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नाटो की चिंता बढ़ी: ड्रोन अटैक्स से नहीं निपट पा रहे, रूसी रणनीति ने बढ़ाई हलचल — जानें मजेदार पहलू

वारसॉ बीते सप्ताह पोलैंड के आसमान से रूसी ड्रोन गुजरने पर हड़कंप मच गया था। खबर है कि 19 ड्रोन पोलैंड के आसमान से गुजरे थे, जिनमें से 7 को ही उसकी ओर से इंटरसेप्ट किया जा सका। इसे उसकी एक असफलता के तौर पर देखा जा रहा है। हाल ही में नाटो देशों की एक मीटिंग हुई है, जिसमें ड्रोन हमलों से निपटने में अक्षमता की बात कही गई। गुरुवार को नाटो महासचिव मार्क रुट और यूरोपियन यूनियन के राजदूतों की मीटिंग हुई। इस मीटिंग में मौजूद कई प्रतिनिधियों ने कहा कि ड्रोन हमलों से निपटने के लिए नाटो के सदस्य देशों की तैयारी कमतर है। यह भी चिंता जाहिर की गई कि ड्रोन हमले बेहद कम लागत से होते हैं और उनके जवाब में बड़ी पूंजी खर्च की जा रही है। इस दौरान एक मजेदार तथ्य यह भी पेश किया गया कि रूस की ओर से करीब 11 हजार डॉलर के ड्रोन से ही हमले किए जाते हैं। उनके जवाब में हमारी तरफ से एयर-टू-एयर मार करने वाली 4 लाख डॉलर की मिसाइल चलाई जाती है। यह बेहद खर्चीला और जटिल है। इस संबंध में ऑस्ट्रिया के अखबार कुरियर डेली ने भी महत्वपूर्ण बात अपनी रिपोर्ट में कही है। अखबार लिखता है कि ड्रोन के जवाब में F-35 फाइटर जेट को तैनात किया गया। इसके अलावा इटली के सर्विलांस प्लेन लगे थे। यही नहीं जर्मन पैट्रियाट एयर डिफेंस सिस्टम भी लगा था। इसके बाद भी रूस की ओर से उड़े 19 ड्रोन्स में से 7 को ही इंटरसेप्ट किया जा सका। यही वजह है कि नाटो देशों ने ड्रोन हमलों से निपटने में अपनी असफलता मानी है। पोलैंड की अथॉरिटीज का भी कहना है कि रूस की ओर से भेजे गए ड्रोन्स में से 3 से 4 को ही मार गिराने में सफलता मिली। फिलहाल रूसी ड्रोन्स के कारण नाटो देशों में हलचल की स्थिति है। पौलैंड के आसमान से रूसी ड्रोन गुजरने को संप्रभुता को चैलेंज माना जा रहा है। यहां तक कि पोलैंड ने तो इसी मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मीटिंग बुलाने की भी मांग की है। नाटो के अधिकारियों का कहना है कि हम हर ड्रोन की निगरानी या उसे गिराने के लिए हर बार F-35 जैसे फाइटर जेट भी तैनात नहीं कर सकते। फिलहाल इस पर बात हुई कि ड्रोन से निपटने के कारगर और कम खर्चीले तरीकों को विकसित किया जाए। पोलैंड की मीडिया ने कहा कि उनका देश ड्रोन तकनीक से होने वाले हमलों से निपटने में सक्षम नहीं है। हमें अपनी तकनीक का आधुनिकीकरण करना होगा।

SC का बड़ा फैसला: वक्फ एक्ट पर पूरी रोक नहीं, 5 साल की शर्त खारिज, गैर-मुस्लिम सदस्य होंगे शामिल

