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केंद्र सरकार को घेरा ममता ने, बोली- अमेरिका और चीन के सामने रही कमजोर

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा को बेच दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘‘कभी अमेरिका के सामने तो कभी चीन के सामने भीख मांग रही है''। अन्य राज्यों में बंगाली प्रवासियों पर हमलों से संबंधित सरकारी संकल्प पर राज्य विधानसभा में चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की ‘‘तानाशाही मानसिकता'' है। भाजपा ‘‘पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना'' चाहती है। बनर्जी ने जैसे ही इस संकल्प पर बोलना शुरू किया तो हंगामा होने लगा। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा बेच दी है। केंद्र सरकार कभी चीन के सामने गिड़गिड़ा रही है, तो कभी अमेरिका के सामने। वे देश नहीं चला सकते, राष्ट्र के हितों की रक्षा नहीं कर सकते, फिर भी हमें उपदेश देने की हिम्मत रखते हैं।'' मुख्यमंत्री ने भाजपा पर भाजपा शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी श्रमिकों पर कथित हमलों पर चर्चा को रोकने का भी आरोप लगाया। बनर्जी ने दावा किया, ‘‘भाजपा बंगाली प्रवासियों पर हमलों को लेकर चर्चा के खिलाफ क्यों है? ऐसा इसलिए है… क्योंकि ये घटनाएं पार्टी शासित राज्यों में हो रही हैं। वे सच्चाई को दबाना चाहते हैं।'' 'भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है…' सदन में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी पार्टी की नारेबाजी के बीच अपनी बात कहने की कोशिश करते हुए बनर्जी ने पूछा, ‘‘भाजपा मुझे इस सदन में बोलने क्यों नहीं दे रही है?'' उन्होंने कहा, ‘‘हम हिंदी या किसी अन्य भाषा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है। उनका रवैया औपनिवेशिक और तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। वे पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं।'' भाजपा तानाशाहों की पार्टी है- ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा के ‘‘वैचारिक पूर्वजों'' ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के साथ विश्वासघात किया था। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा तानाशाहों की पार्टी है। उनके पूर्वजों ने भारत की आजादी के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, उन्होंने देश के साथ विश्वासघात किया।'' नोकझोंक बढ़ने पर, सत्ता पक्ष के कुछ विधायक विपक्षी दलों की ओर दौड़ पड़े, जिससे मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। हंगामे की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री को अपना भाषण कुछ देर के लिए रोकना पड़ा।  

भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक अमित क्षत्रिय को नासा में नई जिम्मेदारी, अंतरिक्ष मिशन की अगुवाई

वाशिंगटन  अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भारतीय-अमेरिकी अमित क्षत्रिय को  ‘अन्वेषण-केंद्रित' नया सह-प्रशासक नियुक्त किया है। नासा में 20 साल सेवा दे चुके क्षत्रिय हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के अन्वेषण प्रणाली विकास मिशन निदेशालय (ईएसडीएमडी) में चंद्रमा और मंगल से जुड़े अभियान कार्यक्रमों के उप-प्रभारी थे। नासा के एक बयान में कहा कि कार्यवाहक नासा प्रशासक सीन पी डफी ने बुधवार को अमित क्षत्रिय को नासा का अन्वेषण केंद्रित नया सह-प्रशासक नियुक्त किया। विस्कॉन्सिन में भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर जन्मे एवं कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैलटेक) तथा ऑस्टिन स्थित टेक्सास विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त क्षत्रिय इतिहास में मिशन नियंत्रण उड़ान निदेशक के रूप में सेवा करने वाले लगभग 100 लोगों में से एक हैं। नासा की वेबसाइट पर उनके प्रोफाइल के अनुसार, वह 2003 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी से जुड़े थे। क्षत्रिय को अंतरिक्ष स्टेशन के 50वें अभियान के वास्ते प्रमुख उड़ान निदेशक के रूप में उनके कार्यों के लिए नासा उत्कृष्ट नेतृत्व पदक से सम्मानित किया गया था।   नासा ने कहा कि अपनी नयी भूमिका में वह एजेंसी में सर्वोच्च रैंक वाले सिविल सेवक के रूप में तथा डफी के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में काम करेंगे। कैलटेक के पूर्व छात्र के ब्लॉग के अनुसार, क्षत्रिय के पिता इंजीनियर थे और उनकी मां केमिस्ट थीं – दोनों ही भारतीय प्रवासी थे – जिन्होंने गणित और विज्ञान में शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। क्षत्रिय और उनकी पत्नी के तीन बच्चे हैं।     

