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‘सिफारिश नहीं, बस योग्यता’: MP कांग्रेस में प्रवक्ता खोजने के लिए टैलेंट हंट अभियान

भोपाल मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने प्रवक्ता, शोध कोऑर्डिनेटर और प्रचार-प्रसार कोऑर्डिनेटर के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने बताया कि इस चयन प्रक्रिया के लिए 28 फरवरी तक आवेदन किए जा सकेंगे। कांग्रेस 'टैलेंट हंट प्रोग्राम' के माध्यम से युवाओं को मौके देगी। जीतू पटवारी ने औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि बदलते राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी को ऐसे ऊर्जावान, वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध और शोधपरक सोच रखने वाले साथियों की आवश्यकता है, जो कांग्रेस की विचारधारा को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचा सकें। जीतू पटवारी ने कहा कि ऐसे लोगों का चयन किया जाएगा जो कांग्रेस की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता एवं स्पष्ट वैचारिक समझ, समसामयिक मुद्दों पर गहन अध्ययन एवं शोध क्षमता, प्रभावशाली संवाद कौशल एवं वाक्पटुता, साथ ही मीडिया प्रबंधन की समझ, तथ्यात्मक एवं प्रमाणिक प्रस्तुति की क्षमता के अलावा संगठनात्मक अनुशासन एवं जनसरोकारों के प्रति संवेदनशीलता रखते हों। बताया गया है कि पार्टी में प्रवक्ता, 'शोध कोऑर्डिनेटर’ और 'प्रचार-प्रसार कोऑर्डिनेटर' का चयन किया जाना है। युवाओं को मौका देगी कांग्रेस यह टैलेंट हंट कार्यक्रम जिला, संभाग, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर तक होगा और प्रतिभाशाली युवाओं को पार्टी मौका देगी। यह आवेदन 28 फरवरी तक जमा होंगे। इसके तहत संभाग स्तर पर इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे। इन इंटरव्यू में एआईसीसी द्वारा नामित कोऑर्डिनेटर, टैलेंट हंट कमेटी के सदस्य, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं संबंधित जिला अध्यक्ष संयुक्त रूप से प्रतिभागियों का मूल्यांकन करेंगे। अंतिम निर्णय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (एआईसीसी) द्वारा लिया जाएगा। योग्यता को मिलेगा मौका जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि विचारों का आंदोलन है। यह टैलेंट हंट कार्यक्रम उसी परिवर्तन की शुरुआत है, जहां अवसर सिफारिश से नहीं, योग्यता से मिलेगा। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह पहल प्रदेश की राजनीति में वैचारिक मजबूती और तथ्याधारित विपक्ष की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कांग्रेस ऐसे युवाओं को मंच दे रही है जो पढ़ें, शोध करें और तथ्यों के साथ जनता की आवाज बनें। यह कार्यक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगा और सरकार के दावों की तथ्य प्रदान समीक्षा सुनिश्चित करेगा। 20 प्रदेश प्रवक्ताओं का चयन होगा मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक ने बताया कि इस टैलेंट हंट प्रक्रिया के माध्यम से सीमित एवं गुणवत्ता-आधारित चयन किया जाएगा। इस प्रक्रिया से केवल 20 प्रदेश प्रवक्ताओं का चयन किया जाएगा और कुछ मीडिया पैनलिस्ट, संभाग एवं जिला स्तर पर दो-दो अधिकृत प्रवक्ता, राष्ट्रीय स्तर पर दो पैनलिस्ट तथा एक विशेष अंग्रेजी मीडिया पैनलिस्ट का चयन किया जाएगा।

