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मुख्यमंत्री साय बोले – बस्तर में नए विश्वास और विकास की सुबह — माओवादी कैडर की मुख्यधारा में वापसी

रायपुर आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है। वर्षों तक हिंसा और भय की छाया में जी रहे 210 माओवादी कैडरों ने आज “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के अंतर्गत बंदूक छोड़कर संविधान को अपनाने का निर्णय लिया है। यह छत्तीसगढ़ में शांति, विश्वास और विकास के नए युग का शुभारंभ है। मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने आज जगदलपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो युवा कभी माओवाद की झूठी विचारधारा के जाल में उलझे हुए थे, वे आज लोकतंत्र की शक्ति, संविधान के आदर्शों और राज्य सरकार की संवेदनशील नीतियों पर विश्वास जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कुल 210 आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, एक रीजनल कमेटी सदस्य, 22 डिविजनल कमेटी सदस्य, 61 एरिया कमेटी सदस्य और 98 पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन पर कुल 9 करोड़ 18 लाख रुपये का इनाम घोषित था। समारोह में 210 माओवादी कैडरों ने कुल 153 हथियार समर्पित किए, जिनमें 19 AK-47, 17 SLR, 23 INSAS राइफलें, एक INSAS LMG, 36 .303 राइफलें, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 शॉटगन और एक पिस्तौल शामिल हैं। मुख्यमंत्रीसाय ने इस अवसर को अपने जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोषजनक क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने बंदूकें नीचे रखकर संविधान को थामा, उन्होंने छत्तीसगढ़ के भविष्य में शांति और एकता के बीज बोए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है, भय और हिंसा से नहीं। राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025”, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी पहल आज न केवल बस्तर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में बदलाव की ठोस आधारशिला सिद्ध हो रही हैं। इन योजनाओं ने बंदूक और बारूद की जगह संवाद, संवेदना और विकास को स्थापित किया है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभूतपूर्व आत्मसमर्पण केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। पुलिस, सुरक्षा बल, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज — सभी ने मिलकर जिस समन्वित और निरंतर प्रयास से यह परिवर्तन संभव किया, वह बस्तर के इतिहास में मील का पत्थर है। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि यह दृश्य न केवल बस्तर बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा है — कि यदि नीयत साफ हो और नीतियाँ जनसंबंधी हों, तो हिंसा का अंत और शांति की शुरुआत संभव है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास की सबसे बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण हिंसा की जड़ को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम है। “अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर, जहाँ कभी भय का शासन था, वहाँ आज विश्वास का शासन है। जो कल जंगलों में छिपे थे, आज वे समाज के निर्माण में सहभागी बन रहे हैं,”।  मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि डबल इंजन सरकार की यह दृढ़ प्रतिज्ञा है कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा — “प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्रीअमित शाह जी के नेतृत्व में हम इस लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। बस्तर का यह परिवर्तन उसी संकल्प का प्रमाण है।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित कैडरों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वरोजगार, प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।  मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आत्मसमर्पण “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” के उस मूल भाव का विस्तार है, जो यह संदेश देता है कि परिवर्तन का मार्ग हिंसा नहीं, बल्कि विश्वास है। यह कार्यक्रम अब पूरे बस्तर क्षेत्र में पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुधार की दिशा में नई ऊर्जा लेकर आएगा। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि यह ऐतिहासिक घटना यह सिद्ध करती है कि जब सरकार की नीतियाँ संवेदनशील और जनकेंद्रित होती हैं, तब सबसे कठिन समस्याएँ भी सुलझाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा — “हमारा लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत नहीं, बल्कि एक नए बस्तर का निर्माण है — जहाँ हर घर में विश्वास और हर मन में विकास का उजाला हो।” मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया, सुरक्षा बलों और नागरिक समाज को इस परिवर्तन के सहयोगी बनने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि शांति, विकास और समृद्धि की यह यात्रा तभी स्थायी होगी जब समाज का प्रत्येक वर्ग इस परिवर्तन की भावना को आत्मसात करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बस्तर को नए उद्योग, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के माध्यम से आत्मनिर्भर क्षेत्र में परिवर्तित करेगी। जंगलों की हरियाली के साथ यहाँ के युवाओं के जीवन में भी उजाला फैलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के इतिहास में यह वह क्षण है, जब “बंदूक की गूंज” की जगह “विकास की गूंज” सुनाई दे रही है। यह उस बस्तर का पुनर्जन्म है, जहाँ अब भय नहीं, विश्वास और बंधुत्व का शासन होगा। अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा — “यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि आत्मजागरण की यात्रा है। यह छत्तीसगढ़ की नई पहचान है — शांति, विश्वास और विकास की। आने वाले समय में बस्तर न केवल नक्सल मुक्त होगा, बल्कि देश के लिए शांति और परिवर्तन का मॉडल बनेगा।   इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीद्वयअरुण साव औरविजय शर्मा, सांसदमहेश कश्यप, जगदलपुर विधायककिरण सिंह देव, पुलिस महानिदेशकअरुणदेव गौतम, एडीजी सीआरपीएफअमित कुमार, एडीजी बीएसएफनामग्याल, एडीजी (एएनओ)विवेकानंद झा, बस्तर रेंज के आईजीसुंदरराज पी, बस्तर के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

