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आजादी के 75 साल बाद सुदूर गांव को मिली बस सेवा, गढ़चिरौली में ऐतिहासिक पहल

 गढ़चिरौली  कभी नक्सलियों का गढ़ रहे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के एक सुदूर गांव में आजादी के बाद अब पहली बार सरकारी बस सेवा शुरू हुई है। पुलिस ने यह जानकारी दी। बुधवार को जब पहली बस मरकनार गांव पहुंची तो स्थानीय लोगों ने राष्ट्रध्वज लहराकर उसका स्वागत किया। पुलिस ने बयान जारी कर बताया कि इस सेवा से मरकनार और आसपास के गांवों के छात्रों समेत लगभग 1,200 निवासियों को लाभ होगा। पुलिस की ओर से दावा किया गया है कि गढ़चिरौली पुलिस के प्रयासों के बाद आजादी के बाद पहली बार सुदूर मरकनार गांव से अहेरी तक बस सेवा शुरू की गई है। आदिवासी आबादी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए जाना जाने वाला गढ़चिरौली जिला खराब कनेक्टिविटी की समस्या से जूझ रहा था। मरकनार गांव गढ़चिरौली जिले के भामरागढ़ उपखंड में अबूझमाड़ की तलहटी में स्थित है, जो नक्सलियों का गढ़ था। बुधवार को ग्रामीणों ने पहली बार अपने इलाके में बस सेवा देखी। गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल की पहल पर शुरू की गई राज्य परिवहन सेवा का स्वागत करने के लिए ग्रामीण तिरंगा लेकर एकत्रित हुए। इस सेवा से मरकनार, मुरुंभुशी, फुलनार, कोपरशी, पोयारकोठी और गुंडुरवाही जैसे गांवों के 1,200 से ज्यादा निवासियों, खासकर मरीजों, छात्रों और अन्य यात्रियों को लाभ होगा। गढ़चिरौली पुलिस ने दूरदराज के इलाकों में परिवहन को आसान बनाने के लिए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू की हैं। कहा गया है कि एक जनवरी 2025 को गट्टा-गरदेवड़ा-वांगेतुरी मार्ग पर और 27 अप्रैल को कटेझर से गढ़चिरौली के लिए बस सेवा शुरू की गई। पिछले पांच वर्षों में, गढ़चिरौली पुलिस के संरक्षण में जिले में 420.95 किलोमीटर लंबी 20 सड़कें और 60 पुल बनाए गए हैं। बता दें कि होम मिनिस्टर अमित शाह ने 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करने का टारगेट रखा है।

अमरनाथ यात्रा पर बारिश का असर: एक दिन के लिए स्थगित, 18 जुलाई से फिर शुरू होने की संभावना

श्रीनगर  जम्मू और कश्मीर सूचना विभाग ने बताया है कि पिछले दो दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण अमरनाथ यात्रा गुरुवार को पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों से रोक दी गई है। यात्रा मार्गों पर बारिश से हुए नुकसान की तुरंत मरम्मत का काम चल रहा है। जम्मू और कश्मीर जनसंपर्क विभाग के एक बयान के अनुसार, "पिछले दो दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण दोनों रास्तों पर ट्रैक्स की मरम्मत का काम बहुत ज़रूरी हो गया है।" सीमा सड़क संगठन ने 18.07.2025 को दोनों आधार शिविरों से यात्रा फिर से शुरू होने से पहले काम पूरा करने के लिए अपने कर्मचारियों और मशीनों को बड़ी संख्या में तैनात किया है। कश्मीर के संभागीय आयुक्त विजय कुमार बिधूड़ी ने भी यात्रा के स्थगित होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मौसम की स्थिति ठीक होने पर 18 जुलाई को तीर्थयात्रा फिर से शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, "पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश के कारण ट्रैक्स पर तुरंत मरम्मत और रखरखाव का काम करना ज़रूरी है। इसलिए, यह फैसला लिया गया है कि आज दोनों आधार शिविरों से पवित्र गुफा की ओर किसी भी यात्री को जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।" बिधूड़ी ने आगे बताया कि जो यात्री पिछली रात पंजतरणी शिविर में रुके थे, उन्हें BRO और पर्वतीय बचाव दलों की मदद से बालटाल जाने की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिन के मौसम को देखते हुए, कल यात्रा फिर से शुरू होने की पूरी संभावना है। यात्रा के आंकड़े और आगे की जानकारी 2025 की अमरनाथ यात्रा के दौरान अब तक 2.47 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्री 3,880 मीटर ऊंची पवित्र गुफा में दर्शन कर चुके हैं। इस साल यह पहला मौका है जब जम्मू से तीर्थयात्रा को एक दिन के लिए रोका गया है। आपको बता दें, 3 जुलाई को तीर्थयात्रा शुरू होने के बाद से, 2.35 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। अब तक 4 लाख से ज़्यादा श्रद्धालुओं ने इस तीर्थयात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। यह 38 दिनों तक चलने वाली तीर्थयात्रा 9 अगस्त को समाप्त होगी।    

