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कांग्रेस का नया अभियान: प्रभात फेरी और गौ सेवा, भाजपा ने साधा निशाना

भोपाल   मध्य प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए तरह-तरह के प्रयोग किया जा रहे हैं। प्रदेश में अब कांग्रेस प्रभात फेरी निकालेगी साथ ही गौ सेवा और श्रमदान भी करेंगी। यह राहुल गांधी के संगठन सृजन अभियान से जोड़ा गया हिस्सा माना जा रहा है। हालही में नवनियुक्त 71 ग्रामीण और शहर जिला अध्यक्षों को इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रदेश के सभी जिला अध्यक्षों को 10 दिन की ट्रेनिंग देने की तैयारी कांग्रेस कर रही है। जिसमें राहुल गांधी से लेकर कांग्रेस की कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। इस दौरान जिला अध्यक्षों को इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। और उन्हें प्रैक्टिकल भी कराया जाएगा। इधर भाजपा ने इसे लेकर तंज कसा है। मंत्री विश्वास सारंग में कहा है कि कांग्रेस की यह महज चुनावी नौटंकी है। कांग्रेस की पहले से रही है परंपरा एमपी कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने बताया कि यह कोई नया नहीं है। कांग्रेस की पहले से परंपरा रही है। हमारा सेवादल इस पर पहले से काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस जिला अध्यक्षों 10 दिन की ट्रेनिंग में सिखाया जाएगा कि किस समय प्रभात फेरी निकालना है।  क्या गीत रहेंगे। साथ ही श्रमदान और गौ सेवा की भी जानकारी दी जाएगी। सभी जिलाध्यक्षों को प्रेक्टिकल कराया जाएगा और उसके बाद वे  अपने-अपने जिले में करने के लिए का जाएगा। बीजेपी के एजेंडें पर कांग्रेस कर रही काम गौरतलब है कि एमपी में कांग्रेस 2003 के बाद के 22 साल में से 2 साल छोड़ दे तो सत्ता से बाहर है। यही वजह है कि लंबे वनवास के बाद कांग्रेस अब राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी संगठन सृजन अभियान के तहत चुने गए जिला अध्यक्षों के द्वारा गांव-गांव शहर प्रभात फेरी निकालना श्रमदान और गौ सेवा कराने जा रही है। बतादें कि कांग्रेस जन जन तक पहुंचने के लिए उन कार्यक्रमों का सहारा ले रही है जो बरसों से बीजेपी का एजेंडा रहे हैं। गौ सेवा और प्रभात फेरी के जरिये भाजपा ने गांव से लेकर शहर तक हिंदुत्व और सनातन का झंडा फहराया है यही वजह है।  

राजनीति के खेल में दिग्गज नेता पीछे, निगम-मंडलों की नियुक्तियों से BJP के नेता कर रहे वापसी

भोपाल  मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई दिग्गज नेता, जो कभी प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते थे, आज हाशिए पर हैं. इन नेताओं को अब निगम-मंडलों और अन्य नियुक्तियों के जरिए फिर से राजनीति की मुख्य धारा में लौटने की उम्मीद है. पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, अरविंद भदौरिया, उमा शंकर गुप्ता, कमल पटेल, गौरी शंकर विशेन, जयभान सिंह पवैया सहित कई अन्य नेता इस कतार में शामिल हैं. ये नेता पार्टी में अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को पुनर्जनन देने की कोशिश में हैं. कांग्रेस प्रवक्ता ने इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा है कि भाजपा ने अन्य दलों से इतने नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल किया है कि अब पार्टी “ओवरलोडेड” हो गई है. इसके चलते भाजपा के कई पुराने और प्रमुख नेता हाशिए पर चले गए हैं. उन्होंने दावा किया कि यह भाजपा में कोई नया चलन नहीं है. पहले भी कई दिग्गज नेताओं को पार्टी ने साइडलाइन किया है. कांग्रेस का कहना है कि भाजपा की यह रणनीति उसके अपने नेताओं के लिए ही चुनौती बन रही है. वहीं, भाजपा प्रवक्ता ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी में हर कार्यकर्ता के लिए उचित दायित्व होता है. कुछ जिम्मेदारियां ऐसी होती हैं, जो सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आतीं, लेकिन नेता पार्टी के लिए लगातार काम करते रहते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा में किसी को हाशिए पर रखने की बात नहीं होती. समय, परिस्थिति और योग्यता के आधार पर नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं. प्रवक्ता का कहना है कि पार्टी अपने सभी नेताओं का सम्मान करती है और उनकी सेवाओं का उपयोग उचित समय पर किया जाता है. भाजपा के इन दिग्गज नेताओं की नजर अब निगम-मंडलों और अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर है. ये नियुक्तियां न केवल उनकी राजनीतिक सक्रियता को पुनर्जनन दे सकती हैं, बल्कि उन्हें फिर से सुर्खियों में ला सकती हैं. पार्टी संगठन जल्द ही इन नियुक्तियों पर फैसला ले सकता है, जिससे इन नेताओं की राजनीतिक वापसी की राह आसान हो सकती है.

