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रेलवे की नई सुविधा: स्लीपर कोच में मिलेगा कंबल, तकिया और चादर, जानें अतिरिक्त चार्ज

चेन्नई इंडियन रेलवे स्लीपर कोच में सफर करने वाले पैसेंजर के लिए नई सुविधा शुरू कर रही है। अब एसी कोच की तरह स्लीपर कोच में भी पैसेंजर को कंबल-तकिया और चादर की सुविधा दी जाएगी। यह बदलाव उन यात्रियों के लिए खास है जिन्हें अब अपना बेडरोल साथ ढोने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दक्षिण रेलवे के चेन्नई डिविजन से इस सुविधा की शुरुआत हो रही है। चेन्नई डिविजन ने 1 जनवरी 2026 से चुनिंदा ट्रेनों में स्लीपर क्लास के लिए ऑन-डिमांड बेडरोल सुविधा लागू करने की घोषणा की है। इसे लेने के लिए यात्री को रिक्वेस्ट करनी होगी और फिर एक तय चार्ज चुकाकर बेडरोल मिल जाएगा। यह सर्विस ऑन-डिमांड मॉडल पर होगी यानी जिसे जरूरत होगी वह यात्री पैसे देकर बेडशीट, तकिया या पूरा बेडरोल सेट ले सकेगा। सोशल मीडिया पर भी रेलवे के इस फैसले की काफी चर्चा है क्योंकि इससे स्लीपर क्लास की यात्रा पहले से ज्यादा आरामदायक हो जाएगी। स्लीपर कोच में इस सुविधा के लिए यात्रियों को कितने पैसे देने होंगे चलिए आपको बताते हैं। बेडरोल सेट बेडशीट, तकिया, तकिए का कवर – 50  तकिया, तकिए का कवर  – 30 बेडशीट- 20 कब से मिलेगी यह सुविधा? दक्षिण भारत से इसकी शुरुआत हो रही है. दक्षिण रेलवे के चेन्नई डिविजन ने 1 जनवरी 2026 से चुनिंदा ट्रेनों में स्लीपर क्लास के लिए ऑन-डिमांड बेडरोल सुविधा लागू करने की घोषणा की है। यह बेडरोल पूरी तरह सैनिटाइज्ड और तुरंत इस्तेमाल करने योग्य होगा। इसे लेने के लिए यात्री को रिक्वेस्ट करनी होगी और फिर एक तय चार्ज चुकाकर बेडरोल मिल जाएगा। रेलवे ने 2023-24 में NINFRIS स्कीम के तहत  पायलट प्रोजेक्ट से शुरू किया गया था. उस समय यात्रियों ने इस सर्विस को लेकर अच्छा रिस्पॉन्स दिया। जिसके बाद रेलवे ने इसे स्थाई रूप से लागू करने का फैसला लिया। दक्षिण रेलवे का मानना है कि यह सुविधा खासकर रात की यात्राओं में स्लीपर क्लास के पैसेंजर्स को बड़ा आराम देगी।

दिसंबर छुट्टियाँ: जानें किन-किन तारीखों को स्कूल रहेंगे बंद

नई दिल्ली कल दिसंबर का महीना शुरू हो रहा है। इसके बाद नया साल यानी 2026 शुरू हो जाएगा। स्कूलों में बच्चों के लिए दिसंबर का महीना मौज मस्ती का रहता है क्योंकि इस महीने में स्कूली बच्चों को छुट्टियों की मौज लगती है। 25 दिसंबर के बाद सर्दियों की छुट्टियां इस महीने 6 और 7 दिसंबर को शनिवार और रविवार है। उसके बाद 13 को महीने का दूसरा शनिवार और 14 को रविवार है। 19 दिसंबर को गोवा मुक्ति दिवस है।  20 और 21 को भी वीकेंड पड़ेगा। अंत में महीने का आखिरी शनिवार 27 दिसंबर को और 28 दिसंबर को रविवार है। 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी मिलती है। इस दिन पूरे भारत में (लगभग सभी राज्यों में) गजेटेड हॉलिडे रहता है। 19 दिसंबर को गोवा मुक्ति दिवस है। हालांकि कुछ राज्यों में 26 दिसंबर को भी छुट्टी है, जैसे हरियाणा में यह शहीद उधम सिंह जयंती है और कुछ राज्यों में यह क्रिसमस का फ़ॉलो-अप हॉलिडे भी है। 25 दिसंबर के बाद ज्यादातर सभी स्कूलों में सर्दियों की छुट्टियां हो जाती हैं जो जनवरी तक चलती हैं। ऐसे में दिसंबर में स्कूली बच्चों की मौज होने वाली है।  

