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चुनाव के टिकट का ऐलान, 4 उम्मीदवारों का नाम तय; जानिए कोयल मल्लिक की राजनीति में एंट्री

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। इस सूची में राजनीति, प्रशासनिक सेवा, कानून और सिनेमा जगत की जानी-मानी हस्तियों को जगह दी गई है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, अभिनेता से नेता बने बाबुल सुप्रियो, मशहूर वकील मेनका गुरुस्वामी और बंगाली अभिनेत्री कोयल मल्लिक को संसद के उच्च सदन के लिए चुना गया है। यह घोषणा राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले की गई है, जिसे ममता बनर्जी का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। कौन हैं TMC के ये 4 दिग्गज उम्मीदवार? पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को चुनकर एक संतुलित टीम बनाने की कोशिश की है: राजीव कुमार: राजीव कुमार बंगाल के प्रभावशाली पुलिस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने जुलाई 2024 से लेकर 31 जनवरी 2026 को अपनी सेवानिवृत्ति तक राज्य के पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्य किया। उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ पार्टी को दिल्ली में मिलेगा। बाबुल सुप्रियो: पूर्व केंद्रीय मंत्री और मशहूर गायक बाबुल सुप्रियो पहले भाजपा में थे, लेकिन बाद में उन्होंने TMC का दामन थाम लिया था। वे अपनी प्रखर वक्ता शैली के लिए जाने जाते हैं। कोयल मल्लिक: बंगाली सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री कोयल मल्लिक को उम्मीदवार बनाकर TMC ने ग्लैमर और जन-अपील का कार्ड खेला है। उनके पिता रंजीत मल्लिक भी बंगाल के दिग्गज अभिनेता रहे हैं। मेनका गुरुस्वामी: सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने IPAC मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का प्रतिनिधित्व किया था। उनकी कानूनी समझ संसद में पार्टी के पक्ष को मजबूती देगी। विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संदेश TMC ने अपने उम्मीदवारों को बधाई देते हुए कहा है कि उन्हें इन नेताओं की नेतृत्व क्षमता और समर्पण पर पूरा भरोसा है। पार्टी ने उम्मीद जताई है कि ये चारों उम्मीदवार हर भारतीय के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए TMC की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इन नामों का चयन करके ममता बनर्जी ने यह संदेश दिया है कि उनकी पार्टी हर वर्ग प्रशासन, कला और कानून के बुद्धिजीवियों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।

गांधी परिवार पर गंभीर आरोप, विदेशी फंडिंग-जासूसी मामले में भाजपा का हमला

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को भाजपा मुख्यालय पर प्रेसवार्ता कर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ विदेशी लेखकों और अभिलेखों में ऐसे उल्लेख हैं, जिन पर कांग्रेस को जवाब देना चाहिए। राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पॉल मैगॉर की किताब ‘स्पाइंग इन साउथ एशिया’ में यह लिखा गया है कि उस समय भारत की व्यवस्था का शायद ही कोई हिस्सा रहा हो जो अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए की पहुंच से बाहर रहा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तक में यह भी उल्लेख है कि पोलित ब्यूरो की ओर से कांग्रेस पार्टी को दो मिलियन की राशि दी गई थी। उन्होंने कहा कि ये बातें संबंधित देशों के पूर्व अधिकारियों द्वारा दर्ज की गई हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने ‘मित्रोखिन आर्काइव्ज़’ का हवाला देते हुए कहा कि उसमें केजीबी संपर्कों का जिक्र है और दावा किया गया है कि वर्ष 1976 में कांग्रेस पार्टी को दो मिलियन रुपए और बाद में दस लाख रुपए दिए गए थे। उन्होंने कहा कि पचास साल पहले यह रकम बहुत बड़ी मानी जाती थी। भाजपा सांसद ने सवाल किया कि इन पुस्तकों में दर्ज सीधे दावों पर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब क्यों नहीं आया है। उन्होंने कच्चातीवू द्वीप को श्रीलंका को सौंपे जाने और 1971 के युद्ध के बाद की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। त्रिवेदी ने कहा कि 93 हजार पाकिस्तानी युद्धबंदियों की रिहाई और 54 भारतीय सैनिकों की वापसी न होने जैसे मुद्दों पर भी देश जवाब चाहता है कि उस समय किन आधारों पर फैसले लिए गए। वहीं, दिल्ली की एक अदालत द्वारा आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कथित आबकारी नीति मामले में बरी किए जाने पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। त्रिवेदी ने कहा कि यदि कोई सबूत नहीं था, तो अदालत ने आरोप तय करने की अनुमति कैसे दी? उन्होंने इसे तकनीकी विषय बताते हुए कहा कि अदालत का विस्तृत फैसला पढ़ने के बाद पार्टी संरचित प्रतिक्रिया देगी। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 100 सिम कार्ड और मोबाइल फोन नष्ट होने की बात सामने आई है, जिससे साक्ष्यों की कमी की स्थिति उत्पन्न हुई होगी। त्रिवेदी ने कहा कि मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा और पार्टी निर्णय का विस्तार से अध्ययन करने के बाद अपना पक्ष रखेगी।

