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दिल्ली में मस्जिद के पास हिंसा: 30 पत्थरबाजों को चिन्हित, 450 से अधिक वीडियो की जांच

 नई दिल्ली दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने के काम के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है. इस मामले में अब तक करीब 30 पत्थरबाजों की पहचान हो चुकी है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापे मार रहे हैं. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, साढ़े चार सौ से अधिक वीडियो मिले हैं जिनमें हिंसा और पत्थरबाजी के विभिन्न विजुअल्स को कैप्चर किया गया है. ये वीडियो सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैम रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप्स समेत हैं.  हिंसा में बाहरी लोगों की भूमिका का शक इन सबका विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे पता चला है कि हिंसा में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि बाहरी लोग भी शामिल थे. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कई पत्थरबाज तुर्कमान गेट के निवासी नहीं हैं. पुलिस को संदेह है कि सोशल मीडिया के जरिये हिंसा के लिए बाहर से लोगों को बुलाकर उन्हें उकसाया गया. इसी वजह से सोशल मीडिया गतिविधियों की भी व्यापक जांच की जा रही है. अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार अब तक पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें काशिफ, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद अरीब, अदनान और समीर शामिल हैं. ये सभी चांदनी महल और दरियागंज के रहने वाले बताए जा रहे हैं. उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. फरार आरोपियों की तलाश में SIT गठित मामले की गंभीरता को देखते हुए, एक विशेष जांच टीम गठित की गई है जो ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी और तकनीकी निगरानी की मदद से फरार आरोपियों की तलाश में लगी है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, कई आरोपी डर के कारण अपने घर छोड़कर फरार हो चुके हैं. पुलिस ने साफ कर दिया है कि कानून व्यवस्था को खराब करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और सभी दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया जाएगा.  तुर्कमान गेट हिंसा के बाद इलाका छावनी में तब्दील अतिक्रमण हटाने के दौरान भड़की हिंसा के बाद पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती कर दी गई है. प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है. दिल्ली पुलिस ने बताया है कि मामले को लेकर पूरी स्थिति पर नियंत्रण है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं. अफवाह ने भड़काया तनाव, सोशल मीडिया की जांच तेज पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिंसा की एक प्रमुख वजह सोशल मीडिया पर फैलाए गए एक झूठे अफवाह को माना जा रहा है. इस अफवाह में दावा किया गया था कि इलाके की मस्जिद को तोड़ा जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो गई.  अतिरिक्त बल तैनात, हालात पर कड़ी नजर इसके कारण कई लोग सड़क पर उतर आए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई. हालांकि, पुलिस ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया.  शांति बनाए रखने की अपील पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार इलाके की निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें. अराजकता और हिंसा को रोकने के लिए अर्धसैनिक बल भी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी स्थिति को काबू में रखा जा सके. इस घटना ने सोशल मीडिया की भूमिका और अफवाहों के खतरों पर एक बार फिर ध्यान खींचा है. प्रशासन और पुलिस मिलकर स्थिति को सामान्य करने में लगे हुए हैं और जनता से शांति बनाए रखने का अपील कर रहे हैं.

नेहा सिंह राठौर को बड़ी राहत: विवादित सोशल मीडिया पोस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

नई दिल्ली लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को पहलगाम आतंकी हमले पर कथित विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने नेहा की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह मामला अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ा है, जिसमें कई पर्यटकों की मौत हो गई थी। हमले के बाद नेहा सिंह राठौर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे, जिनमें सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना की गई थी। पोस्ट को आपत्तिजनक बताते हुए लखनऊ के हजरतगंज थाने में शिकायतकर्ता अभय प्रताप सिंह की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई। आरोप है कि इन पोस्ट से देश में नफरत फैलाने और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। इस मामले में नेहा सिंह राठौर ने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, लेकिन दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता अभय प्रताप सिंह को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए नेहा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, लेकिन स्पष्ट निर्देश दिया कि वह 19 जनवरी को पुलिस जांच में शामिल होंगी और पूछताछ में पूरा सहयोग करेंगी। अगर वह जांच में सहयोग नहीं करतीं, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच आगे बढ़ेगी और नेहा को निर्देशों का पालन करना होगा। नेहा सिंह राठौर सोशल मीडिया पर अपनी राजनीतिक और सामाजिक टिप्पणियों के लिए जानी जाती हैं। उनके गाने और पोस्ट अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस मामले में पहले भी वे जांच के दायरे में थीं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक से उन्हें तत्काल राहत मिल गई है। हालांकि, मामला अभी लंबित है और आगे की सुनवाई में अंतिम फैसला आएगा।

