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साल की सबसे बड़ी Amazon सेल: सस्ते में खरीदें स्मार्टफोन, TV और ढेरों गैजेट्स, 23 सितंबर से शुरुआत

मुंबई  Amazon पर नई सेल 'ग्रेट इंडियन फेस्टिव' शुरू होने वाली है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर साल की सबसे बड़ी सेल 23 सितंबर से शुरू होगी. अगर आप प्राइम मेंबर हैं, तो आपको इस सेल का एक्सेस एक दिन पहले मिल जाएगा. इस सेल का फायदा उठाकर आप इलेक्ट्रॉनिक्स, होम अप्लायंस और दूसरे प्रोडक्ट्स सस्ते में खरीद सकते हैं.  ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर Amazon Great Indian Festival Sale की माइक्रोसाइट भी लाइव हो गई है. सेल में कई ऑफर्स मिलेंगे, जिन्हें कंपनी ने टीज करना शुरू कर दिया है. हालांकि, ऑफर्स को कंपनी ने अभी रिवील नहीं किया है. सेल में फ्लैट डिस्काउंट, बैंक ऑफर, एक्सचेंज बोनस और EMI का विकल्प मिलेगा. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.   मोबाइल फोन्स पर मिलेंगी खास डील्स?  Amazon ने अभी सिर्फ ऑफर्स को टीज किया है, इन्हें कन्फर्म नहीं किया है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 17 सितंबर को स्मार्टफोन्स पर मिलने वाले ऑफर्स को रिवील करेगा. यहां से आप Samsung Galaxy S24 Ultra को अब तक की सबसे कम कीमत पर खरीद पाएंगे. संभव है कि ये फोन आधे से भी कम दाम पर मिले.  इसके अलावा आपको iPhone 15 पर अच्छी डील मिलेगी. ये स्मार्टफोन अब तक के बेस्ट ऑफर पर मिलेगा. कंपनी इसे 50 हजार रुपये से कम में बेच सकती है. iPhone और Samsung के अलावा आपको OnePlus 13R, iQOO Neo 10R, Redmi A4, Realme Narzo 80 Lite 5G और दूसरे फोन्स पर डिस्काउंट मिलेगा.  फ्लैगशिप फोन्स पर डिस्काउंट  सेल में Samsung Galaxy S25 Ultra 5G, S24 Ultra 5G, Xiaomi 15 Ultra, iQOO 13, iPhone 15, OnePlus 13s, OnePlus 13R जैसे हाई-एंड फोन्स को आप सस्ते में खरीद सकते हैं.  फोन्स ही नहीं आप स्मार्ट टीवी, वॉशिंग मशीन, लैपटॉप, रेफ्रिजेरट को भी सस्ते में खरीद सकते हैं. इन सभी प्रोडक्ट्स पर फ्लैट डिस्काउंट के साथ ही आपको बैंक ऑफर और एक्सचेंज बोनस भी मिलेगा. ऐमेजॉन की इस सेल में आपको कई प्रोडक्ट्स पर साल की बेस्ट डील्स मिल सकती हैं.  कंपनी ने साफ किया है कि इस सेल में 40 परसेंट के डिस्काउंट पर स्मार्टफोन मिलेंगे. वहीं इलेट्रॉनिक्स और फैशन प्रोडक्ट्स पर 80 परसेंट तक की छूट मिलेगी. टीवी और दूसरे बड़े होम अप्लायंस को आप 65 फीसदी के डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं. सेल से आप Amazon प्रोडक्ट्स को आधी कीमत पर खरीद पाएंगे.

फॉरेक्स मार्केट में मजबूत भारत: विदेशी मुद्रा भंडार 698.26 अरब डॉलर, सोना भंडार भी चढ़ा

