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सेक्टर-29 में आकार ले रहा अपैरल पार्क, महिलाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

गारमेंट इंडस्ट्री का नया केंद्र यमुना एक्सप्रेस-वे सेक्टर-29 में आकार ले रहा अपैरल पार्क, महिलाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर 175 एकड़ में विकसित हो रहा पार्क, करीब सौ निर्यात आधारित इकाइयों का होगा ठिकाना यमुना एक्सप्रेस-वे और एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी से निर्यात और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनेगा उद्योग की रीढ़, डिजाइन से ट्रेनिंग तक एक ही छत के नीचे लखनऊ,  उत्तर प्रदेश सरकार यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र को निर्यात आधारित औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर-29 में 175 एकड़ में अपैरल पार्क विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना प्रदेश को गारमेंट इंडस्ट्री के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी। अपैरल पार्क के विकास से महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उनके सामाजिक, आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिलेगा। यह परियोजना प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीति और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है। राज्य सरकार के ‘मेक इन यूपी’ और भारत सरकार के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियानों को भी मजबूती मिलेगी।  सेक्टर-29 का अपैरल पार्क विशेष रूप से रेडीमेड गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी निर्यात इकाइयों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यहां लगभग 100 उत्पादन आधारित इकाइयां स्थापित की जाएंगी, जो घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी परिधान तैयार करेंगी। अपैरल पार्क को क्लस्टर मॉडल पर विकसित किया जा रहा है, जिससे कि उद्योगों को साझा सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो सके। अपैरल पार्क की लोकेशन को रणनीतिक रूप से अत्यंत  महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेस-वे से सीधे जुड़ा हुआ है और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित है। एयरपोर्ट के संचालन के बाद गारमेंट उत्पादों के निर्यात को नई गति मिलेगी। दिल्ली-एनसीआर से निकटता के कारण लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत कम होगी और निर्यातकों को समय पर डिलीवरी की सुविधा मिलेगी, जो निर्यातकों के लिए बहुत जरुरी है।  परियोजना के अंतर्गत अपैरल पार्क में ‘कॉमन फैसिलिटी सेंटर’ विकसित किया जाएगा। इसमें डिजाइन सेंटर, ट्रेनिंग सेंटर, यूनिट टेस्टिंग लैब और क्वालिटी कंट्रोल से जुड़ी सुविधाएं शामिल होंगी। साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) सेंटर, मार्केटिंग सपोर्ट सिस्टम आदि की भी सुविधाएं निर्यातक इकाइयों को दी जाएंगी। सरकार का यह उद्देश्य और प्रयास है कि छोटे और मध्यम उद्यमों को अलग-अलग महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश न करना पड़े और वे साझा संसाधनों का उपयोग कर इसका लाभ उठा सकें। इससे उत्पादन लागत घटेगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। अपैरल पार्क रोजगार सृजन के मामले में भी अपनी बड़ी भूमिका निभाएगा। इस परियोजना के माध्यम से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सिलाई, डिजाइन पैटर्न मेकिंग, पैकेजिंग, क्वालिटी कंट्रोल और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार के मौके मिलेंगे। यह परियोजना प्रदेश की नीति के अनुरूप है। योगी सरकार का फोकस कच्चे माल आधारित उत्पादन से आगे बढ़कर वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग पर है। अपैरल पार्क के जरिए प्रदेश में टेक्सटाइल इंडस्ट्री की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की योजना है। इससे किसानों, हथकरघा कारीगरों और छोटे उद्यमियों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उत्तर प्रदेश अब निवेश और उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण वाला प्रदेश बन गया है। यह परियोजना जब अपने पूर्ण रूप में आएगी तो यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा प्राप्त होगी।