RS में नामंजूर हुआ प्रस्ताव, अब LS में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग पर संशय—SC ने किया स्पष्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (7 जनवरी) को इस धारणा पर सवाल उठाए हैं कि अगर संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो जाए, और उसी दिन लोकसभा में वही प्रस्ताव स्वीकार किया गया हो तो क्या उसे विफल मान लिया जाएगा। शीर्ष अदालत ने इस विचार पर संदेह जताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग के लिए लोकसभा द्वारा स्वीकार किए गए प्रस्ताव को विफल माना जाना चाहिए। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की बेंच जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उनके खिलाफ महाभियोग के लिए 'जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट' के तहत तीन सदस्यीय समिति गठित करने के लोकसभा स्पीकर के फैसले को रद्द करने की मांग की गई थी। जस्टिस वर्मा ने प्रक्रियागत आधार पर लोकसभा स्पीकर के फैसले को चुनौती दी है। अपनी याचिका में जस्टिस वर्मा ने इस बात पर जोर दिया है कि हालांकि उनके महाभियोग के नोटिस लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दिए गए थे, लेकिन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने राज्यसभा चेयरमैन द्वारा प्रस्ताव स्वीकार किए जाने का इंतजार किए बिना एकतरफा रूप से जांच समिति का गठन कर दिया। मुकुल रोहतगी के क्या तर्क? उनकी तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि 'जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट' की धारा 3 के एक प्रावधान के तहत, ऐसे मामलों में जहां महाभियोग प्रस्ताव दोनों सदनों में उठाया जाता है, लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन के बीच संयुक्त परामर्श की परिकल्पना की गई है। उन्होंने तर्क दिया कि इसके बाद ही एक जांच समिति का गठन किया जा सकता है। हालांकि, लोकसभा के महासचिव ने अब इसका जवाब देते हुए कहा है कि राज्यसभा ने महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, जिसका मतलब है कि यह प्रावधान लागू नहीं होगा। मुकुल रोहतगी ने आगे दलील दी कि इस प्रक्रिया का पालन न होने से पूरी जांच ही त्रुटिपूर्ण हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी दूसरी तरफ, लोकसभा के महासचिव ने कोर्ट में कहा कि राज्यसभा ने महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार ही नहीं किया, इसलिए संयुक्त परामर्श से जुड़ा प्रावधान लागू नहीं होता। इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने अहम सवाल उठाते हुए पूछा, “अगर एक सदन में प्रस्ताव विफल हो जाए और दूसरे में सफल, तो क्या सफल प्रस्ताव भी अपने आप गिर जाएगा? कानून में ऐसा कोई स्पष्ट प्रतिबंध तो नहीं दिखता।” कोर्ट ने आगे कहा कि संयुक्त जांच समिति तभी बनती है, जब दोनों सदन प्रस्ताव स्वीकार करें। अगर एक सदन प्रस्ताव खारिज कर दे, तो कानून यह नहीं कहता कि दूसरा सदन आगे नहीं बढ़ सकता। कानून की उद्देश्यपूर्ण व्याख्या जरूरी बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस दत्ता ने यह भी कहा कि कानून की उद्देश्यपूर्ण व्याख्या (purposive interpretation) जरूरी है, ताकि संसद की मंशा को सही तरीके से समझा जा सके। उन्होंने प्रारंभिक तौर पर यह संकेत भी दिया कि वह इस तर्क से सहमत नहीं हैं कि राज्यसभा में प्रस्ताव खारिज होने से लोकसभा का प्रस्ताव स्वतः विफल हो जाएगा। क्या राज्यसभा में प्रस्ताव वास्तव में स्वीकार हुआ था? सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र से पूछा कि क्या राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव वास्तव में “स्वीकार” किया गया था? इस पर मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्यसभा के सभापति ने प्रस्ताव की प्राप्ति को स्वीकार किया था और यह कहा था कि जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे यह अप्रत्यक्ष स्वीकृति (implied admission) मानी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या उपसभापति, सभापति के फैसले की समीक्षा कर सकते हैं? सरकार की दलील सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि सभापति ने न तो प्रस्ताव स्वीकार किया और न ही खारिज,वह सिर्फ यह जांचना चाहते थे कि क्या उसी दिन लोकसभा में भी ऐसा प्रस्ताव लाया गया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह गुरुवार को सुनवाई जारी रखेगा और यह जांचेगा कि जांच समिति गठित करने से पहले लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति के बीच परामर्श न होने से क्या जस्टिस यशवंत वर्मा के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है या नहीं? कोर्ट ने कहा,“हमें सिर्फ यह देखना है कि क्या इस मामले में हमें हस्तक्षेप करना चाहिए या नहीं?”  

