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हाईकोर्ट का फैसला: अनुसूचित जाति–जनजाति आरक्षण का लाभ केवल मूल धर्म की स्थिति में मान्य

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) के लाभ का अधिकार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि यह लाभ केवल हिंदू धर्म में रहने वाले व्यक्तियों को ही प्राप्त हो सकता है. हाई कोर्ट के जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने कहा कि धर्म बदलने के बाद भी अनुसूचित जाति का लाभ लेना संविधान के साथ धोखा है. कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए इस पर कानूनी कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए. चार माह में जांच कर कार्रवाई का आदेश हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश दिया है कि धर्म बदल चुके हिंदुओं की ओर से SC लाभ लिए जाने के मामलों की चार माह में जांच करें और जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए. इसके साथ ही महाराजगंज के डीएम को विशेष रूप से निर्देश दिया गया है कि ईसाई धर्म अपना चुके व्यक्ति की ओर से खुद को हिंदू दिखाने के मामले की तीन माह में जांच कर कार्रवाई की जाए. केंद्र व राज्य सरकार को भी निर्देश इसके साथ ही कोर्ट ने निम्न अधिकारियों को इस मामले में कार्रवाई करने के आदेश दिए: 1. भारत सरकार के कैबिनेट सचिव 2. उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव 3. अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग 4. प्रमुख/अपर मुख्य सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग याची जितेंद्र साहनी की याचिका खारिज यह निर्णय जितेंद्र साहनी की याचिका पर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने धर्म परिवर्तन के आरोप में एसीजेएम कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द किए जाने की मांग की थी. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची चाहे तो अधीनस्थ अदालत में डिस्चार्ज अर्जी दे सकता है. कोर्ट ने हिंदू कौन है, इसका स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, आर्य समाजी आदि हिंदू परंपरा के अंतर्गत आते हैं. जो व्यक्ति मुस्लिम, ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं है, वह हिंदू माना जाता है. SC की सुविधाएं केवल हिंदू (और संबंधित धर्मों) को ही दी जाती हैं. धर्म बदलने के बाद व्यक्ति इन लाभों का हकदार नहीं रहता है. सुप्रीम कोर्ट के इस केस का दिया हवाला सुप्रीम कोर्ट के C. Selvarani मामले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि लाभ लेने के उद्देश्य से धर्मांतरण करना संविधान के साथ धोखा बताया गया है. याची पर आरोप है कि उसने गरीबों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया. साथ ही हिंदू देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कीं और धार्मिक शत्रुता भड़काई. ग्राम मथानिया लक्ष्मीपुर एकडंगा के याची पर आरोप है कि उसने जीसस क्राइस्ट की स्पीच के लिए गरीबों का धर्म परिवर्तन कराया है. SC/ST एक्ट का मकसद भी स्पष्ट करते हुए कोर्ट ने कहा कि SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम का उद्देश्य उन समुदायों की रक्षा करना है. जो ऐतिहासिक रूप से जातीय भेदभाव का शिकार रहे हैं, उनके लिए ये एक्ट है. इसलिए इस संरक्षण को उन लोगों तक नहीं बढ़ाया जा सकता, जिन्होंने ऐसा धर्म अपना लिया है जहां जाति व्यवस्था मान्य नहीं है.

आरएसएस के हिंदू सम्मेलन में योगी केंद्र में, क्या यूपी 2027 की राजनीतिक तैयारी शुरू?