UIDAI की सख्ती: आधार सक्रिय रखना है तो तुरंत कर लें यह जरूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली आधार कार्ड (Aadhaar Card) आज के समय में सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट है, जो न सिर्फ आपकी पहचान और नागरिकता का प्रमाण है, बल्कि स्कूल में एडमिशन से लेकर सरकारी योजनाओं के लाभ लेने के लिए भी जरूरी होता है. ऐसे में इसमें आपकी जानकारी का अपडेटेड होना बेहद जरूरी है और इसे लेकर UIDAI ने अलर्ट किया है. दरअसल, यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने ये अलर्ट बच्चों के आधार कार्ड यानी बाल आधार (Baal Aadhaar) के लिए किया है. इसमें कहा गया है कि 5 से 7 साल के बच्चों के आधार के आधार कार्ड का बायोमैट्रिक अपडेट जरूर कराएं, ये काम अभी बिल्कुल फ्री में हो सकता है.  बंद हो सकता है आधार कार्ड UIDAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलर्ट करते हुए अभिभावकों से कहा है कि अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट से स्कूल एडमिशन, प्रवेश परीक्षा, स्कॉलरशिप और DBT Benefits तक आसान पहुंच संभव होगी. इसके साथ ही अथॉरिटी ने हिदायत देते हुए कहा कि समय पर 7 साल से बड़े बच्चे का Aadhaar Biometric Update अपडेट न होने की स्थिति में उसका आधार डिएक्टिवेट किया जा सकता है और वो तमाम लाभों से वंचित रह सकता है.  अभी Free… बाद में लगेगा ₹100 चार्ज  आधार नियामक द्वारा सोशल मीडिया अलर्ट (Social Media Alert) के साथ ही ऐसे बच्चों के आधार में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर SMS के जरिए भी इसकी अपील की जा रही है. यूआईडीएआई ने साफ कहा है कि 5-7 साल के बच्चों के आधार का बायोमैट्रिक अपडेट या एमबीयू प्रोसेस अभी प्रोसेस फ्री है यानी इसके लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाता है. वहीं तो कोई शुल्क नहीं लिया जाता. 7 साल के बाद इस काम को कराने के लिए 100 रुपये का शुल्क देना होता है.  बाल आधार के लिए क्या है नियम?  Baal Aadhaar बनवाने से जुड़े नियमों की बात करें, तो 0–5 साल तक के बच्चों का आधार कार्ड बिना बायोमैट्रिक के बन जाता है और इसे बनवाने के लिए महज बच्चे की फोटो, नाम, जन्मतिथि, पता और माता-पिता के दस्तावेजों की जरूरत होती है, जबकि इस ऐज लिमिट तक कोई भी बायोमैट्रिक जरूरी नहीं होता है. हालांकि, जब बच्चा 5 साल की उम्र पूरी कर लेता है, तो पहले बायोमैट्रिक अपडेट के तौर पर उसके फिंगरप्रिंट, आइरिस स्कैन और लेटेस्ट फोटो को अपडेट कराना जरूरी होता है.  नीले रंग का होता है बच्चों का आधार  बता दें कि बच्चों का आधार कार्ड वयस्कों से अलग होता है. दरअसल, जब बच्चों के लिए आधार कार्ड जारी किया जाता है, तो उसका रंग नीला होता है. नीले रंग वाले आधार कार्ड (Blue Aadhaar Card) को 'बाल आधार' भी कहते हैं. UIDAI के मुताबिक नवजात बच्चे का आधार कार्ड बर्थ डिस्चार्ज सर्टिफिकेट और माता-पिता के आधार कार्ड के जरिये बनाए जाते हैं.  UIDAI ने कहा- 'इसे लेकर न बरतें लापरवाही' बाल आधार में बायोमैट्रिक अपडेट आप अपने नजदीकी आधार सेवा केंद्र (Aadhaar Center) पर जाकर करा सकते हैं. यूआईडीएआई की ओर से साफ शब्दों में हिदायत देते हुए कहा गया है कि आधार आज के समय में सबसे जरूरी दस्तावेज है, जो जीवन को आसान बनाने में सहायक है. ऐसे में माता-पिता और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों के बायोमेट्रिक्स को आधार में प्राथमिकता के तौर पर अपडेट कराएं.

