samacharsecretary.com

गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 520 लीटर ताड़ी के साथ दो गिरफ्तार, FSL जांच जारी

गरियाबंद जिले में देवभोग पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 520 लीटर अवैध ताड़ी के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी शिवा कुम्भम (25 वर्ष) और उसके पिता यादईया कुम्भम (50 वर्ष) को आबकारी अधिनियम के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी मात्रा में कथित छिंद रस, जिसे ताड़ी कहा जाता है जब्त किया गया है। थाना प्रभारी फैजुल हुदा शाह ने बताया कि तेलंगाना के नालगुंडा जिले के निवासी पिता-पुत्र इस क्षेत्र में लगातार ठिकाना बदलकर अवैध ताड़ी का कारोबार कर रहे थे। शिवा कुम्भम पहले भी 25 लीटर ताड़ी के साथ पकड़ा जा चुका है। जमानत मिलने के बाद वह कालाहांडी सीमा के खुटगांव के गौठान के पास अवैध बिक्री में जुटा हुआ था। पुलिस ने आरोपी से कुल 27,400 रुपये मूल्य का ताड़ी और नगद जब्त किया। जाँच के लिए एफएसएल भेजी जाएगी जब्त ताड़ी देवभोग क्षेत्र में ताड़ी का रहस्य वर्षों से चर्चा का विषय रहा है। पिछले कई सालों से इस क्षेत्र में सक्रिय ताड़ी कारोबारी रोजाना डेढ़ से 2 हजार लीटर ताड़ी की खपत कराते थे। अब पुलिस ने उच्च अधिकारियों की अनुमति लेकर जब्त ताड़ी का एफएसएल (Forensic Science Laboratory) परीक्षण कराने की तैयारी शुरू कर दी है। फर्जी ताड़ी के सेवन से हो रही मौतें ! पूर्व कारोबारी सूत्रों के अनुसार, आंध्र और तेलंगाना में तैयार मीठी पावडर को बसों के माध्यम से देवभोग लाया जाता है। 1 किलो पावडर से लगभग 170 लीटर नकली ताड़ी तैयार होती है, जिसे 50 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जाता है। इसमें नींद लाने वाली दवाओं (बेंजोडाइजिपम ग्रुप) का इस्तेमाल किया जाता है। औसतन 2,500 रुपये की लागत में 10,000 रुपये का ताड़ी उत्पाद तैयार होता है। सूत्रों ने बताया कि गांव में प्रभावशाली लोगों और आबकारी अधिकारियों को भी कमाई का 30 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था। पिछले एक साल में देवभोग क्षेत्र में ताड़ी के सेवन से 10 से अधिक लोगों की मौत हुई है। मृतक फैटी लिवर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे। बीएमओ प्रकाश साहू ने बताया कि मीठी पावडर में सेकरीन और कैल्शियम की अधिकता वाले तत्व पाए जाते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर अरविंद तिवारी ने चेताया कि नियमित सेवन से किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और फैटी लिवर और नेफ्रो जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कैसा बनाया जाता है असली छिंद रस ? जानकार बताते हैं कि असली छिंद रस छिंद और ताड़ पेड़ के तने को छेदकर प्राप्त किया जाता है। एक बड़े पेड़ से दिनभर में केवल 3 से 5 लीटर रस ही एकत्रित होता है। ताजा रस स्वास्थ्यवर्धक होता है और 3-5 घंटे के भीतर उसमें खमीर विकसित होकर प्राकृतिक मादकता लाता है। जबकि नकली ताड़ी में रासायनिक पावडर और दवाओं का प्रयोग तुरंत मादक बनाने के लिए किया जाता है। पिछले डेढ़ साल में की गई 16 बड़ी कार्रवाई पिछले डेढ़ साल में देवभोग थाना क्षेत्र में आबकारी विभाग और पुलिस ने मिलकर 16 बड़ी कार्रवाई की है। हालांकि पहले एफएसएल जांच कराने की प्रक्रिया जटिल होने के कारण लंबित रही, लेकिन अब पुलिस ने जप्त रस का परीक्षण कराने की पहल शुरू कर दी है। थाना प्रभारी फैजुल शाह ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर अवैध पेय पदार्थ की बिक्री पर रोक और सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। थाना प्रभारी फैजुल शाह ने कहा कि जो लोग सीमा-वर्ती इलाकों का फायदा उठाकर अवैध बिक्री में शामिल होने की कोशिश करेंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर आगे जप्त पेय पदार्थ की जांच और संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पूर्वी रीजनल नक्सल मोर्चे का पत्र आया सामने, ब्यूरो के तेवर फिर तीखे

