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अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद का बड़ा रक्तदान अभियान, पोस्टर भी हुआ जारी

 नई दिल्ली अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से 17 सितंबर को विश्वव्यापी मेगा रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। देशभर के शहरों के साथ 50 से ज्यादा देशों में 7500 से अधिक शिविर आयोजित किए जाएंगे। रक्तदान अमृत महोत्सव 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में भी रक्तदान शिविर आयोजित होंगे, जिसमें बड़ी संख्या में लोग रक्तदान करेंगे। सिक्किम में राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर, पंजाब में राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने रक्तदान अमृत महोत्सव 2.0 के पोस्टर का विमोचन किया। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने बैनर का विमोचन किया। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से गत 10 वर्षों में आयोजित मेगा रक्तदान शिविरों में 10 लाख से अधिक यूनिट रक्त एकत्र किया जा चुका है। इस बार फिर से कीर्तिमान रचने की तैयारी है। परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि वैश्विक स्तर पर रक्त की कमी को पूरा करने, युवाओं को रक्तदान के प्रति जागरूक करने एवं मानवता की सेवा के उद्देश्य से यह आयोजन होगा। 2022 में एकत्र हुआ था 5600 यूनिट ब्लड बता दें कि 17 सितंबर को अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद का स्थापना दिवस है। इस मौके पर 2022 में भी रक्तदान शिविर का आयोजन कई शहरों में किया गया था, जिसमें 5600 यूनिट ब्लड एकत्र हुआ था. इस ब्लड को जरूरतमंदों तक पहुंचाकर उनकी मदद की गई। तेरापंथ युवक परिषद ने ज्यादा से ज्यादा संख्या में रक्तदान कर कैंप को सफल बनाने की अपील की है।

आज उपराष्ट्रपति चुनाव का परिणाम, सांसदों की कल हुई मतदान ट्रेनिंग के बाद हुआ रोमांचक मुकाबला