नई दिल्ली भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 5 सितंबर को समाप्त हुए हफ्ते में सालाना आधार पर 4.03 अरब डॉलर बढ़कर 698.26 अरब डॉलर हो गया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को दी गई। देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार बढ़त देखी जा रही है। पिछले महीने विदेशी मुद्रा भंडार 3.51 अरब डॉलर बढ़कर 694.2 अरब डॉलर हो गया है। आरबीआई के डेटा के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा आस्तियां (एफसीए) का मूल्य 54 करोड़ डॉलर बढ़कर 584.47 अरब डॉलर हो गया है। विदेशी मुद्रा आस्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी इकाइयों के मूल्यवृद्धि या मूल्यह्रास का प्रभाव डॉलर के रूप में शामिल होता है। समीक्षा अवधि में विदेशी मुद्रा भंडार के अहम घटकों में से एक गोल्ड रिजर्व 3.53 अरब डॉलर बढ़कर 90.29 अरब डॉलर हो गया। भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न अनिश्चितता के बीच, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सुरक्षित निवेश के रूप में गोल्ड के रिजर्व को तेजी से बढ़ा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने के शेयर को 2021 से लगभग दोगुना कर लिया है। केंद्रीय बैंक के डेटा के मुताबिक, समीक्षा अवधि में विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) की वैल्यू 18.74 अरब डॉलर रह गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की रिजर्व पोजीशन भी 20 लाख डॉलर बढ़कर 4.75 अरब डॉलर हो गई है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार आरबीआई को रुपए को तेजी से गिरने से रोकने और उसकी अस्थिरता को कम करने के लिए ज्यादा डॉलर जारी करके हाजिर और अग्रिम मुद्रा बाजारों में हस्तक्षेप करने में सक्षम बनाता है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने अगस्त में कहा था कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने से ज्यादा के माल आयात और लगभग 96 प्रतिशत बकाया विदेशी ऋण के लिए पर्याप्त है। वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा, "अनिश्चित वैश्विक नीतिगत माहौल के बावजूद, जुलाई और वित्त वर्ष 2026 में भारत के सेवा और व्यापारिक निर्यात में अब तक मजबूत वृद्धि हुई है और यह वैश्विक निर्यात वृद्धि से कहीं अधिक है।"

महंगाई पर नया डेटा: अगस्त में खुदरा दर 2.07%, खाने-पीने की चीज़ों के दाम गिरे

नई दिल्ली  भारत की खुदरा महंगाई दर अगस्त में सालाना आधार पर 2.07 प्रतिशत रही है। इसमें जुलाई के मुकाबले 46 आधार अंक की वृद्धि देखने को मिली है। यह जानकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को दी गई। इससे पहले जुलाई में खुदरा महंगाई दर 1.61 प्रतिशत थी। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि महंगाई दर का निचले स्तरों पर बने रहने की वजह खाद्य महंगाई दर का नकारात्मक रहना है, जो कि अगस्त 2025 में सालाना आधार पर -0.69 प्रतिशत रही है। अगस्त में खाद्य महंगाई दर ग्रामीण क्षेत्र में -0.70 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में -0.58 प्रतिशत रही है। इससे पहले जुलाई में खाद्य महंगाई दर -1.76 प्रतिशत थी। सरकार की ओर से जारी किए गए डेटा में बताया गया कि अगस्त 2025 में ग्रामीण सेक्टर में हेडलाइन और खाद्य महंगाई दर में बढ़त देखने को मिली है। अगस्त 2025 में ग्रामीण इलाकों में हेडलाइन महंगाई दर 1.69 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई 2025 में 1.18 प्रतिशत थी। अगस्त 2025 में ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य महंगाई दर में -0.70 प्रतिशत रही है, जो कि अगस्त में -1.74 प्रतिशत थी। आंकड़ों के मुताबिक, शहरी इलाकों में हेडलाइन महंगाई दर अगस्त 2025 में 2.47 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई 2025 में 2.10 प्रतिशत थी। शहरी इलाकों में अगस्त में खाद्य महंगाई -0.58 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई -1.90 प्रतिशत थी। अगस्त में स्वास्थ्य महंगाई दर सालाना आधार पर 4.40 प्रतिशत रही है, जो कि जुलाई में 4.57 प्रतिशत थी। परिवहन और संचार में महंगाई दर अगस्त में 1.94 प्रतिशत रही है, जो जुलाई में 2.12 प्रतिशत थी। ईंधन और प्रकाश में महंगाई दर अगस्त 2025 में 2.43 प्रतिशत थी, जोकि जुलाई में 2.67 प्रतिशत थी। अगस्त में सबसे अधिक 9.04 प्रतिशत की महंगाई दर केरल में थी। इसके बाद कर्नाटक (3.81 प्रतिशत), जम्मू और कश्मीर (3.75 प्रतिशत), पंजाब (3.51 प्रतिशत) और तमिलनाडु (2.93 प्रतिशत) का स्थान था।

जुलाई के मुकाबले अगस्त में बढ़ी महंगाई, रिटेल इनफ्लेशन 1.61% से बढ़कर 2.07% पर पहुंची

