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Tata Motors ने लॉन्च किया Prima E.55S इलेक्ट्रिक ट्रक, डिलीवरी हुई शुरू

मुंबई   Tata Motors की कमर्शियल व्हीकल विंग ने BillionE Mobility को अपने Tata Prima E.55S इलेक्ट्रिक प्राइम मूवर की डिलीवरी शुरू कर दी है. इसके साथ ही कंपनी ने 250 अतिरिक्त यूनिट्स के लिए एक नया ऑर्डर भी हासिल किया है. यह विकास भारत में इलेक्ट्रिक हेवी-ड्यूटी कमर्शियल व्हीकल्स के लिए एक कदम आगे है, जो खासकर लंबी दूरी के माल परिचालन में अहम है।  कंपनी ने ट्रकों के शुरुआती बैच को गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली NCR और हरियाणा सहित प्रमुख लॉजिस्टिक कॉरिडोर में डिलीवर करने की योजना बनाई है. इन वाहनों का इस्तेमाल स्टील और सीमेंट जैसे औद्योगिक सामानों के परिवहन के लिए किया जाएगा, जो मुख्य माल ढुलाई सेगमेंट में इलेक्ट्रिकफिकेशन की ओर एक बदलाव का प्रतीक है।  डिलीवरी के साथ-साथ, BillionE Mobility ने अगले 6 से 18 महीनों में अपने इलेक्ट्रिक ट्रक फ्लीट को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की योजना की रूपरेखा भी तैयार कर ली है, जिसमें 1,500 हेवी-ड्यूटी वाहनों की कुल तैनाती का लक्ष्य रखा गया है. इसके अतिरिक्त 250-यूनिट ऑर्डर इस व्यापक विस्तार का हिस्सा है।  नए Tata Prima E.55S का बैटरी पैक और रेंज Tata Prima E.55S इलेक्ट्रिक ट्रक कंपनी के i-MoEV इलेक्ट्रिक वाहन आर्किटेक्चर पर आधारित है और इसमें एक इंटीग्रेटेड ई-एक्सल सेटअप मिलता है. इस ट्रक में 450 kWh का बैटरी पैक इस्तेमाल किया गया है, जिसके बारे में कंपनी का कहना है कि यह अपने सेगमेंट में सबसे बड़ा बैटरी पैक है, जो एक बार चार्ज करने पर 350 किमी तक की रेंज प्रदान करता है।  ट्रक में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग भी मिलती है, और डुअल-गन फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी मिलता है. ट्रक मिलने वाले हार्डवेयर की बात करें तो इसमें इलेक्ट्रिक प्राइम मूवर 3-स्पीड ऑटो-शिफ्ट ट्रांसमिशन, सेफ्टी और ड्राइवर असिस्टेंट सिस्टम जैसे फीचर्स मिलते हैं।  नए Tata Prima E.55S के फीचर्स इसके अलावा, इस ट्रक में वैकल्पिक ADAS कार्यक्षमता के साथ ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम, लेन डिपार्चर वार्निंग, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, क्रूज़ कंट्रोल और एक इलेक्ट्रॉनिक ब्रेकिंग सिस्टम जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. यह मॉडल अपटाइम, परिचालन दक्षता और स्वामित्व की कुल लागत पर ध्यान देने के साथ लंबी दूरी की लॉजिस्टिक्स की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है।  Tata Motors सेवा बुनियादी ढांचे और फ्लीट मैनेजमेंट समाधान सहित अपने व्यापक ईवी पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से इन तैनाती का समर्थन कर रहा है. Tata Prima E.55S का रोलआउट और BillionE Mobility का अतिरिक्त ऑर्डर भारी कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में हरित समाधानों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है, खासकर जब बेड़े संचालक अंतर-शहर संचालन के लिए पारंपरिक डीजल-संचालित ट्रकों के विकल्प तलाश रहे हैं। 