किम जोंग का जूठा गिलास गायब, बॉडीगार्ड्स ने फिंगरप्रिंट भी मिटाए, वीडियो चौंकाने वाला

बीजिंग उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बीजिंग में हाल ही में हुई मुलाकात चर्चा का विषय तो बनी ही, लेकिन उसके बाद सामने आए एक वीडियो ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। इस वीडियो में किम जोंग की टीम बैठक के बाद जिस तरीके से कुर्सी, टेबल, और यहां तक कि गिलास तक को साफ करती नजर आई, उसने सुरक्षा और जासूसी को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हुआ बीजिंग में? किम जोंग उन और पुतिन की मुलाकात बीजिंग की एक हाई-प्रोफाइल विक्ट्री डे परेड के बाद हुई थी। यह किम का कोविड-19 महामारी के बाद पहला चीन दौरा था। पुतिन से बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने दोस्ती की गर्मजोशी दिखाई और उत्तर कोरिया की ओर से रूस को यूक्रेन युद्ध में दिए गए समर्थन पर चर्चा भी हुई। लेकिन जब यह बैठक खत्म हुई, तभी किम के स्टाफ ने बेहद सावधानी से वह गिलास उठाया जिससे उन्होंने पीया था, कुर्सी के हैंडल और बैकरेस्ट को चमकाया गया, टेबल तक को ऐसे साफ किया गया जैसे वहां कोई फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन हो रही हो।   जैसे क्राइम सीन हो! वीडियो में एक स्टाफ मेंबर किम की कुर्सी को कपड़े से पोछता नजर आता है, जबकि दूसरा उनका गिलास संभाल कर ट्रे में रख देता है। यह सब इतनी बारीकी से किया गया कि जैसे कोई सबूत मिटा रहा हो। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे एक 'फॉरेंसिक क्लीनअप' कहा जा रहा है, यानी किम के डीएनए या बॉयोलॉजिकल ट्रेस (जैसे बाल, त्वचा, थूक आदि) कहीं पीछे न छूट जाएं।   DNA से डर क्यों? विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति के डीएनए या बॉडी फ्लूइड्स से उसकी हेल्थ, जेनेटिक स्थिति और यहां तक कि गंभीर बीमारियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है। जब बात किसी राष्ट्राध्यक्ष की हो, तो यह डेटा दुश्मन देशों के लिए "सोने की खान" हो सकता है। इसलिए उनके बॉयोलॉजिकल ट्रेसेज़ को मिटा देना या वापस ले जाना एक सुरक्षा रणनीति बन चुकी है।   पुतिन भी पीछे नहीं किम जोंग उन ही नहीं, बल्कि व्लादिमीर पुतिन भी अपनी सेहत से जुड़ी जानकारी छुपाने को लेकर उतने ही सख्त हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब भी पुतिन विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो उनके साथ एक 'पूप सूटकेस' (Poo Suitcase) जाता है – जिसमें उनके मल-मूत्र को एकत्र कर सील कर मॉस्को भेजा जाता है। फ्रांसीसी मैगजीन 'Paris Match' के मुताबिक, 2017 से ही यह प्रोटोकॉल जारी है। इसका मकसद यही है कि कोई विदेशी खुफिया एजेंसी उनके मल या यूरिन से हेल्थ रिपोर्ट न निकाल ले। इससे यह भी साफ होता है कि सिर्फ गुप्त दस्तावेज़ ही नहीं, अब बॉडी फ्लूइड्स भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा हैं। सिर्फ सुरक्षा या कुछ और? कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि किम और पुतिन का यह व्यवहार केवल सेहत की जानकारी छिपाने तक सीमित नहीं है। यह एक कूटनीतिक संकेत भी हो सकता है – यह दिखाने के लिए कि वे किसी पर भरोसा नहीं करते, चाहे वह चीन हो या रूस। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भरोसे की जगह सतर्कता ने ले ली है, खासकर तब जब वैश्विक राजनीति में टेंशन बढ़ रही है। किम की बेटी भी आईं साथ इस मीटिंग में एक और खास बात थी – किम जोंग उन की बेटी किम जू ऐ पहली बार किसी विदेशी दौरे पर उनके साथ दिखीं। इससे उत्तर कोरिया की अगली पीढ़ी के लीडरशिप को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।  बढ़ती दोस्ती या रणनीतिक चाल? किम और पुतिन की बातचीत में गर्मजोशी जरूर नजर आई – दोनों ने एक-दूसरे के लिए सम्मान जताया और किम ने तो यह तक कहा कि "अगर मैं रूस के लिए कुछ कर सकता हूं, तो यह मेरा फर्ज होगा।" लेकिन जब एक नेता की टीम उसके छूए हर सामान को मिटा दे, तो यह साफ है कि दोस्ती के दिखावे के पीछे रणनीति और शंका दोनों छिपी होती है।  

