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रेल नेटवर्क का बड़ा विस्तार: महाराष्ट्र में 38 परियोजनाओं के लिए ₹89,780 करोड़ मंजूर

नई दिल्ली केंद्र ने महाराष्ट्र में रेल नेटवर्क बढ़ाने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राज्य में 89,780 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 38 प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है। रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं के तहत कुल 5,098 किलोमीटर लंबी पटरियों का निर्माण, गेज परिवर्तन और दोहरीकरण का कार्य किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में रेल नेटवर्क की क्षमता को बढ़ाना और ट्रेनों के परिचालन को सुगम बनाना है। स्वीकृत योजना में 11 नई रेलवे लाइनें, 2 गेज परिवर्तन और 25 दोहरीकरण या मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं शामिल हैं। रेल मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में रेलवे के बुनियादी ढांचे के लिए आवंटित धन में भारी वृद्धि हुई है। वर्ष 2009 से 2014 के बीच, औसत वार्षिक व्यय लगभग 1,171 करोड़ रुपये था। इसकी तुलना में, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट आवंटन बढ़कर 23,778 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछली राशि से "20 गुना से अधिक" है। फंडिंग में इस वृद्धि का सीधा असर निर्माण कार्यों की गति पर पड़ा है। नई पटरियों को बिछाने की औसत गति, जो पहले 58.4 किलोमीटर प्रति वर्ष थी, अब बढ़कर 208.36 किलोमीटर प्रति वर्ष हो गई है। मुंबई लोकल और उपनगरीय नेटवर्क का कायाकल्प मुंबई के व्यस्त उपनगरीय नेटवर्क, जहां प्रतिदिन 3,200 लोकल ट्रेनों और 120 एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन होता है, के लिए भी विशेष अपग्रेड की घोषणा की गई है। क्षमता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए मुंबई शहरी परिवहन परियोजना के चरण II, III और IIIA को मंजूरी दी गई है। मुख्य विशेषताएं     सीएसएमटी और कुर्ला के बीच 5वीं और 6ठी लाइन का निर्माण।     हार्बर लाइन का गोरेगांव से बोरीवली तक विस्तार।     यात्री क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने 12 डिब्बों वाली 238 नई ट्रेन रेक को मंजूरी दी है। 19,293 करोड़ रुपये की लागत वाली इन नई ट्रेनों में स्वचालित दरवाजे होंगे। बुलेट ट्रेन और फ्रेट कॉरिडोर पर अपडेट बहुप्रतीक्षित हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना पर भी प्रगति हुई है। रेल मंत्रालय ने पुष्टि की है कि महाराष्ट्र में इस परियोजना के लिए "100% भूमि अधिग्रहण" पूरा हो चुका है, और वर्तमान में पुलों तथा अन्य संरचनाओं का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अतिरिक्त, माल ढुलाई को सुगम बनाने के लिए वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC), जो जेएनपीटी (JNPT) पोर्ट को दिल्ली क्षेत्र से जोड़ता है, पर भी काम जारी है। इस कॉरिडोर का 76 किलोमीटर लंबा हिस्सा (न्यू घोलवड से न्यू वैतरणा तक) पूरा हो चुका है और उपयोग में है। भविष्य की योजनाएं और सर्वेक्षण भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, रेलवे विभाग ने 2022 से 2026 के बीच 98 नए सर्वेक्षण शुरू किए हैं। ये सर्वेक्षण 8,603 किलोमीटर की दूरी को कवर करते हैं, जिनका उद्देश्य महाराष्ट्र में नई रेलवे लाइनों और दोहरीकरण कार्यों की संभावनाओं को तलाशना है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नई परियोजनाओं का चयन ट्रैफिक की मांग, राज्य सरकार के अनुरोध और उपलब्ध धन जैसे कारकों पर निर्भर करता है। वहीं, परियोजनाओं के पूरा होने की समय सीमा भूमि अधिग्रहण, वन मंजूरी और यूटिलिटी शिफ्टिंग जैसी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।