बांग्लादेश में रैली के दौरान खूनी संघर्ष, 4 की मौत, कई घायल, अवामी लीग ने कहा- सेना ने निहत्थों पर चलाई गोलियां

ढाका  लंबे वक्त से अशांत चल रहे बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा और झड़प की घटनाएं हुई हैं। बुधवार को गोपालगंज में National Citizen Party (NCP) नेशनल सिटीजन पार्टी की एक रैली में हिंसा भड़क उठी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई। गोपालगंज बांग्लादेश की निर्वासित प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान का होमटाउन भी है। ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, मृतकों की पहचान गोपालगंज शहर के उदयन रोड के संतोष साहा के 25 वर्षीय पुत्र दीप्तो साहा, रमज़ान काज़ी, 18, 30 साल के सोहेल राणा और 24 साल के इमोन हैं।  ये हिंसा गोपालगंज में शेख हसीना को सत्ता से हटाने वाली छात्रों की पार्टी एनसीपी के आंदोलन से पहले हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार को गोपालगंज वर्चुअल रणक्षेत्र में तब्दील रहा. यहां दिन भर आगजनी, हिंसा और फायरिंग होती रही. डॉक्टरों ने बताया कि मृतकों को गोली लगने के बाद घायल अवस्था में गोपालगंज जनरल अस्पताल लाया गया था. उन्होंने बताया कि गोली लगने से घायल नौ और लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.  गोपालगंज में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) की चार अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं. यहां सड़कों पर टैंक गश्त लगा रही हैं. अधिकारियों ने उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भरोसा दिया है.  बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने कहा है कि गोपालगंज में बुधवार रात 8 बजे से 22 घंटे का कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया गया है. उन्होंने कहा है कि एनसीपी पर हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. मीडिया रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बांस के डंडों और ईंट-पत्थरों से लैस प्रदर्शनकारियों की पुलिस और सेना और अर्धसैनिक बल बीजीबी सहित सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई. ढाका ट्रिब्यून के अनुसार एनसीपी गोपालगंज में म्यूनिसिपल पार्क में एक जनसभा कर रही थी, तभी कथित तौर पर अवामी लीग और उसकी प्रतिबंधित छात्र शाखा के कार्यकर्ताओं ने भीड़ पर हमला कर दिया.  बता दें कि बाग्लादेश में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) एक नई राजनीतिक पार्टी है, जिसका गठन 28 फरवरी 2025 को हुआ. यह पार्टी अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद शुरू हुए छात्र-नेतृत्व वाले "मॉनसून क्रांति" और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट (ADSM) से उभरी. NCP का नेतृत्व नाहिद इस्लाम नाम का छात्र नेता कर रहा है. नाहिद इस्लाम और उसकी पार्टी बांग्लादेश को मुजीबवाद से मुक्ति का नारा देते हैं.  एनसीपी नेता ने दावा किया कि उन्हें बताया गया था कि गोपालंगज में सब कुछ नियंत्रण में है, हालांकि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर उन्हें एहसास हुआ कि ऐसा नहीं था. इससे पहले दोपहर करीब 1:45 बजे लगभग 200-300 स्थानीय अवामी लीग समर्थक लाठी-डंडों के साथ सीएनपी रैली स्थल पर पहुंचे. जब हमला शुरू हुआ तो ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पास के अदालत परिसर में शरण लेते देखे गए. कार्यक्रम स्थल पर मौजूद एनसीपी नेता और कार्यकर्ता भी तुरंत वहां से चले गए. एनसीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि हमला करने वाले अवामी लीग के समर्थक हैं. हिंसा पर अवामी लीग ने क्या कहा? वहीं अवामी लीग का आरोप है कि इस हिंसा को बांग्लादेश की सेना और एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने अंजाम दिया है. अवामी लीग ने एक्स पर लिखा है, "बिना किसी डर के बांग्लादेशी सेना ने गोपालगंज में एक नागरिक को प्रताड़ित किया. तस्वीर में उसे घसीटते हुए लेते जाया देखा जा सकता है, ताकि पूरे देश में भय का माहौल पैदा किया जा सके.  अवामी लीग का कहना है यह बदकिस्मत नागरिक उन हजारों लोगों में शामिल था जो यूनुस शासन द्वारा राज्य प्रायोजित दमन के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, जिसमें हत्या, मनमानी गिरफ़्तारियां, नजरबंदी, अपराध की बढ़ती लहर और देश के संस्थापक पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान से जुड़े प्रतीकों को उनके जन्मस्थान गोपालगंज से मिटाने की नवीनतम साजिश शामिल थी.  शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने कहा कि यूनुस और इस्लामिक उपद्रवियों द्वारा समर्थित भीड़ द्वारा फैलाई गई अपराध की लहर के सामने सशस्त्र बलों की पूर्ण निष्क्रियता की वे कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. हम जोर देकर कहते हैं कि इस क्रूर कार्रवाई के साथ बांग्लादेशी सेना ने दिखा दिया है कि उसने अपनी तटस्थता त्याग दी है. अवामी लीग ने कहा कि सरकारी एजेंसियों और सेना द्वारा निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी करने और बंगबंधु की विरासत की रक्षा के लिए खड़े हुए नागरिकों की हत्या करने के बाद एनसीपी नेताओं ने एक कदम और आगे बढ़कर "अवामी लीग" कहे जाने वाले किसी भी व्यक्ति का सफाया करने का आह्वान किया. अवामी लीग ने सेना द्वारा फायरिंग और हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है. 'मुजीबवाद से मुक्ति दिलाएंगे' इस हमले के बाद एनसीपी नेता नाहिद इस्लाम और एनसीपी के दूसरे नेता हसनत अब्दुल्ला ने "मुजीब की विरासत" के अवशेषों को मिटाने का वादा किया. एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम ने घोषणा की कि अगर उनके रैली स्थल पर हुए हमले के लिए तुरंत न्याय नहीं मिला, तो उनकी पार्टी अपने हाथों से "गोपालगंज को मुजीबवाद से मुक्त" कराने के लिए वापस आएगी. इस्लाम ने कहा, "अगर पुलिस बल विफल रहे तो हम न्याय ज़रूर दिलाएंगे" एनसीपी के एक दूसरे नेता ने कहा एक फेसबुक पोस्ट में कहा, "गोपालगंज में हत्यारी हसीना के एजेंटों ने हम पर हमला किया है. पुलिस बस खड़ी है, तमाशा देख रही है और पीछे हट रही है." बेशक कोई नहीं बख्शे जाएंगे बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने कहा है कि गोपालगंज में की हिंसा पूरी तरह से अक्षम्य है. युवा नागरिकों को उनके क्रांतिकारी आंदोलन की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए शांतिपूर्ण रैली आयोजित करने से रोकना उनके मौलिक अधिकारों का शर्मनाक उल्लंघन है. मोहम्मद यूनुस के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि, "यह जघन्य कृत्य जिसे कथित तौर पर प्रतिबंधित अवामी लीग के छात्र लीग के सदस्यों और एएल कार्यकर्ताओं ने अंजाम दिया है, बेशक बख्शे नहीं जाएंगे. अपराधियों की शीघ्र पहचान की जानी चाहिए और उन्हें पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. बांग्लादेश के किसी भी नागरिक के खिलाफ इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है." बता दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से अपदस्थ किए जाने के एक साल पूरे होने … Read more

