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विधायकों के वाहन भत्ते में 3 गुना बढ़ोतरी की तैयारी, तमिलनाडु में ₹75 हजार करने का प्रस्ताव

चेन्नई तमिलनाडु में विधायकों को मिलने वाली सुविधाएं बढ़ सकती हैं. विधानसभा में पेश किए गए एक बिल में वाहन भत्ता ₹25 हजार से बढ़ाकर ₹75 हजार प्रति माह करने का प्रस्ताव है. इसके साथ हर MLA को वाहन की सुविधा देने की बात भी कही गई है. फिलहाल ये बदलाव प्रस्ताव में हैं, लागू नहीं हुए हैं।  यह प्रस्ताव तमिलनाडु वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2026 में रखा गया है. इसके जरिए 1951 के वेतन-भत्ते वाले कानून में बदलाव किया जाना है. सरकार का कहना है कि इससे विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्र में काम करने के लिए ज्यादा संसाधन मिलेंगे. बिल में सिर्फ वाहन भत्ते की बात नहीं है. कुछ दूसरे भत्तों में बदलाव का भी प्रस्ताव रखा गया है. अब समझते हैं कि इस बिल में विधायकों के लिए क्या-क्या कहा गया है।  हर MLA को वाहन देने का प्रस्ताव बिल में तमिलनाडु विधानसभा के हर सदस्य को वाहन की सुविधा देने का प्रावधान रखा गया है. यानी इसे मंजूरी मिलने के बाद हर MLA को वाहन से जुड़ी सुविधा मिल सकेगी. इसके साथ वाहन भत्ते को भी बढ़ाने का प्रस्ताव है. अभी यह राशि ₹25 हजार प्रति माह है. बिल में इसे बढ़ाकर ₹75 हजार प्रति माह करने की बात कही गई है।  इसका मतलब यह नहीं है कि विधायकों को अभी से ₹75 हजार मिलना शुरू हो गया है. पहले बिल को मंजूरी मिलनी होगी. इसके बाद सरकार जिस तारीख की अधिसूचना जारी करेगी, उसी के मुताबिक नया प्रावधान लागू होगा।  पर्सनल असिस्टेंट के लिए भी भत्ता नए संशोधन के मुताबिक सिर्फ वाहन की सुविधा या उसका भत्ता ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि कामकाज के लिए भी अलग से मदद मिलेगी. जिन विधायकों के पास बिल में बताए गए खास पदों में से कोई पद नहीं है, उन्हें पर्सनल असिस्टेंट (PA) रखने के लिए हर महीने 25 हजार रुपये का भत्ता देने का प्रस्ताव है. सरकार का कहना है कि इन अतिरिक्त संसाधनों से विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से निभा सकेंगे. इसका मकसद उन्हें जनता की सेवा के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।  मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद आया बिल यह बिल 19 अगस्त 2026 को विधानसभा में की गई मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद लाया गया है. सरकार ने कहा है कि संशोधन के जरिए उस घोषणा को कानूनी रूप दिया जाएगा. बिल में विधायकों को मिलने वाली आने-जाने की सुविधा यानी कन्वेयंस से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव का प्रस्ताव है. इसका मकसद विधायकों की मौजूदा सुविधाओं को नए प्रावधानों के हिसाब से तय करना है।  कब से लागू होगा नया नियम? अभी इसे लेकर अंतिम तारीख तय नहीं हुई है. बिल में साफ किया गया है कि नए प्रावधान तमिलनाडु सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद लागू होंगे।  यानी फिलहाल ₹75 हजार वाहन भत्ता प्रस्तावित राशि है. बिल को मंजूरी मिलने के बाद सरकार इसकी लागू होने की तारीख तय करेगी. इसके बाद ही बढ़ा हुआ भत्ता प्रभावी होगा। 

देर रात भोपाल बीजेपी ने जारी की जिला कार्यसमिति, 90 नेताओं को जिम्मेदारी; पचौरी को अहम स्थान

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी ने भोपाल में जिला संगठन की नई टीम का ऐलान कर दिया है। रविवार देर रात करीब डेढ़ बजे जिला कार्यसमिति की सूची जारी की गई। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति के बाद जिलाध्यक्ष रविंद्र यती ने सदस्यों के नामों की घोषणा की। नई कार्यसमिति में कुल 90 कार्यकर्ताओं को जिला कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है। इनमें मनोज राठौर, मनोज राजू अनेजा, राजेश खटीक, महेश जोशी, दिनेश पांडे, अनुषा सिंह रघुवंशी, पूजा भारद्वाज, विकास शर्मा (बंटी), सुमत कुमार जैन और सुनील व्यास समेत कई नेताओं को जगह मिली है। सुरेश पचौरी को संगठन में अहम जगह नई सूची में सबसे चर्चित नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी का है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पचौरी को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। इस श्रेणी में कुल 23 नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें रघुनंदन शर्मा, पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी, ध्रुवनारायण सिंह, महापौर मालती राय, राहुल कोठारी और सुमित पचौरी समेत वरिष्ठ नेता शामिल हैं। स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सरकार और संगठन से जुड़े प्रमुख चेहरों को जगह दी गई है।   90 कार्यकर्ताओं को सदस्य बनाया कार्यसमिति में कुल 90 कार्यकर्ताओं को सदस्य बनाया गया है। इनमें मनोज राठौर, मनोज राजू अनेजा, राजेश खटीक, महेश जोशी, दिनेश पांडे, अनुषा सिंह रघुवंशी, पूजा भारद्वाज, विकास शर्मा (बंटी), सुमत कुमार जैन और सुनील व्यास समेत कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को जगह मिली है। 23 नेताओं को स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया  इसके अलावा 23 नेताओं को स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। इनमें कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी, रघुनंदन शर्मा, पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी, ध्रुवनारायण सिंह, महापौर मालती राय, राहुल कोठारी और सुमित पचौरी सहित अन्य नेता शामिल हैं। 21 कार्यकर्ता विशेष आमंत्रित सदस्य वहीं, संगठन ने 21 कार्यकर्ताओं को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया है। इनमें कृष्णमोहन सोनी, हीरेन्द्र बहादुर सिंह (हीरू), अनिल अग्रवाल लिली, नेहा बग्गा, भक्ति शर्मा, सतीश विश्वकर्मा और संदीप बाथम प्रमुख हैं। अनुभवी नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं का संतुलन नई जिला कार्यसमिति में अनुभवी नेताओं के साथ संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी जगह दी गई है। पार्टी की नई टीम में विभिन्न स्तर के नेताओं को शामिल कर संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने की कोशिश की गई है।नई कार्यसमिति के गठन के बाद अब जिला संगठन की आगामी गतिविधियों और कार्यक्रमों में इन नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिए संगठन को मजबूत करने की तैयारी बीजेपी की नई जिला कार्यसमिति के गठन को आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। पार्टी संगठन को बूथ और जिला स्तर पर मजबूत करने के साथ कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने पर जोर दे सकती है।90 नेताओं को शामिल कर बनाई गई नई टीम के जरिए भोपाल में संगठनात्मक गतिविधियों को और प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है। जिलाध्यक्ष ने बधाई दी  जिलाध्यक्ष रविन्द्र यती ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों और सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ता भाजपा की रीति-नीति के अनुरूप काम करते हुए बूथ से लेकर जिला स्तर तक संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि शेष कार्यसमिति सदस्यों की घोषणा भी जल्द की जाएगी। 21 नेताओं को विशेष आमंत्रण जिला संगठन ने 21 कार्यकर्ताओं को विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल किया है। इनमें कृष्णमोहन सोनी, हीरेन्द्र बहादुर सिंह (हीरू), अनिल अग्रवाल लिली, नेहा बग्गा, भक्ति शर्मा, सतीश विश्वकर्मा और संदीप बाथम सहित अन्य नाम शामिल हैं। इस सूची के जरिए संगठन ने अलग-अलग स्तर पर सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिला टीम से जोड़ने की कोशिश की है। जिलाध्यक्ष रविंद्र यती ने नई जिम्मेदारी पाने वाले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि नई टीम संगठन की विचारधारा और तय कार्यक्रमों के अनुसार काम करते हुए पार्टी को बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक मजबूत करने में भूमिका निभाएगी। भाजपा जिला संगठन के मुताबिक कार्यसमिति के शेष सदस्यों के नाम भी जल्द घोषित किए जाएंगे। इसके साथ ही आने वाले समय में नई टीम के सामने संगठन को जमीनी स्तर पर और सक्रिय करने की जिम्मेदारी होगी। 

देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलों पर BJP मंत्री का बड़ा बयान, कहा- अभी महाराष्ट्र में ही जरूरत

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर पिछले कई दिनों से कयास लगाए जा रहे हैं कि वे अब केंद्र की राजनीति में आ सकते हैं। हालांकि इसको लेकर ना तो फडणवीस और ना ही भाजपा की शीर्ष लीडरशिप की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है। इस बीच महाराष्ट्र की पर्यावरण मंत्री और BJP नेता पंकजा मुंडे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में शामिल होने की अटकलों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फडणवीस इस समय महाराष्ट्र में जहां हैं, वहीं उनकी जरूरत है। पंकजा मुंडे ने कोल्हापुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि ऐसा फैसला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या पीएम मोदी की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता। ‘फडणवीस प्रभावशाली और मजबूत नेता’  रिपोर्ट के मुताबिक, पंकजा मुंडे ने फडणवीस की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक प्रभावशाली और अकादमिक रूप से मजबूत नेता हैं। उन्होंने कहा कि वह पिछले करीब ढाई दशक से फडणवीस के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ प्रार्थना कर सकती हूं कि वह वर्तमान पद से आगे बढ़ें। हालांकि, अभी उन्हें वहीं जरूरत है, जहां वह हैं।” पंकजा का यह बयान शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के उस हालिया दावे के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी फडणवीस को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहते हैं। क्या दावा कर बैठे संजय राउत? संजय राउत ने दावा किया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का पुरजोर समर्थन कर रहा है, जिसके तहत महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को राष्ट्रीय राजधानी बुलाकर उन्हें उप-प्रधानमंत्री का पद सौंपने की कोशिश की जा रही है। राउत ने मीडिया कर्मियों से बात करते हुए दावा किया कि 'भगवा परिवार' दिल्ली के बाहर के किसी प्रमुख नेता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित करने की तैयारी कर रहा है और इस अहम पद के लिए फडणवीस सबसे आगे चल रहे हैं। राउत के मुताबिक आरएसएस और पार्टी से जुड़ी अन्य अहम शख्सियतें फडणवीस को दिल्ली लाने की योजना बना रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला करते हुए संजय राउत ने दावा किया कि इतिहास गवाह है कि कोई भी पूर्व गृह मंत्री कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही अमित शाह शीर्ष पद पाने की बड़ी महत्वाकांक्षा रखते हों, लेकिन उन्हें पार्टी के भीतर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। खबरों के अनुसार सत्ताधारी पार्टी के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने कैबिनेट में संभावित फेरबदल को लेकर नेतृत्व को अल्टीमेटम दिया है। मनोज जरांगे की मांगों पर भी बोलीं पंकजा पंकजा मुंडे ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के जारी अनशन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए उनकी मांगों को पूरा करने के लिए प्रयास कर रही है। जरांगे की मांग है कि जिन मराठाओं के कुनबी रिकॉर्ड मिले हैं, उन्हें जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। इसके अलावा, वह कोल्हापुर, सतारा और मुंबई गजेटियर में मौजूद प्रावधानों को लागू कर मराठाओं को कुनबी के रूप में मान्यता देने की मांग कर रहे हैं। पंकजा मुंडे ने बताया कि सरकार ने जरांगे से बातचीत के लिए राधाकृष्ण विखे पाटील की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति गठित की है। उन्होंने कहा कि सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए उनकी मांगों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। बाद में पंकजा मुंडे ने अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इसमें पंचगंगा नदी में प्रदूषण से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई।

अजित पवार की मौत पर आमने-सामने सुनेत्रा और सुप्रिया सुले, ‘मेरा भाई चला गया, कुछ सत्ता भोग रहे’ पर पलटवार

