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सीएम योगी का बड़ा बयान: ‘धर्म की आड़ में कालनेमि सनातन धर्म को कमजोर कर रहे

 लखनऊ प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य से जुड़े हालिया विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्म, राष्ट्र और सनातन पर तीखा और स्पष्ट संदेश दिया है. बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि आज के समय में धर्म की आड़ लेकर सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं और ऐसे लोगों से समाज को सतर्क रहने की जरूरत है. सीएम योगी ने ऐसे तत्वों को 'कालनेमि' करार देते हुए कहा कि ये लोग बाहर से धार्मिक दिखते हैं, लेकिन भीतर से धर्मविरोधी एजेंडे पर काम कर रहे हैं. सीएम योगी ने कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, उसकी असली संपत्ति धर्म होता है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो व्यक्ति धर्म के खिलाफ आचरण करता है, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता. कौन है कालनेमि  सीएम योगी के बयान में इस्तेमाल किया गया कालनेमि शब्द अपने आप में गहरा अर्थ रखता है. कालनेमि का उल्लेख रामायण में मिलता है. वह एक मायावी असुर था, जिसने साधु का वेश धारण कर हनुमान को भ्रमित करने की कोशिश की थी. बाहर से वह धर्मात्मा और तपस्वी दिखाई देता था, लेकिन भीतर से उसका उद्देश्य भगवान राम के कार्य में बाधा डालना था. अंततः हनुमान ने उसके छल को पहचान लिया और उसका वध कर दिया. शंकराचार्य विवाद के बीच आया बयान सीएम योगी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब शंकराचार्य को अपने अनुयायियों के साथ रथ से मौनी अमावस्या पर स्थान करने जाने से रोकने के बाद बहस तेज है. हालांकि मुख्यमंत्री ने किसी व्यक्ति या संस्था का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों को मौजूदा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है. उनका संदेश यह था कि सनातन धर्म की रक्षा केवल परंपराओं से नहीं, बल्कि आचरण की शुद्धता से होती है. धर्म आचरण में दिखना चाहिए सीएम योगी ने यह भी कहा कि धर्म केवल वेश या शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में दिखाई देना चाहिए. उन्होंने समाज से अपील की कि धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे भ्रम और दिखावे से सावधान रहें. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने हमेशा सत्य, संयम और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है और इसी मार्ग पर चलना ही उसकी सच्ची सेवा है.  

डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा

योगी सरकार ने दी कौशल क्रांति को नई दिशा :  ‘कौशल दिशा’ पोर्टल से ग्रामीण युवाओं को मिलेगा रोजगार का मार्ग डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल अंतर को समाप्त कर युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है पोर्टल का उद्देश्य तकनीक और नवाचार से मजबूत होगा कौशल इकोसिस्टम लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल के रूप में “कौशल दिशा” पोर्टल विकसित किया गया है। यह पोर्टल राज्य में कौशल विकास की व्यापक और समावेशी नीति का सशक्त डिजिटल माध्यम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल अंतर को समाप्त कर युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। “कौशल दिशा” पोर्टल योगी सरकार की उस सतत प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत युवाओं को कौशल, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जा रहा है। डिजिटल माध्यम से ग्रामीण युवाओं को सशक्त बनाने की पहल प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि “कौशल दिशा” एक ऑनलाइन कौशल शिक्षा मंच है, जो सरल पंजीकरण प्रक्रिया, सेल्फ लर्निंग, ऑनलाइन मूल्यांकन एवं प्रमाणन जैसी सुविधाओं के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण को युवाओं की सीधी पहुंच में लाता है। यह प्लेटफॉर्म दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) 1.0 के अंतर्गत चयनित शीर्ष 10 प्रमुख सेक्टरों में ऑनलाइन प्रशिक्षण उपलब्ध कराता है। इनमें आईटी-आईटीईएस, पर्यटन एवं आतिथ्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाएं, परिधान एवं रेडीमेड गारमेंट, होम फर्निशिंग, रिटेल और लॉजिस्टिक्स जैसे रोजगारोन्मुखी क्षेत्र शामिल हैं। पोर्टल के माध्यम से ग्रामीण निर्धन युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी। महिला सशक्तिकरण को मिलेगा विशेष लाभ “कौशल दिशा” पोर्टल विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए लाभकारी है, जो सामाजिक या पारिवारिक कारणों से प्रशिक्षण केंद्रों तक भौतिक रूप से नहीं पहुंच पातीं। स्मार्टफोन और इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाणन हासिल करने की सुविधा योगी सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति को नई मजबूती प्रदान करती है। यह पोर्टल उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कौशल विकास को प्रौद्योगिकी और नवाचार से जोड़कर राज्य में एक मजबूत, समावेशी और भविष्य-उन्मुख कौशल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है।

वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की

ग्रामीण आजीविका में योगी सरकार ने बनाया रिकॉर्ड, 23 लाख से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की रोजगार से नेतृत्व तक उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाओं के हाथ आई कमान लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में गांवों की तस्वीर अब बदल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अब सिर्फ रोजगार नहीं दे रही, बल्कि गांव-गांव महिला नेतृत्व तैयार कर रही है। रोजगार गारंटी व्यवस्था के जरिए उत्तर प्रदेश ने वह कर दिखाया है, जो अब तक सिर्फ कल्पना थी। महिलाएं अब मेट बनकर काम की निगरानी, प्रबंधन और नेतृत्व कर रही हैं। मानव दिवस सृजन में महिलाओं की सहभागिता 43 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। आंकड़ों से साफ है कि उत्तर प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व से तेजी से मजबूत हो रही है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 23 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराकर प्रदेश ने न सिर्फ लाखों परिवारों को स्थायी सहारा दिया है, बल्कि गांवों में आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव भी रखी है। ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ी है और उनका सामाजिक-आर्थिक आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है। महिला नेतृत्व को मिला नया मंच योगी सरकार की सोच का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक करीब 32 हजार से अधिक महिला मेट्स को कार्य सौंपा गया है। ये महिलाएं गांवों में कार्यों की निगरानी, श्रमिकों की हाजिरी और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रही हैं। सरकार ने इन महिला मेट्स को 111 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की है। पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान प्रणाली ने महिलाओं का भरोसा सरकारी योजनाओं पर और गहरा किया है। स्वयं सहायता समूह बने नेतृत्व की रीढ़ महिला सशक्तिकरण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए सरकार ने स्पष्ट रणनीति अपनाई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को प्राथमिकता के आधार पर महिला मेट के रूप में चुना जा रहा है। इससे रोजगार के साथ-साथ गांवों में लीडरशिप और मैनेजमेंट स्किल्स का भी तेजी से विकास हो रहा है। गांवों में अब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बन रही हैं। समय पर भुगतान, भरोसे की गारंटी रोजगार गारंटी व्यवस्था में पारदर्शिता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025–26 में 97 प्रतिशत से अधिक श्रमिकों को समय से भुगतान किया गया है। यह आंकड़ा बताता है कि सिस्टम अब भरोसेमंद हो चुका है और श्रमिकों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल रहा है। गांवों में बने आय के नए स्रोत प्रदेश में ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत अब तक 6703 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इससे गांवों में विकास कार्यों को नई रफ्तार मिली है, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को विशेष प्राथमिकता देकर सरकार ने समावेशी विकास को भी मजबूत किया है। मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर योगी सरकार की यह पहल सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में सामाजिक परिवर्तन की कहानी बन चुकी है। रोजगार से लेकर नेतृत्व तक, महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई यह नीति उत्तर प्रदेश को देश के सामने वूमेन-लीड ग्रोथ मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है। गांवों में आत्मनिर्भर परिवार, सशक्त महिलाएं और मजबूत अर्थव्यवस्था यही योगी सरकार का नया इतिहास है।

समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बना रहे योगी सरकार के भूमि सुधार कार्यक्रम

कृषि भूमि और आवास स्थल आवंटन में यूपी ने प्राप्त किया सत्तर फीसदी लक्ष्य, भूमिहीन किसान हुए लाभान्वित समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बना रहे योगी सरकार के भूमि सुधार कार्यक्रम यूपी में भूमिहीन और सीमांत किसानों को कृषि भूमि और आवास स्थल का आवंटन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले ग्रामीणों और भूमिहीन किसानों के आर्थिक स्वावलंबन के लिए बड़े पैमाने पर भूमि सुधार कार्यक्रम लागू किए हैं। जो उत्तर प्रदेश में समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके तहत प्रदेश का राजस्व विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक भूमिहीन, अल्पभूमि धारक किसानों को कृषि भूमि और आवास स्थल आवंटित करता है। इस क्रम में विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष लगभग सत्तर फीसदी लक्ष्य हासिल किया है। जिससे न केवल भूमिहीन किसानों को आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्राप्त हुए हैं, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जो प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भूमिहीन किसानों को 151.80 हेक्टेयर कृषि भूमि का आवंटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश में चलाए जा रहे भू-सुधार कार्यक्रमों के तहत भूमिहीन या अल्पभूमि धारक ग्रामीणों को ग्राम सभा की ओर से भूमि आवंटित कराई जाती है। जिसके तहत वर्ष 2025-26 में राजस्व विभाग की ओर से 1076 आवंटियों को 151.80 हेक्टेयर कृषि भूमि का आवंटन किया जा चुका है। जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 69.16 प्रतिशत है। राजस्व विभाग के इस कार्य से प्रदेश के भूमिहीन और सीमांत किसानों को खेती के लिए उपजाऊ भूमि उपलब्ध हुई है। इससे न केवल उनकी आजीविका में स्थिरता आएगी, बल्कि राज्य के कुल कृषि उत्पादन में भी सकारात्मक वृद्धि होगी। राजस्व विभाग ने 3754 परिवारों को आवास स्थल आवंटित किए राजस्व विभाग गांवों में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को आवास के लिए भी जमीन उपलब्ध करवाता है। इस क्रम में विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3754 परिवारों को आवास स्थल आवंटित किए गए हैं। जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 70.90 प्रतिशत है। आवास स्थल प्राप्त करने से इन परिवारों को न सिर्फ सिर पर छत मिली, बल्कि इसका सीधा प्रभाव उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में सुधार के रूप में देखा गया। प्रदेश सरकार के इस कार्यक्रम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को वरीयता प्रदान की जाती है। राजस्व विभाग के भूमि सुधार कार्यक्रमों के तहत कृषि भूमि और आवास स्थल उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की समावेशी विकास नीति का अहम हिस्सा है। इससे न केवल प्रदेश में भूमि का न्यायोचित वितरण सुनिश्चित होता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक न्याय एवं आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

गोवंश संरक्षण को मिली तकनीकी मजबूती, अयोध्या के सभी गो-आश्रय हाईटेक निगरानी से जुड़े