बिहान की दीदियों ने तैयार किए संगिनी ब्रांड के आकर्षक गिफ्ट हैम्पर

 ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता की दिशा में सराहनीय कदम, सक्ती प्रशासन का सतत सहयोग रायपुर, दीपावली जैसे प्रमुख त्यौहार के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत कार्यरत जिला सक्ती की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है। ग्राम पलाड़ीखुर्द की राधा कृष्ण स्व-सहायता समूह की सदस्याएं अपने “संगिनी” ब्रांड के अंतर्गत आकर्षक गिफ्ट हैम्पर तैयार कर रही हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार के सुगंधित एवं डिज़ाइनर मोम उत्पाद शामिल हैं। महिलाओं की सशक्तिकरण और रोज़गार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल यह अभिनव पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और रोज़गार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। जिला प्रशासन सक्ती द्वारा दीदियों को उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विपणन के लिए निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।  समूह की सदस्य श्रीमती पुष्पा दीदी ने बताया कि समूह द्वारा त्यौहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए राखी, रंगोली, आचार, गुलाल, तथा मोम उत्पाद जैसे विविध वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से हमें न केवल आर्थिक लाभ मिला है बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। समूह को 2 लाख रुपये तक की आय पुष्पा दीदी ने आगे बताया कि समूह की दीदियों ने पूर्व में आर-सेटी (त्ैम्ज्प्) से डिज़ाइनर कैंडल बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इसके बाद यूट्यूब वीडियो के माध्यम से गिफ्ट हैम्पर तैयार करने का विचार आया। इस समय जिले की विभिन्न इंडस्ट्रीज और संस्थानों से गिफ्ट हैम्पर के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जिनकी आपूर्ति दीदियों द्वारा समय पर और आकर्षक पैकेजिंग में की जा रही है।  इस पहल से समूह को लगभग 1 लाख 50 हजार  से 2 लाख रुपये तक का व्यवसाय प्राप्त होने की संभावना है। इन्हें अभी तक लगभग 60 हज़ार रुपए के गिफ्ट हैंपर के ऑर्डर मिल चुके हैं । यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें स्थायी आजीविका और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान कर रहा है। बिहान मिशन के तहत संचालित यह पहल महिलाओं की सृजनशीलता, परिश्रम और नवाचार की उत्कृष्ट मिसाल है, जो अन्य समूहों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक दिन, बंदूक छोड़ संविधान अपनाने वालों का स्वागत : मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर में 210 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण को राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि जो युवा कभी माओवाद के झूठे विचारधारा के जाल में फंसे थे, उन्होंने आज संविधान, लोकतंत्र और विकास की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है। जिन युवाओं ने वर्षों तक अंधेरी राहों पर भटककर हिंसा का मार्ग चुना, उन्होंने आज अपने कंधों से बंदूक उतारकर संविधान को थामा है। यह न केवल आत्मसमर्पण का क्षण है, बल्कि विश्वास, परिवर्तन और नये जीवन की शुरुआत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में बंदूकें छोड़कर सुशासन पर विश्वास जताने वाले इन युवाओं से मेरी मुलाकात मेरे जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोष देने वाले पलों में से एक रही। यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन की नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी योजनाएँ विश्वास और परिवर्तन का आह्वान हैं। इन्हीं नीतियों के प्रभाव से नक्सल प्रभावित इलाकों में बंदूक छोड़कर लोग शासन की विश्वास और विकास की प्रतिज्ञा को स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है। यह छत्तीसगढ़ के शांतिपूर्ण भविष्य का शिलान्यास है। हमारी सरकार आत्मसमर्पितों के पुनर्वास और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार की प्रतिज्ञा है कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में यह प्रतिज्ञा पूर्ण हो रही है। छत्तीसगढ़ अब शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर अग्रसर है।