पुणे महाराष्ट्र की डिप्टी CM और NCP प्रमुख सुनेत्रा पवार ने विपक्षी नेताओं से उनके पति अजित पवार की मौत पर राजनीति नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अजित पवार की मां, बच्चों और उनके दुख को कोई और नहीं समझ सकता। सुनेत्रा पवार ने गुरुवार को पुणे में कहा कि अजित दादा के जाने से महाराष्ट्र में पैदा हुआ खालीपन बहुत बड़ा है। यह बयान NCP (SP) की वर्किंग प्रेसिडेंट सुप्रिया सुले के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने हादसे के बाद NCP पर सत्ता का आनंद लेने का आरोप लगाया था। सुनेत्रा बोलीं- जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा सुनेत्रा पवार ने कहा कि उन्हें कानून और संविधान पर भरोसा है। जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और उन्हें समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “लगातार मीडिया के सामने आने का मतलब यह नहीं है कि जांच में कोई अपडेट मिल रहा है। यह संदेह है कि बार-बार मीडिया ट्रायल तो नहीं किया जा रहा।” सुप्रिया सुले ने NCP पर सत्ता भोगने के आरोप लगाए थे सुप्रिया सुले ने बुधवार को पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, “मेरे भाई यानी मेरे कजिन अजित पवार की मौत को लेकर FIR दर्ज क्यों नहीं की गई? हमने अपने परिवार के एक प्रमुख सदस्य को खोया है। NCP का अजित पवार गुट मौजूदा सरकार का हिस्सा है। क्या उनके 40 विधायकों या 8-9 मंत्रियों में से किसी ने मेरे भाई की मौत को लेकर FIR या सही जांच की मांग करते हुए एक शब्द भी कहा है?” सुले ने कहा था, “हमारा भाई चला गया और वे सत्ता का आनंद ले रहे हैं।” 28 जनवरी: बारामती में प्लेन क्रैश में अजित पवार समेत 4 की मौत हुई थी अजित पवार का 28 जनवरी को बारामती में एक प्लेन क्रैश में निधन हो गया था। मुंबई से बारामती जा रहे लियरजेट 45 XR एयरक्राफ्ट ने कम विजिबिलिटी के बावजूद रनवे पर लैंडिंग की। रिपोर्ट के मुताबिक एयरक्राफ्ट पहले दायीं ओर मुड़ा, पेड़ों से टकराया और फिर जमीन पर गिर गया। इसके बाद उसमें आग लग गई। इस हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार और 4 और लोगों की मौत हो गई थी। AAIB ने क्रैश साइट के पास के गांव में लगे CCTV फुटेज का हवाला देते हुए कहा कि हादसे से पहले प्लेन दायीं ओर मुड़ा, पेड़ों और फिर जमीन से टकराया। इससे उसमें आग लग गई और पूरा कॉकपिट, केबिन जल गया।  

‘बदला हुआ भारत’ दिखाएगी BJP की सोशल मीडिया टीम, Gen Z को रील्स के जरिए बताएगी सरकार के काम

भोपाल  भाजपा अब Gen Z तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के जरिए सरकार के काम और योजनाओं से हुए बदलाव की कहानियां लोगों तक पहुंचाई जाएंगी। अभियान के तहत हर शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इन रील्स में सरकारी योजनाओं से लाभ लेने वाले वास्तविक लोगों की कहानियां दिखाई जाएंगी। कार्यकर्ता लाभार्थियों से संपर्क कर उनके अनुभव रिकॉर्ड करेंगे। वीडियो में लाभार्थी का नाम, स्थान, जिला, योजना और उससे हुए बदलाव की जानकारी भी शामिल की जाएगी। इन्फ्लुएंसर्स दिखाएंगे ‘बदला हुआ भारत’ अभियान में देशभर के इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को ऐसे स्थानों पर ले जाने की योजना है, जहां सरकारी योजनाओं या विकास कार्यों से बदलाव दिखाई देता है। क्रिएटर्स मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे और अपने अनुभव के आधार पर वीडियो तैयार करेंगे। इसके लिए राज्यों से ऐसे स्थानों की सूची मांगी जाएगी, जहां जीवन, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर या रोजगार के अवसरों में बदलाव दिखाई देता हो। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 50 प्रमुख स्थानों के चयन का प्रस्ताव है। हर शक्ति केंद्र से बनेंगी कम से कम 10 रील अभियान के तहत भाजपा के हर शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इन रील्स में सरकारी योजनाओं से लोगों की जिंदगी में आए बदलाव को दिखाया जाएगा। पार्टी का फोकस सिर्फ योजनाओं की जानकारी देने पर नहीं, बल्कि उनके असर को लोगों की असली कहानियों के जरिए सामने लाने पर होगा। कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के ऐसे लोगों से संपर्क करेंगे, जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है। उनकी कहानी वीडियो में रिकॉर्ड की जाएगी। रील में लाभार्थी का नाम, जगह, जिला, योजना का नाम और उससे हुए बदलाव की जानकारी भी शामिल की जाएगी। इन्फ्लुएंसर्स खुद मौके पर जाकर दिखाएंगे बदलाव इस अभियान में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को भी जोड़ा जाएगा। उन्हें ऐसे स्थानों पर ले जाने की योजना है, जहां सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के कारण जमीन पर बदलाव दिखाई देता है। इन्फ्लुएंसर्स वहां जाकर स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे और अपने अनुभव के आधार पर वीडियो बनाएंगे। इसका उद्देश्य युवाओं तक विकास कार्यों की जानकारी ऐसे तरीके से पहुंचाना है, जिसे वे सोशल मीडिया पर आसानी से देख और समझ सकें। इसके लिए राज्यों से ऐसे स्थानों की सूची तैयार करने को कहा जाएगा, जहां सुरक्षा, रोजगार, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर या लोगों के लिए नए अवसरों में बदलाव दिखाई देता हो। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 50 प्रमुख स्थानों को चुने जाने का प्रस्ताव है। ‘कहानी बदलाव की’ में दिखेंगी कहानियां अभियान का एक प्रमुख हिस्सा ‘कहानी बदलाव की’ नाम से डिजिटल सीरीज होगी। इसमें सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों की वास्तविक कहानियां दिखाई जाएंगी। इस योजना के तहत करीब 25 लाख लोगों की कहानियां सामने लाने का प्रस्ताव है। इनमें से लगभग 25 हजार कहानियों को आगे के लिए चुना जाएगा। इसके बाद करीब 250 प्रभावशाली कहानियों को प्रोफेशनल तरीके से तैयार करने की योजना है। चुनी गई रील्स को राज्यों और जिलों के सोशल मीडिया अकाउंट से भी शेयर किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ये वीडियो पहुंच सकें। WhatsApp से Instagram और YouTube तक फोकस भाजपा के इस अभियान में सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। Instagram और YouTube के लिए 60 सेकंड तक की रील्स बनाने की योजना है। सभी वीडियो में एक जैसे हैशटैग, फ्रेम और अभियान की पहचान का इस्तेमाल किया जा सकता है। कार्यकर्ताओं को सिर्फ वीडियो रिकॉर्ड करने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। वे खुद भी रील बनाएंगे और उन्हें सोशल मीडिया पर शेयर करेंगे। ‘आशीर्वाद का दीया’ से जुड़ेगा डिजिटल अभियान अभियान में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम भी शामिल है। 17 सितंबर की शाम भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों से अपने घरों पर दीप जलाने की अपील की जाएगी। पार्टी के अनुसार, इस दीप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंबे समय की जनसेवा के प्रति आभार और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ा जाएगा। बूथ कार्यकर्ता लाभार्थियों के घर जाकर उन्हें दीप जलाने के लिए प्रेरित करेंगे। दीप जलाते हुए फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर #आशीर्वाद_का_दीया के साथ शेयर किए जाएंगे। इन्फ्लुएंसर्स, मंत्री और मुख्यमंत्री भी इस डिजिटल अभियान में शामिल हो सकते हैं। ‘सेवा मेरा योगदान’ में लोग खुद करेंगे सेवा अभियान के दूसरे हिस्से ‘सेवा मेरा योगदान’ में आम लोगों को सेवा गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। इसके तहत 25 अलग-अलग सेवा गतिविधियों में से कोई एक चुनकर कम से कम 25 मिनट सेवा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सेवा से पहले और बाद का वीडियो बनाकर उसे My Bharat Portal पर अपलोड करने की योजना है। इसके बाद प्रतिभागियों के लिए डिजिटल सर्टिफिकेट भी जारी किया जाएगा। 25 लाख लोगों की कहानियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘कहानी बदलाव की’ अभियान के तहत सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करीब 25 लाख नागरिकों की वास्तविक कहानियां सामने लाने का प्रस्ताव है। इनमें से करीब 25 हजार कहानियां शॉर्टलिस्ट की जाएंगी और लगभग 250 प्रभावशाली कहानियों को प्रोफेशनल तरीके से तैयार किया जाएगा। इन वीडियो को भाजपा के जिला, प्रदेश और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाएगा। WhatsApp से Instagram तक डिजिटल कनेक्ट अभियान में सोशल मीडिया शेयरिंग पर भी खास जोर रहेगा। ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत 17 सितंबर की शाम घर-घर दीप जलाने की अपील की जाएगी। इससे जुड़े फोटो और वीडियो #आशीर्वाद_का_दीया के साथ सोशल मीडिया पर साझा किए जाएंगे। ‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत नागरिकों को 25 सेवा गतिविधियों में से किसी एक में कम से कम 25 मिनट योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सेवा गतिविधि का पहले और बाद का वीडियो बनाकर My Bharat Portal पर रील अपलोड करने की व्यवस्था होगी। इसके बाद डिजिटल सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक कई कार्यक्रम अभियान के तहत स्कूलों में ड्रॉइंग और भाषण प्रतियोगिताएं, गांवों में ‘नमो सेवा गाथा’ के नुक्कड़ नाटक, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ‘आंगन का … Read more