सेंसेक्स में भारी गिरावट, 702 अंक लुड़क कर 76,847 पर बंद, निफ्टी 23,842 पर

मुंबई  हफ्ते के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। शुरुआत करीब 2% की बड़ी गिरावट के साथ हुई लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी आने से बाजार ने कुछ रिकवरी जरूर दिखाई। इसके बावजूद आखिरी घंटों तक दबाव बना रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 702.68 अंक (0.91%) गिरकर 76,847.57 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 207.95 अंक (0.86%) टूटकर 23,842.65 के स्तर पर आ गया। सबसे ज्यादा दबाव ऑटो और बैंकिंग शेयरों में देखने को मिला। Maruti Suzuki और Eicher Motors करीब 4% तक टूटे। वहीं Axis Bank, Kotak Mahindra Bank, State Bank of India और HDFC Bank में 1% से 2% से ज्यादा की गिरावट रही। फाइनेंशियल शेयरों जैसे Shriram Finance, Jio Financial Services और Bajaj Finance में भी कमजोरी दर्ज की गई। स्पाइसजेट में लगातार चौथे दिन लगा अपर सर्किट SpiceJet का शेयर सोमवार को लगातार चौथे सेशन में अपर सर्किट पर पहुंच गया। लगातार चल रहे फाइनेंशियल दबाव और हाल की कानूनी मुश्किलों के बावजूद शेयरों में यह तेजी जारी रही। दोपहर के कारोबार में शेयर 5 प्रतिशत के अपर सर्किट पर 12.88 रुपये पर लॉक हो गया, जिससे चार दिनों में इसका कुल फायदा लगभग 21.4 प्रतिशत हो गया। लंबे समय तक कमज़ोरी के दौर से गुज़रने के बाद अब SpiceJet के शेयरों में ज़बरदस्त तेज़ी आई है, और लगातार बनी हुई खरीदारी की दिलचस्पी के चलते शेयर लगातार अपर सर्किट पर पहुंच रहे हैं। कच्चे तेल में उछाल से बजाज इलेक्ट्रिकल्स समेत अन्य घरेलू उपकरण कंपनियों के शेयरों में तेजी कच्चे तेल के $100 के स्तर पर लौटने से बजाज इलेक्ट्रिकल्स और अन्य घरेलू उपकरण कंपनियों के शेयरों में 2.5% तक की बढ़त हुई। इन शेयरों में यह उछाल ऐसे समय में आया है, जब भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया है। कुकिंग गैस (LPG) की कीमतें कच्चे तेल से सीधे तौर पर जुड़ी होती हैं। जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो LPG सिलेंडर भी महंगे हो जाते हैं। जैसे-जैसे कुकिंग गैस महंगी होती जाती है, उपभोक्ता बिजली से चलने वाले इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक केतली जैसे सस्ते या ज़्यादा स्थिर विकल्पों की तलाश करने लगते हैं। BSE मिडकैप में Thermax और Voltas सबसे अधिक चढ़ने वाले शेयरों में शामिल BSE MidCap Today: आज Thermax में 5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हुई, जबकि Vedant Fashions और Ajanta Pharma 4–5 प्रतिशत ऊपर चढ़े। Sun TV Network और Voltas में भी तेजी देखी गई। बाजार ने निचले स्तरों से कुछ संभलने की कोशिश की। इसकी तीन प्रमुख वजहें रहीं…. पहला, गिरावट के बाद निवेशकों ने वैल्यू बाइंग की, जिससे निफ्टी फिर से 23,800 के ऊपर टिकने में कामयाब रहा। दूसरा, विदेशी और घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सपोर्ट दिया। FIIs और DIIs दोनों की ओर से खरीदारी देखने को मिली, वहीं म्यूचुअल फंड और SIP निवेश भी मजबूत बना रहा। तीसरा, तकनीकी रूप से 23,500–23,700 का सपोर्ट जोन मजबूत बना हुआ है, जिससे बड़ी गिरावट फिलहाल टलती दिख रही है।

Silver Price Drop: चांदी ₹6000 सस्ती, सोने में ₹1100 की कमी आई

मुंबई  सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rate) में सप्ताह के पहले दिन ही खुलने के साथ बड़ी गिरावट आई है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी का वायदा भाव बीते शुक्रवार के बंद के मुकाबले फिसलकर 2.37 लाख रुपये पर आ गया और इस हिसाब से एक झटके में चांदी 6000 रुपये से ज्यादा सस्ती हो गई. इस ताजा गिरावट के बाद अब 1 Kg Silver Price अपने हाई लेवल से 2.02 लाख रुपये प्रति किलो कम हो गया है. सोना भी फिसला है और ये सोमवार को 1100 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता हो गया है।  चांदी की कीमत खुलते ही धड़ाम  सबसे पहले बात करते हैं चांदी की कीमत में आई गिरावट के बारे में तो बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को MCX Silver Price 2,43,274 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुआ था. वहीं सप्ताह के पहले दिन 5 मई की एक्सपायरी वाली इस चांदी का प्राइस खुलने के साथ ही टूटकर 2,37,190 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से चांदी 6,084 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई।  अगर चांदी के लाइफ टाइम हाई लेवल से तुलना करें, तो ये करीब आधी कीमत (Silver Price Half) पर मिल रही है. बता दें कि जनवरी 2026 में ही सिल्वर प्राइस ने इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये का स्तर पार किया था और 4,39,337 रुपये प्रति किलो के हाई पर पहुंची थी. यहां से लगातार क्रैश होते हुए चांदी (Silver Price Crash From High) अब इस स्तर तक आ चुकी है और ये इस लेवल से 2,02,147 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती मिल रही है।  Gold का दाम हाई से अब इतना कम  चांदी की तरह सोना भी अपने हाई लेवल से लगातार फिसला है. बीच-बीच में कीमतों में आई तेजी के बावजूद ये लाइफ टाइम हाई से काफी सस्ता बना हुआ है. बीते शुक्रवार को MCX पर 5 जून की एक्सपायरी वाला सोना 1,52,652 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था और सोमवार को ये भी खुलने के साथ ही गिरकर 1,51,457 रुपये पर आ गया यानी ये कीमती पीली धातु 1,195 रुपये सस्ती हो गई।  बात हाई लेवल से गिरावट की करें, तो MCX Gold High 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जिसे इसने इस साल जनवरी महीने में ही छुआ था और चांदी की तरह इसकी कीमत भी हाई लेवल पर पहुंचने के बाद भरभराकर टूटी है. फिलहाल के ताजा रेट से तुलना करें, तो 10 Gram 24 Karat Gold Rate 51,527 रुपये सस्ता है।  US-Iran युद्ध, फिर भी गिरावट जब भी ग्लोबल टेंशन बढ़ती है, तो लोग सेफ हेवेन माने जाने वाले सोना-चांदी में निवेश को तरजीह देते हैं और इसके चलते कीमती धातुओं के दाम बढ़ने लगते हैं. लेकिन, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से Global Tension हाई पर है और फिर भी सोना-चांदी टूट रहे हैं।  इसके पीछे के कारणों की बात करें, तो मिडिल ईस्ट युद्ध से बढ़ी होर्मुज टेंशन के बीच Crude Oil Price डरा रहे हैं, बीते दिनों सीजफायर के ऐलान के बाद धड़ाम हुए कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल आने लगा है और ये 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं. ग्लोबल महंगाई का खतरा बढ़ा है और लोग अपने हाथ में कैश रखना चाहते हैं।  इसके अलावा, ग्‍लोबल निवेशक सुरक्षित मुद्रा 'डॉलर' की ओर रुख कर रहे हैं, जो युद्ध के दौरान लगातार मजबूत हुई है. मजबूत होते डॉलर और महंगाई के डर की वजह से ही जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी को रोक रहे हैं। 

