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संपत्ति कर वसूली को लेकर सख्ती, नगर निगम ने कई व्यावसायिक भवन सील किए

रायपुर राजधानी के जोन क्रमांक 10 में बकाया संपत्ति कर की वसूली को लेकर नगर निगम ने सख्त कदम उठाया है। कई वर्षों से संपत्ति कर जमा नहीं करने वाले बड़े बकायादारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके संस्थानों को सील की गई है। इस कार्रवाई के बाद बकायादारों में हड़कंप मच गया है। नगर निगम ने पूर्व में संबंधित बकायादारों को डिमांड बिल, डिमांड नोटिस एवं अंतिम नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद निर्धारित समय सीमा तक संपत्ति कर जोन कार्यालय में जमा नहीं किया गया। इसके बाद निगम प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए बकायादारों के व्यावसायिक परिसरों को ताला लगाकर सीलबंद करने की कार्रवाई की। नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बकाया कर जमा नहीं करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने सभी करदाताओं से अपील की है कि वे समय पर संपत्ति कर जमा कर अनावश्यक कार्रवाई से बचें।

साय सरकार का अहम फैसला, छत्तीसगढ़ में खुलेंगे 4 नए उप पंजीयक कार्यालय

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने आम नागरिकों को रजिस्ट्री और पंजीयन से जुड़ी सेवाएं अधिक सहज और सुलभ बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रदेश के तीन जिलों में चार नए उप पंजीयक कार्यालय  खोलने के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी है. इस निर्णय से अब लोगों को रजिस्ट्री के लिए जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. इन चार स्थानों पर खुलेंगे नए कार्यालय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1908 के तहत स्वीकृत किए गए नए कार्यालय निम्नलिखित क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे:     भखारा: जिला धमतरी     लवन: तहसील मुख्यालय, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा     सकरी: जिला बिलासपुर     राजकिशोर नगर: जिला बिलासपुर समय और धन की होगी बचत इन नए कार्यालयों के खुलने से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी. अब तक लोगों को छोटे से पंजीयन कार्य के लिए दूरस्थ जिला मुख्यालयों तक जाना पड़ता था, जिससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होता था. नए केंद्रों से पंजीयन प्रक्रिया में न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि जिला मुख्यालयों में होने वाली भीड़ से भी मुक्ति मिलेगी. सुशासन की दिशा में सशक्त कदम: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय को सुशासन का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा, “हमारी सरकार का उद्देश्य शासन की सेवाओं को नागरिकों के दरवाजे तक पहुँचाना है. नए कार्यालयों की स्वीकृति से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति आएगी और आमजन को कार्यालयों की दौड़-भाग से राहत मिलेगी.” पंजीयन विभाग के ’10 क्रांतिकारी सुधार’ भी होंगे लागू वित्त एवं वाणिज्य कर (पंजीयन) मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि इन नए कार्यालयों में भी विभाग द्वारा शुरू किए गए 10 हाई-टेक सुधारों का लाभ मिलेगा. पंजीयन विभाग की आधुनिक सेवाएं:     घर बैठे रजिस्ट्री: अब ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग और प्रक्रियाओं की सुविधा.     ऑटो डीड जनरेशन: दस्तावेजों को तैयार करने की स्वचालित व्यवस्था.     स्वतः नामांतरण: रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया शुरू होना.     WhatsApp और डिजीलॉकर: व्हाट्सएप आधारित सेवाएं और डिजिटल दस्तावेजों का एकीकरण.     कैशलेस पेमेंट: पारदर्शी और सुरक्षित भुगतान के लिए एकीकृत व्यवस्था. मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि सरकार नागरिक सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन और ऑनलाइन सर्च जैसी सुविधाओं से अब धोखाधड़ी की संभावना भी खत्म होगी.