CM रेवंत रेड्डी के खिलाफ बेटी का बयान पड़ा भारी, कोंडा सुरेखा की मंत्री पद से छुट्टी

 हैदराबाद  तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को अपनी कैबिनेट सहयोगी कोंडा सुरेखा को तुरंत प्रभाव से मंत्रिपरिषद से हटाने का फैसला किया। यह कदम महिला नेता की बेटी द्वारा मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर हुए विवाद के बाद उठाया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, इस बारे में गवर्नर शिव प्रताप शुक्ला को सिफारिश की गई है। राज्य की वन और बंदोबस्त मंत्री सुरेखा विवादों में घिर गई हैं। उनकी बेटी ने मुख्यमंत्री और पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ तीखी टिप्पणी की थी, जिस पर सत्ताधारी पार्टी के विधायकों और पदाधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। पिछले कुछ दिनों में चला था बैठकों का दौर सुरेखा को हटाने के अलावा, मुख्यमंत्री ने जी. चिन्ना रेड्डी की राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति को भी तुरंत प्रभाव से रद कर दिया। ये घटनाक्रम पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, उनके डिप्टी मल्लू भट्टी विक्रमार्क और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ की एआईसीसी नेताओं के साथ हुई बातचीत के बाद सामने आए। कांग्रेस की राज्य इकाई की अनुशासनात्मक समिति ने पहले ही पार्टी नेतृत्व से सुरेखा और चिन्ना रेड्डी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। सुरेखा ने राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी मामलों की एआईसीसी प्रभारी मीनाक्षी नटराजन से भी मुलाकात की थी और उनके सामने अपना पक्ष रखा था। कोंडा सुरेखा का मंत्री पद छिनने से इनकार उधर, कोंडा सुरेखा ने कैबिनेट से हटाने की खबरों से इनकार किया है और कहा है कि उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। सुरेखा ने CNN-News18 से बातचीत में कहा, "मुझे अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। न कोई हस्ताक्षर, न लेटर पैड, सिर्फ़ सादा कागज़। मुझे लगता है कि यह सही नहीं है। मुझे कोई सूचना नहीं दी गई।" उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के तरीके पर सवाल उठाए और कहा कि यह सही तरीका नहीं है। पहले पार्टी को हमारी बात सुननी चाहिए थी सुरेखा ने कहा कि उन्होंने पार्टी द्वारा जारी 'शो-कॉज़ नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) का जवाब दे दिया था। उनका कहना है कि बेटी की टिप्पणी के मामले में उनके पक्ष पर ठीक से विचार नहीं किया गया। उन्होंने आगे कहा, "पार्टी की ओर से किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया।" सुरेखा ने फैसले की जानकारी देने वाले संदेश की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि उसमें न तो हस्ताक्षर थे और न ही आधिकारिक लेटरहेड। उन्होंने तर्क दिया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से पहले पार्टी को उनकी बात सुननी चाहिए थी। अगला कदम क्या? कोंडा सुरेखा ने कहा कि वह अधिकारियों से औपचारिक पुष्टि मिलने के बाद ही आगे का कदम तय करेंगी। उन्होंने कहा, "आधिकारिक पुष्टि मिलने के बाद, मैं आगे की कार्रवाई तय करूंगी।" विवाद से जुड़े आरोपों पर सुरेखा ने कहा, "मैंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया और न ही कोई टिप्पणी की।" इससे पहले कांग्रेस आलाकमान ने सुरेखा के मामले पर विचार किया था। बता दें कि सुरेखा को हटाने का फैसला तब लिया गया, जब तेलंगाना कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने उनकी बेटी की ओर से मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और पार्टी के अन्य नेताओं पर की गई टिप्पणियों के लिए जारी 'कारण बताओ नोटिस' पर उनके जवाब की समीक्षा की। सुरेखा के बयान से पार्टी नेता असहमत सुरेखा को बर्खास्त करने का फैसला राज्य कांग्रेस की अनुशासन समिति द्वारा पार्टी नेतृत्व से उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश के बाद लिया गया है। इससे पहले करीब 20 विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने कहा था कि वे सुरेखा के इस बयान से असहमत हैं कि उनकी बेटी की टिप्पणियां उनके निजी विचार हैं। तेलंगाना कांग्रेस की अनुशासन समिति ने 19 अगस्त को कोंडा सुरेखा को नोटिस जारी कर उनकी बेटी सुष्मिता द्वारा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ की गई टिप्पणियों के संबंध में तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा था। सुरेखा ने 20 अगस्त को दिए अपने जवाब में कहा था कि उनकी बेटी द्वारा की गई टिप्पणियों के लिए उनसे स्पष्टीकरण मांगना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बेटी की टिप्पणियों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। सुरेखा की बेटी ने क्या कहा था? कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल ने वारंगल में एक समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री टीडीपी (TDP) और बीआरएस (BRS) से आए नेताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं, पुराने कांग्रेस वफादारों और उनकी उपेक्षा कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने परकल निर्वाचन क्षेत्र से अगला विधानसभा चुनाव लड़ने की भी घोषणा की थी। सुरेखा ने किया था कैबिनेट में बने रहने का आग्रह सुरेखा ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से उन्हें कैबिनेट में बने रहने देने का आग्रह किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक मंत्री के तौर पर उनका काम अच्छा रहा है और उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। मुख्यमंत्री और अन्य लोगों के खिलाफ अपनी बेटी की टिप्पणियों की निंदा न करने के कारण कई कांग्रेस विधायकों द्वारा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग का जिक्र करते हुए सुरेखा ने कहा कि कोई भी विधायक अपनी मर्जी से नहीं बोला और उनके पीछे कोई था। सुरेखा ने जताई आपत्ति जब उनसे पूछा गया कि विधायकों के पीछे कौन था तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया और कहा कि इससे विवाद पैदा होगा। उन्होंने उन विधायकों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की जिन्होंने उनके खिलाफ बात की थी। सुरेखा ने अनुशासनात्मक समिति द्वारा उन्हें भेजे गए नोटिस पर आपत्ति जताई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे शीर्ष नेताओं को ईमेल भेजे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपनी बेटी की टिप्पणियों का समर्थन करती हैं तो सुरेखा ने जवाब दिया कि उनकी बेटी स्वतंत्र है और उन टिप्पणियों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। चिन्ना रेड्डी पर भी हुई कार्रवाई सुरेखा के अलावा, राज्य कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने चिन्ना रेड्डी के खिलाफ भी … Read more