US-ईरान टेंशन का असर, शेयर बाजार धड़ाम—सेंसेक्स 1600 अंक लुढ़का

मुंबई  अमेरिका-ईरान में युद्ध (US-Iran War) थमता नजर नहीं आ रहा है. पाकिस्तान में शांति वार्ता फेल होने के बाद अचानक कच्चे तेल की कीमतों में आए जोरदार उछाल (Crude Oil Price Surge) ने एक बार फिर से शेयर बाजारों का मूड खराब कर दिया है. भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह की तेजी पर ब्रेक लग गया है और सोमवार को ओपनिंग के साथ ही ये क्रैश (Stock Market Crash) हो गया।  बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खुलते ही 1600 अंकों से ज्यादा का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स 490 अंक के आसपास फिसल गया. इस बीच IndiGo, Bajaj Finance, Asian Paints से लेकर HDFC Bank तक के शेयर धराशायी नजर आए।  सेंसेक्स-निफ्टी खुलते ही क्रैश  शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,550 की तुलना में तेज गिरावट के साथ 75,937 के लेवल पर ओपन हुआ और महज कुछ सेकंड में ये गिरते हुए 75,868 पर आ गया. इस बीच एनएसई का निफ्टी-50 भी भरभराकर टूटा और अपने पिछले बंद 24,050 की तुलना में 23,589 पर खुला।  शेयर बाजार में आए इस भूचाल के बीच हर ओर कोहराम मचा हुआ नजर आया. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल सभी 30 शेयर रेड जोन में कारोबार कर रहे थे. सबसे ज्यादा बिखरने वाले स्टॉक्स की बात करें, तो IndiGo Share (4%), Maruti Share (3%), Bajaj Finance Share (2.90%), SBI Share (2.80%), Reliance Share (2.70%) और HDFC Bank Share (2.60%) की बड़ी गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे।  विदेशों से मिले थे खराब संकेत  शेयर बाजार में गिरावट के लिए पहले से ही विदेशों से खराब सिग्नल मिल रहे थे. दरअसल, अमेरिका-ईरान के बीच फिर चरम पर पहुंची टेंशन के चलते एशियाई शेयर मार्केट में हाहाकार मचा था. शुरुआती कारोबार में ही Japan Nikkei 600 अंक, Hongkong HangSeng करीब 400 अंक टूटकर कारोबार कर रहा था।  वहीं South Korea KOSPI समेत अन्य एशियाई शेयर बाजारों में CAC, DAX, FTSE-100 भी गिरावट के साथ लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे. इस बीच गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) भी 280 अंक से ज्यादा फिसलकर ट्रेड कर रहा था।  क्यों आई शेयर बाजार में गिरावट?  सोमवार को शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे US-Iran के बीच फिर से बढ़ी युद्ध की टेंशन है. पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच बातचीत फेल हुए, तो क्रूड की कीमतों ने छलांग लगा दी. इस बीच अमेरिका-ईरान दोनों ओर से लगातार चेतावनियों का सिलसिला भी जारी है, जिनसे शेयर बाजार निवेशकों का सेंटीमेंट खराब हुआ है और बाजार क्रैश हुआ है। 