डीके शिवकुमार ने मानी सच्चाई, कहा- पांच योजनाओं का बोझ झेल रही सरकार

कर्नाटक कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की पांच योजनाओं को लेकर उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने स्वीकार किया है कि यह सरकारी खजाने के ऊपर बोझ हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं को इस गारंटी के साथ तैयार किया गया था कि पैसा नागरिकों के हाथों में रहे, ताकि कठिन समय में उनका आत्मविश्वास कम न हो। उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भले ही सरकार पर बोझ पड़ता हो, लेकिन वह इन योजनाओं को जारी रखेंगे। बेंगलुरू में मीडिया से बात करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्य की इन पांच गारंटी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य राज्य की जनता को मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इन योजनाओं में से अपात्र और मृत लोगों को हटाए जाने की जरूरत है। सरकार लगातार इस संबंध में काम कर रही है। गौरतलब है कि उप मुख्यमंत्री जिन योजनाओं का जिक्र कर रहे थे उनमें गृह ज्योति योजना, जिसके अंतर्गत हर परिवार को 200 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाती है। इसके अलावा, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य, युवा निधि और शक्ति योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। यह योजनाएं मुख्यतः जनता को सीधा लाभ देती हैं। शिवकुमार ने स्वीकार कहा, "यह योजनाएं सरकार पर भले ही वित्तीय बोझ डाल सकती हैं, लेकिन सार्वजनिक कल्याण से समझौता नहीं किया जाएगा।" इसी बीच, परिवहन और मुजरा मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि विभाग ने आगामी राज्य बजट में 3,000 नई बसों की मांग की है ताकि बेड़े को मजबूत किया जा सके। यह मांग ‘शक्ति’ योजना के लागू होने के बाद बसों में यात्रियों की संख्या में तेज वृद्धि के बीच की गई है। रेड्डी ने सुझावों को खारिज किया कि मुफ्त यात्रा कार्यक्रम परिवहन कंपनियों के घाटे का कारण है। उन्होंने कहा, “शक्ति योजना परिवहन कंपनियों के घाटे का कारण नहीं है। परिवहन कंपनी भाजपा सरकार के दौरान भी घाटे में थी।” उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को लाभ कमाने के बजाय सेवा के रूप में चलाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा, “हम 35% लाभ कमा रहे हैं। अगर घाटा भी होगा तो हम बसें चलाएंगे। यहां लाभ कमाने का कोई उद्देश्य नहीं है। निजी कंपनियां लाभ न होने पर बसें नहीं चलातीं।” आपको बता दें, कर्नाटक सरकार द्वारा कई लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्य तौर पर शक्ति जैसी योजनाएं, जिसमें गैर लग्जरी सरकारी बसों में महिलाओं को फ्री टिकट की व्यवस्था है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की इस स्कीम से राज्य परिवहन विभाग को घाटा हुआ है।  

