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4 साल में ही खस्ताहाल स्कूल भवन पर बवाल, स्वाति मालीवाल बोलीं– बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़, सिसोदिया जिम्मेदार

नई दिल्ली दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। साल 2020 में करोड़ों रुपए की लागत से बनी एक सरकारी स्कूल की चार मंजिला इमारत अब इतनी खराब हालत में पहुंच चुकी है कि उसे 'डेंजरस' घोषित कर बंद करना पड़ा है। इस मामले को लेकर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी और तत्कालीन शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 4–5 साल में खंडहर बनी 2020 की स्कूल बिल्डिंग, सुरक्षा के चलते स्कूल बंद सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, स्वाति मालीवाल का कहना है कि जिस स्कूल को 2020 में बनाया गया था, वह महज 4–5 साल में ही खंडहर जैसी हालत में पहुंच गया। उन्होंने स्कूल भवन की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि इमारत में जगह-जगह दरारें, भारी सीलन, कमजोर दीवारें और कुछ हिस्सों में लेंटर तक नहीं है। ऐसे हालात में बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल को बंद करना पड़ा। दरारें, सीलन और कमजोर ढांचा, स्वाति मालीवाल ने तस्वीरें-वीडियो जारी कर उठाए सवाल स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। उनका कहना है कि अगर निर्माण कार्य सही तरीके से और मानकों के अनुसार हुआ होता, तो इतनी नई बिल्डिंग को खतरनाक घोषित नहीं करना पड़ता। उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी क्यों नहीं हुई। भ्रष्टाचार का आरोप, करोड़ों खर्च के बावजूद निर्माण गुणवत्ता पर सवाल वहीं आम आदमी पार्टी और मनीष सिसोदिया समर्थकों की ओर से इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में हजारों सरकारी स्कूलों का निर्माण और नवीनीकरण किया गया है और किसी एक इमारत की खराब हालत के आधार पर पूरे शिक्षा मॉडल पर सवाल उठाना गलत है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर किसी स्कूल में निर्माण से जुड़ी खामी पाई गई है, तो उसकी तकनीकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार ठेकेदार या एजेंसी पर कार्रवाई की जानी चाहिए।   AAP का पलटवार, आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित, तकनीकी जांच की मांग इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या स्कूल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ? क्या गुणवत्ता जांच में लापरवाही बरती गई? और सबसे बड़ा सवाल, बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? घटिया निर्माण या निगरानी में चूक? दिल्ली के स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा सवाल फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप के बीच है, लेकिन 2020 में बनी एक स्कूल इमारत का इतनी जल्दी जर्जर हो जाना दिल्ली के सरकारी निर्माण कार्यों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है।  

दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, गणतंत्र दिवस से पहले 94 जगहों पर रेड, 70 लोग पकड़े

नई दिल्ली गणतंत्र दिवस से ठीक पहले राजधानी में किसी बड़ी साजिश की आशंका के बीच दिल्ली पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर करारा प्रहार किया है. दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जिले में हाई अलर्ट के दौरान पुलिस ने ‘ऑपरेशन कवच-12’ के तहत एक साथ 94 जगहों पर छापेमारी कर 70 लोगों को गिरफ्तार किया है. सूत्रों के मुताबिक, 26 जनवरी को देखते हुए पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियों की इनपुट मिली थी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं. इसी कड़ी में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली पुलिस ने 78 विशेष टीमों का गठन कर संवेदनशील इलाकों में एक साथ कार्रवाई की. अचानक हुई इस छापेमारी से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई संदिग्ध वाहनों को रोका और उनकी तलाशी ली. जांच में कुछ गाड़ियों से आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ, जिसके बाद उन्हें जब्त कर लिया गया. इसके अलावा अलग-अलग मामलों में पकड़े गए 70 आरोपियों के पास से हथियार, नशीले पदार्थ और नकदी भी बरामद की गई है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए कई लोग पहले से आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं और गणतंत्र दिवस से पहले किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हो सकते थे. फिलहाल सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित साजिश तो नहीं थी. दक्षिण-पूर्वी दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ‘ऑपरेशन कवच-12’ का उद्देश्य गणतंत्र दिवस के मद्देनजर राजधानी में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और किसी भी तरह की साजिश को नाकाम करना है. उन्होंने साफ कहा कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. दिल्ली पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि 26 जनवरी का पर्व शांति और सुरक्षित माहौल में मनाया जा सके.