PM नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले मणिपुर में हुई अहम बैठक, तय हुई बड़ी सहमति

मणिपुर  मणिपुर के लिए नई दिल्ली से बड़ी खबर है। पीएम मोदी के मणिपुर दौरे की चर्चा के बीच 'कुकी-जो' परिषद ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को यात्रियों और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही के लिए खोलने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि उनके ( PM Modi ) पहुंचने से पहले कई फैसले गुडविल के तौर पर लिए जा रहे हैं। फिलहाल केंद्र सरकार की पूरी कोशिश है कि मणिपुर में हालात सामान्य और स्थिर रहें। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के अनुसार, यह फैसला नई दिल्ली में गृह मंत्रालय के अधिकारियों और केजेडसी के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई कई बैठकों के बाद लिया गया। केजेडसी ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर शांति बनाए रखने के लिए भारत सरकार द्वारा तैनात सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने का वचन दिया है। गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि कुकी-जो परिषद ने एनएच-2 पर शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है। मणिपुर को नागालैंड और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण जीवनरेखा एनएच-2, मई 2023 में राज्य में भड़के जातीय तनाव के कारण अवरुद्ध हो गई थी। मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच संघर्ष के कारण व्यापक हिंसा, जान-माल की हानि, हजारों लोगों का विस्थापन और गहराता मानवीय संकट उत्पन्न हुआ है। राजमार्ग को फिर से खोलना विश्वास बहाली और हिंसा प्रभावित राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इंफाल और नई दिल्ली के अधिकारियों का मानना है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति आसान होने से विस्थापित परिवारों और राहत शिविरों में रह रहे लोगों की कठिनाइयां कम होंगी। गृह मंत्रालय ने बताया कि गुरुवार को नई दिल्ली में गृह मंत्रालय, मणिपुर सरकार, केएनओ और यूपीएफ के प्रतिनिधियों के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक का समापन त्रिपक्षीय परिचालन निलंबन (एसओओ) समझौते पर हस्ताक्षर के साथ हुआ, जिसमें फिर से बातचीत की गई शर्तों और नियमों (आधारभूत नियमों) को हस्ताक्षर की तिथि से एक वर्ष के लिए प्रभावी माना जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि संशोधित आधारभूत नियमों में दो प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया गया है। मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता और मणिपुर में स्थायी शांति व स्थिरता के लिए बातचीत के माध्यम से समाधान की आवश्यकता। साथ ही, गृह मंत्रालय ने बताया कि केएनओ और यूपीएफ ने संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों से सात निर्दिष्ट शिविरों में स्थानांतरण, शिविरों की संख्या कम करने, हथियारों को निकटतम सीआरपीएफ और बीएसएफ शिविरों में स्थानांतरित करने, और सुरक्षा बलों द्वारा कैडरों का कठोर भौतिक सत्यापन करने पर सहमति जताई है, ताकि विदेशी नागरिकों (यदि कोई हों) को सूची से हटाया जा सके।  