दिल्ली के तुर्कमान गेट विवाद में क्यों पहुंचे UP के सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली दिल्ली में मंगलवार देर रात पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट और फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास के अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ा बुलडोजर ऐक्शन चलाया गया। इस दौरान पुलिस पर पथराव भी किया गया। कुछ ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिसमें वहां मस्जिद के नाम पर लोगों को भड़काया जा रहा है और पुलिसकर्मियों पर पथराव किया जा रहा है। इस बीच यूपी के रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी के भी मौके पर मौजूद होने की तस्वीरें सामने आई हैं। नदवी ने वहां जाने की बात स्वीकार करते हुए कहा है कि उन्हें मस्जिद को नुकसान पहुंचाए जाने के मकसद से इंतजाम किए जाने की सूचना मिली थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि पुलिस से बातचीत और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील के बाद वह लौट गए थे।   सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं जिसमें रामपुर के सांसद नदवी बवाल के बीच पुलिकर्मियों से बहस करते दिख रहे हैं। पुलिसकर्मी नदवी को आगे जाने से रोकते हुए नजर आ रहे हैं। दूसरी तरफ बड़ी संख्या में उपद्रवी हंगामा करते दिख रहे हैं। रात को बुलडोजर ऐक्शन के बीच उग्र भीड़ ने पथराव किया जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस सीसीटीवी के जरिए उपद्रवियों की पहचान करके उन्हें दबोचने में जुटी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस नदवी से भी पूछताछ कर सकती है। सपा सांसद क्या बोले एनडीटीवी से बातचीत में नदवी ने कहा, 'मैं गया था रात। जब मुझे इत्तेला मिली कि हाई कोर्ट से ऑर्डर आए बिना मस्जिद को नुकसान पहुंचाने के लिए भारी बंदोस्त किया गया है। इससे पहले महरौली में एक मस्जिद को रातोंरात हटा दिया गया था। हम वहां गए तो देखा कि बहुत भीड़ है और (सुरक्षा) तैनाती भी है। हमने भीड़ से शांत रहने की अपील की। हम मस्जिद कमेटी के पास गए।' नदवी ने दावा किया कि पुलिस से बातचीत और भीड़ से शांति की अपील के बाद वह लौट गए थे। उन्होंने कहा कि एक खास वर्ग को उकसाने के लिए इस तरह की कार्रवाई की जा रही है। एक अन्य सवाल के जवाब में नदवी ने कहा, ‘हिन्दुस्तान में कहीं भी मुझे खबर मिलेगी कि किसी मस्जिद को नाजायज तरीके से घेरा जा रहा है या रातोंरात खत्म करने की कोशिश है तो मैं जाऊंगा और वहां कानून की जानकारी लूंगा। मैं जनप्रतिनिधि हूं। मेरा जिम्मेदारी बनती है। मैं जनता और प्रशासन के बीच कड़ी हूं। मैंने डीसीपी से बात की, उन्होंने कहा कि आप चले जाइए तो हम चले गए।’ मस्जिद के नाम पर लोगों को भड़काया गया कुछ ऐसे भी वीडियो सामने आए हैं जिसमें कुछ आरोपी वीडियो बनाते हुए लोगों को एकत्रित होने की अपील कर रहे हैं। एक आरोपी मस्जिद को नुकसान पहुंचाए जाने की बात करते हुए लोगों को दुकानें बंद करने और रात काली करने की बात कहता है। दिल्ली पुलिस की ओर से दी गई सूचना के मुताबिक रात को उग्र भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया जिसमें करीब 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को काबू किया।  

आतिशी पर सिख भावनाएं आहत करने का आरोप, BJP ने जारी किया वीडियो, कार्रवाई की उठी मांग