अखिलेश यादव का बयान: संतों के सम्मान के लिए सपा खड़ी रहेगी

लखनऊ छोटे लोहिया के नाम से विख्यात समाजवादी विचारक डॉ. जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि पर गुरुवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जनेश्वर मिश्र पार्क जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रयागराज माघ मेले में साधु-संतों के साथ दुर्व्यवहार की घटना सामने आई है। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी साधु-संत का अपमान होगा तो समाजवादी पार्टी उनके सम्मान की लड़ाई में उनके साथ खड़ी रहेगी।         'सपा पीडीए की लड़ाई को आगे बढ़ा रही है' अखिलेश यादव ने कहा कि सपा पीडीए की लड़ाई को आगे बढ़ा रही है। जनेश्वर मिश्र ने जो सिद्धान्त, जो आंदोलन दिया, उसे आगे बढ़ने का हम संकल्प लेते हैं।  अखिलेश यादव ने नोएडा में इंजीनियर की मौत के प्रकरण को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घटना के बाद भी सरकारी तंत्र समय रहते पीड़ति की जान नहीं बचा सका। अखिलेश ने आरोप लगाया कि कई घंटे तक इसलिए कारर्वाई नहीं की गई क्योंकि यह कहकर टाल दिया गया कि पानी ठंडा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता बताते हुए कहा कि सरकार बताए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं सम्भल प्रकरण में सीओ समेत अन्य पर केस दर्ज कराने का आदेश देने वाले जज के ट्रांसफर पर सपा अध्यक्ष ने कहा कि 'सच्चाई को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।' 'सरकार सच सामने आने से घबराती है' सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार सच सामने आने से घबराती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में पूंजीवादी ताकतें हावी हो रही हैं। ऐसे में समाजवादियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे जनेश्वर मिश्र, डॉ. लोहिया, बाबा साहब और नेताजी के विचारों को आगे बढ़ाकर समाजवादी आंदोलन को मजबूती दें। इस दौरान अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला बोलते हुए कहा कि हम सभी ने देखा है कि जब वह योग कर रहे थे तो एक टांग पर लड़खड़ा रहे थे, क्या आप लोग उन्हें योगी कहेंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोग, वे लोग हैं जब उन्हें लगता है कि धर्म के आधार पर वोट नहीं मिल सकता है, सनातन के रास्ते से वोट नहीं मिल सकता है तो इस तरह का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन का रास्ता सत्य का रास्ता है, धर्म का रास्ता, न्याय का रास्ता है। हम सबको साथ लेकर चले, वही सनातनी रास्ता है। हमारे साधु संत और जितने भी पूजनीय लोग हैं उनका सम्मान करें। उनके पास समय-समय पर जाकर राय मशविरा करें। यही सनातन है।         'सतुआ बाबा को नहीं जानते हैं' इस दौरान सतुआ बाबा के बारे में पूछने पर अखिलेश यादव ने कहा कि सतुआ बाबा को नहीं जानते हैं, हम भी मुख्यमंत्री रहे हैं। सतुआ बाबा को देखा है, वह हमारे आजम साहब से कान में क्या कहते थे मुझे पता है। तमाम साधु संतों से कहूंगा कि सरकार को ना भड़काएं। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने तंज कसा कि उप मुख्यमंत्री को 'दंडवत होकर माफी मांगनी चाहिए।' उन्होंने प्रेरणा स्थल का नाम लिए बिना कहा कि 'तीन प्रतिमाओं की तरह खड़ा होना पड़ेगा न हिलो, न डुलो।'उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि जिस सरकार में वह डिप्टी सीएम हैं, वहां उन्हें कई बार 'डपट' भी पड़ जाती है। 

केशव मौर्य की शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से अपील: स्नान कर विवाद समाप्त करें

प्रयागराज  माघ मेला-2026 में मौनी अमावस्या के दिन पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक तरफ प्रशासन ने नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब तलब किया है तो वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के एक बयान ने इस पूरे प्रकरण को अलग ही मोड़ दे दिया है। प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रही खींचतान के बारे में पूछे जाने पर डिप्टी सीएम ने कहा कि पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम है। वह बढ़िया स्नान करें। उनसे प्रार्थना है और इस विषय का समापन करें, ऐसा आग्रह है। बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मेला एवं पुलिस प्रशासन ने मौनी अमावस्या पर पहिया लगी पालकी से संगम स्नान के लिए जाने से रोका था। शंकराचार्य ने स्नान नहीं किया था, उन्होंने कहा था कि वह अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे, उसी स्थान पर तब तक बैठे रहेंगे जब तक अफसर उनसे मांफी मांग ससम्मान संगम स्नान के लिए नहीं ले जाते हैं। शंकराचार्य के इस ऐलान के बीच प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए उसने 24 घंटे में स्पष्ट करने को कहा गया था कि वह खुद को शंकराचार्य कैसे लिख रहे हैं और अपने शिविर पर लगे बोर्ड पर शंकराचार्य कैसे लिखा है। इसके बाद मामला और अधिक बढ़ गया। मंगलवार को शंकराचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वो अपना जवाब दाखिल करेंगे। बुधवार को जवाब दे दिया। इस जवाब में उन्होंने प्राधिकरण के अफसरों से 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेने को कहा। ऐसा न करने पर उन्होंने कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी। शंकराचार्य के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र की ओर से दिए गए जवाब में मेला प्रशासन को बताया गया है कि उनका पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका था, कोर्ट का आदेश बाद का है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि प्रशासन अपना नोटिस 24 घंटे के भीतर वापस ले। ऐसा न करने पर प्रशासन के खिलाफ कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत करने कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। आठ पेज के जवाब में प्रशासन की ओर से उठाए गए बिंदु पर स्थिति स्पष्ट की गई। हालांकि इसके बार प्रशासन की ओर से उन्हें एक और नोटिस देकर 24 घंटे में यह स्पष्ट करने को कहा कि उनकी संस्था को माघ मेला में दी गई जमीन और सुविधाओं को निरस्त करके हमेशा के लिए मेले में उनके प्रवेश को क्यों न प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस दूसरी नोटिस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए पूछा है कि क्या समझकर उन्हें सुविधाएं दी गई थीं और क्या समझकर वापस ली जा रही हैं।  