SIR फॉर्म जमा करने की तारीख बढ़ी, 11 दिसंबर नई डेडलाइन, 16 दिसंबर को आएगा ड्राफ्ट

नई दिल्ली  देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR Deadline Extended) की प्रक्रिया की समय सीमा बढ़ा दी गई है। चुनाव आयोग द्वारा जारी नए कार्यक्रम के अनुसार पश्चिम बंगाल में गणना फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि अब 11 दिसंबर तय की गई है, जो पहले 4 दिसंबर थी। इसी तरह केरल में भी एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया है। दोनों राज्यों में ड्राफ्ट मतदाता सूची 16 दिसंबर को जारी होगी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी। एसआईआर संशोधन देश के 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। चुनाव आयोग के अनुसार संशोधित शेड्यूल में 11 दिसंबर तक पोलिंग स्टेशनों को व्यवस्थित करने और आवश्यक सुधार कार्य पूरे किए जाएंगे। उसके बाद 12 से 15 दिसंबर तक कंट्रोल टेबल को अपडेट करने और ड्राफ्ट रोल तैयार करने की प्रक्रिया चलेगी। 16 दिसंबर को आयोग ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल जारी करेगा, जिसके बाद नागरिक 15 जनवरी तक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कर सकेंगे।   निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि 16 दिसंबर से 7 फरवरी के बीच प्राप्त गणना फॉर्म और दावों-आपत्तियों पर निर्णय लें। इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद आयोग 12 फरवरी को नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करेगा। शेड्यूल में किया गया यह बदलाव उन बूथ स्तर अधिकारियों (BLO) के लिए राहत लेकर आया है, जो अभी तक गणना फॉर्म जमा कराने और उनके डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा नहीं कर पाए थे।

आज के नए नियम: LPG कीमतें, बैंक चार्ज और लोन रेट—जानें किन बदलावों का पड़ेगा सीधा असर

नई दिल्ली  नया महीना यानी दिसंबर 2025 आपकी जेब के लिए कई नई चुनौतियां लेकर आ रहा है। LPG और ATF की कीमतों से लेकर बैंक छुट्टियों व लोन रेट्स तक कई बदलाव आपके रोजमर्रा के खर्चों पर सीधा असर डाल सकते हैं। पहले से ही जरूरी आर्थिक प्लानिंग करना बेहद जरूरी हो जाता है। LPG और ATF की कीमतों में बदलाव हर महीने की पहली तारीख को ऑयल कंपनियाँ LPG यानी कुकिंग गैस और ATF के दामों में अपडेट करती हैं। ऐसे में 1 दिसंबर को रेट बढ़े तो गैस सिलेंडर और हवाई यात्रा दोनों और महंगी हो सकती हैं। बैंक हॉलिडे और लेन-देन की योजना दिसंबर में पूरे महीने में कुल 17 दिनों तक बैंक बंद रहेंगे, जिनमें रविवार, दूसरे और चौथे शनिवार के साथ राज्य-वार छुट्टियाँ शामिल हैं। ऐसे में लोन EMI, चेक क्लियरेंस और नकद लेन-देन की प्लानिंग समय रहते कर लें, वरना असुविधा हो सकती है।   लोन रेट पर फैसला दिसंबर के पहले हफ्ते में RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक होगी। इसमें रेपो रेट में कटौती या बदलाव पर चर्चा होगी। अगर रेपो रेट में बदलाव होता है, तो बैंक लोन की EMI भी बदल सकती है। यानी बढ़ोतरी हुई तो जेब पर दबाव और राहत मिली तो बजट में आराम। पेंशन और अन्‍य लाभों में बदलाव पेंशन से जुड़े दिशानिर्देशों में भी दिसंबर से कुछ परिवर्तन लागू हो सकते हैं। ऐसे में पेंशनधारकों के लिए यह जानना जरूरी है कि उनके मासिक लाभों में क्या बदलाव हो रहा है, ताकि वे अपने खर्च को बेहतर मैनेज कर सकें।