तत्काल आवेदन करें! राजस्थान में जमादार ग्रेड-2 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी

रायपुर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) ने जमादार ग्रेड-2 के पदों के लिए भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती में कुल 72 पद भरे जाएंगे, जिनमें 64 नॉन-टीएसपी और 8 टीएसपी क्षेत्र के पद शामिल हैं। यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए है जिन्होंने 12वीं स्तर की सीईटी परीक्षा पास की हो। आवेदन प्रक्रिया 17 अक्तूबर 2025 से शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 15 नवंबर 2025 है। भर्ती परीक्षा 27 दिसंबर 2025 को आयोजित की जाएगी। 12वीं पास करें आवेदन इस भर्ती के लिए उम्मीदवार 12वीं पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही किसी मान्यता प्राप्त कंप्यूटर कोर्स या सर्टिफिकेट का होना आवश्यक है। इसमें O-Level (DOEACC) कोर्स, NIELIT कंप्यूटर कॉन्सेप्ट सर्टिफिकेट कोर्स, कोपा, या भारत में किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/संस्थान से कंप्यूटर साइंस/कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट शामिल हैं। इसके अलावा, देश के किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से सीनियर सेकेंडरी सर्टिफिकेट, जिसमें कंप्यूटर साइंस/कंप्यूटर एप्लीकेशन एक विषय हो, या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी पॉलिटेक्निक संस्थान से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, या Rajasthan Knowledge Corporation Limited के तहत संचालित RSCIT कोर्स किया हुआ होना भी योग्यता में गिना जाएगा। आयु सीमा में इतनी मिलेगी छूट     उम्मीदवार की आयु 21 से 40 साल के बीच होनी चाहिए।     राजस्थान की एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस पुरुष उम्मीदवारों को 5 साल की छूट।     राजस्थान की एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस महिला उम्मीदवारों को 10 साल की छूट।     सामान्य (अनारक्षित) वर्ग की महिला उम्मीदवारों को 5 साल की छूट। आवेदन शुल्क इस भर्ती के लिए सामान्य वर्ग और कीमलेयर श्रेणी के OBC/अति पिछड़ा वर्ग के आवेदकों को 600 रुपये, राजस्थान के नॉन-कीमलेयर OBC/अति पिछड़ा वर्ग, EWS, SC/ST आवेदकों को 400 रुपये, और सभी दिव्यांगजन आवेदकों को 400 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा। एग्जाम पैटर्न     परीक्षा 2 घंटे की होगी और इसमें कुल 100 सवाल (100 अंक) होंगे।     गलत उत्तर पर 1/3 अंक की कटौती होगी।     प्रश्नों में सामान्य ज्ञान, सामाजिक अध्ययन, भूगोल, इतिहास, कला एवं संस्कृति, दैनिक विज्ञान, गणित, और राजस्थान राज्य से जुड़े समसामयिक मामलों के उच्च माध्यमिक स्तर के सवाल शामिल होंगे। ऐसे करें आवेदन     सबसे पहले आप  rssb.rajasthan.gov.in या rssb.rajasthan.gov.in पर जाकर लॉगिन करें।     अब Jamadar Grade-2 भर्ती नोटिफिकेशन खोलें और ऑनलाइन फॉर्म भरें।     इसके बाद आवश्यक दस्तावेज (शैक्षिक प्रमाण पत्र, फोटो, हस्ताक्षर, जाति प्रमाण पत्र आदि) अपलोड करें।     आवेदन शुल्क ऑनलाइन जमा करें।     अंत में फॉर्म सबमिट करें और प्रिंट आउट अपने पास रख लें।

मानसून के जाते ही छत्तीसगढ़ में बदला मौसम, ठंड की दस्तक शुरू

रायपुर दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के साथ ही छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार, शुक्रवार यानी 17 अक्टूबर को प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा। आसमान में हल्के बादल जरूर रहेंगे, लेकिन बारिश के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग ने बताया कि गुरुवार, 16 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरे देश से वापसी हो गई। इसके साथ ही पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय हो गया है और उसकी वर्षा गतिविधियां तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्रप्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल-माहे में शुरू हो गई हैं। प्रदेश में फिलहाल किसी बड़े मौसम तंत्र का प्रभाव नहीं है। हालांकि, उत्तरी झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में औसत समुद्र तल से लगभग 3.1 किलोमीटर ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, लेकिन इसका असर छत्तीसगढ़ पर नहीं पड़ेगा। गुरुवार को प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रहा। तापमान में विशेष परिवर्तन की संभावना नहीं है और आने वाले 24 घंटों में भी मौसम शुष्क रहेगा। दो दिन में हल्की बारिश के आसार रायपुर शहर के लिए स्थानीय पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार को आसमान आंशिक रूप से मेघमय रहेगा। अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। दो दिनों के बाद प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