जगदलपुर लगातार नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास के दौर के बीच, अब नक्सल संगठन के पूर्वी रीजनल ब्यूरो का नया बयान सामने आया है. यह ब्यूरो झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय बताया जाता है. ब्यूरो की ओर से जारी बयान में लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया गया है. बताया जा रहा है कि इस बयान के पीछे नक्सल नेता मिशिर बेसरा का नाम प्रमुखता से सामने आया है, जिसे इस रीजन का सबसे बड़ा नक्सली माना जाता है. बेसरा और उसके संगठन ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में लगातार हो रहे नक्सल आत्मसमर्पण की निंदा की है. बयान में कहा गया है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी “संगठन के गद्दार” हैं और राज्य सरकार की नीति में फंस गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह बयान नक्सलियों की घटती ताकत और संगठनात्मक हताशा का संकेत है. बस्तर से लेकर सीमाई राज्यों तक नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की बढ़त ने अब संगठन की जमीनी पकड़ कमजोर कर दी है.

भर्ती घोटाला मामला: डबल बेंच का फैसला — 37 चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति पर अब कोई रोक नहीं

 बिलासपुर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2021-22 भर्ती घोटाले से जुड़ा मामला अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए उन 37 चयनित अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिनके खिलाफ अब तक सीबीआई (CBI) ने कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति (ज्वाइनिंग) दी जाए। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच में हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। सिंगल बेंच ने पहले ही इन 37 अभ्यर्थियों के पक्ष में आदेश दिया था, जिसके अनुसार जिन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है या चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है, उन्हें ज्वाइनिंग दी जानी चाहिए। मामला CGPSC द्वारा 2021-22 में आयोजित विभिन्न सरकारी पदों की परीक्षा और चयन प्रक्रिया से जुड़ा है। चयन प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी थी। जांच में कुछ उम्मीदवारों पर संदेह जताया गया और कुछ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि बाकी अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग पर रोक लगा दी गई थी। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे 37 अभ्यर्थियों, जिनमें अमित कुमार समेत अन्य चयनित उम्मीदवार शामिल हैं, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने दलील दी थी कि केवल जांच के नाम पर बिना चार्जशीट के उनकी नियुक्ति रोकना अनुचित है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला देते हुए राज्य सरकार को ज्वाइनिंग देने का निर्देश दिया था। हालांकि, सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए डबल बेंच में अपील की। अब डबल बेंच ने भी सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए सरकार की याचिका खारिज कर दी है। डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि, “जब तक किसी अभ्यर्थी के खिलाफ आपराधिक चार्जशीट दाखिल नहीं होती, उसे नियुक्ति से वंचित रखना न्यायोचित नहीं है।” इस फैसले के बाद अब उन सभी 37 चयनित उम्मीदवारों के लिए राहत का रास्ता साफ हो गया है, जो लंबे समय से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। इस निर्णय को न केवल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और न्यायिक निष्पक्षता का उदाहरण भी पेश करता है। अब राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, उन सभी उम्मीदवारों को जल्द ज्वाइनिंग देने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी, जिनके खिलाफ सीबीआई ने अब तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है।