राष्ट्रपति ने दी मंजूरी: विकसित भारत-जी राम कानून से 125 दिन काम की गारंटी

नई दिल्ली राष्ट्रपति ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम दी विधेयक, 2025 को अपनी मंजूरी दे दी है। इस स्वीकृति के साथ यह विधेयक अब कानून बन गया है। इस कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली वैधानिक मजदूरी रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर अब एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिन कर दिया गया है। सरकार इसे ग्रामीण जीवन को मजबूत आधार देने वाला ऐतिहासिक कदम बता रही है। सरकार का कहना है कि वीबी-जी राम जी कानून लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कानूनी गारंटी पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगी। बता दें, इस बिल पर देत रात तक संसद में चर्चा चली थी। इस मामले में विपक्ष का कहना था कि सरकार जानबूझकर मनरेगा का नाम बदल रही है, मनरेगा में महात्मा गांधी का भी नाम आता था, इसीलिए भाजपा इस नाम को हटाने के लिए ये बिल लाई। वहीं, सरकार का कहना था कि पहले की योजना में लोगों को 100 दिन का काम दिया जाता था। लेकिन अब इस कानून के तहत अब कम से कम 125 दिन काम देना आनिवार्य है। इस बहस के दौरान ही कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर जमकर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि जब भी कांग्रेस सत्ता में आएगी, तो वो इसका फिर नाम बदलेंगे। इन सब हंगामों के बीच इस बिल को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया था। हालांकि संसद में विपक्ष ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया था। इतना ही नहीं, इसके बाद विपक्ष ने संविधान सदन के बाहर पूरी रात धरना भी दिया था। इस कानून के मुताबिक अब पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन तक मजदूरी आधारित काम उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी होगी। इसका सीधा उद्देश्य गांवों में रहने वाले श्रमिकों, किसानों और भूमिहीन परिवारों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देना है। सरकार का कहना है कि इससे गांवों में गरीबी कम होगी और लोगों को अपने ही क्षेत्र में काम मिलेगा। सशक्तिकरण और समावेशी विकास पर जोर सरकार का कहना है कि नए कानून का मकसद केवल रोजगार देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण समाज का समग्र सशक्तिकरण करना भी है। वीबी-जी राम जी के तहत समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। सरकार का दावा है कि यह कानून महिलाओं, कमजोर वर्गों और जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिलेगी। सरकार चाहती है कि ग्रामीण इलाकों में चल रही योजनाएं एक-दूसरे से जुड़कर ज्यादा प्रभावी परिणाम दें। सड़कों, जल संरक्षण, सिंचाई, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कामों को रोजगार से जोड़कर गांवों की तस्वीर बदलने की योजना है। इससे विकास कार्यों में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेंगी। वीबी-जी राम जी कानून में संतृप्ति आधारित डिलीवरी को खास महत्व दिया गया है। इसका मतलब यह है कि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे। सरकार का कहना है कि अंतिम व्यक्ति तक रोजगार और आजीविका का लाभ पहुंचाना इस कानून का मूल उद्देश्य है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में असमानता कम होगी और विकास का लाभ सभी तक पहुंचेगा। सरकार का मानना है कि यह कानून समृद्ध, मजबूत और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की नींव को और पुख्ता करेगा। रोजगार बढ़ने से गांवों में आय के साधन मजबूत होंगे और शहरों की ओर पलायन पर भी रोक लगेगी। वीबी-जी राम जी को ग्रामीण भारत के भविष्य के लिए निर्णायक कदम माना जा रहा है, जो लंबे समय तक देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। मनरेगा से कितना अलग होगा वीबी-जी राम जी? केंद्र सरकार का कहना है कि नए नियमों से मनरेगा की ढाचांगत कमियों को दूर किया गया है। सबसे पहले तो योजना के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने का दावा किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में किए जाने वाले सभी कार्यों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक में शामिल किया जाएगा। कानून में कहा गया है कि इससे ग्रामीण स्तर पर सार्वजनिक कार्यों के लिए एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार होगा। इसी के आधार पर गांवों में आगे के कामों को लेकर तैयारियां होंगी। कानून में दी गई जानकारी के मुताबिक, इस तरह गांवों के लिए एकीकृत ढांचा तैयार करने से देशभर में उत्पादक, टिकाऊ, सुदृढ़ और बदलाव में सक्षम ग्रामीण परिसंपत्तियों (एसेट्स) का निर्माण सुनिश्चित होगा। केंद्र और राज्य 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य के तहत इन परिसंपत्तियों को आगे बढ़ाने की योजनाएं भी साझा तौर पर तैयार करेंगी। यानी एक राष्ट्रीय नीति के तहत काम के बिखराव को समेटा जाएगा और तय दिशा में इसे आगे बढ़ाया जाएगा। किसानों-मजदूरों के लिए कानून में क्या? चूंकि राज्य सरकारें तय कर सकती हैं कि किस अवधि में बुवाई और कटाई का ध्यान रखते हुए वीबी-जी राम जी के तहत 60 दिन के लिए काम रोकना है, ऐसे में किसानों को अपने खेतों पर काम करने के लिए मजदूरों की कमी नहीं पड़ेगी। खासकर पीक सीजन के दौरान। इससे मजदूरों को भी मनरेगा के काम से अतिरिक्त अपने लिए बाकी स्रोतों से वेतन जुटाने में मदद मिलेगी। इतना ही नहीं चूंकि किसानों के लिए मजदूर सही स्तर पर उपलब्ध रहेंगे, ऐसे में उन्हें अतिरिक्त वेतन पर मजदूरों को नहीं रखना होगा। कई बार किसानों पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त बोझ का असर फसलों की कीमत पर पड़ता है, क्योंकि ज्यादा खर्च की वजह से उन्हें लाभ लेने के लिए उन्हें फसलों के दाम बढ़ाने पड़ते हैं। इसके अतिरिक्त मजदूरों के लिए काम के दिन बढ़ाकर 100 से 125 किए गए हैं। यानी उन्हें आर्थिक तौर पर भी ज्यादा रकम हासिल करने में मदद मिलेगी।