नई दिल्ली अगस्त में रिटेल महंगाई दर जुलाई के 1.6% से थोड़ा बढ़कर 2.7% पर पहुंच गई है। इसकी वजह कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी है।रिटेल महंगाई के आधिकारिक आंकड़े आज सरकार ने जारी किए हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी, RBI का लक्ष्य महंगाई को 4% ±2% की सीमा में रखने का है। जुलाई में खाने-पीने के सामानों की कीमत घटी थीं महंगाई के बास्केट में लगभग 50% योगदान खाने-पीने की चीजों का होता है। इसकी महीने-दर-महीने की महंगाई माइनस 1.06% से घटकर माइनस 1.76% हो गई है। जून महीने में ग्रामीण महंगाई दर 1.72% से घटकर 1.18% हो गई है। वहीं शहरी महंगाई 2.56% से घटकर 2.05% पर आ गई है। RBI ने महंगाई का अनुमान घटाया 4 से 6 अगस्त तक हुई RBI मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में भी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 3.7% से घटाकर 3.1% कर दिया था। महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। इस तरह बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों का अत्यधिक बहाव या चीजों की शॉर्टेज महंगाई का कारण बनता है। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। सब्जियों और दालों की अच्छी पैदावार का असर रिपोर्ट के अनुसार, लगातार अच्छी पैदावार और सप्लाई में सुधार की वजह से सब्जियों और दालों के दाम कम हुए हैं. सितंबर में भी टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. यही वजह है कि जरूरी सामानों का दाम नियंत्रण में है. प्याज और आलू में सबसे तेज गिरावट बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि प्याज की खुदरा कीमतों में सालाना आधार पर 37.5% की गिरावट दर्ज की गई है, जो जनवरी 2021 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है. आलू की कीमतें भी 44 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. दालों की कीमतें भी घटीं दालों में भी लगातार गिरावट जारी है. अगस्त में तुअर/अरहर की कीमतों में 29% तक की कमी आई है. इसके अलावा उड़द में 8.9%, मूंग में 5.2% और मसूर में 1.4% की गिरावट देखी गई है. ग्लोबल मार्केट और सरकार के कदम से मदद वैश्विक स्तर पर भी खाद्य और ऊर्जा की कीमतें नियंत्रण में हैं. साथ ही, सरकार ने FMCG और टिकाऊ वस्तुओं पर GST दरें कम की हैं, जिससे महंगाई को और राहत मिली है. बैंक ऑफ बड़ौदा का अनुमान है कि इसका असर CPI पर 55-75 बेसिस प्वाइंट तक दिखेगा. खरीफ सीजन का समर्थन रिपोर्ट में कहा गया है कि इस खरीफ सीजन में दालों की बुवाई का क्षेत्र बढ़ा है. इसी वजह से उत्पादन अच्छा हुआ है और कीमतों पर दबाव कम हुआ है. अनाजों में भी चावल की कीमतें धीरे-धीरे नीचे आ रही हैं. CPI से तय होती है महंगाई एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल मार्केट से सामान खरीदते हैं। इससे जुड़ी कीमतों में हुए बदलाव को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है। हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है। अमेरिका में बढ़ी महंगाई! गैस, ग्रॉसरी, होटल और हवाई टिकट सब कुछ हुआ महंगा अमेरिका में खुदरा महंगाई दर अगस्त 2025 में बढ़कर 2.9 प्रतिशत हो गई, जो इस साल जनवरी के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गैस, किराने का सामान, होटल के कमरे, हवाई किराया, कपड़े और पुरानी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी इसके पीछे प्रमुख कारण रही। जुलाई में खुदरा महंगाई दर 2.7 प्रतिशत थी, यानी अगस्त में इसमें 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि उस समय हुई है जब उपभोक्ता पहले से ही बढ़ती लागतों के दबाव में हैं, जिससे घरेलू बजट पर असर पड़ रहा है। कोर महंगाई भी बनी हुई है ऊंची न्यूज एजेंसी भाषा ने रिपोर्ट के अनुसार बताया कि अगर खाद्य और ईंधन की अस्थिर कीमतों को हटा दिया जाए, तो कोर महंगाई दर अगस्त में 3.1 प्रतिशत रही, जो जुलाई के समान है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि महंगाई का दबाव केवल अस्थायी कारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक रूप से अर्थव्यवस्था में फैला हुआ है। फेड की अगली बैठक पर टिकी नजरें यह डेटा ऐसे समय आया है जब फेडरल रिजर्व अगले सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक करने वाला है। अनुमान लगाया जा रहा है कि नीति निर्धारक प्रमुख ब्याज दर को मौजूदा 4.3 प्रतिशत से घटाकर लगभग 4.1 प्रतिशत कर सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दरों में कटौती का दबाव और बढ़ती महंगाई मिलकर फेड के सामने एक कठिन स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं। उन्हें एक संतुलन साधना होगा। जहां आर्थिक विकास को समर्थन मिले, लेकिन महंगाई भी काबू में रहे।

सिर्फ 20 रुपये में बनती है दवा, बिकती है 100 में – मेडिकल स्टोर्स कितनी कमाई कर रहे?