कांग्रेस पर रामदास आठवले का हमला, बोले- राहुल गांधी के रहते सत्ता दूर

मुंबई केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के बयान पर कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में नहीं आएगी, ऐसा अब उनकी पार्टी के नेताओं को भी लगने लगा है। मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा कि मणिशंकर अय्यर का बयान सही है। कांग्रेस पार्टी जनता का नेतृत्व नहीं कर सकती और राहुल गांधी पार्टी को मजबूत या प्रतिष्ठित नहीं बना सकते। मणिशंकर अय्यर ने जो कहा, यही उसका सार है। उन्होंने कहा कि मणिशंकर अय्यर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। मेरे साथ उनके संबंध बहुत अच्छे रहे हैं। अय्यर बहुत नाराज चल रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता भाजपा में आ रहे हैं और राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में नहीं आएगी। कांग्रेस पार्टी घोषणाबाजी और हंगामा करने का काम करती है। कांग्रेस पार्टी में कुछ दम नहीं है। जनता ने पीएम मोदी को तीन बार सत्ता की कुर्सी पर बैठाया है। जनता का भरोसा पीएम मोदी के साथ है। बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार बनने पर केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि बहुमत के साथ उनकी सरकार बनी है। भारत और बांग्लादेश के संबंध बहुत अच्छे रहे हैं। तारिक रहमान को भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने की जरूरत है। बांग्लादेश की बेरोजगारी हटानी है तो भारत के साथ संबंध अच्छा बनाना चाहिए। चुनाव में उनकी जीत पर पीएम मोदी ने बधाई दी है। भविष्य में दोनों देशों के संबंध अच्छे होंगे। टीपू सुल्तान विवाद पर केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा कि मालेगांव की डिप्टी मेयर के कार्यालय में टीपू सुल्तान की प्रतिमा रखने का निर्णय ठीक नहीं था। मुस्लिम समुदाय को विवाद वाली बात नहीं करनी चाहिए। कांग्रेस नेता को भी यह देखना चाहिए कि ऐसा बयान नहीं देना चाहिए जिससे विवाद पैदा हो। शिवाजी महाराज के साथ टीपू सुल्तान की तुलना नहीं करनी चाहिए। कांग्रेस नेता की हर तरफ निंदा हो रही है। पीएम मोदी के मुंबई दौरे को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई में हैं और उनके साथ फ्रांस के राष्ट्रपति भी हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति और पीएम मोदी व्यापार के संबंध पर चर्चा करेंगे, जिससे जरूर भारत और फ्रांस दोनों को लाभ होगा। वंदे मातरम का कांग्रेस नेता विरोध जताए जाने पर रामदास आठवले ने कहा कि हरि प्रसाद को यह अधिकार नहीं है। पहले वे बताएं कि नेता कांग्रेस के हैं या फिर पाकिस्तान के। अगर कांग्रेस के नेता हैं तो वंदे मातरम से उन्हें दिक्कत क्या है? यह हमारा राष्ट्रगीत है और इसका विरोध करना ठीक नहीं है।

BJP से कांग्रेस तक का सरप्राइज, वरिष्ठ नेता की बेटी का पार्टी बदलना मचा रहा हलचल

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक और मध्य प्रदेश खाद एवं ग्रामोद्योग निगम के पूर्व अध्यक्ष सत्यनारायण सत्तन की बेटी कनुप्रिया सत्तन कांग्रेस में शामिल हो गई है। कनुप्रिया ने आज भोपाल में कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष अर्चना जायसवाल की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस कार्यालय में हुआ सदस्यता ग्रहण भोपाल स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कनुप्रिया सत्तन को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। इस अवसर पर पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्वागत करते हुए संगठन को मजबूत करने की बात कही। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा के वरिष्ठ नेता के परिवार से जुड़ी यह एंट्री इंदौर और प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती है। सियासी हलकों में चर्चा तेज कनुप्रिया सत्तन का कांग्रेस में शामिल होना कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर तब जब प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। अब देखना होगा कि इस घटनाक्रम पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और कनुप्रिया सत्तन कांग्रेस संगठन में किस भूमिका में नजर आती हैं।