बीजेपी SC मोर्चा में बड़ा फेरबदल, 56 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति में जगह; हॉस्टल प्रभारियों का भी ऐलान

भोपाल  मध्य प्रदेश भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए विभिन्न जिलों में प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों समेत 56 पदाधिकारियों की नियुक्ति की है। प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह परमार ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से नियुक्तियों की सूची जारी की। इसके साथ ही प्रदेश कार्यालय प्रभारी, संभाग प्रभारी, सह सोशल मीडिया प्रभारी, सह मीडिया प्रभारी, छात्रावास संपर्क प्रभारी और स्व-सहायता समूह प्रभारी भी बनाए गए हैं। प्रदेश कार्यसमिति सदस्य     मुरैना: महेश जाटव, मुकेश जाटव     भिंड: धरम सिंह भार्गव, बाबूलाल टैगोर     ग्वालियर नगर: अरविंद बैदौरिया, अर्जुन जाटव, महेश आर्य, मानवेन्द्र मौर्य (मोनू)     श्योपुर: पूर्ण आर्य, दीपकराज वाल्मीकि     शिवपुरी: सुभाष जाटव     सागर: लता साकवार, मूलचंद उर्रिया     छतरपुर: नीरज जाटव     सीधी: राजीव मौर्य, हरिकेश साकेत     जबलपुर नगर: बलराज सोनकर, गोपाल अहिरवार     जबलपुर ग्रामीण: राम महोबिया     कटनी: शिवकुमार चौधरी     छिंदवाड़ा: नितिन डेहरिया     नर्मदापुरम: राजकुमार मकोरिया     हरदा: अरविंद सौदे     भोपाल नगर: डॉ. पंकज कुमार     रायसेन: नेहा आदित्य चावला, जगदीश अहिरवार     विदिशा: सोना सप्रे, राजेश प्रभाकर     सीहोर: रवि नागले     राजगढ़: दिनेश जाटव     इंदौर नगर: दानवीर नरवले, अर्जुन सावले     इंदौर ग्रामीण: महेश गेहलोत, जितेंद्र जटिया     धार: दिनेश बामनिया     बुरहानपुर: राजकुमार बाघ     खरगोन: लच्छीराम नागरे, सुंदरलाल वारसे, एन.एस. सोलंकी     बड़वानी: सुखदेव भोसले, किशोर वर्मा     उज्जैन नगर: मनोज मालवीय, प्रकाश गोमे     उज्जैन ग्रामीण: डॉ. मदन चौहान, प्रकाश जटिया, बबलीलाल मालवीय     शाजापुर: अमित उदय, कंदन जाटव, दिनेश परमार, चंदन सिंह सौराष्ट्र     आगर: प्रभुराम मालवीय, प्रकाश जाटव     रतलाम: नंदकिशोर डुबवाड़ा, योगेश कैथवास     मंदसौर: जितेंद्र अटवाल     नीमच: ओमप्रकाश मेघवाल प्रदेश कार्यालय प्रभारी: गणपत लाल डाबी( प्रदेश महामंत्री, अजा मोर्चा) ये बनाए संभाग प्रभारी     भोपाल: डॉ. जगदीश चौहान     नर्मदापुरम: राकेश सिंह कुचबंदिया     शहडोल: अमित कछवाहा सह सोशल मीडिया प्रभारी: क्षितिज (बाबी) मालवीय सह मीडिया प्रभारी:रामस्वरूप अहिरवार छात्रावास संपर्क प्रभारी एवं सहप्रभारी     प्रभारी: दीपक कुमार भन्नारे     सह-प्रभारी: कमलकांत राजोरिया, दुर्गेश (कालू) चौहान, मनीषा मंगेश रमपुरिया, सरिता मालवीय स्व-सहायता समूह प्रभारी एवं सहप्रभारी     प्रभारी: बरखा वर्मा     सह-प्रभारी: पुष्पा चौहान, पार्वती तामिया

मोदी कैबिनेट की ओवरहॉलिंग की तैयारी? 17 नए चेहरों की एंट्री, वैष्णव-गडकरी को लेकर भी चर्चा