कालीबाड़ी और पेंशनबाड़ा में बनेगा नया चार मंजिला हॉस्टल

रायपुर,. प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने किया निरीक्षण राजधानी के सड्डू में बन रहे ‘‘ज्ञानोदय हब’’ का शुभारंभ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय करेंगे। आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग विकास विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे इस हब का उ्ददेश्य शिक्षा के जरिए राष्ट्र निर्माण की बुनियाद मजबूत करना है। ज्ञानोदय हब के शुभारंभ से राजधानी रायपुर में अनुसूचित जाति, जनजातीय, ओबीसी और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर मिलेगा।  प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने आज ज्ञानोदय हब सहित विभाग द्वारा संचालित किए जा रहे हॉस्टलों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को कालीबाड़ी और पेंशनबाड़ा स्थित पुराने छात्रावासों के स्थान पर आधुनिक सुविधाओं से लैस नया चार-चार मंजिला हॉस्टल भवन तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड्डू और डूंडा में तैयार पांच हॉस्टल भवन का भी निरीक्षण किया। यहां लगभग एक हजार बच्चों को हॉस्टल में रहने के लिए सुविधाएं विकसित की गई है।  प्रमुख सचिव  बोरा ने बताया कि राजधानी रायपुर में बनाए जा रहे इन हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थियों को सिविल सर्विसेस, एनडीए, क्लेट, नेट, स्लेट, पीटी, पीएमटी, आईआईटी, मेडिकल सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। सढ्ढू का पूरा परिसर लगभग 18 एकड़ तथा डूंडा का हॉस्टल परिसर 10 एकड़ से अधिक भूमि में विकसित किया गया है।  गौरतलब है कि नवनिर्मित हॉस्टलों में एकलव्य ड्रापर छात्रों के लिए कोचिंग हेतु 500 सीटर, ओबीसी बालक-बालिकाओं हेतु सौ-सौ सीटर, अनुसूचित जनजाति के बालिकाओं के व्यवसायिक शिक्षा, शोध एवं अन्य उच्च शिक्षा हेतु 250 सीट शामिल है। इसकी लागत 35 करोड़ 30 लाख 64 हजार रूपए है। इस मौके पर संयुक्त सचिव  बी.एस. राजपुत, अपर संचालक  आरएस भोई, ईई  त्रिदीप चक्रवर्ती, सहायक आयुक्त  शरदचन्द्र शुक्ला सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रभात मिश्रा बने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष, राज्य शासन ने जारी किया आदेश

रायपुर. प्रभात मिश्रा बने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष, राज्य शासन ने जारी किया आदेश छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य की राजभाषा को और ज्यादा सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शासन की ओर से प्रभात मिश्रा को छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसे लेकर संस्कृति विभाग की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया है। जारी आदेश के मुताबिक राज्य शासन ने अपने निहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए प्रभात मिश्रा को उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है।  शासन के इस फैसले को राजभाषा के प्रचार-प्रसार और शासकीय कार्यों में हिंदी के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। नवनियुक्त अध्यक्ष प्रभात मिश्रा रायपुर जिले के टिकरापारा स्थित नंदी चौक क्षेत्र के रहने वाले हैं। प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए शासन ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।

