samacharsecretary.com

मोहन भागवत का तीखा सवाल: एक शब्द का अंग्रेजी अनुवाद नहीं बता पाए लोग!

नई दिल्ली  आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने मातृ भाषाओं के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि बहुत सारे ऐसे भी भारतीय हैं जिन्हें अपनी भाषा ही नहीं आती है। नागपुर में एक पुस्तक के विमोचन के मौके पर उन्होने कहा कि हमारी भाषायी विरासत का क्षय हो रहा है। भागवत ने कहा, एक समय था जब रोजामर्रा के जीवन में सारा संचार संस्कृत में होता था। अब हाल यह है कि अमेरिका के प्रोफेसर हमें संस्कृत पढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि भाषायी चेतना को लेकर हमें आत्ममंथन करने की जरूरत है।   भागवत ने कहा कि बहुत सारे बच्चे आज अपनी ही भाषा के शब्द नहीं जानते हैं और वे अंग्रेजी का मिश्रण करके भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा, मैं अंग्रेजी माध्यम वाली शिक्षा को दोष नहीं दे रहा हूं लेकिन कम से कम अपनी भाषा को भी तो जानना चाहिए। अगर हम अपने घरों में भी अपनी भाषा बोलें तो भी हमें उसके बारे में पूरी जानकारी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि संत ज्ञानेश्वर ने भगवद्गीता को मराठी में प्रचारित किया। भागवत ने कहा, दिक्कत यह है कि अंग्रेजी के शब्द भावों की गहराई को पकड़ नहीं पाते हैं और ऐसे में विचारों का प्रकटीकरण कमजोर पड़ जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कल्पवृक्ष के लिए अंग्रेजी में तरह-तरह के शब्द लिखे जाते हैं लेकिन कोई भी शब्द उसका असली अर्थ नहीं बता सकता है। आप इसे अंग्रेजी में कैसे अनुवादित करेंगे। ऐसे में विदेशी भाषाएं हमारी संस्कृति की गहराई तक नहीं पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को सीखने और मजबूत करने की जरूरत है। भागवत ने कहा कि भारत का दर्शन कहता है कि विविधता में भी एकता होनी चाहिए। एक दिन पहले भागवत ने कहा था कि हात्मा गांधी का यह विचार कि ब्रिटिश शासन से पहले भारतीयों में एकता का अभाव था, औपनिवेशिक शिक्षा से प्रेरित एक गलत विमर्श है। भागवत ने नागपुर में राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव में कहा, ‘‘गांधीजी ने (अपनी पुस्तक) हिंद स्वराज में लिखा है कि अंग्रेजों के आने से पहले हम एकजुट नहीं थे, लेकिन यह उनके द्वारा हमें सिखाई गई झूठी कहानी है।’’ गांधीजी द्वारा 1908 में गुजराती में लिखी गई और 1909 में उनके द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित ‘हिंद स्वराज’ में 20 अध्याय हैं और यह पाठक और एक सम्पादक के बीच बातचीत की शैली में लिखा गया है। भागवत ने कहा कि भारत की 'राष्ट्र' की अवधारणा प्राचीन और पश्चिमी व्याख्याओं से मूलतः भिन्न है।  

घने कोहरे की चपेट में उत्तर भारत, आईएमडी ने शीतलहर के तीव्र होने का अलर्ट किया जारी