लखनऊ बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब आरएसएस की निगाहें उत्तर प्रदेश पर केंद्रित हो गई हैं. बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाने का तानाबाना बुनना शुरू कर दिया है. 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में संघ और बीजेपी हिंदुत्व के एजेंडे को और धार देने की रणनीति पर अभी से काम शुरू कर दिया है ताकि पूरे सूबे में हिंदुत्व का सियासी रंग चढ़ सके. आरएसएस और बीजेपी ने संयुक्त रूप से उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व आधारित माहौल को मजबूती देने की रणनीति बनाई. संघ के साथ बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे को गांव-गांव पहुंचाने का प्लान बनाया है, तो साथ ही लखनऊ में 'विराट हिंदू सम्मेलन' कराने की तैयारी की है. इस सम्मेलन में सीएम योगी आदित्यनाथ भी शिरकत करेंगे, जिसके मायने साफ हैं कि पार्टी ने उन्हें हिंदुत्व का चेहरा बनाकर पेश करने की रणनीति अपनाई है. आरएसएस-बीजेपी की मंथन से निकलेगा अमृत उत्तर प्रदेश में सवा साल के बाद सोमवार को सरकार, संगठन और संघ की समन्वय बैठक हुई. पहली बैठक संघ की भारती भवन के बंद कमरे में हुई, जिसमें संघ के सरकार्यवाह अरुण कुमार, बीजेपी राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष, अतुल लिमये, पश्चिम क्षेत्र प्रचारक महेंद्र शर्मा, पूर्वी क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह और यूपी बीजेपी के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह मौजूद रहे. यह बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली. इसके बाद संघ की सरकार और बीजेपी संगठन के साथ मीटिंग हुई. संघ, सरकार और संगठन की बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ, बीएल संतोष, अरुण कुमार, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी सहित संघ के क्षेत्रीय प्रचारकों के बीच बैठक हुई. इस बैठक में मिशन-2027 को लेकर रणनीति बनी और अब उसे अमलीजामा पहनाने का काम शुरू कर दिया गया है. यूपी से फीडबैक लेकर वापस दिल्ली लौटे बीएल संतोष ने प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ बैठक की. योगी के बहाने हिंदुत्व को धार देने का प्लान संघ के 100 साल पूरे हो गए हैं. संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है. ऐसे में संघ और बीजेपी जनवरी 2026 में लखनऊ में 'विराट हिंदू सम्मेलन' करने जा रहे हैं. इस कार्यक्रम में सीएम योगी भी शिरकत करेंगे. माना जा रहा है कि इस रैली के जरिए योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्ववादी छवि को और भी मजबूत कर पेश करने की रणनीति है. सीएम योगी को केंद्र में रखकर विशेष रूप से रणनीति तैयार की जा रही है. इसी बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इन तमाम कार्यक्रमों में मुख्य चेहरे के तौर पर आगे रखने का भी प्लान है और उन्हीं के बहाने हिंदुत्व को धार देने की कोशिश है. योगी आदित्यनाथ सिर्फ अपने काम से ही नहीं बल्कि अपने लिबास से भी हिंदुत्व के रंग में रचे-बसे नजर आते हैं. यूपी में 'विराट हिंदू सम्मेलन' 2027 से पहले संघ के शताब्दी वर्ष के मद्देनजर राज्यभर में बड़े पैमाने पर हिंदू सम्मेलनों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी. इसी क्रम में लखनऊ में होने वाले 'विराट हिंदू सम्मेलन' को शक्तिशाली राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है. बीजेपी और संघ की साझा रणनीति से एक बात साफ है कि यूपी में विकास को आधार बनाकर हिंदुत्व के भावनात्मक मुद्दों को भुनाने की तैयारी है. लखनऊ में होने वाला विराट हिंदू सम्मेलन इस रोडमैप का केंद्रबिंदु माना जा रहा है. मिशन 2027 के हिंदुत्व को धार देने का प्लान जनवरी में राम मंदिर के कैलेंडर और तस्वीर के साथ संघ और बीजेपी के कार्यकर्ता लोगों से जनसंपर्क करते हुए घर-घर पहुंचने की कोशिश करेंगे. इसके बाद 20 फरवरी तक हिंदू सम्मेलन शुरू होंगे, जिसमें हिंदू समाज को एकजुट करने, खासकर दलित, अति पिछड़े और पिछड़े वर्गों तक पहुंच कर संघ और हिंदुत्व को लेकर सभी शहरों में कार्यक्रम करेंगे. एक कार्यक्रम लखनऊ में भी प्लान किया जा रहा है जो विराट हिंदू सम्मेलन के तौर पर होगा. इसमें भाजपा और संघ के कार्यकर्ता जुड़ेंगे और उनकी कोशिश पिछड़े और दलित परिवारों तक पहुंचने की होगी. इस समीक्षा में विराट हिंदू सम्मेलन की तैयारियां और विभिन्न समूहों से मिले फीडबैक शामिल रहे. यूपी में भाजपा–संघ ने राजनीतिक समीकरणों को साधने की कवायद शुरू कर दी है. सपा के पीडीए का क्या काउंटर प्लान संघ और बीजेपी के इन कार्यक्रमों को सपा के पीडीए की काट के तौर पर देखा जा रहा है. इस संबंध में बैठक में पीडीए के काउंटर प्लान पर चर्चा हुई. सपा ने 2024 में पीडीए फॉर्मूले के जरिए बीजेपी को झटका दिया था. 2024 में यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सपा 37 और कांग्रेस 6 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. वहीं, बीजेपी सिर्फ 33 सीट पर सिमट गई थी. 2019 की तुलना में उसे 31 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था. बीजेपी का सियासी समीकरण बिगड़ गया था, जिसके बाद से योगी आदित्यनाथ लगातार 'बंटोगे तो कटोगे' के नारे के जरिए हिंदुओं को एकजुट करने में लगे हैं. बीजेपी और संघ का प्लान है कि दलित, अति पिछड़े और पिछड़े वर्गों तक अपनी पहुंच बनाई जाए. संघ और हिंदुत्व गांव-गांव ही नहीं बल्कि तमाम शहरों में कार्यक्रम करेंगे. इस तरह बीजेपी अलग-अलग जातियों में बिखरे हिंदू वोटों को फिर से एक छतरी के नीचे लाने के लिए विराट हिंदू सम्मेलन की रूप रेखा तैयार कर रही है. माना जा रहा है कि इस दांव से सपा के विनिंग फॉर्मूला पीडीए को काउंटर करने की रणनीति है.

