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SHO भूषण कुमार पर शिकंजा कसने की तैयारी! फिल्लौर पुलिस विभाग में मचा हड़कंप

जालंधर जालंधर में बाल आयोग के चेयरमैन कंवरदीप सिंह ने आज फिल्लौर के पूर्व SHO भूषण कुमार के मामले को लेकर एसएसपी हरविंदर विर्क से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने मीडिया को बताया कि नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में SHO के खिलाफ सभी संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया जा चुका है। कंवरदीप सिंह ने कहा कि इस मामले में पुलिस की देरी को लेकर एसएसपी से बात की गई है। उन्होंने कहा कि पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में पुलिस को अपनी जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता है। चेयरमैन ने थाना इंचार्ज द्वारा पीड़िता के साथ हुई घटना की निंदा की और बताया कि यह मामला उच्च अधिकारियों के ध्यान में लाया गया है। उन्होंने कहा कि जांच में देरी को लेकर बड़ी कार्रवाई की जाएगी, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। कंवरदीप सिंह ने माना कि इस मामले में किसी द्वारा SHO को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिस कारण जांच धीमी चल रही है। चेयरमैन ने कहा कि पुलिस पीड़िता की सुरक्षा करने में नाकाम रही और SHO के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। उन्होंने बताया कि SHO की गिरफ्तारी अभी बाकी है, लेकिन जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा, हालांकि उन्होंने कोई तारीख नहीं बताई। 

सीमा पर संकट! अधूरे पुल के बीच फंसे लोग — गोलियों और लहरों के साए में गुजर रही ज़िंदगी

अखनूर अखनूर विधानसभा क्षेत्र के परगवाल इलाके में पुल निर्माण का मुद्दा एक बार फिर विधानसभा में गूंज उठा है। पाकिस्तान की सीमा से सटे इस क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर पाकिस्तान की सीमा और दूसरी ओर बहती चिनाब नदी इन दोनों के बीच फंसी करीब 25,000 की आबादी को रोजमर्रा की जिंदगी में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी पाकिस्तान की ओर से फायरिंग या सीजफायर उल्लंघन होता है, तो गांव के निवासियों के पास सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं होता। कई बार फायरिंग में ग्रामीण घायल भी हो चुके हैं। इसके साथ ही, चिनाब नदी में बाढ़ आने पर हालात और बिगड़ जाते हैं। पानी घरों में घुस जाता है, रास्ते टूट जाते हैं और लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। गांव के लोगों ने अब सरकार से पुल निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की है, ताकि उन्हें राहत मिल सके और आपात स्थितियों में आवाजाही के लिए एक सुरक्षित मार्ग उपलब्ध हो सके। 

Border पर भारी हलचल: भारत ने शुरू किया विशाल युद्धाभ्यास, थल, जल और वायु सेना साथ में एक्शन में