पन्नीरसेल्वम का DMK में शामिल होना, तमिलनाडु में सियासी परिदृश्य में हलचल

 चेन्नई तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सियासत में हलचल तेज हो गई है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK से निष्कासित नेता ओ. पन्नीरसेल्वम आज सत्ताधारी पार्टी DMK में शामिल हो गए हैं.  DMK में शामिल होने के बाद ओपीएस ने कहा, 'आज मैंने अन्नादुराई की बनाई गई पार्टी डीएमके में खुशी-खुशी शामिल हो गया हूं. इसके लिए डीएमके नेता का धन्यवाद. डीएमके नेता स्टालिन अच्छे से पार्टी चला रहे हैं. ईपीएस के अहंकार और सत्ता के दुरुपयोग ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि AIADMK कभी चुनाव नहीं जीत सकती.' ओपीएस ने आगे कहा, 'मुख्यमंत्री स्टालिन ने सुशासन दिया है और राज्य इसे देख रहा है. विशेषकर महिलाएं डीएमके सरकार के परिवार चलाने के लिए दी गई सुविधाओं से खुश हैं. ईपीएस तानाशाही तरीके से पार्टी चला रहे हैं और एआईएडीएमके पतन की ओर अग्रसर है.' दबाव में डीएमके में शामिल होने के सवाल पर, ओपीएस ने कहा, 'पिछले कई सालों में झेली गई कड़वाहट के कारण ये फैसला मैंने खुद लिया है. आगामी चुनाव में, अगर स्टालिन मौका देंगे तो मैं चुनाव लड़ूंगा. डीएमके का कोई विरोध नहीं कर सकता.' पन्नीरसेल्वम तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उन्हें दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता रहा है. AIADMK में उनके और एडप्पादी के. पलानीस्वामी के बीच लंबे समय तक नेतृत्व संघर्ष चला, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल होने से साउथ तमिलनाडु का वोट बैंक प्रभावित हो सकता है. यहां थेवर समुदाय में पन्नीरसेल्वम का समर्थन मजबूत माना जाता है. DMK कार्यकर्ता ने जताई खुशी पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल होने पर डीएमके कार्यकर्ता अभिषेक ने खुशी जाहिर की है. उन्होंने एएनआई से बात करते हुए कहा, 'ये एक शानदार दिन है. लोग साबित कर रहे हैं कि हम फिर से एक मजबूत सरकार बनाने जा रहे हैं. हम अभी मजबूत हैं और आगे और भी मजबूत होंगे. इसलिए, ये अच्छा होगा ये (ओपीएस के डीएमके में शामिल होने की संभावना) हमारी नेतृत्व क्षमता को दिखाता है कि कोई दूसरा (पूर्व) मुख्यमंत्री भी हमारे साथ जुड़ सकता है. हमें हराने वाला कोई नहीं है.' तीन बार मुख्यमंत्री बने पन्नीरसेल्वम  बता दें कि ओ.पन्नीरसेल्वम पहली बार 2001 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे. हालांकि 6 महीने बाद ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद 2014 में उन्होंने दूसरी बार राज्य के सीएम पद का कार्यभार संभाला. लेकिन इस बार वो एक महीने तक ही इस पद पर बने रह सके. पनीरसेल्वम 2016 में तीसरी बार राज्य के सीएम बने थे, लेकिन 2017 में उन्होंने एक बार फिर इस्तीफा दे दिया था.