क्लीन चिट की जंग: नेतन्याहू की राष्ट्रपति से माफी की गुहार पर बढ़ी सियासी हलचल

इजरायल  इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश के राष्ट्रपति से औपचारिक रूप से क्षमादान की मांग की है ताकि उनके खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के लंबे मुकदमे को समाप्त किया जा सके। प्रधानमंत्री कार्यालय ने रविवार को जारी बयान में कहा कि नेतन्याहू ने राष्ट्रपति भवन के कानूनी विभाग को क्षमादान का औपचारिक आवेदन सौंप दिया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने इसे 'असाधारण अनुरोध' करार देते हुए स्वीकार किया कि इसके 'गंभीर और दूरगामी निहितार्थ' हैं।   बता दें कि यह आवेदन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप के उस सार्वजनिक आग्रह के कुछ सप्ताह बाद आया है, जिसमें उन्होंने इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से नेतन्याहू को क्षमा करने की अपील की थी। राष्ट्रपति कार्यालय ने अनुरोध मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि इस पर पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता से विचार किया जाएगा। क्षमादान की प्रक्रिया में न्याय मंत्रालय की राय लेना और जनहित का मूल्यांकन करना अनिवार्य होता है। कार्यालय ने कहा कि हमें पता है कि यह एक असामान्य अनुरोध है जिसके व्यापक प्रभाव हैं। सभी संबंधित पक्षों की राय लेने के बाद राष्ट्रपति पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ फैसला लेंगे। गौरतल है कि नेतन्याहू इजरायली इतिहास के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो पद पर रहते हुए आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे हैं। उन पर तीन अलग-अलग मामलों में धोखाधड़ी, विश्वासघात और रिश्वतखोरी के आरोप हैं। इनमें धनी राजनीतिक समर्थकों से अनुचित लाभ लेने और मीडिया मालिकों को फायदा पहुंचाने के बदले सकारात्मक कवरेज हासिल करने के आरोप शामिल हैं। अभी तक उन्हें किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है।

भारत का अभेद्य किला तैयार: रणनीतिक ‘चिकन नेक’ में राफेल, ब्रह्मोस और S-400 की तैनाती

