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जल जीवन मिशन 2.0 में पेयजल योजनाओं को पूर्ण करने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बनाया रोडमैप

रायपुर  उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  अरुण साव ने आज लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों तथा मैदानी अधिकारियों की बैठक लेकर जल जीवन मिशन के कार्यों, नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों की पेयजल योजनाओं एवं प्रदेश में ग्रीष्म काल में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की। राज्य के सभी जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक में शामिल हुए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव तथा जल जीवन मिशन के संचालक  मोहम्मद कैसर अब्दुलहक और प्रमुख अभियंता  के.के. मरकाम भी बैठक में मौजूद थे। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने जल जीवन मिशन के कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने आगामी दो वर्षों के रोडमैप पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को मिशन के शेष कार्यों को गंभीरता, सक्रियता और तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर पर काम की गति और पूर्णता से ही केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा कार्यों के लिए राशि जारी की जाएगी। जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को और ज्यादा फोकस एवं बारीकी से करना है। उन्होंने कहा की वर्तमान समय में पेयजल आपूर्ति अधिकांशतः शासकीय व्यवस्था पर ही आश्रित है। जल आपूर्ति की अपर्याप्त व्यवस्था या इसमें किसी तरह की बाधा आने पर लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके लिए विभाग को दूरदृष्टि एवं पूर्वानुमान के साथ काम करने की जरूरत है। उप मुख्यमंत्री  साव ने बैठक में हर गांव की पेयजल व्यवस्था की समय-समय पर जांच करने और किसी तरह की दिक्कत होने पर तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने जहां-जहां जल जीवन मिशन के काम पूरे हो गए हैं, वहां हर घर जल का सत्यापन कराकर योजनाओं के संचालन-संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को सौंपने को कहा। उन्होंने विभाग के सभी मुख्य अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं को कलेक्टरों से चर्चा कर प्रत्येक योजना की प्रगति पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यपालन अभियंताओं के कार्यों में सक्रिय सहयोग कर योजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करने को कहा।  उप मुख्यमंत्री ने ग्रीष्म काल में प्रदेश की पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए खराब हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत करने और जलस्तर के नीचे चले जाने के कारण सूख चुके हैंडपंपों में राइजर पाइप बढ़ाकर जलापूर्ति दुरूस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने जरूरत पड़ने पर तत्परता से नया ट्यूबवेल भी खोदने को कहा।  साव ने आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए जलजनित रोगों से बचाव के लिए भी पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए गंदे पानी की आपूर्ति रोकने, नालियों से गुजरने वाले पाइपलाइनों को बदलने तथा जल की गुणवत्ता का नियमित परीक्षण करने को कहा। उप मुख्यमंत्री  साव ने विभागीय अधिकारियों से लोगों को बारिश के पानी को संचित करने, वृक्षारोपण, जलस्रोतों के संरक्षण-संवर्धन और रेन-वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रेरित करने को कहा। भविष्य में जल की पर्याप्त उपलब्धता के लिए ये बहुत जरूरी है। उन्होंने बैठक में नक्सल प्रभावित रहे जिलों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने जल जीवन मिशन के कार्यों को गति देते हुए पहुंचविहीन एवं दूरस्थ वनांचलों में भी स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के विभिन्न प्रावधानों पर भी चर्चा की गई। जल जीवन मिशन के अतिरिक्त मिशन संचालक  ओंकेश चंद्रवंशी और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता  एस.एल. पाण्डेय भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे। वर्ष 2026-27 में 13,183 और 2027-28 में 7352 योजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जल जीवन मिशन के तहत प्रगतिरत 13 हजार 183 योजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं 2027-28 में 7352 योजनाओं को पूर्ण किया जाएगा। इस दौरान क्रमशः 22 और 48 समूह जल प्रदाय …