नई दिल्ली दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी की सदस्यता रद्द करने और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दायर करने की मांग की है। अपनी इस मांग को लेकर उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भी लिखा है। इस बारे में दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने बुधवार को मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कल मंगलवार को विधानसभा में सिखों के नौवें गुरु श्री तेग बहादुर जी की शहादत पर चर्चा की गई थी, जिसमें विपक्ष की नेता आतिशी ने भाग नहीं लिया, इसके साथ ही वर्मा ने आतिशी पर इस दौरान गुरु तेग बहादुर का अपमान करने का आरोप भी लगाया।   प्रवेश वर्मा ने कहा कि आतिशी द्वारा किए गए अपमान के मुद्दे को सभी भाजपा विधायकों ने उठाया, जिसके बाद स्पीकर ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने बताया कि सभी भाजपा विधायकों ने स्पीकर को पत्र देकर आतिशी की विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की मांग की है और हमें उम्मीद है कि उनकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने इसे टाइम बाउंड करने की बात भी कही। प्रवेश वर्मा बोले- हम गुरुजी के अपमान से आहत मंत्री वर्मा ने कहा कि देश का हर नागरिक गुरु तेग बहादुर जी के हुए अपमान से आहत है और इस बात से हमें भी चोट लगी है। इसके साथ ही वर्मा ने बताया कि कल जो सदन में आतिशी ने कहा है उसकी कॉपी हमने स्पीकर को दे दी है। उधर मंगलवार को आतिशी ने सदन में जो कुछ भी कहा उसका वीडियो दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर शेयर किया। कपिल मिश्रा ने शेयर किया विधानसभा में हुई घटना का वीडियो कपिल मिश्रा ने वीडियो को शेयर करते हुए बताया कि 'कल (मंगलवार) जब दिल्ली विधानसभा में हो रहा था गुरुओं का सम्मान, तब नेता विपक्ष आतिशी ने बहुत भद्दी और शर्मनाक भाषा का इस्तेमाल किया। खुद सुनिए …क्या ऐसे व्यक्ति को पवित्र सदन में रहने का अधिकार है?'

बल्ले से बरसा वैभव सूर्यवंशी का कहर, साउथ अफ्रीका पस्त

नई दिल्ली विस्फोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने बुधवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे वनडे के दौरान दमदार शतक लगाया है। इंडिया अंडर-19 टीम के कप्तान वैभव सूर्यवंशी ने इस सीरीज में पहली बार शतक ठोका है। वैभव अफ्रीका के खिलाफ शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने पिछले मैच में 24 गेंद में ताबड़तोड़ 68 रन बनाए थे और टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। तीसरे वनडे में वैभव सूर्यवंशी ने 63 गेंद में 100 रन पूरे किए। इस दौरान उन्होंने अपनी पारी में 5 चौके और 8 छक्के लगाए। वैभव सूर्यवंशी ने तीसरे वनडे में अफ्रीका के खिलाफ आरोन जॉर्ज के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 200 से ज्यादा रन जोड़े हैं। आरोन भी शतक के करीब हैं। इससे पहले अफ्रीका अंडर-19 के खिलाफ के खिलाफ दूसरे यूथ वनडे में वैभव ने कप्तानी करते हुए मात्र 24 गेंदों पर 68 रन बनाए। उन्होंने 15 गेंदों पर अर्धशतक जड़ा, जो यूथ वनडे में सबसे तेज है। उन्होंने अपनी पारी में 10 छक्के और सिर्फ एक चौका लगाया, जिसमें से 64 रन बाउंड्री से आए, जिससे साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों को उन्हें रोकने में मुश्किल हुई। उन्होंने सीनियर भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत के पिछले भारतीय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जिन्होंने 18 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की थी। इस पारी की बदौलत भारत ने दूसरा मैच 8 विकेट से मैच जीतकर सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बनाई। इससे पहले वैभव सूर्यवंशी ने विजय हजारे ट्रॉफी में बिहार के लिए खेलते हुए अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 84 गेंदों पर 190 रन की विस्फोटक पारी खेली थी। इसमें 16 चौके और 15 छक्के शामिल थे। उन्होंने 36 गेंदों पर शतक और 54 गेंदों पर 150 रन पूरे किए, जो लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे तेज 150 का विश्व रिकॉर्ड है (एबी डिविलियर्स का पुराना रिकॉर्ड तोड़ा)। वे लिस्ट ए में शतक बनाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी भी बने। इस पारी से बिहार ने 574/6 का स्कोर बनाकर लिस्ट ए का सर्वोच्च टीम कुल का विश्व रिकॉर्ड कायम किया।  