मुख्यधारा में वापसी: 17 लाख की इनामी नक्सली कमला सोरी ने छोड़ी नक्सल राह

खैरागढ़ छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में आज पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है. लंबे समय से फरार चल रही 17 लाख रुपए की इनामी हार्डकोर महिला नक्सली कमला सोरी उर्फ उंगी उर्फ तरूणा (आयु 30 वर्ष) ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत यह आत्मसमर्पण नक्सल उन्मूलन अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. कमला सोरी वर्ष 2011 से प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़ी रही. वह माड़ डिवीजन, बस्तर एमएमसी (मध्य प्रदेश–महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़) जोन की सक्रिय सदस्य थी और एमएमसी जोन प्रभारी रामदर की टीम की प्रमुख सदस्य के रूप में काम करती थी. इस दौरान उसने कई हिंसक वारदातों में भूमिका निभाई और पुलिस बलों पर हमले की योजनाओं में भी शामिल रही.  कमला सोरी मूल रूप से ग्राम अरलमपल्ली, थाना दोरनापाल, जिला सुकमा की निवासी है. वह छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र (गोंदिया जिला) और मध्य प्रदेश की सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय रही. तीनों राज्यों की पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर कुल 17 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शासन की विकासोन्मुखी नीतियों, ग्रामीण अंचलों में तेजी से चल रहे निर्माण कार्यों, सड़क और संचार सुविधाओं के विस्तार तथा सिविक एक्शन कार्यक्रमों के चलते नक्सल प्रभावित इलाकों में अब विश्वास का माहौल बन रहा है. सुरक्षा बलों द्वारा निरंतर संवाद और जनसंपर्क से नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इसी मुहिम से प्रभावित होकर कमला सोरी ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया. आत्मसमर्पण के बाद कमला सोड़ी को छत्तीसगढ़ शासन की नीति के तहत ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि तत्काल प्रदान की गई. साथ ही पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यह आत्मसमर्पण शासन की नीतियों और सुरक्षा बलों की निरंतर कोशिशों का नतीजा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि कमला सोरी का यह कदम उन अन्य नक्सलियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा जो अभी भी जंगलों में सक्रिय हैं.

विजय शर्मा का पलटवार: राहुल और तेजस्वी पर निशाना साधते हुए कहा – SIR मतदाता सूची हो पारदर्शी

रायपुर/पटना बिहार विधानसभा चुनाव के मैदान में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला हैं. पटना की सभा में शर्मा ने कहा, “राहुल बाबा को SIR पर भरोसा रखना चाहिए. मतदाता सूची का शुद्धिकरण ही SIR है. गलती हुई तो सुधार भी हो रहा है.” राहुल के विदेशी दौरे पर तंज कसते हुए शर्मा ने कहा, “सेना के पराक्रम पर भरोसा रखो, विदेश जाकर भारत को बदनाम मत करो.” नक्सल मुद्दे पर सख्त संदेश दिया, “हिंसा छोड़ो, पुनर्वास मिलेगा. नहीं तो अंजाम भुगतना पड़ेगा.”  तेजस्वी यादव के 2 करोड़ नौकरी वादे पर हंसते हुए बोले, “लालू परिवार को सत्ता चाहिए, जनता को नौकरी नहीं. लोगों ने वादों का भरोसा छोड़ दिया है.” शर्मा ने एनडीए की लहर का दावा किया और कहा कि “बिहार में फिर कमल खिलेगा.”

ओडिशा उपचुनाव में गरजे सीएम विष्णुदेव: बोले, भाजपा लाएगी परिवर्तन की लहर

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज पड़ोसी राज्य ओडिशा के नुआपाड़ा विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की धुआंधार चुनावी हुंकार भरने जा रहे हैं. संगठन के निर्देश पर सीएम साय, विधायक पुरंदर मिश्रा और सह-प्रभारी लता उसेंडी के साथ पंचमपुर में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे. ओडिशा रवाना होने से पहले सीएम साय ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि “नुआपाड़ा में भाजपा की बहुमत वाली जीत पक्की है. हम विकास की गारंटी दे रहे हैं.” बता दें, नुआपाड़ा सीट दिवंगत बीजेडी नेता राजेंद्र ढोलकिया के निधन से खाली हुई है. 11 नवंबर को मतदान होने हैं और 14 को नतीजे सामने आएंगे. भाजपा ने इस उपचुनाव के लिए 40 स्टार प्रचारकों की फौज उतारी है, जिसमें ओडिशा सीएम मोहन माझी, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अश्विनी वैष्णव समेत मुख्यमंत्री साय शामिल हैं. इसी बीच, एग्रीस्टेक पोर्टल में रिकॉर्ड पंजीयन के बावजूद कुछ किसानों के खेत का रकबा कम दिखने की शिकायतें सामने आईं. सीएम साय ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए-ई-केवाईसी में गड़बड़ी सुधारो, डुप्लीकेशन हटाओ. इस बार पिछले साल से एक लाख ज्यादा किसानों ने पंजीयन कराया. धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू, पारदर्शिता के लिए कमांड कंट्रोल सेंटर भी गठित. बिहार में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सीएम साय ने पटना में हुंकार भरी. उन्होंने कहा कि एनडीए स्पष्ट बहुमत से सरकार बना रहा है. राजद-कांग्रेस ने तो पशुओं का चारा भी खा लिया, लेकिन बिहार की जनता पीएम मोदी पर भरोसा जता रही है.

छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का शानदार स्टाल आकर्षण का केंद्र

 छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का भव्य स्टाल  छत्तीसगढ़ राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का शानदार स्टाल आकर्षण का केंद्र राज्य उत्सव में जिंदल स्टील का भव्य प्रदर्शन, मिली लोगों की बड़ी प्रतिक्रिया रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर स्थित मेला स्थल में आयोजित भव्य राज्योत्सव 2025 के दौरान जिंदल स्टील ने एक आकर्षक और जानकारीपूर्ण स्टॉल लगाया, जिसने वहां आने वाले लोगो का ध्यान अपनी ओर खींचा । जिंदल स्टील के इस स्टॉल में कंपनी के विभिन्न उत्पादों, आधुनिक तकनीक, मशीनरी डिवीजन के उन्नत उपकरणों एवं CSR गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही, कंपनी द्वारा पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ राज्य के विकास में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को भी प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया। स्टॉल में जिंदल स्टील के स्टील, स्ट्रक्चरल्स, रेल्स, प्लेट्स, मशीनरी पार्ट्स इत्यादि उत्पादों की जानकारी के साथ-साथ उनकी निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों को भी दर्शाया गया। इसके अलावा, कंपनी के CSR  कार्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी गतिविधियों की झलक भी दिखी. राज्योत्सव के दौरान बड़ी संख्या में आये लोग  एवं उद्योग प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों एवं सरकारी अधिकारियों ने स्टॉल का भ्रमण किया और जिंदल स्टील के नवाचार एवं उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि स्टॉल न केवल जानकारीपूर्ण था, बल्कि छत्तीसगढ़ में जिंदल स्टील की 25 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा और योगदान को गर्व के साथ प्रदर्शित भी करता है। जिंदल स्टील के प्रतिनिधियों ने बताया कि कंपनी आगे भी छत्तीसगढ़ राज्य के सर्वांगीण विकास में अपना योगदान जारी रखेगी और “विकसित छत्तीसगढ़, मजबूत भारत” के विज़न को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी।

यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की जीवंत तस्वीर-राज्यपाल डेका

रायपुर : लखपति दीदी महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण समृद्धि की मिसाल – उपराष्ट्रपति  राधाकृष्णन यह सम्मेलन छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की जीवंत तस्वीर-राज्यपाल  डेका राजनांदगांव में लखपति दीदी सम्मेलन में शामिल हुए उपराष्ट्रपति राज्यपाल और मुख्यमंत्री रायपुर राजनांदगांव के स्टेट हाई स्कूल मैदान में आयोजित लखपति दीदी सम्मेलन में देश के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने महतारी वंदन योजना और नियद नेल्लानार योजना के तहत 69 लाख 15 हजार 273 हितग्राहियों को कुल 647 करोड़ 28 लाख 36 हजार 500 रुपए की राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन ने कहा कि लखपति दीदी आत्मनिर्भरता और सम्मान का प्रतीक हैं। यह केवल आय का कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और समाज में उनके बढ़ते प्रभाव का उत्सव है। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव जिला महिला सशक्तिकरण का उदाहरण बन चुका है, जहां महिलाएं आर्थिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अग्रसर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए चल रहे प्रयासों की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ आज बिजली उत्पादन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अधोसंरचना के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि लखपति दीदी आंदोलन दिखाता है कि जब महिलाएं संगठित होती हैं, तो परिवर्तन की गाथाएं स्वयं लिखती हैं। अपने संबोधन में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि लखपति दीदी सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि यह आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की जीवंत तस्वीर है। यह सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, संकल्प और आत्मबल से कैसे समृद्धि का नया अध्याय लिखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज हर जिले में महिलाएं स्वसहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सक्षम हो रही हैं। बलरामपुर में महिलाएं बाड़ी विकास और विपणन में, बस्तर में वनोपज से जैविक उत्पाद तैयार करने में, और कोण्डागांव में फूड प्रोसेसिंग, सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। राजनांदगांव जिले में ही लगभग 40 हजार लखपति दीदियां बनी हैं, जिनमें से 208 दीदियां सालाना 5 लाख रुपए से अधिक और 26 दीदियां 10 लाख रुपए से अधिक का व्यवसाय कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर दीदी की कहानी प्रेरणा है। जब संकल्प और सामूहिक प्रयास जुड़ते हैं, तो आत्मनिर्भरता केवल सपना नहीं रहती, वह हकीकत बन जाती है। राज्यपाल ने पद्मश्री फूलबासन बाई यादव जैसी महिलाओं के कार्यों को आदर्श बताते हुए कहा कि उनके प्रयासों से नारी सशक्तिकरण का मार्ग और सशक्त हुआ है।  राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिला उद्यमिता और स्वरोजगार के लिए देशभर में अनेक योजनाएं चल रही हैं, और छत्तीसगढ़ ने उन्हें ज़मीन पर उतारकर एक “सशक्त भारत, सशक्त छत्तीसगढ़” की मिसाल पेश की है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश में 7 लाख 82 हजार लखपति दीदी बनाने का है, जिनमें से अब तक 4 लाख 93 हजार दीदियां आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपए की सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्लानार योजना से बस्तर के दूरस्थ इलाकों में बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि लखपति दीदी सम्मेलन नारी शक्ति की पहचान और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव जिले ने विकास की दिशा में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं  चाहे वह पीएम आवास निर्माण हो, जल संरक्षण या कुपोषण उन्मूलन का अभियान। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करने हेतु पद्मश्री फूलबासन बाई यादव के योगदान की भी प्रशंसा की। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, श्रम कल्याण मंडल अध्यक्ष योगेशदत्त मिश्रा, पूर्व सांसद प्रदीप गांधी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिला स्वसहायता समूह की दीदियां उपस्थित थीं।

छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव-2025 : उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 37 विभूतियों और 4 संस्थाओं को अलंकरण से किया सम्मानित

रायपुर : छत्तीसगढ रजत महोत्सव-2025 : उप राष्ट्रपति  सीपी राधाकृष्णन ने छत्तीसगढ़ के 34 अलंकरण से 37 विभूतियों एवं 4 संस्थाओं को किया सम्मानित रायपुर उप राष्ट्रपति  सीपी राधाकृष्णन ने नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के राज्य अलंकरण समारोह में छत्तीसगढ़ के 34 अलंकरण से विभिन्न क्षेत्रों से उत्कृष्ट योगदान देने वाले 37 विभूतियों एवं 4 संस्थाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल  रमेन डेका ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय अलंकरण समारोह के अति विशिष्ट अतिथि तथा विशिष्टि अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण उपस्थित थे। राज्य अलंकरण समारोह में उप राष्ट्रपति  राधाकृष्णन एवं मुख्यमंत्री  साय ने शहीद वीरनारायण सिंह पुरस्कार  हिरेश सिन्हा जिला कांकेर को प्रदान किया। यति यतनलाल सम्मान भारतीय कुष्ठ निवारक संघ, कात्रे नगर सोठी जिला जांजगीर-चांपा, गुण्डाधूर सम्मान सु ज्ञानेश्वरी यादव राजनांदगांव, मिनीमाता सम्मान मती ललेश्वरी साहू दुर्ग, गुरूघासीदास सम्मान संयुक्त रूप से  भुवनदास जांगड़े बेमेतरा एवं  शशि गायकवाड़ बलौदाबाजार-भाटापारा,  ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति डोमा जिला धमतरी, हबीब तनवीर सम्मान डॉ. कुंज बिहारी शर्मा जिला रायपुर, महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान सु चांदनी साहू जिला बिलासपुर को प्रदान किया गया।  इसी प्रकार पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान  राजेश अग्रवाल जिला रायपुर, पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान डॉ. चिंतरंजन कर जिला रायपुर, चक्रधर सम्मान पंडित कीर्ति माधव लाल व्यास जिला दुर्ग, दाऊ मंदराजी सम्मान  रिखी क्षत्रिय जिला दुर्ग, डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार संयुक्त रूप से  थनेन्द्र कुमार साहू जिला धमतरी एवं  वामन कुमार टिकरिहा जिला बलौदाबाजार, महाराजा अग्रसेन सम्मान  राजेन्द्र अग्रवाल राजू जिला बिलासपुर, चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट मीडिया हिन्दी डॉ. संदीप कुमार तिवारी रायपुर एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हिन्दी का पुरस्कार संयुक्त रूप से डॉ. सोमेश कुमार पटेल एवं  अभिषेक शुक्ला रायपुर, मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट मीडिया अंग्रेजी सु भावना पाण्डेय जिला दुर्ग, दानवीर भामाशाह सम्मान  नीरज कुमार बाजपेयी जिला राजनांदगांव, धन्वन्तरि सम्मान डॉ. अजय कृष्ण कुलश्रेष्ठ, मती बिलासादेवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार  सुखदेव दास जिला रायपुर को प्रदान किया गया। इसी तरह डॉ. भंवरसिंह पोर्ते आदिवासी सेवा सम्मान जंगो रायतार विद्या केतुल शिक्षण संस्था ग्राम दमकसा जिला कांकेर, रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार संयुक्त रूप से  मिथलेश कुमार आदिल एवं अग्रसर टीम जिला दुर्ग तथा एनटीपीसी लिमि. लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट पुसौर जिला रायगढ़ , पंडित लखनलाल मिश्र सम्मान  योगेश कुमार साहू जिला कांकेर, छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान  मनीष तिवारी जिला रायपुर, देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार  रोहित कुमार कोसरिया जिला महासमुंद, किशोर साहू सम्मान  सुनील सोनी जिला रायपुर, लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान  राकेश तिवारी जिला रायपुर, लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार डॉ. विनोद कुमार वर्मा जिला बिलासपुर, किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण  अनुराग बसु मुम्बई को प्रदान किया गया।   बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान संयुक्त रूप से  खेमचंद जैन राजनांदगांव, डॉ. सुरेश मणि त्रिपाठी, डॉ. भूपेन्द्र करवंदे एवं  भरतलाल सोनी रायपुर को, वीरांगन अवंतिबाई लोधी स्मृति पुरस्कार मती प्रेमशीला बघेल महासमुंद को, माता बहादुर कलारिन सम्मान मती शिल्पा पाण्डेय सृष्टि जिला सरगुजा को, पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान  अवधेश कुमार नई दिल्ली तथा संस्कृत भाषा सम्मान डॉ. दादू भाई त्रिपाठी जिला रायपुर को प्रदान किया गया। 