स्वामित्व योजना बनी सहारा, हितग्राही दिलीप वर्मा को मिली अपने घर की नई उम्मीद

​रायपुर. "मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना से मुझे ज़मीन का मालिकाना हक मिल गया है। अब मुझे अपना खुद का पक्का आवास बनाने में बहुत आसानी होगी। इस मदद के लिए छत्तीसगढ़ शासन को मेरा बहुत-बहुत धन्यवाद।" यह भावुक और कृतज्ञता भरे शब्द बलौदाबाजार के करहीबाजार में आयोजित 'सुशासन तिहार' के दौरान हितग्राही दिलीप कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से कहे। ​सुशासन तिहार में सीधे संवाद से बढ़ी खुशियां राजस्व विभाग की 'स्वामित्व योजना' ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रही है। करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर  में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने योजना के तहत लाभान्वित हितग्राहियों से सीधा संवाद किया। इसी कड़ी में जब मुख्यमंत्री ने दिलीप कुमार वर्मा से बात की, तो दिलीप ने अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि ज़मीन का कानूनी हक मिलने से उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है और अब वे बिना किसी अड़चन के अपना आशियाना बना सकेंगे हर गरीब का हो अपना पक्का मकान: मुख्यमंत्री हितग्राही दिलीप वर्मा की बात सुनकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उन्हें सहर्ष बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि हमारी सरकार का मुख्य ध्येय अंतिम व्यक्ति तक सुशासन का लाभ पहुंचाना है। स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का असली हक मिल रहा है, जिससे न केवल उन्हें बैंक लोन मिलने में आसानी होगी, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बनाने की राह भी आसान होगी। दिलीप कुमार जी जैसे लाखों परिवारों के चेहरे पर आई यह मुस्कान ही हमारी सरकार की असली ताकत है। सुशासन का मतलब ही यही है कि हर नागरिक को उसका अधिकार बिना किसी परेशानी के मिले।

बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ

रायपुर. बस्तर के सुदूर वनांचलों से डर और उपेक्षा का अंधेरा अब छंटने लगा है, और इसकी गवाह बनी सुकमा की वो तस्वीरें जहां जिले के मुखिया खुद दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना जनता के द्वार पहुंचे रहे हैं। कलेक्टर अमित कुमार और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने कोंटा विकासखंड के धुर नक्सल प्रभावित रहे और पहुंचविहीन गांवों भेज्जी, मैलापुर, दंतेशपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा का ऐतिहासिक दौरा किया। सालों से मुख्यधारा से कटे इन गांवों के उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों पर जब अधिकारियों का काफिला मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकला, तो यह सिर्फ एक निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीणों के मन में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास जगाने का सफर बन गया। आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर को अपने बीच पाकर ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। चौपाल पर संवाद और 'सुशासन परिसर' की सराहना अधिकारियों ने बुर्कलंका में बन रहे 'सुशासन परिसर' का बारीकी से निरीक्षण किया। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने दुर्गम घने जंगलों के बीच बसे इस गांव में बने परिसर की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी बताया। इस बहुद्देशीय परिसर में एक ही बाउंड्रीवाल के भीतर स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन को समेटा गया है, जो ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सारी मूलभूत सुविधाएं देने का बेहतरीन मॉडल है। सुशासन शिविर के दौरान मैलासुर पंचायत में अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर सरपंच, पटेल, मुखिया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी और निर्माणाधीन कार्यों को समय पर पूरा करने का संकल्प दोहराया। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगातें प्रशासन का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीणों की सेहत और बच्चों की शिक्षा पर रहा। कलेक्टर ने संवेदनशील पहल करते हुए भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में इसके लिए तत्काल जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए। गछनपाल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों के रहने के लिए स्टाफ क्वार्टर को मंजूरी दी गई, ताकि चौबीसों घंटे इलाज की सुविधा मिल सके। शिक्षा की लौ को मजबूत करने के लिए दंतेषपुरम में निर्माणाधीन प्राथमिक शाला भवन को बारिश के मौसम से पहले हर हाल में पूरा करने का निर्देश शिक्षा विभाग को दिया गया, साथ ही अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। पेयजल, आजीविका और कृषि को मिला नया जीवन गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता लाने के लिए कलेक्टर ने आजीविका के नए द्वार खोले। मैलासुर और दंतेषपुरम के ग्रामीणों की मांग पर मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हाँकन किया गया और ग्रामीणों को मछली बीज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दंतेषपुरम में एक नए डैम और तालाब निर्माण की बड़ी स्वीकृति दी गई, साथ ही क्रेड़ा विभाग को पानी टंकी बनाने के निर्देश दिए गए। मैलासुर और बोदराजपदर में पेयजल संकट को खत्म करने के लिए नए हैंडपंप और बोरिंग की तत्काल मंजूरी दी गई। पीएचई विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में जल जीवन मिशन का काम पूरा हो चुका है, वहां बिना देरी किए तत्काल जलापूर्ति शुरू की जाए। जहाँ काम पूरा नहीं हुआ है वहां तेजी से कार्य पूरा कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाये। कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में 'सुशासन परिसर' और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण वाकई प्रेरणादायी है। कलेक्टर ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो चुके इन अंतिम छोर के गांवों तक विकास की रफ्तार पहुंचाना है। बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण तक शासन की योजनाओं का सीधा लाभ पहुंच सके। सड़कों से जुड़ेंगे दिल और रास्ते, विकास की रफ्तार होगी तेज बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहे पहुंचविहीन रास्तों को अब पक्की सड़कों की मजबूती मिलने जा रही है। कलेक्टर ने बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेशपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजेएसवाई) का तत्काल प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। आरईएस विभाग द्वारा डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम का भी मुआयना किया गया। मोटर साइकिल के पहियों से शुरू हुआ प्रशासन का यह सफर सुकमा के इन दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिख गया है, जो यह साबित करता है कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर की पहचान बंदूक से नहीं, बल्कि सुशासन और समृद्धि से हो रही है। केलक्टर के निरीक्षण के दौरान एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला, जनपद सीईओ सुमित ध्रुव, एडिशनल एसपी मनोज तिर्की, कार्यपालन अभियंता पीएमजेएसवाई रविंद्र ताती, महिला एवं बाल विकास अधिकारी रितिश टंडन, बीएमओ डॉ. दीपेश चंद्राकर सहित अन्य जिलाधिकारी मौके पर उपस्थित थे।