नई दिल्ली दवा की असली कीमत और उस पर मिलने वाला मुनाफा शायद ही आम लोगों को पता हो. हम और आप जिस दवा की स्ट्रिप 100 रुपये में खरीदते हैं, वही दवा मेडिकल स्टोर वाले को कितने में पड़ती है और उस पर कितना मार्जिन जुड़ता है, यह सुनकर आप चौंक सकते हैं. इसका जवाब जानने के लिए हमने दवाइयों के डिस्ट्रीब्यूटर  से बात की. डिस्ट्रीब्यूटर ने विस्तार से बताया कि दवाइयां बेचने पर कितना मार्जिन मिलता है. आइए, आपको भी बताते हैं. जब हमने डिस्ट्रीब्यूटर से पूछा कि मेडिकल वाले दवाइयों पर कितना प्रॉफिट कमा लेते हैं, तब उन्होंने बताया कि दवाइयों में प्रॉफिट मार्जिन, कंपनियों, दवा के प्रकार और कई जगहों पर निर्भर करता है. मुख्य तौर पर देखें तो दवाइयों का प्रॉफिट मार्जिन 4-5 तरह का होता है.  फार्मा दवाइयों पर मार्जिन सबसे पहले, फार्मा कैटेगरी की दवाइयों में 20 से 30% का मार्जिन होता है. इसमें न्यूनतम बीस प्रतिशत तो होता ही है. इस कैटेगरी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव डॉक्टर को दवाई के लिए परामर्श देता है और उसके अनुसार जो दवाइयां बेची जाती हैं, उनमें बीस से पैंतीस प्रतिशत का मार्जिन मिल जाता है.  जेनरिक दवाइयों पर ज्यादा फायदा दूसरी तरह की दवाइयां होती हैं जेनरिक. जेनरिक दवाइयों में प्रॉफिट मार्जिन ज्यादा होता है. जेनरिक दवाइयां रिटेलर खुद अपने पास से बेचने की कोशिश करता है या ग्राहक को बेचता है. रिटेलर्स को इस तरह की दवाइयां बेचने में 50 से 75 प्रतिशत का प्रॉफिट होता है.  डॉक्टर्स के जरिए भी होती है कमाई इसके अलावा, तीसरी कैटेगरी है पर्सनल मोनोपोलाइज़्ड कंपनियां. इसमें डॉक्टरों को उन दवाइयों को रिकमेंड करने के लिए कहा जाता है, जिसमें डॉक्टर का कमीशन भी शामिल हो सकता है. इस तरह की दवाइयों में 30 से 35 फीसदी तक का प्रॉफिट मार्जिन होता है. इनमें मैटेरियल का प्रतिशत थोड़ा कम होता है. क्या क्वालिटी का मसला? इसके अलावा, कुछ दवाइयां ऐसी होती हैं, जो अलग-अलग कंपनियां बनाती हैं. उनमें मैटेरियल का इस्तेमाल 90 फीसदी तक ही होता है और ऐसी दवाइयों में 90 फीसदी तक बचत होती है.  दरअसल, दवाइयों में मैटेरियल उपयोग का क्राइटेरिया 90 से 110 फीसदी तक होता है. कई कंपनियां दवाइयों में 90 फीसदी तक के मैटेरियल का इस्तेमाल करती हैं, जो रिटेलर को काफी कम कीमत में मिलती है. जेनरिक में मैटेरियल 100 फीसदी तक होता है. सरकार के नियम हैं कि दवा 90% से कम या 110% से ज्यादा नहीं हो सकती. मतलब, 90% में भी अगर सामग्री पूरी तरह से है, तो दवा शुद्ध मानी जाएगी.   यही कारण है कि कई दवा कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमाती हैं, क्योंकि वे दवा में मिनिमम मात्रा तक ही मैटेरियल मिलाती हैं. वहीं, बड़ी कंपनियां दवाइयों में अच्छी मात्रा में सामग्री मिलाती हैं. ऐसे में कुछ कंपनियों की दवाइयों में 90 फीसदी तक प्रॉफिट होता है. मान लीजिए अगर दवा 100 रुपये की है तो फार्मा की बड़ी कंपनी उसे 65 रुपये में बनाएगी. वहीं, जेनरिक दवा 25 रुपये में बनकर तैयार हो जाएगी.  खांसी की दवाई पर कितना मार्जिन? अनीष बताते हैं कि जो खांसी की जेनरिक दवाई होती है, वह 8 रुपये में बनकर आती है और दुकानदारों को 20 से 30 रुपये तक मिल जाती है. अब इसकी MRP 80-100 रुपये या ज्यादा होती है और ऐसे में इसमें अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है.