किराया बढ़ा, लेकिन राहत भी: 26 दिसंबर से इन रेल यात्रियों को मिलेगा पूरा फायदा

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने आगामी 26 दिसंबर से रेल टिकट के किराए को बढ़ाने की घोषणा की है, जिससे रेलवे को लगभग 600 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी होने की उम्मीद है। रेलवे के इस बड़े बदलाव से जहां कुछ यात्रियों को 26 दिसंबर के बाद ज्यादा किराया देना पड़ेगा, तो वहीं कुछ यात्रियों को कोई बढ़ा किराया नहीं देना पड़ेगा। रेलवे के इस नए नियम के तहत, साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा पर यात्रियों को 1 पैसा प्रति किलोमीटर ज्यादा देना होगा।  वहीं मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन-एसी और एसी श्रेणियों में 2 पैसे प्रति किलोमीटर ज्यादा किराया लगेगा। अगर कोई यात्री 500 किलोमीटर की नॉन-एसी यात्रा करता है, तो उसे 10 रुपए अतिरिक्त देने होंगे। लेकिन अगर कोई यात्री 215 किलोमीटर से कम दूरी की यात्रा करता है, तो उसे कोई बढ़ा किराया नहीं देना पड़ेगा, यानी 215 किलोमीटर से कम दूरी पर यह नियम लागू नहीं होगा। इसके साथ ही रेलवे ने यह भी साफ किया है कि लोकल (सब-अर्बन) ट्रेन और मासिक सीजन टिकट के किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। ऐसा इसलिए, ताकि कम और मध्यम आय वाले परिवारों पर बोझ न पड़े और यात्रा सस्ती बनी रहे। रेल मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पिछले एक दशक यानी दस वर्षों में भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क को काफी बढ़ाया है और अब देश के दूर-दराज इलाकों तक सेवाएं पहुंच रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और बेहतर सेवाएं देने के लिए रेलवे ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई है। इसके कारण कर्मचारियों पर खर्च बढ़कर 1.15 लाख करोड़ रुपए हो गया है और पेंशन पर खर्च 60,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वर्ष 2024-25 में रेलवे का कुल खर्च 2.63 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इन बढ़े हुए खर्चों को पूरा करने के लिए रेलवे माल ढुलाई (कार्गो) को बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही यात्रियों के किराए में थोड़ा-सा बदलाव किया गया है। रेलवे ने बताया कि इन सुधारों से सुरक्षा भी बेहतर हुई है और भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा माल ढुलाई करने वाला रेलवे बन गया है। रेलवे ने यह भी बताया कि माल ढुलाई के किराए 2018 के बाद से नहीं बढ़ाए गए हैं, जबकि खर्च बढ़ता रहा है। रेलवे अब ज्यादा माल ढोकर अपनी कमाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रेल मंत्रालय ने कहा कि हाल ही में त्योहारों के दौरान 12,000 से ज्यादा ट्रेनें सफलतापूर्वक चलाई गईं, जो रेलवे की बेहतर योजना और काम करने की क्षमता को दिखाता है। इस बीच, मंत्रालय ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र में हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके लिए 100 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण पूरा हो चुका है।

रेगिस्तान में छलका जाम? सऊदी अरब में शराब बिक्री पर सख्ती ढीली, दुकानों पर उमड़ी भीड़