अयोध्या के 87 गो-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी से 24 घंटे निगरानी, योगी आदित्यनाथ सरकार की पहल गोवंश संरक्षण को मिली तकनीकी मजबूती, अयोध्या के सभी गो-आश्रय हाईटेक निगरानी से जुड़े सोलर व सिम बेस्ड सीसीटीवी से सुरक्षित हुए अयोध्या के गो-आश्रय स्थल -विकास भवन कंट्रोल रूम से 87 गो-आश्रयों की पल-पल निगरानी -अब ऐप से दिखेगी गोशालाओं की लाइव स्थिति, व्यवस्था में आई पारदर्शिता -सीसीटीवी निगरानी से गोवंशों की देख-रेख में उल्लेखनीय सुधार -14,800 निराश्रित गोवंशों का संरक्षण, सीडीओ बोले व्यवस्था हुई अधिक प्रभावी अयोध्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप निराश्रित गोवंशों के संरक्षण एवं गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में अयोध्या जनपद में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले के सभी 87 गो-आश्रय स्थलों में अब वाई-फाई, सोलर एवं सिम बेस्ड सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक गो-आश्रय स्थल पर दो-दो कैमरे लगाए गए हैं। एक कैमरा प्रवेश द्वार पर स्थापित किया गया है, जिससे आने-जाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा सके, जबकि दूसरा कैमरा गोशाला के अंदर लगाया गया है, जिसके माध्यम से गोवंशों की स्थिति, भूसा, हरा चारा, पानी, साफ-सफाई एवं अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है। सोलर व सिम बेस्ड कैमरों से निर्बाध निगरानी कैमरे सोलर बेस्ड होने के कारण सूर्य की रोशनी से चार्ज होकर बिना बिजली बाधा के लगातार कार्य कर रहे हैं। वाई-फाई एवं सिम आधारित प्रणाली के चलते मोबाइल फोन व ऐप के माध्यम से लाइव स्ट्रीमिंग को कहीं से भी आसानी से देखा जा सकता है। सभी कैमरों की स्थापना ग्राम पंचायत निधि से की गई है। विकास भवन में कंट्रोल रूम से निगरानी सभी 87 गो-आश्रय स्थलों की निगरानी के लिए अयोध्या विकास भवन में एक केंद्रीय कंट्रोल रूम संचालित किया गया है। यहां 11 विकास खंडों के अलग-अलग ग्रुप बनाकर टेलीविजन स्क्रीन पर एक बार में चार-चार कैमरों की लाइव स्थिति देखी जाती है। कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारी बारी-बारी से सभी गो-आश्रय स्थलों की सतत निगरानी करते हैं और किसी भी कमी के पाए जाने पर तत्काल निवारण की कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। कैमरा प्रणाली की प्रमुख विशेषताएं सीसीटीवी कैमरे 360 डिग्री रोटेशन की क्षमता से युक्त हैं, जिससे गोशाला के अंदर और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी संभव है। स्मार्ट डिटेक्शन सेंसिटिविटी के माध्यम से गतिविधियों का स्वतः पता चलता है। ह्यूमन डिटेक्शन एवं स्मार्ट ट्रैकिंग से केयरटेकर व अन्य मानव गतिविधियों की पहचान कर नोटिफिकेशन और क्लिप क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित होती है।डिटेक्शन एरिया सेटिंग से नाद, बैठने के स्थान, साफ-सफाई व भूसा भंडारण की निगरानी की जा सकती है। सायरन सेटिंग अवांछनीय गतिविधियों को रोकने में सहायक है। नाइट विजन मोड से रात्रि में भी स्पष्ट दृश्य उपलब्ध होते हैं, जिससे चोरी और गोवंशों के बाहर निकलने की घटनाओं पर रोक लगी है। डिवाइस कॉल सुविधा के माध्यम से ऐप से गोशाला में मौजूद लोगों से सीधे संवाद भी किया जा सकता है। देख-रेख में आया उल्लेखनीय सुधार इस प्रणाली से गोशालाओं में पाई जाने वाली कमियों का तुरंत पता चल रहा है। समय पर भूसा, हरा चारा, पानी एवं अन्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होने से सुरक्षा, स्वच्छता और गोवंशों की देख-रेख में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।  सीसीटीवी निगरानी से गो-आश्रयों में बढ़ी पारदर्शिता, 14,800 निराश्रित गोवंश सुरक्षित: सीडीओ मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि जिले के 87 गो-आश्रय स्थलों में अब तक 14 हजार 800 निराश्रित गोवंशों को संरक्षित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी आधारित निगरानी व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी है और गो-आश्रयों की व्यवस्थाएं पहले से अधिक प्रभावी और विश्वसनीय हुई हैं। सोलर बेस्ड सिम सीसीटीवी प्रणाली के केंद्रीकृत संचालन से अयोध्या के सभी गो-आश्रय स्थलों की निगरानी अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और दक्ष हो गई है। इससे निराश्रित गोवंशों के संरक्षण की व्यवस्था मजबूत हुई है और पूरी प्रणाली अब अधिक सुदृढ़ एवं भरोसेमंद बन गई है।