कश्मीर उत्तर भारत में सर्दी का असर तेज हो गया है। कश्मीर से लेकर राजस्थान तक तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, जबकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने  की संभावना है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को बुलेटिन में देशभर की मौसम स्थिति और आगामी सप्ताह के पूर्वानुमान जारी किए हैं। कश्मीर घाटी इस समय कड़ाके की ठंड से जूझ रही है। बादल छाने से कई स्थानों पर रात के तापमान में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन न्यूनतम पारा अब भी हिमांक से नीचे बना हुआ है। शुक्रवार रात दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के कोनीबाल में तापमान माइनस 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो घाटी का सबसे ठंडा स्थान रहा। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 3.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो एक दिन पहले के माइनस 4.5 डिग्री की तुलना में थोड़ा अधिक है। काजीगुंड में पारा माइनस 3.4, कुपवाड़ा में माइनस 4.9, कोकरनाग में माइनस 1.6, पहलगाम में माइनस 5.2 और गुलमर्ग में माइनस 1.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। घाटी के अधिकांश हिस्सों में सुबह घना कोहरा छाया रहा, खासकर झीलों और नदी किनारे के क्षेत्रों में। आईएमडी ने 10 दिसंबर तक कश्मीर में मौसम शुष्क रहने का अनुमान लगाया है। 1 से 5 दिसंबर के बीच बादल बढ़ सकते हैं और तापमान में और गिरावट की संभावना है। राजस्थान : शुष्क मौसम जारी, तापमान में और गिरावट की भविष्यवाणी राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से शुष्क मौसम बना हुआ है। जयपुर मौसम केंद्र के अनुसार शेखावाटी क्षेत्र (झुंझुनू, सीकर, चुरू) में तापमान 8-9 डिग्री तक गिर चुका है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से ऊपर है, लेकिन अगले तीन दिनों में 2-3 डिग्री की और गिरावट की संभावना है। 2 से 4 दिसंबर के बीच शेखावाटी में रात का पारा 4-5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे ठिठुरन बढ़ेगी। उत्तराखंड : पाला-कोहरे का दौर जारी रहेगा उत्तराखंड में भी तापमान में गिरावट जारी है। उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चमोली और रुद्रप्रयाग के ऊंचाई वाले हिस्सों में पारा लगातार शून्य के आसपास पहुंच रहा है। मैदानों में खासकर हरिद्वार, उधम सिंह नगर सुबह कोहरा घना रहेगा। आईएमडी ने 30 नवंबर से 4 दिसंबर के बीच राज्य में शीतलहर जैसे हालात बनने की चेतावनी दी है। उत्तर भारत में अधिकतर राज्यों में मौसम शुष्क रहेगा आईएमडी के अनुसार अगले 7-10 दिनों में उत्तर भारत में अधिकतर राज्यों में मौसम शुष्क रहेगा। तापमान में क्रमिक गिरावट होगी, मैदानी इलाकों में कोहरे की स्थिति गंभीर होगी, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिम यूपी में धुंध का असर तेज होगा। दिल्ली-एनसीआर में रात का तापमान धीरे-धीरे कम होगा और सुबह के समय दृश्यता प्रभावित हो सकती है। जम्मू : धूप, लेकिन ठंड बरकरार कश्मीर में जहां तेज पाला पड़ रहा है, वहीं जम्मू में दिन में धूप खिली रही। अधिकतम तापमान 23 डिग्री और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। सुबह-शाम ठंडक तेज है, जबकि रात में हल्का कोहरा छा रहा है। पूर्वोत्तर, मध्य व दक्षिण भारत का मौसम पूर्वोत्तर राज्यों असम, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल में हल्की बारिश के आसार हैं। मध्य भारत (एमपी, छत्तीसगढ़) में रातें ठंडी होंगी, लेकिन दिन में धूप निकलने से थोड़ी राहत रहेगी। दक्षिण भारत में तापमान सामान्य रहेगा, हालांकि तटीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। हिमाचल प्रदेश: ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी के आसार आईएमडी के अनुसार हिमाचल प्रदेश में दिन और रात के तापमान में लगातार गिरावट हो रही है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा के ऊपरी इलाके कड़ाके की ठंड की चपेट में हैं। कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान हिमांक से नीचे है। अगले एक सप्ताह तक प्रदेश में मुख्यतः शुष्क मौसम, कुछ ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई है। 1 से 4 दिसंबर के बीच उच्च पर्वतीय भागों में ठंड और बढ़ सकती है, जबकि मैदानी इलाकों में सुबह-शाम धुंध घनी रहने की आशंका है।  