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति के लिए आज मंगलवार को मतदान होगा। उसी दिन शाम तक नतीजे घोषित होंगे। इसके साथ ही देश को 50 दिन बाद जगदीप धनखड़ की जगह नया उपराष्ट्रपति मिलेगा। 21 जुलाई को धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने के चलते चुनाव हो रहा है। पिछले दो दशकों में उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत का मार्जिन लगातार बढ़ा है। 2002 में भैरों सिंह शेखावत ने 149 वोट से जीत दर्ज की थी। वहीं, 2022 में धनखड़ ने विपक्ष की मार्गरेट अल्वा को 346 वोट से हराया था। NDA ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन और विपक्षी गठबंधन इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुदर्शन रेड्‌डी को उम्मीदवार बनाया है। आंकड़ों में NDA को स्पष्ट बढ़त है। हालांकि संसद में विपक्ष की मजबूती से पिछले दो दशक में पहली बार मुकाबला करीबी हो सकता है।  भाजपा सांसदों को उपराष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग की जानकारी दी गई । वहीं, इंडिया गठबंधन भी अपने सांसदों को मतदान प्रक्रिया समझाने के लिए मॉक पोल हुआ । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहयोगी दलों को डिनर भी दिया । चुनाव का शेड्यूल: सुबह 10 बजे वोटिंग, 6 बजे नतीजे मतदान 9 सितंबर, सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संसद भवन में होगा। वोटों की गिनती शाम 6 बजे से और तुरंत परिणाम घोषित होंगे। हर सांसद को विशेष पेन से बैलेट पर पहली वरीयता दर्ज करनी होगी। ऐसा न करने पर वोट अमान्य होगा। हर वोट का मूल्य एक समान होगा। 2017 में 11 और 2022 में 15 वोट अमान्य हुए थे। नियम: लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य देते हैं वोट उपराष्ट्रपति पद के लिए लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य वोट देते हैं। हालांकि इसके लिए व्हिप नहीं जारी हो सकती। सभी सांसद पार्टी लाइन पर वोट करें तो एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन के 439 और विपक्ष के रेड्डी के 324 वोट माने जा रहे हैं। हालांकि गुप्त मतदान में क्रॉस वोटिंग दोनों तरफ से समीकरण बिगाड़ सकती है। इसलिए दोनों ओर से पूरी तैयारी की जा रही है। लोकसभा में कुल सांसदों की संख्या 542 है। एक सीट खाली है। एनडीए के 293 सांसद हैं। वहीं, राज्यसभा में 245 सांसद हैं। 5 सीट खाली हैं। एनडीए के पास 129 सांसद हैं। यह मानते हुए कि उपराष्ट्रपति के लिए नामांकित सदस्य भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे। इस तरह, सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। बहुमत के लिए 391 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। अगस्त 2022 में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे। वहीं विपक्षी उम्मीदवार मार्गेट अल्वा को सिर्फ 182 वोट मिले थे। तब 56 सांसदों ने वोट नहीं डाला था। 2000 से लगातार बढ़ा जीत का अंतर 2002: भैरों सिंह शेखावत (एनडीए) ने सुशील शिंदे (कांग्रेस) को 149 वोट से हराया। 2007: हामिद अंसारी (यूपीए) ने नजमा हेपतुल्ला (एनडीए) को 233 वोट से हराया। 2012: अंसारी दोबारा निर्वाचित हुए। एनडीए के जसवंत सिंह को 252 वोट से हराया। 2017: एनडीए के वेंकैया नायडू ने विपक्ष के गोपालकृष्ण गांधी को 272 वोट से मात दी। 2022: धनखड़ ने एनडीए प्रत्याशी के तौर पर मार्गरेट अल्वा को 346 वोट से हराया। उपराष्ट्रपति चुनाव का 'नंबर गेम' समझें उपराष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मतदान करते हैं. इस लिहाज से दोनों सदनों के कुल सांसदों की संख्या 781 है. इस लिहाज से जीत के लिए 392 सांसदों का समर्थन चाहिए. लोकसभा – 542 (अध्यक्ष को छोड़कर) एनडीए: 293 विपक्ष: 234 अन्य: 15 राज्यसभा – कुल संख्या 245-6 = 239 एनडीए: 132 विपक्ष: 77 अन्य: 30 'संख्यात्मक' लड़ाई बनाम 'नैतिक' लड़ाई! एनडीए ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु से आने वाले सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है. ऐसे में शुरू से ही यह बात स्पष्ट थी कि विपक्ष दक्षिण से एक उम्मीदवार उतारेगा. विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ब्लॉक ने तेलंगाना से आने वाले बी. सुदर्शन रेड्डी को उतारकर चुनावी लड़ाई को संख्यात्मक से ज़्यादा प्रतीकात्मक बना दिया है. 'इंडिया' ब्लॉक अपने घटक दलों को एकजुट रखने के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त संख्या जुटाने की उम्मीद लगाए है, क्योंकि तेलुगु अस्मिता के ज़रिए वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों को लुभाने की कवायद है. सुदर्शन रेड्डी ने जगन मोहन रेड्डी से मुलाकात की, लेकिन जगन ने उनका समर्थन करने में असमर्थता जताई, क्योंकि जगन पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एनडीए उम्मीदवार का समर्थन देने का वादा कर चुके थे. हालांकि, विपक्ष इस बात को समझने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि उन्होंने संविधान की रक्षा और लोकतंत्र की भावना की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी की प्रशंसा की. साथ ही जगन ने अनुरोध किया कि सुदर्शन की उम्मीदवारी का समर्थन करने में उनकी असमर्थता को गलत न समझा जाए. विपक्ष को 'अंतरात्मा की आवाज़' का सहारा विपक्ष उम्मीद कर रहा है कि उपराष्ट्रपति का चुनाव जितना साफ दिख रहा है, उतना है नहीं. कई सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर वोटिंग कर सकते हैं. बी. सुदर्शन रेड्डी कह भी चुके हैं कि उपराष्ट्रपति चुनाव में व्हिप नहीं होता है. ऐसे में कई विपक्षी सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर वोटिंग करेंगे. कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने शराब घोटाले मामले के आरोपी सांसद मिथुन रेड्डी की रिहाई पर टीडीपी और वाईएसआरसी के बीच प्रतिद्वंद्विता का हवाला देते हुए कहा, 'अब अंतरिम ज़मानत पर वह कुछ समय के लिए आज़ाद हैं. इसलिए नहीं कि न्याय हुआ, बल्कि इसलिए कि उन्हें उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना वोट देना है. असली सस्पेंस यह है कि क्या टीडीपी के लोग बीजेपी के उस उम्मीदवार को वोट देंगे जिसने उन्हें जेल भेजा? या न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी को वोट देंगे जो संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं?' सत्ता पक्ष को 'नंबर गेम' से दिख रही उम्मीद सीपी राधाकृष्णन को एनडीए के 'नंबर गेम' पर अपनी जीत साफ दिख रही है. एनडीए के पास लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 132 का समर्थन है. इस तरह 425 सांसदों का समर्थन साफ दिख रहा है. इससे एनडीए की जीत तय मानी जा रही है, लेकिन 2022 में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को मिले 528 वोटों की तुलना में यह कम है. हालांकि, बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व सीपी राधाकृष्णन की जीत के मार्जिन को बढ़ाने के लिए … Read more

नए Pakistan Census में खुलासा, मस्जिदों की संख्या स्कूलों और अस्पतालों से बहुत ज्यादा