नितेन्द्र सिंह राठौर ने दिया बड़ा बयान, भाजपा में शामिल होने की अफवाहों पर कांग्रेस में मची हलचल

भोपाल   हाल ही में मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर हाइलाइट हुई है। इन तस्वीरों ने क्षेत्र में यह माहौल बना दिया है कि अब पृथ्वीपुर से विधायक नितेन्द्र सिंह राठौर कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल हो जाएंगे। इतना ही नहीं कई राजनैतिक पंडित तो यह भी कह रहे हैं कि नितेन्द्र सिंह राठौर अगला चुनाव भी भाजपा से लड़ेंगे। हालांकि इस बात की पुष्टि हम नहीं करते, परन्तु इन दिनों नितेन्द्र सिंह राठौर का रहन-सहन यह बता रहा है कि अंदरखाने कुछ तो चल रहा है। तस्वीरों से बढ़ीं सियासी अटकलें पिछले कुछ महीनों में विधायक नितेन्द्र सिंह राठौर की प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ कई मुलाकातें सामने आई हैं। खासतौर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव से उनकी बार-बार की मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े किए हैं। इसके अलावा पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल और कैबिनेट मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के साथ बैठकों की तस्वीरें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा नेताओं से उनकी बढ़ती नजदीकियां किसी बड़े राजनीतिक फैसले का संकेत हो सकती हैं। हालांकि अभी तक यह केवल अटकलों के दायरे में है। विधायक का जवाब: “जनता के काम के लिए मिलना जरूरी” नितेन्द्र सिंह राठौर ने कहा ये निराधार बातें हैं जिनका कोई औचित्य नहीं हैं। किसी फंक्शन में जाने की तस्वीर को लेकर या मुख्यमंत्री से मिलने का मतलब ये नहीं कि मैं पार्टी बदल रहा हूं। सीएम मोहन यादव प्रदेश के मुखिया हैं उनसे सत्ता पक्ष के विधायक भी मिलते हैं और विपक्ष के विधायक भी मिलते हैं। क्योंकि, जनता ने चुनकर भेजा है तो हम क्षेत्र के काम मांगने या जनता की समस्याओं से अवगत कराने के लिए किसके पास जाएंगे? विपक्ष का विधायक यदि प्रदेश के मुखिया से मिलता है तो इसीलिए मिलता है ताकि जनता के हितों का ध्यान रख सके। क्योंकि, मुझे जनता ने चुनकर भेजा है। पृथ्वीपुर विधायक ने कहा मैं तो कहता हूं कि जनता के लिए मुझे प्रधानमंत्री जी से मिलना पड़े या किसी केन्द्रीय मंत्री से मिलना पड़े तो उनसे भी मिलूंगा। इसमें क्या गलत है? लेकिन, इन मुलाकातों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना। ये बहुत दुखद और निराधार है। मैं इतना ही कहूंगा कि ऐसी खबरों से पत्रकारों को बचना चाहिए। क्योंकि इससे एक जनप्रतिनिधि जी जनता के द्वारा चुनकर आता है उसकी छवि खराब करने का प्रयास है। जनता के काम के लिए और विकास कार्यों के लिए किसी से भी काम के लिए मिलना होगा मैं मिलूंगा।  माह पहले संभावित बदलाव की चर्चा सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि यदि कोई राजनीतिक बदलाव होता है तो वह चुनाव से लगभग छह माह पहले हो सकता है। फिलहाल वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे, ताकि कानूनी या दल-बदल से जुड़ी जटिलताएं न खड़ी हों। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समय से पहले कदम उठाने पर सदस्यता और अयोग्यता से जुड़े प्रश्न उठ सकते हैं। हालांकि यह पूरी तरह अटकलों पर आधारित है और विधायक या पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान इस संबंध में सामने नहीं आया है। बदली हुई राजनीतिक शैली स्थानीय मीडियाकर्मियों का कहना है कि पहले भाजपा सरकार के खिलाफ मुखर रहने वाले विधायक अब अपेक्षाकृत शांत नजर आते हैं। विपक्षी तेवरों में आई इस कमी को भी लोग संभावित राजनीतिक बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि मध्य प्रदेश की राजनीति में पृथ्वीपुर क्षेत्र से जुड़ी यह चर्चा आने वाले समय में और गर्मा सकती है। आने वाले महीनों में ही यह साफ होगा कि यह केवल सियासी कयास हैं या किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की भूमिका।  