यूपी दिवस पर योगी सरकार की पहल, अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी से समयबद्ध लक्ष्य प्राप्ति पर जोर

निपुण भारत मिशन को जन-आंदोलन बनाने की तैयारी, 24 जनवरी को हर न्याय पंचायत में होगी ‘शिक्षा चौपाल’ यूपी दिवस पर योगी सरकार की पहल, अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी से समयबद्ध लक्ष्य प्राप्ति पर जोर बालवाटिका के प्रभावी संचालन, बच्चों के नामांकन और नियमित उपस्थिति तथा शिक्षा के दीर्घकालिक महत्व पर विशेष बल लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से प्राप्त करने और शिक्षा को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश की सभी न्याय पंचायतों में 24 जनवरी, 2026 को यूपी दिवस के अवसर पर ‘शिक्षा चौपाल’ का आयोजन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समितियों (SMC), शिक्षकों और स्थानीय जनसमुदाय को निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों से जोड़ते हुए बच्चों की बुनियादी भाषायी और गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ करना है। बालवाटिका से बुनियादी शिक्षा तक जागरूकता महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा समस्त बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर आयोजन के निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि शिक्षा चौपाल के माध्यम से बालवाटिका के प्रभावी संचालन, बच्चों के नामांकन और नियमित उपस्थिति तथा शिक्षा के दीर्घकालिक महत्व पर विशेष जोर दिया जाएगा। चौपाल में विद्यालयों को उपलब्ध कराई गई शिक्षण सामग्री, प्रिंट-रिच सामग्री, गणित किट, क्रियाशील पुस्तकालय, खेल सामग्री सहित डिजिटल संसाधनों जैसे स्मार्ट क्लास, ICT लैब, दीक्षा, खान अकादमी और टीचर्स ऐप की जानकारी भी साझा की जाएगी। सम्मान और सहभागिता से बढ़ेगा उत्साह शिक्षा चौपाल के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों, नामांकन व उपस्थिति में उल्लेखनीय सुधार करने वाले विद्यालयों, तथा मेधावी बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, अभिभावकों और SMC सदस्यों के योगदान के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया जाएगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, प्रबुद्धजन और मीडिया प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। ₹10 हजार प्रति न्याय पंचायत, सख्त वित्तीय दिशा-निर्देश शिक्षा चौपाल के आयोजन के लिए ₹10,000 प्रति न्याय पंचायत की दर से धनराशि स्वीकृत की गई है। यह राशि टेंट, कुर्सी, साउंड सिस्टम, बैनर, जलपान, स्टेशनरी, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी आदि व्यवस्थाओं पर व्यय की जाएगी। व्यय का विवरण निर्धारित समयसीमा में प्रबंध पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।जिला और मंडलीय स्तर के अधिकारी कार्यक्रम का सतत अनुश्रवण करेंगे।

