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फरवरी में भारत का व्यापारिक घाटा कम होकर 27.1 अरब डॉलर हुआ

नई दिल्ली  भारत का वस्तु व्यापारिक घाटा फरवरी में कम होकर 27.1 अरब डॉलर हो गया है, जो कि पिछले महीने 34.68 अरब डॉलर था। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से  दी गई। बीते महीने देश का वस्तु निर्यात बढ़कर 36.61 अरब डॉलर हो गया है, जो कि जनवरी में 36.56 अरब डॉलर था। वहीं, आयात कम होकर 63.71 अरब डॉलर हो गया है, जो कि पहले 71.24 अरब डॉलर था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश का वस्तु निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-फरवरी अवधि में 402.93 अरब डॉलर रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 395.66 अरब डॉलर था। यह समीक्षा अवधि में सालाना आधार पर 1.84 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। यह आंकड़े ऐसे समय पर सामने आए हैं, जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है, जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था और जिसके चलते मध्य पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित हो गया है। इसी जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस का निर्यात होता है।  जलडमरूमध्य के बंद होने से मध्य पूर्व के देशों को चावल जैसी वस्तुओं के भारत के निर्यात पर भी असर पड़ा है। पहले, भारत के ऊर्जा आयात का लगभग 50 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता था, लेकिन अब इसमें विविधता आ गई है और इसका एक बड़ा हिस्सा रूस से आ रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत के रणनीतिक तेल भंडार और 40 आपूर्तिकर्ता देशों से ऊर्जा आयात में विविधता लाने से वैश्विक ऊर्जा संकटों का सामना करने की देश की क्षमता में काफी सुधार हुआ है। इस लचीलेपन के कारण ईरान युद्ध से उत्पन्न व्यवधान के बावजूद भारत में कोई ऊर्जा संकट नहीं आया है, क्योंकि सरकार आपूर्ति-पक्ष प्रबंधन के माध्यम से स्थिति को संभाल रही है। जहाज और बंदरगाह मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, भारत ईरान के साथ भी सीधे संपर्क में है ताकि उसके व्यापारिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल सके। भारतीय ध्वज वाला जहाज जग लाडकी रविवार को संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह से लगभग 80,800 मीट्रिक टन मुरबान कच्चे तेल के साथ सुरक्षित रूप भारत के लिए रवाना हुआ। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। बयान में आगे कहा गया कि इलाके में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, और पिछले 24 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई भी दुर्घटना की सूचना नहीं मिली है। भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज, शिवालिक और नंदा देवी, जिनमें लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है, शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और वर्तमान में भारत की ओर रवाना हैं। इनके सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह और मंगलवार को कांडला बंदरगाह पहुंचने वाले हैं।