ग्रामीण महिलाओं के हाथ में विकास की कमान

पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारक एवं अंत्योदय कार्डधारक दो लाख लाभार्थी परिवारों को समूहों से जोड़ा जाएगा ग्रामीण महिलाओं को आवश्यकता अनुसार ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही, जिसे सरल किस्तों में चुकाने की मिलेगी छूट स्टार्ट-अप फंड, रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड बनेंगे विकसित यूपी का ग्रोथ इंजन लखनऊ, उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को विकास की धुरी बनाया जा रहा है। स्टार्ट-अप फंड, रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के जरिए महिलाओं को आर्थिक संबल देकर प्रदेश को नए ग्रोथ इंजन की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसी क्रम में पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारक एवं अंत्योदय कार्डधारकों के करीब दो लाख लाभार्थी परिवारों को समूहों से जोड़ा जाएगा। इस तरह मिलेगी जिम्मेदारी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को समूह सखी, बैंक सखी, ड्रोन सखी और आजीविका सखी जैसी जिम्मेदार भूमिकाएं दी जाएंगी। इससे जहां महिलाओं की आय बढ़ेगी, वहीं सरकारी योजनाओं का लाभ भी गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा। जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित 6.67 लाख परिवारों की महिलाओं को समूह से जोड़ने का अभियान तेज योगी सरकार पात्र गृहस्थी और अंत्योदय राशन कार्डधारकों के करीब दो लाख लाभार्थी परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने जा रही है। इसके साथ ही वीबी जीरामजी कार्डधारकों और जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित 6.67 लाख परिवारों की महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का अभियान तेज किया गया है। ग्रामीण महिलाओं को आवश्यकता अनुसार ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसे सरल किस्तों में चुकाने की छूट होगी, ताकि वे बिना आर्थिक दबाव के स्वरोजगार शुरू कर सकें। वहीं, प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में महिलाओं को समूह से जोड़ने के लिए मेगा कैंपेन चलाया जाएगा। सशक्त गांव और सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सीधे बाजार से जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय उत्पादों को उचित मूल्य मिल सके। योगी सरकार का मानना है कि सशक्त महिला ही सशक्त परिवार, सशक्त गांव और सशक्त उत्तर प्रदेश की आधारशिला है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ विकसित यूपी के लक्ष्य को नई गति देगी।

सीमा पर खुशियों का सवेरा, योगी सरकार के सुशासन से चौगुर्जी गांव में रचा गया इतिहास

यूपी-नेपाल सीमा पर बसे गांव में योगी सरकार लाई खुशियों का सवेरा पुल से चलकर आई ‘जिंदगी’ चौगुर्जी में सीएम योगी के मार्गदर्शन, डीएम की सक्रिय पहल से बदली 109 परिवारों की बदली तकदीर कर्णाली और मोहना नदी पर बने नए पांटून पुल का लोकार्पण लखनऊ/लखीमपुर खीरी भारत-नेपाल सीमा पर बसा चौगुर्जी गांव वर्षों तक विकास से कटे रहने की मजबूरी झेलता रहा। नदी, दूरी और दुर्गम भूगोल ने यहां के 109 परिवारों को मुख्यधारा से अलग-थलग कर दिया था। लेकिन योगी सरकार के “हर गांव तक विकास” के संकल्प ने आज इस सीमांत गांव की नियति ही बदल दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित सुशासन मॉडल का जीवंत उदाहरण गुरुवार को तब देखने को मिला, जब जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल की प्रशासनिक तत्परता और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से चौगुर्जी गांव को ‘जिंदगी’ की वह सौगात मिली, जिसका इंतजार दशकों से था। पुल बना, दूरी घटी, अब घंटे नहीं, मिनटों में सफर गुरुवार को कर्णाली व मोहना नदी पर बने नए पांटून पुल का लोकार्पण डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल और निघासन विधायक शशांक वर्मा ने किया। यह पुल सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि गांव के लिए जीवन-रेखा साबित हुआ है। जहां पहले गांव तक पहुंचने में दो घंटे लगते थे, अब एंबुलेंस, स्कूल बस और आवश्यक सेवाएं मिनटों में उपलब्ध होंगी। यह बदलाव योगी सरकार की उस नीति का परिणाम है, जिसमें सीमांत और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंच प्राथमिकता है। शुद्ध जल, स्वस्थ जीवन, आर्सेनिक से मिली मुक्ति योगी सरकार के जल जीवन मिशन के तहत चौगुर्जी के 109 परिवारों को नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा मिली। वर्षों से आर्सेनिक युक्त पानी पीने को मजबूर ग्रामीणों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं। बटन दबाते ही नलों से निकला साफ पानी इस बात का प्रतीक बना कि सरकार की योजनाएं अब कागजों से निकलकर ज़मीन पर उतर चुकी हैं। अंधेरे से उजाले की ओर, सोलर लाइटों से रोशन गांव सीमांत गांव की गलियों में अब अंधेरा नहीं, बल्कि उम्मीद की रोशनी है। 20 सोलर स्ट्रीट लाइटों के लोकार्पण से न सिर्फ गांव जगमगाया, बल्कि सुरक्षा और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया। यह पहल योगी सरकार की ग्रीन एनर्जी और आत्मनिर्भर गांव की सोच को दर्शाती है। शिक्षा को मिली नई उड़ान, बच्चों के सपनों को लगे पंख परिषदीय विद्यालयों में सौर ऊर्जा, स्मार्ट क्लास और नया फर्नीचर उपलब्ध कराकर सरकार ने यह संदेश दिया कि सीमा पर रहने वाला बच्चा भी वही अवसर पाएगा, जो शहरों में उपलब्ध हैं। अब चौगुर्जी के बच्चे भी डिजिटल शिक्षा से जुड़कर देश की मुख्यधारा का हिस्सा बनेंगे। ग्रामीणों की जुबानी, यह सिर्फ विकास नहीं, सम्मान है ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि यह दिन उनके जीवन का सबसे बड़ा पल है। इतने वर्षों बाद हमें पुल, साफ पानी, रोशनी और शिक्षा मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, विधायक और डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने हमारे गांव को पहचान दी है। चौगुर्जी गांव की यह तस्वीर लखीमपुर खीरी में चल रहे उस व्यापक बदलाव की कहानी कहती है, जहां योगी सरकार के नेतृत्व में सीमा, दूरी और संसाधनों की कमी अब विकास में बाधा नहीं बन रही।

