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मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल पर सूरजपुर जिला प्रशासन ने वितरित की मुआवजा राशि

रायपुर : हाथी के हमले में जान गंवाने वाले ग्रामीणों के परिजनों को त्वरित राहत पीड़ितों को मिली राहत: मंत्री लक्ष्मी Rajwade के प्रयास से वितरित हुआ मुआवजा मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल पर सूरजपुर जिला प्रशासन ने वितरित की मुआवजा राशि रायपुर महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देशों पर जिला प्रशासन और वन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए सूरजपुर जिला के कल्याणपुर में हाथी हमले के शिकार हुए हितग्राहियों के परिजनों को मुआवजा राशि का वितरण कर दिया है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया था कि पीड़ित परिवारों को बिना किसी विलंब के सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।   सूरजपुर जिले के कल्याणपुर निवासी दो ग्रामीणों की हाथी हमले में मृत्यु होने के पश्चात, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (सूरजपुर मंडल) द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई की गई। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, दोनों प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा राशि स्वीकृत कर वितरित की गई है, जिनमें हितग्राही श्रीमती कांति भोई को डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में 5 लाख 50 हजार रूपए एवं श्रीमती राजेश्वरी सिंह श्याम को डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में 5 लाख 50 हजार रूपए भेज दी गई है। साथ ही डिविजनल फारेस्ट ऑफिसर सूरजपुर को 50-50 हजार रूपए डीबीटी के माध्यम से प्रदान किया गया है। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े जी ने कहा कि क्षेत्र की जनता की सुरक्षा और संकट की घड़ी में उनके साथ खड़ा होना सुशासन सरकार की प्राथमिकता है। हाथी-मानव द्वंद्व को कम करने के लिए प्रशासन सजग है और प्रभावितों को हर संभव मदद दी जाएगी। इस त्वरित कार्रवाई से पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल मिला है, जिसके लिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मंत्री श्रीमती राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त किया है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की घोषणा की

रायपुर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस पर राज्य की नर्सों के सम्मान में नर्सिंग संवर्ग के पदनाम परिवर्तन की बड़ी घोषणा की है। इस घोषणा के अनुसार "नर्सिंग सिस्टर" अब "सीनियर नर्सिंग ऑफिसर" कहलाएंगी जबकि स्टाफ नर्स का नाम नर्सिंग ऑफिसर होगा।     डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ये घोषणा की है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारी व नर्सिंग छात्र-छात्राओं के साथ अस्पताल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मरीजों की सेवा में नर्सों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो दिन-रात समर्पण भाव से मरीजों की देखभाल कर उन्हें नया जीवन देने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा में मानवीय संवेदनाओं और सेवा भाव का सबसे बड़ा उदाहरण नर्सिंग स्टाफ प्रस्तुत करता है।  उन्होंने कोविड काल में नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं को याद करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी नर्सों ने समर्पण और सेवा भाव के साथ कार्य किया। चिकित्सा सेवा में नर्स माँ के समान होती है। उनका दर्जा माँ के समान उच्च है क्योंकि वे मरीजों की देखभाल परिवार की तरह करती हैं।  स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्षों से लंबित कई सुविधाओं और व्यवस्थाओं को पूरा किया जा रहा है। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री ने सीनियर नर्सिंग ऑफिसर डॉ. रीना राजपूत, नीलिमा शर्मा, रंजना सिंह ठाकुर, सुमन देवांगन, कोमेश्वरी नवरंगे, प्रगति सतपुते, शीतल सोनी और नमिता डेनियल सहित पूरे नर्सिंग ऑफिसर को बधाई देते हुए उनके कार्यों की सराहना की।

र मालवा महोत्सव में छाया रहा गेड़ी नृत्य का जादू विधानसभा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री ने किया अनिल गढ़ेवाल का सम्मान