कांग्रेस की नसीहत: तानाशाह न बनें, सर्वपल्ली राधाकृष्णन के आदर्शों पर चलें नए उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली  मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बुधवार (10 सितंबर) को नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को शुभकामनाएं दीं और देश के पहले उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद दिलाकर उन्हें कर्तव्य निभाने और तानाशाह नहीं बनने की नसीहत दी है। कांग्रेस ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा 1952 में राज्यसभा में कहे गए उन शब्दों को याद किया कि अगर कोई लोकतंत्र विपक्षी दलों के समूह को सरकार की नीतियों के खिलाफ निष्पक्ष और स्वतंत्र आलोचना करने की इजाजत नहीं देता है तो वह तानाशाही में तब्दील हो जाता है। विपक्षी दल ने जोर देकर कहा कि सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने जो उपदेश दिया था, उसका अक्षरशः पालन किया था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, जो राज्यसभा के सभापति भी होंगे, उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कांग्रेस भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के प्रथम सभापति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रेरक शब्दों को स्मरण करती है।” जयराम रमेश क्या लिखा? रमेश ने याद दिलाया कि सर्वपल्ली राधृष्णन ने राज्यसभा के सभापति के रूप में कहा था कि वह सदन में हर दल के हैं और उनका प्रयास संसदीय लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखना और प्रत्येक दल के प्रति पूरी निष्पक्षता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने आगे लिखा, “16 मई, 1952 को राज्यसभा के उद्घाटन के अवसर पर डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था, मैं किसी एक दल का नहीं हूं, और इसका अर्थ यह है कि मैं इस सदन के हर दल का हूं। मेरा प्रयास संसदीय लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखना होगा और प्रत्येक दल के प्रति पूर्ण निष्पक्षता और समानता के साथ कार्य करना होगा -किसी के प्रति द्वेष नहीं, और सभी के प्रति सद्भावना रखते हुए…यदि कोई लोकतंत्र विपक्षी समूहों को सरकार की नीतियों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और स्पष्ट आलोचना करने की अनुमति नहीं देता है, तो वह तानाशाही में बदल सकता है…।” पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ संग तल्ख थे रिश्ते रमेश ने कहा, "डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने जीवन में इन बातों को अक्षरशः और भावना, दोनों ही अर्थों में पूरी तरह आत्मसात किया।" उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद, कांग्रेस ने मंगलवार को कहा था कि उपराष्ट्रपति चुनाव में भाजपा की "अंकगणितीय" जीत सत्तारूढ़ दल की "नैतिक और राजनीतिक हार" है। कांग्रेस ने ज़ोर देकर कहा था कि विपक्ष ने चुनाव में एकजुट होकर "बेहद सम्मानजनक" प्रदर्शन किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी राधाकृष्णन को चुनाव में जीत हासिल करने पर शुभकामनाएँ दीं, साथ ही रेड्डी के संयुक्त विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार होने और उनके जोशीले व सैद्धांतिक संघर्ष के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। गौरतलब है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के साथ विपक्षी दल के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं थे। कांग्रेस उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव तक के दांव चल चुकी थी।  