इजरायली एयरस्ट्राइक से स्वेदा में सैन्य ठिकानों पर कहर, स्वेदा में एयरस्ट्राइक से भारी तबाही,कई हथियार डिपो ध्वस्त

स्वेदा  इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने दावा किया है कि उसने सीरिया के स्वेदा क्षेत्र में सीरियाई सरकारी बलों पर अपने हमले जारी रखे हैं. शनिवार को जारी एक बयान में आईडीएफ ने इन हमलों का ताज़ा वीडियो भी जारी किया है, जिसमें सैन्य ठिकानों और वाहनों को निशाना बनाते हुए देखा जा सकता है.  सूत्रों के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने अपने इन ताजा हमलों में बख्तरबंद गाड़ियों और भारी मशीनगनों से लैस पिकअप ट्रकों को निशाना बनाया, जो स्वेदा शहर की ओर बढ़ रहे थे. यह शहर बहुसंख्यक द्रूज़ समुदाय का गढ़ माना जाता है और वहां इन दिनों गंभीर झड़पें हो रही हैं. आईडीएफ ने बताया कि केवल सैन्य वाहनों को ही नहीं, बल्कि सीरियाई सेना की चौकियों, हथियार डिपो और अन्य रणनीतिक ठिकानों को भी दक्षिणी सीरिया में निशाना बनाया गया है. यह हमले ऐसे समय हो रहे हैं जब सीरियाई सरकार विरोधी गतिविधियों में इजाफा देखा जा रहा है और क्षेत्र में ईरानी समर्थक गुटों की मौजूदगी को लेकर इजरायल पहले से ही सतर्क है. स्वेदा में हालात गंभीर स्वेदा में द्रूज़ समुदाय के नागरिकों और सरकारी बलों के बीच हाल ही में तनाव और झड़पें बढ़ी हैं. इजरायल का कहना है कि उसने हमले आत्मरक्षा में किए हैं क्योंकि उसकी सीमाओं के पास सीरियाई और ईरानी गतिविधियां खतरा बन रही थीं. वीडियो किया जारी इससे पहले जब इजरायल ने मिसाइल के जरिए हमला किया था तो उसका वीडियो भी जारी किया था.  वीडियो में दिख रहा है कि जैसे ही इजरायली मिसाइल सैन्य मुख्यालय में गिरी तो उसके परखच्चे उड़ गए. मिसाइल का पेलोड कितना रहा होगा, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि कुछ सेकेंड्स में पूरी इमारत धुएं का गुबार बन जाती है. जो इंपैक्ट साइट है वहां मलबा कई फीट ऊपर बिखर जाता है. इजरायल ने क्यों किया हमला? इसे लेकर इजरायल का कहना है कि सीरिया में द्रूज समुदाय के साथ वहां की फौज अमानवीय हरकत कर रही है. सीरियन फौज से लड़ाई में द्रूज समुदाय के 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. उसी का बदला लेने के लिए या यूं कहिए सीरिया की फौज को रोकने के लए इजरायल ने ये हमला किया है. इस बीच आज यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक भी आज बुलाई गई है.