नई दिल्ली  देश की पश्चिमी सीमाओं के पास तीनों सेनाओं का एक बड़ा संयुक्त अभ्यास शुरू हो चुका है — नाम है ऑपरेशन त्रिशूल। यह अभ्यास 10 नवंबर तक चलेगा और इसमें सेना, नौसेना व वायुसेना की सामूहिक युद्धक क्षमताओं का परखा जाएगा। पिछले कुछ समय में संपन्न ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला मौका है जब भारत ने किसी सामरिक चुनौती के परिदृश्य में हर संभव युद्धक्षेत्र पर अपनी ताकत आजमाने के लिए इतनी व्यापक स्तर पर अभ्यास किया है। राजस्थान व गुजरात के सीमाई इलाकों में चल रहे इस अभ्यास को न केवल प्रशिक्षण का कार्यक्रम माना जा रहा है, बल्कि सीमा सुरक्षा के प्रति निर्णायक संदेश भी बताया जा रहा है – कि यदि कोई विरोधी फिर किसी प्रकार की हिमाकत करता है तो उसका जवाब सीमा पर ही नहीं, बल्कि आवश्यकतानुसार सीमा पार तक भी दिया जा सकता है। किस-किस ने हिस्सेदारी ली है त्रिशूल अभ्यास में तीनों सेनाओं के कुल मिलाकर 25,000 से अधिक जवान तैनात हैं। वायुसेना के राफेल व सुखोई जैसे अग्रिम लड़ाकू विमानों के अलावा ब्रह्मोस व आकाश मिसाइल प्रणालियां – जो पहले ऑपरेशन सिंदूर में अपना प्रदर्शन दे चुकी हैं – भी शामिल हैं। इसके साथ ही युद्धक टैंकों, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स, लड़ाकू हेलिकॉप्टरों, लंबी दूरी मार करने वाली आर्टिलरी प्रणालियों, ड्रोन और नौसेना के युद्धपोत भी अभ्यास का हिस्सा हैं। मल्टी-डोमेन वॉरफेयर – आधुनिक युद्ध की तैयारी त्रिशूल का एक मुख्य उद्देश्य है मल्टी-डोमेन ऑपरेशन का अभ्यास – यानी जमीन, समुद्र और हवा के अलावा साइबर, इलेक्ट्रॉनिक स्पेस और अन्य नए क्षेत्र शामिल कर के इन सभी मोर्चों पर समन्वित कार्रवाई का परिक्षण। आधुनिक युद्ध अब केवल पारंपरिक युद्धभूमि तक सीमित नहीं रहा; अंतरिक्ष व साइबर स्पेस जैसी चुनौतियों को भी एक साथ संभालने की क्षमता विकसित करना इस अभ्यास का अहम हिस्सा है।   कच्छ क्षेत्र पर विशेष नजर अभ्यास का एक विशेष फोकस गुजरात के कच्छ क्षेत्र पर रखा गया है। यह इलाका रणनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है और हाल ही में रक्षा मंत्रियों की चेतावनियों के बीच इसका महत्व और बढ़ गया है। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि पाकिस्तान ने सर क्रीक इलाके में कोई दुस्साहस किया तो उसके जवाब में निर्णायक कार्रवाई की जाएगी – इस संदर्भ में कच्छ का क्षेत्र खास रणनीतिक महत्व रखता है, क्योंकि कराची तक पहुँचने वाले मार्ग से भी यह जुड़ा हुआ है।

Black Clothes Ban: सरकार के आदेश से दुकानों में छाई हलचल, जानिए पूरा मामला

थाईलैंड क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी देश में एक साथ लोग इतने काले कपड़े खरीदने लगे कि काले रंग के कपड़ों की किल्लत पड़ जाए? थाईलैंड में इन दिनों कुछ ऐसा ही हो रहा है। देश में काले कपड़ों की अचानक कमी हो गई है। हालात यह हैं कि दुकानों में कपड़ों के स्टॉक्स खत्म हो गए हैं। लेकिन इस आखिर थाईलैंड के लोग एक साथ इतने काले कपड़े क्यों खरीद रहे हैं? दरअसल देश में हुई काले कपड़े की कमी का कारण थाईलैंड की राजमाता, रानी सिरीकित, की मृत्यु है। बीते सप्ताह रानी सिरीकित के निधन के बाद देशभर में शोक मनाया जा रहा है। 25 अक्टूबर को 93 वर्ष की आयु में उनके निधन के बाद थाई सरकार ने देश में 30 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। वहीं आधिकारिक तौर पर एक साल तक शोक मनाया जाएगा। इस अवधि के दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को एक वर्ष तक काले शोक वस्त्र पहनने होंगे। 90 दिनों तक काले कपड़े पहनने की सलाह वहीं राष्ट्रीय शोक के बीच आम जनता को 90 दिनों तक काले, सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। इस बीच थाईलैंड में काले कपड़ों की मांग इतनी बढ़ गई है कि दुकानों में स्टॉक खत्म हो रहा है। हालांकि थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह एक अनुरोध है और कोई कानूनी आदेश नहीं है। यानी काले कपड़े न पहनने पर किसी को सजा नहीं दी जाएगी। हालांकि लोगों से इस निर्देश का पालन करने की अपेक्षा की गई है। थाईलैंड में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब काले कपड़ों की कमी हो गई है। इससे पहले 2016 में राजा भूमिबोल के निधन के समय भी देश में काले कपड़ों की मांग अचानक बढ़ गई थी। कौन थीं थाईलैंड की राजमाता रानी सिरीकित? रानी सिरीकित थाईलैंड की पूर्व रानी और वर्तमान राजा महा वजीरालोंगकोर्न की मां थीं। सिरिकित का जन्म 12 अगस्त 1932 को बैंकॉक में हुआ था। वह 1950 से 2016 तक थाईलैंड की महारानी रहीं। थाई संस्कृति को बढ़ावा देने में उनके व्यापक प्रयासों के कारण उन्हें 'राष्ट्रमाता' की उपाधि मिली थी। जानकारी के मुताबिक सिरिकित को 2012 में स्ट्रोक हुआ था, जिसके बाद बिगड़ती सेहत के कारण वह सार्वजनिक कार्यक्रमों से अक्सर दूर रहती थीं। इससे पहले उनके पति महाराजा भूमिबोल अदुल्यादेज का अक्टूबर 2016 में निधन हो गया था।