युवराज केस में उलझी कहानी: मौके पर मौजूद थे लोग, फिर मदद क्यों नहीं मिली? पुलिस के जवाब पर शक गहरा

नई नोएडा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दुखद मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया है। 27 साल के युवराज 16 जनवरी 2026 की रात अपनी कार से घर लौट रहे थे। घने कोहरे के कारण उनकी एसयूवी निर्माणाधीन साइट के पास एक गहरे पानी भरे गड्ढे में जा गिरी। युवराज कार की छत पर चढ़ गए और फोन की फ्लैशलाइट जलाकर मदद मांगते रहे। उन्होंने अपने पिता को फोन किया और 'पापा, मुझे बचा लो' कहकर गुहार लगाई। करीब दो घंटे तक वो जिंदगी की लड़ाई लड़ते रहे, लेकिन बचाव में देरी के कारण उनकी मौत हो गई। इस मामले में अब पुलिस का स्पष्टीकरण आया है। पुलिस ने बताया है कि रेस्क्यू के दौरान उनके पास क्या-क्या संसाधन थे। लेकिन अब सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतने संसाधनों के साथ भी क्यों हाथ बंधे रहे?   हादसे के बाद क्या हुआ? पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। नोएडा पुलिस ने बताया कि डायल 112 पर सूचना मिलते ही पीआरवी न्यूनतम समय में पहुंच गई। टीमों ने लाइफ बाय रिंग, रबर बोट, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, सर्च लाइट, लाइफ-सेविंग रोप और एक्सटेंशन लैडर जैसे उपकरणों से रेस्क्यू की कोशिश की। लेकिन घना कोहरा और कम विजिबिलिटी ने काम मुश्किल कर दिया। युवराज को निकालने में देर हुई और कार को बाहर निकालने में चार दिन लग गए। पुलिस के जवाब से सवाल और बढ़े पुलिस का दावा है कि संसाधन पूरे थे और प्रयास किए गए। नोएडा पुलिस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र के अंतर्गत हुयी घटना के सम्बन्ध में सूचना, डायल 112 पर प्राप्त होते ही घना कोहरा और न्यूनतम विजिबिलिटी होने के बाद भी पीआरवी न्यूनतम प्रतिक्रिया समय में घटना स्थल पर पहुंची। साथ ही स्थानीय पुलिस, फायर सर्विस/रेस्क्यू टेंडर मौके पर पहुंचे। सभी प्रकार के उपकरण लाइफ बॉय रिंग, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, सर्च एंड रेस्क्यू लाइट, एयर-फिल्ड रबर बोट, हाइड्रा, लाइफ-सेविंग रोप, ड्रैगन टॉर्च, रेस्क्यू फायर टेंडर और एक्सटेंशन लैडर की मदद से रेस्क्यू के प्रयास किए गए थे।   अब और उठ रहे सवाल नोएडा पुलिस के इस दावे के बाद सवाल और भी ज्यादा हो गए हैं। आखिर इतने उपकरण और टीमें होने के बावजूद युवराज को क्यों नहीं बचाया जा सका? वायरल वीडियो में दिखता है कि रेस्क्यू टीम के जवान दिशा-निर्देश दे रहे थे, लेकिन कोई पानी में नहीं उतरा। एक फ्लिपकार्ट डिलीवरी एजेंट मोनिंदर सिंह ने पानी में उतरकर कोशिश की, लेकिन अकेले क्या कर पाता? अब कुछ रिपोर्ट्स में मोनिंदर पर पुलिस दबाव का आरोप लगा है कि उन्होंने बयान बदला। जांच और कार्रवाई तेज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उच्च स्तरीय एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने घटनास्थल पर सीन रीक्रिएट किया। पुलिस ने निर्माण साइट की लापरवाही के लिए लोटस ग्रीन के दो बिल्डरों रवि बंसल और सचिन कर्णवाल को गिरफ्तार किया। नोएडा अथॉरिटी से रिपोर्ट मांगी गई, जिसमें डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान शामिल है। रिपोर्ट 24 जनवरी को सरकार को सौंपी जाएगी। एनजीटी ने भी स्वतः संज्ञान लिया और कई अधिकारियों को नोटिस जारी किया। सोशल मीडिया पर गुस्सा यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि निर्माण साइट पर बैरिकेडिंग नहीं थी, सुरक्षा मानक टूटे गए। नोएडा जैसे 'स्मार्ट सिटी' में खुले गड्ढे और नाले मौत का जाल बने हुए हैं। युवराज के पिता का कहना है कि अगर समय पर मदद मिलती, तो बेटा बच जाता।  