सुविधाएं वापस लेने की धमकी पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कड़ा प्रतिवाद

प्रयागराज नोटिस में प्राधिकरण ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे में यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनकी संस्था को माघ मेला में दी गई जमीन और सुविधाओं को निरस्त करके मेले में उनके प्रवेश को क्यों न प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस नोटिस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया सामने आई है। माघ मेला-2026 में मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के लिए जाते समय शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पिछले पांच दिनों से इस पर यूपी में सियासी बवंडर मचा हुआ है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा एक और नोटिस जारी किए जाने के बाद शंकराचार्य के समर्थक और भक्त और नाराज हैं। इस नोटिस में प्राधिकरण ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे में यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनकी संस्था को माघ मेला में दी गई जमीन और सुविधाओं को निरस्त करके हमेशा के लिए मेले में उनके प्रवेश को क्यों न प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस नोटिस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने जमीन और सुविधाएं वापस लेने की चेतावनी पर पलटवार करते हुए प्रशासन से पूछा है कि क्या समझकर दिया था और क्या समझकर वापस ले रहे हैं? निजी टीवी चैनलों से बातचीत में उन्होंने कहा- ‘क्या समझकर दिया था और क्या समझकर वापस ले रहे हो? देते समय तुम्हारी अकल कहां गई थी या लेते समय कहां अकल चली गई है, दोनों में तो अंतर आ गया न।’ उन्होंने कहा कि पीछे हटने की क्या बात है? 100 करोड़ सनातनधर्मियों के सम्मान को हम कैसे Give up कर दें? एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जो भी नोटिस आया है उसका जवाब दे दिया गया है। कल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने दी थी ये चेतावनी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और मेलाधिकारी ऋषिराज की ओर से को दिए गए नोटिस के जवाब के साथ प्राधिकरण के अफसरों से 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेने को कहा था। ऐसा न करने पर उन्होंने कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी थी। शंकराचार्य के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र की ओर से दिए गए जवाब में मेला प्रशासन को बताया गया कि उनका पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका था, कोर्ट का आदेश बाद का है। साथ ही चेतावनी दी गई कि प्रशासन अपना नोटिस 24 घंटे के भीतर वापस ले। ऐसा न करने पर प्रशासन के खिलाफ कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत करने कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। आठ पेज के जवाब में प्रशासन की ओर से उठाए गए बिंदु पर स्थिति स्पष्ट की गई। प्रशासन ने दिया एक और नोटिस मेला प्रशासन द्वारा स्वामी जी को एक और नोटिस जारी किया गया जिसमें प्रशासन ने 24 घंटे में जवाब मांगते हुए मेला प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी है। प्रशासन द्वारा दिए गए नोटिस में 24 घंटे में जवाब न देने पर मेले से प्रतिबंधित करने और सुविधाएं निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज सरकार ने आरोप लगाया कि सरकार पूरी तरह बदले की भावना के साथ कार्रवाई कर रही है। प्रशासन ने पारदर्शिता का उल्लंघन करते हुए शंकराचार्य शिविर पांडाल के पीछे बैक डेट (पुरानी तारीख) में नोटिस चस्पा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस लगाने के बाद अधिकारी खुद आकर कहने लगे की आपने इसका जवाब क्यों नहीं दिया। शैलेंद्र योगिराज सरकार ने यह भी कहा कि नोटिस का जवाब तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इसे प्रशासन को सौंप दिया जाएगा। बिना इजाजत पालकी पर संगम स्नान के लिए जाने का आरोप प्रशासन की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप है कि वह बिना इजाजत मौनी अमावस्या के दिन अपने अनुयायियों के साथ पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। भारी भीड़ के चलते उनसे पालकी छोड़कर पैदल संगम स्नान के लिए जाने का अनुरोध किया गया लेकिन वह अड़ गए। प्रशासन का कहना है कि उस दिन संगम स्नान के लिए करोड़ों श्रद्धालु जुटे थे और यदि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी पर अनुयायियों के साथ वहां जाते तो कोई अप्रिय घटना हो सकती थी। प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों पर बैरियर गिराने और धक्का मुक्की करने का अभी आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की जिद के चलते काफी देर तक वापसी मार्ग अवरुद्ध रहा जिससे सामान्य जनमानस को काफी असुविधा हुई। उधर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि यदि वह पैदल जाते तो उन्हें देखकर भीड़ उमड़ जाती और भगदड़ मच सकती थी। वह पिछले तीन वर्षों से पालकी पर इसीलिए जाते हैं ताकि श्रद्धालु दूर से उन्हें देख लें और वहां किसी प्रकार की असुविधा न हो।  