सऊदी अरब  सऊदी अरब ने चुपचाप एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। दरअसल, दशकों से लागू सख्त शराब प्रतिबंध के बीच बड़ा बदलाव किया गया है। सऊदी सरकार ने अपने एकमात्र शराब बेचने वाले स्टोर तक अमीरों की पहुंच बढ़ा दी है। इस बदलाव के बाद गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिक, जिनके पास प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट है, अब इस स्टोर से शराब खरीद सकते हैं। इस फैसले की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन खबर फैल चुकी है और सऊदी राजधानी रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर में स्थित बिना किसी पहचान वाले स्टोर के बाहर कारों और लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।   रिपोर्टों के अनुसार, यह शराब की दुकान रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर में स्थित है। यह दुकान बाहर से पूरी तरह सामान्य दिखती है और इस पर कोई नाम या पहचान नहीं है। बताया जाता है कि यह स्टोर जनवरी 2024 में खोला गया था, जहां पहले केवल गैर-मुस्लिम राजनयिकों को ही शराब खरीदने की अनुमति थी। लेकिन अब प्रीमियम रेजिडेंसी वाले गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिक भी यहां से शराब खरीद सकते हैं। प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट क्या है? प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट सऊदी अरब की एक खास नीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह निवेशकों, उद्यमियों और विशेष कौशल वाले लोगों को आकर्षित करना चाहता है। इस परमिट के लिए मुख्य शर्त उच्च आय और बड़ा निवेश है। इसके तहत विदेशी लोग बिना किसी सऊदी स्पॉन्सर के संपत्ति खरीद सकते हैं, बिजनेस शुरू कर सकते हैं और अपना परिवार भी साथ रख सकते हैं। शराब की कीमतें कितनी हैं? एसोसिएटेड प्रेस और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, स्टोर से बाहर निकलने वाले ग्राहकों ने बताया कि कीमतें काफी ज्यादा हैं। राजनयिकों को उनकी खरीदारी पर टैक्स में छूट मिलती है, लेकिन प्रीमियम रेजिडेंसी धारकों को नहीं। ग्राहकों ने स्टोर को अच्छी तरह से स्टॉक किया हुआ बताया, हालांकि कुछ ने कहा कि बीयर और वाइन का चयन अभी सीमित है। पहले लोग शराब कहां से पीते थे? सऊदी अरब में शराब पर सख्त प्रतिबंध होने के कारण यहां रहने वाले लोग अक्सर पड़ोसी देश बहरीन जाते थे, जहां मुसलमानों और गैर-मुसलमानों दोनों के लिए शराब कानूनी है। सप्ताह के अंत और छुट्टियों में सऊदी अरब और खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में लोग बहरीन जाते हैं, जिससे यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है। इसके अलावा, कुछ लोग तस्करी वाली शराब का भी सहारा लेते हैं, जो बेहद महंगी होती है। सऊदी अरब ऐसा क्यों कर रहा है? यह बदलाव सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और किंग सलमान के नेतृत्व में पिछले कुछ सालों से हो रहे बड़े सामाजिक और आर्थिक सुधारों का हिस्सा है। यहां सिनेमा हॉल खोले गए हैं, महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति दी गई है और बड़े म्यूजिक फेस्टिवल आयोजित किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि ये फैसले पर्यटन बढ़ाने, विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने और तेल पर निर्भरता कम करने के लिए किए जा रहे हैं। यह बदलाव विजन 2030 के तहत देश को ज्यादा आधुनिक और वैश्विक बनाने की दिशा में एक कदम है।

भारत के छात्रों के लिए खुशखबरी: पुतिन सरकार ने रूस में बिना एंट्रेंस एग्जाम एडमिशन का रास्ता खोला

नई दिल्ली  भारतीय छात्रों के लिए रूस से एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। रूसी सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए अपने प्रतिष्ठित सरकारी छात्रवृत्ति कार्यक्रम (Government Scholarship Program) की घोषणा कर दी है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब भारतीय छात्रों को रूस में उच्च शिक्षा पाने के लिए किसी भी प्रवेश परीक्षा से नहीं गुजरना होगा। चयन का आधार और पाठ्यक्रम यह छात्रवृत्ति स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG), पीएचडी और उन्नत प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए प्रदान की जा रही है। उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह से उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड और पोर्टफोलियो के आधार पर किया जाएगा। पोर्टफोलियो में शोध पत्र, अनुशंसा पत्र (LOR), और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के प्रमाणपत्रों को वरीयता दी जाएगी। इस कार्यक्रम के तहत मेडिसिन, इंजीनियरिंग, फार्मेसी और स्पेस स्टडीज जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई की जा सकेगी।   रूस ने भाषा की बाधा को दूर करने के लिए कई कोर्स अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध कराए हैं। जो छात्र रूसी भाषा सीखना चाहते हैं, उनके लिए मुख्य पाठ्यक्रम शुरू होने से पहले एक वर्षीय प्रारंभिक भाषा पाठ्यक्रम (Preparatory Language Course) का विकल्प भी रखा गया है। आवेदन प्रक्रिया और समय सीमा रिपोर्ट के अनुसार, छात्रवृत्ति की चयन प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन और प्रारंभिक चयन किया जाएगा और यह प्रक्रिया 15 जनवरी तक चलेगी। दूसरे चरण में रूसी विज्ञान और उच्च शिक्षा मंत्रालय चयनित छात्रों को उनकी योग्यता के अनुसार विश्वविद्यालय आवंटित करेगा और वीजा संबंधी प्रक्रिया पूरी करेगा। भारतीय छात्र मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग, कजान और व्लादिवोस्तोक जैसे प्रमुख शहरों के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट education-in-russia.com पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यह पहल न केवल छात्रों का भविष्य संवारेगी, बल्कि भारत-रूस के शैक्षिक संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

बाबरी मस्जिद विवाद पर मोहन भागवत की दो-टूक: ‘इससे न हिंदुओं का भला होगा, न मुसलमानों का’