यूपी पुलिस एसआई एग्जाम डेट जारी: उम्मीदवार मार्च 2026 में दें तैयारी का बड़ा मुकाबला

लखनऊ  उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने सब-इंस्पेक्टर (SI) पद भर्ती परीक्षा की तिथि जारी कर दी है। आयोग की ओर से जारी नोटिस के अनुसार यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा का आयोजन 14 मार्च और 15 मार्च 2026 को किया जाएगा। जिन उम्मीदवारों ने भर्ती के लिए आवेदन किया है वे आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाकर परीक्षा तिथि नोटिस चेक कर सकते हैं। इस भर्ती प्रकिया के जरिए कुल 4543 पदों पर उम्मीदवारों की नियुक्ति होगी। जिसमें उप निरीक्षक नागरिक पुलिस पद, प्लाटून कमांडर पीएसी/उप निरीक्षक सशस्त्र पुलिस पद, प्लाटून कमाण्डर/उप निरीक्षक, विशेष सुरक्षा बल पद और महिला उप निरीक्षक ना.पु. (पीसी) पद शामिल हैं। वैकेंसी डिटेल्स- उप निरीक्षक नागरिक पुलिस- 4242 पद प्लाटून कमांडर पीएसी/उप निरीक्षक सशस्त्र पुलिस- 135 पद प्लाटून कमाण्डर/उप निरीक्षक, विशेष सुरक्षा बल- 60 पद महिला उप निरीक्षक ना.पु. (पीसी)- 106 पद लिखित परीक्षा लिखित परीक्षा ओएमआर शीट पर होगी। यह 400 अंकों की होगी। 2 घंटे का समय होगा। कुल प्रश्न 160 होंगे। सामान्य हिंदी, मूलविधि/संविधान/सामान्य ज्ञान, संख्यात्मक व मानसिक योग्यता परीक्षा, मानसिक अभिरुचि परीक्षा/ बुद्धिलब्धि परीक्षा/ तार्किक परीक्षा से 40-40 प्रश्न आएंगे। चारों सेक्शन 100-100 नंबर के होंगे।प्रत्येक विषय में 35 फी प्रदी अंक और कुल 50 प्रतिशत अंक प्राप्त न करने वाले अभ्यर्थी भर्ती के पात्र नहीं होंगे। फिजिकल टेस्ट शारीरिक दक्षता परीक्षा के संभावित नियम इस प्रकार है- पुरुषों के लिए – 4.8 किमी की दौड़ 28 मिनट में पूरी करनी होगी। महिलाओं को 16 मिनट में 2.4 किमी दौड़ना होगा। सफल तैयारी के लिए जरूरी टिप्स परीक्षा की तारीख अब तय हो गई है, इसलिए उम्मीदवारों को एक स्मार्ट स्ट्रैटिजी के साथ अपनी तैयारी करनी चाहिए। नियमित अभ्यास और टाईम मैनेजमेंट: सबसे पहले सभी विषयों को उनकी ताकत और कमजोरी के आधार पर विभाजित करते हुए एक स्टडी प्लान बनाएं। परीक्षा हॉल में टाईम मैनेजमेंट में महारत हासिल करने के लिए नियमित रूप से मॉक टेस्ट दें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों पर ध्यान: परीक्षा के पैटर्न और कठिनाई स्तर को समझने के लिए कम से कम 5 से 10 पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करें।  

गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री करेंगे अध्यक्षता, एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी होंगे मुख्य अतिथि