चमोली के कई इलाकों में भूकंप से हड़कंप, राहत की दौड़

चमोली उत्तराखंड में आज एक बार फिर धरली डोली। चमोली के नारायणबगड़ में भूकंप के झटके महसूस किए गए। इससे लोगों में दहशत फैल गई और लोग घरों से बाहर दौड़ पड़े। जानकारी के अनुसार, भूकंप के झटके 10 बजकर 27मिनट पर, कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली और देवाल में महसूस हुए। भूकंप की तीव्रता 3.7 मापी गई है। आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी नें बताया भूकंप का केंद्र चमोली के आसपास बताया जा रहा है। कहीं से किसी नुकसान की सूचना नहीं है। उत्तराखंड संवेदनशील जोन-छह में शामिल उत्तराखंड को भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील जोन-छह में शामिल किया गया है। इससे पहले राज्य के जिलों को जोन चार और पांच में विभाजित किया गया था। अब भारतीय मानक ब्यूरो ने डिजाइन भूकंपीय जोखिम संरचनाओं के भूकंपरोधी डिजाइन के मानदंड रीति संहिता-2025 में नया भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र जारी किया है। इसमें उत्तराखंड समेत अन्य हिमालीय राज्यों को भी भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन छह में रखा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पूरे राज्य में निर्माण कार्यों के लिए लोगों को अधिक सजग होना होगा। पहले दो जोन में रखा गया था राज्य को पहले भूकंप की दृष्टि से उत्तराखंड को दो जोन में रखा गया था। इसमें सबसे अधिक संवेदनशील जोन पांच में रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ थे। जबकि जोन चार में उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल शामिल थे। 2021 में सबसे अधिक संवेदनशील जिलों में चार जिले शामिल थे लोकसभा में वर्ष-2021 में दिए एक उत्तर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री ने भूकंप की दृष्टि से अधिक संवेदनशील 38 शहर और कस्बों की जानकारी दी थी। इसमें अल्मोड़ा, नैनीताल, देहरादून, रुड़की शामिल हैं।

‘सीनियर’ टैग का मतलब यह नहीं कि… सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई दो-टूक हिदायत

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर वकीलों को किसी भी बेंच के समक्ष मामलों का मौखिक उल्लेख करने पर रोक लगा दी है। यह फैसला हाल के महीनों में अनौपचारिक रूप से अपनाई जा रही प्रथा को औपचारिक रूप प्रदान करने वाला है। कोर्ट ने स्थगन और तत्काल मामलों की लिस्टिंग के लिए प्रक्रिया निर्धारित करने वाला एक सर्कुलर जारी किया है। इसके अनुसार, जमानत या जमानत रद्द करने, मृत्युदंड, हेबियस कॉर्पस, विध्वंस या अंतरिम राहत से संबंधित सभी नए मामले अगले 2 कार्य दिवसों के भीतर लिस्ट किए जाएंगे। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि किसी भी कोर्ट के समक्ष मौखिक उल्लेख के लिए किसी सीनियर वकील को इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके बजाय, युवा जूनियर वकीलों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। अत्यंत तत्काल प्रकृति के मामले में क्या होगा अगर कोई मामला अत्यंत तत्काल प्रकृति का हो, जैसे अग्रिम जमानत, मृत्युदंड, हेबियस कॉर्पस, बेदखली या विध्वंस से जुड़ा और निर्धारित तारीख पर लिस्टिंग का इंतजार न कर सके, तो प्रोफॉर्मा के साथ एक पत्र अधिकारी को सुबह 10:30 बजे से पहले सौंपना होगा। अनावश्यक स्थगनों को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से भी कोर्ट ने निर्देश दिए। एससी की ओर से कहा गया कि मामले का स्थगन केवल परिवार में मृत्यु, अधिवक्ता या पक्षकार-व्यक्ति की चिकित्सा, स्वास्थ्य स्थिति या कोर्ट को संतुष्ट करने वाले अन्य वास्तविक कारणों के मामलों में ही स्वीकार किया जाएगा। यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया है, जिससे तत्काल मामलों का निपटारा तेजी से हो सके।  