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद के लिए नींव डाले जाने पर आरएसएस चीफ मोहन भागवत की प्रतिक्रिया है। मोहन भागवत ने कहा कि यह एक सियासी साजिश है। बाबरी मस्जिद फिर से बनाने का विवाद वोटों के लिए खड़ा किया जा रहा है। मोहन भागवत ने कहा कि इससे ना तो हिंदुओं का भला होने वाला है और ना ही मुसलमानों का। गौरतलब है कि टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने बेलडांगा में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान किया है।   मोहन भागवत से पूछा गया कि क्या सरकारी पैसे धार्मिक स्थल का निर्माण करना ठीक है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार को मंदिर या कोई भी धार्मिक स्थल नहीं बनाना चाहिए। यही नियम है। उन्होंने कहाकि सोमनाथ मंदिर बनाया गया था। उस समय सरदार वल्लभभाई पटेल गृहमंत्री थे। राष्ट्रपति भी उद्धाटन समारोह में शामिल हुए थे। लेकिन इसमें सरकारी पैसे का इस्तेमाल नहीं हुआ था। आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि राम मंदिर भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनाया गया था। सरकार से ट्रस्ट बनाने के लिए कहा गया था और उन्होंने वैसा ही किया। सरकार ने पैसा नहीं दिया था, बल्कि हम लोगों ने सहयोग से धन जुटाया था। इससे पहले विहिप ने कहा था कि मुर्शिदाबाद में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद का निर्माण करना भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत अपराध है। साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार से निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का आग्रह किया। गौरतलब है कि छह दिसंबर को, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित नेता कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले के रेजिनगर में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनाई जाने वाली मस्जिद की आधारशिला रखी। इससे अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले से ही ध्रुवीकृत पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया।  

ग्रामीण रोजगार को बड़ी सौगात: ‘जी राम जी’ विधेयक बना कानून, अब 125 दिन मिलेगा काम

नई दिल्ली  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-जी राम जी) विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है। इस तरह मनरेगा की जगह अब 'जी राम जी' कानून बन गया है। ग्रामीण परिवारों के लिए अब हर साल मजदूरी रोजगार गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ा दिया गया है। संसद में गुरुवार को विपक्ष के विरोध के बीच जी राम जी विधेयक पारित हुआ। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने बापू के आदर्शों की हत्या की, जबकि मोदी सरकार ने उन्हें जिंदा रखा है। मनरेगा योजना की जगह नया विधेयक लाने और उसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर विपक्ष के आरोपों को चौहान ने सिरे से खारिज कर दिया।   शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया, ‘कांग्रेस नीत सरकार ने मनरेगा को भी ताकत के साथ लागू नहीं किया और प्रधानमंत्री मोदी ने इसे सही से क्रियान्वित किया।’ उन्होंने यूपीए और राजग सरकार के समय इस योजना के क्रियान्वयन की तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय जहां 1660 करोड़ श्रम दिवस सृजित हुए थे, वहीं मोदी सरकार में 3210 करोड़ श्रम दिवस का सृजन किया गया। मोदी सरकार से पहले इस योजना में महिलाओं की भागीदारी 48 प्रतिशत थी, जो इस सरकार के समय 56.73 प्रतिशत हो गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी ने तो गांधी का नाम चुराने का पाप किया है।’ क्या है जी राम जी कानून जी राम जी कानून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' विजन के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और कृषि उत्पादकता को मजबूत करना है। विधेयक में ग्रामीण परिवारों के लिए सालाना रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है, साथ ही स्थानीय नियोजन, श्रमिक सुरक्षा और योजनाओं के एकीकरण पर जोर दिया गया है। इस कानून का मकसद ग्रामीण आय सुरक्षा को मजबूत करना, अग्रिम पंक्ति की योजनाओं का एकीकरण और कृषि-रोजगार संतुलन है। सरकार का कहना है कि यह कानून ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा।  

पाकिस्तान का राष्ट्रीय खिलाड़ी बना ‘टीम इंडिया’ का हिस्सा! तिरंगा थामते ही सीमा पार हड़कंप