पति और बेटी की हत्या, ब्लैक मैजिक के शक में महिला ने किया कत्लेआम

तेलंगाना  पत्नी के अवैध संबंधों की खातिर पति की बली चढ़ गई। इंदौर की सोनम रघुवंशी, मेरठ की मुस्कान रस्तोगी, तुमकुरु की सुमंगला जैसे कई नामों ने इस तरह के अपराध की खबरों को आम बना दिया है। अब तेलंगाना के भूपलपल्ली से ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां के कविता नाम की महिला ने ना सिर्फ अपने पति की हत्या करा दी, बल्कि आशिक के साथ मिलकर बेटी को भी मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद दोनों ने काले जादू का षड्यंत्र रचा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 45 साल की के कविता और उसके आशिक जे राजकुमार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों पर 22 साल की वार्षिनी की हत्या के आरोप हैं। वार्षिनी, कविता की बेटी थी। जयशंकर भूपलपल्ली एसपी किरन खरे का कहना है कि वार्षिनी 3 अगस्त से घर से गायब थी और उसकी मां ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ समय बाद वार्षिनी की लाश मेदिपल्ली जंगल में मिली थी। उस समय जांच कर रहे काताराम डीएपी ए सूर्य नारायण को शव के पास आधार कार्ड, हल्दी और सिंदूर मिला था। इसके चलते पुलिस को काले जादू का शक हुआ। खबर है कि राजकुमार सोशल मीडिया के जरिए काला जादू सीखता था। आरोपी ने जंगल में पड़ी लाश पर हल्दी और सिंदूर छिड़क दिया था। साथ ही उसने शव के आसपास नींबू रख दिए और पास ही जमीन में कई कीलें ठोक दी थी। पुलिस का कहना है कि कविता का पति 50 वर्षीय कुमारास्वामी बीमार रहता था। तब उसने प्रेमी राजकुमार के साथ मिलकर मारने की साजिश रची थी। 6 जून को आरोपी ने कुमारास्वामी का गला दबा दिया और मौत की वजह बीमारी बताकर मामले को रफा दफा कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, इस बात का शक वार्षिनी को हो गया था। इसके चलते ही दोनों मिलकर 22 साल की बेटी की हत्या की भी योजना बनाई थी। 3 अगस्त को मिलकर दोनों ने उसे मौत के घाट उतार दिया और पुलिस को गुमराह करने के मकसद से आसपास काले जादू जैसा सामान रख दिया।  

HC का फैसला पलटा, SC/ST एक्ट में जमानत अब केवल खास परिस्थितियों में मिलेगी

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाल ही में एक फैसला सुनाते हुए कहा है कि दलितों के खिलाफ उत्पीड़न से जुड़े मामले यानी SC/ST एक्ट 1989 के तहत दर्ज मामलों में किसी भी आरोपी को अग्रिम जमानत तभी दी जा सकती है, जब स्पष्ट रूप से यह साबित हो कि आरोपी के खिलाफ प्रथम द्रष्टया कोई मामला न बनता हो। यानी पहली नजर में ही यह तथ्य साबित हो जाए कि आरोपी ने दलित समुदाय के प्रति कोई हिंसा नहीं की है। CJI बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मंगलवार को इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से लाया गया था और यह आरोपी को गिरफ्तारी से पूर्व जमानत देने पर रोक लगाता है। इसके साथ ही पीठ ने जातिगत अत्याचार के आरोपों का सामना कर रहे एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने संबंधी बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। SC/ST एक्ट की धारा 18 का उल्लेख पीठ ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 18 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रावधान स्पष्ट रूप से दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 438 (अग्रिम जमानत देने संबंधी) को लागू नहीं करने के बारे में है और इसे धारा के तहत दायर आवेदनों को सुनवाई से बाहर करने का प्रावधान करता है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान के साथ ही SC/ST एक्ट की धारा 18 आरोपी को अग्रिम जमानत देने पर रोक लगाती है। हालांकि, पीठ ने ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देने के लिए स्पष्ट रेखा खींचते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 के तहत अगर प्रथम द्रष्टया यह साबित होता है कि आरोपी ने इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं किया है तो अदालत आरोपी को CRPC की धारा 438 के तहत दायर आवेदनों पर विचार करते हुए अग्रिम जमानत देने का विवेकाधिकार रखता है। अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जानी चाहिए बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा, "अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 की धारा 18 स्पष्ट भाषा के साथ सीआरपीसी की धारा 438 के तहत दायर आवेदनों को खारिज करती है और SC/ST समुदाय के लोगों के प्रति अपराध करने के आरोपियों को अग्रिम जमानत देने पर प्रतिबंध लगाता है।" पीठ ने कहा कि ऐसे आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जानी चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘यह कानून अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उपायों को लागू करने के उद्देश्य से लागू किया गया था।’’ क्या है मामला? पीठ ने शिकायतकर्ता किरण द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट के 29 अप्रैल के आदेश के विरुद्ध दायर अपील को स्वीकार करते हुए आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दिया। यह मामला 2024 में हुए विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जब महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में चुनाव के बाद हुई झड़प में एक दलित परिवार पर हमला किया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने हमले के दौरान जातिसूचक गालियां गदी थीं। नवंबर 2024 में दर्ज प्राथमिकी में धाराशिव जिले के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपी राजकुमार जीवराज जैन हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां मामले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी गई थी। हाई कोर्ट का आदेश पलटा शिकायत के अनुसार, 25 नवंबर 2024 को जैन और अन्य ने कथित तौर पर किरण के घर के बाहर उसके साथ बहस की और उसे और उसके परिवार पर लोहे के रॉड से हमला किया था और इस दौरान जातिसूचक गालियां दीं थीं। दलित परिवार पर आरोप था कि उन लोगों ने जैन के पसंदीदा उम्मीदवारों को वोट नहीं दिए थे। हाई कोर्ट के पैसले के खिलाफ किरण ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि पीड़ित को अपमानजनक शब्द कहना और जातिसूचक गालियां देना स्पष्ट रूप से SC/ST एक्ट का उल्लंघन है।  