बंगाल राजनीति में ट्विस्ट: हुमायूं कबीर का बड़ा फैसला, अब नजर AIMIM के जवाब पर

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए JUP यानी जनता उन्नयन पार्टी नेता हुमायूं कबीर साथी तलाश रहे हैं। खबर है कि उन्होंने कांग्रेस समेत कई दलों के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया है। बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण के ऐलान के बाद कबीर चर्चा में आ गए थे। इसके बाद उन्हें तृणमूल कांग्रेस ने निलंबित कर दिया था। उन्होंने राज्य में टीएमसी को हराने की बात कही है। कांग्रेस नहीं अधीर रंजन का साथ देंगे मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कबीर ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट और सीपीएम के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया है। साथ ही भरोसा जताया है कि वह सांसद असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन से गठबंधन कर सकते हैं। वहीं, उन्होंने कांग्रेस से दूरी बनाने की बात भी कही है। जबकि, दावा किया है कि चुनाव में उनकी पार्टी अधीर रंजन चौधरी को समर्थन दे सकती है। कबीर ने कहा, 'ISF सीट शेयरिंग पर फैसला लेने में देरी कर रही है। वो मुझे कम आंकने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में हम आईएसएफ और इसी वजह से सीपीआई (एम) के साथ सीटें साझा नहीं कर सकते।' उन्होंने कांग्रेस से भी गठबंधन नहीं करने की बात कही है। उन्होंने कहा, 'अगर अधीर रंजन चौधरी बेहरमपुर से चुनाव लड़ते हैं, तो हम उनका समर्थन करेंगे। वह अच्छे व्यक्ति हैं। समर्थन सिर्फ उनके लिए होगा और कांग्रेस पार्टी के लिए नहीं।' AIMIM से कर सकते हैं गठबंधन उन्होंने कहा, 'मुझे भरोसा है कि AIMIM मेरे साथ होगी। कुछ और पार्टीयां भी मेरे साथ आएंगी। यह तय है। आने वाले दिनों में हम उनके साथ बैठकें करने वाले हैं।' बीते साल AIMIM ने पश्चिम बंगाल की सभी सीटों पर लड़ने की बात कही थी। बाबरी मस्जिद का निर्माण शुरू कबीर ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बहुचर्चित मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू किया। कबीर ने घोषणा की कि बेलडांगा के रेजिनगर में इस मस्जिद का निर्माण दो साल के भीतर पूरा हो जाएगा और इसकी लागत लगभग 50-55 करोड़ रुपये आएगी। यह मस्जिद 11 एकड़ जमीन पर बनाई जा रही है और इसमें लगभग 12,000 लोग एकसाथ नमाज अदा कर सकेंगे। सभी सीटों पर लड़ने का प्लान कबीर ने यह भी घोषणा की कि उनकी पार्टी राज्य के 294 निर्वाचन क्षेत्रों में से 135 पर प्रत्याशी खड़ा कर आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों को टक्कर देगी। इस बीच, कबीर एक नए विवाद में फंस गए हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल पुलिस ने मंगलवार को मादक पदार्थों की तस्करी के एक मामले में उनके कुछ रिश्तेदारों से संबंधित लगभग 11 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क कर लिया है।

INDIA ब्लॉक में नेतृत्व बदलाव की मांग तेज, राहुल गांधी हटें—ममता बनर्जी को आगे लाने की पैरवी