संसद का शीतकालीन सत्र तपा देने को तैयार—FIR से लेकर SIR तक बढ़ेगी राजनीतिक गर्मी

नई दिल्ली  संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। केंद्र तथा विपक्ष के बीच दो बड़े मुद्दों पर गतिरोध पैदा होने की संभावना है। गांधी परिवार के खिलाफ नेशनल हेराल्ड केस में नई FIR और चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चल रहा वोटर लिस्ट का विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे। चूंकि सत्र 19 दिसंबर को समाप्त हो रहा है, इसलिए संभावित व्यवधानों से सरकार के विधायी एजेंडे पर खतरा मंडरा रहा है।   दिल्ली पुलिस की अपराध नियंत्रण विभाग द्वारा सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज की गई नई FIR में 2,000 करोड़ की संपत्ति वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को यंग इंडियन के माध्यम से धोखाधड़ी से हासिल करने का आरोप है। FIR में यह भी दावा किया गया है कि कुछ अधिकारियों ने हेराफेरी की है। इसके लिए जाली बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और नकली शिक्षण अनुभव प्रमाण पत्र जमा करने की सुविधा दी गई। कांग्रेस अब संसद में इस मुद्दे पर सरकार को निशाना बनाने की तैयारी में है। एसआईआर पर विपक्ष एकजुट तृणमूल कांग्रेस (TMC), DMK और समाजवादी पार्टी (SP) ने विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास का कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया है। टीएमसी का आरोप है कि SIR का दुरुपयोग मतदाता सूचियों में छेड़छाड़ और अगले साल चुनाव वाले पश्चिम बंगाल में बूथों की संख्या को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को केंद्र का "षड्यंत्र" बताया है। डीएमके का कहना है कि अगले साल तमिलनाडु में चुनाव है। इससे पहले एसआईआर के जरिए हेराफेरी की जा रही है। समाजवादी पार्टी ने विशेष अभियान में कथित अनियमितताओं को उठाया है और इस मामले को संसद में जोर-शोर से उठाने की योजना बना रही है। अन्य विपक्षी दलों विशेष रूप से कांग्रेस और CPI(M) ने भी SIR को अराजकता और बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) पर असहनीय दबाव का कारण बताया है, जिसकी वजह से कुछ BLOs की मौत भी हुई है। वहीं, केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR मुद्दा संसद के पटल पर गैर-परक्राम्य है। सरकार का तर्क है कि यह चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जा रही है। सरकार ने सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। सरकार परमाणु ऊर्जा, उच्च शिक्षा, कॉर्पोरेट कानून और प्रतिभूति बाजार से जुड़े 10 प्रमुख विधेयक पेश करने की तैयारी में है। सरकार 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा प्रस्तावित करना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने 1937 में गीत की कई पंक्तियों को हटा दिया था। उन्होंने इसे ऐसा कार्य बताया जिसने विभाजन के बीज बोए थे। कांग्रेस ने PM मोदी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह रवींद्रनाथ टैगोर की सिफारिशों पर किया गया था, ताकि गीत की धर्मनिरपेक्ष अपील और समावेशिता बनाए रखी जा सके। मूल गीत के वे छंद हटा दिए गए थे, जिनमें राष्ट्र को हिंदू देवी-देवताओं दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में चित्रित किया गया था।  