कराची  अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली किसी से छुपी नहीं है. देश में हालात ऐसे हैं कि लोग दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं. राशन के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े रहना आम बात हो गई है, जबकि महंगाई आसमान छू रही है. इन विपरीत परिस्थितियों के बीच पाकिस्तान पर एक पुरानी कहावत सटीक बैठती है 'घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने.' अब इसी बदहाली की असली तस्वीर सामने आई है. हाल ही में पाकिस्तान ने पहली बार अपनी आर्थिक जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, और यह रिपोर्ट बहुत ही चौंकाने वाली है. आर्थिक रिपोर्ट से मिले आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि देश की अर्थव्यवस्था किस कदर चरमरा चुकी है. पाकिस्तान में 6,00,000 से ज्यादा मस्जिदें और 36,000 मदरसे हैं, जबकि मात्र 23,000 कारखाने हैं। पाकिस्तान की पहली आर्थिक जनगणना में ये बात सामने आई है। इसे पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने जारी किया है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब नकदी संकट से जूझ रहा पाकिस्तान करीब 61 हजार करोड़ रुपए के बेलआउट पैकेज की दूसरी समीक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ बातचीत कर रहा है। मात्र 2.42 लाख स्कूल और 214 यूनिवर्सिटी रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 2,42000 स्कूल, 11568 कॉलेज और मात्र 214 यूनिवर्सिटी हैं। कॉलेजों में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत ज्यादा है। इससे पता चलता है कि शिक्षा और कल-कारखानों की जगह देश ने मस्जिदों और मदरसों पर निवेश किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 27 लाख रिटेल शॉप्स, 1.88 लाख होलसेल की दुकानें, 2.56 लाख होटल और 1.19 लाख अस्पताल हैं। 250 से ज्यादा रोजगार वाले मात्र 7086 प्रतिष्ठान पाकिस्तान के अंदर सबसे ज्यादा विकसित राज्य पंजाब है, जहाँ देश की 58 फीसदी प्रतिष्ठान हैं। इसके बाद सिंध में 20 फीसदी, खैबर पख्तूनख्वा में 15 फीसदी और बलूचिस्तान में 6 फीसदी हैं। राजधानी इस्लामाबाद में 1 फीसदी से कम प्रतिष्ठान हैं। पंजाब में मदरसे और मस्जिदें भी सबसे ज्यादा हैं। देश में छोटे कारोबार का बोलबाला हैं। यहाँ 71 लाख ऐसे बिजनेस हैं जहाँ 1 से 50 लोग काम करते हैं। जबकि 35351 ऐसे प्रतिष्ठान हैं जहाँ 50 से 250 लोग काम करते हैं। सिर्फ 7086 ऐसे बिजनेस यूनिट्स हैं जहां 250 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। मस्जिदों- मदरसों की तुलना में फैक्ट्री काफी कम देश में कुल 400 लाख स्थाई यूनिट्स हैं जिनमें से 72 लाख रोजगार देती हैं। देश में 2023 तक 254 लाख लोग काम कर रहे थे। इनमें सबसे ज्यादा सर्विस सेक्टर में 113 लाख लोग हैं यानी करीब 45 फीसदी। 76 लाख लोग सोशल सेक्टर में हैं जो करीब 30 फीसदी हैं। जबकि 22 फीसदी लोग प्रोडक्शन सेक्टर में काम करते हैं। देश में करीब 6.04 लाख मस्जिदें हैं जबकि 36331 मदरसे हैं। पाकिस्तान के हालात को ये रिपोर्ट बयाँ कर रहा है। गंभीर आर्थिक संकट की एक अहम वजह पिछले कुछ दशकों में देश में इस्लामिक कट्टरता को माना जा रहा है। यही वजह है कि देश में मस्जिदों, मदरसों की संख्या, कारखानों से कहीं अधिक है। शिक्षण संस्थान कम हैं और जो हैं वहाँ की शिक्षा का स्तर भी विश्वस्तरीय नहीं है। जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें पाकिस्तान का हाल      देश भर में केवल 11,568 कॉलेज और 214 विश्वविद्यालय हैं। स्वास्थ्य सेवा भी लोगों के हिसाब से अपर्याप्त हैं। कुपोषण और बीमारी से जूझ रहे देश में 2,083 लोगों पर सिर्फ एक अस्पताल उपलब्ध है।     1.09 करोड़ लोग पशुपालन, सिलाई, खाद्य पैकेजिंग और ऑनलाइन सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जो औपचारिक रोजगार के अवसरों की कमी को दर्शाता है।     आर्थिक जनगणना के अनुसार, 71.43 लाख व्यवसाय 253.44 लाख लोगों को रोजगार दे रहे हैं। इनमें केवल 2,50,000 ही औपचारिक रूप से प्रतिभूति और विनिमय आयोग में पंजीकृत हैं, जो अविकसित अर्थव्यवस्था की प्रकृति को दर्शाता है।     सूक्ष्म और लघु उद्यम व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र पर हावी हैं, जहां 95 प्रतिशत प्रतिष्ठान दस से कम लोगों को रोजगार देते हैं।     अकेले सेवा क्षेत्र में लगभग 58 प्रतिशत कार्यबल मौजूद है, जबकि उत्पादन और विनिर्माण क्षेत्र बहुत पीछे है। क्षेत्रीय असमानताएं भी उजागर हुई हैं, जहां आर्थिक प्रतिष्ठानों और सामाजिक बुनियादी ढांचे की संख्या के मामले में पंजाब और सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान से आगे हैं।  