 नई दिल्ली बीजेपी संगठन की नई टीम के गठन के बाद अब मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है. संगठन में हुए बदलावों के बाद से मंत्रिमंडल में बड़े पैमाने पर ओवरहॉलिंग की अटकलें लगाई जा रही हैं. मंत्रिमंडल से कई दिग्गजों की छुट्टी हो सकती है तो युवा और नए चेहरों को एंट्री मिल सकती है. मोदी कैबिनेट बदलाव में 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों के समीकरणों को ध्यान में रखा जा सकता है।  मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर 'आजतक रेडियो' के कार्यक्रम 'रिपोर्टर्स ऑन एयर' (Reporters On Air) में चर्चा हुई. मंत्रिमंडल विस्तार में कौन से नए चेहरे आएंगे और कौन जाएंगे के मुद्दे पर सियासी गलियारों और बीजेपी के कॉरिडोर में क्या बातें हो रही हैं, उसे लेकर सबने अपनी-अपनी बातें रखीं।  'रिपोर्टर्स ऑन एयर' में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को प्रमोशन मिल सकता है तो नितिन गडकरी का मंत्रालय बदला जा सकता है. यही नहीं, कई पुराने और दिग्गज नेताओं की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है तो 16 से 17 नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है।  कैबिनेट के कई दिग्गज नेताओं की होगी छुट्टी मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर ऐश्वर्या पालीवाल ने बताया कि कैबिनेट विस्तार को लेकर राजनीतिक कॉरिडोर में काफी चर्चा है. मंत्रिमंडल में किसे एंट्री मिलनी है, यह बात तब पता चलती है जब पीएम मोदी चाय पर बुलाते हैं. कुछ ऐसे मंत्रालय हैं, जिनके ऊपर मंथन चल रहा है. इस बार बीजेपी में एक बात स्पष्ट है, वो है मंत्री का परफॉर्मेंस. एक-एक मंत्री के कामकाज पर मंथन किया जा रहा है।  ऐश्वर्या पालीवाल आगे कहती हैं कि बीजेपी जानती है कि नई टीम के साथ 2027 के चुनाव में जाना है. उत्तर प्रदेश का चुनाव आसान नहीं है, पंजाब की लड़ाई भी आसान नहीं है और इससे भी बड़ा 2029 का चुनाव है, जो बीजेपी के लिए काफी अहम है. बीजेपी चुनाव जीत रही है, बहुमत से जीत रही है, लेकिन ग्राउंड पर कनेक्ट कम हो रहा है. पिछले दिनों जो कैबिनेट मीटिंग हुई थी, उसमें पीएम मोदी ने यह बात साफ तौर पर अपने सारे मंत्रियों से कही थी कि आप लोग ग्राउंड पर काम कीजिए. ऐसी ही बातें नितिन नवीन की नई टीम के संदर्भ में भी कही गई हैं।  टॉप फाइव मिनिस्ट्री के अंदर भी दिखेगा बदलाव? ऐश्वर्या पालीवाल बताती हैं कि कैबिनेट विस्तार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कई सारे नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं. बीजेपी के सहयोगी दलों को भी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. वह कहती हैं कि मोदी कैबिनेट के टॉप फाइव मंत्रालयों में से किसी एक मिनिस्ट्री के अंदर भी बदलाव दिख सकता है. यह इसलिए नहीं कि काम खराब था, बल्कि किसी और को मौका देने के लिए हो सकता है. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि मोदी कैबिनेट में जो बढ़िया काम कर रहे हैं, उन्हें कोई और मिनिस्ट्री दी जा सकती है।  वह कहती हैं कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वह बहुत बड़ी मिनिस्ट्री है, तो आपको वहां पर भी बदलाव करना पड़ेगा. इसके अलावा कई मंत्री ऐसे हैं, जिनके पास तीन-चार मंत्रालयों का जिम्मा है. इसीलिए उनसे कुछ विभाग लेकर दूसरे मंत्रियों में बांटे जाएंगे।  . कैबिनेट में 14 मंत्री ऐसे हैं जिनके पास एक से ज्यादा मंत्रालय हैं. 14 बहुत बड़ा नंबर होता है और प्रावधानों के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं. मोदी कैबिनेट में फिलहाल 69 मंत्री हैं. इस लिहाज से 12 मंत्री पद खाली हैं।  अश्विनी वैष्णव को मिल सकता है कैबिनेट में प्रमोशन ऐश्वर्या पालीवाल को बीच में टोकते हुए राहुल गौतम कहते हैं कि राज्यसभा से आने वाले मंत्री मुझे लगता है थोड़े ज्यादा दिखेंगे. मंत्रियों के पास अधिक विभागों की जो बात हो रही है, उसमें अश्विनी वैष्णव के पास तीन मंत्रालय हैं. तीनों बड़े-बड़े मंत्रालय हैं- रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और आईटी मंत्रालय. ऐसे में उनसे कुछ मंत्रालयों का जिम्मा लिया जा सकता है. मेरे लिहाज से अश्विनी वैष्णव का काम अच्छा रहा है, जिसके चलते उनका प्रमोशन कर टॉप फाइव मंत्रियों में लाया जा सकता है।  पीयूष मिश्रा कहते हैं कि कई सारे ऐसे मंत्री हैं जिनके पास भारी-भरकम मंत्रालय हैं. प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बना दिया गया है, यह मंत्रालय सीधे-सीधे Gen-Z से जुड़ा हुआ है. संजय शर्मा भी बीच में टोकते हुए कहते हैं कि अश्विनी वैष्णव के बारे में सुन रहे हैं कि शायद उनको प्रमोशन मिल जाए. वह मोदी सरकार के शीर्ष पांच मंत्रियों में से एक हो सकते हैं।  नितिन गडकरी का बदला जा सकता है मंत्रालय 'रिपोर्टर्स ऑन एयर' में संजय शर्मा ने पूछा कि सियासी गलियारों में चर्चा नितिन गडकरी को लेकर है कि कैबिनेट से उनकी छुट्टी हो सकती है. इस पर ऐश्वर्या पालीवाल ने कहा कि मैंने उनके बयान को बहुत ध्यान से देखा है. वह बहुत सहज और अच्छे तरीके से अपनी बात रखते हैं. वह युवा पीढ़ी को आगे लाने की बात कर रहे हैं, लेकिन अपना मंत्री पद छोड़ने की बात नहीं कर रहे हैं।  वह कहती हैं कि मुझे ऐसा लगता है कि ऐसा संकेत है कि कैबिनेट विस्तार होगा तो उनकी मिनिस्ट्री किसी और को दी जा सकती है. उनके पास जो मंत्रालय है, उसमें फेरबदल किया जा सकता है. आगे उनके पास इतनी हैवी मिनिस्ट्री न दिखे, जिसे लेकर चर्चा चल रही है. इसके बाद संजय शर्मा ने पीयूष मिश्रा से पूछा कि गडकरी को लेकर क्या चर्चा है।  पीयूष कहते हैं कि नीट (NEET) की बात हो या ई-20 (E-20) की, जिसे लेकर बहुत बखेड़ा हुआ है. मुझसे एक शख्स बोल रहे थे कि ई-20 तो पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़ा हुआ है, फिर नितिन गडकरी का नाम क्यों आ रहा है? उनके पास ट्रांसपोर्ट मंत्रालय है. इस पर संजय शर्मा कहते हैं कि वह खुद तमाम इंटरव्यू में ई-20 को लेकर बयान दे रहे थे, लेकिन जब मामला विवादों में आया तो सफाई दी।  पीयूष मिश्रा कहते हैं कि अगर धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय पहले … Read more