इस्लामाबाद  पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन (पीकेएफ) ने एक बड़े विवाद के बाद जनरल काउंसिल की इमरजेंसी बैठक बुलाई है। यह विवाद पाकिस्तान के लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी उबैदुल्लाह राजपूत से जुड़ा है, जो बहरीन में आयोजित एक निजी कबड्डी टूर्नामेंट में भारतीय टीम की जर्सी पहनकर खेलते और भारतीय झंडा लहराते नजर आए। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिससे पाकिस्तान में व्यापक आक्रोश फैल गया है। पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन के सचिव राणा सरवर ने बताया कि फेडरेशन के चेयरमैन चौधरी शफाय हुसैन के निर्देश पर 27 दिसंबर को आपात बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में उबैदुल्लाह राजपूत और अन्य संबंधित खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। सरवर ने कहा- यह घटना अस्वीकार्य है। एक राष्ट्रीय खिलाड़ी का विदेशी टीम का प्रतिनिधित्व करना और उसका झंडा लहराना गंभीर मामला है। हम इसकी जांच करेंगे और सबसे सख्त कार्रवाई करेंगे। टूर्नामेंट का नाम था तीसरा जीसीसी कबड्डी कप, जो 16 दिसंबर को बहरीन के सलमाबाद स्थित गल्फ एयर क्लब में आयोजित हुआ। इसमें भाग लेने वाली टीमों में बहरीन, कुवैत, दुबई और ओमान शामिल थे। सरवर ने कहा कि यह एक निजी आयोजन था, जिसमें आयोजकों ने भारत, पाकिस्तान, कनाडा, ईरान आदि देशों के नाम पर निजी टीमें बनाई थीं। हालांकि, सभी टीमों में मुख्य रूप से अपने-अपने मूल देश के खिलाड़ी थे। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों वाली निजी टीम का प्रतिनिधित्व भारतीय खिलाड़ियों ने किया, लेकिन उबैदुल्लाह का उसमें शामिल होना इन परिस्थितियों में अस्वीकार्य है। 16 पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर तलवार सरवर ने आगे बताया कि बहरीन गए 16 पाकिस्तानी खिलाड़ियों (जिनमें राष्ट्रीय और नेशनल लेवल के खिलाड़ी शामिल हैं) ने फेडरेशन या पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड से कोई अनुमति या एनओसी नहीं ली था। यह कोई आधिकारिक पाकिस्तानी राष्ट्रीय टीम नहीं थी। पाकिस्तान के नाम का दुरुपयोग करने और बिना अनुमति भाग लेने के लिए इन खिलाड़ियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि क्लब स्तर पर विभिन्न देशों के खिलाड़ी एक साथ खेल सकते हैं, लेकिन किसी विदेशी टीम का प्रतिनिधित्व करना और उसका झंडा लहराना दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही, स्वघोषित प्रमोटर्स के खिलाफ भी कार्रवाई होगी ताकि पाकिस्तान के नाम को बदनाम करने वाली अवैध घटनाओं को रोका जा सके। खिलाड़ी ने माफी मांगी विवाद के बाद उबैदुल्लाह राजपूत ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट हर साल बहरीन में होता है और उन्होंने पहले भी इसमें हिस्सा लिया था। इस बार उनकी पुरानी टीम ने नहीं बुलाया, लेकिन दूसरी टीम ने आमंत्रित किया, इसलिए वे चले गए। उन्हें नहीं पता था कि टीमें भारत और पाकिस्तान के नाम से रखी जाएंगी। मैदान में प्रवेश करते समय दोस्तों ने बताया कि वे भारत की टीम से खेल रहे हैं। उन्होंने कमेंटेटर से अनाउंस करवाया कि यह भारत-पाकिस्तान मैच नहीं बल्कि स्थानीय कप है। राजपूत ने कहा कि नारे लगने और झंडे लहराने की उन्हें उम्मीद नहीं थी। यह सिर्फ एक कप था, विश्व कप नहीं। विश्व कप होता तो वे निश्चित रूप से पाकिस्तान के लिए खेलते, क्योंकि वे पाकिस्तानी हैं। उन्होंने कहा- मेरा जीवन पाकिस्तान पर कुर्बान है। अगर किसी का दिल दुखा है तो मैं माफी मांगता हूं। उन्होंने फेडरेशन, कोच और शुभचिंतकों से भी माफी मांगी और कहा कि कप को कप ही रहने दें, विश्व कप इससे अलग होते हैं।

निकाय चुनावों में NDA का दबदबा, महाराष्ट्र में BJP-शिवसेना-NCP गठबंधन 200 से ज्यादा सीटों पर आगे