नेपाल में बवाल, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों में झड़प; PM ओली ने बुलाई आपात बैठक

 काठमांडू  पड़ोसी मुल्क नेपाल में फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाए जाने को लेकर युवक सड़कों पर उतर आए. काठमांडू समेत कई शहरों में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी हुई है. हालात पर काबू पाने के लिए कर्फ्यू लगाया गया और सेना की तैनाती की गई है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार बैन हटाए और पारदर्शिता लाए. काठमांडू में तो प्रदर्शन हिंसक हो गया और युवाओं ने संसद भवन में घुस कर जमकर तोड़फोड़ औेर आगजनी की. पुलिस ने फिर आंसू गैस, पानी की बौछार और यहां तक की रबर बुलेट का इस्तेमाल किया.हालात पर काबू पाने के लिए नेपाल की सरकार ने काठमांडू, पोखरा समेत कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया और सड़कों पर सेना की तैनाती कर दी है.  इस प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की मौत भी हुई है और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. सोशल मीडिया बैन, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के आवास पर सुरक्षा बढ़ाई गई नेपाल में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार को लेकर ओली सरकार के खिलाफ युवाओं का प्रदर्शन हिंसक हो गया है. अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है और 250 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के आवास पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. युवा प्रदर्शनकारी पीएम ओली के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.  काठमांडू में कर्फ्यू का दायरा बढ़ाया गया काठमांडू में कर्फ्यू का दायरा बढ़ाया गया है. अब पाबंदियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के आवासों के साथ-साथ सिंहदरबार क्षेत्र तक लागू होंगी. शुरुआत में कर्फ्यू केवल बनेश्वर के कुछ हिस्सों में लगाया गया था, जब प्रदर्शनकारी प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुस आए थे. लेकिन स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इसे बढ़ाकर राष्ट्रपति भवन (शीतल निवास क्षेत्र), महाराजगंज, उपराष्ट्रपति का निवास (लैनचौर), सिंहदरबार के चारों ओर, प्रधानमंत्री का निवास (बालुवाटार) और आसपास के इलाकों तक कर दिया है.    मरने वालों का आंकड़ा 20 पहुंचा, 25 की हालत नाज़ुक नेपाल में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़प में मौत का आंकड़ा 20 पहुंच गया है. इनमें से 18 की मौत काठमांडू और दो की इटाहारी में हुई. संसद भवन के पास अभी माहौल तनावपूर्ण है.  दूसरी ओर 100 से ज्यादा लोग घायल हैं. इनमें से 25 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है. अस्पतालों में घायलों की संख्या बढ़ने की वजह से स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हुई है.   काठमांडू में प्रदर्शन के दौरान घायल लोगों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश  रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्रालय के सचिव प्रदीप पौडेल ने निर्देश दिया है कि राजधानी काठमांडू में प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाए.  तीन और शहरों में लगा कर्फ्यू युवाओं के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए सरकार कर्फ्यू का दायरा लगातार बढ़ाते जा रही है. रुपन्देही, बुटवल और भैरहवा में अब कर्फ्यू लगा दिया गया है. सूत्रों के अनुसार, इसके अलावा स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए नेपाल की सेना की ओर से सड़कों पर सैनिकों की संख्या में वृद्धि की गई है. भैरहवा भारत से लगने वाली सीमा पर ही स्थित शहर है. नेपाल मानवाधिकार आयोग ने युवा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कड़ी कार्रवाई की निंदा की नेपाल मानवाधिकार आयोग ने युवा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कड़ी कार्रवाई की निंदा की है. आयोग ने कहा कि पुलिस और सरकार प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए अत्याधिक बल का प्रयोग किया. कभी आंसू गैस के गोले, रबर की गोलियां, कभी बैटन तो कभी पानी की तोप का इस्तेमाल किया गया.  नेपाल के पत्रकार ने प्रदर्शन के स्तर बढ़ने के बीच बताई तीन मुख्य वजह आजतक से नेपाल के पत्रकार साबिन धामला ने युवाओं के प्रदर्शन से बातचीत की है. उन्होंने कहा- काठमांडू के अलावा अन्य शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं और स्थिती और बिगड़ते जा रही है. Gen-Z के आंदोलन को सरकार ने पहले कम आंका गया. सरकार सोच रही थी कि इस प्रदर्शन का कोई लीडर नहीं तो ये लोग क्या ही कर लेंगे. नाखुश-नाराज और जो बेचैन युवा थे, उसको ये सोशल मीडिया पर पाबंदी ट्रिगर कर गई. ये बड़े कारण हैं जो प्रदर्शन को और व्यापक कर दिया.  नेपाल में हो रहे इन प्रदर्शनों के पीछे वजह मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध है. नेपाल की सड़कों पर हजारों की संख्या में युवाओं की भीड़ देखी जा रही है. ये लोग भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर लगे बैन को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. आपको बता दें कि नेपाल में फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, यूट्यूब और स्नैपचैट पर पाबंदी लगा दी गई है, जिससे युवा काफी नाराज हैं.  बुटवल, भैरहवा और ईटहरी में सख्‍ती नेपाल में Gen Z प्रोटेस्ट के तेज होते ही प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए कई शहरों में कर्फ्यू लगा दिया है. बुटवल, भैरहवा और ईटहरी में धारा 144 जैसी पाबंदियाँ लागू कर दी गईं, जिसके तहत किसी भी तरह की सभा, रैली या धरना-प्रदर्शन पर रोक रहेगी. रूपनदेही और सुनसरी ज‍िला प्रशासन ने ऐलान किया कि हालात को काबू में रखने और शांति बहाल करने के लिए यह कदम उठाया गया है.  नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के घर पथराव नेपाल के झापा ज‍िले के दमक में हालात गरमा गए जब लोगों ने पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली के घर पर पत्थर बरसा दिए. गुस्से में आए प्रदर्शनकारियों ने ईस्ट-वेस्ट हाइवे पर टायर जलाकर रोड जाम कर दिया, जिससे गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं. माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की. फिलहाल इलाके में भारी सुरक्षा तैनात है. लोगों का कहना है कि यह विरोध स्थानीय मुद्दों और ओली के कामकाज को लेकर बढ़ती नाराज़गी की वजह से भड़का. पुलिस का दावा है कि अब स्थिति काबू में है, लेकिन नजर लगातार रखी जा रही है. नेपाल में सेना ने संभाला सड़कों पर मोर्चा नेपाल में प्रदर्शन हिंसक होने के बाद सड़कों पर सेना ने मोर्चा संभाल लिया है. वहीं कुछ प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते थे लेकिन पुलिस की फायरिंग के बाद चीज़ें बिगड़ गईं. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उन पर गोलियां चला रही है.