लूटकांड में लापरवाही पर सख्ती, 52 लाख की वारदात में थाना प्रभारी पर एसपी का प्रहार

सीतापुर यूपी के सीतापुर में सेवानिवृत्त लेखपाल के परिवार को बंधक बना कर 52 लाख की लूट के मामले में एसपी ने ऐक्शन लिया है। एसपी अंकुर अग्रवाल ने घटना के चार दिन बाद तालगांव थाना प्रभारी आशीष तिवारी को लाइन हाजिर कर दिया है। यूपी के सीतापुर में तालगांव में सेवानिवृत्त लेखपाल के परिवार को बंधक बना कर 52 लाख की लूट के मामले में चार दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। पुलिस अब तक एक दर्जन से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है पर किसी सटी नतीजे पर नही पहुंच सकी है। लापरवाही बरतने पर एसपी अंकुर अग्रवाल ने घटना के चार दिन बाद तालगांव थाना प्रभारी आशीष तिवारी को लाइन हाजिर कर दिया है। पुलिस लाइन में तैनात इंस्पेक्टर दिनेश प्रकाश पांडेय को अब तालगांव थाने की कमान सौंपी गई है। तालगांव के रसूलपुर स्थित सेवानिवृत्त लेखपाल अमर सिंह के घर में शनिवार देर रात नकाबपोश बदमाश घुस आए थे। बदमाशों ने घर में मौजूद पांच सदस्यों को बंधक बना लिया था। बदमाशों ने घर का कोना-कोना खंगाला था। बदमाशों ने महिलाओं के जेवर उतरवाने के साथ 52 लाख की लूट की बड़ी वारदात को अंजाम दिया था। जाते वक्त बदमाशों ने पुलिस से शिकायत करने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी थी। रविवार सुबह आईजी रेंज लखनऊ किरण एस घटनास्थल पर जांच के लिए पहुंचे थे। आईजी ने पीड़ित परिवार से मिलकर घटना के बारे में विस्तार से पूछताछ की थी। एसपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि आठ टीमें बदमाशों की तलाश में दबिश दे रही हैं। कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। बदमाशों के बारे में अहम सुराग मिले हैं। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया जाएगा। इस मामले में तालगांव थाना प्रभारी आशीष तिवारी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इंस्पेक्टर दिनेश प्रकाश पांडेय को अब तालगांव थाना प्रभारी बनाया गया है। आठ टीमें बदमाशों की तलाश में दे रहीं दबिश पुलिस अधिकारियों के मुताबिक लूटपाट की घटना को जिस तरह से अंजाम दिया गया है। अंदेशा है कि परिवार का कोई करीबी भी वारदात में शामिल है। बदमाशों को पहले से अंदाजा था कि किस कमरे में कौन रहता है। किस जगह कीमती सामान रखा है। कुछ दिन पहले ही बैंक से पैसा निकालकर भी लाए हैं। पुलिस कई अन्य पहलुओं पर भी जांच कर रही है। पुलिस की आठ टीमें बदमाशों की तलाश में दबिश दे रही हैं।  

धर्म के नाम पर धोखा! सनातन धर्म को नुकसान पहुंचा रहे ‘कालनेमि’, सीएम योगी बोले—सतर्क रहें