बिलासपुर संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित 25 वा मालवा महोत्सव जो की इंदौर जिला में संपन्न हुआ इसमें बिलासपुर छत्तीसगढ़ की लोकप्रिय संस्था गेड़ी लोक नृत्य दल को प्रदर्शन हेतु आमंत्रण प्राप्त हुआ था गेड़ी लोक नृत्य दल अनिल कुमार गढ़ेवाल के कुशल नेतृत्व में प्रदर्शन दिनांक 6 एवं 7 तथा 8 मई को इंदौर के विराट मंच में प्रदर्शित किया गया  गेड़ी लोक नृत्य का प्रदर्शन पारंपरिक वेशभूषा तथा पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं पारंपरिक गीत शैली के आधार पर प्रदर्शित किया गया जिसकी सराहना इंदौर वासियों ने खुले मन से किये ! अनिल गढ़ेवाल के द्वारा गाया हुआ गीत काट ले हरिहर बाँसे जो भला गीत में इंदौर वासी झूम उठे वहीं बिना ताल टूटे एक ही जगह पर घूम-घूम कर मोहन डोंगरे ने मांदल वादन किया तो पूरा दशहरा मैदान तालिया की गड़गड़ाहट से गूंज उठा ! मुख्य मांदल वादक संजय रात्रे ने पारंपरिक मांदल वादन कर दर्शकों को चकित कर दिया वहीं महेश नवरंग के बांसुरी के स्वर लहरियों में इंदौर वासी झूम उठे तथा सौखी लाल सूर्यवंशी के द्वारा गीत एवं नृत्य को हारमोनियम में  स्वर दिया गया सह वादक के रूप में रामनाथ उत्तम ने अपनी भूमिका निभाई ! दर्शन गण आश्चर्यचकित तब हुवे जब मुख्य गेड़ी नर्तक चेतन कुर्रे तथा लक्ष्मी नारायण माण्डले के गेड़ी में खड़े रहने के बावजूद शुभम भार्गव ने उनके कंधों पर खड़े होकर गेड़ी को हवा में लहराया तो दशहरा मैदान तालियो की गड़गड़ाहट से गूंज उठा वही फूलचंद ओगरे ने एक गेड़ी उठाकर डांस किया तो दर्शनगण आश्चर्य चकित हो गए सह गेड़ी नर्तक के रूप में मनोज माण्डले ,खेलन दास ओगरे ,अजय चेलकर, योगेश ओगरे ,संजय ओगरे ने अपनी भूमिका निभाई ! गेदी नृत्य प्रदर्शन के उपरांत केंद्रीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जी एवं मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर जी ने अनिल गढ़ेवाल का मंच पर सम्मानित किये!कौड़ियों एवं चीनी मिट्टी की माला पटसन वस्त्र ,मयूर पंख धारण करके सभी कलाकारों ने अद्भुत गेड़ी नृत्य का प्रदर्शन किया गेड़ी लोक नृत्य का नृत्य संचालन एवं गीत संयोजन अनिल कुमार गढ़ेवाल  के द्वारा तैयार किया गया है !

भीषण गर्मी में बड़ी राहत: नहरों के पानी से 4755 सूखे तालाब हुए लबालब

नहरों से सूखते तालाबों में जलभराव:भीषण गर्मी से बड़ी राहत, 4755 तालाब हुए लबालब मुख्यमंत्री श्साय की मंशा के अनुरूप सूखते तालाबों को*जीवनदान देने जल संसाधन विभाग का विशेष अभियान  रायपुर वर्तमान में भीषण गर्मी के दौरान तालाबों में पानी की कमी से जूझ रहे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश में सूख रहे 4 हजार 755 तालाबों को अब तक विभाग द्वारा त्वरित पहल करते हुए नहरों के माध्यम से भरा जा चुका है और जरूरत के मुताबिक शेष तालाबों में भी पानी भरने का कार्य तेजी से जारी है।     उल्लेखनीय है कि वर्तमान में भीषण गर्मी नेे पूरे देश को अपने चपेट में ले रखा है, इससे छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है। इससे जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्र में पानी का प्रमुख स्त्रोत तालाब भी जलविहीन हो रहे हैं। ऐसे हालात में लोगों को राहत पहुंचाने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य में सूख रहे तालाबों में जल भराव का कार्य तेजी से चलाया जा रहा है।     जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इनमें सर्वाधिक रायपुर जिला के अंतर्गत निस्तारी हेतु प्रस्तावित कुल 783 तालाबों में से अब तक 663 तालाबों में जल भराव हेतु नहर से पानी दिया जा चुका है। इसी तरह बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के 586 तालाबों में से 504 तालाबों, धमतरी जिले के 508 तालाबों में से 329 तालाबों में पानी भरा जा चुका है। इस तरह प्रदेश के अमूमन सभी जिलों के तालाबों में पानी भराव का कार्य किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में लोगों के निस्तारी आदि की समस्या का तत्काल समाधान हो सके।     उल्लेखनीय है कि जल संसाधन विभाग द्वारा विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के तहत नहरों के माध्यम से पानी को तालाबों तक पहुंचाने के लिए यह योजना जल संरक्षण  और वाटर रिचार्ज की दिशा में एक दूरदर्शी और प्रभावी कदम साबित हो रही है। यह पहल केेवल सरकारी योजना नहीं बल्कि जल संरक्षण की सामूहिक सोच को मजबूत करती है। जब गांवों के तालाब भरते हैं और लोगों को उनका प्रत्यक्ष लाभ मिलता है, तब समाज में जल बचाने और जल-स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है।     जल संसाधन विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में जल दोहन सहित अन्य कारणों से सूखते तालाबों के लिए नहरों से पानी का पहुंचाया जाना अत्यंत लाभकारी साबित हो रहा है। इसके माध्यम से तालाबों के भू-जल स्तर में वृद्धि अहम साबित होगी। नहरों से तालाबों में छोड़ा गया पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भूूूू-जल का पुर्नभरण होता है। इससे कुएं, हैण्डपम्प लम्बे समय तक जलयुक्त बने रहते हैं। इस तरह तालाबों के भरने से जहां ग्रामीणों को गर्मी के मौसम में पानी के कमी से राहत मिल रही है, वहीं आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।