हद से ज्यादा नमक खा रहे भारतीय …ICMR ने बताया कितना है सुरक्षित सेवन, जानें कितनी मात्रा सुरक्षित

नई दिल्ली  नमक खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता बल्कि यह शरीर के लिए भी काफी जरूरी होता है. बिना नमक के खाना फीका लगता है, चाहे वह कितना भी अच्छा पकाया गया हो. लेकिन नमक के सेवन की भी एक लिमिट होती है. हाल ही में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने कहा है कि भारतीय नमक का अत्यधिक सेवन कर रहे हैं और ऐसे में साइलेंट महामारी को बढ़ावा मिल रहा है जिससे लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, हृदय रोग और किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. वैज्ञानिकों ने इस समस्या के समाधान के लिए नमक के कम सेवन और कम सोडियम वाले नमक का प्रयोग करने की सलाह दी है. नमक की कितनी मात्रा लोगों के लिए सुरक्षित होती है और नमक के और कौन से ऐसे सोर्स हैं जिनके माध्यम से नमक आपके शरीर में जा रहा है, इस बारे में भी जान लीजिए ताकि नमक के सेवन को कंट्रोल किया जा सके. नमक की कितनी मात्रा सुरक्षित? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) प्रति व्यक्ति प्रति दिन 5 ग्राम से कम नमक लेने की सिफारिश करता है. लेकिन वैज्ञानिकों ने पाया कि भारतीय की शहरी आबादी रोजाना लगभग 9.2 ग्राम और ग्रामीण आबादी लगभग 5.6 ग्राम नमक का सेवन करती है. यानी कि दोनों आबादी नमक का सेवन तय सीमा से अधिक कर रहा है. राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (एनआईई) के सीनियर साइंटिस्ट और रिसर्च हेड डॉ. शरण मुरली ने कहा, 'सोडियम का कम सेवन ब्लडप्रेशर कम करने और ओवरऑल हार्ट हेल्थ में सुधार करने में मदद करता है, जिससे कम सोडियम वाले ऑपशंस हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं. सिर्फ कम सोडियम वाले नमक पर स्विच करने से ब्लडप्रेशर औसतन 7/4 mmHg तक कम हो सकता है. यह एक छोटा सा बदलाव है जिसका बड़ा असर होता है.' 'यह सिर्फ नमक कम करने की बात नहीं है. यह हमारी डाइट, हमारे शरीर और हमारे हृदय में संतुलन को बैलेंस करने के बारे में है. कम नमक के सेवन से ब्लडप्रेशर संबंधी समस्याओं में भी कमी देखी जा सकती है.' सोडियम और नमक में क्या अंतर है? सोडियम और नमक को अक्सर एक ही माना जाता है. लेकिन ये दोनों एक जैसे नहीं हैं. सोडियम एक मिनरल है जो खाने में प्राकृतिक रूप से पाया जा सकता है या खाने के दौरान उसमें मिलाया जा सकता है. खाने का नमक लगभग 40 प्रतिशत सोडियम और 60 प्रतिशत क्लोराइड होता है. टेबल नमक में सोडियम की मात्रा मोटे तौर पर इस प्रकार है. 1/4 चम्मच नमक = 600 मिलीग्राम (मिलीग्राम) सोडियम 1/2 चम्मच नमक = 1,200 मिलीग्राम सोडियम 3/4 चम्मच नमक = 1,800 मिलीग्राम सोडियम 1 चम्मच नमक = 2,400 मिलीग्राम सोडियम सोडियम को किन नामों से पहचान सकते हैं? सोडियम कई रूपों में पाया जाता है. खाने वाली पैकेज्ड चीजों पर कंपनियों सीधे सोडियम न लिखने की जगह नीचे बताए हुए नाम लिख सकती हैं. आप उन्हें देखकर सोडियम का पता लगा सकते हैं.     डिसोडियम ग्वानिलेट     डिसोडियम इनोसिनेट     मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG)     सोडियम बाईकारबोनेट     सोडियम नाइट्रेट     सोडियम सिट्रट     सोडियम क्लोराइड (नमक)     सोडियम डायएसीटेट     सोडियम एरिथोर्बेट     सोडियम लैक्टेट     सोडियम मेटाबाइसल्फाइट     सोडियम फास्फेट     ट्राइसोडियम फॉस्फेट भोजन में इतना सोडियम क्यों होता है? सोडियम हमारे भोजन में कई भूमिकाएं निभाता है. स्वाद बढ़ाना इसका सबसे आम काम है. सोडियम भोजन को एक संरक्षक के रूप में सुरक्षित भी रख सकता है, खाने की बनावट में सुधार कर सकता है. उदाहरण के लिए, बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) ब्रेड और अन्य बेक्ड खाद्य पदार्थों को फूलने में मदद करता है. लेकिन अक्सर, जरूरत से अधिक नमक डालने के कारण कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं. सोडियम के इनडायरेक्ट सोर्स क्या हैं? अमेरिकी रिसर्च से पता चलता है कि लोगों की डाइट में लगभग 14 प्रतिशत सोडियम कुछ खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है. इसके अलावा, कई लोग खाना बनाते और खाते समय नमक डालते हैं. यह कुल सोडियम सेवन का केवल लगभग 11 प्रतिशत होता है. भले ही आप खाने में नमक कम डाल रहे हों लेकिन फिर भी आप शायद बहुत ज़्यादा सोडियम ले रहे हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि सोडियम अक्सर पैकेज्ड और तैयार की गई चीजों जैसे डिब्बाबंद सूप, लंच मीट और फ्रोजन चीजों में अधिक मात्रा में पाया जाता है. इसे नमक के रूप में या बेकिंग सोडा जैसे सोडियम के अन्य सामान्य रूपों के रूप में मिलाया जा सकता है. अमेरिका में जो लोग सोडियम खाते हैं, उसका 70 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा पैकेज्ड या रेस्टोरेंट के खाने से आता है. वहीं जब हम जो पैकेज्ड या बना हुआ खाना खरीदते हैं, उसमें सोडियम पहले से ही मिला हुआ होता है जिससे हमारी दैनिक सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है. सोडियम का सेवन कम करने के लिए हमेशा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूर रहें और घर पर ही खाना बनाएं. दवाइयां भी सोडियम का सोर्स होती हैं. बिना डॉक्टर के पर्चे के मिलने वाली दवाओं के लेबल पर एक्टिव और निष्क्रिय अवयवों की जांच करें और डॉक्टर से पूछें कि आपकी दवाई में कितना नमक है.