डोनाल्ड ट्रंप ने किया बड़ा संकेत, किस और नोबेल पर खुलासा

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि जल्दी ही यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग थम सकती है। उन्होंने सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि मैं सब कुछ देख रहा हूं। अब इस इन पर नजर थी। इसके बारे में राष्ट्रपति पुतिन और जेलेंस्की से बात चल रही है। उन्होंने कहा कि कुछ होने वाला है, लेकिन वे लोग इसके लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन फिर भी कुछ होगा और हम ऐसा करने जा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रूस ने यू्क्रेन पर हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों में 15 लोग मारे गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर दिए इंटरव्यू में कहा कि मुझे लगता था कि रूस आसानी से मान जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब लगता है कि कुछ होने ही वाला है। यही नहीं डोनाल्ड ट्रंप ने चीन में विक्ट्री परेड में व्लादिमीर पुतिन के हिस्सा लेने पर भी टिप्पणी की। ट्रंप ने कहा कि मुझे पता था कि ऐसा होगा और पुतिन एवं जिनपिंग के साथ किम जोंग उन भी रहेंगे। ट्रंप ने तिकड़ी पर तंज कसते हुए कहा कि मुझे पता है कि वे लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। उन्हें लगा होगा कि मैं देख रहा हूं और यह सच है। अमेरिकी नेता ने कहा कि मेरे इन सभी लोगों के साथ अच्छे संबंध हैं। अगले एक से दो सप्ताह में आपको पता चल जाएगा कि ये कितने अच्छे हैं। अपनी ही तारीफ करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मैं धैर्य रखना जानता हूं। मैं सामने वाले को चांस देता हूं कि वह आए और टेबल पर बात की जाए। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से क्रेडिट लिया और कहा कि मैंने दुनिया में 6 से 7 युद्ध रुकवा दिए हैं। मैं नोबेल प्राइज के लिए डिजर्व करता हूं। इन जंगों के बारे में बताता हुए वाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि शायद डोनाल्ड ट्रंप इजरायल-ईरान, रवांडा-कांगो, अर्मेनिया-अजरबैजान, थाइलैंड-कंबोडिया, भारत-पाकिस्तान, मिस्र-इथियोपिया और सर्बिया-कोसोवो के बारे में बात कर रहे हैं। उन्होंने युद्ध रुकवाने के क्रेडिट लेते हुए कहा कि ये सारे देश आपस में लड़ रहे थे। इन लोगों के लिए जंग ही एक रास्ता बन गया था और शांति की बात भी भूल चुके थे। लेकिन मैंने जब दखल दिया और कहा कि अब बहुत हो चुका है। आप लोगों ने बहुत सी जानें ले ली हैं तो फिर जंग थमी और इन देशों को युद्ध से हटाने में सफल रहा। इस बार उन्होंने दिलचस्प तरीके से यह जरूर कहा कि मैं नोबेल पुरस्कार नहीं मांग रहा। इस साल के नोबेल सम्मान विजेताओं के नाम अगले महीने घोषित होने वाले हैं। ट्रंप ने कहा कि मैं तो सिर्फ युद्धों को रुकवाना चाहता हूं। मुझे दुनिया का अटेंशन पाने की कोई चाहत नहीं है।  