बिलासपुर की शिविका पांडेय बनीं राज्य स्तरीय स्केटिंग चौंपियन, चोट के बावजूद जीता गोल्ड

बिलासपुर की शिविका पांडेय बनीं राज्य स्तरीय स्केटिंग चौंपियन, चोट के बावजूद जीता गोल्ड रायपुर रायपुर के सरोना स्थित निजी पब्लिक स्कूल के स्केटिंग ग्राउंड में 9 एवं 10 मई 2026 को प्रथम छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय रोलर स्पोर्ट्स रैंकिंग चौंपियनशिप का सफल आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में बिलासपुर की होनहार खिलाड़ी शिविका पांडेय ने अपनी प्रतिभा और अदम्य साहस का लोहा मनवाते हुए राज्य स्तरीय चौंपियन का खिताब अपने नाम किया। चोट को मात देकर हासिल किया स्वर्ण          शिविका ने 10 से 12 वर्ष आयु वर्ग के ट्वॉय इनलाइन स्केट स्पर्धा में हिस्सा लिया। 9 मई को आयोजित 400 मीटर रेस के दौरान वे गंभीर रूप से चोटिल हो गई थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और घायल अवस्था में ही रेस पूरी कर कांस्य पदक जीता। अगले ही दिन, उसी चोट और दर्द के बावजूद, शिविका ने 200 मीटर रेस में असाधारण प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया और अपने आयु वर्ग की ओवरऑल चौंपियन बनीं। परिचय और परिवार         शिविका पांडेय बिलासपुर के बिरला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल की छठवीं कक्षा की छात्रा हैं और रॉयल स्केटिंग क्लब, बिलासपुर में नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं। उनकी इस सफलता पर उनके परिवार में हर्ष का माहौल है। शिविका के माता-पिता चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। डॉ. श्वेता पांडेय आयुर्वेद चिकित्साधिकारी हैं और डॉ. विद्या भूषण पांडेय (विभागाध्यक्ष – बालरोग विभाग), शासकीय आयुर्वेद चिकित्सालय महाविद्यालय, बिलासपुर में पदस्थ हैं। उल्लेखनीय है कि शिविका स्वयं स्वर्ण प्राशित (आयुर्वेदिक इम्युनिटी बूस्टर प्राप्त) हैं। उनके पिता डॉ. विद्या भूषण पांडेय नियमित रूप से स्वर्ण प्राशन शिविरों का आयोजन कर बच्चों के स्वास्थ्य संवर्धन के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