आखिरी घंटे में पलटी बाजी, शेयर बाजार ने दिखाई ताकत, सेंसेक्स 900 अंक बढ़ा

मुंबई शेयर बाजार की चाल ने सप्ताह के पहले कारोबारी दिन निवेशकों को जमकर हैरान किया. कभी रेड, तो कभी ग्रीन जोन में सेंसेक्स-निफ्टी कारोबार करते नजर आए, लेकिन दोपहर दो बजे के आसपास अचानक बाजी पलट गई और दोनों इंडेक्स रॉकेट की रफ्तार से भागने लगे. बाजार बंद होने पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 938 अंक की तेजी लेकर बंद हुआ, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 257 अंक उछलकर क्लोज हुआ. इस तेजी के बीच HDFC Bank, M&M, Trent जैसे शेयर जोरदार उछाल के साथ बंद हुए।  सुस्त शुरुआत के बाद रॉकेट बना सेंसेक्स शेयर बाजार में धीमी शुरुआत के बीच BSE Sensex सोमवार को अपने पिछले शुक्रवार के बंद 74,563 की तुलना में गिरकर 74,415 के लेवल पर ओपन हुआ था और शुरुआती कारोबार के दौरान 73,949 तक फिसला था. हालांकि, आखिरी कारोबारी घंटे में 2.20 बजे के आसपास अचानक 30 शेयरों वाला ये इंडेक्स गदर मचाने लगा और अंत में 938 अंक या 1.26 फीसदी की उछाल के साथ 75,502.85 पर क्लोज हुआ।   Nifty ने भी मचाया गदर  सेंसेक्स ही नहीं, NSE Nifty की भी चाल बदली-बदली नजर आई. एनएसई का ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,151 की तुलना में गिरकर 23,116 पर खुला था. खराब शुरुआत के बाद ये तेजी से फिसलता चला गया और 22,955.25 के लेवल आ गया था, लेकिन सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए इस इंडेक्स ने भी रफ्तार पकड़ी और बाजार बंद होने पर ये 257.70 अंक चढ़कर 23,408.80 पर क्लोज हुआ।  इन 10 शेयरों ने दिखाया दम  शेयर बाजार में अचानक लौटी तेजी के बीच जिन टॉप-10 शेयरों ने दम दिखाया, उनमें लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Trent Share (3.01%), HDFC Bank Share (2.88%), M&M Share (2.86%), Eternal Share (2.80%), Bajaj Finance Share (2.79%), ITC Share (2.22%) और Tata Steel Share (2.04%) की तेजी के साथ बंद हुआ. मिडकैप में शामिल Paytm Share (3.86%) चढ़कर क्लोज हुआ, तो वहीं स्मॉलकैप में शामिल शेयरों में Poonawalla Share (4.40%) और Apollo Tyre Share (3.38%) उछलकर बंद हुआ।  बाजार में तेजी के ये बड़े कारण  सोमवार को बाजार में अचानक लौटी तेजी के पीछे के कारणों की बात करें, तो निचले स्तरों से वैल्यू बाइंग देखने को मिली. मेटल, ऑटो, बैंक और FMCG शेयरों ने मार्केट को सपोर्ट किया. इसके अलावा शेयर बाजार में डर का पैमाना माने जाने वाला India VIX करीब 5% फिसल गया। 

सोना-चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट, चमक पड़ी फीकी, जानें आज के रेट

इंदौर मिडिल ईस्ट जंग के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार,  बीते कारोबारी दिन (शुक्रवार), 13 मार्च 2026 को शाम के समय 22 कैरेट सोने का भाव ₹145093 प्रति 10 ग्राम था, जो आज 16 मार्च 2026 को ₹143295 प्रति 10 ग्राम पहुंच आ गया है. वहीं, चांदी (999, प्रति 1 किलो) की कीमत में भी आज गिरावट दर्ज की गई है।  बता दें कि इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए दाम पूरे देश में मान्य होते हैं. केंद्रीय सरकार द्वारा घोषित छुट्टियों के अलावा शनिवार और रविवार को रेट जारी नहीं किए जाते हैं।  Gold-Silver Price Today 16 March 2026: सोना-चांदी का लेटेस्ट रेट शुद्धता शुक्रवार शाम का रेट सोमवार सुबह का रेट जानें कितना सस्ता? सोना (प्रति 10 ग्राम) 999 (24 कैरेट) 158399 156436 1963 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 995 (23 कैरेट) 157765 155810 1955 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 916 (22 कैरेट) 145093 143295 1798 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 750 (18 कैरेट) 118799 117327 1472 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 585 (14 कैरेट) 92663 91515 1148  रुपये सस्ता चांदी (प्रति 1 किलो) 999 260488 252793 7695 रुपये सस्ती बता दें कि बीते कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को सोना सुबह की तुलना में शाम के समय सस्ता हुआ था जबकि, चांदी के रेट में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. शुक्रवार को 24 कैरेट सोने का भाव (999 शुद्धता) सुबह का रेट: ₹158555 प्रति 10 ग्राम शाम का रेट: ₹158399 प्रति 10 ग्राम शुक्रवार को चांदी का भाव (999 शुद्धता) सुबह का रेट: ₹259951 प्रति किलो शाम का रेट: ₹260488 प्रति किलो इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए दामों में जीएसटी शामिल नहीं होता है. गहने खरीदते समय पर मेकिंग चार्ज भी अलग से देने होते हैं. 