गोरखपुर महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक सप्ताह समारोह का भव्य शुभारम्भ गुरुवार (4 दिसंबर) को सुबह 9:30 बजे से गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होगा। मुख्य अतिथि के रूप में राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट योगेंद्र डिमरी उपस्थित रहेंगे।  महाराणा प्रताप इण्टर कॉलेज के क्रीडांगन में आयोजित यह कार्यक्रम पूर्वांचल का अति प्रतिष्ठित एवं सबसे बड़ा अकादमिक कार्यक्रम है। 7 दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में विविध प्रकार की अकादमिक एवं क्रीड़ा प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। अकादमिक प्रतियोगिताओं में गोरखपुर मंडल के 125 से अधिक शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान प्रतिभाग करते हैं, जबकि भाषण एवं खेल-कूद की प्रतियोगिताओं जैसे वॉलीबाल, बास्केटबाल में पूरे प्रदेश से प्रतिभागी अपनी प्रतिभागिता सुनिश्चित करते हैं।  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संस्थापक सप्ताह समारोह संचालन समिति के सदस्य डॉ. नितीश शुक्ल ने बताया कि बुधवार को कार्यक्रम स्थल पर मुख्य अतिथि और समारोह अध्यक्ष के संबोधन के बाद मुख्य अतिथि शिक्षा परिषद के दर्जनों संस्थाओं के विद्यार्थियों द्वारा निकाली जाने वाली भव्य शोभा यात्रा की सलामी लेंगे। शोभा यात्रा महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद परिसर से निकलकर अपने निर्धारित मार्ग से होते हुए जिला परिषद रोड पर स्थित शताब्दी द्वार से पुनः महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद परिसर में प्रवेश करेगी। उद्घाटन समारोह को भव्य बनाने के लिए एक हजार से अधिक शिक्षक कर्मचारी एवं स्वयं सेवक लगे रहेंगे। शोभा यात्रा के दौरान अनुशासन, श्रेष्ठ पथ संचलन के साथ-साथ जन-जागरण को प्रदर्शित करने वाली झांकिया एवं नारे मुख्य आकर्षण होंगे।

संदिग्ध घुसपैठियों की सूची तैयार करने के निर्देश, घुसपैठियों को रखने के लिए बनेगा डिटेंशन सेंटर

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों पर निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 17 नगर निकायों को आदेश दिया है कि वे अपने यहां काम करने वाले सभी संदिग्ध विदेशी नागरिकों की तत्काल सूची बनाएं। सरकार का स्पष्ट इरादा है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे यूपी में बसने की कोशिश करने वाले किसी भी घुसपैठिए को बख्शा न जाए। डिटेंशन सेंटर की तैयारी तेज, हर मंडल में होगी व्यवस्था राज्य भर के कमिश्नरों और पुलिस महानिरीक्षकों को पहले चरण में डिटेंशन सेंटर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इन सेंटरों में अवैध रूप से रह रहे व्यक्तियों को तब तक रखा जाएगा जब तक उन्हें उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी न हो जाए। जिलों में खाली सरकारी भवन, सामुदायिक केंद्र, पुलिस लाइन और थाने को चिन्हित किया जा रहा है। इन स्थानों को हाई सिक्योरिटी जोन की तरह विकसित किया जाएगा ताकि घुसपैठियों को निगरानी में रखा जा सके। दस्तावेजों की जांच से पता चलेगा कौन है असली और कौन घुसपैठिया सरकार ने पाया है कि कई रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक भारतीय पहचान पत्र बनवाकर खुद को स्थानीय नागरिक दिखाने की कोशिश कर रहे थे। इसी कारण सभी संदिग्ध दस्तावेजों का बड़े स्तर पर सत्यापन शुरू किया गया है। उत्तर प्रदेश में भी अन्य राज्यों की तरह डिटेंशन सेंटर को प्रशासन और पुलिस की संयुक्त निगरानी में संचालित किया जाएगा।

फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में शिवानी का अभिनव प्रयोग देश-दुनिया में लिख रहा सफलता की नई कहानी