GST कटौती ने इस कार को किया किफायती, त्योहारों पर ग्राहकों को मिलेगा बड़ा ऑफर

मुंबई होंडा कार्स इंडिया लिमिटेड (HCIL) की लग्जरी सिटी सेडान को 22 सितंबर से खरीदने सस्ता हो जाएगा। दरअसल, नए GST स्लैब का असर इस कार की कीमत पर भी देखने को मिलेगा। ऐसे में कंपनी ने बताया कि इस कार पर ग्राहकों का 57,500 रुपए के टैक्स की बचत होगी। इतना ही नहीं, कंपनी इस कार पर इस महीने 1.07 लाख रुपए के बेनिफिट भी दे रही है। यानी इस सेडान को खरीदने पर कुल मिलाकर 1.64 लाख रुपए तक का फायदा मिल जाएगा। होंडा सिटी में e:HEV के साथ SV, V, VX और ZX वैरिएंट आते हैं। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 12.38 लाख रुपए है। भारत में इसका मुकाबला स्कोडा स्लाविया, हुंडई वरना और फॉक्सवैगन वर्टूस से होता है। होंडा सिटी का इंजन, फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस होंडा सिटी में 1.5-लीटर का पेट्रोल इंजन दिया गया है. जो 121bhp की पावर और 145Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है। कार के इंजन को 6-स्पीड मैनुअल और 7-स्टेप सीबीटी गियरबॉक्स से जोड़ा गया है। कंपनी 1.5-लीटर ऑटोमेटिक वैरिएंट में 17.8 किलोमीटर प्रति लीटर माइलेज देने का दावा करती है। जबकि 1.5-लीटर CVT वैरिएंट 18.4 किमी प्रति लीटर तक माइलेज देता है। वही, हाइब्रिड मॉडल का माइलेज 26.5Km/l तक है। होंडा सिटी में वायरलेस एंड्रॉइड ऑटो और एपल कारप्ले के साथ 8-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, लैदर अपहोल्स्ट्री, रेन-सेंसिंग वाइपर, वायरलैस फोन चार्जर, क्रूज कंट्रोल, सनरूफ और एम्बिएंट लाइटिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं।सेफ्टी के लिए 6 एयरबैग, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, रियर व्यू कैमरा, ABS के साथ EBD और ADAS जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसमें होंडा ADAS सेफ्टी फीचर्स भी ऑफर करती है। छोटी और लग्जरी कारों पर नए GST 2.0 की कंडीशन छोटी पेट्रोल और पेट्रोल हाइब्रिड कारों पर अब 18% GST ही देना होगा। इसी तरह CNG और LPG कारों पर भी यही टैक्स लिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए कंडीशन ये तय की गई है कि पेट्रोल और CNG कारों में 1200cc या इससे कम कैपेसिटी वाला इंजन हो। या फिर इन कारों की लंबाई 4 मीटर से ज्यादा ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसी तरह, डीजल और डीजल हाइब्रिड कारों पर भी अब 28% के बजाय 18% GST लगेगा, लेकिन ये छूट सिर्फ 1500cc पावर तक कैपिसिटी वाली और 4 मीटर तक लंबी कारों को ही मिलेगी। दूसरी तरफ, लग्जरी और मिड साइज कारों के लिए अब 40% टैक्स कर दिया है। सरकार ने इन्हें लग्जरी आइटम मानते हुए 40% GST स्लैब के दायरे में रखा है। 1200cc से बड़ी पेट्रोल कारें और 1500cc से अधिक क्षमता वाली डीजल कारें इस दायरे में आएंगी। ऐसे में यूटीलिटी व्हीकल (UV), स्पोर्ट्स यूटीलिटी व्हीकल (SUV), मल्टी यूटीलिटी व्हीकल (MUV) और मल्टी पर्पज व्हीकल (MPV) या क्रॉस ओवर यूटीलिटी (XUV) व्हीकल पर 40% GST देना होगा। जिन व्हीकल का ग्राउंड क्लीयरेंस 170mm से अधिक होगा वो भी इसी कैटेगरी में आएंगे। सरकार ने लग्जरी और बड़ी कारों म को 40% कर दिया है। हालांकि, अच्छी खबर ये है कि पुराने GST स्टैब की तुलना में इसे कम किया गया है। जी हां, पहले लग्जरी कारों पर 28% GST और 22% सेस लगता था। इस तरह ग्राहकों को कुल 50% टैक्स देना पड़ता था। अब नए GST स्लैब में इसे घटाकर कुल 40% कर दिया गया है। यानी ग्राहकों को यहां भी 10% टैक्स से छुटकारा दिया गया है। यानी इसमें 28% GST को बढ़ाकर 40% कर दिया गया है, लेकिन सेस को 00% कर दिया है।

मार्केट में जोरदार उछाल, JBM और Lupin के शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