एयर इंडिया का ऐतिहासिक कदम: अबू धाबी और दुबई की 5 फ्लाइट्स रद्द

 नई दिल्ली मध्य पूर्व (Middle East) में गहराते युद्ध के बादलों ने अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कई देशों द्वारा अपने एयरस्पेस (वायु क्षेत्र) को बंद करने या पाबंदियां लगाने के कारण वैश्विक उड़ानों का पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एअरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा जारी नए निर्देशों के बाद एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों पर भी बड़ा असर पड़ा है। 15 मार्च 2026 के लिए निर्धारित कई 'एड-हॉक' (ad-hoc) उड़ानों को रद्द करना पड़ा है, जिससे भारत और यूएई के बीच यात्रा करने वाले सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं। एअर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि दुबई एअरपोर्ट अथॉरिटी के निर्देशों के कारण उसे अपनी उड़ानें कम करने पर मजबूर होना पड़ा है. एअर इंडिया की दिल्ली-दुबई मार्ग पर केवल एक रिटर्न फ्लाइट संचालित होगी, जबकि पांच में से चार निर्धारित उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। एअर इंडिया एक्सप्रेस की दुबई के लिए छह में से पांच उड़ानें रद्द हैं, केवल एक दिल्ली-दुबई रिटर्न फ्लाइट चलेगी. अबू धाबी के लिए एअर इंडिया एक्सप्रेस की सभी पांचों उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। शारजाह: एयर इंडिया एक्सप्रेस दिल्ली, कन्नूर, कोच्चि, कोझिकोड, मुंबई और तिरुवनंतपुरम के लिए उड़ानें संचालित करने की योजना बना रही है. रास अल खैमाह: कोझिकोड और कोच्चि के लिए उड़ानें चलेंगी। कंपनी ने साफ किया है कि ये उड़ानें भी स्लॉट की उपलब्धता और परिचालन के समय की स्थितियों पर निर्भर करेंगी. यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक कर लें।

28 दिन में 18 लाख से अधिक बाइक और स्कूटर बिके, जानें कौन सी कंपनियों की हुई सबसे ज्यादा बिक्री

 नई दिल्ली भारतीय टू-व्हीलर मार्केट के लिए फरवरी शानदार महीना रहा है. इस महीने ऑटोमोबाइल कंपनियों ने बेहतरीन सेल की है. SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) ने  बताया कि फरवरी 2026 में इंडस्ट्री ने रिकॉर्ड सेल की है. टू-व्हीलर मार्केट की बात करें, तो इस सेक्टर की ग्रोथ 35.2 परसेंट है। सभी कंपनियों ने कुल 18,71,406 यूनिट्स बेची हैं. पिछले साल फरवरी में कंपनियों ने 13,84,605 यूनिट्स बेची थी. कैटेगरी के हिसाब से बात करें, तो स्कूटर्स की सेल 42.3 परसेंट बढ़ी है. कंपनियों ने 7,29,774 यूनिट्स बेची हैं। सबसे ज्यादा किन कंपनियों ने बेची दोपहिया? वहीं मोटरसाइकिल की सेल 30.8 परसेंट बढ़ी है. कंपनियों ने कुल 10,96,537 यूनिट्स बेची हैं. सबसे ज्यादा टू-व्हील्स हीरो मोटोकॉर्प ने बेचे हैं. कंपनी ने फरवरी 2026 में कुल 4,57,826 यूनिट्स बेची हैं. वहीं दूसरे नंबर पर होंडा टू-व्हीलर्स हैं, जिन्होंने 4.31 लाख गाड़ियों को बेचा है. ये आंकड़े रिटेल सेल्स के हैं। तीसरे नंबर पर TVS है. कंपनी ने फरवरी 2026 में कुल 3,33,935 यूनिट्स बेची हैं. वहीं बजाज ने 1,80,846 यूनिट्स और सुजुकी ने 94,398 यूनिट्स को बेचा है. 6वें पायदान पर रॉयल एनफील्ड है, जिसने 91,216 यूनिट्स को बेचा है. ओला को छोड़ दे तो इस महीने सभी टू-व्हीलर कंपनियों की सेल बढ़ी है.    कंपनी हीरो मोटोकॉर्प होंडा टू-व्हीलर्स TVS बजाज ऑटो सुजुकी फरवरी में सेल (यूनिट्स) 4,57,826 4.31 लाख 3,33,935 1,80,846 94,398 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की भी है जबरदस्त मांग फेडरल ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की 1,11,709 यूनिट्स फरवरी महीने में बिकी हैं. पिछले साल फरवरी में 76,722 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स बिके थे. हालांकि, जनरवरी के मुकाबले फरवरी में इलेक्ट्रिक दोपहियो की सेल कम हुई है.  सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स TVS ने बेची हैं. कंपनी ने 31,614 यूनिट्स फरवरी में बेची हैं. वहीं बजाज ऑटो ने 25,328 यूनिट्स सेल की है. जबकि एथर ने 20,584 यूनिट्स बेची हैं. Hero Vida की बात करें, तो कंपनी ने 12,514 यूनिट्स सेल की हैं. ओला को पीछे करते हुए 5वें नंबर पर Greaves/ Ampere है, जिसकी 4,724 यूनिट्स बिकी हैं. कंपनी TVS बजाज ऑटो एथर एनर्जी हीरो विडा एंपियर फरवरी में सेल (यूनिट्स) 31,614 25,328 20,584 12,514 4,724