कर्नाटक में CM फेस पर नया ट्विस्ट: DK शिवकुमार नहीं, HM के समर्थन में नारे; मंत्रीजी ने किया किनारा

बेंगलुरु कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद का नाटक अभी खत्म नहीं हुआ है। वहां लंबे समय से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को सीएम बनाने को लेकिर सियासी रस्साकसी जारी है। अब इस नाटक में तीसरे किरदार की एंट्री हुई है। कर्नाटक के गृहमंत्री जी. परमेश्वर के समर्थकों ने तुमकुरु में उनके सामने ही उनके समर्थन में राज्य के 'अगले मुख्यमंत्री' के नारे लगाए लेकिन बड़ी बात यह है कि परमेश्वर ने समर्थकों द्वारा लगाए गए राज्य के 'अगले मुख्यमंत्री' नारों से खुद को अलग कर लिया है। परमेश्वर ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि वह इस पद के लिए अटकलों को हवा नहीं देंगे और ना ही पैरवी करेंगे क्योंकि कोई भी निर्णय पार्टी के आला कमान का है। परमेश्वर ने बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा कि उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए नारों में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने दोहराया कि नेतृत्व संबंधी निर्णय उचित समय पर पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता कि और कोई भ्रम उत्पन्न हो। हमारा आलाकमान उचित समय पर निर्णय लेगा।” मैं कोई पैरवी नहीं करूंगा मंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा कथित पैरवी के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा, "मैं कोई पैरवी नहीं करूंगा। कल मैंने जो कहा क्या आपने वह नहीं सुना? किसी ने मुझसे पूछा कि क्या मैं दिल्ली जा रहा हूं। मैं दिल्ली नहीं गया। बस इतना ही।" उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे निर्णय कांग्रेस के आलाकमान पर छोड़ दिए जाते हैं। परमेश्वर ने कहा कि शुभचिंतक अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं लेकिन उन्होंने उन्हें ऐसा करने से हतोत्साहित किया है। मैं इस भ्रम में शामिल नहीं होऊंगा उन्होंने कहा, "हो सकता है कि हमारे शुभचिंतक यहां अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हों। मैं उन्हें ऐसा करने से कैसे मना कर सकता हूं? मैंने उन्हें ऐसा ना करने के लिए कहा है… लेकिन जैसा कि मैंने कहा, मैं इस भ्रम में शामिल नहीं होऊंगा और न ही इसे बढ़ावा दूंगा।" कर्नाटक के गृह मंत्री ने लापता बच्चों के मामलों के संबंध में कहा कि सरकार इसे गंभीरता से ले रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रह रहे विदेशियों का पता लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।  

NCP में बड़ा बदलाव: सुनेत्रा पवार को सौंपी गई राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी

मुंबई एनसीपी के मुंबई अधिवेशन में सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। अजित पवार के निधन के बाद उन्हें पहले उपमुख्यमंत्री और अब संगठन की कमान सौंपी गई है। बारामती से उनके चुनाव लड़ने की चर्चा भी तेज है। वहीं पार्थ पवार को भी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।   महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी में नेतृत्व परिवर्तन के साथ नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो गया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। पार्टी बैठक में लिया गया यह फैसला राज्य की राजनीति में अहम माना जा रहा है। अजित पवार की विमान हादसे में मौत के बाद पार्टी और सत्ता दोनों की जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल।   अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति अचानक नए मोड़ पर आ गई थी। उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सुनेत्रा पवार को सौंपी गई और अब उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय कमान भी मिल गई है। पिछले कुछ दिनों से एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय की चर्चा चल रही थी, लेकिन अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेताओं ने इसमें खास रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए नया नेतृत्व तय किया और सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया गया।   मुंबई अधिवेशन में सर्वसम्मति से फैसला एनसीपी का राष्ट्रीय अधिवेशन 2026 मुंबई के वर्ली इलाके में आयोजित किया गया, जिसमें पार्टी के सभी बड़े नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। अधिवेशन के दौरान सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव को सभी नेताओं ने एकमत से मंजूरी दी। पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल ने औपचारिक रूप से उनके नाम की घोषणा की। साथ ही यह भी तय किया गया कि प्रफुल्ल पटेल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रहेंगे, जबकि महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सांसद सुनील तटकरे संभालेंगे। बारामती से विधायक बनने की चर्चा तेज राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा तेज हो गई है कि सुनेत्रा पवार जल्द ही बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ सकती हैं। यह सीट अजित पवार की राजनीतिक पहचान मानी जाती रही है। अगर उपचुनाव होता है तो सांसद सुप्रिया सुले ने उम्मीद जताई है कि यह चुनाव निर्विरोध भी हो सकता है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में सुनेत्रा पवार विधानसभा पहुंचकर राज्य की राजनीति में और मजबूत भूमिका निभा सकती हैं।