सोनीपत/लखनऊ गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लव जिहाद, अवैध धर्मांतरण तथा राष्ट्रविरोधी षड्यंत्रों में लिप्त तत्वों को सख्त चेतावनी दी कि हमारी बेटियों के साथ किसी तरह का खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अवैध गतिविधियों के प्रति समाज को जागरूक रहना होगा तथा इनका प्रतिकार करने के लिए पूज्य साधु-संतों को भी आगे आना होगा। सीएम योगी गुरुवार को हरियाणा के सोनीपत जिले में मुरथल स्थित बाबा नागे वाला धाम में आयोजित नाथ संप्रदाय के मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा एवं आठ मान के भव्य भंडारा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सीएम ने यह भी कहा कि कई कालनेमि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को हानि पहुंचा रहे हैं। इनसे भी सतर्क रहना होगा। एक योगी के लिए, एक संत के लिए, एक सन्यासी के लिए, धर्म व राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। यही उसके जीवन का ध्येय होना चाहिए। उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नहीं होती। धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी है, राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है। अगर कोई राष्ट्रीय स्वाभिमान को चुनौती देता है तो हमें खुलकर उसके सामने आकर खड़े हो जाना चाहिए। ऐसे बहुत कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे। हमें उनसे सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि अवैध धर्मांतरण और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को पूरी तरह नियंत्रित किया जाएगा। इसके साथ ही डेमोग्राफी बदलने की जो साजिश हो रही है, लव जिहाद के नाम पर हमारी बेटियों के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा है। हम उसे रोकेंगे, पूरी शक्ति से रोकेंगे, जागरूकता से रोकेंगे। समाज के जागरूक लोगों और पूज्य संतों को भी इसके लिए आगे बढ़ना होगा। परिवारों को सुसंस्कृत किया जाएगा। सीएम ने कहा कि याद करिए, वर्ष 2009 में केरल के उच्च न्यायालय ने कहा था कि ‘लव जिहाद’ केरल जैसे राज्य को इस्लामी राज्य बनाने की साजिश का हिस्सा है। आज जब मैं देखता हूं तो तमाम राज्यों में बड़े पैमाने पर ये षड्यंत्र हो रहे हैं। हमारी संयुक्त परिवारों की परंपरा पहले संस्कारित होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह परंपरा विखंडित होती दिखाई दे रही है। इसे पुनः जीवित करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परिवार, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना के माध्यम से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण होगा। धर्म केवल उपासना विधि नहीं, बल्कि अभ्युदय और उत्थान का मार्ग है, जिसमें भौतिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास साथ-साथ चलते हैं। धर्मों के संरक्षण के प्रति हमें जागृत होना पड़ेगा। उनकी पवित्रता, मर्यादा को बनाए रखना होगा। सनातन धर्म व आध्यात्मिक विरासत में नाथ पंथ भारत की प्राचीनतम उपासना विधियों में से एक है। गुरु परंपरा के प्रति गहन श्रद्धा भाव के साथ जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा समारोह एवं भव्य भंडारे का आयोजन किया गया है, जो सचमुच अभिनंदनीय और सराहनीय है। सीएम ने नाथ संप्रदाय और योगी सभा की ओर से उपस्थित सभी पूज्य संतों, योगियों एवं श्रद्धालु जनों का स्वागत और अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि नाथ परंपरा ने सदैव समाज को जोड़ने, साथ लेकर आगे बढ़ने और जीवन को सार्थक ढंग से जीने की प्रेरणा दी है। यही कारण है कि वृहत्तर भारत में उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक सिद्ध महंतों और योगियों की एक लंबी श्रृंखला दिखाई देती है। उनके मठ, मंदिर और धर्मस्थल सनातन धर्म के मूल्यों के प्रति नाथ पंथ की प्रतिबद्धता को प्रस्तुत करते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ को साकार होते हुए देख रहा है। यह हमारा सौभाग्य है कि लगभग एक हजार वर्षों तक विदेशी आक्रांताओं का सामना करते हुए गुलामी की जंजीरों को तोड़कर भारत पुनः अपने वैभव की ओर अग्रसर है। हालांकि, एक समय ऐसा भी आया, जब लोगों को लगने लगा था कि गुलामी हमारी नियति बन गई है, लेकिन भारत की चेतना ने अंगड़ाई ली और देश फिर उठ खड़ा हुआ। आजादी के अमृत काल में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जो अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है, उसमें भारत और सनातन धर्म का कल्याण एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। दोनों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। सनातन धर्म मजबूत होगा तो विश्व मानवता के कल्याण का मार्ग भी सुदृढ़ होगा। इसलिए भारत का सशक्त होना भी आवश्यक है। सीएम योगी ने कहा कि धार्मिक, आध्यात्मिक या राजनीतिक नेतृत्व ऐसे हाथों में होना चाहिए, जो देश को नई दिशा दे सकें और विकास की उन ऊंचाइयों तक पहुंचा सकें, जहां भारत डेढ़-दो हजार वर्ष पहले था। बीते 11 वर्षों में भारत ने एक शानदार यात्रा की है। कभी किसी ने कल्पना की थी कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा? संघर्ष तो था, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण आज डबल इंजन की सरकार डबल ताकत और डबल स्पीड के साथ परिणाम दे रही है। गुलामी के ढांचे टूटे, अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण हुआ और आज सनातन धर्म की ध्वजा पूरे वैभव के साथ फहरा रही है। उन्होंने कहा कि काशी में बाबा विश्वनाथ धाम का कायाकल्प भी इसका जीवंत उदाहरण है। पहले दस श्रद्धालुओं का एक साथ दर्शन कर पाना कठिन था, आज 50 हजार श्रद्धालु एक साथ और प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। अयोध्या धाम में प्रतिदिन डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु आ रहे हैं। कहीं कोई भय नहीं, कोई अफरातफरी नहीं। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। 