नई दिल्ली वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मुस्लिम पक्ष की कुछ दलीलें तो मान ली है, लेकिन पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट बेंच ने साफ किया कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कलेक्टर के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कलैक्टर का फैसला अंतिम फैसला नहीं होगा. इसके साथ ही वक्फ़ संशोधन अधिनियम 2025 की उस प्रावधान पर रोक लगा दी है, जिसमें वक्फ़ बनाने के लिए किसी व्यक्ति का 5 वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी होना आवश्यक बताया गया था. अदालत ने फिलहाल उस प्रावधान पर रोक लगाई है, जिसमें वक्फ बोर्ड का सदस्य बनने के लिए कम से कम 5 साल तक इस्लाम का पालन करने की शर्त रखी गई थी. कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में उचित नियम बनने तक यह प्रावधान लागू नहीं होगा. इसके अलावा, धारा 3(74) से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड के प्रावधान पर भी रोक लगाई गई है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि कार्यपालिका किसी भी व्यक्ति के अधिकार तय नहीं कर सकती. जब तक नामित अधिकारी की जांच पर अंतिम निर्णय न हो और जब तक वक्फ संपत्ति के मालिकाना हक का फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट द्वारा न हो जाए, तब तक वक्फ को उसकी संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामलों का अंतिम निपटारा होने तक किसी तीसरे पक्ष के अधिकार नहीं बनाए जाएंगे. बोर्ड में अधिकतम तीन गैर-मुस्लिम सदस्य ही होंगे वक्फ बोर्ड की संरचना पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि बोर्ड में अधिकतम तीन गैर-मुस्लिम सदस्य ही हो सकते हैं, यानी 11 में से बहुमत मुस्लिम समुदाय से होना चाहिए. साथ ही, जहां तक संभव हो, बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मुस्लिम ही होना चाहिए. अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका यह आदेश वक्फ एक्ट की वैधता पर अंतिम राय नहीं है. अदालत ने साफ किया कि पूरे कानून पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है, लेकिन कुछ प्रावधानों पर अंतरिम सुरक्षा दी जा रही है. कोर्ट ने कहा कि सामान्य तौर पर किसी कानून के पक्ष में संवैधानिक वैधता की धारणा रहती है. पांच साल वाली शर्त खारिज मुख्य आपत्ति धारा 3(r), 3(c), 3(d), 7 और 8 सहित कुछ धाराओं पर थी. इनमें से धारा 3(r) के उस प्रावधान पर कोर्ट ने रोक लगा दी, जिसमें वक्फ बोर्ड का सदस्य बनने के लिए पांच साल तक इस्लाम का पालन करने की शर्त रखी गई थी. अदालत ने कहा कि जब तक सरकार इस पर स्पष्ट नियम नहीं बनाती, तब तक यह प्रावधान लागू नहीं होगा, वरना यह मनमाना साबित हो सकता है. कार्यपालिका नहीं तय कर सकती संपत्ति के अधिकार   अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कलेक्टर या कार्यपालिका को संपत्ति के अधिकार तय करने की अनुमति देना शक्तियों के पृथक्करण (separation of powers) के खिलाफ है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक धारा 3(c) के तहत वक्फ संपत्ति के मालिकाना हक का अंतिम फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट से नहीं हो जाता, तब तक न तो वक्फ को संपत्ति से बेदखल किया जाएगा और न ही राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़ होगी. साथ ही, इस दौरान किसी तीसरे पक्ष के अधिकार भी नहीं बनाए जाएंगे.

मॉनसून ने लिया जल्दी रुख्सत, कई राज्यों में सूखे जैसे हालात का खतरा

नई दिल्ली मॉनसून इस साल समय से पहले देशभर में छाया और अब इसके विदाई भी समय से पहले शुरू कर दी है. मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून 14 सितंबर, 2025 को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापस चला गया है, जबकि इसकी सामान्य तिथि 17 सितंबर है. वहीं, अगले 2-3 दिनों के दौरान राजस्थान के कुछ और हिस्सों तथा पंजाब और गुजरात के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, मॉनसून आमतौर पर 1 जून तक केरल में प्रवेश करता है और 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है. फिर ये 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू कर देता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से वापस चला जाता है. आईएमडी का पूर्वानुमान था कि 15 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. हालांकि ये वापसी 14 सितंबर से ही शुरू हो गई. बता दें कि इस साल मॉनसून ने सामान्य तिथि 8 जुलाई से नौ दिन पहले ही पूरे देश को कवर कर लिया था. 2020 के बाद से इस साल मॉनसून ने सबसे जल्दी पूरे देश को कवर कर लिया था, इससे पहले, 2020 में 26 जून तक ऐसा हुआ था. वहीं, इस बार केरल से मॉनसून का आगमन भी 24 मई को हुआ था, जो 2009 के बाद से भारतीय मुख्य भूमि पर इसका सबसे पहला आगमन था, जब यह 23 मई को मॉनसून पहुंचा था. देश में मॉनसून सीजन में अब तक 836.2 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश 778.6 मिमी होती है, जो 7 प्रतिशत अधिक है. मई में आईएमडी ने पूर्वानुमान लगाया था कि भारत में जून-सितंबर मॉनसून सीजन के दौरान 87 सेमी की दीर्घकालिक औसत वर्षा का 106 प्रतिशत प्राप्त होने की संभावना है. इस 50-वर्षीय औसत के 96 से 104 प्रतिशत के बीच वर्षा को 'सामान्य' माना जाता है. कैसे तय होती है मॉनसून की वापसी? दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी कुछ मानदंडों पर तय होती है.     पश्चिमी राजस्थान के ऊपर समुद्र तल से 1.5 किमी ऊपर एक प्रतिचक्रवाती परिसंचरण का विकास.     लगातार 5 दिनों के दौरान क्षेत्र में शून्य बारिश.     मध्य क्षोभमंडल तक के क्षेत्र में वायुमंडल की नमी की मात्रा में कमी. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी रेखा 30.5°N /73.5°E, श्री गंगानगर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर और 25.5°N /70°E से होकर गुजरती है. मॉनसून भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद अहम है, जो लगभग 42 प्रतिशत आबादी की आजीविका का आधार है और सकल घरेलू उत्पाद में 18.2 प्रतिशत का योगदान देता है. यह पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक जलाशयों को पुनः भरने में भी खास भूमिका निभाता है.