भूजल संरक्षण की बड़ी पहल, गांव-गांव के कुएं और बोरवेल होंगे डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल

दुर्ग. भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जिले में अब गांवों के कुओं और बोरवेल की जल स्थिति का वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशानुसार जिले की सभी ग्राम पंचायतों में 25 मई से 15 जून तक “जलदूत” मोबाइल एप के माध्यम से विशेष प्री-मानसून भूजल सर्वे अभियान संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत चयनित खुले कुओं एवं बोरवेल में उपलब्ध पानी की गहराई मापकर उसका डिजिटल डेटा ऑनलाइन एप में दर्ज किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा तकनीकी अमले को निर्देशित किया गया है कि ग्राम पंचायतों में जलदूत एप के माध्यम से बोरवेल के वाटर लेवल की भी जांच सुनिश्चित की जाए। सर्वे के दौरान जलस्तर मापन प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन हो सके। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता, जलस्तर में गिरावट और जल संकट की संभावित स्थिति का आकलन करना है। जलदूत एप के माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर भविष्य में जल संरक्षण संरचनाओं की योजना, वर्षा जल संचयन कार्यों की प्राथमिकता तय करने तथा जल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। अभियान के तहत वर्ष में दो बार डेटा संग्रह किया जाएगा। पहली बार बारिश पूर्व यानी प्री-मानसून अवधि में तथा दूसरी बार बारिश के बाद पोस्ट- मानसून अवधि में कुओं का जलस्तर मापा जाएगा। इससे वर्षा के बाद भूजल स्तर में हुए सुधार का तुलनात्मक अध्ययन भी संभव हो सकेगा। जिला प्रशासन ने सभी जनपद पंचायतों एवं ग्राम पंचायतों को अभियान की तैयारी समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। मापन अधिक वैज्ञानिक और एकरूप मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार इस बार भूजल स्तर मापन की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और एकरूप बनाया गया है। सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि कुओं की माप केवल मेजरिंग टेप के माध्यम से ही की जाए, ताकि आंकड़ों की शुद्धता और विश्वसनीयता बनी रहे। सर्वे में सूखे कुएं भी शामिल सीईओ जिला पंचायत ने बताया कि इस बार ऐसे सूखे कुएं, जिनमें पानी उपलब्ध नहीं है, उन्हें भी सर्वे में शामिल किया जाएगा। इन मामलों में जलस्तर के स्थान की कुल गहराई दर्ज की जाएगी। इसके लिए मंत्रालय ने प्री-मानसून 2026 पर कुएं सर्वे में “कुएं की कुल गहराई” नामक नया पैरामीटर जलदूत मोबाइल एप में जोड़ा है। इससे भूजल संरचना, जल उपलब्धता तथा जलस्तर में होने वाले बदलावों का अधिक विस्तृत विश्लेषण किया जा सकेगा।