इन्वेस्टर्स समिट, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों से यूपी बना देश का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य

यूपी दिवस विशेष प्रदेश में निवेश के नए युग का आगाज, एमओयू से ग्राउंड ब्रेकिंग तक ऐतिहासिक प्रगति इन्वेस्टर्स समिट, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों से यूपी बना देश का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य रिकॉर्ड निवेश से औद्योगिक आधार का विस्तार, कारखानों, रोजगार और उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स हब के जरिए संतुलित क्षेत्रीय विकास राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत समग्र योजना, तेज क्रियान्वयन और जनपद स्तर तक इंटीग्रेशन आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के साथ रक्षा कॉरिडोर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का विस्तार लखनऊ योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बीते पौने नौ वर्षों में विकास की वह यात्रा तय की है, जो वर्ष 2017 से पहले कल्पना से परे थी। एक समय निवेशकों के लिए अविश्वसनीय माना जाने वाला प्रदेश आज देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बन चुका है। वर्ष 2018 की पहली इन्वेस्टर्स समिट से लेकर 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक योगी सरकार ने निवेश को सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्राउंड ब्रेकिंग और क्रियान्वयन के मजबूत मॉडल के जरिए उसे धरातल पर उतारा। प्रदेश में अब तक 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 16 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है, जिनमें से हजारों परियोजनाएं व्यावसायिक रूप से संचालित होकर लाखों युवाओं को रोजगार दे रही हैं।  प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर नीति, आईटी–आईटीईएस, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किए गए सुनियोजित प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की छवि से निकालकर भारत के औद्योगिक विकास का अगुआ बना दिया है। कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णयों के साथ योगी सरकार ने यह साबित किया है कि उत्तर प्रदेश केवल संभावनाओं का नहीं, बल्कि संभावनाओं को परिणाम में परिवर्तित करने वाला राज्य है। भरोसे की बहाली से निवेश की बहार तक उत्तर प्रदेश का कायाकल्प वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान कमजोर कानून-व्यवस्था, निवेशकों की उदासीनता और अधूरी परियोजनाओं से जुड़ी थी। उद्योग लगाने में वर्षों लग जाते थे, फाइलें दफ्तरों में अटकी रहती थीं और रोजगार की तलाश में युवा प्रदेश से बाहर पलायन करने को मजबूर थे। इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक पार्क और आधुनिक लॉजिस्टिक्स की कमी ने राज्य की अर्थव्यवस्था को जकड़ रखा था। वर्ष 2017 में सत्ता संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और गुड गवर्नेंस को प्राथमिकता दी। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘इन्वेस्ट यूपी’ और ‘निवेश सारथी’ जैसे प्लेटफॉर्म्स ने निवेशकों का भरोसा लौटाया। वर्ष 2018 की इन्वेस्टर्स समिट से शुरू हुई यह यात्रा 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक ₹45 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों तक पहुंची है और अब भी निरंतर जारी है।  घोषणाओं से आगे ग्राउंड ब्रेकिंग का मॉडल योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि निवेश सिर्फ एमओयू तक सीमित नहीं रहे। अब तक चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों के जरिए 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली 16,000 से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है। इनमें 8,300 से अधिक परियोजनाओं का व्यावसायिक संचालन प्रारंभ हो चुका है, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। योगी सरकार की औद्योगिक नीति ने कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक, परफ्यूम, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विविध क्षेत्रों को समान रूप से बढ़ावा दिया। पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, मेगा लेदर क्लस्टर, फूड पार्क और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल ने छोटे-मध्यम निवेशकों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा। आज देश के 65% से अधिक मोबाइल फोन उत्तर प्रदेश में बन रहे हैं और लखनऊ-नोएडा जैसे शहर उभरते टेक हब बन चुके हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और गति शक्ति से मिली विकास को रफ्तार प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ उत्तर प्रदेश ने योजना, भूमि उपयोग और परियोजना क्रियान्वयन को एकीकृत किया। एक्सप्रेसवे-आधारित औद्योगिक क्लस्टर, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब, ट्रांस-गंगा सिटी और ग्रेटर नोएडा निवेश क्षेत्र ने राज्य को इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन इकोनॉमी की दिशा में अग्रसर किया। जिला स्तर तक डेटा-आधारित योजना आज उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुकी है। उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर, ब्रह्मोस इंटीग्रेशन सुविधा, अदानी डिफेंस जैसी मेगा यूनिट्स ने राज्य को राष्ट्रीय सुरक्षा उत्पादन का केंद्र बनाया। वहीं डेटा सेंटर नीति, आईटी-आईटीईएस विस्तार और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के जरिए उत्तर प्रदेश डिजिटल और नॉलेज इकॉनमी का नया हब बन रहा है। यह बदलाव केवल निवेश नहीं, बल्कि भविष्य की नौकरियों और तकनीकी नेतृत्व का आधार है। बुंदेलखंड से पूर्वांचल तक विकास का समावेशी मॉडल बुंदेलखंड, पूर्वांचल व तराई क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों की स्थापना साबित करती है कि योगी सरकार का विकास मॉडल केवल पश्चिमी यूपी तक सीमित नहीं। वर्ष 2017 के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय संतुलन के साथ औद्योगिकीकरण साकार हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने यह साबित कर दिया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, सख्त प्रशासन और स्पष्ट विजन से किसी भी राज्य की तस्वीर बदली जा सकती है। यूपी अब बीते कल की चुनौतियों में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं में जी रहा है। एक ऐसा प्रदेश, जो भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने को तैयार है।