राष्ट्रपति पद पर आसिम मुनीर? शहबाज शरीफ से मुलाकातों से अटकलें तेज

कराची  पाकिस्तान में बड़े सियासी बदलाव की अटकलें हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ सेना प्रमुख आसिम मुनीर और राष्ट्रपति आसिफ जरदारी की मुलाकात ने चर्चाएं और बढ़ा दी हैं। कहा जा रहा था कि मुनीर राष्ट्रपति पद पर जरदारी की जगह ले सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। पाकिस्तान सरकार के मंत्री भी इन्हें खारिज कर रहे हैं। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति आवास में पीएम शरीफ ने जरदारी से मुलाकात की। इसके कुछ देर पहले ही मुनीर पीएम आवास पर पहुंचे और शरीफ से मीटिंग की। मंगलवार शाम हुईं एक के बाद एक उच्च स्तरीय बैठक ने राष्ट्रपति बदलने की अटकलों को हवा दे दी है। अखबार से बातचीत में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि राष्ट्रपति के इस्तीफे और उनकी जगह सेना प्रमुख के लेने का मुद्दा राष्ट्रपति जरदारी और पीएम शहबाज की मीटिंग में उठा जरूर था, लेकिन उन्होंने ऐसी सभी खबरों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि ये अटकलें एक मीडिया स्टोरी के बाद सामने लगने लगी थी, जिसे बाद में संभवत: वापस ले लिया था। आसिफ ने सभी अटकलों को खारिज किया है और कहा है कि राष्ट्रपति जरदारी को सभी घटनाक्रमों की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने सरकार और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में पूरा भरोसा दिखाया है। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति इस मुद्दे से अवगत हैं और सरकार में पूरा भरोसा दिखाया है।' उन्होंने कहा कि पीएम ने राष्ट्रपति को अपुष्ट खबरों और घटनाक्रमों से अवगत कराया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की है कि पीएम की अगुवाई वाली प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रपति से मिलने से पहले शहबाज शरीफ ने आसिम मुनीर से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है, क्योंकि प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा के लिए हफ्ते में तीन बार मुलाकात करते हैं। आसिफ ने कहा, 'सेना प्रमुख को राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है।'

CSE की रिपोर्ट में शहरी भारत में ओजोन प्रदूषण में खतरनाक वृद्धि, स्वास्थ्य और खेती पर बुरा असर