राजधानी लखनऊ की दो ग्राम पंचायतों से आधार सेवाओं का शुभारंभ

खुशखबरी : अब अपने गांव में ही मिलेंगी आधार से जुड़ी सेवाएं राजधानी लखनऊ की दो ग्राम पंचायतों से आधार सेवाओं का शुभारंभ पहले चरण में 1000 ग्राम पंचायतों में सेवा विस्तार की योजना अब तक 800 से अधिक पंचायत सहायकों को दिया जा चुका प्रशिक्षण सीएम योगी का विजन : पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त कर रहा पंचायतीराज विभाग लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पंचायती राज विभाग ने लखनऊ में ग्राम पंचायत स्तर पर आधार केंद्रों की शुरुआत कर दी है, जिससे ग्रामीणों को आधार से जुड़ी सेवाएं अब अपने गांव में ही उपलब्ध हो सकेंगी। प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ब्लॉक सरोजनीनगर की ग्राम पंचायत भटगवां पांडेय तथा चिनहट ब्लॉक की सैरपुर ग्राम पंचायत में आधार सेवाएं सफलतापूर्वक प्रारंभ कर दी गई हैं। इन दोनों ग्राम पंचायतों में अब तक 40 से अधिक ग्रामीणों को आधार से संबंधित सेवाएं प्रदान की गई हैं, जिससे उन्हें अब शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। चरणबद्ध तरीके से 57,694 ग्राम पंचायतों तक मिलेगी सुविधा यह पहल पंचायत स्तर पर नागरिक सेवाओं की सहज, पारदर्शी और सुलभ उपलब्धता की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। विभाग की योजना के अनुसार, पहले चरण में प्रदेश की 1000 ग्राम पंचायतों में आधार सेवाएं प्रारंभ की जाएंगी, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों तक विस्तारित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायत सहायकों का व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। अब तक 800 से अधिक पंचायत सहायकों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि शेष पंचायत सहायकों का प्रशिक्षण कार्य प्रगति पर है। ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि ग्राम स्तर पर आधार सेवाओं की शुरुआत ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यह पहल न केवल समय और संसाधनों की बचत करेगी, बल्कि पंचायतों को आत्मनिर्भर और सक्षम भी बनाएगी। डिजिटल इंडिया और सशक्त पंचायतों के संकल्प को साकार करने की दिशा में बड़ी शुरुआत पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने कहा कि विभाग ग्राम पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। आधार सेवाओं की यह शुरुआत पंचायतों को नागरिक सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में इसका लाभ प्रदेश के हर गांव तक पहुंचेगा। ग्राम पंचायत स्तर पर आधार सेवाओं की यह पहल डिजिटल इंडिया और सशक्त पंचायतों के संकल्प को साकार करने की दिशा में बड़ी शुरुआत मानी जा रही है।

राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दो साल: जानिए क्या-क्या हुआ निर्माण, धर्मध्वजा से लेकर राम दरबार तक