सीएम फडणवीस ने उपराष्ट्रपति चुनाव पर किया पलटवार, विपक्ष हुआ फेल

मुंबई  उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजों पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल लगातार बड़बोलापन कर रहे थे और यह माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे कि एनडीए के वोट बंट जाएंगे। लेकिन नतीजों में इसका उल्टा हुआ। विपक्ष अपनी पार्टी के वोट भी नहीं संभाल पाया और बड़ी संख्या में उनके वोट एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में चले गए। फडणवीस ने कहा कि एक तरह से विपक्ष ने खुद ही मुंह के बल गिरने का काम किया है। सीएम फडणवीस ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की जीत पर खुशी जताई। उन्होंने उन्हें कर्मठ, सुलझा हुआ और प्रमाणिक व्यक्तित्व वाला नेता बताया। फडणवीस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने राधाकृष्णन जैसे योग्य व्यक्ति को इस पद के लिए नामित किया और एनडीए के सभी दलों ने एकजुट होकर उनका समर्थन किया। इसी वजह से वे बड़े अंतर से विजयी हुए। फडणवीस ने भरोसा जताया कि उपराष्ट्रपति के रूप में राधाकृष्णन इस पद की गरिमा को और बढ़ाएंगे। उपराष्ट्रपति चुनाव पर बोले सीएम फडणवीस मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस बात की सबसे ज्यादा खुशी है कि जब चुनाव परिणाम घोषित हुआ तो सीपी राधाकृष्णन का पता मुंबई, महाराष्ट्र का बताया गया। वे महाराष्ट्र की मतदाता सूची में दर्ज मतदाता हैं और अब देश के उपराष्ट्रपति बन गए हैं। फडणवीस ने कहा कि यह पूरे महाराष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के भारी अंतर से हराया। राधाकृष्णन को प्रथम वरीयता के 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300 वोट हासिल हुए। कुल 781 सदस्यों में से 767 (एक डाक मतपत्र समेत) ने मतदान किया था, जिसमें से 15 वोट अवैध घोषित किए गए। मंगलवार को सुबह 10 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक मतदान हुआ था। इस जीत ने एक बार फिर एनडीए की मजबूती और विपक्ष की कमजोरी को उजागर कर दिया।

महमंत्री पद की होड़: भाजपा नगर कार्यकारिणी में 15 दिग्गजों की चुनौती, किसका होगा दबदबा?

भोपाल   भाजपा की नगर कार्यकारिणी के महत्वपूर्ण पदों पर प्रदेश संगठन ही फैसला करेगा। महामंत्री के 3 पदों के लिए करीब 15 नेता कतार में हैं, समर्थकों के लिए बड़े नेता जोर आजमाइश कर रहे हैं। पदों पर नियुक्ति इस सप्ताह संभव है। अंतिम दौर की जोर आजमाइश चल रही है। पदों के लिए बड़े नेताओं से समर्थकों के नाम बंद लिफाफे में लिए गए थे। पिछले महीने अध्यक्ष को भोपालबुलाकर लिफाफे खोले गए। शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को कार्यकारिणी को अंतिम रूप देकर लिस्ट भेजने के लिए कहा था। सबका जोर महामंत्री पद को लेकर नगर कार्यकारिणी में सबका जोर महामंत्री पद को लेकर है। 3 महामंत्री बनाए जाना हैं, जो अलग-अलग वर्ग के होंगे। सुमित मिश्रा भी रजामंदी से नियुक्ति के प्रयास में हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई है। विधायक महेंद्र हार्डिया समर्थक को यह पद जा सकता है। विधानसभा 2 से सुधीर कोल्हे का नाम है। चार नंबर से विधायक मालिनी गौड़ ने वीरेंद्र शेंडगे का नाम दिया है। महापौर ने भरत पारिख का नाम बढ़ाया तो सांसद ने विशाल का। राऊ से निलेश चौधरी का नाम भी है। अन्य नामों में हरप्रीत बख्शी, देवेश जाजोरिया, भूपेंद्र केसरी, माधुरी जायसवाल हैं। 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा मनाने की तैयारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस से लेकर गांधी जयंती तक प्रदेशभाजपा ‘सेवा पखवाड़ा’ मनाएगी। भाजपा कार्यालय पर आयोजनों को लेकर बैठक की गई। इसमें संभाग सहप्रभारी तेजबहादुर सिंह, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, प्रताप करोसिया, सुदर्शन गुप्ता, प्रदेश प्रवक्ता आलोक दुबे, प्रदेश मीडिया सहप्रभारी दीपक जैन आदि शामिल हुए। अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा, सेवा पखवाड़े के अंतर्गत पीएम मोदी के कार्यों को सेवा के माध्यम से जनता तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा।