नई दिल्ली भारत के बड़े शहरों जैसे कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई में इस गर्मी (2025) में जमीन के स्तर पर ओजोन प्रदूषण ने खूब सिर उठाया है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, इन शहरों में ओजोन का स्तर कई दिनों तक 8 घंटे के मानक से ज्यादा रहा. यह प्रदूषण इतना खतरनाक है कि यह लोगों के स्वास्थ्य और खेती पर बुरा असर डाल रहा है. इस समस्या को समझते हैं और जानते हैं कि क्या करना जरूरी है.  क्या है ओजोन प्रदूषण? ओजोन एक गैस है जो तीन ऑक्सीजन अणुओं से बनती है. ऊंचे आसमान में यह हमें सूरज की हानिकारक किरणों से बचाती है, लेकिन जमीन के पास यह प्रदूषण बन जाता है. यह सीधे किसी स्रोत से नहीं निकलता, बल्कि वाहनों, उद्योगों और बिजलीघरों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के सूरज की रोशनी में रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है. यह गैस बहुत प्रतिक्रियाशील होती है. हवा में लंबी दूरी तक फैल सकती है, जिससे यह शहरों से लेकर गांवों तक को प्रभावित करती है. शहरों में ओजोन का हाल CSE की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गर्मी (मार्च-मई 2025) में कई शहरों में ओजोन का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया. दिल्ली की रिपोर्ट पहले ही जारी हो चुकी है, इसलिए इस अध्ययन में उसे शामिल नहीं किया गया. आइए, बाकी शहरों की स्थिति देखें…     बेंगलुरु: इस गर्मी में 92 दिनों में से 45 दिन ओजोन का स्तर मानक से ज्यादा रहा, जो पिछले साल की तुलना में 29% की बड़ी बढ़ोतरी है. होमबेगोड़ा नगर सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र रहा.     मुंबई: 92 दिनों में 32 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल की तुलना में 42% कम है. चकाला सबसे प्रभावित इलाका रहा.     कोलकाता: 22 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल की तुलना में 45% कम है. रवींद्र सरोवर और जादवपुर हॉटस्पॉट बने.     हैदराबाद: 20 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल की तुलना में 55% कम है. बोल्लारम सबसे ज्यादा प्रभावित रहा.     चेन्नई: 15 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल शून्य था. आलंदुर सबसे प्रभावित क्षेत्र रहा. इन शहरों में ओजोन का स्तर सिर्फ गर्मियों में नहीं,बल्कि सर्दियों और अन्य मौसमों में भी बढ़ रहा है, खासकर गर्म जलवायु वाले इलाकों में. ओजोन के हॉटस्पॉट और असर हर शहर में कुछ खास इलाके हैं जहां ओजोन का स्तर सबसे ज्यादा बढ़ता है. इन हॉटस्पॉट्स में प्रदूषण का असर और गंभीर होता है. ओजोन सांस की नली को नुकसान पहुंचाता है. अस्थमा और दमा जैसी बीमारियों को बढ़ाता है. बच्चों, बुजुर्गों व सांस की बीमारी वालों के लिए खतरनाक है. यह फसलों को भी नुकसान पहुंचाता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ता है. क्यों बढ़ रहा ओजोन प्रदूषण? ओजोन का बढ़ना मौसम और प्रदूषण स्रोतों पर निर्भर करता है. गर्मी और सूरज की रोशनी इसकी रासायनिक प्रतिक्रिया को तेज करती है. वाहन, उद्योग, कचरा जलाना और ठोस ईंधन का इस्तेमाल इसके मुख्य कारण हैं. दिलचस्प बात यह है कि जहां नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) ज्यादा होता है, वहां ओजोन कम बनता है, लेकिन साफ इलाकों में यह जमा हो जाता है . समाधान क्या हो? CSE की अनुमिता रॉयचौधरी कहती हैं कि अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है.इसके लिए जरूरी कदम हैं…     सख्त कदम: वाहनों, उद्योगों और कचरा जलाने से निकलने वाली गैसों को कम करना होगा. शून्य उत्सर्जन वाहन और साफ ईंधन को बढ़ावा देना जरूरी है.     निगरानी बढ़ाएं: ओजोन के स्तर को मापने के लिए और स्टेशन लगाने चाहिए, ताकि हॉटस्पॉट्स की पहचान हो सके.     क्षेत्रीय योजना: ओजोन एक क्षेत्रीय प्रदूषण है, इसलिए स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर मिलकर काम करना होगा.     जागरूकता: लोगों को इस प्रदूषण के बारे में बताना और साफ हवा के लिए कदम उठाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वर्तमान में, अपर्याप्त निगरानी, सीमित आँकड़े और अप्रभावी प्रवृत्ति विश्लेषण विधियों ने इस बढ़ते जन स्वास्थ्य जोखिम को समझने में बाधा डाली है। जमीनी स्तर पर ओज़ोन की जटिल रासायनिक संरचना इसे एक ऐसा प्रदूषक बनाती है जिसका पता लगाना और उसे कम करना मुश्किल है। ओज़ोन की अत्यधिक विषाक्त प्रकृति के कारण, राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक केवल अल्पकालिक जोखिम (एक घंटे और आठ घंटे के औसत) के लिए निर्धारित किया गया है, और अनुपालन इन मानकों से अधिक दिनों की संख्या के आधार पर मापा जाता है। शोधकर्ताओं ने रेखांकित किया कि इसके लिए शीघ्र कार्रवाई आवश्यक है। इस पत्र में कहा गया है कि वाहनों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन को रोकने के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता है। इसमें भारत में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है। इसमें कहा गया है, "कार्ययोजना के सह-लाभों को अधिकतम करने के लिए कण प्रदूषण, ओज़ोन और NOx जैसी इसकी पूर्ववर्ती गैसों के संयुक्त नियंत्रण हेतु कार्यनीति को तत्काल परिष्कृत किया जाना चाहिए।"  