धरती कांपी, मगर हिम्मत न डगमगाई: नर्सों ने नवजातों को सीने से लगाकर बचाई जान

नगांव असम में  शाम 4 बजकर 40 मिनट पर 5.9 रिएक्टर स्किल का भूकंप आया था. भूकंप के दौरान यहां नगांव जिले में अपनी जान की परवाह किए बगैर आदित्य नर्सिंग होम की नर्सें एनआईएसयू (NICU) में बच्चों की रक्षा करती नजर आईं. यह वीडियो सीसीटीवी में कैद हो गया. इस वीडियो की लोग जमकर सराहना कर रहे हैं. जान की परवाह किए बच्चों की रक्षा करती दिखीं नर्सें 5.9 रिएक्टर स्किल के भूकंप से जब सभी लोग घबराहट के मारे अपनी-अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ रहे थे. ठीक उसी वक्त एक ऐसा नजारा सीसीटीवी में कैद हुआ, जिससे यह साबित होता है कि मानवता अभी भी जीवित है. भूकंप के दौरान असम के नौगांव जिले के नौगांव स्थित आदित्य नर्सिंग होम में दो नर्सों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर NISU केयर वार्ड में मासूमों की रक्षा करतीं दिखीं. हॉस्पिटल मैनेजमेंट की तरफ से यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है. सीसीटीवी वायरल होने के बाद से ही लोगों में उन दोनों नर्सों के लिए सम्मान बढ़ गया. साथ ही लोगों ने दोनों नर्सों को पुरस्कार भी देने की घोषणा कर डाली.  उदलगुरी था भूकंप का केंद्र अधिकारियों ने बताया कि रविवार को पूर्वोत्तर क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया. भूकंप से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है. अधिकारियों ने बताया कि शाम 4.41 बजे आए भूकंप का केंद्र उदलगुरी ज़िले में था. भूकंप की गहराई 5 किलोमीटर थी. भूकंप के दौरान गुवाहाटी में दहशत में लोग अपने घरों से बाहर निकलते देखे गए थे. वहीं, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में भी लोगों ने झटके महसूस किए. अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में भी लोग दहशत में अपने घरों और दुकानों से बाहर निकलते देखे गए.

अर्धकुंभ 2027 की भव्य तैयारी शुरू, अखाड़ों ने किया शाही स्नानों का शेड्यूल जारी

हरिद्वार साल 2027 में हरिद्वार में लगने वाला अर्धकुंभ मेला इतिहास रचने जा रहा है। यह आयोजन केवल तीर्थयात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि साधु-संन्यासियों और अखाड़ों के लिए भी विशेष होगा। पहली बार ऐसा होगा जब अर्धकुंभ में संतों और अखाड़ों के द्वारा तीन भव्य शाही स्नान किए जाएंगे। अखाड़ों की भागीदारी से बदलेगा मेला का स्वरूप अब तक हरिद्वार में आयोजित अर्धकुंभ मेलों में मुख्य रूप से आम श्रद्धालु ही स्नान करते आए थे, क्योंकि उसी वर्ष नासिक या उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होता था, जहां अखाड़ों की भागीदारी होती थी। लेकिन इस बार समय में अंतर होने के कारण साधु-संतों की उपस्थिति हरिद्वार में भी देखने को मिलेगी। हरिद्वार में दिखेगा अमृत स्नान का दिव्य दृश्य हरिद्वार में होने वाला यह अर्धकुंभ इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस बार साधु-संन्यासियों के शाही स्नान के भव्य दृश्य भी श्रद्धालुओं को देखने को मिलेंगे। अमूमन अर्धकुंभ के दौरान अखाड़े हरिद्वार की बजाय सिंहस्थ पर्व में हिस्सा लेते हैं, लेकिन 2027 में नासिक का सिंहस्थ जुलाई-अगस्त में आयोजित होगा, जिससे अखाड़ों को दोनों मेलों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। सरकारी तैयारियों का इंतजार फिलहाल सरकार की ओर से शाही स्नानों की आधिकारिक घोषणा बाकी है। जैसे ही तिथियों की औपचारिक पुष्टि होगी, स्नान व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