सिंधु सभ्यता पर बड़ा खुलासा: IIT शोध में सामने आई विनाश की असली वजह

नई दिल्ली  उन्नत, समृद्ध और बेहद रहस्यमय मानी जाने वाली प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के निशान भारत और पाकिस्तान में पाए जाते हैं। यह आज भी रहस्य बना हुआ है कि आखिर इतनी उन्नत सभ्यता गायब कैसे हो गई? हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल और राखीगढ़ी तक इस सभ्यता के नमूने पाए गए हैं। सभ्यता के खात्मे को लेकर अब तक कई तरह के दावे किए गए हैं। इनमें महामारी, बाढ़, भूकंप और उल्कापात जैसी कई बातें की जाती रही हैं। अब आईआईटी गांधीनगर के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि लंबे समय तक सूखे के प्रकोप के चलते यह सभ्यता नष्ट हो गई।   सिंधु घाटी सभ्यता को सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से भी जानते हैं। यह सभ्यता 5000 से 3500 ईसा पूर्व तक फलती-फूलती थी। यह सभ्यता अपने शहरों के लिए जानी जाती है। खुदाई में मिले अवशेषों और शहरों को देखकर पता चलता है कि उनके शहर और पानी निकासी का सिस्टम और सड़कें कितनी उन्नत थीं। इसके अलावा वे धातु का भी उपयोग जानते थे। रोजमर्रा के इस्तेमाल में मिट्टी के बर्तन ही लाए जाते थे। इस सभ्यता के लोग खेती पर निर्भर थे और वे अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना भी जानते थे। आईआईटी गांधीनगर में विमल मिश्रा की अगुआई में शोध में पाया गया कि इस सभ्यता को लगातार सूखे का सामना करना पड़ा। सभ्यता का पतन अचानक नहीं हुआ बल्कि यह धीरे-धीरे समाप्त हो गई। 11 पन्ने के रिसर्च पेपर में दावा किया गया है कि पानी की कमी की वजह से ही बहुत सारे लोगों की मौत हो गई और कुछ पलायन भी कर गए। सिंधु सभ्यता सिंधु नदी पर ही आधारित थी। इस पानी से वे खेती करते थे। मॉनसून और मौसम की गतिविधियों में परिवर्तन की वजह से बारिश में 10 से 20 फीसदी की गिरावट आ गई थी। वहीं औसत तापमान 0.5 डिग्री बढ़ गया। 85 साल में कम से कम चार बेहद गंभीर सूखे पड़े। एक बार तो 164 साल का सूखा पड़ गया जिसमें सभ्यता नष्ट हो गई। नदियों में पानी की कमी बारिश कम होने की वजह से नदियां भी सूखने लगी थीं। आर्कियो बोटैनिकल तथ्यों के मुताबिक पानी की कमी की वजह से सिंधु सभ्यता के लोगों ने गेहूं और अन्य अनाजों को छोड़कर दूसरी फसलों को उगाने की कोशिश की लेकिन वे नाकामयाब हो गए। पुरानी झीलों और गुफाओं के सर्वे से पता चलता है कि इस क्षेत्र में पानी की तेजी से कमी हो रही थी। लगभग दो शताब्दी तक चले सूखे ने पूरी सभ्यता को हिलाकर रख दिया। धीरे-धीरे बड़े-बड़े शहर छोटे कबीलों में बदल गए। रिसर्च में पाया गया है कि उत्तरी अटलांटिक में ठंड बढ़ने से भारत का मॉनसून कमजोर होने लगा था। प्रशांत और हिंद महासागर का तापमान बढ़ने की वजह से बारिश कम होने लगी। समुद्र गर्म होने की वजह से धरती से तापमान का अंतर कम हो गया और मॉनसून कमजोर होने लगा। ऐसे में मौसम पूरी तरह बदल गया। लोग कम बारिश की वजह से सिंधु नदी के पास ही बसने लगे। धीरे-धीरे कम होती आबादी, कृषि की बर्बादी और खाद्यान्न की कमी की वजह से सभ्यता का पतन होता चला गया।  