AI के प्रभाव से इस कंपनी में होगी छंटनी, हजारों की नौकरी जाएगी, मार्क जकरबर्ग ने की भविष्यवाणी

वाशिंगटन फेसबुक की पेरेंट कंपनी Meta एक बड़ा फैसला लेने जा रही है. कंपनी बड़े स्तर पर छंटनी की तैयारी कर रही है, जिसमें वह दुनियाभर से अपने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाएगा. मार्क जकरबर्ग की कंपनी लगातार आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर मोटी रकम इनवेस्ट कर रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट्स, कंपनी की छंटनी की वजह से मेटा के 20 परसेंट वर्कफोर्स पर असर पड़ेगा. जानकारी के मुताबिक, 31 दिसंबर तक मेटा के पास करीब 79 हजार कर्मचारी थे. ऐसे में इसका 20 परसेंट कर्मचारियो को बाहर का रास्ता दिखाएंगे, तो करीब 15 हजार कर्मचारियों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ेगी। AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होगी मोटी रकम  मार्क जबरकर्ब की फर्म का प्लान है कि वह साल 2028 तक AI इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर 600 बिलियन अमेरिका डॉलर (55 लाख करोड़ रुपये) का इनवेस्टमेंट करेंगे। जकरबर्ग पहले ही संकेत दे चुके हैं कि AI के पास ताकत है कि वह चीजों को आसान बनाती है. ऐसे में विशाल टीम के बिना भी कई काम किए जा सकेंगे। जकरबर्ग ने जनवरी में कहा था कि जिन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए एक बड़ी टीम की जरूरत थी. अब उस काम को एक प्रतिभाशाली शख्स कर सकता है। 2022 से भी बड़ी होगी छंटनी अगर मेटा अपनी कंपनी में से 20 परसेंट लोगों को बाहर का रास्ता दिखाता है तो यह कंपनी की तरफ से जाने वाली एक बड़ी छंटनी होगी. साल 2022 के नवंबर में कंपनी ने 11,000 लोगों को नौकरी से निकाल दिया था और चार महीने के बाद 10 हजार लोगों की छंटनी की थी। सीनियर ऑफिसर्स को बताया जा चुका है  रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने बड़े स्तर पर बैठे अधिकारियों को बता दिया है कि बड़ी छंटनी के लिए तैयार हो जाएं. हालांकि अभी तक इसकी कोई डेट का ऐलान नहीं किया गया है। 

मिडल-ईस्ट तनाव के कारण ट्रैवल सेक्टर को ₹5500 करोड़ का रोज़ाना नुकसान, कोच्चि और पुरी की मांग में 200% वृद्धि