अमेरिका में 250 सालों के इतिहास में पहली बार आबादी में गिरावट आने वाली है, ट्रंप पॉलिसी से लगेगा एक और झटका

वॉशिंगटन  अमेरिका में 250 सालों के इतिहास में पहली बार आबादी में गिरावट आने वाली है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रवासियों के आने में कमी आई है। यही नहीं देश में प्रवासियों की संख्या 5,25,000 कम होनी है। एक तरफ यह गिरावट आएगी तो वहीं अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों का आंकड़ा 5 लाख 19 हजार रहने का अनुमान है। इस तरह अमेरिका की आबादी में कुल 6000 लोगों की कमी इस साल दर्ज की जाएगी। अमेरिकन इंटरप्राइजेज इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में सिविल वॉर के दौरान 7 लाख लोग मारे गए थे। तब भी आबादी में गिरावट नहीं आई थी। कोरोना काल में भी अमेरिका की आबादी निगेटिव में नहीं गई थी। इसलिए यह ऐतिहासिक होगा कि अमेरिका की आबादी में इस साल गिरावट दर्ज होगी। आबादी में इस कमी की वजह अमेरिका की घटती जन्मदर भी है। बीते करीब 30 सालों से अमेरिका की औसत जन्मदर 1.6 ही बनी हुई है, जबकि रिप्लेसमेंट लेवल के लिए भी 2.1 जरूरी मानी गई है। इस तरह अमेरिका में परिवार लगातार छोटे हो रहे हैं और बच्चे पैदा करने में लोगों की रुचि कम हो रही है। इंस्टिट्यूट फॉर फैमिली स्टडीज के अनुसार अमेरिका में हर सप्ताह सेक्स करने वाले महिला और पुरुषों की संख्या 37 फीसदी ही है, जबकि 1990 में यह औसत 55 पर्सेंट था। बता दें कि अमेरिका में पहले ही प्रवासियों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है। आने वालों का आंकड़ा कम हुआ है तो वहीं निकलने वाले बढ़ गए हैं। इस साल के शुरुआत 6 महीनों में ही 14 लाख प्रवासियों ने अमेरिका छोड़ दिया है। अमेरिका के गृह विभाग का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से 16 लाख माइग्रेंट अमेरिका छोड़ चुके हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीतियां प्रवासियों को अमेरिका आने से हतोत्साहित करने वाली हैं। यही नहीं अवैध रूप से अमेरिका में आने के नाम पर प्रशासन ने 3,59,000 लोगों को अरेस्ट किया है। इनमें से 3 लाख 32 हजार लोगों को डिपोर्ट किया गया है। यह आंकड़ा डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के शुरुआती 200 दिनों का है। हालांकि दिलचस्प तथ्य यह है कि प्रवासियों की संख्या कम होने के बाद भी देश में 15 फीसदी आबादी ऐसे लोगों की है, जो किसी और मुल्क में पैदा हुए हैं और अब अमेरिका में हैं। जानकारों का मानना है कि आबादी में कमी और खासतौर पर प्रवासियों की घटती संख्या के चलते वर्कफोर्स का संकट भी पैदा हो सकता है।  