HDFC बैंक और ICICI बैंक बने सबसे बड़े गेनर, रिलायंस और इंफोसिस को नुकसान

नई दिल्ल भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह आई जबरदस्त तेजी के बीच देश की सबसे मूल्यवान टॉप-10 कंपनियों में से 8 के मार्केट कैप में कुल 4,13,003.23 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। इस दौरान HDFC बैंक और ICICI बैंक सबसे बड़े मुनाफे वाले शेयर बनकर उभरे। वहीं रिलायंस और इंफोसिस कंपनियां नुकसान में रहीं। पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 4,230.7 अंक (5.77%) और निफ्टी 1,337.5 अंक (5.88%) की भारी बढ़त के साथ बंद हुए थे। एक्सपर्ट के मुताबिक बाजार में तेजी इन दो प्रमुख कारणों से आई:     अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की खबरों ने निवेशकों के सेंटीमेंट को सकारात्मक बनाया।     अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आने से घरेलू चिंताओं में कमी आई और बाजार में चौतरफा खरीदारी देखी गई। किन कंपनियों को हुआ फायदा?     HDFC बैंक: सबसे ज्यादा 91,282.67 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। अब इसका कुल मार्केट कैप 12,47,478.57 करोड़ रुपये हो गया है।     ICICI बैंक: इसकी वैल्युएशन 76,036.36 करोड़ रुपये बढ़कर 9,46,741.85 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।     Bajaj Finance: मार्केट कैप 60,980.35 करोड़ रुपये बढ़ा। अब यह कुल 5,75,206.47 करोड़ रुपये हो गया है।     Larsen & Toubro (L&T): बाजार पूंजीकरण में 47,624.97 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई और यह 5,44,736.59 करोड़ रुपये हो गया।     Bharti Airtel: कंपनी की वैल्युएशन में 45,873.43 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। अब यह बढ़कर 10,66,293.69 करोड़ रुपये हो गया है।     State Bank of India (SBI): इसका मार्केट कैप 43,614.67 करोड़ रुपये बढ़कर 9,84,629.98 करोड़ रुपये हो गया।     TCS: मार्केट कैप 26,303.49 करोड़ रुपये बढ़ा। इसी के साथ यह 9,13,331.92 करोड़ रुपये हो गया है।     Hindustan Unilever (HUL): इसकी वैल्युएशन 21,287.29 करोड़ रुपये बढ़कर 5,06,477.89 करोड़ रुपये हो गई है। इन्हें हुआ नुकसान बाजार की इस रैली के बावजूद दो दिग्गज कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट दर्ज की गई:     Infosys: इसका मार्केट कैप 3,285.03 करोड़ रुपये घटकर 5,24,124.40 करोड़ रुपये रह गया।     Reliance Industries : देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के मार्केट कैप में 947.28 करोड़ रुपये की मामूली गिरावट आई और यह 18,27,086.79 करोड़ रुपये रह गया। सबसे मूल्यवान कंपनी कौन? पिछले हफ्ते नुकसान के बाद भी रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। इसके बाद HDFC बैंक, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, इन्फोसिस और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान है।

MCX पर महंगा हुआ गोल्ड-सिल्वर, निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rate) में बीते सप्ताह तेजी दर्ज की गई, लेकिन इसके बाद भी अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से दोनों कीमती धातुएं काफी सस्ती मिल रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर एक किलो चांदी हाई से अब भी 1.96 लाख रुपये से ज्यादा सस्ती है, तो वहीं सोना भी 50,000 रुपये से कम कीमत पर मिल रहा है. अगर आप सोना-चांदी खरीदने का या इनमें निवेश का प्लान बना रहे हैं, तो फिर हफ्तेभर में इनकी कीमतों में आए बदलाव पर नजर जरूर डाल लें. चांदी चमकी, फिर भी हाई से सस्ती सबसे पहले बात करते हैं चांदी की कीमत में आए बदलाव के बारे में तो, MCX Silver Price बीते 2 अप्रैल को 2,32,495 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी, जबकि पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार ये 5 मई की एक्सपायरी वाली चांदी 2,43,300 रुपये पर क्लोज हुई. यानी हफ्तेभर में 1 Kg Silver 10,805 रुपये महंगी हो गई.   न सिर्फ एमसीएक्स पर, बल्कि घरेलू मार्केट में भी चांदी की कीमत चढ़ी है. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com पर अपडेट किए गए रेट्स को देखें, तो हफ्तेभर में चांदी 2,27,813 रुपये से चढ़कर 2,39,934 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई और इस हिसाब से ये 12,121 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है. भले ही बीते सप्ताह चांदी का भाव तेज रफ्तार के साथ उछला हो, लेकिन इस तेजी के बावजूद भी ये कीमती धातु अपने लाइफ टाइम हाई लेवल 4,39,337 रुपये प्रति किलो की तुलना में अभी भी 1,96,037 रुपये सस्ती मिल रही है. 24 कैरेट सोने का अब ये रेट बात सोने की कीमतों में आए चेंज की करें, तो हफ्तेभर में इसकी कीमत भी उछली है. बीते 2 अप्रैल को 5 जून की एक्सपायरी वाले गोल्ड का वायदा भाव 1,49,680 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो शुक्रवार को 1,52,690 रुपये पर पहुंच गया और इस हिसाब से 10 Gram 24 Karat Gold  3,010 रुपये महंगा हुआ. घरेलू मार्केट में इसकी कीमत 1,46,608 रुपये से उछलकर 1,50,330 रुपये प्रति 10 ग्राम का हो गया. चांदी की तरह से ही सोने के भाव में इस ताजा उछाल के बाद भी ये कीमती पीली धातु अपने हाई लेवल से काफी सस्ती बनी हुई है. MCX Gold Rate देखें, तो इसका लाइफ टाइम हाई लेवल 2,02,984 रुपये है और लेटेस्ट रेट 1,52,690 रुपये तुलना करें, तो Gold Rate फिलहाल यहां से 50,294 रुपये प्रति 10 ग्राम कम है. घरेलू मार्केट में अलग-अलग क्वालिटी के गोल्ड रेट पर नजर डालें, तो. गोल्ड क्वालिटी     गोल्ड रेट (GST+Making Charge के बिना) 24 Karat Gold     1,50,330 रुपये/10 ग्राम 22 Karat Gold     1,46,720 रुपये/10 ग्राम 20 Karat Gold     1,33,790 रुपये/10 ग्राम 18 Karat Gold     1,21,770 रुपये/10 ग्राम 14 Karat Gold     96,960 रुपये/10 ग्राम ज्वेलरी खरदीने से पहले जानें ये बात अगर आप  Gold-Silver Jewellery खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो फिर हफ्ते भर के रेट चेंज के साथ ही इस बात को जान लेना जरूरी है, कि आईबीजेए के द्वारा अपडेट किए गए रेट्स देशभर में एक समान होते हैं, लेकिन जब आप ज्वेलरी खरीदते हैं, तो इन पर लागू GST के साथ ही मेकिंग चार्ज भी देना होता है, जो विभिन्न राज्यों शहरों में अलग-अलग हो सकता है और इनके जुड़ने से कीमत बढ़ जाती है.