सेना और नौसेना कमांडो का 17000 फीट पर अभ्यास, क्षमता और समन्वय बढ़ाने का प्रयास

कोलकाता भारतीय सेना के पैरा स्पेशल फोर्सेज और नौसेना के मरीन कमांडो (मार्कोस) ने सिक्किम में बेहद कठिन परिस्थितियों में संयुक्त स्कूबा और लड़ाकू डाइविंग अभ्यास किया। यह अभ्यास  17,000 फीट की ऊंचाई पर एक सप्ताह तक चला। रक्षा अधिकारियों ने इस संयुक्त अभ्यास के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों बलों के बीच तालमेल बढ़ाना, उनके विशेष युद्ध कौशल को निखारना और विविध व चुनौतीपूर्ण इलाकों में अभियानों के लिए उनकी तैयारी सुनिश्चित करना है। तथा इससे यह सुनिश्चित करना होता है कि भारत की विशिष्ट सेनाएं हिमालय से लेकर गहरे समुद्र तक विविध भूभागों में मिशन के लिए तैयार रहें।   उन्होंने बताया कि उच्च ऊंचाई वाले प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने ओपन सर्किट एयर डाइविंग, क्लोज सर्किट प्योर ऑक्सीजन डाइविंग, अत्यधिक ठंडे पानी की स्थिति में 17 मीटर की गहराई तक गोता लगाया तथा कॉम्बैट नाइट डाइविंग की। 30 अगस्त से पांच सितंबर तक चला अभ्यास यह प्रशिक्षण 30 अगस्त से 5 सितंबर के बीच बर्फीले पानी और दुर्गम इलाके में आयोजित किया गया। इस दौरान कमांडो ने ओपन-सर्किट एयर डाइविंग, क्लोज-सर्किट प्योर ऑक्सीजन डाइविंग, और अत्यधिक ठंडे पानी में 17 मीटर की गहराई तक गोताखोरी का अभ्यास किया। इसके अलावा, उन्होंने रात के समय में भी लड़ाकू गोताखोरी का भी अभ्यास किया। इस बारे में एक रक्षा अधिकारी ने बताया कि इस तरह का प्रशिक्षण सैनिकों को भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए तैयार करने के लिए आवश्यक है, जहां अप्रत्याशितता ही एकमात्र स्थिरता है। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यास से दुर्लभ उच्च ऊंचाई की स्थितियों में काम करना, बर्फीले पानी में सटीक कार्य करना और संयुक्त अभियानों में लड़ाकू गोताखोरी को एकीकृत करते हैं। इस दौरान टीम कमांडर ने कहा कि इन चरम स्थितियों में प्रशिक्षण से सैनिक की सहनशक्ति, कौशल और मानसिक शक्ति के हर पहलू का परीक्षण होता है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करता है कि जब भी आवश्यकता हो, हमारी टीमें किसी भी वातावरण में प्रभावी ढंग से काम कर सकें, चाहे वह कितना भी कठिन या चुनौतीपूर्ण क्यों न हो।  