हरदीप सिंह पुरी ने 1984 दंगों की याद में कहा — आज भी दिल दहल जाता है

नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करके कहा कि वे उन दिनों को याद कर अब भी सिहर उठते हैं, जब निर्दोष सिख पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की निर्मम हत्या की गई और उनकी संपत्तियों व पूजा स्थलों को लूटा गया। पुरी ने कहा कि दंगे को कांग्रेस नेताओं और उनके सहयोगियों की ओर से निर्देशित हिंसक भीड़ ने अंजाम दिया, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या का बदला लेने के नाम पर शुरू हुआ।   हरदीप सिंह पुरी ने पोस्ट में लिखा, 'पुलिस को मूक दर्शक बनने के लिए मजबूर किया गया, जबकि सिखों को उनके घरों, वाहनों और गुरुद्वारों से खींचकर जिंदा जलाया जा रहा था। राज्य मशीनरी पूरी तरह उलट-पुलट हो गई थी, जहां रक्षक ही अपराधी बन गए थे।' उन्होंने आरोप लगाया कि सिखों के घरों और संपत्तियों की पहचान के लिए मतदाता सूचियों का इस्तेमाल किया गया। कई दिनों तक भीड़ को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया। राजीव गांधी के बयान का भी जिक्र भाजपा नेता ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने बयान 'जब एक बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है' से सिखों की हत्या को खुला समर्थन दिया। हरदीप पुरी ने आगे कहा कि कांग्रेस नेता गुरुद्वारों के बाहर भीड़ का नेतृत्व करते नजर आ रहे थे, जबकि पुलिस चुपचाप तमाशा देखती रही। कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्थाएं अपनी अंतरात्मा को त्यागकर इन नेताओं को खुली छूट दे रही थीं। यह बयान 1984 के दंगों की बरसी पर आया है, जो इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे और जिसमें हजारों सिखों की जान गई थी।

अमेरिका में फिर होंगे परमाणु परीक्षण! ट्रंप ने 33 साल बाद दी मंजूरी, रूस-चीन पर साधा निशाना