MCD कार्रवाई के दौरान तुर्कमान गेट में हिंसा, बॉडी कैमरों से पत्थरबाज़ों की पहचान

नई दिल्ली  दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध निर्माण हटाने के दौरान बवाल हुआ. देर रात चले इस अभियान में कुछ असामाजिक तत्वों ने मौके पर तैनात पुलिस बल पर पत्थरबाजी शुरू कर दी. जिसमें चार से पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए. अब इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिन पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी के दौरान बॉडी कैम लगाए हुए थे, उनके बॉडी कैम फुटेज और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से पत्थरबाजी करने वालों की पहचान की गई. 10 पत्थरबाजों को हिरासत में लिया गया है. जांच के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इस संबंध में एफआईआर भी दर्ज की गई है. दिल्ली पुलिस और MCD अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह डिमोलिशन ड्राइव किसी धार्मिक स्थल के खिलाफ नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से हाईकोर्ट के आदेश के तहत अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई थी. डीसीपी सेंट्रल निधिन वालसन ने बताया कि यह कार्रवाई रात करीब 1 बजे शुरू हुई. मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके. डीसीपी निधिन वालसन के मुताबिक, एमसीडी हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अतिक्रमित भूमि पर कार्रवाई कर रही थी. हमने सुरक्षा के लिए अपना स्टाफ तैनात किया था. कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने रात में पुलिस पर पत्थर फेंके. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्के बल का इस्तेमाल किया गया. कुल मिलाकर प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही, लेकिन चार से पांच पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई हैं. बॉडी कैम और CCTV से खुलेगा राज पुलिस का कहना है कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान कई पुलिसकर्मियों ने बॉडी कैम पहन रखे थे. इसके अलावा, तुर्कमान गेट और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है. दिल्ली पुलिस अब इन सभी फुटेज को खंगाल रही है. अधिकारियों के अनुसार, फुटेज के जरिए यह साफ किया गया कि पत्थरबाज़ी किसने की, किस समय की गई और किन परिस्थितियों में ये सब हुआ. पुलिस सूत्रों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है.  पुलिस पर हमला, पांच जवान घायल घटना के दौरान हालात उस वक्त तनावपूर्ण हो गए, जब भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने अचानक पुलिस पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया. पुलिस के अनुसार, यह पत्थरबाज़ी सुनियोजित प्रतीत होती है, क्योंकि कुछ लोग पहले से ही मौके पर मौजूद थे और भीड़ को उकसाने की कोशिश कर रहे थे. पत्थरबाजी में घायल हुए पुलिसकर्मियों को प्राथमिक उपचार दिया गया. सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है. पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि सरकारी काम में बाधा डालना और पुलिसकर्मियों पर हमला करना गंभीर अपराध है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. मस्जिद को नुकसान नहीं, अवैध ढांचे हटाए गए अधिकारियों ने बताया कि  फैज़-ए-इलाही मस्जिद को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया गया है. पुलिस और MCD दोनों ने स्पष्ट किया है कि मस्जिद को बिल्कुल नहीं तोड़ा गया. कार्रवाई केवल मस्जिद के आसपास बने अवैध निर्माणों पर की गई. जानकारी के मुताबिक, जिन ढांचों को हटाया गया, उनमें एक बारात घर का हिस्सा, कुछ अवैध दुकानें, एक डिस्पेंसरी शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि ये सभी निर्माण अतिक्रमित भूमि पर बने हुए थे और इनके खिलाफ पहले से कानूनी प्रक्रिया चल रही थी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही इन्हें हटाया गया. FIR हुई, सभी पर होगी कार्रवाई दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक एफआईआर दर्ज की है. सूत्रों के मुताबिक इसमें सरकारी कार्य में बाधा, पुलिस पर हमला और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसी धाराएं लगाई गई हैं. डीसीपी सेंट्रल ने साफ कहा है कि जो लोग हंगामा करने में शामिल थे, उनकी पहचान की जाएगी और सभी के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होगी. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस घटना के पीछे किसी तरह की साजिश थी या फिर भीड़ को जानबूझकर उकसाया गया. यदि ऐसा पाया गया, तो साजिश रचने वालों के खिलाफ भी अलग से कार्रवाई की जाएगी. इलाके में पुलिस तैनाती बढ़ी घटना के बाद तुर्कमान गेट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. किसी भी तरह की अफवाह या दोबारा हिंसा को रोकने के लिए लगातार गश्त की जा रही है. पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है.