नक्सलमुक्त भारत की ओर बड़ा कदम: झारखंड में माओवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई—अमित शाह

नई दिल्ली झारखंड में माओवादियों के ढेर होने से नक्सलमुक्त अभियान को मिली बड़ी सफलता: अमित शाह नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में 1 करोड़ के कुख्यात इनामी नक्सली सेंट्रल कमेटी मेंबर 'अनल उर्फ पतिराम मांझी' और 15 अन्य नक्सलियों के मारे जाने पर कहा कि इससे नक्सलमुक्त अभियान को बड़ी सफलता मिली है। इसके साथ ही उन्होंने नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि हिंसा, आतंक और हथियारों से जोड़ने वाली विचारधारा को छोड़ विकास और विश्वास की मुख्यधारा से जुड़ें। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, ''आज पश्चिमी सिंहभूम में सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस द्वारा चलाए जा रहे एक जॉइंट ऑपरेशन में 1 करोड़ का कुख्यात इनामी नक्सली सेंट्रल कमेटी मेंबर 'अनल उर्फ पतिराम मांझी' और 15 अन्य नक्सलियों के अब तक एनकाउंटर से नक्सलमुक्त अभियान को बड़ी सफलता मिली। दशकों से भय और आतंक के पर्याय रहे नक्सलवाद को हम 31 मार्च 2026 से पहले समाप्त करने के लिए संकल्पित हैं। मेरी पुनः शेष बचे नक्सलियों से अपील है कि हिंसा, आतंक और हथियारों से जोड़ने वाली विचारधारा को छोड़ विकास और विश्वास की मुख्यधारा से जुड़ें।" झारखंड के नक्सल प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में गुरुवार को सुरक्षाबलों को अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी माओवादी पतिराम मांझी उर्फ अनल दा और 15 नक्सली ढेर कर दिए गए। मारे गए नक्सलियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार सिंह ने बताया कि मारे गए अन्य नक्सलियों में अनमोल उर्फ सुशांत (बीजेएसएसी), अमित मुंडा (आरसीएम), पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालु, राजेश मुंडा, बुलबुल अलदा, बबिता, पूर्णिमा, सूरजमुनी और जोंगा शामिल हैं। इनमें से कई पर झारखंड, ओडिशा और एनआईए ने लाखों रुपए के इनाम घोषित किए थे, और इन सभी के खिलाफ गंभीर नक्सली मामलों के दर्जनों केस दर्ज थे। ये सभी नक्सली केंद्रीय कमेटी सदस्य (सीसीएम) अनल उर्फ पतिराम मांझी के दस्ते के साथ झारखंड के कोल्हान इलाके में लंबे समय से सक्रिय थे। अनल दा पर झारखंड में एक करोड़ और ओडिशा में एक करोड़ 20 लाख का इनाम घोषित था।