एडुटेक कंपनी फिजिक्सवाला पर ब्रोकरेज बुलिश, 140 रुपये का लक्ष्य मूल्य तय

एडुटेक कंपनी PhysicsWallah के शेयर में सुस्ती वाले माहौल के बीच ब्रोकरेज फर्म Elara सिक्योरिटीज ने इसे खरीदने की सलाह दी है। ब्रोकरेज ने इस शेयर के लिए एक टारगेट प्राइस भी दिया है जो वर्तमान कीमत से 35 पर्सेंट से भी अधिक है। शेयर का परफॉर्मेंस और टारगेट प्राइस फिजिक्सवाला के शेयर की बात करें तो अभी 101 रुपये पर है। शेयर के लिए ब्रोकरेज ने 'Buy' रेटिंग दी है। इसके साथ ही ₹140 प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू किया है। इसका मतलब है कि मौजूदा स्तरों से इसमें लगभग 35% से अधिक बढ़त की संभावना है। इस शेयर के 52 हफ्ते का हाई 162.05 रुपये और 52 हफ्ते का लो 77.75 रुपये है। क्या कहा ब्रोकरेज ने? ब्रोकरेज का मानना ​​है कि इस कंपनी की ताकत उसके ओमनीचैनल मॉडल में निहित है, जिसके तहत वह सबसे पहले मुफ्त कंटेंट और जुड़ाव के जरिए बड़ा यूजर बेस तैयार करता है और फिर उन्हें पैसे देने वाले ग्राहकों में बदल देता है। इसके मुख्य ऑफर JEE और NEET कोर्स ही हैं जबकि यह क्षेत्रीय भाषाओं और नई कैटेगरीज में भी अपना विस्तार जारी रखे हुए है। ब्रोकरेज को क्या है उम्मीद? Elara को उम्मीद है कि विकास की मजबूत गति बनी रहेगी। ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY25 और FY28 के बीच रेवेन्यू CAGR 27% और एबिटा CAGR लगभग 85% रहेगा। यह भी उम्मीद है कि FY27 तक कंपनी एडजस्टेड PAT लेवल पर मुनाफा कमाने लगेगी। अपने डिजिटल बिजनेस के साथ-साथ, कंपनी ने तेजी से बढ़ती हुई ऑफलाइन मौजूदगी भी बनाई है। कंपनी अब 200 शहरों में 300 से अधिक सेंटर चलाती है, जो क्लासरूम लर्निंग चाहने वाले स्टूडेंट्स को सेवा देते हैं। ब्रोकरेज ने मजबूत कैश जेनरेशन पर भी जोर दिया है। काफी कैश बैलेंस होने की वजह से कंपनी अपनी बैलेंस शीट पर बिना कोई दबाव डाले अपने विस्तार के लिए अंदरूनी तौर पर फंड जुटा रही है। Elara कंपनी के ऑनलाइन और ऑफलाइन बिजनेस की अलग-अलग वैल्यू लगाती है और मानती है कि इसकी ग्रोथ की संभावना और बढ़ते मुनाफे को देखते हुए, मौजूदा वैल्यूएशन अभी भी आकर्षक हैं। फिजिक्सवाला आईपीओ की डिटेल बता दें कि पिछले साल फिजिक्सवाला का आईपीओ आया था। यह ₹3480 करोड़ का एक बुक-बिल्डिंग इशू था, जिसमें ₹3100 करोड़ का नया इशू और प्रमोटर अलख पांडे और प्रतीक बूब द्वारा ₹380 करोड़ का 'ऑफर फॉर सेल' शामिल था। इसकी प्राइस बैंड ₹103 से ₹109 प्रति शेयर के बीच तय की गई थी।