त्योहारी बुकिंग बनी मुश्किल: IRCTC सर्वर क्रैश से यात्रियों की परेशानी बढ़ी

नई दिल्ली इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन की वेबसाइट शुक्रवार को फिर तकनीकी खामियों की वजह से ठप हो गई। ऑनलाइन टिकट बुक करने की कोशिश कर रहे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, समस्या सर्वर से जुड़ी है और इसे ठीक करने के लिए टीम काम कर रही है। वेबसाइट के साथ-साथ मोबाइल ऐप भी फिलहाल काम नहीं कर रहा था।इस मामले आईआरसीटीसी के अधिकारियों का कहना है कि, तकनीकी खराबी के चलते वेबसाइट में दिक्कत आ गई थी। जिसे 11:15 पर ठीक कर लिया गया है। दरअसल, हर रोज सुबह 10 बजे आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर एसी श्रेणी की तत्काल टिकट बुकिंग शुरू होती है, जबकि नॉन-एसी टिकटों की बुकिंग 11 बजे से खुलती है। शुक्रवार को धनतेरस (शनिवार) के सफर के लिए तत्काल टिकट बुकिंग का समय था, लेकिन वेबसाइट के डाउन होने से यात्रियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। जिन लोगों ने त्योहार पर घर जाने के लिए टिकट बुक करने की योजना बनाई थी, उन्हें बड़ी निराशा हाथ लगी। भारतीय रेलवे की टिकट बुकिंग के लिए एकमात्र आधिकारिक प्लेटफॉर्म आरसीटीसी की वेबसाइट है।रोजाना इस वेबसाइट के जरिए लगभग 12.5 लाख टिकटें बुक की जाती हैं। रेलवे की कुल टिकट बुकिंग में से करीब 84 प्रतिशत बुकिंग आईआरसीटीसी की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से होती है। गुरुवार को आईआरसीटीसी का शेयर सुबह 11 बजे तक बीएसई पर 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 717.05 रुपये के स्तर पर ट्रेड हो रहा है। हालांकि, पिछले 1 सप्ताह में कंपनी के शेयर में 0.34 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। वही, पिछले 2 सप्ताह में इसमें 1.44 फीसदी का उछाल आया है। पिछले 6 महीने में कंपनी का शेयर -6.74 फीसदी गिरा है। वही, पिछले 1 साल में कंपनी के शेयर में -17.69 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। कंपनी का मार्केट कैप करीब 57,400.00 करोड़ रुपये है। 1999 में भारतीय रेलवे में शामिल हुआ था आईआरसीटीसी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अंतर्गत एक मिनीरत्न पीएसयू है। IRCTC को 27 सितंबर 1999 को भारतीय रेलवे की एक शाखा के रूप में शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य स्टेशनों, ट्रेनों और अन्य स्थानों पर  कैटरिंग और हॉस्पिटैलिटी को मैनेज करना है। इसके साथ ही बजट होटल्स, स्पेशल टूर पैकेज, इंफॉर्मेशन एंड कॉमर्शियल पब्लिसिटी और ग्लोबल रिजर्वेशन सिस्टम के डेवलपमेंट के माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देना है।