पंचायत का अजीब फैसला: दो पत्नियों के बीच पति के तीन-तीन दिन बंटे, रविवार को अवकाश

सैदनगर  यूपी के रामपुर के अजीमनगर थाना क्षेत्र में दो पत्नियों के बीच पति के बंटवारे का एक बेहद ही दिलचस्प मामला सामने आया है। आए दिन होने वाले झगड़े से परेशान पति के लिए पंचायत ने अनोखा समझौता कराया। अब पति सप्ताह में तीन-तीन दिन दोनों पत्नियों के पास रहेगा, जबकि रविवार का दिन पति के लिए सुरक्षित रखा गया है, जिस दिन वह दोनों से दूर एकांत में रहेगा। पंचायत का यह अनूठा फैसला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला नगलिया आकिल गांव का है। यहां मुस्लिम समुदाय के एक युवक की दो पत्नियां हैं। पहली अरेंज मैरिज से और दूसरी लव मैरिज से। दोनों ही पत्नियां पति को अपने पास रखने की जिद पर अड़ी रहती थीं, जिसके कारण घर में आए दिन लड़ाई होती थी। विवाद जब पुलिस तक पहुँचा, तो मामला सुलझाने की जिम्मेदारी गांव की पंचायत को सौंपी गई। पंचायत ने दोनों पक्षों और पति की बात सुनने के बाद बीच का रास्ता निकालते हुए दिनों का बंटवारा कर दिया। पंचायत के फैसले के मुताबिक, पति सप्ताह के शुरुआती तीन दिन (सोमवार, मंगलवार और बुधवार) पहली पत्नी के साथ बिताएगा। वहीं, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार का दिन दूसरी पत्नी के नाम रहेगा। रविवार के दिन पति को 'साप्ताहिक अवकाश' की तर्ज पर दोनों से दूर एकांत में रहने की छूट दी गई है। पंचों ने विशेष परिस्थितियों में एक दिन आगे-पीछे करने की भी गुंजाइश रखी है। इस लिखित समझौते पर पति और दोनों पत्नियों के हस्ताक्षर कराए गए हैं, ताकि भविष्य में फिर से क्लेश न हो। पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले ऐसा ही एक मामला पिछले साल फरवरी में बिहार के पूर्णिया से सामने आया था। वहां एक शख्स ने अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बगैर ही दो शादियां कर ली थीं। हंगामा होने के बाद पति का बंटवारा कर दिया गया था। वह बंटवारा भी एक हफ्ते में आने वाले सात दिनों के आधार पर किया गया था। खास बात यह थी कि बंटवारे में एक दिन पति की छुट्टी भी तय की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला सबसे पहले पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में पहुंचा था। पहली पत्नी ने पुलिस से अपने पति की शिकायत की थी। परिवार परामर्श केंद्र के सदस्यों ने कहा कि इस मामले में युवक को अब जेल जाना होगा। इसके बाद दोनों पत्नियों में झगड़ा शुरू हो गया। इस झगड़े के निपटारे में यह तय हुआ था कि पति हफ्ते में तीन दिन पहली पत्नी और तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ रहेगा। एक दिन अपनी मर्जी से किसी पत्नी के साथ रह सकता है।