अधिकारियों की नियुक्ति में अड़चन, अगले महीने भी तीन जिलों में फंसा निगम मंडल अध्यक्ष का मामला

भोपाल  भाजपा और कांग्रेस के लिए सितंबर का महीना नियुक्तियां लेकर आया है। दोनों दलों में कई स्तर पर एक के बाद एक नियुक्तियां होनी हैं। कांग्रेस ने जिला कार्यकारिणी से लेकर पंचायत और वार्ड स्तर तक नियुक्तियां करने के लिए 40 से 45 दिन की अवधि तय की है। इस पर काम भी शुरू कर दिया है तो भाजपा ने भोपाल ग्रामीण, बैतूल, सीधी, देवास, मऊगंज, सागर ग्रामीण व हरदा जैसे संगठनात्मक 7 जिलों की जिला कार्यकारिणी घोषित की थी। रविवार को मंडला, बालाघाट की कार्यकारिणी भी घोषित कर दी। अब जिले के अंदर की नियुक्तियां होंगी। अभी तक भाजपा विभिन्न स्तर पर नियुक्तियां करने में आगे है। जिन निगम-मंडलों, प्राधिकरणों में नियुक्तियों का ज्यादा इंतजार है, उनमें सबसे अंत में नियुक्तियां होंगी। यह अगले माह संभव है। कांग्रेस हाल ही में जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्ति कर चुकी है। दोनों ने इन पदों पर की नियुक्तियां भाजपा (MP BJP District President List) ने सबसे पहले जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों का काम पूरा किया। लेकिन यह काम अलग-अलग चरणों में किया तो कांग्रेस ने एक साथ सभी जिलों के अध्यक्ष नियुक्त कर दिए। कांग्रेस ने कुछ जिलों में किसान कांग्रेस की जिला इकाइयों को भी मजबूत करना शुरू कर दिया है तो, भाजपा जिलों की कार्यकारिणी गठित करने का श्रीगणेश कर चुकी है। तीन जिलों में फंसा पेंच भाजपा ने जिला कार्यकारिणी की नियुक्तियों का श्रीगणेश तो किया, लेकिन अभी कई जिले बाकी हैं। सूत्रों के मुताबिक इसकी अलग-अलग वजह बताई जा रही है। ग्वालियर, इंदौर व सागर जैसे जिलों में जिला कार्यकारिणी को लेकर कई पेंच बताए जा रहे हैं। यहां पार्टी नेताओं के प्रभाव के चलते देरी होना बताया जा रहा है। कई और जिलों में इस तरह की स्थिति है। जिला कार्यकारिणी के अलावा जिलों के अंदर भी भाजपा में कई स्तर पर नियुक्तियां होनी है, जिसका खाका तैयार किया जा रहा है। उधर, भाजपा में प्रादेशिक स्तर पर की जाने वाली नियुक्तियों को लेकर एक दौर का मंथन पूरा हो चुका है, लेकिन यह अंतिम नहीं है। अभी अलग-अलग नामों पर विभिन्न स्तर पर मंथन होने बाकी हैं। कुछ नामों पर शीर्ष नेतृत्व से भी राय ली जा सकती है। उसके बाद इन नामों को हरी झंडी दी जाएगी। उसके पहले संभागीय स्तर पर नियुक्तियां शुरू होनी है। असंतुष्ट नेताओं को साधने पर फोकस है। कांग्रेस की 45 में से 12 प्रकोष्ठों पर ही नियुक्ति अभी जिला कार्यकारिणी की घोषणा शुरू नहीं हुई। हालांकि कवायद जारी है। इसके बाद ब्लॉक अध्यक्ष, मंडलम, पंचायत कमेटी और वार्ड कमेटियों में भी नियुक्तियां होनी हैं। कांग्रेस ने 45 प्रकोष्ठ में से करीब 12 में ही नियुक्तियां की है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस में बाकी नियुक्तियां काम के आधार पर की जानी है, इसके लिए कई दौर का मंथन होना है, जो अभी शुरू ही नहीं हुआ। यही हाल रहा तो भाजपा की तुलना में कांग्रेस पिछड़ सकती है।

कांग्रेस की दोहरी रैली: किसान न्याय यात्रा और वोट चोर गद्दी छोड़ का आयोजन उज्जैन में 12 सितंबर