वाशिंगटन  दुनिया फिर से न्यूक्लियर डर के साये में आ गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा कदम उठा दिया है जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई. उन्होंने 33 साल बाद फिर से अमेरिका में परमाणु हथियारों के परीक्षण शुरू करने का आदेश दे दिया है. यह ऐलान उन्होंने किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं, बल्कि अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर किया वो भी उस वक्त जब वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए जा रहे थे. ट्रंप का ट्रुथ सोशल पोस्ट- ‘अब बराबरी जरूरी है’ ट्रंप ने अपने Marine One हेलिकॉप्टर से उड़ान के दौरान पोस्ट किया कि  दूसरे देशों के परीक्षण कार्यक्रमों को देखते हुए मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि वे हमारे परमाणु हथियारों का परीक्षण तुरंत शुरू करें. यह प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी. उन्होंने लिखा कि रूस दूसरे नंबर पर है और चीन तीसरे पर, लेकिन चीन पांच साल में बराबरी कर लेगा. यानी, ट्रंप का कहना साफ था कि अगर दूसरे देश परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, तो अमेरिका क्यों पीछे रहे? ‘दूसरे कर रहे हैं तो हम क्यों नहीं?’- ट्रंप का तर्क वॉशिंगटन लौटते समय ट्रंप ने कहा कि अगर रूस और चीन परीक्षण कर रहे हैं, तो अमेरिका को भी करना चाहिए. उनका कहना है कि दूसरे देश जब टेस्ट कर रहे हैं, तो हमें भी करना चाहिए. इससे हम अपने विरोधी देशों के बराबर रहेंगे. उन्होंने कहा कि टेस्ट साइट बाद में तय की जाएगी, लेकिन यह भी जोड़ा कि वे अब भी परमाणु निरस्त्रीकरण (denuclearisation) चाहते हैं. मैं चाहूंगा कि दुनिया परमाणु हथियारों से मुक्त हो, लेकिन जब तक दूसरे नहीं रुकते, हम भी नहीं रुकेंगे. हालांकि, यह साफ नहीं है कि ट्रंप असली परमाणु विस्फोट की बात कर रहे हैं या परमाणु मिसाइलों की उड़ान जांच (flight testing) की. चीन-रूस की चालों के जवाब में ट्रंप का न्यूक्लियर कदम ट्रंप का यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब रूस और चीन दोनों अपने परमाणु कार्यक्रमों में तेजी से निवेश कर रहे हैं. चीन ने पिछले दस सालों में अपनी परमाणु ताकत दोगुनी कर ली है. 2020 में 300 हथियार थे, जो 2025 में बढ़कर करीब 600 हो गए. अमेरिकी अधिकारियों का अनुमान है कि 2030 तक चीन के पास 1,000 से ज्यादा परमाणु हथियार होंगे. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की रिपोर्ट कहती है कि हाल ही में चीन की विक्ट्री डे परेड में ऐसे पांच हथियार दिखाए गए जो अमेरिका तक पहुंच सकते हैं. वहीं रूस ने हाल ही में दावा किया है कि उसने Poseidon नाम की परमाणु-चालित टॉरपीडो और Burevestnik नाम की क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका परीक्षण करेगा, तो रूस भी करेगा. दुनिया के तीन बड़े न्यूक्लियर खिलाड़ी Arms Control Association के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका के पास 5,225 परमाणु हथियार, रूस के पास 5,580, चीन के पास करीब 600 है. ट्रंप ने कहा, “हमारे स्टॉक बहुत सुरक्षित हैं, लेकिन जब बाकी देश बढ़ रहे हैं तो हमें भी तैयारी रखनी चाहिए.” उन्होंने यह भी बताया कि वे रूस से बातचीत कर रहे हैं और अगर भविष्य में कोई समझौता होता है तो चीन को भी शामिल किया जाएगा. अमेरिका के अंदर विरोध शुरू, कहा – ‘ट्रंप गलतफहमी में हैं’ ट्रंप के इस ऐलान पर अमेरिका में ही तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली. नेवादा की डेमोक्रेट सांसद डीना टाइटस ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि  मैं ऐसा बिल लाने जा रही हूं जो इस परीक्षण को रोक सके. वहीं Arms Control Association के डायरेक्टर डैरिल किम्बल ने कहा कि  ट्रंप गलतफहमी में हैं. 1992 के बाद अब अमेरिका को फिर से परमाणु विस्फोट करने की न तो जरूरत है और न कारण. उन्होंने चेतावनी दी कि यह फैसला दुनिया में परमाणु परीक्षणों की नई दौड़ शुरू कर सकता है और ‘नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी’ (NPT) को तोड़ सकता है. किम्बल का कहना है कि अगर अमेरिका ने कदम बढ़ाया तो रूस और चीन भी अपनी रफ्तार बढ़ा देंगे. परमाणु युग की कहानी  पहला परीक्षण संयुक्त राज्य अमेरिका ने जुलाई 1945 में न्यू मैक्सिको के अलामोगोर्डो में किया था. इसका पहला प्रयोग अगस्त 1945 में हुआ, जब हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराए गए. अमेरिका ने आखिरी परीक्षण 1992 में किया था. रूस ने आखिरी परीक्षण 1990 में किया था. चीन ने आखिरी परीक्षण 1996 में किया था. उत्तर कोरिया ने आखिरी परीक्षण 2017 में किया था. यानी, 1990 के दशक के बाद से लगभग सभी बड़े देश परमाणु विस्फोटक परीक्षण बंद कर चुके हैं, सिर्फ उत्तर कोरिया को छोड़कर.