छत्तीसगढ़ में सुशासन की नई रूपरेखा, साय सरकार का मॉडल

रायपुर. ग्राउंड से ग्रोथ तक: छत्तीसगढ़ में साय सरकार का सुशासन मॉडल छत्तीसगढ़ आज ग्रामीण विकास के उस मुकाम पर खड़ा है, जहाँ नीतियाँ केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि ज़मीन पर ठोस बदलाव का माध्यम बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सुशासन को केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि कार्यशैली के रूप में अपनाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महात्मा गांधी नरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण विकास का एक उभरता मॉडल बना दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में 8 लाख से अधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण होना, देश में सर्वाधिक है। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और गरिमापूर्ण जीवन की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री  साय का मानना है कि आवास केवल छत नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता और आत्मसम्मान का आधार है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने आवास योजना को आजीविका से जोड़ा है। आवास हितग्राहियों को सेंटरिंग प्लेट एवं अन्य निर्माण की आपूर्ति कर 8 हजार से अधिक महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बन सकीं। छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी चुनौती रहे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ विकास और विश्वास को समान महत्व दिया है। कौशल प्रशिक्षण और पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। आर-सेटी एवं प्रोजेक्ट उन्नति के जरिए आत्मसमर्पित नक्सलियों सहित 5 हजार से अधिक हितग्राहियों को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, 3416 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों को आवास की स्वीकृति दी गई है। पीएम-जनमन आवास योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 33 हजार से अधिक आवासों की स्वीकृति इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। साय सरकार ने योजनाओं की निगरानी में आम नागरिक को सहभागी बनाकर पारदर्शिता को नई परिभाषा दी है। टोल-फ्री हेल्पलाइन, पंचायत स्तर पर क्यूआर कोड और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोई भी व्यक्ति विकास कार्यों की जानकारी सीधे प्राप्त कर सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को मनरेगा, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और पीएम सूर्यघर जैसी योजनाओं से अभिसरण के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे समग्र लाभ सुनिश्चित हो रहा है। ‘मोर गांव मोर पानी’ महाभियान छत्तीसगढ़ की जल संरक्षण नीति का प्रतीक बनकर उभरा है। नरेगा के तहत दो वर्षों में 20 करोड़ से अधिक मानव दिवसों का सृजन हुआ है। जल संरक्षण के लिए 35 हजार से अधिक कार्य और 10 हजार से अधिक आजीविका डबरियों की स्वीकृति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से जीआईएस आधारित योजना निर्माण में छत्तीसगढ़ ने देश के अग्रणी राज्यों में स्थान बनाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2.82 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों से लगभग 30 लाख महिलाएँ जुड़ी हैं। ‘लखपति दीदी’ अभियान के माध्यम से अब तक 4.94 लाख महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। महिलाओं की आवाज़ को मंच देने के लिए ‘दीदी के गोठ’ रेडियो कार्यक्रम और उनके उत्पादों के विपणन हेतु ‘छत्तीसकला’ ब्रांड राज्य सरकार के नवाचारों के प्रमाण हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 2902 किलोमीटर सड़कों की स्वीकृति और 1064 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूर्ण होना, दूरस्थ और जनजातीय अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत स्वीकृत सड़कों के निर्माण में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दशकों से अधूरी पड़ी 43 सड़कों को पूरा कर सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि विकास अब किसी क्षेत्र या वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का कहना है कि शासन का वास्तविक उद्देश्य आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। आवास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण और अधोसंरचना के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज समावेशी और आत्मनिर्भर विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। पारदर्शी, नवाचारी और जनोन्मुखी कार्यप्रणाली के कारण छत्तीसगढ़ अब केवल एक राज्य नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।

महिला शक्ति और वनोपज का सफल संगम, हरिबोल स्व-सहायता समूह ने रचा आर्थिक सशक्तिकरण का उदाहरण