रातभर चली बुलडोजर कार्रवाई के बाद दिल्ली की मस्जिद के आसपास क्या बदला? देखें तस्वीरें

 नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास बीती रात बुलडोजर एक्शन किया गया. पुलिस प्रशासन का दावा है कि मस्जिद के आस-पास मौजूद अवैध निर्माण को ढहाने के लिए यह कार्रवाई की गई, जिसके लिए मौके पर 30 से ज्यादा बुलडोजर पहुंचे.  पुलिस ने बताया कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान पत्थरबाजी और पुलिस की तरफ से आंसू गैस के गोले दागे जाने की जानकारी भी सामने आई है. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े. दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारियों ने बताया कि बुलडोजर कार्रवाई रात 1 बजे शुरू हुई. पुलिस ने बताया कि चार से पांच पुलिस अधिकारियों को मामूली चोटें आई हैं. अभी मौके पर क्या हालात? तुर्कमान गेट के पास फैज़-ए-इलाही मस्जिद के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दिल्ली पुलिस ने पत्थरबाजी की घटना के सिलसिले में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. CCTV फुटेज और बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग की मदद से पत्थर फेंकने वालों की पहचान की जा रही है. कोर्ट के नोटिस के बावजूद चले बुलडोजर मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने मस्जिद सैयद इलाही की मैनेजिंग कमेटी की तरफ से दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें दिल्ली नगर निगम (MCD) के रामलीला मैदान में मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी ज़मीन से कथित अतिक्रमण हटाने के फैसले को चुनौती दी गई थी. नोटिस जारी किए जाने के बावजूद तोड़फोड़ की कार्रवाई जारी रही है. अतिक्रमण में सड़क का कुछ हिस्सा, एक फुटपाथ, एक कम्युनिटी हॉल, एक पार्किंग एरिया और एक प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर शामिल थे. सेंट्रल रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस मधुर वर्मा ने बताया कि कुछ लोगों ने पत्थर फेंककर ड्राइव को रोकने की कोशिश की. उन्होंने कहा, "हालात को तुरंत काबू में कर लिया गया और सही मात्रा में बल का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह तय हुआ कि बिना किसी तनाव के हालात सामान्य हो जाएं." पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि ऑपरेशन से पहले शांति बनाए रखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ कई कोऑर्डिनेशन मीटिंग की गईं. उन्होंने कहा कि पहले से ही बचाव और भरोसा दिलाने वाले कदम उठाए गए थे. मामला कोर्ट में जाने के बाद क्या हुआ? MCD का फैसला हाई कोर्ट की एक डिवीज़न बेंच के 12 नवंबर, 2025 के आदेश के तहत लिया गया था, जिसने सिविक बॉडी और PWD को तुर्कमान गेट के पास रामलीला मैदान में 38,940 वर्ग फुट के अतिक्रमण को हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया था. हाई कोर्ट ने यह आदेश सेव इंडिया फाउंडेशन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया था, जिसका प्रतिनिधित्व कोर्ट में वकील उमेश चंद्र शर्मा ने किया था. अक्टूबर 2025 में, अधिकारियों द्वारा एक संयुक्त सर्वे किया गया था, जिसमें यह दर्ज किया गया था कि ज़मीन पर अतिक्रमण था, जिसका कुछ हिस्सा MCD, PWD और L&DO सहित अधिकारियों का था. नोटिस के बाद, MCD के अधिकारी 4 जनवरी को अतिक्रमण वाले इलाके को चिह्नित करने के लिए साइट पर गए, लेकिन उन्हें स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके कारण पुलिस की तैनाती बढ़ानी पड़ी. MCD के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए, मस्जिद सैयद इलाही मैनेजमेंट कमेटी ने कहा कि संबंधित संपत्ति का उपयोग उसके द्वारा किया जा रहा है और वह वक्फ बोर्ड को लीज का किराया दे रही है. याचिका में कहा गया है कि यह ज़मीन वक्फ अधिनियम द्वारा शासित एक अधिसूचित वक्फ संपत्ति है और इसलिए, इससे संबंधित सभी विवादों पर वक्फ ट्रिब्यूनल का विशेष अधिकार क्षेत्र है.