नई दिल्ली मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक टूरिज्म इंडस्ट्री पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमलों और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण दुनियाभर में ट्रैवल सेक्टर को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल (WTTC) के अनुमान के मुताबिक इस संघर्ष की वजह से दुनिया भर के टूर और ट्रैवल सेक्टर को हर दिन करीब 5,500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। मिडिल-ईस्ट के कई देशों में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताओं के चलते पर्यटक अपने ट्रैवल प्लान बदल रहे हैं, जिससे पर्यटन उद्योग प्रभावित हो रहा है। अगर भारतीय पर्यटकों की बात करें तो हर साल भारत से विदेश यात्रा करने वाले लगभग आधे यात्री यूएई, सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे मिडिल-ईस्ट देशों की यात्रा करते हैं। इनमें से करीब 40 प्रतिशत लोग पर्यटन के उद्देश्य से इन देशों में जाते हैं। लेकिन हालात को देखते हुए अब कई भारतीय पर्यटक अपने ट्रैवल प्लान में बदलाव कर रहे हैं। टूर ऑपरेटर्स के अनुसार अब भारतीय पर्यटक थाईलैंड, मलेशिया और जापान जैसे देशों के लिए ज्यादा पूछताछ कर रहे हैं। इन देशों को फिलहाल सुरक्षित और बेहतर विकल्प माना जा रहा है, इसलिए यहां पर्यटन की मांग बढ़ रही है। वहीं दूसरी ओर भारत के अंदर भी घरेलू पर्यटन में तेजी देखने को मिल रही है। एयरलाइंस के किराए बढ़ने के बावजूद कई पर्यटक अब कोच्चि, पुरी और अंडमान जैसे भारतीय पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में इन घरेलू डेस्टिनेशन के लिए पूछताछ में करीब 200 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।  2026 घरेलू पर्यटन के लिए अच्छा साबित हो सकता है ल्ल दिल्ली स्थित ट्रैवल कंपनी टीमवन हॉलिडेज की प्रवक्ता अनीशा शर्मा के मुताबिक, फिलहाल खाड़ी देशों की यात्रा के लिए लगभग 100% तक कैंसिलेशन देखने को मिल रहे हैं। यदि यह रुझान जारी रहता है तो 2026 भारत के घरेलू पर्यटन के लिए बेहद मजबूत साल साबित हो सकता है। यात्री देश के नजदीकी और विविध पर्यटन स्थलों को खोज रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्लेटफॉर्म पिकयोरट्रेल के सीईओ हरि गणपति के मुताबिक मिडिल-ईस्ट क्षेत्र की बुकिंग में 60% तक की गिरावट आई है। ल्ल मेकमाईट्रिप के को-फाउंडर राजेश मागो कहते हैं- यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो लोग घरेलू गंतव्यों या अप्रभावित अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों की ओर रुख कर सकते हैं। ल्ल वहीं ईज माईट्रिप के फाउंडर निशांत पिट्टी का कहना है- थाईलैंड, मलेशिया, मालदीव और जापान जैसे देशों के लिए बुकिंग में अच्छी बढ़त देखी जा रही है। घरेलू पर्यटन लगातार मजबूत बना हुआ है।’

चांदी और सोने में भारी गिरावट, 12,000 रुपये तक का नुकसान, युद्ध के बीच गोल्ड क्यों गिर रहा है?