इंदौर में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम अब 19 सितंबर को, नेहरू स्टेडियम की जगह रीजनल पार्क तय

इंदौर  लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रस्तावित इंदौर दौरा अब 12 सितंबर को नहीं होगा। कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की तारीख एक सप्ताह आगे बढ़ाकर 19 सितंबर कर दी है। कार्यक्रम का स्थल भी बदल दिया गया है। नेहरू स्टेडियम में अनुमति नहीं मिलने के बाद अब आयोजन रीजनल पार्क के सामने प्रस्तावित है। लगातार बारिश को भी तारीख बदलने की एक वजह बताया जा रहा है। नेहरू स्टेडियम में नहीं मिली अनुमति कांग्रेस ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए इंदौर के नेहरू स्टेडियम को प्रस्तावित किया था। इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी। हालांकि, प्रशासन ने कोर्ट से जुड़े मामले का हवाला देते हुए स्टेडियम में कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कांग्रेस ने कार्यक्रम का स्थल बदलने का फैसला किया। अब रीजनल पार्क में होगा कार्यक्रम नेहरू स्टेडियम की जगह अब रीजनल पार्क के सामने कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। कांग्रेस की ओर से नए स्थल पर व्यवस्थाएं जुटाने का काम शुरू किया जा रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं के शामिल होने की संभावना है। नेहरू स्टेडियम पर प्रशासन ने नहीं दी अनुमति कांग्रेस ने राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम की अनुमति मांगी थी। पार्टी की ओर से कार्यक्रम को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई थीं, लेकिन जिला प्रशासन ने नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। प्रशासन की ओर से इसके लिए कोर्ट से जुड़े मामले का हवाला दिया गया। अनुमति नहीं मिलने के बाद कांग्रेस के सामने कार्यक्रम का स्थान बदलने का विकल्प बचा। अब रीजनल पार्क में जुटेंगे छात्र नेहरू स्टेडियम की जगह अब रीजनल पार्क को कार्यक्रम स्थल बनाया गया है। कांग्रेस का फोकस छात्रों और युवाओं को कार्यक्रम से जोड़ने पर है। ‘छात्रों की गूंज’ के जरिए राहुल गांधी छात्रों से सीधे संवाद करेंगे और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे। बीजेपी की बयानबाजी के बीच बदला कार्यक्रम राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी भी शुरू हो गई थी। कार्यक्रम स्थल को लेकर प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने के बाद राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर चर्चा तेज हुई। कांग्रेस ने अब विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय कार्यक्रम का स्थल बदलकर रीजनल पार्क करने का निर्णय लिया है। एक सप्ताह आगे बढ़ा कार्यक्रम पहले राहुल गांधी का इंदौर दौरा 12 सितंबर को प्रस्तावित था। अब यह कार्यक्रम 19 सितंबर को होगा। यानी कार्यक्रम को एक सप्ताह आगे बढ़ाया गया है। नई तारीख और नए स्थल के साथ कांग्रेस अब छात्रों की भागीदारी बढ़ाने और कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारियों में जुटेगी। छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे राहुल ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का फोकस छात्रों और युवाओं पर रहेगा। कांग्रेस के मुताबिक, कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी युवाओं से सीधे संवाद करेंगे और शिक्षा, रोजगार समेत युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे। कांग्रेस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की तैयारी में जुटी है। बारिश ने भी बढ़ाई मुश्किलें इंदौर में लगातार हो रही बारिश के कारण खुले स्थान पर कार्यक्रम की तैयारियों में भी दिक्कतें आ रही थीं। ऐसे में कांग्रेस ने कार्यक्रम की तैयारियों के लिए अतिरिक्त समय लेने का फैसला किया। इसी के चलते 12 सितंबर की प्रस्तावित तारीख को आगे बढ़ाकर 19 सितंबर किया गया है।कार्यक्रम की तारीख आगे बढ़ाने के पीछे लगातार हो रही बारिश भी एक वजह बताई जा रही है। इंदौर में बारिश के कारण खुले स्थान पर होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों में दिक्कतें आ रही थीं। ऐसे में कांग्रेस ने तैयारियों के लिए अतिरिक्त समय लेते हुए कार्यक्रम को 12 सितंबर से बढ़ाकर 19 सितंबर करने का फैसला किया है। बीजेपी-कांग्रेस के बीच पहले से जारी है सियासी बयानबाजी राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच पहले से ही सियासी बयानबाजी चल रही थी। कार्यक्रम स्थल पर अनुमति नहीं मिलने के बाद इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो गई। कांग्रेस ने अब स्थल बदलकर कार्यक्रम की तैयारियों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। एक सप्ताह आगे बढ़ा कार्यक्रम राहुल गांधी का इंदौर दौरा पहले 12 सितंबर को प्रस्तावित था। अब वे 19 सितंबर को इंदौर पहुंचेंगे। नई तारीख और नए स्थल के साथ कांग्रेस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी कर रही है।

24 जुलाई को राज्यसभा चुनाव, बंगाल की 3 सीटों पर BJP-TMC में कांटे की टक्कर; दो-तिहाई बहुमत पर नजर