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में 12 सितंबर को कांग्रेस एक बड़ा राजनीतिक आयोजन करने जा रही है। इस दिन ‘किसान न्याय यात्रा’ और ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली का आयोजन होगा। इसी दिन कांग्रेस के इस अभियान का समापन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। जानकारी के अनुसार, सचिन पायलट, केसी वेणुगोपाल, कमलनाथ समेत प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। संभावना जताई जा रही है कि इस रैली के समापन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हो सकते हैं। MP के कई जिलों में निकली यात्रा दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाते हुए इस अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ यात्रा कई जिलों में निकाली गई। इन सभाओं और रैलियों को कई जगह समर्थन मिला, तो कुछ स्थानों पर विरोध का भी सामना करना पड़ा। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से गरमाई राजनीति गौरतलब है कि राहुल गांधी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वोट चोरी के आरोप लगाए थे। इसी बयानबाजी के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर यह अभियान शुरू किया, जो अब उज्जैन में समापन की ओर बढ़ रहा है। 

मोदी का संदेश: पार्टी के साथियों से सीखना जरूरी; GST स्लैब बदलाव पर जताया धन्यवाद

 नई दिल्ली भाजपा सांसदों की दो दिवसीय कार्यशाला रविवार को संसद परिसर में शुरू हुई। उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले इस कार्यशाला का शुभारंभ हुआ, जिसमें पीएम मोदी सहित भाजपा के सभी सांसद शामिल हुए। इस दौरान पीएम मोदी का अनोखा अंदाज एक बार फिर देखने को मिला। वह बैठक में एक साधारण सांसद की तरह सबसे पीछे बैठे नजर आए। अब उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। साधारण सांसद की तरह दिखे पीएम मोदी  सुबह शुरू हुई इस कार्यशाला में भाजपा सांसदों ने पीएम मोदी को जीएसटी सुधारों के लिए बधाई दी। इसके बाद सभी सांसदों को उपराष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी जानकारी दी गई। इस दौरान पीएम मोदी सबसे पीछे की पंक्ति में एक आम सांसद की तरह बैठे दिखे। गोरखपुर सांसद रवि किशन ने इसकी तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की और लिखा कि सांसदों की कार्यशाला में आखिरी पंक्ति में बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। यही है भाजपा की ताकत। यहां हर कोई कार्यकर्ता है। इससे पहले, जीएसटी में ऐतिहासिक सुधारों के लिए भाजपा सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन और सम्मान किया। इस मौके पर जगदंबिका पाल ने जीएसटी सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने जीएसटी को लेकर एक बड़ा फैसला लिया, जो अंतरराष्ट्रीय टैरिफ के दबाव का विकल्प है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले विपक्ष जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' कहता था, और अब वे इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। पूरा देश उनकी सच्चाई जानता है। दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य बता दें कि इस दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य विधायी कौशल, शासन रणनीतियों और राजनीतिक संचार पर ध्यान देना है। नेताओं ने केंद्र सरकार के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने और विपक्ष का मुकाबला करने के तरीकों पर चर्चा की। रविवार को सांसद पूरे दिन की कार्यशाला में शामिल हुए। सोमवार को भी तीन घंटे का एक और सत्र निर्धारित है। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव बता दें कि उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होगा। पीएम मोदी उपराष्ट्रपति चुनाव से एक दिन पहले, सोमवार को भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सांसदों के लिए रात्रिभोज का आयोजन भी कर रहे हैं। गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन और विपक्ष के उम्मीदवार, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला है। हालांकि, संख्या बल के आधार पर राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