इजरायल दौरे के बाद भारत और ईरान पर सियासी हलचल, ओवैसी ने दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी एक पोस्ट में ओवैसी ने इस कदम को फिलिस्तीन के प्रति भारत के ऐतिहासिक समर्थन के साथ विश्वासघात करार दिया है। ओवैसी ने यह भी दावा किया कि पीएम मोदी की यात्रा खत्म होते ही अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। गाजा को लेकर ओवैसी की सख्त टिप्पणी ओवैसी ने अपने पोस्ट की शुरुआत में ही गाजा की स्थिति को 'नरसंहार' करार दिया। उन्होंने लिखा कि गाजा में जो कुछ भी हो रहा है, उसे इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। एआईएमआईएम प्रमुख ने इजरायल के प्रधानमंत्री की ओर इशारा करते हुए उन्हें 'युद्ध अपराधी' कहा, जिसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी है। उन्होंने पीएम मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे समय में इजरायल जाना और एक 'युद्ध अपराधी' को गले लगाना भारत की स्थापित विदेश नीति के खिलाफ है। ओवैसी ने कहा कि भारत हमेशा से फिलिस्तीनी लोगों और उनके अधिकारों का समर्थन करता आया है। उनके अनुसार, मौजूदा प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत के उस लंबे समय से चले आ रहे सैद्धांतिक समर्थन के साथ सीधा धोखा है। ओवैसी ने मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की भी आशंका जताई है। उन्होंने अंदेशा जताया कि प्रधानमंत्री के इस दौरे के समाप्त होने के बाद अमेरिका, ईरान पर हमला कर सकता है। उन्होंने अपनी इस पोस्ट का अंत 'जायोनिज्म मुर्दाबाद' के नारे के साथ किया है, जो इजरायल की राजनीतिक विचारधारा 'जायोनिज्म' के प्रति उनके कड़े विरोध को दर्शाता है। कांग्रेस ने भी बोला हमला कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के इजराइल दौरे से पहले बुधवार को आरोप लगाया था कि जब पूरी दुनिया इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना कर रही है तो प्रधानमंत्री मोदी वहां 'नैतिक कायरता' का परिचय देने जा रहे हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, '20 मई 1960 को जवाहरलाल नेहरू गाजा में थे और उन्होंने वहां संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन बल की भारतीय टुकड़ी से मुलाकात की थी। 29 नवंबर 1981 को भारत ने फलस्तीन के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। 18 नवंबर 1988 को भारत ने औपचारिक रूप से फलस्तीन राष्ट्र को मान्यता दी।' कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा- 'मुझे आशा है कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी अपनी आगामी इजराइल यात्रा पर नेसेट को संबोधित करते हुए गाजा में हजारों निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के नरसंहार का उल्लेख करेंगे और उनके लिए न्याय की मांग करेंगे।' उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत अपने पूरे इतिहास में जो सही है, उसके लिए खड़ा रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा, 'हमें दुनिया को सत्य, शांति और न्याय की रोशनी दिखाना जारी रखना चाहिए।' ऐतिहासिक दौरे पर पीएम मोदी, गाजा शांति योजना का जिक्र बता दें कि प्रधानमंत्री अपने दो दिवसीय इजरायल दौरे पर हैं। एक दिन पहले उन्होंने इजरायल की संसद 'नेसेट' में अपने ऐतिहासिक संबोधन में गाजा शांति पहल को पूरे क्षेत्र के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का मार्ग बताया, साथ ही उन्होंने इजरायल के प्रति एकजुटता का सशक्त संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद चाहे कहीं हो, यह हर जगह की शांति के लिए खतरा है। मोदी ने कहा कि इजरायल की तरह भारत भी आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की एक 'सुसंगत और अडिग नीति अपनाता है और इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं है'। उन्होंने इस खतरे का मुकाबला करने के लिए निरंतर और समन्वित वैश्विक प्रयासों का आह्वान भी किया। प्रधानमंत्री इजरायल की प्रतिनिधि सभा, नेसेट को संबोधित करने के कई घंटे पहले यहां पहुंचे। बेन गुरियन हवाई अड्डे पर इजरायल के उनके समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने उनका जोरदार स्वागत किया।