उद्यानिकी की आधुनिक तकनीकों से किसान महेश कश्यप की बदली तकदीर

उद्यानिकी की आधुनिक तकनीकों से किसान महेश कश्यप की बदली तकदीर रायपुर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड अंतर्गत कछार निवासी महेश कश्यप आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं। कभी पारंपरिक खेती के कारण बढ़ती लागत और घटते लाभ से परेशान रहने वाले महेश ने उद्यानिकी विभाग की सहायता से आधुनिक कृषि को अपनाया और अपनी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार किया। परंपरागत खेती से आधुनिकता का सफर           कश्यप पहले परंपरागत फसलों पर निर्भर थे, लेकिन उद्यानिकी विभाग की समेकित उद्यानिकी विकास योजना  ने उनकी सोच और खेती का तरीका बदल दिया। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 2.00 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण और फेंसिंग के लिए प्राप्त अनुदान का लाभ उठाकर सब्जी उत्पादन का उन्नत मॉडल तैयार किया। तकनीक का बेजोड़ तालमेल          कश्यप ने अपने खेतों में वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हुए तकनीकों को अपनाया। ड्रिप सिंचाई से न केवल पानी की बचत हुई, बल्कि फसल को सटीक पोषण मिला और खरपतवार की समस्या भी कम हुई। मिट्टी में नमी बनाए रखने और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए मल्चिंग का प्रभावी उपयोग किया गया। वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ी है। आय में दोगुनी वृद्धि और रिकॉर्ड उत्पादन             महेश ने बैंगन के साथ-साथ अंतरवर्ती फसल  के रूप में कद्दू और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती की। लगभग 4.5 एकड़ में बैगन कीखेती की है। उन्होंने बताया कि अनुमानित 900 से 1100 क्विंटल उत्पादन होने की संभावना है, जहाँ खेती में लगभग 7 से 8 लाख रुपये की लागत आई, वहीं सब्जियों की बिक्री से उन्हें 14 से 15 लाख रुपये की शुद्ध आर्थिक लाभ  प्राप्त हुई। क्षेत्र के किसानों के लिए रोल मॉडल             महेश कश्यप आज न केवल आत्मनिर्भर हुए हैं, बल्कि वे किसानों को संदेश दे रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को एक लाभप्रद व्यवसाय बनाया जा सकता है। उद्यानिकी विभाग की यह पहल बिलासपुर के ग्रामीण अंचल में समृद्धि का नया अध्याय लिख रही है।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल: पर्यावरणीय मानकों के पालन और सतत निगरानी का सशक्त मॉडल

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल: पर्यावरणीय मानकों के पालन और सतत निगरानी का सशक्त मॉडल रायपुर /छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल प्रभावी और सक्रिय भूमिका निभा रहा है। मंडल द्वारा विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण और सतत निगरानी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन हो। राखड़ प्रबंधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुशासित व्यवस्था मंडल की सतर्कता के परिणामस्वरूप जांजगीर-चांपा सहित राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लाई ऐश (राखड़) का प्रबंधन निर्धारित वैज्ञानिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है। हाल ही में विभागीय अधिकारियों ने ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संबंधित स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान राखड़ के परिवहन, भंडारण और निस्तारण की प्रक्रियाएं सुव्यवस्थित एवं मानकों के अनुरूप पाई गईं। पारदर्शिता और जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जनसहभागिता को विशेष महत्व दिया है। निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि राखड़ परिवहन में सुरक्षा मानकों का पालन हो तथा धूल या अन्य कणों का अनियंत्रित प्रसार न हो। वैज्ञानिक डंपिंग तकनीकों के उपयोग से आसपास के जल स्रोतों और कृषि भूमि की गुणवत्ता सुरक्षित बनी हुई है। स्थानीय निकायों और ग्रामीणों के साथ सतत संवाद के माध्यम से मंडल विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित कर रहा है। रियल-टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ा जनविश्वास मंडल आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उद्योगों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग कर रहा है। इस सतत निगरानी व्यवस्था से न केवल पर्यावरणीय अनुपालन को मजबूती मिली है, बल्कि आम नागरिकों में स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति विश्वास भी बढ़ा है। स्वच्छ और हरित छत्तीसगढ़ की दिशा में सतत प्रयास छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल का उद्देश्य राज्य की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करते हुए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य का निर्माण करना है। नियमित समीक्षा, उन्नत तकनीकों और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से मंडल पर्यावरण संरक्षण के उच्चतम मानकों को स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

बजट कार्यों में तेजी लाने के निर्देश: प्राथमिकता से भेजें प्राक्कलन, सरकारी भवनों के आधुनिक और वर्टिकल डिजाइन पर जोर