तीर्थयात्रियों के लिए बड़ा फैसला: बद्रीनाथ मंदिर में अब नहीं होगी भिक्षावृत्ति

चमोली उत्तराखंड के बद्रीनाथ मन्दिर परिसर में भिक्षा वृत्ति पर रोक लगाई गई है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मन्दिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी और शासन की ओर से कार्य पालक नियुक्त विजय प्रसाद थपलियाल ने बदरीनाथ मन्दिर एवं मन्दिर परिसर बाह्य सिंहद्वार परिसर, मंदिर मार्ग, दर्शन पंक्ति, अलकनंदा घाट, तप्तकुंड क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि मन्दिर परिसर में कतिपय साधु भेषधारी तीर्थयात्रियों से दान-दक्षिणा ले रहे हैं तथा भिक्षा मांग रहे है जिससे मन्दिर समिति की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने मंदिर परिसर में भिक्षा वृत्ति पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिये।  अधिकारियों कर्मचारियों की समिति का किया गठन इस संबंध में कार्यपालक मजिस्ट्रेट के निर्देश पर बीकेटीसी अधिकारियों कर्मचारियों की समिति का गठन किया गया है जो कि इस बावत कारर्वाई करेगी। इस बीच श्री थपलियाल ने रविवार को बदरीनाथ मन्दिर एवं मन्दिर परिसर के बाह्य क्षेत्र का भी स्थलीय निरीक्षण किया । उन्होंने बताया कि परिसर के बाहर प्रसाद की दुकानों के नाम पर अतिक्रमण किया जा रहा है जिसे हटाया जाना आवश्यक है। इस कारर्वाई समिति में मन्दिर अधिकारी-राजेन्द्र सिंह चौहान,अध्यक्ष ,प्रधान सहायक- राजेन्द्र सेमवाल तथा मुख्य सहायक जगमोहन बर्त्वाल को सदस्य नामित किया गया है।  साधू वेश में मन्दिर परिसर में अवैध रूप से भिक्षावृत्ति कर लोग  बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डाक्टर हरीश गौड़ ने जानकारी देते हुए बताया मुख्य कार्याधिकारी द्वारा गठित समिति समय-समय पर मन्दिर एवं मन्दिर परिसर का निरीक्षण कर ऐसे लोग जो साधू वेश में मन्दिर परिसर में अवैध रूप से भिक्षावृत्ति कर रहे हैं। उन्हें मंदिर के दर्शन उपरान्त मन्दिर परिसर से बाहर करना सुनिश्चित करेगी। निरीक्षण के अवसर पर प्रभारी अधिकारी विपिन तिवारी, थाना प्रभारी नवनीत भंडारी, अवर अभियंता गिरीश रावत सहित अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे। उन्होंने बताया भिक्षावृत्ति नियंत्रण तथा अतिक्रमण हटाने हेतु बनी कार्रवाई समितियां बदरीनाथ मन्दिर परिसर में भिक्षावृति नियंत्रण तथा मंदिर बाह्य क्षेत्र सहित मंदिर मार्ग से अतिक्रमण को हटाने संबंधित आख्या से कार्यपालक मजिस्ट्रेट/ बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी को अवगत करायेगी।  

इंदिरा गांधी के बाद पहली बार फोर्ट विलियम जाएंगे पीएम मोदी, 15 सितंबर को होगा बड़ा सैन्य सम्मेलन