नई​ दिल्ली  भारत ने अपनी पूर्वी सीमा पर अब तक की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती शुरू कर दी है. सिलिगुड़ी कॉरिडोर, यानी 22 किलोमीटर चौड़ा वह क्षेत्र जिसे चिकन नेक कहते हैं, जिसके जरिए उत्तर-पूर्वी भारत के सात राज्य देश की मुख्य भूमि से जुड़े हैं, अब पूरी तरह अभेद्य किला बनने जा रहा है. इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में तीन नए मिलिट्री स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं, जो नई दिल्ली की सैन्य रणनीति में मूलभूत बदलाव का संकेत देते हैं. असम के धुबरी के पास लाचित बोरफुकन मिलिट्री स्टेशन स्थापित किया जा रहा है. वहीं बिहार के किशनगंज और पश्चिम बंगाल के चोपड़ा में फॉरवर्ड बेस बनाए जा रहे हैं. चोपड़ा फारवर्ड बेस बांग्लादेश सीमा से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. ये सिर्फ सैन्य अड्डे नहीं, रैपिड डिप्लॉयमेंट फोर्स, पैरा स्पेशल फोर्सेज, इंटेलिजेंस यूनिट और हाई-टेक सर्विलांस उपकरणों से लैस स्ट्रैटेजिक नोड हैं, जो किसी भी विपरीत परिस्थिति में 'सिलिगुड़ी कॉरिडोर' की सुरक्षा सनिश्चित करेंगे.   भारत के इस बड़े रणनीतिक कदम की असली वजह बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन है. शेख हसीना की भारत समर्थक सरकार की जगह मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम प्रशासन ने ले ली है, जिसकी विदेश नीति में भारत के मुकाबले चीन और पाकिस्तान को तरजीह दी जा रही है. रिपोर्ट्स की मानें तो बांग्लादेश 2.2 अरब डॉलर में चीन से J-10C फाइटर जेट खरीदने जा रहा है. ड्रोन बनाने में भी चीन से सहयोग ले रहा है. वहीं पाकिस्तान ने उसे JF-17 ब्लॉक-C थंडर जेट ऑफर किए हैं.  भारत ने रिएक्टिव नहीं, प्रो-एक्टिव रुख अपनाया बांग्लादेश के साथ लगने वाली सीमा भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है. बांग्लादेश का चीन और पाकिस्तान की ओर झुकाव भारत के लिए रणनीतिक लिहाज से अच्छा संकेत नहीं है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जो अपने सबसे संकरे बिंदु पर सिर्फ 22 किलोमीटर चौड़ा है, पूर्वोत्तर के 4.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है. दुश्मन देश किसी विपरीत परिस्थिति में उत्तर-पूर्वी राज्यों को भारत की मुख्य भूमि से अलग-थलग करने के लिए इस महत्वपूर्ण संपर्क को निशाना बना सकते हैं. इसलिए अब भारत ने रिएक्टिव नहीं, प्रो-एक्टिव रुख अपनाया है. ये तीनों नए सैन्य अड्डे पूरे सिलि​गुड़ी कॉरिडोर को सिक्योरिटी कवरेज प्रदान करते हैं. पश्चिम बंगाल का चोपड़ा मिलिट्री स्टेशन बांग्लादेश की सीमा से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है. इन सैन्य ठिकानों से बांग्लादेश के अंदर तक निगरानी संभव है और किसी भी खतरे की स्थिति में भारत की सेनाएं  मिनटों में जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हो सकती हैं. भारत ने पूर्वी सीमा पर राफेल लड़ाकू विमानों, ब्रह्मोस मिसाइलों और S-400 जैसे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती की है. बांग्लादेश के लिए, संदेश स्पष्ट है. भारत और उसके बीच सैन्य ताकत का अंतर बहुत बड़ा है. उसकी तरफ से कोई भी गलत कदम उठाया गया तो भारत का जवाब भयानक होगा. सिलिगुड़ी कॉरिडोर अब भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि मजबूत स्ट्रेटेजिक एसेट बन चुका है. देश अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है.