इंदौर  सोने-चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से काफी गिरावट आई है। अब सवाल यह है कि जब दुनियाभर में युद्ध का माहौल है, शेयर बाजारों में जबरदस्त गिरावट है, क्रूड ऑयल के दाम आसमान पर हैं, सप्लाई चेन्स बाधित हो रही हैं, महंगाई बढ़ रही है और ग्लोबल इकॉनोमी पर काले बादल छाए हुए हैं, उस स्थिति में सोना बढ़ क्यों नहीं रहा? क्योंकि जब भी दुनिया में अस्थिरता होती है, निवेशक सुरक्षित निवेश गोल्ड खरीदते हैं, जिससे इसका दाम बढ़ता है। लेकिन इस बार सोना कुछ अलग ही चाल चल रहा है। दरअसल, इक्विटी बाजारों में आई जबरदस्त गिरावट ने निवेशकों को तोड़ कर रख दिया है। उन्हें मार्केट में तगड़ा नुकसान हुआ है। अब वे इस नुकसान की भरपाई करना चाहते हैं। इसके लिए वे सोने में मुनाफावसूली कर रहे हैं और लिक्विडिटी की चिंताओं को दूर कर रहे हैं। यही कारण है कि सोने में गिरावट देखी जा रही है। 12 दिन में 12000 रुपये टूटा सोना एमसीएक्स एक्सचेंज पर 2 मार्च को सोने का वायदा भाव कारोबारी सत्र के दौरान 1,69,880 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। वहीं, इस हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार, 13 मार्च को सोने का भाव कारोबारी सत्र के दौरान न्यूनतम 1,57,540 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गया। इस तरह पिछले 12 दिन में सोने में 12,340 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट देखने को मिली है। चांदी में 43,000 रुपये की गिरावट चांदी में भी पिछले कुछ दिनों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। एमसीएक्स एक्सचेंज पर 2 मार्च को चांदी का वायदा भाव कारोबारी सत्र के दौरान अधिकतम 2,97,799 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था। वहीं, इस हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन 13 मार्च को कारोबारी सत्र के दौरान चांदी का भाव 2,54,474 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया था। इस तरह पिछले 12 दिनों में चांदी की कीमत में 43,325 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को भी टूटे भाव सोने-चांदी की वैश्विक कीमतों में शुक्रवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कॉमेक्स पर सोना 1.25 फीसदी या 64.10 डॉलर की गिरावट के साथ 5,061.70 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं, गोल्ड स्पॉट 1.18 फीसदी या 59.72 डॉलर की गिरावट के साथ 5,019.49 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। उधर चांदी कॉमेक्स पर 4.44 फीसदी या 3.77 डॉलर की गिरावट के साथ 81.34 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। वहीं, सिल्वर स्पॉट 3.88 फीसदी या 3.25 डॉलर की गिरावट के साथ 80.59 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई।

सरकार कर सकती है मोबाइल डेटा पर नया टैक्स, हर GB डेटा के लिए एक्स्ट्रा चार्ज का सुझाव