शिवानी तथा नीलम के स्टार्टअप्स को योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सराहा, राष्ट्रीय स्तर पर दिलाई पहचान लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने की पॉलिसी प्रदेश में महिला उद्यमियों को सशक्त करने का माध्यम बन रही है। प्रदेश में ऐसे कई उदाहरण हैं जो महिला उद्यमिता और नवाचार के नए प्रतिमान गढ़ रहे हैं। यूं तो प्रदेश के हर जिले में सफलता की ऐसी कहानियां आमतौर पर दिख जाएंगी, मगर इसमें विशेष उल्लेख है बुंदेलखंड की महिलाओं का, जिनकी सफलता नई कहानियां लिखने का काम कर रही है। झांसी की कई महिलाओं के स्टार्टअप्स इस समय देश और प्रदेश में चर्चा के केंद्र में हैं, जिनमें से एक है शिवानी के बेर से बने प्रोडक्ट तो दूसरा है नीलम की कबाड़ से बनी कलाकृतियां। इन दोनों को ही सरकार की ओर से सम्मान और प्रोत्साहन प्रदान किया गया है। शिवानी ने बेर से बनाए अनूठे प्रोडक्ट झांसी जिले की रहने वाली शिवानी बुंदेला ने फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए बेर के ऐसे-ऐसे प्रोडक्ट बनाए हैं, जो किसी का भी ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। बेर से जूस, जैम, चॉकलेट और टॉफी बना चुकी शिवानी अभी हाल के दिनों में एक नया प्रोडक्ट सामने लेकर आयी हैं, जो है बेर से बना स्नैक्स। शिवानी के स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में झांसी स्मार्ट सिटी, उद्यान विभाग और एमएसएमई ने काफी मदद प्रदान की। जी 20 के आयोजन में शिवानी के स्टार्टअप को गिफ्टिंग पार्टनर बनाया गया था और काफी सराहना मिली थी। शिवानी ने अपने ब्रांड को अब्रोसा नाम दिया है। शिवानी लगभग 250 किसानों से बेर खरीद रही हैं जबकि उनके स्टार्टअप के माध्यम से 20 से अधिक महिलाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीनों संस्करणों में शिवानी हिस्सेदारी निभा चुकी हैं। अभी कुछ समय पहले शिवानी को यूनाइटेड नेशन्स एनवायरनमेंट प्रोग्राम के तहत एग्रो फॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी मिली है। फिलहाल इनके क्लाइंट्स में आदित्य बिरला समूह, एनबीसीसी, इरकॉन, ह्युंडई, एमिटी विश्वविद्यालय, एसकेएन, अवाडा जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों का नाम शुमार है।  बेकार को आकार देकर नीलम ने बनाई पहचान बेकार सामानों से कलाकृतियां तैयार करने वाली झांसी की नीलम सारंगी के स्टार्टअप बेकार के आकार को उत्तर प्रदेश सरकार ने सम्मानित करने के साथ ही प्रोत्साहित भी किया है। झांसी नगर निगम के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान के अंतर्गत निष्प्रयोज्य सामानों से पार्कों में सुंदर कलाकृतियां तैयार करने का काम किया। योगी सरकार ने नीलम सारंगी को अनूठे स्टार्टअप के लिए नवदेवी सम्मान प्रदान किया है। नीलम का स्टार्टअप इस समय बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंक्यूबेशन सेंटर में पंजीकृत है। नीलम ने अपने स्टार्टअप के साथ उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो, स्टार्टअप महाकुंभ और राइज हैकथान जैसे आयोजनों में हिस्सेदारी निभाई है। नीलम इस समय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आत्मनिर्भरता का प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। महिलाओं को मिल रही आत्मनिर्भरता की प्रेरणा शिवानी बुंदेला ने बताया कि उनके स्टार्टअप को बढ़ावा देने में सरकार और प्रशासन ने काफी मदद की है। उनके स्टार्टअप के माध्यम से बेर से बने उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है और बर्बाद होने वाले बेर को बचाने की कोशिश की जा रही है। बहुत सारी महिलाओं को इससे रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। वहीं, नीलम सारंगी के अनुसार नगर निगम, स्मार्ट सिटी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके स्टार्टअप 'बेकार को आकार' को प्रोत्साहित करने में मदद की। अब कोशिश है कि महिलाओं को यह हुनर सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित किया जाए।

योगी सरकार के कृषि मॉडल से अन्नदाता खुशहाल, बिचौलिए खत्म होने से किसानों को प्रत्यक्ष लाभ

लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने किसानों की आय में वृद्धि के लिए बीज से बाजार तक एक मजबूत और एकीकृत मूल्य श्रृंखला का निर्माण किया है। अन्नदाता को फसल उगाने से लेकर बाजार तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने पिछले साढ़े 8 वर्ष में बड़े फैसले लिए हैं। उत्तर प्रदेश में आधुनिक और किसान-केंद्रित मॉडल बनाया गया है। किसानों की आय में वृद्धि के लिए मूल्य श्रृंखला का निर्माण डिजिटल युग में किसान पीछे न छूट जाएं इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष ध्यान दिया है। सरकार के प्रयासों से कृषि विकास दर वर्ष 2016-17 में 8.6% से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 17.7% हो गयी है। राज्य प्रति वर्ष 400 लाख टन फल एवं सब्जियों का उत्पादन करते हुए देश में प्रथम स्थान पर है। वर्तमान सरकार केवल अनाज उगाने तक नहीं, बल्कि किसानों को लगातार आय के नए साधन विकसित करने की पूरी व्यवस्था बना रही है।  मोबाइल ऐप के द्वारा किसानों को निशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिल रहा है। किसानों के खेत की मिट्टी का जो स्वास्थ्य कार्ड बनता है उसमें उनके मिट्टी के बारे में पूरी जानकारी रहती है। एमएसपी बढ़ने से किसानों की आय सुनिश्चित किसानों के लिए सबसे बड़ा बदलाव योगी सरकार द्वार एमएसपी की समय समय पर समीक्षा करना है। इस बार साधारण धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,369 रुपये प्रति क्विंटल तथा ग्रेड ए धान का मूल्य 2,389 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 69 रुपये अधिक है। अगेती प्रजाति के गन्ने का मूल्य  400 रुपये प्रति कुंतल तथा सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 390 रुपये प्रति कुंतल किया गया है। इससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है। कृषि योजनाओं से किसानों को लाभ उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए यूपी एग्रीस प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसका लक्ष्य खेत की पैदावार बढ़ाना, किसानों को आधुनिक तरीकों से जोड़ना और गांवों में कृषि-आधारित रोजगार के नए रास्ते खोलना है। मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत किसानों को सस्ती ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों के हित में किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा और बड़ा कर दिया गया है। इस साल 25 लाख नए किसानों को KCC देने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही 50% सब्सिडी योजना चलाई जा रही है। इससे ट्रैक्टर, कटाई मशीन, ड्रोन और फसल अवशेष प्रबंधन उपकरण आधी कीमत में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को बाजार एवं मौसम की प्रतिदिन जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को बाजार भाव एवं मौसम की जानकारी प्रतिदिन निशुल्क उपलब्ध करायी जा रही है। किसानों का रजिस्ट्रेशन करते हुए 1.45 करोड़ से ज्यादा फार्मर कार्ड आईडी निर्गत की गयी है। महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सीडलिंग का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे लगभग 60 हजार महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। लखनऊ में 251 करोड़ की लागत से भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी के नाम पर एक सीड पार्क की स्थापना की जा रही है। उत्तर प्रदेश में खरीद केंद्रों की संख्या में वृद्धि   योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में 4000 से अधिक सक्रिय खरीद केंद्रों की स्थापना अपने आप में एक  क्रांतिकारी कदम है। इनमें से 35 से 40 फीसद केंद्र उन ब्लॉकों में खोले गए, जहां दशकों से किसानों को कोई स्थाई खरीद सुविधा नहीं थी। अब गांव के पास ही खरीद व्यवस्था होने से परिवहन खर्च कम हुआ, फसल की त्वरित बिक्री हुई और किसानों को बाजार भाव में उतार-चढ़ाव का डर नहीं रहा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की गन्ना मूल्य और भुगतान नीतियों से बढ़ा किसानों का आत्मविश्वास