नई दिल्ली भारतीय राजनीति में इस समय पर सत्ताधारी पार्टी भाजपा के पास एक चेहरा प्रधानमंत्री मोदी के रूप में मौजूद है। लेकिन सामने की तरफ बिखरा हुआ विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, समय- समय पर इस पद को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार ने विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व को लेकर ममता बनर्जी का नाम आगे बढ़ाया है। उन्होंने लिखा कि वर्तमान समय में ममता बनर्जी ही एक ऐसी नेता है जो एक राजनीतिक दल और सरकार दोनों का नेतृत्व कर रही हैं। वह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं के बीच में एक अलग पहचान रखती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने टेलीग्राफ में लिखे अपने लेख में ममता को एक कद्दावर नेत्री करार दिया। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह से अपनी ताकत से उभरी हैं, और पहली पीढ़ी की नेता है, जो कि उन्हें और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाता है। इतना ही नहीं बारू ने कांग्रेस नेतृत्व के ऊपर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी-मनमोहन सिंह मॉडल को राहुल और खरगे के साथ दोहराने का कोई खास लाभ भी पार्टी और इंडिया ब्लॉक को नहीं हुआ है। ऐसे में अब ममता को नेतृत्व संभालना चाहिए। एक महिला प्रधानमंत्री का समय बारू ने लिखा कि काफी समय हो गया है कि अब देश को एक महिला प्रधानमंत्री मिलना चाहिए। उन्होंने लिखा, "यह देखते हुए कि सत्ताधारी भाजपा एक पुरुष प्रधान पार्टी है, अगर विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व किसी महिला नेत्री के हाथ में हो तो यह महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत आधार होगा। इससे भाजपा के महिला मतदाताओं में सेंध लग सकती है। वैसे भी काफी समय हो गया है, जब हमारे पास महिला प्रधानमंत्री रही हो।" गौरतलब है कि आजाद भारत के इतिहास में केवल इंदिरा गांधी ही भारत की महिला प्रधानमंत्री रही हैं। बारू के इस लेख को तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी शेयर किया। उन्होंने लिखा,"एक विचार ऐसा भी जिसका समय आ गया है।' भारत की राजनीति में कांग्रेस भले ही अभी कमजोर स्थिति में हो लेकिन उसके सामने कोई भी नेता अभी इतनी मजबूत स्थिति में नहीं आया है। ममता बनर्जी का पश्चिम बंगाल में एक मजबूत आधार है, लेकिन दूसरे राज्यों में उनकी खास पहचान नहीं है। इसके अलावा विरोधी प्रचार की वजह से आम जनमानस के मन ममता की छवि एक तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली महिला नेता के तौर पर बनी हुई है, जबकि राहुल गांधी अभी भी एक मजबूत राष्ट्रीय नेता के तौर पर उभर रहे हैं। कई राज्यों में कांग्रेस का एक मजबूत आधार है। ऐसे में भले ही ममता का नाम आगे बढ़ाया जा रहा हो, लेकिन इसका कोई मजबूत आधार नजर नहीं आता।  