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में मुठभेड़ जारी, सुरक्षाबलों ने आतंकियों को किया निशाना

जम्मू जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ में अब तक दो आतंकियों को मार गिराया गया है, जबकि भारतीय सेना का एक जवान बलिदान हो गया है। इस मुठभेड़ में दो अन्य जवान घायल भी हुए हैं। ऑपरेशन अब भी जारी है। तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग की। इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी जवाब दिया। फायरिंग में एक अफसर के घायल होने की खबर है। इलाके में तलाशी अभियान जारी है। कश्मीर जोन पुलिस के अनुसार, खुफिया जानकारी के आधार पर कुलगाम के गुड्डर जंगल में मुठभेड़ हो रही है। जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की एसओजी काम पर हैं। तलाशी अभियान के दौरान जंगल में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग की है, सुरक्षाबलों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया है। दोनों तरफ से तेज गोलीबारी हुई। खबर मिली है कि एक अफसर घायल हो गया है। घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।   भारतीय सेना के अनुसार, अभियान के दौरान एक आतंकवादी मारा गया। एक जूनियर कमीशन अधिकारी घायल हो गया। अभियान जारी है। फिलहाल सुरक्षाबलों ने जंगल को घेर लिया है। 

22 सितंबर से सस्ते होंगे प्रोडक्ट्स? GST कटौती पर दुकानदारों की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली.  सरकार ने दिवाली से पहले देशवासियों को बड़ा तोहफा देते हुए रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले घरेलू सामानों से लेकर कार-बाइक तक पर लागू जीएसटी को घटा दिया है। जीएसटी काउंसिल की बीते 3 सितंबर को हुई बैठक में चार की जगह सिर्फ दो जीएसटी स्लैब रखे गए हैं, जो 5% और 18% के हैं। जबकि 12% और 28% को हटा दिया गया है। इसके बाद तेल, साबुन, शैंपू, दूध, मक्खन, घी से लेकर टीवी, फ्रिज, एसी समेत तमाम सामानों का स्लैब चेंज हुआ है, जिससे इनपर टैक्स घट गया है और नई दरें 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाली हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या इस तारीख से ग्राहकों को सस्ते रेट में सामान मिलने लगेगा? आजतक ने दुकानदारों की राय जानी और इसके असर को समझा।।। पुराने स्टॉक को लेकर बड़ी परेशानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 3 सितंबर को जीएसटी रेट कट का ऐलान किए जाने के बाद ये जानने के लिए दुकानदारों से बात की कि क्या 22 सितंबर के बाद खुदरा दुकानदार नई लागू सस्ती दरों पर सामान को घाटा सहकर बेचेंगें और इससे दुकानदारों के बिजनेस पर क्या असर होगा? इस पर खुदरा दुकानदारों और रिटेलरों ने अपनी-अपनी राय रखी। नोएडा में किराने का दुकान चलाने वाले तेजपाल सिंह ने बताया कि रिटेलर के पास तो पुराने माल का स्टॉक भरा पड़ा है। क्योंकि हम इसे थोड़ा-थोड़ा करके बेचते हैं और जीएसटी रेट कट के बाद अभी तो पता ही नहीं रेट कितनी कमी आई है। उन्होंने कहा कि अगर समान आगे से महंगा आएगा, तो फिर हम महंगा बेचेंगे।उन्होंने कहा कि खुदरा दुकानदार 100 ग्राम से 500 ग्राम या किलो के भाव में बेंचते हैं, तो पूरी आने वाले समय में ही कीमतों के बारे में पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।  एक अन्य दुकानदार नरेश का जीएसटी सुधार को लेकर लिए गए फैसले पर कहना है कि सरकार का काम अच्छा है इससे हम लोगों को फायदा होगा, लेकिन आगे देखने वाली बात होगी कि यह कितना असरदार साबित होता है। हम लोग दाल, चीनी, चावल बेचते हैं, तो उनके रेट किस तरह रहेंगे, इसका पता तो नई दरें लागू होने के बाद हम तक पहुंचने वाले सामान के बाद ही सही से पता चल पाएगा। लेकिन जो माल स्टॉक में है, उस पुराने माल को तो हम लोग अभी इसी रेट पर बेचेंगे, जब पीछे से जीएसटी कम होकर आएगा, तो हम भी सस्ता कर देंगे।  सवाल- कितने तैयार हैं दुकानदार?  सरकार के जीएसटी कट के फैसले के बाद चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने भी बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ने करीब 400 वस्तुओं और सेवाओं पर  GST दरों में बड़ी कटौती की है, जो 22 सितंबर से लागू होने वाली हैं। इनमें फूड प्रोडक्ट्स से लेकर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें, इलेक्ट्रॉनिक्स, कार-बाइक्स, बीमा पॉलिसी तक शामिल हैं, जो सस्ते हो जाएंगे। सीटीआई के मुताबिक, सरकार चाहती है कि इस बदलाव का सीधा फायदा आम जनता तक पहुंचे। लेकिन सवाल यह है कि आने वाले दिनों में लोगों को जीएसटी कटौती का फायदा देने के लिए व्यापारी और दुकानदार कितने तैयार हैं? इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि यह बड़ा सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि पहले ही पुरानी दरों वाला हजारों टन माल दुकानों और गोदामों में भरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे पुराने सामान पर दाम कैसे घटाएं और ग्राहकों को इसका फायदा कैसे दे पाएं। 22 सितंबर से पहले के माल पर पुरानी दरों का ही टैग और दाम होगा, अब उसी माल को घटे हुए दाम पर बेचने के लिए कंपनियों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और दुकानदारों को आपसी समन्वय करना होगा। इन तरीकों से हल्का होगा बोझ बृजेश गोयल ने दुकानदारों पर पड़ने वाले बोझ को हल्का करने के कुछ तरीके भी शेयर किए। उन्होंने कहा प्राइस एडजस्टमेंट से पुराने स्टॉक को लेकर पैदा हुई समस्या कम हो सकती है। इसके लिए कंपनियां पुरानी दरों वाले सामान के लिए डीलरों को क्रेडिट नोट देंगी। उदाहरण के तौर पर अगर किसी डीलर ने साबुन का एक कार्टून पुरानी GST की दरों के हिसाब से खरीदा है और अब उसकी कीमत घट गई है, तो फिर कंपनी उसे बराबर का क्रेडिट देगी, इससे डीलर नुकसान में नहीं रहेगा और ग्राहकों को सामान भी सस्ता मिलेगा। सीटीआई चेयरमैन के मुताबिक, रिटेल सेक्टर की दिग्गज कंपनियां रिलायंस, डीमार्ट के पास मजबूत तकनीकी सिस्टम है, वे अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर और पीओएल मशीनों को तुरंत अपडेट भी कर सकते हैं, लेकिन दूसरी ओर छोटे दुकानदारों और मोहल्लों के दुकान चलाने वाले किराना व्यापारियों को यह बदलाव करने में थोड़ी दिक्कत पेश आ सकती है, क्योंकि उनके पास उस तरह का तकनीक उपलब्ध नहीं है। बृजेश गोयल के मुताबिक, कंपनियों को साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, बिस्कुट जैसे उत्पादों पर नई MRP वाले स्टीकर लगाने पड़ेंगे या फिर हो सकता है कुछ कंपनियां कीमत घटाने की जगह उस सामान के पैकिंग का वजन बढ़ा दें, जैसे 10 रुपये वाले बिस्किट के पैकेट में ज्यादा बिस्किट मिलने लगें, लेकिन प्राइस पुराना ही रहे।  दुकानदारों के लिए बड़ी चुनौती CTI चेयरमैन बृजेश गोयल की मानें, तो कुल मिलाकर सरकार द्वारा तय की गई नई दरें 22 सितंबर से ही लागू होंगी और आम उपभोक्ताओं को GST कटौती का लाभ पहुंचाना छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाली है, क्योंकि पुरानी जीएसटी दरों का सामान नई दरों के हिसाब से बेचना दुकानदारों के लिए घाटे का सौदा भी साबित हो सकता है।

चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट की हिदायत, SIR डॉक्यूमेंट्स में आधार को किया शामिल

पटना  बिहार में चुनाव आयोग की ओर से चल रहे SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण में अब आधार को भी मान्यता रहेगी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में आदेश दिया और चुनाव आयोग से कहा कि 11 अन्य दस्तावेजों की तरह आधार को भी मान्यता दी जाए। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग किसी की ओर से दिए गए आधार की वैधता की जांच कर सकता है। इस तरह अब वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए आधार को भी मान्यता मिल गई है, जिसकी डिमांड लंबे समय से की जा रही थी। बेंच ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड को SIR के लिए वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि SIR के लिए आधार कार्ड को पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाए। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार रहेगा कि वह आधार कार्ड की प्रमाणिकता के बारे में जांच कर ले। इस तरह आधार कार्ड को जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, राशन कार्ड समेत अन्य 11 दस्तावेजों की तरह ही मान्यता मिलेगी। बेंच ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह आज ही आधार कार्ड को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दे ताकि स्पष्ट संदेश दिया जा सके। बेंच ने यह भी कहा कि आधार कार्ड सिर्फ पहचान का ही प्रमाण है। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग का पक्ष रख रहे वकील ने यह भी कहा कि SIR के दौरान ऐसे लोग भी पाए गए हैं, जो यहां के वोटर बने हुए थे। लेकिन वास्तव में वे घुसपैठिए हैं और अवैध तौर पर भारत में प्रवेश कर के आए हैं। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह एक समस्या है। इसी को लेकर उन्होंने कहा कि आधार कार्ड का वेरिफिकेशन चुनाव आयोग की ओर से किया जा सकता है। बता दें कि यही वजह है कि चुनाव आयोग कहता रहा है कि आधार कार्ड को पता या फिर नागरिकता का आधार नहीं माना जा सकता। गौरतलब है कि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR की प्रक्रिया में वोटर्स को पूरा वक्त दिया जाएगा और नामांकन से एक दिन पहले तक यह जारी रहेगा।