किसानों की सहभागिता से गांवों तक पहुंच रही पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था एथेनॉल उत्पादन, मिल विस्तार और निवेश से चीनी उद्योग में आया ऐतिहासिक बदलाव बागपत, उत्तर प्रदेश में किसानों की समृद्धि और सीधी सहभागिता पर केंद्रित योगी आदित्यनाथ सरकार की नीति अब जमीन पर अपना प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखा रही है। सोमवार को मीतली गांव में हुई पहली चौपाल के बाद बुधवार को बागपत के हिसावदा गांव में आयोजित कृषि चौपाल किसानों की सक्रिय भागीदारी और आत्मविश्वास का नया प्रमाण बनी। चौपाल में करीब साढ़े तीन सौ किसानों ने हिस्सा लिया। किसान खुले तौर पर अपने अनुभव और सुझाव साझा करते दिखे और यह भरोसा प्रकट किया कि उनकी बात सीधे सरकार तक पहुंच रही है। चीनी उद्योग और गन्ना विकास विभाग की उपलब्धियों का सकारात्मक असर अब गांवों के आर्थिक माहौल में देखने को मिल रहा है। कभी मिलों के बंद होने और भुगतान में देरी से परेशान रहने वाले किसान अब समय पर भुगतान पाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार द्वारा गन्ना मूल्य में निरंतर वृद्धि किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनी है। 2017 से अब तक गन्ना मूल्य क्रमिक रूप से बढ़ाया गया जिससे उत्पादन उत्साह और किसानों का लाभ दोनों बढ़े। पहली चौपाल में किसानों ने जहां सरकार के प्रयासों की सराहना की थी वहीं हिसावदा की चौपाल में किसान अधिक सुझावोन्मुख होकर साझेदारी का भाव प्रदर्शित करते दिखे। किसानों ने गन्ना कटाई की समयबद्धता और पर्ची जारी करने की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ठोस फीडबैक दिया। इस आयोजन की सबसे विशेष बात यह रही कि चौपाल पूरी तरह से  किसानों द्वारा संचालित रही। यह परिवर्तन सरकार और किसानों के बीच भरोसे की नई कड़ी का संकेत देता है जहां किसान सिर्फ लाभार्थी नहीं बल्कि नीति निर्धारण के सहभागी बन रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत, हापुर, शामली और मुजफ्फरनगर के गांवों में हो रही इन चौपालों का परिणाम यह है कि सरकार किसानों की हर बात को सुन रही है और उसके आधार पर अगले कदम निर्धारित कर रही है। चीनी मिलों की क्षमता विस्तार, सीबीजी संयंत्रों की स्थापना और गन्ना आधारित एथेनॉल उत्पादन में उत्तर प्रदेश उदाहरण बन चुका है। वर्ष 2017 में एथेनॉल आसवनी की संख्या 61 थी जो 2025 में बढ़कर 97 हो गई है, जबकि चार नई आसवनियां पाइपलाइन में प्रस्तावित हैं। एथेनॉल उत्पादन 41.28 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर तक पहुंचा है जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष मजबूती मिली है। किसानों के हितों में भुगतान व्यवस्था में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 2007 से 2017 के बीच गन्ना भुगतान 147346 करोड़ रहा जबकि 2017 से अब तक यह बढ़कर 290225 करोड़ हो गया है। यह 142879 करोड़ की अतिरिक्त भुगतान वृद्धि दर्शाता है जो सीधे किसानों के खातों में पहुंची। वर्ष 2016-17 में गन्ना क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर था जो वर्तमान में बढ़कर 29.51 लाख हेक्टेयर हो गया है। गन्ना मूल्य अब अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल प्रस्तावित है जिससे किसानों को 3000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान लाभ प्राप्त होगा। आज उत्तर प्रदेश का यह ग्रामीण विकास मॉडल किसानों की साझेदारी और सीधी संवाद प्रणाली पर आधारित है। बागपत से उठती यह आवाज साबित करती है कि किसान अब बिचौलियों के भरोसे नहीं बल्कि स्वयं सरकारी नीति निर्धारण में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं और योगी सरकार की पहल से गांव-गांव में बदलावों की यह बयार वास्तविक विकास का आधार बन रही है।

प्रमुख परियोजनाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग का माध्यम है सीएम डैशबोर्ड, स्वयं मुख्यमंत्री करते हैं नियमित समीक्षा

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की शासन प्रणाली ने अभूतपूर्व रूप से नई दिशा व गति प्राप्त की है। उनके कुशल मार्गदर्शन व निर्णायक प्रशासनिक दृष्टि के परिणामस्वरूप राज्य का अभिनव सीएम डैशबोर्ड सिस्टम वर्तमान में त्वरित, पारदर्शी एवं उत्तरदायी शासन प्रणाली का आधार स्तंभ बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस डैशबोर्ड के माध्यम से प्रमुख परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर रहे हैं, जिसके चलते विकास कार्यों में उल्लेखनीय तेजी, उच्च गुणवत्ता और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।                        योगी सरकार द्वारा क्रियान्वित डिजिटल सुशासन की नीतियों के अंतर्गत विकसित यह डैशबोर्ड डाटा इंटीग्रेशन, प्रदर्शन निगरानी, विजुअलाइजेशन, रियल टाइम अपडेट, जिलेवार विश्लेषण तथा नागरिक सहभागिता जैसी उन्नत विशेषताओं से सुसज्जित है। यह जटिल आंकड़ों को सरल तथा दृश्य रूप में प्रस्तुत कर जिलों में प्रशासनिक दक्षता, लक्ष्य-आधारित कार्य संस्कृति और जवाबदेही को सुदृढ़ करता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में सीएम डैशबोर्ड उत्तर प्रदेश के शासन को वैज्ञानिक, पारदर्शी, परिणामोन्मुख तथा उत्तरदायी बनाते हुए सुशासन का ऐसा आदर्श प्रस्तुत कर रही है जिसे आज देशभर में एक नए मॉडल के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। जिलों के प्रदर्शन का आकलन कर जारी होती है रैंकिंग सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की जिलों में मासिक समीक्षा की जाती है। यह प्रणाली विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, राजस्व संचालन और कानून-व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर जिलों के प्रदर्शन का आकलन करती है। हर माह जिलों की रैंकिंग जारी होती है, जिससे प्रशासन के विभिन्न विभागों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। प्रक्रिया के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को प्रोत्साहित किया जाता है, जबकि कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को सुधार के लिए निर्देश दिए जाते हैं। तत्काल सुधार के लिए भी निर्देश जारी करने का माध्यम सीएम डैशबोर्ड में स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, ग्रामीण सड़कें तथा सरकारी योजनाओं की पहुंच जैसे महत्वपूर्ण मापदंड शामिल हैं। इसका लक्ष्य केवल भौतिक संरचनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग जैसे किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं के समग्र उत्थान को सुनिश्चित करना है। योजनाओं की लाभार्थियों तक पहुंच, उनकी प्रगति और वास्तविक प्रभाव का सीधा मूल्यांकन इस प्रणाली से किया जाता है। प्रणाली की गुणवत्ता नियंत्रण को सुनिश्चित करने के लिए सीएम डैशबोर्ड को आईजीआरएस पोर्टल से भी जोड़ा गया है। खास बात यह है कि शिकायत निस्तारण के बाद यदि नागरिक असंतोष जताते हैं, तो इसके माध्यम से अधिकारियों को तत्काल सुधार के लिए निर्देश भी दिए जाते हैं। अन्य राज्यों के लिए मॉडल बना यूपी का डैशबोर्ड सीएम डैशबोर्ड और आईजीआरएस का प्रभावी प्रदर्शन अन्य राज्यों को भी ऐसे ही उन्नत एवं परिणामोन्मुख प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार ने सक्रिय निरीक्षण व अध्ययन के बाद योगी सरकार के आईजीआरएस और सीएम डैशबोर्ड सिस्टम के मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया है। दिल्ली के अधिकारियों ने इस प्रणाली को तकनीकी रूप से उन्नत, प्रभावशाली और शिकायतों के त्वरित, पारदर्शी व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में अत्यंत कारगर पाया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने विकास कार्यों की अधिक प्रभावी निगरानी तथा प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने हेतु इस मॉडल की विशेष सराहना भी की है।