नई दिल्ली शेयर बाजार आज भी तेजी पर खुला, लेकिन इसमें बड़ी उछाल नहीं देखी जा रही है. 9.23 बजे सुबह सेंसेक्‍स 155.26 अंक चढ़कर 81,703.99 पर कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी 51.80 अंक चढ़कर 25,057.30 पर कारोबार कर रहा था. निफ्टी बैंक में तेज गिरावट आई है, ये अभी 54.95 अंक गिरकर 54,614.65 पर कारोबार कर रहा है.  बीएसई टॉप 30 शेयरों की बात करें तो 9 शेयरों में गिरावट आई है, जबकि 21 शेयर तेजी दिखा रहे हैं. इंफोसिस के शेयर में 2 फीसदी और मारुति, टाटा मोटर्स जैसे शेयर्स में 1 फीसदी की तेजी आई है. हिंदुस्‍तान लीवर और HDFC Bank के शेयर में आज 1 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है.  FMCG, मीडिया और पीएसयू बैंक सेक्‍टर में गिरावट है. ऑटो, आईटी, मेटल और फार्मा के शेयर में अच्‍छी तेजी है.  क्‍यों नहीं चल रहा शेयर बाजार?  शेयर बाजार में तेजी तो आ रही है, लेकिन निवेशकों के उम्‍मीद के मुताबिक उतनी उछाल नहीं देखी जा रही है. एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि टैरिफ पर अन‍िश्चितता बने रहने के कारण भारतीय मार्केट को मोमेंटम नहीं मिल पा रहा है. टैरिफ के कारण ग्‍लोबल स्‍तर पर मार्केट भी प्रभावित हुआ है. रुपये में भी गिरावट देखी जा रही है. वहीं अमेरिका और भारत के रिश्‍तों में अभी सुधार नहीं आई है. इसके अलावा, विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार से लगातार बिकवाली कर रहे हैं.  94 शेयरों में अपर सर्किट  बीएसई के 3,187 शेयरों में से सिर्फ 1,947 शेयरों में तेजी आई है. 1055 शेयरों में गिरावट आई है और 185 शेयर अनचेंज हैं. 43 शेयरों ने आज लोअर सर्किट लगाया है, जबकि 94 शेयरों ने अपर सर्किट लगाया है. 20 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर और 56 शेयर 52 सप्‍ताह के उच्‍चतम स्‍तर पर है.  इन शेयरों में अच्‍छी तेजी JBM Auto के शेयर में आज 8 फीसदी की तेजी है. शक्ति पम्‍प के शेयर में 7.30 फीसदी की उछाल है. धानी सर्विस के शेयर में 6 फीसदी, लक्ष्‍मी ऑर्गेनिक के शेयर में 4%, एमसीएक्‍स और बीएसई के शेयर में 2 फीसदी से ज्‍यादा की उछाल आई है. Infosys और Lupin के शेयरों में भी 2 फीसदी से ज्‍यादा की तेजी आई है. 

1.10 लाख पार पहुंचा सोना, रतलाम सहित प्रदेश भर में सराफा कारोबार मंदा

रतलाम   सोने के दाम सातवें आसमान पर हैं, जिसका सीधा असर जेवरों की डिमांड पर पड़ रहा है. सोने में तूफानी तेजी के साथ सराफा बाजार में ज्वेलरी की खरीदी बुरी तरह से गिरी है. बारिश के सीजन में डिमांड पहले से ही कमजोर थी, जिसके बाद अब सोने की ऊंची कीमतों की वजह से 22 कैरेट सोने की ज्वेलरी के ऑर्डर्स में बड़ी गिरावट आई है. जिससे ज्वेलरी निर्माण से जुड़े कारीगरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. रतलाम सराफा बाजार पड़ा ठंडा शुद्ध सोने और कारीगरी के लिए प्रसिद्ध रतलाम के सराफा बाजार से ग्राहकों की रौनक गायब है. ऐसे में ज्वेलरी निर्माण से जुड़े सुनार समाज और बंगाली कारीगरों को नए ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं. जिससे इन कारीगरों का काम करीब 3 महीनो से बंद पड़ा हुआ है. रतलाम सराफा में ज्वेलरी निर्माण से जुड़े व्यावसायी  ने बताया, '' सोने की कारीगरी से जुड़े लोगों की स्थिति बहुत खराब है. रतलाम ही नहीं पूरे भारत में स्वर्णकारो की यही हालत है.'' कोरोना काल से ज्यादा बुरा हाल थेवा कला आर्टिस्ट और स्वर्णकार ने बताया, '' सोने के दाम में तेजी और अनिश्चितता की वजह से पूरे सराफा का कामकाज ठप्प हो गया है. यह स्थिति कोरोना काल और लॉकडाउन से भी अधिक गंभीर है क्योंकि सोने के दाम को लेकर अस्थिरता बनी हुई है. ऐसे में ग्राहक भी हल्के कैरेट ज्वेलरी या अन्य विकल्पों पर जा रहे हैं. ग्राहकी मंदी होने से नए ऑर्डर मिलना बिल्कुल बंद हो गए हैं.'' गौरतलब है कि रतलाम में 500 के करीब बंगाली कारीगर स्वर्णकारी का कार्य करते हैं. बताया कि 3 महीने से कोई काम ही नहीं मिला है. कुछ कारीगर तो वापस अपने गांव चले गए हैं. क्यों नहीं मिल रहा काम? दरअसल, वर्तमान में 24 कैरेट सोने के दाम 1 लाख 10 हजार प्रति 10 ग्राम के करीब हैं, जिससे ग्राहकी कमजोर हुई है. बाजार की अस्थिरता की वजह से सोने के दामों में वृद्धि या कमी होने का डर बना हुआ है जिसकी वजह से 22 कैरेट ज्वैलरी की मांग तेजी से घटी है. यही वजह है कि वर्तमान में ज्वेलरी निर्माण से जुड़े लोगों को कम नहीं मिल पा रहा है. 3 महीने से काम नहीं मिलने की वजह से खाली हाथ बैठे ज्वेलरी निर्माताओं और कारीगरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है. इसके बाद इन कारीगरों ने सरकार से राहत देने और कोई ठोस कदम उठाने की गुहार लगाई है.