NCP में नई सियासी चाल, अजित पवार खेमे ने सुनेत्रा पवार पर लगाया दांव

मुंबई  अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला लेने की खबर है। पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी ने सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार तय किया है। इस निर्णय को अजित पवार के बाद पार्टी की कमान तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित गुट) की केंद्रीय कार्यकारिणी की एक बेहद अहम बैठक आज गुरुवार को मुंबई के वर्ली स्थित एनएससीआई डोम में होने जा रही है। इस बैठक में सुनेत्रा पवार को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने की औपचारिक घोषणा की जाएगी। पिछले महीने बारामती में हुए एक दर्दनाक विमान हादसे में अजित पवार के निधन ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जिसके बाद से ही पार्टी नेतृत्व को लेकर कयासों का दौर जारी था। पार्थ पवार नहीं, सुनेत्रा पर लगी मुहर अजित पवार के निधन के बाद से ही सवाल उठ रहा था कि पार्टी का अगला मुखिया कौन होगा? चर्चाओं के बाजार में अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम भी काफी ऊपर था, लेकिन पार्टी के अनुभवी नेताओं ने सुनेत्रा पवार के नाम पर भरोसा जताया है। महायुति गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ-साथ एनसीपी के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल और सांसद सुनील तटकरे ने भी सुनेत्रा पवार के नाम का पुरजोर समर्थन किया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आज होने वाली बैठक में कार्यकारिणी सर्वसम्मति से सुनेत्रा को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपेगी। सुनेत्रा पहले ही उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर अपनी प्रशासनिक क्षमता दिखा चुकी हैं, और अब संगठन की कमान संभालना उनके लिए एक नई परीक्षा होगी। राज्यसभा की सीट पर अब बेटे का कब्जा नेतृत्व परिवर्तन के साथ-साथ परिवार और पार्टी के भीतर पदों का नया बंटवारा भी शुरू हो गया है। सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि वे अब राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। खाली हुई इस राज्यसभा सीट के लिए पार्टी ने पार्थ पवार को अपना उम्मीदवार बनाने का बड़ा फैसला लिया है। यानी अब पिता की विरासत को सुनेत्रा राज्य में संभालेंगी, जबकि दिल्ली की राजनीति में पार्थ पवार पार्टी का चेहरा बनेंगे। हालांकि, सुनेत्रा पवार के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए अगले छह महीने के भीतर महाराष्ट्र विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होगा। क्या सुप्रिया सुले देंगी सुनेत्रा को वॉकओवर? अजित पवार के निधन से खाली हुई बारामती विधानसभा सीट पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। एनसीपी (अजित गुट) यहाँ से सुनेत्रा पवार को उम्मीदवार बनाने की तैयारी में है। पार्टी की सबसे बड़ी कोशिश यह है कि इस उपचुनाव को 'निर्विरोध' कराया जाए। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि अजित पवार के प्रति सम्मान प्रकट करने की यह एक राजनीतिक परंपरा होनी चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने भी इसके संकेत दिए हैं कि मौजूदा हालात को देखते हुए चुनाव नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो बारामती से सुनेत्रा पवार की जीत तय है और यह पवार परिवार के बीच जारी राजनीतिक कड़वाहट को कम करने का एक बड़ा जरिया भी बन सकता है। संगठन के लिए आज का दिन ऐतिहासिक आज वर्ली में होने वाली यह बैठक केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि अजित पवार के बिना पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक बड़ा मोड़ है। कार्यकर्ताओं में अपने चहेते नेता को खोने का गम तो है, लेकिन सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में वे नई ऊर्जा तलाश रहे हैं। आगामी उपचुनाव और संगठन को मजबूती देने के लिए सुनेत्रा के पास बहुत कम समय है। क्या वे अजित पवार के उस करिश्मे को बरकरार रख पाएंगी जिसने एनसीपी को महाराष्ट्र की सत्ता के केंद्र में रखा था? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन आज का दिन महाराष्ट्र के इतिहास में सुनेत्रा पवार के उदय के रूप में दर्ज होने जा रहा है।