सौर ऊर्जा क्रांति के दौर से गुजर रहा है उत्तर प्रदेश

रोशन हुआ उत्तर प्रदेश : सौर ऊर्जा में योगी सरकार की ऐतिहासिक छलांग सौर ऊर्जा क्रांति के दौर से गुजर रहा है उत्तर प्रदेश  ऊर्जा बचत और आर्थिक लाभ का नया अध्याय, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत… लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की सौर ऊर्जा नीति से उत्तर प्रदेश आज ऊर्जा क्रांति के दौर से गुजर रहा है। प्रदेश की कुल सौर ऊर्जा क्षमता अब 1003.64 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जिससे वार्षिक बिजली बिल में औसतन 40 से 60 प्रतिशत तक की बचत होने का अनुमान है। यह बचत बड़े उद्योगों से लेकर ग्रामीण उपभोक्ता तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट सन्देश है कि विकसित यूपी 2047 विजन के अंतर्गत आने वाले 22 वर्षों में प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जाये। सौर ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी बचत लंबी अवधि में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी। वहीं इससे बिजली खपत का भार भी काफी हद तक कम हो जाएगा। रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत… प्रदेश में सौर ऊर्जा के बढ़ते दायरे के साथ लगभग 50 हजार युवाओं को तकनीशियन, इंस्टॉलर और सर्विस स्टाफ के तौर पर प्रत्यक्ष रूप से रोजगार हासिल हुआ। रोजगार के अवसर गांव और कस्बों तक पहुंचे हैं। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ है कि पलायन में कमी आई है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। इसी के साथ, ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में लोड शेडिंग में कमी दर्ज की जा रही है। पहले जहां बिजली कटौती के कारण छोटे व्यवसायों जैसे मिल, वेल्डिंग और प्रोसेसिंग यूनिट प्रभावित होते थे, वहीं अब इनकी आय में 10 से 15 प्रतिशत तक का सुधार हुआ है। सौर ऊर्जा गांव के प्रगति की एक प्रमुख धुरी बनती दिख रही है।  ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर प्रदेश उत्तर प्रदेश अब ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसमें सौर ऊर्जा की भूमिका को और सशक्त करने के प्रयास जारी हैं। जैसे-जैसे सौर ऊर्जा का दायरा बढ़ेगा वैसे-वैसे परंपरागत बिजली आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी और इसका लाभ उद्योग और छोटे व्यवसायों को मिलेगा। योगी आदित्यनाथ सरकार का विश्वास है कि आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा प्रदेश की आर्थिक रीढ़ साबित होगी और उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी। सूर्य की रोशनी पर आधारित यह परिवर्तन अब कल्पना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई देने वाली वास्तविकता है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऊर्जा नीति को लोककल्याण और आर्थिक उन्नति के साथ जोड़ा है।  सौर ऊर्जा से संबंधित आंकड़े… – प्रदेश के 2.90 लाख घरों में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित – कुल 2,600 करोड़ रुपये का अनुदान – सोलर सेक्टर में अब तक 50,000 नए रोजगार सृजित