‘मैं राहुलवादी नहीं’—मणिशंकर अय्यर का तीखा हमला, कांग्रेस में मचा घमासान

नई दिल्ली कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने खुलकर कहा है कि वह राहुलवादी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी हैं, लेकिन राहुलवादी नहीं हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसा कि वह तो भूल गए कि अय्यर पार्टी के सदस्य हैं। अय्यर ने केसी वेणुगोपाल और पवन खेड़ा पर भी निशाना साधा।   कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर अपने विवादित बयानों के लिए चर्चित रहे हैं, लेकिन सोमवार को उनकी बातों ने पार्टी को ही असहज कर दिया। एक तरफ उन्होंने केरल में पिनराई विजयन के फिर से मुख्यमंत्री बनने की भविष्यवाणी कर दी तो वहीं राहुल गांधी को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी हैं, लेकिन राहुलवादी नहीं हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसा कि वह तो भूल गए कि अय्यर पार्टी के सदस्य हैं। अय्यर ने डॉ. अंबेडकर की जीवनी का हवाला भी दिया। आज केसी वेणुगोपाल को इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली हुई है। पवन खेड़ा जैसे आदमी को पार्टी का आधिकारिक प्रवक्ता बना रखा है। आखिर पार्टी इतनी बड़ी मूर्खता कैसे कर सकती है, वह तो एक कठपुतली हैं। अय्यर ने कहा, 'मिस्टर राहुल गांधी भूल गए हैं कि मैं कांग्रेस में हूं। इसलिए मैं नेहरू वादी, राजीववादी हूं, लेकिन राहुलवादी नहीं हूं। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कांग्रेस की हालत क्या है। केसी वेणुगोपाल जैसे शख्स को वह जिम्मेदारी दी गई है, जो कभी सरदार पटेल के पास थी।' केरल विधानसभा चुनाव से पहले कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के फिर से सत्ता में लौटने की भविष्य़वाणी कर दी। उन्होंने कहा कि मैं एक कांग्रेसी नेता के तौर पर चाहूंगा कि यूडीएफ की जीत हो और सत्ता मिले। लेकिन एक गांधीवादी के तौर पर कहूंगा कि पिनराई विजयन फिर से सत्ता में लौट सकते हैं। उनके काम को केरल के लोग पसंद कर रहे हैं। मैं झूठ नहीं बोलना चाहता। उन्होंने कहा कि आखिर ऐसे दल को कौन वोट देना चाहेगा, जिसमें नेता आपस में लड़ रहे हैं। एक-दूसरे के गले काटने को तैयार हैं। क्या ये चीजें जनता को नहीं पता हैं। मणिशंकर अय्यर ने कहा कि एक समय पर वह कांग्रेस भी थी, जब किसी फैसले को माना जाता था। नेहरू पीएम बने तो सबने स्वीकार किया। यदि सुभाष चंद्र बोस की विमान हादसे में मौत नहीं होती तो वह शायद राष्ट्रपति बनते। ‘पवन खेड़ा प्रवक्ता हैं, इससे समझिए कांग्रेस की हालत क्या है’ उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा जैसे नेता आज कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता हैं। इससे समझा जा सकता है कि इन दिनों कांग्रेस की हालत क्या है। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा से पूछना चाहिए कि आखिर पिनराई विजयन से यहां केरल में दुश्मनी है और दिल्ली में दोस्ती है। पूर्व सांसद ने कहा कि पवन खेड़ा तो सिर्फ एक कठपुतली हैं। वह वही बात कहते हैं, जो उन्हें जयराम रमेश बता देते हैं। वह कोई प्रवक्ता नहीं हैं बल्कि तोता हैं। पवन खेड़ा पर बोले- निकल जाऊंगा बाहर और पीछे से लगाऊंगा मार इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु के नेता एमके स्टालिन की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि स्टालिन ने सूट-बूट की सरकार या फिर वोट चोर गद्दी छोड़ जैसे नारे नहीं दिए। उन्होंने जरूरी मुद्दे उठाए और सरकार बनाई। यही नहीं अय्यर ने कहा कि INDIA ब्लॉक का अध्यक्ष यदि किसी नेता को बनना चाहिए तो वह एमके स्टालिन ही हो सकते हैं। तंज कसते हुए अय्यर ने कहा कि यदि पवन खेड़ा ही मुझे कांग्रेस से बाहर करेंगे तो मैं खुद ही बाहर निकल जाऊंगा और उसे पीछे से लात मारूंगा।  

असम कांग्रेस में टूट: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा ने छोड़ी पार्टी

गुवाहाटी असम में अगले कुछ महीनों में ही चुनाव होने वाले हैं और उससे ठीक पहले कांग्रेस को करारा झटका लगा है। पार्टी के सीनियर लीडर और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सभी पदों के साथ ही प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। रिपुन बोरा ने 2021 में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से तब इस्तीफा दे दिया था, जब कांग्रेस की करारी हार हुई थी। वह राज्यसभा के भी सदस्य रह चुके थे। तरुण गोगोई सरकार के दो कार्यकालों में वह लगातार मंत्री रहे और पहली बार 2001 में विधायक चुने गए थे। वह असम कांग्रेस के करीब 5 सालों तक प्रदेश अध्यक्ष रहे थे। 2016 में उन्हें पार्टी की कमान मिली थी। इसी साल वह राज्यसभा के लिए भी चुने गए थे, जिसका कार्यकाल 2022 में समाप्त हुआ था। उन्होंने 2022 में कांग्रेस छोड़ दी थी और टीएमसी का हिस्सा बन गए थे। हालांकि 2024 में वह फिर से कांग्रेस में लौट आए। कांग्रेस में वापसी के बाद भी वह ज्यादा चर्चा में नहीं थे। ऐसे में उनका इस्तीफा अहम है और माना जा रहा है कि कांग्रेस को इसका नुकसान हो सकता है। राज्य में चुनाव प्रचार अगले कुछ दिनों में जोर पकड़ सकता है, जबकि हिमंत बिस्वा सरमा काफी ऐक्टिव हैं। उनका एक वीडियो भी इन दिनों चर्चा में है।