राजनीति की नई उड़ान: निशांत तैयार, बस नीतीश कुमार का ओके बाकी

नई दिल्ली/पटना  बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल यूनाइटेड (JDU) में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर हलचल तेज हो गई है। हालांकि, नीतीश कुमार लंबे समय से वंशवाद के खिलाफ मुखर रहे हैं, लेकिन जेडीयू के भीतर अब यह राय बन रही है कि पार्टी को बचाने और मजबूत करने के लिए निशांत की राजनीति में एंट्री जरूरी है। हाल ही में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख और एनडीए सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा ने पटना की रैली में कहा कि अगर निशांत तुरंत राजनीति में नहीं आए तो जेडीयू को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है।  रिपोर्ट में एक करीबी सूत्र के हवाले से कहा, “निशांत राजनीति में आने के लिए तैयार हैं, उन्हें सिर्फ अपने पिता की मंजूरी चाहिए।” सूत्र ने आगे कहा, "हम वंशवाद को बढ़ावा न देने के मुख्यमंत्री के रुख से वाकिफ हैं, लेकिन हमें व्यावहारिक होना होगा। अगर जेडीयू को एक पार्टी के रूप में जिंदा रहना है और फलना-फूलना है, तो निशांत को राजनीति में लाना होगा। सिर्फ वही कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर सकते हैं और पार्टी को मजबूती से खड़ा कर सकते हैं।" जेडीयू नेताओं का कहना है कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री की सेहत और प्रशासन पर पकड़ को लेकर चिंता बढ़ी है। कई नेताओं ने दावा किया कि सरकार के कुछ फैसले नौकरशाहों के प्रभाव में लिए गए हैं, जिससे पार्टी की पकड़ कमजोर होती दिख रही है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “एनडीए की 100 से ज्यादा सीटों पर बैठकें हुईं, लेकिन दलित और युवा वर्ग की भागीदारी घटी है। निशांत इस स्थिति को बदल सकते हैं।” जेडीयू में समर्थन, लेकिन अंतिम फैसला नीतीश का जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने हाल ही में कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से निशांत को राजनीति में देखना चाहते हैं, लेकिन अंतिम फैसला नीतीश कुमार का ही होगा। आपको बता दें कि नालंदा से लेकर हरनौत तक निशांत को चुनाव मैदान में उतारने की मांग उठ चुकी है। निशांत इस साल जनवरी से कई बार मीडिया के सामने आए हैं और अपने पिता के समर्थन में जनता से अपील भी की है। बताया जाता है कि वह समाजवादी नेताओं राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के विचारों का अध्ययन भी कर रहे हैं।  

कांग्रेस में हलचल: बीड़ी-बिहार मामले पर केरल इकाई के सोशल मीडिया प्रमुख का इस्तीफा

नई दिल्ली मोदी सरकार द्वारा जीएसटी की दरों में बदलाव करने के बाद कांग्रेस की केरल इकाई के सोशल मीडिया अकाउंट से बीड़ी और बिहार को जोड़ने वाला पोस्ट किया गया था। इस पोस्ट पर खूब बवाल मचा था। विपक्षी दलों ने इसके लिए कांग्रेस की जमकर आलोचना की थी। विवाद के बाद अब केरल कांग्रेस के सोशल मीडिया हेड वीटी बलराम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वीटी बलराम केरल की थ्रीथला विधानसभा सीट से दो बार के विधायक रहे हैं। पहले केरल प्रदेस कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया का जिम्मा डॉ. पी. सरीन के संभाल रहे थे। लेकिन उनके सीपीआई(एम) में शामिल होने के बाद बलराम को यह जिम्मेदारी मिली थी।   केरल कांग्रेस ने किया था पोस्ट जीएसटी काउंसिल की तरफ से बीड़ी पर लगने वाले 28 फीसदी टैक्स को घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया था। जबकि इसके उलट सिगरेट पर टैक्स बढ़ाया गया था। इस बढ़े हुए टैक्स को सिन टैक्स (पाप के लिए टैक्स) नाम दिया गया। इसी विषय पर केरल कांग्रेस के एक्स हैंडल से एक पोस्ट किया गया था। पोस्ट में लिखा था कि बीड़ी और बिहार दोनों बी से शुरू होते हैं। अब इसे पाप नहीं माना जा सकता। लेकिन विवाद के बाद पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। एनडीए के नेताओं ने इसे लेकर कांग्रेस पर बिहार का अपमान करने का आरोप लगाया। यहां तक कि कांग्रेस के सहयोगी दल राजद ने भी खुद को इससे अलग कर लिया। आक्रोश देख केपीसीसी ने माफी मांगी। नई पोस्ट में कहा गया कि हमारे तंज को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है और अगर किसी को ठेस पहुंची है तो हम क्षमा चाहते हैं। माफी के बाद अब केपीसीसी के सोशल मीडिया हेड का इस्तीफा भी हो गया है। बता दें कि बीड़ी पर 18 फीसदी और बीड़ी बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेंदू के पत्तों पर 5 फीसदी टैक्स लगाया गया है। बीड़ी उत्पादन में बिहार का अहम योगदान है और इस उद्योग से लगभग 70 लाख लोग जुड़े हुए हैं।