दिल्ली शराब नीति मामला: केजरीवाल को दो केसों में क्लीन चिट, कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली कथित शराब घोटाले से जुड़े दो केस में आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को राहत मिल गई है। समन को दरकिनार किए जाने की वजह से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज किए गए मुकदमों में दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री को बरी कर दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) पारस दलाल ने गुरुवार को आदेश पारित किया। विस्तृत आदेश का इंतजार है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएल) की धारा 50 के तहत दिए गए समन को दरकिनार किए जाने पर फरवरी 2024 में ईडी ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।  

एयरपोर्ट सुरक्षा में सनसनी: दिल्ली एयरपोर्ट पर मिला मानव कंकाल, जांच में जुटी पुलिस

नई दिल्ली दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब जांच के दौरान मानव कंकाल जैसी दिखने वाली वस्तु बरामद हुई। दिल्ली पुलिस ने कंकाल को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। शुरुआती जांच में पता चला कि यह एक डेमो कंकाल है, जिसका उपयोग मेडिकल छात्र करते हैं।   दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 पर गुरुवार को सुरक्षा कर्मियों द्वारा मानव कंकाल जैसी दिखने वाली वस्तु बरामद की गई। इसकी सूचना फैलने के बाद थोड़ी देर के लिए वहां अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद हवाई अड्डे की सुरक्षा और दिल्ली पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला कि कंकाल एक डेमो कंकाल है, जिसका उपयोग मेडिकल छात्र आमतौर पर शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए करते हैं। यह कंकाल एक मेडिकल छात्र के सामान में मिली थी, जिससे पुष्टि होती है कि इसका किसी आपराधिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। हालांकि, किसी भी संदेह को दूर करने के लिए दिल्ली पुलिस ने कंकाल को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। अधिकारियों ने बताया कि फोरेंसिक विश्लेषण से वैज्ञानिक रूप से यह साबित हो जाएगा कि बरामद अवशेष वास्तव में शैक्षिक प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल किया गया एक डेमो कंकाल है या फिर मानव का। एक रनवे 5 महीनों के लिए बंद रहेगा दिल्ली एयरपोर्ट पर इंफ्रास्ट्रक्चरल अपग्रेडेशन के काम की वजह से एयरपोर्ट का एक रनवे 16 फरवरी से लगभग 5 महीनों के लिए बंद रहेगा। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने कहा कि रनवे 11R/29L की री-सर्फेसिंग की जानी है, इसके साथ ही इसका टेक्निकल अपग्रेड भी होना है। हालांकि, दिल्ली एयरपोर्ट का एक रनवे बंद होने के बावजूद फ्लाइट ऑपरेशन बिना किसी बड़ी रुकावट के सामान्य रूप से जारी रहेंगे।  

पर्यावरण से खिलवाड़ पर NGT की फटकार: युवराज मेहता मामले में यूपी सरकार से मांगा जवाब