तमिलनाडु में दो बसों की आमने-सामने भिड़ंत, 11 की मौत और कई गंभीर

शिवगंगा तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में रविवार को दो बसों के आमने-सामने जोरदार टक्कर में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और करीब 40 लोग घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा तिरुप्पत्तूर के पास कुम्मानगुडी रोड पर हुआ। मृतकों में एक बच्चा भी शामिल है। एक बस तिरुप्पुर से कराईकुड़ी जा रही थी, जबकि दूसरी बस कराईकुड़ी से दिन्दिगुल की ओर जा रही थी। इस दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. मौके पर पहुंची आपातकालीन टीम पुलिस ने बताया कि एक बस कराईकुडी जा रही थी जबकि दूसरी मदुरै जा रही थी, तभी तिरुपथुर के पास सड़क पर दोनों बसें आपस में टकरा गईं. टक्कर के बाद कई यात्री गाड़ियों में फंस गए, लेकिन स्थानीय निवासियों और आपातकालीन टीमों ने उन्हें बाहर निकाला. घायलों को शिवगंगा सरकारी अस्पताल ले जाया गया है. अधिकारियों ने बताया कि कुछ यात्रियों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. पुलिस ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी दोनों बसों के आगे के हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिसमें कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. एक हफ्ते दो बड़ी बस दुर्घटना तमिलनाडु में पिछले एक हफ्ते के दौरान दूसरी बार ऐसा हुआ है जब दो बसों की आपस में टक्कर हुई, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई. राज्य के तेनकासी जिले में सोमवार (23 नवंबर 2025) को दो बसों की आमने-सामने टक्कर हो गई थी. इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 30 यात्री घायल हुए थे. मरने वालों में 5 महिलाएं और एक पुरुष शामिल थे. मदुरै से सेनकोट्टई जा रही बस और तेनकासी से कोविलपट्टी जा रही बस टकरा गई थी. तब जांच में पता चला था कि गलती ड्राइवर की थी. मदुरै से सेनकोट्टई जा रही बस का ड्राइवर लापरवाही और तेज स्पीड में गाड़ी चला रहा था.

यूक्रेन-रूस टकराव का नया मोर्चा: तेल टैंकरों पर हमले से तुर्की के हितों को खतरा

तुर्की  तुर्की सरकार ने काला सागर में रूसी शैडो फ्लीट के दो तेल टैंकरों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। तुर्की विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ओंकू केसेली ने कहा कि केरोस (Koeros) और विराट (Virat) नामक जहाजों पर हुए हमले तुर्की के विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) के अंदर हुए थे। इन हमलों से क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा, मानव जीवन, संपत्ति और पर्यावरण को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। शनिवार देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट में केसेली ने लिखा कि तुर्की यूक्रेन युद्ध को काला सागर के पार फैलने से रोकने और अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी संबंधित पक्षों से लगातार संपर्क और बातचीत कर रहा है।   ओपनसैंक्शंस डेटाबेस (जो प्रतिबंधों से बचने वाले व्यक्तियों और संगठनों पर नजर रखता है) के अनुसार, ये दोनों जहाज़ उस शैडो फ्लीट का हिस्सा हैं जिसका उपयोग 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण आक्रमण के बाद लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए किया जा रहा है। तुर्की के समुद्री मामलों के महानिदेशालय ने बताया कि शुक्रवार रात तुर्की तट से लगभग 28 समुद्री मील दूर नोवोरोसिस्क (रूस) की ओर जा रहा खाली केरोस टैंकर अचानक बाहरी आघात के कारण जल उठा। जहाज पर सवार सभी 25 क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं और बचाव दल उन्हें वापस लाने की तैयारी कर रहे हैं। तुर्की के यातायात एवं आधारभूत संरचना मंत्रालय ने बाद में स्पष्ट किया कि जहाज पर सवार सभी नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। यह जहाज मिस्र से रूस की ओर जा रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो जहाज डूब सकता है। दूसरे जहाज विराट के बारे में महानिदेशालय ने कहा कि टैंकर विराट का चालक दल ने सूचना दी कि तुर्की तट से करीब 35 समुद्री मील दूर जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। इंजन रूम में भारी धुआं भर गया था। बचाव दल और एक व्यापारी जहाज को मौके पर रवाना कर दिया गया है। विराट के 20 क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं। गौरतलब है कि यूक्रेन ने स्वीकार किया है कि उसने शुक्रवार दोपहर तुर्की के काला सागर तट के निकट इन दोनों टैंकरों पर लगातार हमले के लिए अपने सर्फेस नौसैनिक ड्रोन का इस्तेमाल किया था। बता दें कि यूक्रेन ने युद्ध के दौरान रूसी नौसेना के जहाजों पर कई सफल ड्रोन हमले किए हैं, खासकर विस्फोटक से लदे समुद्री ड्रोनों के जरिए। हालांकि अब तक यूक्रेनी अभियान मुख्य रूप से उत्तरी काला सागर तक ही सीमित रहे थे।