अयोध्या  अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को दो साल पूरे हो चुके हैं. इन दो वर्षों में मंदिर में लगातार निर्माण हो रहे हैं और आस्था के इस नए केंद्र का नया ही स्वरूप बदलकर सामने आ रहा है. रोज हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. मंदिर में दर्शन की व्यवस्था से लेकर टाइमिंग आदि में भी बदलाव हुए हैं जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सहूलियत को देखते हुए अपनाए जा रहे हैं.  श्रीराम मंदिर का मुख्य ढांचा अब लगभग पूर्ण हो चुका है. गर्भगृह में श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की मूर्ति स्थापित है और नियमित पूजा-अर्चना हो रही है. मंदिर की भूतल संरचना पूरी तरह तैयार है, जबकि पहली और दूसरी मंजिल पर निर्माण और कलात्मक कार्य अंतिम चरण में हैं. मंदिर का शिखर, मंडप और स्तंभ पारंपरिक नागर शैली में निर्मित किए गए हैं, जिन पर बारीक नक्काशी की गई है. पत्थरों पर रामायण से जुड़े प्रसंग उकेरे गए हैं, जो मंदिर को सांस्कृतिक पहचान देते हैं. पिछले दो साल में मंदिर परिसर का बड़ा हिस्सा विकसित किया गया है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चौड़ा परिक्रमा पथ बनाया गया है, जिससे दर्शन के दौरान भीड़ नियंत्रित रहती है. परिसर में रास्ते, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है. सुरक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक तकनीक से मजबूत किया गया है ताकि श्रद्धालु निश्चिंत होकर दर्शन कर सकें. राम मंदिर में फहराई गई धर्म ध्वजा बीते साल नवंबर 2025 में अयोध्या में राम मंदिर पर धर्म ध्वजारोहण हुआ. राम मंदिर पर फहराने वाला ध्वज केसरिया रंग का है. ध्वज की लंबाई 22 फीट चौड़ाई 11 फीट और ध्वजदंड 42 फीट का है. इस ध्वज को 161 फीट के शिखर पर फहराया गया. ध्वज पर 3 चिन्ह चिह्नित किए गए हैं- सूर्य, ऊं, कोविदार वृक्ष. माना जा रहा है कि यह ध्वज सूर्य भगवान का प्रतीक है. सनातन परंपरा में केसरिया त्याग, बलिदान, वीरता और भक्ति का प्रतीक माना गया है. रघुवंश के शासनकाल में भी यह रंग विशेष स्थान रखता था. भगवा वह रंग है जो ज्ञान, पराक्रम, समर्पण और सत्य की विजय का प्रतिनिधित्व करता है. ध्वज पर उकेरे गए ये पवित्र चिन्ह ध्वज पर कोविदार वृक्ष और 'ऊं' की छवि अंकित की गई है. कोविदार वृक्ष का उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और इसे पारिजात व मंदार के दिव्य संयोग से बना वृक्ष माना गया है. मुख्य राम मंदिर: गर्भगृह और रंग मंडप सहित इसका निर्माण पूरा हो गया है. परकोटा: मुख्य मंदिर के चारों ओर लगभग 800 मीटर लंबा परकोटा तैयार है, जिसमें कई छोटे मंदिर शामिल हैं. सप्त मंडप: महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, शबरी और ऋषि पत्नी अहल्या के मंदिर बनकर तैयार हैं. छोटे मंदिर: भगवान शिव, गणेश, हनुमान, सूर्यदेव, मां दुर्गा और मां अन्नपूर्णा के मंदिर भी पूर्ण हो चुके हैं. प्रतिमाएं और ध्वज: जटायु, गिलहरी और संत तुलसीदास की प्रतिमाएं स्थापित हैं, और सभी मंदिरों पर कलश व धर्म ध्वज लगा दिए गए हैं. लक्ष्मण जी का मंदिरः परकोटे के बाहर शेषावतार लक्ष्मणजी का मंदिर भी बनकर तैयार है और सभी मंदिरों के शिखरों पर कलश और धर्म ध्वज भी स्थापित किए जा चुके हैं. मंदिर परिसर में राम कथा को समझाने के लिए संग्रहालय और प्रदर्शनी स्थल विकसित किए जा रहे हैं. यहां श्रद्धालुओं को भगवान राम के जीवन, वनवास, राम-रावण युद्ध और रामराज्य की अवधारणा को चित्रों, शिल्प और आधुनिक माध्यमों से समझाया जाएगा. यह व्यवस्था खासतौर पर युवाओं और बच्चों के लिए बनाई जा रही है ताकि वे रामायण को सरल भाषा और दृश्य रूप में समझ सकें. जन्मभूमि पर राम मंदिर के निर्माण से संबंधित काम 15 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच अगस्त 2020 को भूमि पूजन किया था. भूमि पूजन के बाद जनवरी 2021 से मंदिर निर्माण के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नींव की खोदाई शुरू कराई थी. कुल मिलाकर, दो साल बाद श्रीराम मंदिर अपनी भव्यता और गरिमा के साथ खड़ा है. कुछ कार्य अभी शेष हैं, लेकिन मंदिर अब अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना का मजबूत केंद्र बन चुका है.