अब कर सकेंगे ज्यादा बड़ा ट्रांजैक्शन! NPCI ने बढ़ाई UPI लिमिट, जानें नई सीमा

नई दिल्ली  नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन लिमिट्स में बड़ा बदलाव किया है। नई सीमाएं 15 सितंबर 2025 से लागू होंगी। इसका उद्देश्य रिटेल ग्राहकों को बड़े भुगतानों में सुविधा देना है। खासतौर पर बीमा प्रीमियम, क्रेडिट कार्ड बिल, सरकारी भुगतान, निवेश और यात्रा जैसे बड़े लेनदेन अब एक ही ट्रांजेक्शन में पूरे किए जा सकेंगे। जहां पहले बड़े भुगतानों को कई हिस्सों में बांटना पड़ता था। अब यह परेशानी खत्म हो जाएगी। हालांकि, P2P (पर्सन टू पर्सन) ट्रांसफर की सीमा अभी भी प्रतिदिन 1 लाख रुपये ही रहेगी। क्रेडिट कार्ड और लोन भुगतान नए नियमों के तहत अब क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान के लिए प्रति लेनदेन सीमा 5 लाख रुपये और दैनिक सीमा 6 लाख रुपये तय की गई है। इसी तरह लोन और ईएमआई भुगतान की सीमा 5 लाख रुपये प्रति लेनदेन और दैनिक सीमा 10 लाख रुपये कर दी गई है।   निवेश और बीमा प्रीमियम पहले कैपिटल मार्केट निवेश और बीमा प्रीमियम की अधिकतम सीमा 2 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति लेनदेन और 10 लाख रुपये दैनिक सीमा कर दिया गया है। इससे निवेशक और बीमा ग्राहक दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। यात्रा और सरकारी भुगतान यात्रा उद्योग में अब 5 लाख रुपये तक का भुगतान एक ही ट्रांजेक्शन में संभव होगा। इसी तरह, सरकारी ई-मार्केटप्लेस और टैक्स पेमेंट्स की सीमा भी 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। बैंकिंग और फॉरेक्स सेवाएं डिजिटल ऑनबोर्डिंग के जरिए टर्म डिपॉजिट की सीमा पहले 2 लाख रुपये थी। अब इसे 5 लाख रुपये प्रति दिन कर दिया गया है। डिजिटल अकाउंट ओपनिंग की सीमा 2 लाख रुपये ही रहेगी। फॉरेक्स पेमेंट्स (BBPS) की सीमा भी अब 5 लाख रुपये प्रति लेनदेन और दैनिक 5 लाख रुपये कर दी गई है। क्यों अहम है यह बदलाव     बड़े भुगतान छोटे हिस्सों में बांटने की जरूरत नहीं।     बीमा, ईएमआई, निवेश और सरकारी टैक्स जैसे बड़े लेनदेन आसान।     व्यवसायिक उत्पादकता और डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा।     बैंकों को अपनी जोखिम नीति अनुसार लोअर कैप लगाने की स्वतंत्रता।

साजिश का पर्दाफाश: NIA ने जम्मू-कश्मीर समेत पांच राज्यों में छापेमारी की

श्रीनगर  एनआईए ने आतंकी साजिश मामले में जम्मू-कश्मीर और पांच राज्यों में ताबड़तोड़ ऐक्शन शुरू किया है। सोमवार को कम से कम 22 ठिकानों पर छापेमारी हुई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एक आतंकी साजिश से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में की जा रही है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में बारामूला, कुलगाम, अनंतनाग और पुलवामा जिलों में तलाशी जारी है। जानकारी के मुताबिक मामला आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। एनआईए की टीम सोमवार सुबह ही बारामूला के जंगम गांव पहुंच गई। यहां रशीद लोन के घर पर छापेमारी की गई। इस मामले पर एनआईए ने अब तक कोई बयान जारी नहीं किया है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाले हैं। अधिकारियों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के कुलगाम, अनंतनाग, पुलवामा और बारामुला में तलाशी जारी है। कई जगहों से मोबाइल फोन और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इससे पहले जून में एनआईए ने जम्मू-कश्मीर में ही 32 ठिकानों पर छापेमारी की थी। बिहार में एनआईए को बड़ी सफलता बिहार में एनआईए को बड़ी सफलता मिली है। एनआईए की टीम ने खालिस्तानी आतंकी शरणजीत को गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार को छापेमारी के दौरान गोपालपुर से गिरप्तार किया गया। स्वर्ण मंदिर में ग्रेनेड अटैक मामले में शरणजीत कुमार उर्फ शनी आरोपी है। वह पंजाब के गुरदासपुर के बटाला का रहने वाला है।