खदान हादसा: छुई मिट्टी निकालते समय धंसी मिट्टी, एक महिला की मौके पर मौत

अंबिकापुर बलरामपुर जिले के ककनेसा गांव में शुक्रवार सुबह हादसा हो गया। छुई मिट्टी निकालने के दौरान खदान धंसने से दो महिलाएं मिट्टी में दब गईं, जिसमें एक महिला की मौत हो गई, जबकि दूसरी घायल हो गई। हादसे के वक्त मौके पर मौजूद दो अन्य महिलाएं सुरक्षित बच गईं। घटना से गांव में कोहराम मच गया। महिलाओं को गांववालों ने ही बाहर निकाला। जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह ग्राम गुरमुटी निवासी सविता बाई पति विजय कुमार (35) गांव की अन्य तीन महिलाओं के साथ छुई मिट्टी निकालने के लिए ग्राम ककनेसा गई थी। ककनेसा में छुई मिट्टी की खदान है, जहां से आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में मिट्टी निकालते हैं। छुई मिट्टी निकालने के लिए बनाए गए सुरंग में सविता बाई और एक अन्य महिला घुसी हुई थीं, तभी अचानक सुरंग का ऊपरी हिस्सा धंस गया और दोनों महिलाएं मिट्टी में दब गईं। साथ गई महिलाओं की चीख पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। एक महिला का कुछ हिस्सा मिट्टी से बाहर था, जिसे ग्रामीणों ने तत्काल निकाल लिया। वहीं अंदर दबी सविता बाई को निकालने के लिए ग्रामीणों ने फावड़ा से खुदाई शुरू की। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद सविता बाई को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। ग्रामीणों ने घायल महिला को वाड्रफनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। वहीं, मृतका सविता बाई का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। छुई मिट्टी का उपयोग सरगुजा अंचल में ग्रामीण क्षेत्रों में दीवारों और घरों की लिपाई-पोताई के लिए किया जाता है। यह सफेद और चिकनी मिट्टी है। दीपावली त्योहार से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं घरों की रंगाई पोताई के लिए इस मिट्टी को निकालती हैं। इस मिट्टी को निकालने में खतरा रहता है। प्रतिवर्ष ऐसी घटनाएं होती हैं। ककनेसा में जहां यह हादसा हुआ, वहां खदान का ऊपरी हिस्सा भारी था, जो अचानक धंस गया और हादसा हो गया। घटना की सूचना मिलने पर वाड्रफनगर तहसीलदार अनुराग केरकेट्टा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने असुरक्षित तरीके से छुई मिट्टी निकालने पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश पंचायत प्रतिनिधियों को दिए। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि सुरक्षा उपायों के बिना खदानों में प्रवेश न करें और छुई मिट्टी निकालने के कार्य में सावधानी बरतें।

विस्फोट से जख्मी हुए थे, अब बने हीरो: टोमन कुमार ने तीरंदाजी में दिलाया भारत को स्वर्ण पदक

रायपुर अंतरराष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी खिलाड़ी टोमन कुमार की कहानी साहस और जज़्बे की मिसाल है। 22 से 28 सितंबर 2025 तक दक्षिण कोरिया में आयोजित विश्व पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता में टोमन ने स्वर्ण और कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रौशन किया। तीन साल पहले झारखंड के माओवादी ऑपरेशन के दौरान CRPF की टुकड़ी में शामिल टोमन बारूदी विस्फोट का शिकार हुए और उनका चांया पैर खो गया। लेकिन इस चोट ने उन्हें नहीं तोड़ा; बल्कि नई उड़ान भरने की प्रेरणा दी। टोमन छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के अहिबरनवागांव के रहने वाले हैं और लक्ष्य पर निशाना साधने में माहिर हैं। टोमन ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान जयपुर के पैरा नेशनल में पहला पदक जीतकर बनाई। इसके बाद उन्होंने सामान्य वर्ग के नेशनल गेम्स देहरादून में भी हिस्सा लिया। खेल में अंतर केवल समय का होता है – साधारण वर्ग में निशाना साधने का समय तीन मिनट और पैरास्पोर्ट्स में चार मिनट होता है। दूरी और उपकरण समान रहते हैं, लेकिन धैर्य, हौसला और मानसिक दृढ़ता ही सफलता तय करती है। विश्व पैरा तीरंदाजी में स्वर्ण और कांस्य जीतने के बावजूद सरकार की ओर से टोमन को कोई आर्थिक सहायता या सम्मान नहीं मिला। उनका अगला लक्ष्य पैरालिंपिक 2028 में पदक जीतना है। दक्षिण कोरिया में हुई प्रतियोगिता के बाद भारतीय तीरंदाजी टीम अगले साल होने वाली एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लेगी, जिसमें टोमन कुमार भी शामिल होंगे। इस आधार पर भारत की पैरालिंपिक टीम का चयन किया जाएगा। तैयारी के लिए टोमन औरंगाबाद के ट्रेनिंग सेंटर में अभ्यास कर रहे हैं। टोमन ने अपना पहला नेशनल मुकाबला पटियाला में अपने कोच के कंपाउंड धनुष से खेला। अंतरराष्ट्रीय मानक का यह धनुष और उपकरण करीब 5.5 लाख रुपये का था। अपने सपनों को सच करने के लिए टोमन ने 2024 में अपनी बचत से दो लाख रुपये खर्च कर अपना पहला धनुष खरीदा। आज भी उनके कोच पंकज सिंह उन्हें तकनीकी और उपकरणों में मदद करते हैं। आमतौर पर इस मुकाम तक पहुंचने में खिलाड़ियों को सालों लग जाते हैं, लेकिन टोमन ने तीर-कमान में भी करिश्माई प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि हौसला और मेहनत किसी भी चुनौती को पार कर सकती है।