GST में छूट का दिखा असर: वाहन बाजार में बुकिंग का उछाल, लेकिन सप्लाई चेन बना रोड़ा

ग्वालियर जीएसटी काउंसिल ने फेस्टिवल सीजन को देखते हुए आम लोगों की जेब पर बड़ा फायदा देने का ऐलान किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, इंश्योरेंस और अन्य रोजमर्रा की चीजों पर जीएसटी दरों में कटौती की गई है, लेकिन इसका एक साइड इफेक्ट ये हुआ है कि बाजार फिलहाल थम सा गया है। ज्यादातर लोग नई दरों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे खरीदारी 70-80 फीसदी तक गिर गई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में बुकिंग जारी, डिलीवरी रुकी ग्वालियर ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरिकांत समाधिया ने बताया कि सरकार की ओर से जीएसटी की दरें कम करने के बाद कंपनियां दिमाग लगा रही हैं। कंपनियां सेस का कंपन्सेशन एडजस्ट नहीं करना चाहती, ऐसे में वे स्कीम्स को बंद करने का मन बना रही हैं। जहां तक कारों की खरीदारी की बात है तो फिलहाल सिर्फ वाहनों की बुकिंग हो रही है, खरीदारी 22 सितंबर के बाद होगी। एक छोटी गाड़ी पर 50 हजार तक की बचत होगी। सरकार को 22 सितंबर को ही घोषणा करनी थी इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी केदारनाथ गुप्ता ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में जीएसटी की दरें 28 से कम होकर 18 फीसदी होने वाली हैं। पर सरकार को इसकी घोषणा 22 सितंबर को ही करनी थी, फिलहाल बाजार एकदम से थम सा गया है। यानी खरीदारी 80 फीसदी तक कम हो गई है। लोग अब 22 सितंबर का ही इंतजार कर रहे हैं। एक लाख रुपए के 75 इंच के एलइडी पर 10 हजार और 55 इंच के एलइडी पर करीब 3906 रुपए की बचत होगी। नहीं करा रहे इंश्योरेंस, रिन्युअल प्रीमियम भी नहीं भर रहे स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इंश्योरेंस कंसल्टेंट प्रणव कुमार दास ने बताया कि 22 सितंबर तक कोई भी व्यक्ति इंश्योरेंस कराने को तैयार नहीं है। यहां तक कि लोग अपनी रिन्युअल प्रीमियम भी नहीं जमा कर रहे। हम उन्हें समझा रहे हैं कि आपकी पॉलिसी लेप्स हो जाएगी और उसमें रिस्क कवर भी नहीं है। फिर भी लोग मानने को तैयार नहीं हैं और कह रहे हैं कि 16-17 दिनों में कुछ नहीं होगा। इसके साथ ही जिन बीमा कंपनियों ने अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए प्रतियोगिताएं निकाली थीं, उन्हें या तो बंद कर दिया गया है या फिर उनकी तारीख बढ़ा दी है। सिर्फ तीन दिन में होगा जीएसटी रजिस्ट्रेशन जीएसटी कॉउंसिल की ओर से किए गए रिफॉर्म्स में जीएसटी करदाताओं के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को भी अब बेहद सरल बना दिया गया है। कॉउंसिल ने महज 3 दिन में ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन देने की बात कही है। इससे व्यापार करने में सुगमता आएगी और विभाग के चक्कर लगाने की कोई जरूरत नहीं होगी। इसमें खास बात यह है कि ये रजिस्ट्रेशन अब बिना वेरिफिकेशन के ही प्रदान कर दिए जाएंगे। इस नई स्कीम से करीब 96 फीसदी करदाताओं को लाभ मिलेगा, जो नया पंजीयन लेते हैं। ये स्कीम एक नवंबर 2025 से चालू होगी। इसके साथ ही जीएसटी के 90 फीसदी रिफंड का रुपया प्रोविजनल आधार पर ही मिल सकेगा। सीए पंकज शर्मा ने बताया कि व्यापार की सुगमता के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाना अच्छा कदम है। इससे लंबा समय लेने वाली प्रक्रिया से बचाव होगा।