मन की बात 128वां संस्करण: पीएम मोदी ने साझा किए प्रमुख विचार और संदेश

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 128वें संस्करण को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कई अहम मुद्दों पर बात की, जिनमें राम मंदिर धर्म ध्वज फहराने से लेकर इंसानी सहनशक्ति परखने वाले खेलों (एंड्यूरेंस स्पोर्ट्स) की चर्चा शामिल है। तो आइए जानते हैं कि पीएम मोदी के संबोधन की बड़ी बातें- प्रधानमंत्री ने कहा कि नवंबर का महीना बहुत सी प्रेरणाएं लेकर आया, जिनमें संविधान दिवस का आयोजन, वंदे भारत पर आयोजित कार्यक्रम और राम मंदिर पर धर्म ध्वज का आरोहण शामिल है। पीएम मोदी ने कुरुक्षेत्र में ज्योतिसर में पांचजन्य स्मारक के लोकार्पण का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में वन तुलसी यानी सुलाई के फूलों से बने शहद का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि यह सफेद रंग का शहद होता है, जिसे रामबन सुलाई शहद कहा जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस शहद को जीआई टैग भी मिल चुका है। उन्होंने कहा 'आज भारत शहद उत्पादन में नए रिकॉर्ड बना रहा है। आज भारत में शहद उत्पादन डेढ़ लाख मीट्रिक टन से ज्यादा हो गया है। इससे हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इससे देश के कोनों में शहद की मिठास भी बढ़ रही है और ये मिठास किसानों की आय भी बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री ने जामनगर के राजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा को याद किया। उन्होंने कहा भारत की महान संस्कृति में शांति और करुणा का भाव सर्वोपरि रहा है। दूसरे विश्वयुद्ध के समय जब चारों ओर भय का माहौल था। उस वक्त जामनगर के जामसाब राजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा ने विश्वयुद्ध के बीच यहूदी बच्चों की रक्षा की। उन्होंने तब गुजरात में हजारों यहूदी बच्चों को शरण देकर उनकी रक्षा की, जो आज भी मिसाल है। पिछले साल पोलैंड के वारसॉ में मुझे जामसाब की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने का मौका मिला था, जो मेरे लिए अविस्मरणीय पल रहा। पीएम मोदी ने कहा कि 2 दिसंबर से काशी के नमो घाट पर काशी-तमिल संगमम के चौथे संस्करण की शुरुआत हो रही है। यह उन सभी लोगों के एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है, जिन्हें तमिल भाषा से प्यार है। इस बार भी काशी वासी पूरे जोश और उत्साह के साथ तमिलनाडु से आने वाले अपने भाई-बहनों का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। इसके साथ ही ऐसे और मंचों के बारे में सोचे, जिनसे एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना मजबूत हो। प्रधानमंत्री ने कहा 'मुंबई में INS 'माहे' को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। कुछ लोगों के बीच इसके स्वदेशी डिजाइन को लेकर खूब चर्चा रही। वहीं, पुडुचेरी और मालाबार तटीय इलाकों के लोग इसके नाम से ही खुश हो गए। दरअसल इसका 'माहे' नाम उस स्थान माहे के नाम पर रखा गया है, जिसकी एक समृद्ध ऐतिहासिक विरासत रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी नौसेना तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही है। 4 दिसंबर को हम नौसेना दिवस मनाने जा रहे हैं। ये दिन हमारे बहादुर नौसेना जवानों को सम्मान देने का अवसर है। पीएम मोदी ने नौसेना से जुड़े संग्रहालय जाने की लोगों से अपील की। प्रधानमंत्री ने देश में विंटर टूरिज्म की असीम संभावनाओं पर बात की। उन्होंने कहा 'इन दिनों उत्तराखंड का विंटर टूरिज्म लोगों को आकर्षित कर रहा है। कई जगह लोगों के बीच खूब प्रसिद्ध हो रही हैं। हाल ही में आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड मैराथन रन का आयोजन किया गया। 60 किलोमीटर लंबा आदि कैलाश रन कड़कड़ाती सर्दी में सुबह 5 बजे हुआ था। आदि कैलाश की यात्रा पर जहां तीन साल पहले तक दो हजार तक पर्यटक आते थे, आज यह संख्या बढ़कर 30 हजार तक पहुंच गई है।' पीएम मोदी ने वोकल फॉर लोकल की भावना को मजबूत करने की देशवासियों से अपील की और बताया कि हाल ही में जी20 सम्मेलन में उन्होंने दुनियाभर के नेताओं को जो उपहार दिए, वे भारतीय कारीगरों ने तैयार किए थे। पीएम मोदी ने कहा कि 'मुझे खुशी है कि वोकल फॉर लोकल की भावना को देशवासियों ने अपना लिया है। हाल के त्योहारों की खरीद में लोगों ने मन से भारत के उत्पादों को चुना। इस बार युवाओं ने भी वोकल फॉर लोकल के अभियान को गति दी। आगामी क्रिसमस के समय भी वोकल फॉर लोकल की भावना का ध्यान रखें।' प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों के लिहाज से भी ये महीना भारत के लिए सुपरहिट रहा। पहले महिला टीम ने वर्ल्ड कप जीता। कुछ दिनों पहले ही बधिर ओलंपिक में 20 मेडल जीते। हमारी महिला टीम ने कबड्डी वर्ल्ड कप जीता। वर्ल्ड बॉक्सिंग में भी हमारे खिलाड़ियों ने 20 पदक जीते। हमारी ब्लाइंड महिला टीम ने बिना कोई मैच हारे वर्ल्ड कप जीता। इस टीम का हौसला और जज्बा हमें बहुत कुछ सिखाता है। ये जीत हर भारतीय को प्रेरित करती रहेगी। प्रधानमंत्री ने देश में एंड्युरेंस स्पोर्ट्स यानी सहनशक्ति की परीक्षा लेने वाले खेलों की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता पर बात की। उन्होंने कहा आजकल हमारे देश में एंड्युरेंस स्पोर्ट्स की संस्कृति तेजी से उभर रही है। इससे मतलब ऐसी गतिविधियों से है, जिनमें इंसानी क्षमता की परख होती है। मुझे बताया गया है कि देशभर में हर महीने 1500 से ज्यादा एंड्युरेंस स्पोर्ट्स का आयोजन होता है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए एथलीट्स दूर-दूर तक जाते हैं। इसका उदाहरण है आयरनमैन जिसमें समुद्र में चार किलोमीटर तक तैरना, 180 किलोमीटर की साइकिल चलाना और 82 किलोमीटर तक मैराथन करना जैसे काम एक दिन में करने होते हैं। ऐसी कई और प्रतियोगिताएं हैं, जो युवाओं में काफी लोकप्रिय हो रही हैं। इनसे फिटनेस को बढ़ावा मिलता है। 