सरकार की बड़ी सफलता: 208 नक्सलियों ने BGL लॉन्चर, AK-47, 153 हथियार समेत किया सरेंडर

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर आज नक्सलियों ने सबसे बड़ी संख्या में हथियार डालकर सरेंडर किया है. बस्तर संभाग के अबूझमाड़ और कांकेर के जंगलों से निकलकर कुल 208 नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया है. इनमें 110 महिला नक्सली है और 98 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जो सीसी मेंबर के साथ दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी जन जनमिलिसिया कमेटी के अलावा अन्य कैडर पर पदस्थ रहे हैं. नक्सली प्रवक्ता रूपेश के साथ-साथ अन्य सभी माओवादियों ने जगदलपुर पुलिस लाइन में मुख्यमंत्री साय के समक्ष हथियार डाले हैं. नक्सलियों ने डाले कुल 153 हथियार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा, बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी समते पुलिस प्रशासन के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में नक्सलियों ने 9 प्रकार के 153 हथियार डालकर सरेंडर किया. इनमें 19 AK 47, 17 SLR राइफल, 23 INSAS राइफल, एक INSAS LMG, 36 नग 303 राइफल, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 नग 12 बोर/ सिंगल शॉट और 1 पिस्टल शामिल हैं. मुख्यधारा से जुड़ने वाले नक्सलियों को अच्छी पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ : CM साय देश के सबसे बड़े नक्सली को लेकर रायपुर से रवाना होने के दौरान सीएम साय ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि विकास की मुख्यधारा से जुड़ने वाले नक्सलियों का स्वागत है. उन्हें हमारी (राज्य सरकार) अच्छी पुनर्वास नीति का लाभ मिलेगा. हमने शुरू से ही हथियार छोड़ने का नक्सलियों से आह्वान किया था. खाली हो जाएगा माड़ डिविजन भैरगगढ़ से सरेंडर होने वाले नक्सलियों में नक्सली प्रवक्ता रूपेश के अलावा 1 सेंट्रल कमेटी मेंबर (सीसीएम), 2 दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर (डीकेएसजेडसी), 15 डिविजनल कमेटी मेंबर (डीवीसीएम), एक माड़ एसीएम और 121 अन्य कैडर के माओवादी शामिल हैं. इसी के साथ अधिकतम अबूझमाड़ नक्सल मुक्त होगा और उत्तर बस्तर से लाल आतंक समाप्त हो जाएगा। इसके बाद दक्षिण बस्तर में नक्सलवाद का सूपड़ा साफ होना रह गया है. इन 7 कैडरों के नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण 1) CCM 01 कैडर 2) DKSZC 04 कैडर 3) रीजनल कमेटी मेंबर 01 कैडर 4) DVCM 21 कैडर 5) ACM लेवल 61 कैडर 6) पार्टी मेंबर 98 कैडर 7) PLGA मेंबर/ RPC मेंबर/ अन्य 22.  

रायपुर : रितु नाग ने बढ़ाया सुकमा का मान, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जीता स्वर्ण पदक

रायपुर सुकमा जिले की धरती एक बार फिर खेल के क्षेत्र में चमक उठी है। यहां की होनहार छात्रा रितु नाग ने अपने शानदार प्रदर्शन से जिले का नाम पूरे प्रदेश में रोशन किया है। रितु की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि सुकमा की  बेटियां मेहनत और लगन से हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने रितु की उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं देते उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है। कोरबा जिले में 12 से 15 अक्टूबर 2025 तक आयोजित 25वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में रितु नाग ने बस्तर संभाग की हॉकी टीम में शामिल होकर बेहतरीन खेल दिखाया। उनकी टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) अपने नाम किया। इस सफलता से सुकमा ही नहीं, पूरे बस्तर संभाग का गौरव बढ़ गया है। रितु नाग वर्तमान में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, छिंदगढ़ में कक्षा 9वीं की छात्रा हैं और प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, जिला खेल अधिकारी श्री विरूपाक्ष पौराणिक, सहायक खेल अधिकारी श्री कमल कोसरिया और पीटीआई शिक्षिका श्रीमती योगिता नायक को दिया है।