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग से किसकी सैलरी होगी सबसे पहले बढ़ी?

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग को आखिरकार मंजूरी मिल चुकी है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आयोग के लिए संदर्भ की शर्तों को मंजूरी दे दी है. अब यह नई वेतन संरचना 1 जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद है. इसी बीच आइए जानते हैं कि 8वें वेतन आयोग का सबसे पहले किन सरकारी कर्मचारियों को फायदा होगा. केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सबसे पहले लाभ  आठवें वेतन आयोग का सबसे पहला लाभ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलेगा. इसके लागू होते ही 50 लाख से ज्यादा कार्यरत कर्मचारियों की सैलरी में सीधी वृद्धि देखने को मिलेगी. इनमें भारतीय रेलवे, आयकर, डाक विभाग और सीमा शुल्क जैसे कुछ बड़ी विभागों के कर्मचारी शामिल हैं.  सशस्त्र बल और अर्धसैनिक बल के कर्मचारी शामिल  इसी के साथ भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मचारी भी आठवें वेतन आयोग का लाभ उठा पाएंगे. इसमें सिर्फ अधिकारी और सैनिक ही शामिल नहीं हैं, बल्कि बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आइटीबीपी और एसएसबी जैसे अर्धसैनिक बलों में सेवारत कर्मचारी भी शामिल हैं. आपको बता दें कि केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इन बालों के वेतनमान नए फिटमेंट फैक्टर के मुताबिक एडजेस्ट किए जाएंगे.  केंद्रीय संस्थानों और स्वायत्त निकायों के लिए लाभ  मंत्रालयों और रक्षा बलों के अलावा कई केंद्रीय शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को भी इस नए वेतन ढांचे का फायदा होगा. इसमें आईआईटी, आईआईएम, एआईआईएमएस, यूजीसी, आईसीएआर और सीएसआईआर शामिल हैं. इसी के साथ अलग-अलग सेक्टर में काम करने वाले रिटायर्ड कर्मचारियों को भी आठवें वेतन आयोग का फायदा होगा. इन कर्मचारियों की पेंशन में भी बढ़ोतरी हो सकती है. क्या हो सकता है फिटमेंट फैक्टर  आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.83 और 2.46 के बीच रहने की उम्मीद की जा रही है. यानी कि यदि किसी कर्मचारी का वर्तमान मूल वेतन ₹20000 है और फिटमेंट फैक्टर 2.5 पर सेट है तो नया मूल वेतन 20000×2.5=50000 हो जाएगा. इस वृद्धि के बाद एचआरए और डीए जैसे भत्तों पर भी प्रभाव पड़ेगा. इसके बाद टेक होम वेतन और भी ज्यादा हो जाएगा. हालांकि आपको बता दें कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर और वेतन स्लैब इन्फ्लेशन, जीवन यापन की लागत और सरकारी राजस्व का मूल्यांकन करने के बाद ही आयोग द्वारा तय किए जाएंगे. केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशन भोगियों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा. अनुमानों के मुताबिक कुल वेतन में 30% से 34% तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है.

तनाव बढ़ा: रूस-यूएस परमाणु दांव — क्रूज़ मिसाइल टेस्ट के बाद दोनों देशों के पास कितने परमाणु बॉम्ब हैं?