मुंबई  महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों के अब तक रुझानों में सत्तारूढ़ महायुति 214 स्थानीय निकायों में स्पष्ट बढ़त बनाए हुए है। इसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 118 निकायों में, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 59 निकायों में और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) 37 निकायों में आगे चल रही है। वहीं, विपक्षी महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (MVA) वर्तमान में केवल 49 निकायों में आगे है, जबकि कांग्रेस 32 निकायों में बढ़त बनाए हुए है। बता दें कि 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में से 253 में मतगणना जारी है। गौरतलब है कि भाजपा ने पहले ही तीन सीटें निर्विरोध जीत ली हैं, जिनमें डोंडाईचा नगर परिषद (धुले) और अंगार नगर पंचायत (सोलापुर) के सदस्य व अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए हैं। साथ ही जामनेर नगर पालिका के अध्यक्ष चुनाव में भी कोई विपक्ष नहीं था।   महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में महायुति की 'सफलता' भाजपा संगठन और सरकार के संयुक्त प्रयास का नतीजा है। उन्होंने कहा कि यह एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें संगठन और सरकार दोनों शामिल हैं। हमने विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। मैंने सकारात्मक विकास एजेंडे पर आधारित अभियान चलाया और कभी भी किसी राजनीतिक नेता या पार्टी की आलोचना नहीं की। फडणवीस ने आगे कहा कि उन्होंने विकास एजेंडे, अब तक किए गए कार्यों और भविष्य की योजनाओं के आधार पर ही वोट मांगे। लातूर में भाजपा ने 5 में से 4 सीटों पर अध्यक्ष पद जीता महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में भाजपा को बड़ी सफलता मिली है। लातूर जिले में नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव परिणाम घोषित हो रहे हैं। यहां भाजपा ने पांच में से चार स्थानीय निकायों में अध्यक्ष पद पर विजय हासिल की है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने उदगीर, अहमदपुर, निलंगा और रेनापुर के स्थानीय निकायों में अध्यक्ष पद जीते, जबकि उसके सहयोगी अजीत पवार की एनसीपी ने औसा की सीट पर कब्जा किया है। इस तरह लातूर जिले में सभी पांच सीटों पर महायुति ने कब्जा कर लिया है। नतीजे और महायुति की जीत तो बस ट्रेलर है उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को कहा कि महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों में आगे क्या होने वाला है, इसका एक ट्रेलर हैं। शिवसेना के नेता शिंदे ने अपनी सेना के 'स्ट्राइक रेट' की भी सराहना की और कहा कि ये परिणाम हमारी पार्टी द्वारा किए गए अच्छे काम की पुष्टि करते हैं। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ये परिणाम जनता की उस प्रवृत्ति को दर्शाते हैं जो राजनीति से ऊपर विकास को प्राथमिकता देती है। महायुति की जीत महज एक ट्रेलर है। महायुति आगामी नगर निगम चुनावों में भी यही शानदार प्रदर्शन दोहराएगी निकाय चुनाव में पार्टी की जीत पर बधाई महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव 2025 के नतीजों पर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी की जीत पर बधाई दी। गडकरी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि भारतीय जनता पार्टी को उसकी शानदार जीत पर हार्दिक बधाई। राज्य भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और सभी समर्पित पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई। उन्होंने आगे कहा कि यह जीत पार्टी कार्यकर्ताओं की है। भाजपा और उसके विकासोन्मुखी कार्यों पर भरोसा जताने के लिए जनता का तहे दिल से धन्यवाद। विपक्ष के 'झूठे प्रचार' को मतदाताओं ने किया खारिज महाराष्ट्र में रविवार को स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने दावा किया कि उनकी पार्टी को निर्णायक जनादेश मिला है। चव्हाण ने कहा कि मतदाताओं ने विपक्ष के 'झूठे प्रचार' को खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि महायुति ने 288 में से 250 से अधिक परिषदों, नगर पंचायतों और नगर परिषदों में जीत हासिल की है। भाजपा के उम्मीदवारों ने 236 में से 134 पार्षद पदों और 3,000 से अधिक पार्षद सीटों पर जीत हासिल की है। चव्हाण ने दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष ने तरह-तरह के आरोप लगाए, लेकिन जनता ने उनकी पोल खोल दी। उद्धव ठाकरे ने खुद कहा कि उनके पास जनता को देने के लिए कुछ नहीं था और इसीलिए उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। उनकी पार्टी विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए भी दो अंकों में जीत हासिल नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि परिषद, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में मतदाताओं ने विपक्ष के झूठे दावों को खारिज कर दिया है। अब मुंबईवासी भी आगामी बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के चुनावों में विपक्ष के दावों को खारिज कर देंगे। दोपहर 3 बजे के मुताबिक रायगढ़ जिले की नगरपालिकाओं में मेयर पद के नतीजे घोषित हो गए हैं। रोहा सीट पर एनसीपी के वनश्री शेगडे मेयर चुनी गई हैं। कर्जत सीट पर एनसीपी की पुष्पा डागड़े और मुरुड सीट पर एनसीपी की आराधना दांडेकर ने जीत हासिल की है। माथेरान सीट पर शिवसेना उम्मीदवार चंद्रकांत चौधरी, महाड से शिवसेना के सुनील कविस्कर, खोपोली में शिवसेना के कुलदीप शिंदे मेयर चुने गए हैं। श्रीवर्धन में शिवसेना यूबीटी के अतुल चोगले, पेण में बीजेपी की श्रीमती प्रीतम पाटिल, अलीबाग में शेतकरी कामगार पक्ष के अक्षया नाइक और उरण सीट पर एनसीपी शरद गुट की भावना घाणेकर ने जीत हासिल की है।  

सोशल मीडिया पर मचा बवाल: क्या अरावली के खत्म होते ही भारत बढ़ेगा रेगिस्तान की ओर? तथ्य बनाम दावा