नई नोएडा एनजीटी ने नोएडा में 16 जनवरी की रात सेक्टर 150 में पानी भरे गड्ढे में तड़पकर जान देने वाले युवराज मेहता की मौत पर कार्रवाई की है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यूपी सरकार के सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है और उन्हें निर्देश दिया है कि वे कम से कम एक सप्ताह के भीतर हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें। एनजीटी ने कहा कि यह घटना पर्यावरण नियमों के पालन में गंभीर चूक और कानून के उल्लंघन की ओर इशारा करती है।   सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के 6 दिन बाद एनजीटी ने इस मामले में नोएडा अथॉरिटी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB), उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव (पर्यावरण) और गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) को प्रतिवादी बनाया है। इन सभी संबंधित अधिरकारियों को नोटिस दे दिया गया है और सबसे सफ्ताह भर के भीतर जवाब मांगा गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह घटना पर्यावरण नियमों के पालन में गंभीर चूक और कानून के उल्लंघन की ओर इशारा करती है। NGT ने अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया है कि संबंधित जमीन मूल रूप से एक निजी मॉल प्रोजेक्ट के लिए आवंटित की गई थी। लेकिन लगभग एक दशक तक ध्यान न दिए जाने के कारण, बारिश के पानी और आस-पास की हाउसिंग सोसायटियों से निकलने वाले गंदे पानी के जमा होने से यह जगह अब एक तालाब में तब्दील हो गई थी। ट्रिब्यूनल के आदेश में स्थानीय निवासियों के उन आरोपों को भी दर्ज किया गया है, जिनमें उन्होंने नोएडा अथॉरिटी की निष्क्रियता की बात कही थी। निवासियों का कहना है कि जलजमाव की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, जिससे हिंडन नदी का जलस्तर बढ़ने पर पानी के वापस लौटने और खतरा पैदा होने की आशंका बनी रहती थी। प्रथम दृष्टया तथ्यों को देखने के बाद, बेंच ने माना कि समाचार रिपोर्ट में बताए गए तथ्य पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं। इसके साथ ही, यह मामला पर्यावरण नियमों के पालन और कानूनी जिम्मेदारियों को निभाने पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।  

रेखा सरकार का बड़ा कदम: यमुना को फिर से दिल्ली की जीवनरेखा बनाने का वादा

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना को फिर से स्वच्छ और प्रवाहमान बनाने के लिए मिशन-मोड में ठोस एक्शन प्लान लागू करने के निर्देश दिए हैं। यमुना बनेगी फिर से दिल्ली की जीवनरेखा, एक्शन मोड में रेखा सरकार मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ये निर्देश  दिल्ली सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में यमुना की मौजूदा हालत, सीवेज ट्रीटमेंट, नालों की सफाई और अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाने जैसे कामों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना केवल नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की जीवनरेखा है। सरकार वैज्ञानिक योजना, तय समय-सीमा और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर इसे फिर से साफ और जीवंत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। बैठक में सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह सहित दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, डीडीए व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में अभी 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) मिलकर रोजाना 814 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) गंदा पानी साफ कर रहे हैं, जो मौजूदा जरूरत के हिसाब से काफी है। लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने इस क्षमता को बढ़ाकर 1500 एमजीडी करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इसके लिए पुरानी मशीनों को सुधारकर दिसंबर 2027 तक 56 एमजीडी और 35 नए छोटे डिसेन्ट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) लगाकर 170 एमजीडी अतिरिक्त क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही नालों के पास नए बड़े प्लांट लगाकर दिसंबर 2028 तक 460 एमजीडी क्षमता और जोड़ी जाएगी, ताकि दिल्ली के सीवेज मैनेजमेंट को पूरी तरह चाक-चौबंद किया जा सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिना साफ किया गया गंदा पानी अब यमुना में नहीं जाएगा। जैसे-जैसे सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता बढ़ेगी, शहर का ज्यादा से ज्यादा गंदा पानी पहले साफ होगा और फिर नदी में छोड़ा जाएगा। इससे यमुना का पानी धीरे-धीरे साफ होगा, बदबू और प्रदूषण कम होगा और नदी में दोबारा जीवन लौटेगा। लंबे समय में इससे पीने के पानी के स्रोत सुरक्षित होंगे, शहर की सेहत सुधरेगी और दिल्ली को भविष्य की बढ़ती आबादी के लिए बेहतर और टिकाऊ सीवेज व्यवस्था मिलेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि अनधिकृत कॉलोनियों और जेजे क्लस्टर्स में सीवर लाइन बिछाने का काम तेजी से किया जा रहा है। 675 जेजे क्लस्टर्स में से 574 में काम पूरा हो चुका है, जबकि 65 क्लस्टर्स में सीवेज इकट्ठा करने के लिए सिंगल पॉइंट कलेक्शन की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, 1799 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क का काम दिसंबर 2026 से दिसंबर 2028 तक चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इससे गंदा पानी बिना साफ हुए यमुना में जाने से रुकेगा। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब तक दिल्ली के हर घर का कनेक्शन सीवर लाइन से नहीं होगा, तब तक गंदा पानी यमुना में गिरना बंद नहीं होगा और नदी पूरी तरह साफ नहीं हो पाएगी। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब दिल्ली के नालों की निगरानी के लिए पहली बार पुख्ता सिस्टम बनाया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की टीमें 47 तय जगहों पर हर महीने पानी की जांच कर रही हैं। नजफगढ़ और शाहदरा नालों से जुड़े सभी छोटे नालों की पहचान और जांच ड्रोन सर्वे के जरिए जनवरी 2026 तक पूरी कर ली जाएगी, जबकि बाकी नालों का सर्वे दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) जून 2026 तक पूरा करेगा। इस पूरी कवायद का मकसद यह पता लगाना है कि कहां से और कितना प्रदूषण नदी में मिल रहा है ताकि उसे रोका जा सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यमुना को निर्मल करने के लिए पड़ोसी राज्यों से भी समन्वय बनाना होगा। बैठक में बताया गया कि नजफगढ़ ड्रेन में हरियाणा राज्य के छह नाले आकर मिलते हैं, जो कुल दूषित पानी का 33 प्रतिशत है। इसके अलावा, शाहदरा ड्रेन में उत्तर प्रदेश के चार बड़े नाले आकर गिरते हैं, जो कुल दूषित पानी का करीब 40 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मसले को लेकर वह दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री से समाधान पर बात करेंगी। मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि वर्ष 2028 तक यमुना पुनर्जीवन मिशन के अंतर्गत दिल्ली में सभी प्रमुख नालों और सीवर से जुड़े कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व और निगरानी में दिल्ली सरकार और एमसीडी के सभी संबंधित विभाग एकीकृत, समयबद्ध कार्ययोजना के तहत कार्य कर रहे हैं। डीडीए भूमि सहित पूरे शहर में सीवर नेटवर्क के विस्तार का कार्य पूर्ण समन्वय के साथ तेजी से प्रगति पर है।