सड़क सुरक्षा के साथ पर्यावरण पर जोर, ट्रैफिक कर्मियों को बांटी गई सेफ्टी जैकेट

रायपुर. ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (RADA) द्वारा सामाजिक दायित्व (CSR) गतिविधि के अंतर्गत ट्रैफिक विभाग को रिफ्लेक्टिव सेफ्टी जैकेट वितरण कार्यक्रम का आयोजन ट्रैफिक थाना, कालीबाड़ी चौक में किया गया। कार्यक्रम में रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ल एवं राडा अध्यक्ष रविंदर भसीन द्वारा ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को सेफ्टी जैकेट वितरित किए गए। इस अवसर पर राडा की ओर से अमर परवानी, मनीष राज सिंघानिया, शशांक शाह, विवेक गर्ग, कैलाश खेमानी, विवेक अग्रवाल, सूरज परवानी एवं अभिनव ऋषि उपस्थित रहे। इस अवसर पर राडा अध्यक्ष रविंदर भसीन ने कहा कि उन्हें रायपुर ट्रैफिक पुलिस पर गर्व है, जो भीषण गर्मी में भी 24X7 शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में लगे रहते हैं। उन्होंने रायपुर कमिश्नर एवं ट्रैफिक विभाग को आश्वस्त किया कि सड़क सुरक्षा एवं जनहित के किसी भी कार्यक्रम में राडा हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा। कार्यक्रम के दौरान रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला ने राडा से पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की। इस पर राडा के उपाध्यक्ष कैलाश खेमानी ने आश्वासन दिया कि वृक्षारोपण हेतु शासन से भूमि की मांग की जाएगी तथा हर वर्ष बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा। साथ ही राडा द्वारा लगाए गए पौधों की पूरी देखरेख एवं संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाई जाएगी। यह कार्यक्रम सड़क सुरक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति राडा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ

बदलते बस्तर की नई तस्वीर, बंदूक के साए से सुशासन की छांव तक बाइक पर सवार होकर नक्सलियों के गढ़ रहे गांवों में पहुंचे कलेक्टर-सीईओ पहुँचविहीन गांव मैलासुर, दंतेषपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका में ग्रामीणों को दी सौगात स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया निर्माण की तत्काल स्वीकृति रायपुर बस्तर के सुदूर वनांचलों से डर और उपेक्षा का अंधेरा अब छंटने लगा है, और इसकी गवाह बनी सुकमा की वो तस्वीरें जहां जिले के मुखिया खुद दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना जनता के द्वार पहुंचे रहे हैं। कलेक्टर अमित कुमार और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर ने कोंटा विकासखंड के धुर नक्सल प्रभावित रहे और पहुंचविहीन गांवों भेज्जी, मैलापुर, दंतेशपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा का ऐतिहासिक दौरा किया। सालों से मुख्यधारा से कटे इन गांवों के उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों पर जब अधिकारियों का काफिला मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकला, तो यह सिर्फ एक निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीणों के मन में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास जगाने का सफर बन गया। आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर को अपने बीच पाकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। चौपाल पर संवाद और श्सुशासन परिसरश् की सराहना अधिकारियों ने बुर्कलंका में बन रहे श्सुशासन परिसरश् का बारीकी से निरीक्षण किया। कलेक्टर अमित कुमार ने दुर्गम घने जंगलों के बीच बसे इस गांव में बने परिसर की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी बताया। इस बहुद्देशीय परिसर में एक ही बाउंड्रीवाल के भीतर स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन को समेटा गया है, जो ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सारी मूलभूत सुविधाएं देने का बेहतरीन मॉडल है। सुशासन शिविर के दौरान मैलासुर पंचायत में अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर सरपंच, पटेल, मुखिया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी और निर्माणाधीन कार्यों को समय पर पूरा करने का संकल्प दोहराया। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगातें प्रशासन का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीणों की सेहत और बच्चों की शिक्षा पर रहा। कलेक्टर ने संवेदनशील पहल करते हुए भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में इसके लिए तत्काल जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए। गछनपाल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों के रहने के लिए स्टाफ क्वार्टर को मंजूरी दी गई, ताकि चौबीसों घंटे इलाज की सुविधा मिल सके। शिक्षा की लौ को मजबूत करने के लिए दंतेषपुरम में निर्माणाधीन प्राथमिक शाला भवन को बारिश के मौसम से पहले हर हाल में पूरा करने का निर्देश शिक्षा विभाग को दिया गया, साथ ही अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। पेयजल, आजीविका और कृषि को मिला नया जीवन गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता लाने के लिए कलेक्टर ने आजीविका के नए द्वार खोले। मैलासुर और दंतेषपुरम के ग्रामीणों की मांग पर मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हाँकन किया गया और ग्रामीणों को मछली बीज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दंतेषपुरम में एक नए डैम और तालाब निर्माण की बड़ी स्वीकृति दी गई, साथ ही क्रेड़ा विभाग को पानी टंकी बनाने के निर्देश दिए गए। मैलासुर और बोदराजपदर में पेयजल संकट को खत्म करने के लिए नए हैंडपंप और बोरिंग की तत्काल मंजूरी दी गई। पीएचई विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में जल जीवन मिशन का काम पूरा हो चुका है, वहां बिना देरी किए तत्काल जलापूर्ति शुरू की जाए। और जहाँ काम पूरा नहीं हुआ है वहां तेजी से कार्य पूरा कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाये।  कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में श्सुशासन परिसरश् और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण वाकई प्रेरणादायी है। कलेक्टर ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हो चुके इन अंतिम छोर के गांवों तक विकास की रफ्तार पहुंचाना है। बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को पूरी गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण तक शासन की योजनाओं का सीधा लाभ पहुंच सके। सड़कों से जुड़ेंगे दिल और रास्ते, विकास की रफ्तार होगी तेज बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहे पहुंचविहीन रास्तों को अब पक्की सड़कों की मजबूती मिलने जा रही है। कलेक्टर ने बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेशपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजेएसवाई) का तत्काल प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारीयांे को दिए। आरईएस विभाग द्वारा डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम का भी मुआयना किया गया। मोटरसाइकिल के पहियों से शुरू हुआ प्रशासन का यह सफर सुकमा के इन दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिख गया है, जो यह साबित करता है कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब बस्तर की पहचान बंदूक से नहीं, बल्कि सुशासन और समृद्धि से हो रही है। केलक्टर के निरीक्षण के दौरान एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला, जनपद सीईओ सुमित ध्रुव, एडिशनल एसपी मनोज तिर्की, कार्यपालन अभियंता पीएमजेएसवाई रविंद्र ताती, महिला एवं बाल विकास अधिकारी रितिश टंडन, बीएमओ डॉ. दीपेश चंद्राकर सहित अन्य जिलाधिकारी मौके पर उपस्थित थे।

परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानकी और नकद फसलों पर दे रहे हैं जोर

जशपुर के किसान खेती में बना रहे हैं अलग पहचान परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानकी और नकद फसलों पर दे रहे हैं जोर चाय, नाशपाती, लीची, स्ट्रॉबेरी के बाद अब सेब की खेती में आजमा रहे हैं हाथ रायपुर जशपुर हमेशा फसल विविधताओं के लिए जाना जाता रहा है। यहां के किसान परंपरागत फसलों के साथ उद्यानकी और नकद फसलों पर भी जोर दे रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जशपुर में उद्यानिकी फसलों के लिए अनुकूल वातावरण को देखते हुए किसानों को उद्यानिकी और नगद फसलों के लिए लगातार  प्रोत्साहित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर स्थानीय जिला प्रशासन, नाबार्ड और उद्यानिकी  विभाग द्वारा इस दिशा में विशेष प्रयास किया जा रहा है। किसानों  को उद्यानिकी फसलों के लिए विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इन समन्वित प्रयासों से पिछले दो-ढाई सालों में यहाँ के किसान परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानिकी एवं नगदी फसलों में रुचि लेने लगे हैं। जशपुर के किसान अब चाय, लीची, स्ट्राबेरी, नाशपाती के साथ सेब के बगान भी तैयार कर रहे हैं। जिला प्रशासन, उद्यानिकी विभाग, रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (त्म्।क्ै) व नाबार्ड के समन्वित प्रयासों से जशपुर ने फलोत्पादन व बागवानी में नई पहचान बनाई है। इन पहलों से स्थानीय किसानों की आय सुदृढ़ हुई है। कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।  जशपुर में सेब उत्पादन वर्ष 2023 में आरंभ हुआ। सेब खेती अब लगभग 410 एकड़ में विस्तारित है, जिसमें लगभग 410 किसान सेब की खेती कर रहे हैं। जिले के मनोर व बगीचा विकासखंड तथा शैला, छतौरी, करदना व छिछली जैसे पंचायतों में लगाए गए सेब के वृक्षों ने इस वर्ष उत्कृष्ट गुणवत्ता व आकार के फल दिए हैं। । स्थानीय किसान बताते हैं कि जशपुर के सेब स्वाद और गुणवत्ता के लिहाज से कश्मीर व हिमाचल के सेबों के समकक्ष हैं। रूरल डेव्हलपमेंट एंड डेव्हलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष श्री राजेश गुप्ता ने बताया कि जशपुर जिले के 410 किसानों ने अपने 1-1 एकड़ जमीन पर सेब की खेती कर रहे हैं।  इसी तरह जिले में नाशपाती के बाग लगभग 3,500 एकड़ में फैले हुए हैं, जहाँ 3,500 से अधिक किसान नाशपाती की खेती कर रहे हैं। जिले के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई, गीधा आदि लाखों में नाशपाती की खेती हो रही है। यहीं से नाशपाती पैक कर दिल्ली, उत्तरप्रदेश और उड़ीसा सहित दूसरे राज्यों में भेजी जाती है। नाशपाती का वार्षिक उत्पादन लगभग 1,75,000 क्विंटल तक पहुँच चुका है। किसानों को नाशपाती से प्रति एकड़ वार्षिक आमदनी लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये मिल रहा है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बाजार पहुँच जैसी योजनाएँ हैं, जिनसे किसान आत्मनिर्भर बने हैं और नई फसल विविधिकरण के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण प्राप्त कर रहे हैं। जशपुर में चाय की खेती पहले से होती आ रही है और यहां की चाय पत्ती की गुणवत्ता अच्छी है। अब जशपुर में सेब व नाशपाती उत्पादन के सफल विकास से जशपुर न केवल नए बाजारों के रूप में स्थापित हुआ है बल्कि स्थानीय किसानों के जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। भविष्य में इन फसलों का दायरा और विस्तारित करने की योजना है।

कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई पर खुशवंत साहेब का तंज, ‘जनसेवा नहीं, जेब सेवा चाहिए’

रायपुर. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को लेकर टीएस सिंहदेव और दीपक बैज में ठन गई है. इस पर दोनों के बीच चल रही बयानबाजी पर खुशवंत साहेब ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में कई गुट हैं. टीएस सिंहदेव गुट, दीपक बैज गुट, भूपेश गुट ना जाने और इनके कितने गुट सामने आएंगे कांग्रेस में. लगातार गुटबाजी चल रही है. जब चुनाव होता है, तब कांग्रेस में कुर्सी तोड़ कार्यक्रम चलता है. ये सिर्फ भ्रष्टाचार जानते हैं. खुशवंत साहेब ने कहा कि कांग्रेस हमेशा परिवारवाद की पार्टी रही है. ये अपने परिवार को ही नहीं संभाल पा रहे और देश संभालने की बात करते हैं. भारत जोड़ने की बात करते हैं, पहले अपनी पार्टी को तो जोड़ लें. आपस में युद्ध कर रहे हैं. इससे पता चलता है कि इनके पास कोई विचारधारा, कोई सोच नहीं है. जेब भरने और भ्रष्टाचार करने के लिए सरकार में आना चाहते हैं. सीएम के दिल्ली दौरे पर मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दिल्ली विकास और उन्नति के लिए जाते हैं. पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करते हैं. छत्तीसगढ़ के लिए सौगात लेकर आते हैं. कांग्रेस पहले खुद को संभाल ले. केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर बीजेपी के घर-घर संपर्क अभियान चलाए जाने पर मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि हमारा तो सुशासन तिहार चारों तरफ चल रहा है. जन चौपाल लगाकर सीधे जनता से बात कर रहे हैं. जनता खुश है. वहीं कांग्रेस के पिटाई वाले बयान पर उन्होंने कहा कि जनता उन्हें पहले ही पिट चुकी है. 2023 और 2024 के चुनाव में भी पिट चुके हैं. आने वाले 2028 के चुनाव में भी जनता इन्हें कूटेगी-पिटेगी. इनके कार्यकर्ता और नेता ही एक-दूसरे को पिट रहे हैं. पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि पर खुशवंत साहेब ने कहा कि दूसरे देशों से तुलना करें, वहां कीमतें कैसे बढ़ रही हैं, और भारत में कीमत कितनी बढ़ रही हैं. पीएम मोदी चाहते हैं कि जनता को ज्यादा दिक्कत न हो, इसलिए ज्यादा दाम नहीं बढ़ रहे. कांग्रेस को समझना चाहिए कि युद्ध की स्थिति के कारण समस्याएं आ रही हैं. पढ़े-लिखे हैं, तो समझना चाहिए. भाजपा प्रशिक्षण शिविर को लेकर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि भाजपा एक विचारधारा पर चलने वाली पार्टी है, अनेकों प्रकार के संगठनात्मक कार्य चलते रहते हैं. आज जिला प्रशिक्षण शिविर चल रहा है. प्रत्येक जिले में प्रशिक्षण शिविर लग रहा. कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण होगा, उन्हें जानकारी मिलेगी.