मिर्जापुर में जिम संचालक का एनकाउंटर, हिंदू लड़कियों को फंसाकर ब्लैकमेल करने का आरोप

मिर्जापुर  यूपी के मिर्जापुर में जिम में लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण करवाने के आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने आरोपी जिम मालिक/ट्रेनर फरीद को एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया है. ये एनकाउंटर देहात कोतवाली के बरकछा में हुआ, जहां आरोपी के पैर में गोली लगी. फिलहाल, उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है.  मिर्जापुर धर्मांतरण केस में एक्शन  आपको बता दें कि मिर्जापुर में पुलिस ने जिम की आड़ में चल रहे अवैध धर्मांतरण और ब्लैकमेलिंग के बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. दो युवतियों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी जिम ट्रेनर मोहम्मद शेख अली आलम सहित चार आरोपियों (फैजल खान, जहीर और सादाब) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. साथ ही, घटना में शामिल KGN और बी-फिट सहित कुल 5 जिमों को सीज कर दिया गया है. पीड़िता के गंभीर आरोप पीड़िता ने आरोप लगाया कि ट्रेनर ने पहले उसे प्रेमजाल में फंसाया, फिर अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया और उसके नाम पर लोन भी लिया. उसे जबरन बुर्का पहनाने, नमाज पढ़ने और दरगाह ले जाकर कलमा पढ़वाकर धर्मांतरण का दबाव बनाया गया. विरोध करने पर वीडियो वायरल करने और जान से मारने की धमकी दी गई. सियासी हलचल  इस मामले पर भाजपा विधायक रत्नाकर मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे 'लव जिहाद' करार दिया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में अवैध धर्मांतरण का खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी. जिसके बाद पुलिस ने दो फरार आरोपियों को एकाउंटर के बाद अरेस्ट कर लिया. पुलिस पर फायर के बाद आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की गई जिसमें फरीद घायल हो गया. उसके पास से दो तमंचे बरामद हुए. फरीद से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं. 

संभल में जज के ट्रांसफर पर बवाल, वकीलों ने बताया दबाव की कार्रवाई

लखनऊ यूपी के संभल में हिंसा के मामले में सीओ रहे एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश देने वाले चंदौसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का ट्रांसफर कर दिया गया है। सीजेएम विभांशु सुधीर के तबादले को लेकर संभल जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं में रोष देखने को मिला। मंगलवार को सीजेएम विभांशु सुधीर का सुल्तानपुर स्थानांतरण किए जाने के बाद बुधवार को अधिवक्ताओं ने इसके विरोध में प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की।   बुधवार को जिला न्यायालय परिसर में एकत्र हुए अधिवक्ताओं ने स्थानांतरण के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीजेएम विभांशु सुधीर द्वारा न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता और सक्रियता दिखाई जा रही थी। अधिवक्ताओं का कहना है कि उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण और सराहनीय निर्णय लिए गए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में गति आई। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने मीडिया कवरेज को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि स्थानांतरण से जुड़े तथ्यों को सही तरीके से सामने लाया जाना चाहिए। अधिवक्ताओं का मत है कि बेहतर कार्य करने वाले अधिकारी का तबादला न्याय व्यवस्था के लिए उचित संदेश नहीं देता।हालांकि, स्थानांतरण शासन का विषय है, लेकिन अधिवक्ताओं ने इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। आपको बता दें कि संभल हिंसा मामले में सीओ रहे अब एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश देने वाले चंदौसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का तबादला हो गया है। विभांशु सुधीर का कार्यकाल यहां मात्र तीन माह का रहा। हाईकोर्ट ने उनके स्थान पर सिविल जज (वरिष्ठ श्रेणी) आदित्य सिंह को सीजेएम चंदौसी नियुक्त किया है। इसके अलावा सीतापुर की सीजेएम राजेंद्र कुमार सिंह को इसी पद पर कन्नौज स्थानांतरित किया गया है। इस फेरबदल में इसी स्तर के आठ अन्य न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन किया गया है। एक सप्ताह पहले ही संभल में शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले में सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। अदालत ने यह आदेश गोली लगने से घायल खग्गू सराय निवासी एक युवक के पिता की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया था।