युवराज मौत मामले में पहली गिरफ्तारी, नोएडा पुलिस ने बिल्डर को दबोचा

नोएडा दिल्ली एनसीआर के नोएडा सेक्टर-150 में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में पहली गिरफ्तारी हो गई है। ये गिरफ्तारी MZ विशटाउन के बिल्डर और मालिक की हुई है। उसका नाम अभय कुमार है। उसे नॉलेज पार्क पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस में दर्ज FIR में दो बिल्डर एमजेड विश्टाउन और लोटस ग्रीन को नामजद किया गया है।   योगी बोले- 5 दिन में रिपोर्ट सौंपिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना की जांच रिपोर्ट 5 दिन के अंदर तलब की है। इस मामले को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री ने एक 3 सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया है। उत्तर प्रदेश शासन ने सोमवार को नोएडा विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया था। अभी तक नोएडा विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पद पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। SIT जांच पर क्या बोले अधिकारी मेरठ जोन के एडीजी और एसआईटी हेड भानू भास्कर ने बताया- नोएडा प्राधिकरण टीम, नोएडा जिला अधिकारी, नोएडा पुलिस कमिश्नर समेत सभी लोग वहां मौजूद हैं। हमारी एसआईटी टीम ने जांच शुरू कर दी है। शासन के निर्देशों पर हम पांच दिनों के अंदर इसकी रिपोर्ट दे देंगे। सभी लोगों से बातचीत की जाएगी। सभी से बात करने के बाद देखेंगे कि आखिर किन कारणों से ये एक्सीडेंट हुआ है। गड्डों की पहचान, सुरक्षा के उपाय के आदेश सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जीएनआईडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CO) एन जी रवि कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सड़कों पर या उसके आसपास के सभी गड्ढों की पहचान करें। उन्हें तुरंत भरें तथा एक्सीडेंट की आशंका वाली जगहों को बिना किसी देरी के चिह्नित करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टर और ब्रेकरों सहित जरूरी सुरक्षा उपाय तीन दिनों के भीतर सभी सड़कों पर लागू किए जाएं। युवराज की हादसे में ऐसे हुई थी मौत मृतक इंजीनियर युवराज मेहता की कार 16 जनवरी को निर्माणाधीन स्थल के पास पानी से भरे गड्ढे में गिर गयी थी। उस निर्माणाधीन स्थल पर कोई अवरोधक भी नहीं था। यह गड्ढा एक मॉल के भूमिगत तल के निर्माण के लिए खोदा गया था। इस घटना में लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं।  