महंगाई भत्ते में देरी से बढ़ी चिंता, 8वें वेतन आयोग की बैठक पर नजर

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ता यानी डीए में इजाफे का इंतजार बढ़ता जा रहा है। अप्रैल महीने के 10 दिन से भी ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अब तक कर्मचारियों के डीए बढ़ोतरी का ऐलान नहीं हुआ। इस देरी की वजह से अब केंद्रीय कर्मचारियों की अप्रैल की सैलरी पर भी असर पड़ने की आशंका है। आइए समझते हैं पूरा मामला। क्या है मामला? आमतौर पर केंद्र सरकार मार्च के महीने में होली के आसपास डीए बढ़ोतरी का ऐलान कर देती है। यह साल की पहली छमाही के लिए लागू होता है। मार्च महीने में डीए ऐलान के बाद कर्मचारियों की अगले महीने सैलरी बढ़कर आती है। इसमें जनवरी, फरवरी महीने का एरियर भी जुड़ा रहता है। हालांकि, इस बार भत्ते में देरी से अब केंद्रीय कर्मचारियों को मई महीने का इंतजार करना पड़ सकता है। दरअसल, केंद्र सरकार के कई ऐसे भी विभाग हैं जहां सैलरी कैल्कुलेशन 15 से 15 तारीख का चलता है। मतलब ये कि जो सैलरी बनती है वो पिछले महीने की 15 तारीख से चालू महीने की 15 तारीख तक की होती है। अगर डीए के ऐलान में देरी होती है तो यह संभव है कि केंद्रीय कर्मचारियों की मई की सैलरी 4 महीने यानी जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल का डीए एरियर जोड़कर बैंक अकाउंट में क्रेडिट हो। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स इस बात से सहमत हैं कि पिछले सालों के मुकाबले इस बार डीए में थोड़ी देरी हुई है। BankBazaar के CEO अधिल शेट्टी ने मनीकंट्रोल से इसकी वजह बताते हुए कहा- यह शायद एडमिनिस्ट्रेटिव सीक्वेंसिंग और 8वें CPC फ्रेमवर्क की ओर बदलाव की वजह से है, जिसके लिए अपडेटेड पे स्ट्रक्चर और महंगाई के डेटा के बीच तालमेल जरूरी होता है। उन्होंने आगे कहा कि यह देरी इरादे की नहीं, बल्कि टाइमिंग की बात लगती है। शेट्टी के अनुसार, मौजूदा रुझान लगभग 2-3 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी का संकेत दे रहे हैं जिससे DA का कुल स्तर 60 प्रतिशत के करीब या 61 प्रतिशत पहुंच जाएगा। सरकार से मांगा जा रहा स्पष्टीकरण केंद्र सरकार के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संगठनों ने वित्त मंत्रालय को पहले ही पत्र लिखकर महंगाई भत्ते (DA) के बारे में जल्द से जल्द घोषणा करने या स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने कहा-केंद्र सरकार ने DA के बारे में कोई घोषणा नहीं की है और न ही देरी का कोई कारण बताया है। सरकार को इस देरी के बारे में तुरंत कोई घोषणा करनी चाहिए या स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए। इसके अलावा, कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स के एक अन्य पत्र में कहा गया है कि DA आमतौर पर मार्च के आखिरी सप्ताह में घोषित किया जाता था और हर साल अप्रैल के पहले सप्ताह में तीन महीनों का बकाया भुगतान किया जाता था। इसकी घोषणा में हो रही देरी को लेकर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच भारी बेचैनी और आशंका है। 8वें वेतन आयोग के लिए सोमवार को बड़ी बैठक, सैलरी से लेकर पेंशन तक पर होगी बात सोमवार को नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की अहम बैठक होने वाली है। बता दें कि 13 अप्रैल की यह बैठक 12 मार्च को हुई पिछली चर्चाओं के बाद हो रही है। 8वें वेतन आयोग के लिए सोमवार को बड़ी बैठक, सैलरी से लेकर पेंशन तक पर होगी बात 8th Pay Commission latest: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 13 अप्रैल की तारीख काफी अहम है। इस दिन आठवें वेतन आयोग के लिए अपना मेमोरेंडम फाइनल किया जाएगा। इसके लिए नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की अहम बैठक होने वाली है। यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि कर्मचारियों के प्रतिनिधि सैलरी, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़ी अपनी मांगों को एक साझा मेमोरेंडम में इकट्ठा कर रहे हैं, जिसे 8वें वेतन आयोग को सौंपा जाएगा। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) के सी. श्रीकुमार ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि 13 अप्रैल की बैठक में संभवतः एक साझा ज्ञापन को अंतिम रूप दिया जाएगा। AIDEF, रेलवे, रक्षा और अन्य क्षेत्रों के कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस बैठक में अपने प्रस्तावों पर चर्चा करेगा और उन्हें अंतिम रूप देगा।