रायपुर. बढ़ती मांग, मजबूत बाजारः स्थानीय से प्रदेश स्तर तक वनौषधियों की निरंतर आपूर्ति ग्रामीण अंचलों में वनोपज पर आधारित आजीविका सदियों से महिलाओं के जीवन और आर्थिक संरचना का अभिन्न हिस्सा रही है। जंगलों से प्राप्त वनोषधि एवं अन्य वनोपज न केवल पारंपरिक ज्ञान का प्रतीक हैं, बल्कि आज के समय में महिला स्वावलंबन, स्वास्थ्य और सतत रोजगार का मजबूत आधार भी बन रहे हैं। जब संगठित प्रयास, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव मिलता है, तब यही वनोपज ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता और सम्मान का नया अध्याय रचते हैं। इसी सोच को साकार करता हुआ एक सशक्त उदाहरण है कोरबा जिले के ग्राम डोंगानाला का हरिबोल स्व सहायता समूह है, वर्ष 2006-07 में यूरोपियन कमीशन परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत इस पहल के माध्यम से गठित हरिबोल स्व सहायता समूह ने आज महिला सशक्तिकरण की एक सफल मिसाल कायम की है। 12 महिला सदस्यों से युक्त यह समूह वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र, डोंगानाला का सफल संचालन कर रहा है, जहां कच्ची वनौषधियों का संग्रहण, वैज्ञानिक पद्धति से प्रसंस्करण एवं विपणन किया जाता है। समूह की महिलाएं स्वयं जंगलों से कच्ची वनौषधि एकत्र कर, निर्धारित घटक मात्रा के अनुसार प्रसंस्करण कार्य करती हैं। प्रसंस्करित वनौषधियों की मांग स्थानीय स्तर के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी निरंतर बनी हुई है। समूह द्वारा उत्पादित वनौषधियों का विक्रय एन.डब्ल्यू.एफ.पी. मार्ट बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, कांकेर, अंबिकापुर, जगदलपुर सहित संजीवनी केंद्र केवची (कटघोरा) एवं कोरबा में किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रसंस्करण केंद्र में नियुक्त वैद्य द्वारा स्थानीय एवं आसपास के क्षेत्रों के 1500 से अधिक मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। समूह की महिलाओं द्वारा हिंगवाष्टक चूर्ण, अजमोदादि चूर्ण, अश्वगंधादि चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण, अविपत्तिकर चूर्ण, बिल्वादि चूर्ण, पुष्यानुग चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, पंचसम चूर्ण, शतावरी चूर्ण, आमलकी चूर्ण, पायोकिल (दंतमंजन), सर्दी-खांसी नाशक चूर्ण, हर्बल कॉफी चूर्ण, महिला मित्र चूर्ण, हर्बल मधुमेह नाशक चूर्ण, हर्बल फेसपैक चूर्ण तथा हर्बल केशपाल चूर्ण का निर्माण किया जा रहा है। आर्थिक दृष्टि से हरिबोल स्व सहायता समूह ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्तमान में समूह द्वारा 20 लाख 52 हजार रुपये की वार्षिक आय अर्जित की जा रही है तथा प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख रुपये की वनौषधियों का विक्रय किया जाता है। इससे प्रत्येक सदस्य को औसतन 1.71 लाख रुपये प्रति वर्ष की आमदनी प्राप्त हो रही है। बीते दो वर्षों में समूह का विक्रय एवं लाभ दोनों दोगुने हुए हैं, जहां पूर्व में वार्षिक लाभ 10.68 लाख रुपये था, जो वर्तमान में बढ़कर 20.52 लाख रुपये हो गया है। वन मंडलाधिकारी कटघोरा ने बताया कि यह वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र समूह से जुड़ी महिलाओं को स्थायी रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है। महिलाएं अपनी आय से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य उपचार, घरेलू आवश्यकताओं एवं त्यौहारों के खर्चों को सहजता से पूरा कर रही हैं। समूह की महिलाएं मासिक अंशदान के माध्यम से आपसी सहयोग, ऋण व्यवस्था और सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत कर रही हैं। हरिबोल स्व सहायता समूह की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। वर्ष 2008 में फिलिप्स बहादुरी पुरस्कार प्राप्त करने के साथ ही भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन संघ (ट्राइफेड), भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 में वनधन विकास केंद्र, डोंगानाला को राष्ट्रीय स्तर पर अधिकतम प्रकार के वनोत्पाद निर्माण एवं विपणन हेतु प्रथम पुरस्कार तथा अधिकतम विक्रय हेतु द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया, केंद्रीय मंत्री  अर्जुन मुंडा द्वारा प्रदान किया गया। हरिबोल स्व सहायता समूह की यह सफलता इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब महिलाओं की पारंपरिक जानकारी को आधुनिक प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ा जाता है, तब वनोपज न केवल आजीविका का साधन बनते हैं, बल्कि ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव भी तैयार करते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन

रायपुर. रायपुर में हुई उच्च स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विमर्श के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस रायपुर में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।     कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केवल कागज़ों तक सीमित न रखकर प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कुलपति,कुलसचिव,महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्राध्यापक स्वयं अध्ययन करें।उन्होंने राज्य स्तर पर संचालित समितियों द्वारा नियमित समीक्षा, जिला क्लस्टर व्यवस्था, टास्क फोर्स की बैठकें तथा विश्वविद्यालय स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में समावेशित कर विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, विरासत और मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। स्थानीय लोक कला और शिल्प कला को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।भारतीय ज्ञान परंपरा पर विद्यार्थियों के बीच ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित कर उनमें जागरूकता बढ़ाई जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है। मंत्री  वर्मा ने भविष्य में इस प्रकार की विस्तृत एवं बहुदिवसीय कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में विशेष अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के अध्यक्ष  अतुल कोठारी, राष्ट्रीय सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, निदेशक आईआईटी भिलाई डॉ. राजीव प्रकाश, शिक्षाविद  दिलीप केशरवानी, डॉ. नारायण गवांडकर सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक उपस्थित रहे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।मुख्य वक्ता  अतुल कोठारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने, क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री एवं एग्जिट सिस्टम तथा टास्क फोर्स के गठन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। वहीं डॉ. राजीव प्रकाश ने नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव साझा किए। इसी तरह  ओम प्रकाश शर्मा ने राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। जिसमें प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया।

नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता: बीजापुर में 12 माओवादी हथियारों के साथ पुलिस के सामने झुके

बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “नियद नेल्लानार” और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर एक डीवीसीएम सहित कुल 12 सशस्त्र माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 08 महिला माओवादी और 04 पुरुष माओवादी शामिल हैं। इन सभी माओवादियों पर कुल 54 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने अपने साथ एक AK-47 और दो SLR राइफल भी पुलिस को सौंपे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले सभी 12 माओवादी फायरिंग, आईईडी ब्लास्ट, आगजनी सहित कई गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं। यह आत्मसमर्पण बस्तर आईजी पी. सुंदरराज, सीआरपीएफ डीआईजी देवेंद्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यूलेण्डन यार्क, डीएसपी शरद जायसवाल, उप पुलिस अधीक्षक विनीत साहू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ। आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत अधिकारियों ने प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये की नगद सहायता राशि प्रदान की। इस साल अब तक 888 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण पुलिस ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक कुल 888 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, वहीं 1163 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 231 माओवादी अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए हैं। पी. सुंदरराज, आईजी, बस्तर ने कहा, सरकार की योजनाएं और पुनर्वास नीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रही है। लगातार माओवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी: नक्सलियों का गुप्त हथियार डंप बरामद, 5KG IED सहित कई घातक हथियार जब्त