तुलकु पाल्डेन वांग्याल की दुखद मृत्यु, चीनी हिरासत में बिताई अंतिम घड़ियां

नई दिल्ली चोएग्याल मठों के प्रमुख लामा तुलकु पाल्डेन वांग्याल की कथित तौर पर कई वर्षों के कारावास और गंभीर दुर्व्यवहार के बाद 53 वर्ष की आयु में जेल में मृत्यु हो गई। बताया गया कि उन्हें पहले गोंजो काउंटी जेल में रखा गया, फिर चामडो और बाद में ल्हासा स्थानांतरित किया गया, जहां उन्हें अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें निरंतर यातनाएं सहनी पड़ीं और उनकी रिहाई की अपीलों को अनसुना कर दिया गया। 2025 में उन्हें गांसु प्रांत ले जाया गया, जहां यातनाएं जारी रही। 19 जुलाई को हिरासत में उनकी मृत्यु हो गई। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) ने उनकी मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसे बीजिंग द्वारा तिब्बती धार्मिक हस्तियों के व्यवस्थित दमन और बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित करने का स्पष्ट उदाहरण बताया। सीटीए के अनुसार, सम्मानित धार्मिक नेता तुलकु पाल्डेन वांग्याल ने अपना जीवन तिब्बती लोगों की सेवा में समर्पित किया। उन्होंने तिब्बती संस्कृति के संरक्षण की वकालत की, समुदाय में एकता पर जोर दिया और तिब्बती पहचान के प्रति निष्ठा को प्रोत्साहित किया। लेकिन इन गतिविधियों ने चीनी अधिकारियों को संदेहास्पद बना दिया, जिसके कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और करीब आठ वर्षों तक जेल में रखा गया। सीटीए ने जोर देकर कहा कि उनकी मृत्यु तिब्बत में व्याप्त संकट को उजागर करती है, जहां धार्मिक स्वतंत्रता, आवागमन की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कठोर प्रतिबंध हैं। तिब्बती निर्वासित सरकार ने कहा कि तुलकु पाल्डेन वांग्याल के साथ चीन का व्यवहार सांस्कृतिक संरक्षण और आध्यात्मिक नेतृत्व की आवाज को दबाने की जानबूझकर नीति को दर्शाता है। सीटीए ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उनके साथ हुए अन्याय को मान्यता देने और तिब्बत में जारी उल्लंघनों के लिए चीन को जवाबदेह ठहराने की अपील की। सीटीए ने कहा कि तिब्बतियों के लिए, तुलकु पाल्डेन वांग्याल का निधन न केवल एक सम्मानित लामा की क्षति है, बल्कि उत्पीड़न के खिलाफ निरंतर संघर्ष की दुखद याद भी है।  

शिवसेना के MP ने उठाई मुंबई प्रदर्शन रोक की मांग, राउत ने शिंदे को लिया आड़े हाथ

मुंबई महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अगुवाई वाली शिवसेना के सांसद मिलिंद देवड़ा ने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर दक्षिण मुंबई में विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है और कहा है कि इस इलाके में, जहां वित्तीय/व्यावसायिक केंद्र और सरकारी कार्यालय स्थित हैं, वहां विरोध-प्रदर्शनों से कामकाज बाधित होता है। मिलिंद देवड़ा की यह मांग और चिट्ठी ऐसे वक्त में आई है, जब कुछ दिनों पहले ही ओबीसी आरक्षण की मांग पर मनोज जरांगे की अगुवाई में मराठा आंदलनकारियों के प्रदर्शन की वजह से मुंबई की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी चिट्ठी साझा करते हुए देवड़ा ने लिखा है, "हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर, जिसने मुंबई को लगभग ठप कर दिया है, मैंने मुख्यमंत्री@Dev_Fadnavis जी को पत्र लिखा है।" उन्होंने आगे लिखा है, “हालांकि, प्रत्येक भारतीय को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) यह सुनिश्चित करे कि महाराष्ट्र का राजनीतिक और आर्थिक केंद्र ठप न हो।” संजय राउत शिंदे पर भड़के दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया है कि उन्हें जानकारी है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मुंबई में मराठा आंदोलन और उनके विरोध-प्रदर्शनों की व्यवस्था करने में शामिल थे। राउत ने मिलिंद देवड़ा की चिट्ठी साझा करते हुए एक्स पर मराठी में लिखा, “अमित शाह द्वारा प्रायोजित शिंदे गुट का असली चेहरा यही है; न्याय की मांग के लिए एकजुट हो रहे मराठी लोगों पर इनके पेट का दर्द उजागर हो गया है। शिंदे गुट के सांसद मिलिंद देवड़ा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मुंबई में मराठी लोगों के आंदोलन की अनुमति न देने की मांग की है। बालासाहेब की तस्वीर का इस्तेमाल बंद करो!” पांच दिनों तक मुंबई में जनजीवन रहा बाधित बता दें कि मराठा नेता मनोज जरांगे-पाटिल के नेतृत्व में मराठा समुदाय के लिए शिक्षा एवं नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग को हुए विरोध प्रदर्शन से शहर के कई हिस्सों में दैनिक जनजीवन बाधित हो गया था। बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन (बेस्ट) उपक्रम ने विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर अपना परिचालन कुछ दिनों तक रोक दिया था। हालांकि, अब शहर में स्थिति सामान्य सी हो गई है। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) से भी बस सेवाएं पुनः शुरू कर दी गई हैं।