बीजापुर में विकास की नई पहल: माओवाद प्रभावित सात गांवों में पहली बार आयोजित हुआ मेगा हेल्थ कैंप

 बीजापुर में विकास की दस्तकः धुर माओवाद प्रभावित क्षेत्र के सात गांवों में पहली बार लगा मेगा हेल्थ कैंप 989 ग्रामीणों को मिला उपचार का लाभ रायपुर कभी माओवाद की छाया में सिमटे बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के इन्द्रावती नदी पार बसे गांवों में अब विकास की नई सुबह दिखने लगी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति 2025 के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं। बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद अब इन दुर्गम इलाकों में प्रशासन ने पहली बार सात गांवों में एक साथ मेगा हेल्थ कैंप का आयोजन किया, जिसने ग्रामीणों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा दी। इस अभियान में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम शामिल रही। टीम ने उसपरी, बेलनार, सतवा, कोसलनार, ताड़पोट, उतला और इतामपार गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए। कुल 989 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। कैंप में सामान्य जांच के 777, रक्तचाप 371, मुख कैंसर 344, ब्रेस्ट कैंसर 112, नेत्र जांच 199, दंत जांच 154, टीकाकरण 14, संपूर्ण टीकाकरण 8, मलेरिया 156, क्षय रोग 7 तथा उल्टी-दस्त के 24 प्रकरणों की जांच की गई। इनमें 54 वरिष्ठ नागरिक भी शामिल रहे।  विशेषज्ञों ने एक बालक को हृदय रोग से ग्रस्त पाया, जिसे ‘चिरायु योजना’ के तहत उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। कैंप के दौरान बीमार ग्रामीणों का मौके पर ही उपचार कर मुफ्त दवाइयों का वितरण किया गया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुरूप साहू और डॉ. बी.एस. साहू ने बताया कि अब दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ हो रही हैं, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। ग्रामीणों में भी अब भय की जगह विश्वास और आशा का माहौल दिखाई दे रहा है। वे शासन-प्रशासन से जुड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के प्रति सजग हो रहे हैं। बीजापुर कलेक्टर  संबित मिश्रा ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा “शासन के निर्देशानुसार प्रशासन अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित है। ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत अंदरुनी क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आई है और प्रशासन की टीमें पूरी तत्परता से काम कर रही हैं।”जिससे बीजापुर में अब सकारात्मक बदलाव नजर आ रहे है। बीजापुर में यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि अब माओवाद नहीं, मुख्यधारा और विकास ही बीजापुर की नई पहचान बनेगा।