घरेलू मनी ट्रांसफर में सुधार जरूरी: जयराम रमेश ने उठाया मुद्दा

नई दिल्ली कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को कहा कि घरेलू स्तर पर धन प्रेषण (रेमिटेंस) में लगने वाला समय और लागत कम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे उत्तर प्रदेश सहित कई पूर्वी और उत्तरी राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं को मदद मिलती है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''भारत को 2025 में विदेशों से पहले लगभग 135 अरब डॉलर की राशि (रेमिटेंस) प्राप्त हुई। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 3.4 प्रतिशत है। देश के भुगतान संतुलन के प्रबंधन में विदेश से भारतीय नागरिकों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है और केरल जैसे कई राज्यों की अर्थव्यवस्था के लिए ये निर्णायक रहे हैं। इन धन प्रेषण (रेमिटेंस) पर व्यापक अध्ययन भी हुआ है।'' उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, देश के भीतर एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवासी श्रमिकों द्वारा भेजी जाने वाली राशि की मात्रा के बारे में अपेक्षाकृत कम जानकारी उपलब्ध है। रमेश ने कहा, ''केरल के संबंध में कुछ अनुमान लगाए गए हैं, जिनके अनुसार एक अध्ययन बताता है कि केरल के भीतर से होने वाले घरेलू धन प्रेषण, केरल को विदेशों से प्राप्त प्रेषणों का लगभग एक-तिहाई हो सकते हैं।'' रमेश ने इस बात का उल्लेख किया, ''एमस्टर्डम विश्वविद्यालय के शिक्षाविद रॉबिन वैन जेन ड्यूजिन ने अत्यंत उपयोगी लेख लिखा है। उनके अनुसार, 2024 में पूरे भारत में घरेलू धन प्रेषण का अनुमान 36 से 48 अरब डॉलर के बीच है। यह भारत को विदेशों से प्राप्त प्रेषण का लगभग एक-तिहाई से अधिक है।'' रमेश ने कहा, ''दुर्भाग्यवश, घरेलू धन प्रेषण को कम सुर्खियां मिलती हैं, वे कम उत्साह पैदा करते हैं और उन्हें विदेशों से आने वाले धन प्रेषण की तुलना में कम नीतिगत ध्यान प्राप्त होता है। यह स्थिति बदलनी चाहिए, क्योंकि घरेलू प्रेषण की मात्रा भी महत्वपूर्ण है और उनका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी व्यापक है।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन प्रेषण में लगने वाले समय और लागत को कम किया जाना चाहिए। रमेश का यह भी कहना है कि घरेलू प्रेषण पूर्वी राज्यों तथा उत्तर प्रदेश जैसे कुछ उत्तरी राज्यों की अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ कर रहे हैं।  

पीएम मोदी के लिए कांग्रेस का ट्वीटेड सरप्राइज: फ्लाइट टिकट बुक, जनता का ध्यान आकर्षित