सुकमा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘गढ़’ गोगुंडा में सुरक्षाबलों का ऑपरेशन लगातार दूसरे दिन भी जारी है. आज गुरुवार को सीआरपीएफ 74वीं बटालियन और कोबरा 201 के जवानों ने एक संयुक्त कार्रवाई में नक्सलियों के हथियारों के डंप को बरामद कर उनकी बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है. एरिया डोमिनेशन के दौरान मिला हथियारों का डंप जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबल इलाके में सर्चिंग और एरिया डोमिनेशन  पर निकले थे. इसी दौरान गोगुंडा पहाड़ के दूसरे छोर पर जवानों को नक्सलियों द्वारा छिपाया गया हथियारों का एक बड़ा डंप मिला. तलाशी के दौरान वहां से 5 किलो वजनी एक शक्तिशाली बम (IED) भी बरामद किया गया. नक्सलियों ने यह बम जवानों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से लगाया था, जिसे बम निरोधक दस्ते ने सूझबूझ दिखाते हुए मौके पर ही सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया. नक्सली कंमांडर रमन्ना के स्मारक को किया था जमींदोज बता दें, बीते दिन (बुधवार को) भी सुरक्षा बल के जवानों ने नक्सली कमांडर रमन्ना का 20 फीट ऊंचा स्मारक ढहाया था. जिसके बाद आज भी इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन और डॉमिनेशन जारी है. इस कार्रवाई से नक्सलियों के बीच घबराहट साफ देखी जा रही है. वर्षों से माओवादियों के खौफ में जी रहे गोगुंडा के ग्रामीणों में अब सुरक्षाबलों की मौजूदगी से सुरक्षा का भाव लौट रहा है. इस सफलता पर सीआरपीएफ कमांडेंट हिमांशु पांडे ने कहा कि “हमारा प्राथमिक लक्ष्य पूरे इलाके को नक्सल भय से मुक्त बनाना है. गोगुंडा की पहाड़ियों में शांति और विकास की दस्तक शुरू हो चुकी है और यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक शांति पूरी तरह बहाल न हो जाए.” 40 साल बाद इस इलाके में सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित होने के बाद अब यहां विकास कार्यों की राह आसान हो गई है. लगातार हो रही कार्रवाई से नक्सली बैकफुट पर हैं, जिससे क्षेत्र में सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के पहुंचने की उम्मीद जगी है.

मंगल कार्बन प्लांट हादसा: जोरदार विस्फोट में 9 माह का बच्चा समेत 8 मजदूर गंभीर रूप से घायल

रायगढ़ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के खरसिया स्थित मंगल कार्बन प्लांट में गुरुवार को एक बड़ा हादसा हो गया. टायर रिसाइक्लिंग के दौरान बॉयलर में हुए जोरदार धमाके ने प्लांट परिसर को दहला दिया. इस दर्दनाक हादसे में 8 मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनमें एक 9 महीने का मासूम बच्चा भी शामिल है. घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है. यह पूरा मामला खरसिया थाना क्षेत्र के बानीपाथर का है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना शक्तिशाली था कि इसकी गूंज दूर तक सुनी गई. टायर गलाने की प्रक्रिया के दौरान अचानक हुए इस ब्लास्ट से निकली गर्म गैस और आग ने आसपास काम कर रहे मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया. वहां मौजूद लोग जब तक कुछ समझ पाते, तब तक 8 लोग बुरी तरह झुलस चुके थे. अस्पताल में मची चीख-पुकार हादसे के तुरंत बाद सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया. डॉक्टरों के मुताबिक, घायलों की स्थिति बेहद चिंताजनक है. कई मजदूर 70 से 80 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं. विशेष रूप से 9 महीने के मासूम की स्थिति बेहद चिंताजनक है. टायर गलाने के दौरान तकनीकी गड़बड़ी की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्लांट में पुराने टायरों को गलाकर कार्बन बनाने (रिसाइक्लिंग) का काम चल रहा था. आशंका जताई जा रही है कि बॉयलर के भीतर दबाव (Pressure) अधिक बढ़ने या किसी तकनीकी खामी की वजह से यह विस्फोट हुआ. पुलिस और तकनीकी टीम इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि आखिर यह ब्लास्ट कैसे हुआ. सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल, जांच में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची. पुलिस ने प्लांट परिसर को सील कर दिया है और जांच शुरू कर दी है. सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि:     क्या प्लांट में सुरक्षा मानकों (Safety Norms) का पालन किया जा रहा था?     खतरनाक रिसाइक्लिंग प्लांट परिसर के भीतर 9 माह का मासूम बच्चा कैसे मौजूद था?     क्या मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे? मौके पर पहुंचे अधिकारियों का कहा कि जांच के बाद यदि प्लांट प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है, तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.