AEPC का अनुमान: जापान से भारत के वस्त्र क्षेत्र में बड़े निवेश की उम्मीद

नई दिल्ली  एईपीसी ने कहा कि कपड़ा उद्योग में भारत और जापान की कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने के व्यापक अवसर मौजूद हैं। परिधान क्षेत्र में व्यापार के अवसरों का पता लगाने के लिए दोनों देशों की कंपनियों के बीच कई बैठकें हुईं। भारतीय उद्योग जापानी गुणवत्ता मानदंडों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। कपड़ा उद्योग में भारत और जापान की कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने का सुनहरा अवसर मौजूद हैं। टोक्यो की कंपनियां भारत में निवेश करने की इच्छुक हैं। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) ने बुधवार को यह बात कही।    दोनों देशों के बीच हुई बैठक एईपीसी के अध्यक्ष सुधीर सेखरी ने कहा कि परिधान क्षेत्र में व्यापार के अवसरों का पता लगाने के लिए दोनों देशों की कंपनियों के बीच कई बैठकें हुईं। टोक्यो में इंडिया टेक्स ट्रेंड फेयर (आईटीटीएफ) में कई घरेलू कंपनियां भाग ले रही हैं। जापानी गुणवक्ता मानदंडों को पूरा करने के लिए भारत प्रतिबद्ध उन्होंने कहा कि हमने जापान से सोर्सिंग बढ़ाने और भारत में अधिक निवेश करने को कहा है। यूनिक्लो, एडास्ट्रिया, टोरे, इटोकिन कंपनी, ब्रोक जापान, डाइसो, वाईकेके और पेगासस जैसे प्रमुख ब्रांडों के साथ हमारी सफल बैठकें हुई हैं। भारतीय उद्योग जापानी गुणवत्ता मानदंडों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। सेखरी ने कहा कि हम अपने सभी जापानी साझेदारों को भारतीय प्रदर्शकों के साथ जुड़ने, सहयोगात्मक संभावनाओं का पता लगाने, पसंदीदा सोर्सिंग गंतव्य के रूप में भारत की ताकत और विश्वसनीयता का प्रत्यक्ष अनुभव करने के लिए आमंत्रित करते हैं। वस्त्र मंत्री ने किया मेले का उद्धघाटन इस मेले का उद्घाटन वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने टोक्यो में किया। यह एक प्रमुख वस्त्र कार्यक्रम है। इसका आयोजन भारतीय दूतावास, वस्त्र मंत्रालय, एईपीसी और जापान-भारत उद्योग संवर्धन संघ (जेआईआईपीए) के सहयोग से किया जाता है। भारत के पास मजबूत आधार मौजूद सरकार घरेलू वस्त्र विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है, जैसे सात पीएम मित्र पार्क। परिषद ने कहा शुल्क मुक्त व्यापार, मजबूत स्थायित्व संबंधी साख और लचीला विनिर्माण क्षेत्र इसके लिए मजबूत आधार हैं। जापानी परिधान बाजार में अमेरिका का बड़ा हिस्सा  हालांकि, गुणवत्ता मानकों (विशेष रूप से एमएमएफ में) को प्राप्त करना, व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाना, और जापानी अनुपालन मानदंडों का पालन करना। साथ ही अमेरिका के 35 अरब डॉलर के जापानी परिधान बाजार में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है। 2024 में जापान को भारत का परिधान निर्यात 234.5 मिलियन डॉलर का था। पिछले साल टोक्यो ने लगभग 23 अरब डॉलर मूल्य के इन सामानों का आयात किया था। इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल एक प्रतिशत है। 

सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी, कहा- अगर हिम्मत है तो भेजो मुझे डिटेनशन सेंटर

कोलकाता  पश्चिम बंगल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को भाजपा शासित राज्यों में बंगाली बोलने वाले लोगों के साथ हो रहे कथित उत्पीड़न के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। इस दौरान ममता ने कहा कि वो आगे से अब बंगाली ही बोलेंगी। यह रैली कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर से शुरू होकर धर्मतला के दोरीना क्रॉसिंग तक गई, जिसमें टीएमसी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस रैली में शामिल हुए। लगभग तीन किलोमीटर लंबे इस मार्च के लिए पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। करीब 1,500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए और कई सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया। विरोध मार्च के दौरान सीएम ममता बनर्जी ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बंगालियों के प्रति भाजपा के रवैये से मैं शर्मिंदा और निराश हूं। सीएम ने कहा कि मैंने अब से ज्यादा बांग्ला में बोलने का फैसला किया है, अब इसके लिए अगर हो सके तो मुझे हिरासत शिविरों में बंद कर दो।