मुस्लिम पत्रकार के घर बुलडोजर चलने पर डिप्टी CM का बड़ा बयान—‘हमने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया’

जम्मू और कश्मीर जम्मू और कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने शनिवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा पत्रकार अरफज डैंग के पिता का घर गिराए जाने की घटना की जांच का आदेश देने का आग्रह किया। चौधरी ने इस कार्रवाई को चुनिंदा और प्रतिशोधी बताते हुए इसमें शामिल अधिकारियों को निलंबित करने की भी मांग की। पत्रकार के परिवार से मिलने के बाद मीडिया से बात करते हुए चौधरी ने सवाल उठाया कि इस विध्वंस के लिए कौन जिम्मेदार है, जबकि निर्वाचित सरकार ने इसका आदेश नहीं दिया था।   चौधरी ने एलजी को संबोधित करते हुए कहा, "पुलिस, जिसने विध्वंस के लिए समर्थन दिया, वह आपकी थी। जेडीए के उपाध्यक्ष आपके द्वारा नियुक्त किए गए हैं। अगर आप कहते हैं कि यह विध्वंस आपके आदेश पर नहीं किया गया, तो इन अधिकारियों ने एलजी या मुख्यमंत्री से पूछे बिना इसे करने की हिम्मत कैसे की?" उन्होंने कहा, "हम निर्वाचित सरकार, खुले तौर पर कह रहे हैं कि हमने इसका आदेश नहीं दिया। उमर अब्दुल्ला सरकार के उपमुख्यमंत्री कह रहे हैं कि यह जम्मू-कश्मीर सरकार की मंजूरी से नहीं किया गया है।" उपमुख्यमंत्री ने मांग की कि एलजी विध्वंस की जांच का आदेश दें और पता लगाएं कि यह किसके आदेश पर किया गया था। उन्होंने जेडीए उपाध्यक्ष से जवाब मांगा कि विध्वंस का आदेश किसने दिया और कहा कि मुख्यमंत्री की सहमति के बिना यह कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही सख्ती से तय की जाएगी। चौधरी ने वरिष्ठ भाजपा नेता रविंदर रैना के उस कथित दावे का जिक्र किया जिसमें उन्होंने एलजी से बात करने के बाद विध्वंस आदेश जारी करने से इनकार कर दिया था। चौधरी ने सच्चाई जानने के लिए भाजपा नेता के मोबाइल फोन के कॉल डेटा रिकॉर्ड को र्प्राप्त करने की मांग की। JDA ने गुरुवार को ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में एक अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान 72 वर्षीय गुलाम कादिर डैंग के एक मंजिला घर को ध्वस्त कर दिया था। निवासियों ने दावा किया कि वे पिछले चार दशकों से वहां रह रहे थे और उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। चौधरी ने कहा कि निर्वाचित सरकार न तो कमजोर है और न ही असहाय और वह पत्रकारों या गरीबों को निशाना बनाने वाले चुनिंदा या प्रतिशोधी उपायों की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने बताया कि वह मुख्यमंत्री के निर्देश पर आए थे ताकि लोगों को यह बता सकें कि हमारी सरकार कभी भी सस्ते या बदले की रणनीति नहीं अपनाएगी। उन्होंने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) को दबाने की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा, "अगर कोई सोचता है कि वे जम्मू-कश्मीर को उत्पीड़न और दमन से चला सकते हैं, तो यह लंबे समय तक नहीं चलेगा।"  