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को पेंटगन को परमाणु हथियारों का परीक्षण तुरंत शुरू करने का आदेश दिया। ट्रंप के इस बयान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी। इससे पहले रूस ने क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया था। आइए जानते हैं किस देश के पास ज्यादा परमाणु हथियार हैं। इससे पहले रूस ने 26 अक्टूबर को क्रूज मिसाइल के परीक्षण की जानकारी दी थी। रूस के इस कदम के कुछ ही दिनों के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति ने परमाणु हथियारों को परीक्षण का आदेश दे दिया। ट्रंप ने यह दावा भी किया कि परमाणु हथियार के मामले में अमेरिका सबसे आगे है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीनी प्रेसिडेंट से मुलाकात के ठीक पहले परमाणु हथियार के परीक्षण को लेकर यह ऐलान किया। उन्होंने ट्रूथ सोशल पर लिखा, "संयुक्त राज्य अमेरिका के पास किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं। यह सब मेरे पहले कार्यकाल के दौरान ही संभव हो पाया, जिसमें मौजूदा हथियारों का पूर्ण नवीनीकरण और नवीनीकरण भी शामिल है। इसकी प्रचंड विनाशकारी शक्ति के कारण, मुझे ऐसा करना बहुत बुरा लगता था, लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं था।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए आगे लिखा, "रूस दूसरे स्थान पर है और चीन काफी दूर तीसरे स्थान पर है, लेकिन अगले पांच सालों में यह बराबरी पर आ जाएगा। अन्य देशों के परीक्षण कार्यक्रमों के कारण, मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि वह हमारे परमाणु हथियारों का समान आधार पर परीक्षण शुरू करे। यह प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी।  वहीं, रूस ने क्रू मिसाइल परीक्षण की सफलता के बारे में कहा, "हमने परमाणु ऊर्जा से संचालित मिसाइल की कई घंटे लंबी उड़ान संचालित की। इस मिसाइल ने 14 हजार किलोमीटर (8,700 मील) की दूरी तय की, जो कि इसकी अधिकतम सीमा नहीं है।" बता दें कि रूस ने इसकी घोषणा साल 2018 में की थी। वहीं, इसका परीक्षण 21 अक्टूबर को किया गया। परीक्षण के दौरान रूस की ये क्रूज मिसाइल 15 घंटे तक हवा में रही। यूक्रेन के साथ युद्ध के बीच जब नाटो देशों ने रूस पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, तब पुतिन ने साफ शब्दों में कह दिया था कि वह परमाणु हमले के लिए तैयार हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ये दावा कर रहे हैं कि अमेरिका के पास सबसे ज्यादा हथियार हैं, लेकिन आंकड़े कुछ और कह रहे हैं। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट नाम की संस्था के 2022 के आंकड़ों के हिसाब से रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट ने भारत समेत कुल 9 देशों के परमाणु हथियारों की संख्या की लिस्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में जो आंकड़े दिखाए गए हैं, वह 2025 की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक रूस के पास 5, 449 परमाणु हथियार हैं, जबकि नाटो देशों को मिलाकर 5792 परमाणु हथियार हैं। नाटो देशों में अमेरिका के पास 5277, फ्रांस के पास 290, ब्रिटेन के पास 225 परमाणु हथियार हैं। इसके अलावा चीन के पास 350, पाकिस्तान के पास 165, इजरायल के पास 90 और उत्तर कोरिया के पास 20 परमाणु हथियार हैं। बता दें कि यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट की ओर से ये आंकड़े जारी किए गए हैं।

राउज एवेन्यू कोर्ट में नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई स्थगित, नई तारीख 7 नवंबर तय