कोलकाता  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाद फोर्ट विलियम (अब विजय दुर्ग) का दौरा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे. वह 15 से 17 सितंबर तक फोर्ट विलियम में आयोजित होने वाले एक हाई-प्रोफाइल त्रि-सेवा संयुक्त कमांडर सम्मेलन में भाग लेंगे. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के साथ एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा सचिव मौजूद रहेंगे. इस सम्मेलन के मद्देनजर कोलकाता को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये हैं. प्रधानमंत्री मोदी रविवार रात कोलकाता पहुंचेंगे और राजभवन में रुकेंगे. सोमवार, 15 सितंबर की सुबह प्रधानमंत्री मोदी इस उच्च स्तरीय रक्षा सम्मेलन में भाग लेंगे. कोलकाता में क्यों हो रहा है सम्मेलन? ये हैं वजह लेकिन यह सम्मेलन कोलकाता ही क्यों हो रहा है? क्या यह 2026 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हो रहा है? या पश्चिम बंगाल की वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति के मद्देनजर यहां सम्मेलन हो रहा है? पश्चिम बंगाल और सिक्किम की चार अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं हैं: 1. पूर्व में बांग्लादेश, 2. भूटान (उत्तर पूर्व), 3. चीन (उत्तर), 4. नेपाल (उत्तर पश्चिम). यदि 7 सिस्टर्स स्टेट को ध्यान में रखा जाए, तो पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों की सीमा से लगे पड़ोसी देश हैं: 1. चीन, 2. म्यांमार, 3. बांग्लादेश, 4. भूटान और 5. नेपाल. 1) मणिपुर में अशांति, 2) म्यांमार में उग्रवाद, 3) बांग्लादेश में विद्रोह, 4) नेपाल में विद्रोह, 5) म्यांमार सीमा पर घुसपैठ, 6) बांग्लादेश और नेपाल सीमा से घुसपैठ, 7) भूटान के साथ संबंध, इस त्रि-सेवा सम्मेलन के प्रमुख मुद्दे रहे होंगे, जो फोर्ट विलियम में आयोजित किया जाएगा. क्यों खास हैसंयुक्त कमांडर सम्मेलन? पूर्वी कमान के सूत्र और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश की ओर भारतीय सीमा के पास चीन ने जो कुछ विकसित किया है, उसे देखते हुए प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पूर्वी कमान में युद्ध की तैयारियों की वर्तमान आवश्यकताओं को समझने की कोशिश करेंगे. पूर्वी कमान में भारत की चीन के साथ सबसे ऊंची सीमा सिक्किम रामगढ़ में 19100 फीट की ऊंचाई पर, भूटान और चीन के साथ डोकलाम सीमा त्रि-जंक्शन 13700 फीट की ऊंचाई पर, चीन के साथ अरुणाचल सीमा (किबितु) 4300 फीट की ऊंचाई पर और समुद्र तल पर बांग्लादेश के साथ भी लगती है. यह भौगोलिक विविधता सेना पर रसद, गोला-बारूद और गोला-बारूद में विविधता बनाए रखने का दबाव डालती है.प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित यह त्रि-सेवा सम्मेलन भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा.

भूकंप से सिलीगुड़ी में हड़कंप, घरों और दफ्तरों से उमड़ी लोगों की भीड़

नई दिल्ली सिलीगुड़ी में शाम 4.41 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसका केंद्र असम के धेकियाजुली से 16 किलोमीटर दूर था। वहां शाम 4:41 बजे 5.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ। इस भूकंप का असर भारत के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार और चीन तक महसूस किया गया। झटकों से लोग दहशत में घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। बता दें कि 2 सितंबर को भी असम के सोनितपुर में 3.5 तीव्रता का भूकंप आया था। इस खबर को लगातार अपडेट किया जा रहा है। हम अपने सभी पाठकों को पल-पल की खबरों से अपडेट करते हैं। हम लेटेस्ट और ब्रेकिंग न्यूज को तुरंत ही आप तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रारंभिक रूप से प्राप्त जानकारी के माध्यम से हम इस समाचार को निरंतर अपडेट कर रहे हैं। ताजा ब्रेकिंग न्यूज़ और अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए जागरण के साथ।

नशे के कारोबार पर DRI का शिकंजा, मास्टरमाइंड समेत 10 गिरफ्तार, 26 करोड़ की खेप बरामद