 नई दिल्ली सरकार इंटरनेट को महंगा करने की तैयारी में है। दरअसल रिपोर्ट्स की मानें, तो अब हर GB डेटा के इस्तेमाल के साथ आपकी जेब से ज्यादा पैसे कट सकते हैं। फिलहाल सरकार में इस पर मंथन किया जा रहा है। गौरतलब है कि सरकार की कमाई को बढ़ाने के अनोखे तरीके के रूप में 'डेटा यूसेज टैक्स' लाने का प्रस्ताव चर्चा में है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई एक हालिया समीक्षा बैठक में इस पर चर्चा हुई। इस बारे में पता चलते ही टेक जगत में हलचल मच गई है। एक्सपर्ट्स का दावा है कि इसका सीधा असर लोगों के मोबाइल रिचार्ज प्लान के बजट पर पड़ सकता है। भारत में आने वाले समय में मोबाइल इंटरनेट इस्तेमाल करना महंगा हो सकता है. सरकार मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाने के विकल्प को देख रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में Department of Telecommunications (DoT) से कहा गया है कि वह इस पर स्टडी करे और बताए कि क्या डेटा यूज़ पर टैक्स लगाना संभव है या नहीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में टेलीकॉम सेक्टर की एक रिव्यू मीटिंग में यह मुद्दा सामने आया. इसके बाद DoT को कहा गया कि वह यह जांच करे कि मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर टैक्स लगाया जा सकता है या नहीं और अगर लगाया जाए तो उसका मॉडल क्या होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार जिस विकल्प को देख रही है उसमें ₹1 प्रति GB डेटा पर टैक्स लगाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो हर बार जब कोई यूजर मोबाइल डेटा इस्तेमाल करेगा तो उस पर यह अतिरिक्त चार्ज जुड़ सकता है। बताया जा रहा है कि अगर ₹1 प्रति GB का टैक्स लागू होता है तो इससे सरकार को हर साल लगभग ₹22,900 करोड़ तक की कमाई हो सकती है. हालांकि अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव है और इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। भारत दुनिया के उन देशों में है जहां मोबाइल डेटा काफी सस्ता है. सस्ते इंटरनेट की वजह से भारत में डेटा की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है. वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और रील्स देखने की वजह से मोबाइल डेटा का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। एक और अहम बात यह है कि अभी भी मोबाइल रिचार्ज और पोस्टपेड बिल पर 18% GST लिया जाता है. यानी यूजर्स पहले से ही टेलीकॉम सर्विस पर टैक्स दे रहे हैं. अगर भविष्य में डेटा पर अलग से टैक्स लगाया जाता है तो यह मौजूदा टैक्स के अलावा एक नया चार्ज हो सकता है। सरकार यह प्रस्ताव इस मकसद से ला रही है कि इंटरनेट का इस्तेमाल सकारात्मक कामों के लिए हो। दूरसंचार विभाग DoT को सितंबर 2026 तक रिपोर्ट सबमिट कर यह बताने के लिए कहा गया है कि ऐसा कर पाना संभव है या नहीं? इस टैक्स का एक मकसद बच्चों और युवाओं में बढ़ते 'स्क्रीन टाइम' को कम करना है। सरकार एक ऐसा मॉडल बनाना चाह रही है जिससे पॉजिटिव डेटा कंजम्पशन बढ़े। इस टैक्स के जरिए सरकार इंटरनेट की लत और बढ़ते स्क्रीन-ऑन टाइम पर काबू पाना चाहती है। हालांकि यह देखना होगा कि सरकार शिक्षा और मनोरंजन के बीच डेटा के इस्तेमाल पर अंतर कैसे तय करेगी। क्या ऐसा कर पाना मुमकिन है? भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण TRAI के पूर्व प्रधान सलाहकार सत्या एन. गुप्ता ने इस प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि डेटा पर टैक्स लगा पाना न सिर्फ नामुमकिन है बल्कि यह देश में डिजिटल सेवाओं को बाधित भी कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार,(REF.) इससे डिजिटल इनोवेशन रुक जाएंगे और डिजिटल क्षेत्र में भारत की वैश्विक बढ़त खतरे में पड़ सकती है। गौर करने वाली बात है कि फिलहाल मोबाइल रिचार्ज पर 18% GST लगता है, ऐसे में डेटा पर अलग से कर लगाना यूजर्स के लिए दोहरी मार जैसा साबित हो सकता है। अगर टैक्स लगा, तो होगी कितनी कमाई? रिपोर्ट्स के अनुसार अब स्पेक्ट्रम नीलामी और लाइसेंस फीस के अलावा सरकार कमाई का नया तरीका तलाश रही है। आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत की मोबाइल डेटा खपत लगभग 229 अरब GB थी। ऐसे में अगर हर GB पर सरकार 1 रुपये का मामूली टैक्स भी लगाती है, तो इससे सरकार को सीधे 22,900 करोड़ रुपये का फायदा होगा। ऐसे में एक तर्क है कि यह रकम देश के विकास के काम आ सकती है, वहीं सच ये भी है कि इससे महंगे इंटरनेट का बोझ आम लोगों पर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार ने DoT से कहा है कि वह इस प्रस्ताव की पूरी स्टडी करे और इसके फायदे-नुकसान को समझे. रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार तय करेगी कि भारत में मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर नया टैक्स लगाया जाएगा या नहीं। सराकर की तरफ से हालांकि अभी इसे लेकर कोई भी ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से रेडिट से लेकर तमाम सोशल मीडिया पर सूत्रों के हवालें से ये खबर चल रही है। 

इलेक्ट्रिक कारों की कीमत जल्द होगी पेट्रोल-डीजल कारों के बराबर, दावा देश की प्रमुख कंपनी का