  नई दिल्ली असम के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री से हिंसा प्रभावित मणिपुर जाने की अपील की है.  X पर एक पोस्ट में, खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, "चुनाव वाले राज्य हमेशा आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता होते हैं, लेकिन मणिपुर को "छोड़ा नहीं जाना चाहिए. राज्य 2023 से जल रहा है, और अब फिर से जल रहा है." खेड़ा ने दोनों राज्यों के बीच कम दूरी की तरफ इशारा करते हुए लिखा, “आप आज असम में हैं. मणिपुर यहां से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है. कृपया वहां भी जाइए. प्रधानमंत्री की उपस्थिति मणिपुर के लोगों को आश्वस्त करने में बहुत मददगार साबित हो सकती है.”  'मेरे पास आपका नंबर नहीं था…': कांग्रेस नेता ने फ्लाइट टिकट की फोटो साझा करते हुए लिखा, "आपकी आसानी के लिए हमने गुवाहाटी से इम्फाल का टिकट बुक कर दिया है, आपको बस विमान में सवार होना है. चूंकि मेरे पास आपका नंबर नहीं था, इसलिए मैं टिकट यहीं साझा कर रहा हूं." उन्होंने केंद्र के 'PM CARES' फंड पर कटाक्ष करते हुए संदेश दिया कि प्रधानमंत्री वहां जाकर दिखाएं कि वह वाकई मणिपुर की परवाह करते हैं. मणिपुर में 2023 से जारी हिंसा और बीच-बीच में भड़कती घटनाओं को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर सवाल उठाता रहा है. वहीं सरकार का कहना है कि शांति बहाली के प्रयास जारी हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. इस अनूठे राजनीतिक विरोध ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. जहां कांग्रेस समर्थक इसे मणिपुर की अनदेखी का मुद्दा बना रहे हैं, वहीं आलोचक इसे राजनीतिक नौटंकी करार दे रहे हैं.

आरिफ मसूद ने जताई आपत्ति, कहा—हर नागरिक को अपने धर्म का पालन और प्रचार करने की आज़ादी

भोपाल गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रगान "जन गण मन" के पहले वंदे मातरम् के 6 छंदों का ससम्मान गायन का निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे मध्य प्रदेश में लागू करने के निर्देश दिए हैं। उनके मुताबिक, प्रदेश के सभी शिक्षक संस्थानों, मदरसों और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के 6 छंदों का गायन अनिवार्य होगा। लेकिन सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को बाध्यकारी बनाना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। क्या है मसूद का तर्क? मसूद ने स्पष्ट किया कि उन्हें ‘वंदे मातरम्’ से वैचारिक विरोध नहीं है, बल्कि इसे अनिवार्य करने के तौर-तरीकों पर आपत्ति है। उनका कहना है कि देशभक्ति भावनात्मक विषय है, जिसे आदेश के जरिए लागू नहीं किया जा सकता। यह सीधे तौर पर मजहबी आजादी पर अंकुश है। उन्होंने संविधान के मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आस्था के सम्मान की बात कही। विशेष रूप से उन्होंने आर्टिकल 25 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अनुच्छेद सभी को अपने धर्म का पालन और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। ऐसे में किसी भी नए कानून या आदेश को संवैधानिक दायरे में परखा जाना जरूरी है। राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज मसूद के बयान के बाद विपक्षी दलों ने इसे राष्ट्रवाद से जोड़कर निशाना साधा। वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने इसे व्यक्तिगत राय बताया, तो कुछ ने संवाद के जरिए समाधान की बात कही। सत्तापक्ष के नेताओं ने मसूद के रुख को “अनावश्यक विवाद” करार दिया है। विधानसभा और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बहस मामला तब और तूल पकड़ गया जब यह मुद्दा सार्वजनिक कार्यक्रमों और सरकारी आयोजनों से जुड़ गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में ऐसे मुद्दे अक्सर भावनात्मक बहस को जन्म देते हैं। इससे जनभावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश भी मानी जा रही है। सामाजिक और संवैधानिक विमर्श विशेषज्ञों का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा ऐतिहासिक गीत है, लेकिन इसके गायन को लेकर समय-समय पर कानूनी और सामाजिक बहस होती रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राष्ट्रभावना और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। भोपाल का यह मामला अब प्रदेश की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।