आजीवन कारावास के बाद ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी पर गिरी गाज, सेवा से बर्खास्त

दुर्ग. विशेष न्यायालय (एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम) रायपुर द्वारा गंभीर आपराधिक प्रकरण में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए संभागीय संयुक्त संचालक कृषि, संभाग- दुर्ग श्रीमती गोपिका गभेल ने त्वरित शासकीय प्रक्रिया के तहत गंभीर कदाचरण के दोषी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से पदच्युत (बर्खास्त कर दिया गया है। शासन के नियमों के तहत नौकरी से निष्कासित किए जाने के बाद अब वे भविष्य में किसी भी शासकीय नियोजन (सरकारी नौकरी) के लिए पूरी तरह से अयोग्य होंगे। इसके साथ ही, दोषसिद्धि की तिथि से उन्हें किसी भी प्रकार के शासकीय सेवा परिलाभों की पात्रता नहीं होगी। ज्ञात हो कि विकासखण्ड मानपुर, जिला मोहला- मानपुर – अं. चौकी के क्षेत्र सीतागांव में पदस्थ रहे ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी देवनारायण साहू, पिता रोहित साहू के विरुद्ध नगर पुलिस अधीक्षक माना, जिला रायपुर द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर 08 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इस हेतु उन्हें पूर्व में उप संचालक कृषि, जिला मोहला मानपुर- अं. चौकी द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित भी किया गया था। इस गंभीर आपराधिक मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट रायपुर द्वारा 02 मई 2026 को देवनारायण साहू को भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 (2) (ड), धारा 69 और एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3 (2) (ट) के तहत दोषी पाते हुए क्रमशः 10-10 वर्ष के कठोर कारावास तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत आजीवन कारावास सहित अर्थदंड से दंडित किया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर कोपरा जलाशय में जागरूकता कार्यक्रम, संरक्षण का दिया संदेश

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर कोपरा जलाशय में जागरूकता कार्यक्रम स्वच्छता अभियान, बर्ड वॉक और सीड बॉल निर्माण से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश रायपुर अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर कोपरा रिजर्वायर परिसर में पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन को लेकर जनजागरण कार्यक्रम आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्रकृति संरक्षण के लिए सामूहिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना था।         आयोजकों ने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। स्वच्छता से हुई शुरुआत             कार्यक्रम की शुरुआत क्लीनलीनेस ड्राइव से हुई। नागरिकों, स्वयंसेवकों और पर्यावरण प्रेमियों ने जलाशय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। प्रतिभागियों ने स्वच्छ और हरित वातावरण बनाए रखने का संकल्प लिया। बर्ड वॉक में पक्षियों का अवलोकन              इसके बाद आयोजित बर्ड वॉक में प्रतिभागियों ने क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न पक्षियों का अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में पक्षियों की अहम भूमिका है। उन्होंने पक्षियों और जैव विविधता के पारस्परिक संबंधों की जानकारी दी। सीड बॉल निर्माण बना आकर्षण             वृक्षारोपण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित सीड बॉल निर्माण गतिविधि आकर्षण का केंद्र रही। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सीड बॉल तैयार किए। यह पहल वन क्षेत्र विस्तार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हस्ताक्षर अभियान से जताई प्रतिबद्धता             जैव विविधता संरक्षण, प्रकृति संवर्धन और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति उपस्थित लोगों ने हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से   अपनी प्रतिबद्धता जताई। सभी ने पर्यावरण बचाने और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया।            कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों, नागरिकों और प्रकृति प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास के संदेश के साथ हुआ।