इमरान खान को लेकर बड़ा दावा: बेटे ने मांगे सबूत, पार्टी सांसद बोले—हैं बिल्कुल सुरक्षित

रावलपिंडी पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर दुनियाभर में चर्चा जारी है। मौत की अफवाहों के बीच अब उनकी ही पार्टी के एक सांसद ने दावा किया है कि खान अभी जिंदा है और अडियाला जेल में ही हैं। लेकिन उनके ऊपर जल्द से जल्द देश छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि यह बयान उस समय पर आया है, जब पिछले कुछ दिनों से लगातार इमरान खान की मौत की खबरें उड़ रही थीं। उनके बेटे और बहन ने भी खान के जिंदा होने के सबूत की मांग की थी। पाकिस्तान के पूर्व पीएम की उड़ती अफवाहों पर विराम लगाते हुए पार्टी के सांसद खुर्म जीशान ने इमरान की मौत की खबर को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने एएनआई से कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री फिलहाल अडियाला जेल में ही कैद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खान को सबसे अलग रखना और जेल में परेशान करना एक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत उन्हें पाकिस्तान छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "यह बहुत ही ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है। एक महीना हो गया है और खान को जेल में ही सबसे अलग रखा गया है। उनके परिवार, वकीलों यहां तक की पीटीआई के नेताओं को भी उनसे मिलने नहीं दिया गया। यह मानवाधिकारों का पूरी तरह से उल्लंघन है। ऐसा लगता है कि उन्हें किसी बात के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनकी हिम्मत तोड़ने की कोशिश की जा रही है।" दरअसल, यह पूरा मामला उस समय उठा था जब इमरान के बेटे कासिम ने अपने पिता से मिलने का समय मांगा। हालांकि, इन अफवाहों को तब और बल मिल गया जब अदालत के आदेश के बावजूद इमरान की बहनों और उनके बेटों को उनसे नहीं मिलने दिया गया। इससे यह अटकल शुरू हो गई कि इमरान खान की जेल में ही हत्या हो गई है। कासिम ने कहा, "मेरे पिता को पिछले 845 दिनों से कैद करके रखा गया है। पिछले छह हफ्तों से उन्हें मौत की सजा वाले कैदखाने में रखा गया है। हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं है।" कासिम के इस बयान के बाद पाकिस्तान की आर्मी और शहबाज शरीफ की मिली जुली सरकार पर दबाव बना। इसके बाद उनके वकीलों और पीटीआई के नेताओं को इमरान के जिंदा होने का आश्वासन दिया गया।

UP-बंगाल समेत 12 राज्यों को राहत: चुनाव आयोग ने SIR की समय सीमा बढ़ाई

नई दिल्ली   भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की समय सीमा को 7 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। अब यह प्रक्रिया 11 दिसंबर तक चलेगी। आपको बता दें कि एसआईआर के दूसरे चरण में अंडमान और निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट को सुधारा जा रहा है।  चुनाव आयोग ने 11 दिसंबर 2025 तक समय सीमा बढ़ाया है। पोलिंग स्टेशनों को ठीक करना और फिर से व्यवस्थित करना सुनिश्चित करने को कहा है। कंट्रोल टेबल का अपडेट और ड्राफ्ट रोल तैयार करना की समय सीमा अब 12–15 दिसंबर तक होगी। ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल का पब्लिकेशन 16 दिसंबर को किया जाएगा। दावे और आपत्तियां फाइल करने का समय 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक तय किया गया है। ओसआईआर चुनाव आयोग की लगातार कोशिशों का हिस्सा है ताकि यह पक्का किया जा सके कि वोटर रोल सही, अप-टू-डेट और सबको शामिल करने वाले हों, खासकर जरूरी विधानसभा चुनावों से पहले इसे सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। उनमें पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश शामिल है। चुनाव आयोग के द्वारा दी गई मोहलत के साथ ही मतदाताओं को अपनी डिटेल्स वेरिफाई करने, ऑब्जेक्शन फाइल करने या वोटर लिस्ट में जरूरी सुधार करने के लिए और समय मिल गया है। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि प्रभावित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निवासियों को भविष्य के चुनावों में वोट देने का मौका गंवाने से बचने के लिए बढ़े हुए शेड्यूल का फायदा उठाना चाहिए।