परिवार की कॉम्प्रोमाइज पॉलिटिक्स पर घिरे Rahul Gandhi, Piyush Goyal ने साधा निशाना

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस की 'कॉम्प्रोमाइज' राजनीति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "राहुल गांधी दुनियाभर में भारत को नीचा दिखाने के लिए एआई समिट में बिना शर्ट के लोगों को भेजते हैं, तो यह भारत की छवि और हितों से 'कॉम्प्रोमाइज' करने की उनकी पारिवारिक विरासत को ही आगे बढ़ाता है।" उन्होंने जवाहर लाल नेहरू पर आरोप लगाए कि उनके कार्यकाल में 1950 के दशक में भारत ने चीन को नाराज न करने के लिए स्थायी सीट ठुकराई। 1954 में भारत ने औपचारिक रूप से तिब्बत को चीन का हिस्सा स्वीकार किया। इसके अलावा, 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान खुफिया चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, जिससे हार हुई। इस बारे में रिपोर्ट अभी भी गोपनीय है। पीयूष गोयल ने राजीव गांधी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, बोफोर्स डील के समय रक्षा अनुबंध में कथित रूप से कमीशनखोरी और दस्तावेजित लीपापोती शामिल थी। यूनियन कार्बाइड (1984) के दौरान आरोपी वॉरेन एंडरसन को भारत छोड़ने की अनुमति दी गई। वहीं, विदेशी बिचौलिए का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि रक्षा निर्णयों पर करीबी व्यक्तिगत संबंधों के माध्यम से प्रभाव डाला गया। उन्होंने इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान विदेशी फंडिंग, कच्चातीवू और सिक्योरिटी के फैसले में 'कॉम्प्रोमाइज' के आरोप लगाए। सोनिया गांधी को लेकर उन्होंने दावा किया कि शैडो पावर यानी यूपीए के दौरान असली अथॉरिटी प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर काम करती थी। नेशनल हेराल्ड के मामले में पार्टी फंड का इस्तेमाल परिवार के कंट्रोल वाली एंटिटी को एसेट्स ट्रांसफर करने के लिए किया गया था। इसके अलावा, चीन और सोरोस नेटवर्क सहित विदेशी डोनर्स से जुड़े फाउंडेशन ने गंभीर चिंताएं पैदा कीं। एक अन्य पोस्ट में पीयूष गोयल ने लिखा, "राहुल गांधी के भ्रामक बयानों पर भारी कांग्रेस का इतिहास। वो जितना भूलने की कोशिश करें, लेकिन भारत की जनता पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी की ओर से राष्ट्रहित के साथ बार-बार किए गए समझौते को भूल नहीं सकती।"