कंपनी देगी 19वीं बार डिविडेंड, 1 शेयर पर 30 रुपये का लाभ, रिकॉर्ड डेट की घोषणा

मुंबई   Muthoot Finance Ltd ने एक बार फिर से डिविडेंड देने का फैसला किया है। कंपनी ने इस बार एक शेयर पर 30 रुपये डिविडेंड देने का ऐलान किया है। इस डिविडेंड के लिए Muthoot Finance Ltd की तरफ से रिकॉर्ड डेट की जानकारी दे दी गई है। जोकि अगले हफ्ते ही है। किस दिन है रिकॉर्ड डेट? (Muthoot Finance Dividend Record date) Muthoot Finance Ltd ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया गया है कि एक शेयर पर 30 रुपये का डिविडेंड दिया जाएगा। इस डिविडेंड के लिए कंपनी ने 17 अप्रैल 2026 की तारीख को रिकॉर्ड डेट तय किया है। बता दें, कंपनी पहली बार इस साल एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने जा रही है। 19वीं बार डिविडेंड देने जा रही है कंपनी इस कंपनी ने पहली बार 2012 में डिविडेंड दिया था। तब कंपनी ने एक शेयर पर 4 रुपये का डिविडेंड बांटा था। 2013 में कंपनी ने एक शेयर पर 4.5 रुपये का डिविडेंड दिया था। आखिरी बार Muthoot Finance Ltd के शेयर 25 अप्रैल 2025 को एक्स-डिविडेंड ट्रेड किए थे। तब कंपनी ने हर एक शेयर पर 26 रुपये का डिविडेंड दिया था। बता दें, कंपनी ने अबतक एक बार भी निवेशकों को बोनस शेयर नहीं दिया है। शेयरों का प्रदर्शन कैसा है? (Muthoot Finance Stock Performance) यह स्टॉक बीएसई के क्लोजिंग के टाइम पर 2 प्रतिशत से अधिक की उछाल के बाद 3572.55 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। पिछले एक हफ्ते में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 12.41 प्रतिशत की तेजी आई है। वहीं, 6 महीने में यह स्टॉक 13.13 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बता दें, एक साल में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 66 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। Muthoot Finance Ltd का बीएसई में 52 वीक हाई 4149 रुपये और 52 वीक लो लेवल 1964.35 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 1.43 लाख करोड़ रुपये का है। 10 साल में 1896% की तेजी दो साल में Muthoot Finance Ltd ने 116 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। तीन साल में कंपनी के शेयरों का भाव 247 प्रतिशत बढ़ा है। बता दें, 10 साल से शेयरों को होल्ड करने वाले निवेशकों को अबतक 1896 प्रतिशत का फायदा मिला है।

सोने के भंडार में कौन टॉप पर? चीन टॉप-5 में नहीं, जानिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत की स्थिति