नई दिल्ली  अरावली को लेकर इस समय काफी बवाल मचा हुआ है, सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक लोग इसको बचाने की मुहीम चला रहे हैं। इसको लेकर मुहीम चलाने वाले लोगों का कहना है कि पर्वत बोल ही नहीं रहे, बल्कि रो रहे हैं और इंसान से गुहार लगा रहे हैं हमें बचा लो। खनन, अवैध निर्माण और अंधाधुंध विकास ने अरावली को गहरे जख्म दिए हैं। यही वजह है कि आज Save Aravalli, Save Future, अरावली नहीं तो पानी नहीं और रेगिस्तान रोको, अरावली बचाओ जैसे नारे सड़कों से सोशल मीडिया तक गूंज रहे हैं। ये सिर्फ स्लोगन नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों और सैकड़ों जीव-जंतुओं की आवाज़ हैं, जिनका जीवन हवा, पानी और हरियाली के लिए अरावली पर निर्भर है।   अरावली पर्वतमाला चर्चा में क्यों है? ‘ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ अरावली’ के नाम से जानी जाने वाली यह पर्वतमाला दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इसकी कानूनी व्याख्या को लेकर बहस छेड़ दी है। फैसले के अनुसार अब केवल 100 मीटर से अधिक ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली के अंतर्गत माना जाएगा। इसका अर्थ यह है कि पहले जो छोटी पहाड़ियां और जंगल इस श्रेणी में आते थे, वे अब इससे बाहर हो सकते हैं। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जमीन का वर्गीकरण केवल ऊंचाई के आधार पर नहीं, बल्कि रिकॉर्ड, अधिसूचना और जमीनी स्थिति को देखकर तय किया जाएगा। अरावली को लेकर विवाद क्या है? विवाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर नहीं, बल्कि उसके संभावित उपयोग को लेकर है। अदालत का आदेश कानूनी स्पष्टता देता है, लेकिन इसके अमल की जिम्मेदारी अब राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन पर है। इस फैसले से जमीन की व्याख्या करने की ताकत राज्यों के हाथ में आ गई है। आशंका यह है कि जिन क्षेत्रों को पहले जंगल जैसा माना जाता था, उन्हें अब राजस्व भूमि या गैर-वन क्षेत्र घोषित किया जा सकता है। अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकारें रिकॉर्ड तय करने में कितनी पारदर्शिता और पर्यावरणीय सख्ती अपनाती हैं। अरावली कहां-कहां फैली है? अरावली पर्वतमाला पश्चिमी भारत की एक प्राचीन श्रृंखला है, जो गुजरात के कच्छ से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है। दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में इसकी लंबाई लगभग 800 किलोमीटर है। यह दो अरब वर्ष से भी अधिक पुरानी मानी जाती है और आज भी कई राज्यों के लिए जीवनरेखा बनी हुई है। क्या अरावली में वन्य जीव भी रहते हैं? अरावली जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र है। यहां भेड़िया, बंगाल लोमड़ी, कैराकल, धारीदार लकड़बग्घा, सियार सहित कई दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियां पाई जाती हैं। ये पहाड़ियां न केवल इन जीवों का प्राकृतिक आवास हैं, बल्कि भूजल संरक्षण, वायु शुद्धिकरण और स्थानीय जलवायु संतुलन में भी अहम भूमिका निभाती हैं। दिल्ली-NCR के लिए अरावली क्यों जरूरी है? अरावली भूजल रिचार्ज की प्राकृतिक प्रणाली की तरह काम करती है। शोध के अनुसार, यह हर साल प्रति हेक्टेयर लगभग 20 लाख लीटर भूजल रिचार्ज करने में मदद करती है। इसके अलावा यह थार रेगिस्तान को दिल्ली की ओर बढ़ने से रोकने वाली प्राकृतिक दीवार है। यदि अरावली कमजोर होती है, तो दिल्ली-NCR में पानी की कमी बढ़ेगी, कुएं-तालाब सूखेंगे और वायु प्रदूषण व गर्मी का स्तर और बढ़ जाएगा। यह क्षेत्र का प्राकृतिक डस्ट बैरियर और कूलिंग सिस्टम भी है, जिसके बिना ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ और गंभीर हो सकता है। विशेषज्ञों की राय Green Pencil Foundation के संस्थापक सैंडी खांडा के अनुसार, अगर अरावली को नुकसान पहुंचा तो दिल्ली-NCR का भूजल संकट बेहद गंभीर हो जाएगा। गुरुग्राम, फरीदाबाद और दक्षिण दिल्ली पहले से ही अत्यधिक दोहन झेल रहे हैं। अरावली के खत्म होने से यमुना और अन्य जल स्रोतों पर दबाव और बढ़ेगा। वहीं ‘सेव अरावली ट्रस्ट’ के पदाधिकारी जितेंद्र भड़ाना का कहना है कि नई परिभाषा से अरावली के बड़े हिस्से के नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। स्वच्छ हवा, जल संतुलन और पर्यावरण सुरक्षा के लिए इस फैसले पर पुनर्विचार जरूरी है। दिल्ली का कितना हिस्सा अरावली पर स्थित है? दिल्ली का लगभग 20 से 25 प्रतिशत क्षेत्र अरावली की चट्टानों पर बसा है। दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के महरौली, साकेत, वसंत कुंज और द्वारका के कुछ हिस्से इसी पर्वतमाला का हिस्सा हैं। NCR में गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर और दक्षिण सोनीपत के इलाके भी अरावली से जुड़े हैं। विरोध भी तेज नई परिभाषा को लेकर गुरुग्राम, राजस्थान और उदयपुर में विरोध देखने को मिला है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह बेहद प्राचीन पर्वत श्रृंखला है और इसमें किया गया कोई भी बदलाव भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसी को लेकर गुरुग्राम में मंत्री राव नरबीर सिंह के आवास पर भी प्रदर्शन हुआ।