कोलकाता राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की। डीआरआई की कोलकाता क्षेत्रीय इकाई ने 12 सितंबर को चलाए गए बहुआयामी अभियान में लगभग 26 करोड़ रुपए के मादक पदार्थ जब्त किए और रैकेट के मास्टरमाइंड सहित कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार, सुबह के शुरुआती घंटों में तीन अलग-अलग स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। इनमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय (एनएससीबीआई) हवाई अड्डा और जादवपुर के बिजॉयगढ़ इलाके के दो आवासीय परिसर शामिल थे। रैकेट के मास्टरमाइंड के आवास से भारी मात्रा में हाइड्रोपोनिक वीड, कैनाबिस और कोकीन बरामद किया गया है। मास्टरमाइंड द्वारा किराए पर लिए गए और संचालित एक अन्य आवास से, 'वितरण के लिए तैयार' रूप में भारी मात्रा में गांजा बरामद किया गया। कोलकाता में ऐसी नशीली दवाओं की बिक्री और स्थानीय वितरण के लिए काम कर रहे मास्टरमाइंड के चार सहयोगियों को भी उसी स्थान से गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने उक्त स्थानों से नकदी भी जब्त की, जो नशीले पदार्थों की बिक्री से प्राप्त हुई थी। सिंडिकेट का एक अन्य सदस्य, जो विदेशों में आपूर्तिकर्ताओं की व्यवस्था करने में शामिल है, को भी उसी दिन गिरफ्तार किया गया। इस बीच, दमदम स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय (एनएससीबीआई) हवाई अड्डे पर एक अलग अभियान में, बैंकॉक से आ रहे उक्त गिरोह से जुड़े चार मालवाहकों (जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं) को पकड़ा गया है। उनके पास से भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भी बरामद किए गए। कुल मिलाकर अभियान में कुल 32.466 किलोग्राम गांजा, 22.027 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड, 345 ग्राम कोकीन और नकदी जब्त की गई है। मास्टरमाइंड, विदेशी वाहक, खुदरा वितरक और बिचौलियों सहित दस लोगों (सभी भारतीय नागरिक) को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत के लिए अदालत में पेश किया गया है। सभी जब्ती और गिरफ्तारियाँ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 की संबंधित धाराओं के तहत की गई हैं। आगे की जांच जारी है।

अमित शाह बोले – राजभाषा सम्मेलन देश में नई प्रेरणा और उत्साह का संचार कर रहा

गांधीनगर हिंदी दिवस के अवसर पर गुजरात की राजधानी गांधीनगर में 5वां अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिरकत की और देशभर से आए राजभाषा और भारतीय भाषाओं के विद्वानों का स्वागत किया। अपने संबोधन में केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि आज का दिन मेरे लिए विशेष अवसर है, क्योंकि पूरे देश से राजभाषा और भारतीय भाषा के उत्साही लोग एकत्रित हुए हैं। यह मेरा संसदीय क्षेत्र भी है और मैं आप सभी का हार्दिक स्वागत करता हूं। उन्होंने सम्मेलन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह समारोह पहले हमेशा दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया जाता था, लेकिन पिछले पांच वर्षों से इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित करने की परंपरा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि 2021 के बाद 5वां अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन दिल्ली के बाहर हो रहा है। पिछले चार सम्मेलनों के अपने अनुभव से हम जानते हैं कि यह नए दृष्टिकोण, ऊर्जा और प्रेरणा लेकर आता है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इस बदलाव से हमें राजभाषा और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच संवादिता और आदान-प्रदान का शानदार अवसर मिला है। उन्होंने गुजरात की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भले ही यह हिंदी भाषी राज्य नहीं है, लेकिन यहां हिंदी को हमेशा से अपनाने और आगे बढ़ाने की परंपरा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसी महान विभूतियों ने न केवल हिंदी को स्वीकार किया, बल्कि इसके प्रचार-प्रसार में भी अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि जब सारा कामकाज जनता की भाषा में होता है तो जनता के साथ संपर्क अपने आप बढ़ जाता है। सारथी एक अनुवाद की प्रणाली है। यह हिंदी से भारत की सभी भाषाओं में सरलता से अनुवाद करने की व्यवस्था है। मैं गर्व के साथ देशभर की सभी सरकारों को कहना चाहता हूं कि आप अपनी भाषा में हमें पत्र दीजिए और गृह मंत्रालय आपकी ही भाषा में जवाब देगा, हम यह व्यवस्था कर चुके हैं। आने वाले दिनों में हम इसे और समृद्ध करेंगे। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि आज हिंदी दिवस के अवसर पर, मैं आप सभी का हार्दिक अभिनंदन करता हूं और गुजरात की पावन धरती पर आपका स्वागत करता हूं। आज गांधीनगर में 5वां अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन आयोजित हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राजभाषा विभाग ने डिजिटल हिंदी शब्दकोश 'सिंधु' जैसे प्रयास किए हैं। इन प्रयासों के माध्यम से शब्दकोश 'सिंधु' में 7 लाख से अधिक शब्द शामिल किए गए हैं।