इंदौर  सोना मुसीबत का सहारा होता है. परिवार हो या देश, दोनों सोना खरीदने से पीछे नहीं हटता. लेकिन क्या आप जानते दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किस देश के पास है? भारत के पास कितना सोना है? चीन के पास कितना सोना है? पाकिस्तान और बांग्लादेश के पास कितना सोना है? और पिछले कुछ महीनों में किस देश ने सबसे ज्यादा सोना खरीदा है?  हालिया दौर में गोल्ड और सिल्वर के दाम में लंबी छलांग देखने को मिली है. सोने के साथ चांदी की कीमत आसमान छू रही हैं.  आंकड़े बताते हैं कि बीते 5 साल में ही इसमें 265 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है. चीन, पोलैंड और तुर्की से लेकर भारत ने गोल्ड रिजर्व में इजाफा किया है. यहां के सेंट्रल बैंक गोल्ड खरीदने में आगे रहे, जबकि कई देशों ने गोल्ड रिजर्व को घटाया है, इनमें फिलीपींस से लेकर श्रीलंका का नाम शामिल है.  आइए जानते हैं सोना खरीदने और बेचने में कौन से देश सबसे आगे हैं और भारत किस नंबर पर आता है।  किसने देश ने खरीदा सबसे ज्यादा सोना? वर्ल्ड ऑफ स्टेटिक की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते पांच साल यानी 2020 से लेकर 2025 तक सोना खरीदने के मामले में चीन नंबर वन पर है. चीन ने बीते पांच साल में 357.1 टन गोल्ड की खरीदारी की है. हालांकि जानकारों की मानें तो यह इससे भी ज्यादा हो सकता है. चीन के बाद गोल्ड खरीदने में पोलैंड का दूसरा स्थान है, जिसने बीते पांच साल के भीतर 314.6 टन सोना खरीदा है. तीसरे नंबर पर तुर्की का नंबर आता है, जिसने 251.8 टन गोल्ड खरीदा है।  अमेरिका के पास सबसे ज्यादा सोना अब आइए जानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किस देश के पास पड़ा है. अमेरिका सबसे बड़े सोने के भंडार पर बैठा है, अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा 8,133 टन सोना है,  यह भंडार मुख्य रूप से 'फोर्ट नॉक्स' में सुरक्षित है।    जर्मनी के पास अकूत सोना  अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा सोना जर्मनी के पास करीब 3,350 टन है, जो कि उसे यूरोप में सबसे बड़ा स्वर्ण धारक बनाता है. वहीं इटली 2,452 टन सोने के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है. फ्रांस के पास करीब 2,437 टन सोने का भंडार है।         चीन भी जमकर खरीद रहा है सोना सोने के भंडार में 5वें नंबर पर रूस का नंबर आता है, वर्तमान में रूस के पास करीब 2,330 टन सोना है. यानी टॉप-5 में अभी भी चीन नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से चीन लगातार सोने का भंडार अपने यहां बढ़ा रहा है. चीन के पास वर्तमान में लगभग 2,313.5 टन सोना है. चीन पिछले 17 महीनों से लगातार अपने भंडार में सोना जोड़ रहा है. अगर चीन इसी गति से खरीदारी जारी रखता है, तो वह जल्द ही टॉप-5 देशों में शामिल हो सकता है।                 भारत के पास सोने का बड़ा भंडार भारत का स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) साल 2026 में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास लगभग 880 टन सोना है. भारत लगातार अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोना खरीद रहा है. भारत न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि निजी तौर पर भी दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक है।  भारत भी खूब खरीद रहा है सोना दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी खरीदारी की रफ्तार तेज कर दी है. फरवरी 2026 में भारत ने करीब 18 टन सोना खरीदा है. भारत पिछले कई महीनों से लगातार सोना खरीद रहा है ताकि अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके और अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित किया जा सके. भारत, चीन और रूस जैसे देश डॉलर के प्रभाव को कम करने के लिए सोने को एक ठोस विकल्प के रूप में देख रहे हैं।        पाकिस्तान के पास महज इतना सोना  पाकिस्तान के पास बेहद कम सोने का भंडार है, वैसे भी देश आर्थिक तौर पर बदहाल है. फिलहाल पाकिस्तान के पास लगभग 64.77 टन सोना सुरक्षित है. जो कि भारत के मुकाबले काफी कम है. बांग्लादेश के पास महज लगभग 14.28 टन सोना है।                 पोलैंड (Poland) सोना खरीदने में आगे साल 2026 की शुरुआती आंकड़ों (फरवरी-मार्च 2026) के मुताबिक दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों में सोना खरीदने की होड़ मची हुई है. पिछले एक से दो महीनों में जिन देशों ने सबसे ज्यादा सोना खरीदा है, उसमें पोलैंड का नाम सबसे ऊपर है. फरवरी 2026 में पोलैंड के केंद्रीय बैंक ने अकेले 20 टन सोना खरीदा है, पोलैंड का लक्ष्य अपने कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 20% हिस्सा सोने में बदलना है।        उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) ने खरीदा सोना  उज्बेकिस्तान ने फरवरी-मार्च के दौरान लगभग 8 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा है. यह पिछले लगातार 5 महीनों से सोने का शुद्ध खरीदार बना हुआ है. कजाकिस्तान ने भी हाल ही में अपनी सक्रियता बढ़ाई है और पिछले महीने लगभग 8 टन सोना खरीदा है।   गोल्ड खरीदने में भारत किस नंबर पर? चौथे नंबर पर भारत है, जिसने 245.3 टन सोना खरीदा. इसके अलावा ब्राजील ने 105.1 टन, अजरबैजान ने 83.6 टन, थाईलैंड ने 80.6 टन, हंगरी ने 78.5 टन सोने और सिंगापुर ने 77.3 टन गोल्ड खरीदा है. ईरान ने 74.612, कतर ने 73.013, रूस ने 55.4 टन और यूएई ने 51.7 टन सोना खरीदा. टॉप-15 की लिस्ट में पाकिस्तान का नाम शामिल नहीं है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 के बाद सोने के दाम में 265 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है।  सोना बेचने में कौन से देश आगे? बीते पांच साल में गोल्ड बेचने के मामले में फिलीपींस पहले स्थान पर है, उसने 65.2 टन गोल्ड बेचा है. दूसरे नंबर पर कजाकिस्तान है, जिसने इस दौरान 52.4 टन सोना बेचा. श्रीलंका ने 19.1 टन गोल्ड की बिक्री की. जर्मनी का गोल्ड रिजर्व भी 16.3 टन घटा है. मंगोलिया ने 15.9 टन सोना बेचा. इसके अलावा ताजिकिस्तान ने 11.9 टन, कोलंबिया ने 9.2 टन और फिनलैंड ने 5.4 टन गोल्ड की बिक्री की।