81 साल के अरबपति ने छीना एलन मस्क का ताज, जानें कितनी है उनकी नेटवर्थ

वाशिंगटन निया के टॉप अरबपतियों की लिस्ट में बड़ा फेरबदल हुआ है और लंबे समय से दुनिया के नंबर-1 अमीर की कुर्सी पर बैठे एलन मस्क से ये ताज छिन गया है. 81 साल के टेक टॉयकून और ओरेकल के को-फाउंडर लैरी एलिसन उन्हें पीछे छोड़ते हुए दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन गए हैं. ये कमाल उनकी संपत्ति में अचानक एक ही दिन में आए 100 अरब डॉलर से ज्यादा के उछाल के चलते हुआ है. आइए जानते हैं इनकी नेटवर्थ के बारे में… झटके में 8.90 लाख करोड़ रुपये बढ़ी संपत्ति टेक दिग्गज कंपनी ओरेकल कॉर्पोरेशन ने अपने शानदार तिमाही नतीजों का ऐलान क्या किया और इसके बाद अचानक दुनिया के टॉप अरबपतियों की लिस्ट में खलबली सी मच गई. दरअसल, नतीजों के बाद इसके को-फाउंडर लैरी एलिसन की नेटवर्थ में 101 अरब  डॉलर (करीब 8.90 लाख करोड़ रुपये) बढ़ गई और कंपनी के शेयरों में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला.  इतनी नेटवर्थ के साथ बने नंबर-1 अमीर ब्लूमबर्ग बिलेनियर्स इंडेक्स के अनुसार, अचानक आए इस उछाल के चलते न्यूयॉर्क में सुबह 10:10 बजे तक एलिसन की संपत्ति 393 अरब डॉलर पर पहुंच गई और इसके साथ ही उन्होंने एलन मस्क को पीछे छोड़ नंबर-1 अमीर की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया. इस समय पर लंबे समय से दुनिया के सबसे अमीर इंसान रहे एनल मस्क की नेटवर्थ 385 अरब डॉलर दर्ज की गई. किसी भी अरबपति की संपत्ति में एक ही दिन में आया ये अब तक का सबसे बड़ा उछाल है. लैरी एलिसन को मिली इस उपलब्धि के साथ ही टेस्ला और स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क का विश्व के सबसे धनी व्यक्ति के रूप में लंबा कार्यकाल समाप्त हो गया. गौरतलब है कि 81 साल के एलिसन इस उम्र में भी ओरेकल के चेयरमैन और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर के पद की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं. उनकी नेटवर्थ में अधिकांश हिस्सा उनकी कंपनी से होने वाली कमाई पर ही केंद्रित है.  बुधवार को 41% उछला ओरेकल का शेयर ओरेकल के शेयर ने इस साल जोरदार तेजी दर्ज की है और इसके चलते तेजी से को-फाउंडर लैरी एलिसन अमीरों की लिस्ट में आगे बढ़ते गए और अब सबसे रईस बन गए हैं. 2025 में अब तक ओरेकल स्टॉक में 45% से ज्यादा की तेजी आ चुकी है. बुधवार को इस शेयर में 41% का उछाल आया और इसका भाव 328.33 डॉलर पर पहुंच गया. इससे पिछले कारोबारी दिन एलिसन का शेयर 241.63 डॉलर पर क्लोज हुआ था, लेकिन बुधवार को तूफानी तेजी के साथ ये 319.19 डॉलर पर खुला और फिर तेज रफ्तार पकड़ते हुए 345.72 डॉलर तक पहुंच गया था.   टेस्ला के शेयर टूटने से मस्क को नुकसान टेस्ला और स्पेसएक्स सीईओ एनल मस्क ने पहली बार 2021 में दुनिया के सबसे अमीर इंसान का ताज अपने नाम किया था. हालांकि, इसके बाद कुछ समय के लिए ये अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस और एलवीएमएच के चेयरमैन बर्नार्ड अरनॉल्ट के पास रहा, लेकिन बीते साल फिर संपत्ति में तेज उछाल के चलते मस्क ने नंबर-1 पायदान पर कब्जा जमा लिया था. लेकिन टेस्ला के शेयरों में इस साल अब तक आई तगड़ी गिरावट का असर सीधे उनकी नेटवर्थ पर दिखा. टेस्ला शेयर 13% तक फिसला है.