नई दिल्ली नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई को टाल दिया है। विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। अगली सुनवाई 7 नवंबर को निर्धारित की गई है। कोर्ट ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने की प्रक्रिया में है, जिसमें कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत अन्य को आरोपी बनाया गया है। पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने ईडी से कुछ पहलुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी थी। यह मामला 2012 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया कि कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड अखबार की मूल प्रकाशक कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की संपत्तियों को अनुचित तरीके से हथियाने की साजिश रची। ईडी ने अप्रैल 2025 में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, इंडियन ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन लिमिटेड और डॉटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया। ईडी का दावा है कि यंग इंडियन लिमिटेड (जिसमें सोनिया और राहुल 38-38 प्रतिशत शेयर रखते हैं) ने मात्र 50 लाख रुपए चुकाकर एजेएल की करीब 2,000 करोड़ रुपए की संपत्ति हड़प ली। ईडी के अनुसार, 2008 में बंद हो चुके नेशनल हेराल्ड अखबार की संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए 2010 में 'यंग इंडियन' का गठन किया गया। कांग्रेस ने एजेएल को 90 करोड़ रुपए का ब्याज-मुक्त ऋण दिया, जिसे यंग इंडियन ने 'लोन' के रूप में चुकाया, लेकिन वास्तव में यह संपत्ति हस्तांतरण था। जुलाई महीने में हुई सुनवाई में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी. राजू ने तर्क दिया कि यंग इंडियन 'कठपुतली' कंपनी है और गांधी परिवार के अन्य आरोपी उसके इशारे पर काम करते हैं। ईडी ने कहा कि इस 'फर्जी लेन-देन' से गांधी परिवार को 142 करोड़ रुपए की 'अपराध की आय' प्राप्त हुई, जो मनी लॉन्ड्रिंग का स्पष्ट मामला है।

मौसम का मिजाज बदला: मोंथा तूफान से बढ़ी ठंड, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली  उत्तर भारत में मौसम ने करवट ले ली है। मोंथा तूफान के प्रभाव से यूपी, बिहार, दिल्ली, MP, CG समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना (Weather Update) जताई गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD Rain Alert) ने पूर्वी यूपी और बिहार के कई जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में आए इस तूफान की वजह से उत्तर भारत तक ठंडी हवाएं पहुंच रही हैं। अब धीरे-धीरे सर्दी का असर बढ़ने लगा है और लोगों को गर्म कपड़े निकालने का समय आ गया है।   IMD का इन राज्यों में अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, बिहार के कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। विभाग ने पहले भी तीन दिन के लिए खराब मौसम का अलर्ट जारी किया था। अगले 48 घंटों में तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन बारिश के बाद ठंड में बढ़ोतरी तय है। मोंथा तूफान का असर सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में दिखाई दे रहा है।   दिल्ली में बारिश के आसार दिल्ली में भी 30 अक्टूबर को हल्की बारिश के आसार हैं। 28 अक्टूबर को दिल्ली सरकार ने कृत्रिम बारिश की कोशिश की थी ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब जब मौसम विभाग ने प्राकृतिक बारिश का अनुमान लगाया है, तो राजधानी में वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। मौसम विभाग ने बताया कि 1 नवंबर के बाद दिल्ली में ठंड तेजी से बढ़ेगी। UP में बारिश की संभावना उत्तर प्रदेश में भी 30 और 31 अक्टूबर को हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। पूर्वी यूपी के 17 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। इनमें मऊ, वाराणसी, जौनपुर, प्रयागराज, अयोध्या, बाराबंकी, जालौन, बरेली और रायबरेली जैसे जिले शामिल हैं। इन इलाकों में तेज हवाएं चलने और तापमान में गिरावट की संभावना है।   MP में रेन अलर्ट मध्य प्रदेश में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। बुधवार को प्रदेश के अधिकांश जिलों में बादल छाए रहे और छह जिलों में वर्षा दर्ज की गई। उत्तरी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट आई है। उज्जैन और शिवपुरी में सबसे अधिक तापमान में कमी देखी गई। उज्जैन का अधिकतम तापमान 9.9 डिग्री की गिरावट के साथ 23 डिग्री सेल्सियस और शिवपुरी का 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार रात को कई शहरों में तापमान 21 डिग्री तक पहुंच गया। सुबह से ही तेज ठंडी हवाओं और बादलों ने लोगों को सर्द मौसम का एहसास कराया। दिन का तापमान सामान्य से करीब सात डिग्री सेल्सियस कम रहा। कुल मिलाकर, मोंथा तूफान का असर अब उत्तर भारत में पूरी तरह दिखने लगा है। जहां बारिश से राहत मिलेगी, वहीं आने वाले दिनों में ठंड की शुरुआत और तेज होने की संभावना है। मौसम विभाग ने नागरिकों को सावधानी बरतने और यात्रा से पहले मौसम की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी है।