मुंबई   भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है और अब यह ऑटो उद्योग के लिए एक अहम बदलाव का दौर बनता जा रहा है। खासतौर पर चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के सेगमेंट में कुछ कंपनियों ने मजबूत पकड़ बना ली है। इसी कड़ी में देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें पेट्रोल और डीजल से चलने वाली पारंपरिक कारों के बराबर पहुंच सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो भारतीय ऑटो बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार और तेज हो सकती है।  इलेक्ट्रिक कार बाजार में तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी भारत के इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर सेगमेंट में फिलहाल एक प्रमुख कंपनी का दबदबा बना हुआ है, जिसके पास लगभग 40 प्रतिशत तक बाजार हिस्सेदारी बताई जाती है। कंपनी की सफलता के पीछे उसके इलेक्ट्रिक मॉडल्स की लंबी श्रृंखला भी एक बड़ी वजह है। उसके पोर्टफोलियो में नेक्सन EV, पंच EV, टियागो EV, टिगोर EV, कर्व EV और हैरियर EV जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। इन मॉडलों के कारण अलग-अलग बजट और जरूरतों वाले ग्राहकों को विकल्प मिल रहे हैं। हालांकि सबसे किफायती इलेक्ट्रिक कार का खिताब अभी किसी अन्य कंपनी के पास है, जबकि इस कंपनी की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार टियागो EV मानी जाती है, जिसकी शुरुआती कीमत करीब आठ लाख रुपये के आसपास है। तकनीक में सुधार से घट सकती है लागत कंपनी के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों की तकनीक तेजी से विकसित हो रही है। उनका कहना है कि बैटरी तकनीक में लगातार सुधार हो रहा है और नई बैटरियां पहले के मुकाबले अधिक ऊर्जा संग्रह करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही चार्जिंग की गति भी तेज हुई है और सुरक्षा के लिहाज से भी नई तकनीक अधिक भरोसेमंद मानी जा रही है। इन बदलावों के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। प्रोपल्शन सिस्टम के इंटीग्रेशन से बढ़ेगी दक्षता वाहनों के इलेक्ट्रिक सिस्टम में भी तेजी से बदलाव हो रहे हैं। मोटर, इन्वर्टर, ऑनबोर्ड चार्जर और अन्य पावर इलेक्ट्रॉनिक्स को अब पहले की तरह अलग-अलग यूनिट के रूप में नहीं रखा जा रहा है। इन्हें एकीकृत सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे गाड़ी का कुल वजन कम होता है और डिजाइन अधिक प्रभावी बनता है। पहले जहां इन हिस्सों को अलग-अलग लगाया जाता था, वहीं अब इन्हें एक कॉम्पैक्ट सिस्टम में बदला जा रहा है। इससे वाहन हल्का होने के साथ-साथ बैटरी की क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश भी बनती है और बिना बड़े ढांचे में बदलाव किए गाड़ी की ड्राइविंग रेंज को बेहतर बनाया जा सकता है। बैटरी कीमतों में नरमी से मिल सकता है फायदा वैश्विक स्तर पर बैटरी की कीमतों में धीरे-धीरे कमी आने और तकनीक के बेहतर होने से कंपनियों को उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक कारें बेहतर रेंज और प्रदर्शन के साथ बाजार में आएंगी। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ मॉडलों में कीमत का अंतर अब पारंपरिक इंजन वाली कारों से बहुत कम रह गया है। यदि यह अंतर और घटता है तो ग्राहक इलेक्ट्रिक कारों को ज्यादा तेजी से अपनाने लगेंगे। 10 लाख रुपये से कम का सेगमेंट बना फोकस भारतीय यात्री वाहन बाजार में दस लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों की मांग काफी अधिक है और यही वजह है कि कंपनियां इस सेगमेंट पर खास ध्यान दे रही हैं। हाल ही में एक लोकप्रिय इलेक्ट्रिक मॉडल को बैटरी-एज-ए-सर्विस विकल्प के साथ पेश किया गया, जिससे उसकी शुरुआती कीमत और कम कर दी गई। इस व्यवस्था में ग्राहक बैटरी को अलग से सेवा के रूप में ले सकते हैं, जिससे शुरुआती लागत कम हो जाती है। हालांकि बैटरी सेल अभी भी विदेशों से मंगाए जाते हैं, लेकिन बैटरी पैक का डिजाइन और असेंबली देश में ही की जा रही है और धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने की कोशिश भी जारी है। सस्ती और व्यावहारिक EV से बढ़ेगा अपनाने का चलन ऑटो उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सबसे बड़ा अवसर कम कीमत वाले सेगमेंट में ही है। यदि दस लाख रुपये से कम कीमत में भरोसेमंद और पर्याप्त रेंज देने वाली इलेक्ट्रिक कारें उपलब्ध होती हैं, तो परिवार इन्हें अपनी मुख्य कार के रूप में भी इस्तेमाल करना शुरू कर सकते हैं। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहन सुलभ, किफायती और रोजमर्रा के उपयोग के लिए सुविधाजनक बनेंगे, वैसे-वैसे इनके प्रति लोगों का भरोसा और बाजार में इनकी हिस्सेदारी दोनों बढ़ती जाएंगी।