JNU कैंपस में नारेबाजी को लेकर गिरिराज सिंह सख्त, कहा– ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए’

नई दिल्ली/पटना केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के कैंपस में लगे विवादित नारे के बाद कहा है कि भारत को बांटने और पाकिस्तान की सोच रखने वाले गलतफहमी में न रहें। चरमपंथियों और नक्सलियों के साथ-साथ 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' को भी खत्म कर दिया जाएगा। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, "जेएनयू कैंपस 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का सेंटर बन गया है, जिसमें राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी पार्टियां और दूसरे विपक्षी दल शामिल हैं। देश इसे ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं करेगा।" उन्होंने कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया, मैं उसका स्वागत करता हूं। इसी बीच, गिरिराज सिंह ने कहा, "जो लोग भारत को बांटने की बात करते हैं और पाकिस्तान जैसी सोच रखते हैं, उनकी इस देश में कोई जगह नहीं है। गलतफहमी में न रहें। यह नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सरकार है। जिस तरह चरमपंथियों और नक्सलियों को खत्म किया जा रहा है, उसी तरह 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' को भी खत्म कर दिया जाएगा।" वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि जेएनयू में लगाए जा रहे नारे एक अर्बन-नक्सली विचारधारा है जिसे राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी सपोर्ट करते हैं। यह वही विचारधारा है जिसे बौद्धिक आतंकवाद में बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब से देशद्रोही उमर खालिद, जो कहता है कि भारत ने जम्मू-कश्मीर पर गैर-कानूनी कब्जा किया है, या देशद्रोही शरजील इमाम जो कहता है कि वह चिकन नेक को भारत से अलग करना चाहता है, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। प्रदीप भंडारी ने आगे कहा, "उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में कांग्रेस के नेता आए हैं। जिस तरह जेएनयू कैंपस में नारे लगे हैं, इन नारों का समर्थन मौन स्वीकृति के जरिए कांग्रेस पार्टी कर रही है। चुनाव के मैदान में जनता के सामने इनका देशविरोधी चेहरा होता है। यही कारण है कि जनता उन्हें बार-बार विपक्ष में बैठाती है।"

इंदौर की घटनाओं का असर दिल्ली तक: BJP नेता बोले—आम जनता को मुफ्त बोतल वाला पानी दिया जाए

नई दिल्ली इंदौर में दूषित जल पीने से कई लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की घटना के बीच दिल्ली सरकार से भी लोगों को बोतलबंद पानी आपूर्ति की मांग की गई है। यह मांग किसी और ने नहीं खुद भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व विधायक सरदार आरपी सिंह की है। उन्होंने दिल्ली सरकार को शहरवासियों को बोतलबंद पानी उपलब्ध कराने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सीवर का पानी पाइपलाइन में मिल जाने की आशंका बनी रहती है। आरपी सिंह ने कहा कि उन्होंने दिल्ली सरकार के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह को पत्र लिखकर उनसे इस सलाह पर विचार करने का आग्रह किया है। भाजपा के प्रवक्ता और राष्ट्रीय राजधानी में राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक सिंह ने मुफ्त पानी देने का तरीका भी सुझाया है। उन्होंने कहा कि मुफ्त बोतलबंद पानी की आपूर्ति बोतलों पर विज्ञापनों और सुरक्षित पेयजल बुक करने संबंधी ऐप के जरिए प्रायोजित की जा सकती है। आरपी सिंह ने कहा- हमेशा रहती है आशंका उन्होंने कहा, ‘पानी की पाइपलाइन की मरम्मत पर चाहे जितना भी ध्यान दिया जाए, मलजल लाइन और अन्य स्रोतों से इसके दूषित होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। बोतलबंद पानी से यह सुनिश्चित होगा कि लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी मिले।’ सिंह ने यह भी तर्क दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की आपूर्ति को भी घरों में आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) मशीनों के जरिए और शुद्ध किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि, गरीब लोगों का स्वास्थ्य दांव पर है क्योंकि वे महंगी आरओ मशीन नहीं लगवा सकते और असुरक्षित पेयजल पर निर्भर रहते हैं या निजी निर्माताओं का वह बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं जिसकी गुणवत्ता संदिग्ध होती है।’