चक्रवाती तूफान दितवाह का खतरा बढ़ा—भारत के बेहद करीब, श्रीलंका में तबाही से 200 जानें गईं

चेन्नई  श्रीलंका में भारी तबाही मचाने के बाद चक्रवाती तूफान दितवाह भारत पहुंचने वाला है। तमिलनाडु से अभी करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर है। दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी तमिलनाडु-पुडुचेरी के ऊपर चक्रवाती तूफान दितवाह की वजह से 30 नवंबर को तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश होने वाली है। 30 नवंबर और एक दिसंबर को तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, रायलसीमा, तेलंगाना में भी बहुत भारी बरसात की चेतावनी है। श्रीलंका में दितवाह की वजह से करीब 200 लोगों की जान गई है।   चक्रवाती तूफान दितवाह आज सुबह साढ़े आठ बजे पुडुचेरी से 110 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, चेन्नई से 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था और तेज गति से दक्षिण के तटों की ओर बढ़ रहा। अब यह चेन्नई से महज 80 किमी की दूरी पर है। यह आज दोपहर और शाम तक क्रमश: तमिलनाडु-पुडुचेरी तट से न्यूनतम 60 किलोमीटर और 30 किलोमीटर की दूरी पर बंगाल की खाड़ी पर केंद्रित होगा। मौसम विभाग के अनुसार, दितवाह की वजह से 30 नवंबर और एक दिसंबर को तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है। 30 नवंबर को केरल, माहे में, 30 नवंबर को उत्तरी तटीय तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटी यआंध्र प्रदेश के दक्षिण जिलों में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा, उत्तरी तमिलनाडु में कहीं-कहीं गरज, बिजली और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट है। बता दें कि मौसम विभाग ने रविवार को उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और आस-पास के दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। IMD के रविवार सुबह 5:30 बजे के अपडेट के अनुसार, साइक्लोन दितवाह पिछले छह घंटों में 7 किलोमीटर की स्पीड से लगभग उत्तर की ओर बढ़ा और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और आस-पास के उत्तरी तमिलनाडु-पुडुचेरी तटों पर केंद्रित था। श्रीलंका में करीब 200 लोगों की जान ले चुका है तूफान तूफान दितवाह की वजह से आई भयानक बाढ़, लैंडस्लाइड और तबाही के बाद श्रीलंका ने रविवार को भी भारत की मदद से राहत और बचाव का काम जारी रखा। दितवाह में करीब श्रीलंका में 200 से लोग मारे गए हैं। श्रीलंका के डिज़ास्टर मैनेजमेंट सेंटर (DMC) द्वारा रविवार दोपहर 12 बजे जारी किए गए नए आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार से अब तक 193 लोग मारे गए हैं और 228 लापता हैं। डीएमसी ने कहा कि खराब मौसम की वजह से 2,66,114 परिवारों के कुल 9,68,304 लोग प्रभावित हुए हैं। इस बीच, भारत की नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के लोग, इंडियन एयर फोर्स के साथ मिलकर, युद्ध स्तर पर कीमती जानें बचाने के लिए श्रीलंकाई अधिकारियों की मदद कर रहे हैं।  