बजट में शामिल कार्यों के प्राक्कलन प्राथमिकता क्रम में तत्काल भेजने के निर्देश, शासकीय भवनों के वर्टिकल व आधुनिक डिजाइन तथा नई तकनीक से निर्माण पर जोर लोक निर्माण विभाग के सचिव ने की कार्यों की समीक्षा, भू-अर्जन, वन-व्यपवर्तन, पोल शिफ्टिंग की बाधाओं को समय-सीमा में निराकृत करने के दिए निर्देश रायपुर लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज सभी मुख्य अभियंताओं की बैठक लेकर विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने पीडब्लूडी मुख्यालय नवा रायपुर के निर्माण भवन में आयोजित बैठक में अधिकारियों को निर्माण कार्यों में भू-अर्जन, वन-व्यपवर्तन, पोल शिफ्टिंग आदि की बाधाओं को स्वयं रूचि लेते हुए समय-सीमा में त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने डी.पी.आर. तैयार करने, एजेंसी निर्धारण, मार्गों एवं भवनों के मरम्मत तथा कार्य मेजरमेंट बुक के लिए नई तकनीक अपनाने पर जोर दिया। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी भी बैठक में मौजूद थे। सचिव श्री बंसल ने बैठक में हाई स्कूल भवनों, हायर सेकेण्डरी स्कूलों, शासकीय आवासगृहों, मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों व कम्पोजिट भवनों के निर्माण के लिए भूमि की उपलब्धता एवं उपयोगिता के अनुरूप हॉरिजांटल की जगह वर्टिकल निर्माण को बढ़ावा देते हुए आधुनिक डिजाइनों और नई तकनीकों से शासकीय भवनों के निर्माण की कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के बजट में शामिल कार्यों के प्राक्कलन प्राथमिकता क्रम में तत्काल प्रेषित करने को कहा। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को हर 15 दिनों में कोर्ट प्रकरणों, भू-अर्जन के मामलों तथा लोक सेवा गारंटी के लंबित प्रकरणों की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन मामलों में आ रही बाधाओं से वरिष्ठ कार्यालयों को अवगत कराने को कहा, ताकि निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर पर यथासमय की जा सके। उन्होंने इनके निराकरण में किसी भी प्रकार की देरी नहीं करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने भवनों, सड़कों और पुल-पुलियों के सभी प्रगतिरत कार्यों में निर्धारित मानक अनुसार पूर्ण मासिक कार्ययोजना बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग के सभी कार्यपालन अभियंताओं, अनुविभागीय अधिकारियों तथा उप अभियंताओं को छुट्टी के दिनों में भी सतर्क रहने और बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ने को कहा। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किसी भी दिन निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया जा सकता है।

कोरबा के विकास में DMF की बड़ी भूमिका: मंत्री लखनलाल देवांगन बोले- जिले की तरक्की का मजबूत आधार बना फंड