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की सत्ता परिवर्तन के बाद अब तीन राज्यसभा पर चुनाव की बारी है. निर्वाचन आयोग ने तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है. ये तीनों सीटें बंगाल के सत्ता बदलने के बाद टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से खाली हुई हैं. अब सवाल है कि बीजेपी क्या टीएमसी के बागियों पर दांव खेलेगी या फिर अपने किसी नए चेहरों पर जताएगी भरोसा?  ममता बनर्जी के सत्ता से बाहर होते ही टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुस्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक ने इस्तीफा दे दिया था. राज्यसभा सदस्यता के साथ टीएमसी को भी अलविदा कह दिया था, जिसके चलते खाली हुई तीनों राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव आयोग ने 24 जुलाई को मतदान कराने का फैसला किया है।  बंगाल के बदले हुए सियासी समीकरण के बाद राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं. बीजेपी के पास 207 विधायक हैं तो टीएमसी दो गुटों में बंट चुकी है. इस लिहाज से बीजेपी तीनों राज्यसभा सीटें ममता बनर्जी के हाथों से छीन लेगी, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में ममता बनर्जी को उनके ही बागियों के जरिए मात देगी या फिर नए चेहरों को सांसद भेजेगी? बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव की सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. चुनाव आयोग के मुताबिक राज्यसभा चुनाव के लिए मंगलवार से नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो रही है और 14 जुलाई तक नॉमिनेशन किए जाएंगे. इसके बाद नामांकन पत्रों की  स्क्रूटनी 15 जुलाई को होगी और 17 जुलाई नाम वापस लेने की आखिरी तारीख है. इसके बाद अगर सीटों की संख्या से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में रहते हैं तो फिर 24 जुलाई को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी और उसी दिन पांच बजे के बाद नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे।  राज्यसभा की ये तीन सीटें सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं, लेकिन तीनों सीटों का कार्यकाल अलग-अलग हैं. सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक का कार्यकाल 18 अगस्त 2029 तक था तो सुष्मिता देव का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था. इस लिहाज से दो सीटें के एक साथ मतदान होंगे तो एक सीट के लिए अलग से वोटिंग होगी।  ममता बनर्जी से तीनों सीटें छीन लेगी बीजेपी राज्यसभा की तीनों ही सीटों पर टीएमसी का कब्जा था, लेकिन अब ममता बनर्जी के हाथों से तीनों ही राज्यसभा सीटें बीजेपी छीन लेगी. बंगाल विधानसभा की कुल 294 सीटों में से बीजेपी के पास इस समय 207 विधायक हैं, जबकि ममता बनर्जी की टीएमसी महज 80 विधायक हैं, लेकिन दो गुटों में बंटे हुए हैं. टीएमसी के 80 में से 60 से 65 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के साथ हैं और 15 विधायक ममता बनर्जी के साथ हैं।   राज्यसभा उपचुनाव के लिए अलग-अलग वोटिंग होनी, इसलिए बहुमत के आंकड़े के लिहाज से बीजेपी बिना किसी अड़चन के तीनों राज्यसभा सीटों पर कब्जा करने की स्थिति में है. यह ममता बनर्जी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि उच्च सदन में उनकी पार्टी की ताकत सीधे तौर पर कम होने जा रही है. यही नहीं टीएमसी के विधायक अगर एकजुट भी हो जाते हैं तो भी नहीं जीत पाएंगे. इसकी वजह यह है कि प्रथम वारियता के आधार पर भी बीजेपी की संख्या टीएमसी से ज्यादा हो रही है।    टीएमसी के 'बागियों' पर दांव खेलेगी भाजपा? राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जिन तीन नेताओं ने टीएमसी नेतृत्व से नाराज होकर राज्यसभा से इस्तीफा दिया है, क्या बीजेपी उन्हें ही राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाएगी. सुखेंदु शेखर रॉय टीएमसी का एक बड़ा और अनुभवी चेहरा रहे हैं तो सुस्मिता देव असम की कद्दावर महिला नेता के रूप में जानी जाती हैं. माना जा रहा है कि जिस तरह से टीएमसी के नेताओं ने बीच कार्यकाल में इस्तीफा दिया है, उसके चलते माना जा रहा है कि बीजेपी बागियों पर भरोसा जता सकती है।  सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने टीएमसी छोड़ दी है, लेकिन अधिकारिक तौर पर बीजेपी का दामन नहीं थामा है. ऐसे में अब सभी की निगाहें लगी हुई हैं कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में किसे उम्मीदवार बनाएगी. सूत्रों की माने तो सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक पर बीजेपी दांव खेल सकती है, लेकिन सुष्मिता देव को राज्यसभा के बजाय असम से लोकसभा उपचुनाव लड़ाया जा सकता है।   बीजेपी क्या नए और युवा चेहरों को देगी मौका बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से बीजेपी के हौसले बुलंद है. बीजेपी ने आलाकमान का एक धड़ा यह मान रहा है कि विधानसभा चुनाव में मिली बंपर जीत के बाद अब पार्टी को किसी बैसाखी या बाहरी नेताओं की जरूरत नहीं है. ऐसे में बीजेपी किसी स्थानीय नेताओं को मौका दे सकती है. सूत्रों के मुताबिक आरएसएस और भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी इस पक्ष में है कि जिन्होंने संकट के दिनों में बंगाल में भाजपा का झंडा थामे रखा, उन्हें पुरस्कृत किया जाए।   पार्टी उत्तर बंगाल से किसी मजबूत राजवंशी या आदिवासी चेहरे और दक्षिण बंगाल से किसी मतुआ समुदाय या सांगठनिक पृष्ठभूमि के नेता को मौका दे सकती है. इस तरह बीजेपी नए चेहरों को उतारकर 2029 के आम चुनाव के लिए राज्य में अपनी एक नई और कड़क लीडरशिप लाइन तैयार करना चाहती है. अब देखना है कि बीजेपी अपनी जीत के लिए कन्फर्म है, लेकिन किस चेहरे पर दांव खेलती है, यह देखना होगा?  दो-तिहाई बहुमत के कितनी दूर बीजेपी राज्यसभा की इन तीन सीटें जीतने के बाद मॉनसून सत्र के बीच में यानी जुलाई के आखिरी सप्ताह में ही उच्च सदन में बीजेपी की संख्या में इजाफा हो जाएगा. सरकार यदि मॉनसून सत्र में फिर से महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लाती है तो राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत हासिल करने में आसानी रहेगी. जुलाई के आखिरी सप्ताह में राज्यसभा में 245 सदस्यों के सदन में दो तिहाई बहुमत के लिए 162 सांसदों की जरूरत होगी।  बीजेपी तीन राज्यसभा सीटें जीतने के बाद उसका आंकड़ा 117 हो जाएगा. एनजीए के पास राज्यसभा सांसदों … Read more