‘T-Dome’ की धमक: ताइवान का नया हथियार चीन की रणनीति में भूचाल लाने को तैयार

ताइवान  ताइवान की सरकार ने चीन के किसी भी संभावित आक्रमण से निपटने के लिए अतिरिक्त 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रक्षा खर्च का प्रस्ताव रखा है। इस भारी-भरकम राशि का बड़ा हिस्सा टी-डोम (T-Dome) नामक एक बहु-स्तरीय (मल्टी-लेयर्ड) वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने पर खर्च होगा। यह प्रणाली ताइवान द्वीप को चीनी लड़ाकू विमानों, बैलिस्टिक/क्रूज मिसाइलों तथा ड्रोनों के हमलों से बचाने के लिए तैयार की जा रही है।   यह कदम अमेरिका के उस दबाव के बीच उठाया जा रहा है जिसमें वह ताइवान से अपने रक्षा खर्च को लगातार बढ़ाने की मांग कर रहा है। यह विशेष बजट 2026 से 2033 तक आठ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खर्च किया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रपति लाई चिंग-ते पहले ही रक्षा खर्च को जीडीपी के 5% तक ले जाने का वादा कर चुके हैं। वर्तमान में ताइवान ने 2026 के लिए अपना नियमित रक्षा बजट बढ़ाकर 31.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया है, जिससे कुल रक्षा व्यय जीडीपी का 3.3% हो जाएगा। लाई ने बुधवार को ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में प्रकाशित अपने लेख में इस विशेष बजट का पूर्वानुमान देते हुए कहा था कि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अमेरिका से हथियार खरीदने में होगा। रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ने बुधवार को स्पष्ट किया कि 40 बिलियन डॉलर इस विशेष बजट की ऊपरी सीमा है। इसका उपयोग सटीक मारक मिसाइलें खरीदने तथा ताइवान-अमेरिका के बीच संयुक्त रूप से हथियार प्रणालियों के विकास और खरीद के लिए होगा। टी-डोम है क्या? राष्ट्रपति लाई ने 10 अक्टूबर को टी-डोम की औपचारिक घोषणा की थी और इसकी तुलना इजरायल की मशहूर 'आयरन डोम' से की थी। हालांकि दोनों में काफी अंतर हैं। ताइपे स्थित रक्षा विश्लेषक जे माइकल कोल के अनुसार, आयरन डोम छोटी दूरी के रॉकेट्स के खिलाफ है, जबकि टी-डोम को खतरों की बहुत व्यापक श्रेणी से निपटना होगा। इसमें पीएलए (चीनी सेना) के लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन सभी शामिल हैं। बता दें कि ताइवान के पास पहले से ही अमेरिकी पैट्रियट पीएसी-3, स्वदेशी स्काई बो तथा तियान कुंग प्रणालियां मौजूद हैं। वह अमेरिका से NASAMS (नेशनल एडवांस्ड सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम) की नई यूनिट्स की डिलीवरी का भी इंतजार कर रहा है। टी-डोम इन सभी मौजूदा प्रणालियों को आधुनिक रडार, सेंसर और कमांड सेंटर से जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क बनाएगा, ताकि 'तेज पता लगाने और प्रभावी अवरोधन' संभव हो सके।    ताइवान को इसकी जरूरत क्यों पड़ी? यूक्रेन युद्ध ने ताइवान को सिखाया है कि मजबूत वायु रक्षा प्रणाली ही लड़ाकू सेना, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और आम नागरिकों की जान बचा सकती है। पिछले दस साल में ताइवान ने अपनी सेना को आधुनिक बनाने और अमेरिकी हथियार खरीदने में अरबों डॉलर खर्च किए हैं, फिर भी चीन के साथ पूर्ण युद्ध में वह अभी भी हथियारों की संख्या और किस्म में काफी पीछे है। सु त्ज़ु-युन कहते हैं कि अगर अचानक चीनी मिसाइल हमले को 'निष्प्रभावी' करने की क्षमता होगी, तो बीजिंग को आक्रमण करने से पहले दस बार सोचना पड़ेगा। उनके अनुसार ताइवान के आसपास तैनात चीनी युद्धपोत और मुख्य भूमि पर मौजूद सैकड़ों मिसाइल लॉन्चर तीन मिनट के अंदर ही ताइवान के एयरफील्ड, रडार और सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों मिसाइलें दाग सकते हैं। इसी खतरे से निपटने के लिए एक एकीकृत, तेज़ प्रतिक्रिया वाली वायु रक्षा प्रणाली जरूरी है।