कोरबा जिले के विकास का महत्वपूर्ण आधार है डीएमएफ – मंत्री लखनलाल देवांगन डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित कार्यों को मिली स्वीकृति रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य, उद्योग, आबकारी, सार्वजनिक उपक्रम एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की मुख्य उपस्थिति में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) कोरबा की शासी परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु प्रस्तावित कार्यों की कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया। इस अवसर पर कोरबा की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत, कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम, रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया सहित शासी परिषद के सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं पदेन अध्यक्ष कुणाल दुदावत ने की। बैठक में मंत्री देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए डीएमएफ योजना की व्यवस्था की है, जिसके माध्यम से कोरबा जिले को बड़ी राशि प्राप्त होती है। डीएमएफ अब कोरबा जिले की प्रगति का मजबूत आधार बन चुका है। जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अधोसंरचना विकास जैसे कार्यों को इससे नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग और जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिले में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। डीएमएफ मद से स्कूल, आंगनबाड़ी भवन, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण तथा पुल-पुलियों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वीकृत कार्यों का समय-सीमा में पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आमजन को शीघ्र लाभ मिल सके। मंत्री देवांगन ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशा है कि कोरबा जिले में डीएमएफ के तहत होने वाले सभी कार्य पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूरे हों। निर्माण पोर्टल के माध्यम से आम नागरिक भी डीएमएफ के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वीकृत कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए और नए प्रस्तावों को बजट प्रावधान के अनुरूप प्रस्तुत किया जाए। सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा कि डीएमएफ मद के माध्यम से कोरबा जिले को विकास की नई पहचान प्राप्त होगी। जिले में जहां भी शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल तथा अन्य आवश्यक क्षेत्रों में राशि की जरूरत है, वहां इस फंड का प्रभावी उपयोग होना चाहिए। उन्होंने सभी कार्यों को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने पर विशेष जोर दिया। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निर्धारित किए गए केपीआई के अनुरूप तैयार की गई है। जिले में उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों को विशेष महत्व दिया गया है और सभी कार्यों को गुणवत्तापूर्वक तथा समय-सीमा में पूर्ण करने के प्रयास किए जाएंगे। कलेक्टर ने बताया कि डीएमएफ से संबंधित शिकायतों के निराकरण हेतु टोल-फ्री नंबर जारी किया गया है तथा निर्माण पोर्टल के माध्यम से सभी कार्यों की प्रगति देखी जा सकती है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के अभिसरण के साथ उच्च प्राथमिकता वाले विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा। उन्होंने जिले शिक्षा,स्वास्थ्य, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में खनन प्रभावित विद्यार्थियों को दिए जाने वाले लाभ,खेल,अधोसंरचना, बेसलाइन सर्वे, पंचवर्षीय परिपेक्ष्य परियोजना,सड़क सुरक्षा आदि के संबंध में विस्तार से बताया। इस दौरान वनमंडलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव, कुमार निशांत, जिला पंचायत सीईओ एवं पदेन सचिव दिनेश नाग, निगमायुक्त  आशुतोष  पाण्डेय, अपर कलेक्टर देवेन्द्र पटेल, प्रशिक्षु आईएएस तरूण किरण तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी डीएमएफ के सदस्य श्रीमती किरण मरकाम, पार्षद नरेन्द्र देवांगन भी बैठक में शामिल हुए। खनिज संपदा से जनकल्याण की नई उड़ान वर्ष 2026-27 के लिए विकास का खाका तैयार कलेक्टर सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास कोरबा की शासी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें खनिज क्षेत्रों के सतत विकास और प्रभावित समुदायों के कल्याण के लिए वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में यह जानकारी दी गई कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए तीन चरणों में एक व्यापक बेसलाइन सर्वे किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 5 विकास खंडों के 782 गाँवों को कवर कर आगामी पाँच वर्षों की परिप्रेक्ष्य योजना तैयार की जाएगी। पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निर्माण पोर्टल का शुभारंभ किया गया है, जो एक डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में जिले की सभी परियोजनाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग और फंड मॉनिटरिंग सुनिश्चित करेगा।वर्ष 2026-27 के लिए 70 प्रतिशत राशि सीधे तौर पर उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल के लिए आवंटित की गई है। शिक्षा के क्षेत्र में 255 करोड़ रुपये के बजट से 16 पीएम स्कूलों में वर्चुअल रियलिटी लैब और नीट-जेईई हेतु आवासीय कोचिंग की सुविधा प्रदान की जाएगी, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए 67.18 करोड़ रुपये से मोबाइल मेडिकल यूनिट और एम्बुलेंस सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पेयजल संकट के समाधान हेतु 150 नए ट्यूबवेल और सौर ऊर्जा संचालित पंपों की स्थापना की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एंटी-स्मॉग गन और सघन वृक्षारोपण के माध्यम से ग्रीन बेल्ट विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के अनुरूप, इन सभी प्रयासों का मुख्य लक्ष्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए स्थायी और आत्मनिर्भर आजीविका के नए अवसर सृजित करना है।

तरबूज खाने से बच्चे की मौत, 3 अन्य बच्चे अस्पताल में भर्ती मामले में जांजगीर कलेक्टर ने लिया तत्काल संज्ञान

तरबूज खाने से बच्चे की मौत, 3 अन्य बच्चे अस्पताल में भर्ती मामले में जांजगीर कलेक्टर ने लिया तत्काल संज्ञान जांच के लिए भेजे गए तरबूज के सैंपल स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कर रही अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच रायपुर जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम धुरकोट में तरबूज खाने के बाद एक बच्चे की मृत्यु तथा 3 अन्य बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे ने तत्काल संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम एवं संबंधित एसडीएम को जिला चिकित्सालय जांजगीर भेजा , कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम जांजगीर ने मेडिकल टीम को गांव में संबंधित परिवार के सभी लोगों के स्वास्थ्य जांच के लिए रवाना किया तथा तहसीलदार को गांव में इस बाबत पूरे मामले पर लगातार निगरानी रखने हेतु निर्देशित किया गया। सिविल सर्जन श्री एस. कुजूर ने बताया बच्चों के तरबूज और चिकन खाने बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। एक बच्चे की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत्यु हो गई, जबकि 3 अन्य बीमार बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है जिनकी हालत अब सामान्य है ।कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित तरबूज के सैंपल जांच हेतु भेज दिए गए हैं। साथ ही मृत बच्चे का पोस्टमार्टम कराया गया है और विसरा सुरक्षित रखा गया है ताकि मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। जिला प्रशासन द्वारा पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है तथा जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में अन्य लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर निगरानी भी कर रही है।