दिल्ली में ट्रैफिक का कहर: मेरठ एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की लंबी कतार, 5 किलोमीटर जाम

दिल्ली/मेरठ   देश की राजधानी दिल्‍ली से बड़ी खबर सामने आ ही है. दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेसवे पर 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया है. सैकड़ों-हजानों वहनों के साथ ही बड़ तादाद में आमलोग इसमें फंसे हुए हैं. बताया जा रहा है कि पूर्वी दिल्‍ली के पांडव नगर इलाके से मेरठ एक्‍सप्रेसवे पर जाम लगना शुरू हुआ. उसके बाद धीरे-धीरे गाड़ियों का रेला सराय काले खां तक पहुंच गया. तकरीबन 5 किलोमीटर तक लगे लंबे ट्रैफिक जाम की वजह से वाहन रेंगने को मजबूर हैं. बता दें कि सुबह बड़ी तादाद में नौकरीपेशा लोग दिल्‍ली से एनसीआर और आसपास के शहरों से राष्‍ट्रीय राजधानी की ओर आते हैं, ऐसे में पीक आवर में वाहनों की संख्‍या भी काफी ज्‍यादा रहती है. अब इसी समय ट्रैफिक जाम लगने से हालात बेकाबू होने लगे हैं. ऑफिस और अन्‍य काम के सिलसिले में जा रहे लोग ट्रैफिक जाम में फंसे पड़े हैं. बता दें कि इससे पहले दिल्‍ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से कुछ रूट को लेकर एडवायजरी जारी की गई थी. इसके अनुसार, दिल्‍ली में कुछ प्रमुख रास्‍तों पर 19 जनवरी 2026 को ट्रैफिक प्रतिबंध लागू रहेंगे, जिसको लेकर दिल्‍ली ट्रैफिक पुलिस (Delhi Traffic Police) ने एडवायजरी जारी की. ये प्रतिबंध गणतंत्र दिवस परेड की तैयारियों को लेकर लागू किए गए हैं. सोमवार को सेंट्रल दिल्‍ली की कुछ सड़कों पर प्रतिबंध लागू रहेंगे. ये सड़कें परेड की रिहर्सल को लेकर प्रभावित रहेंगी. ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि सेंट्रल दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में कुछ घंटों के लिए ट्रैफिक प्रतिबंध और डायवर्जन लागू रहेंगे. ऐसे में सोमवार को ऑफिस और स्‍कूल-कॉलेज को खासकर प्रभावित ट्रैफिक रूट का इस्‍तेमाल न करने की सलाह दी गई. कौन सा रूट बंद, कौन ओपन ट्रैफिक एडवायजरी के मुताबिक, परेड की रिहर्सल 17 जनवरी शनिवार से शुरू हुई. 18 जनवरी को रिहर्सल शेड्यूल नहीं थी, जबकि 19 जनवरी, 20 जनवरी और 21 जनवरी को परेड की रिहर्सल होगी. इसको लेकर सुबह करीब 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक सेंट्रल दिल्‍ली की कुछ सड़कें प्रभावित रहेंगी. परेड रिहर्सल का रूट विजय चौक (Vijay Chowk) से इंडिया (India Gate) तक और कर्तव्‍य पथ से C-हेक्सागन तक रहेगा. इसके अलावा विजय चौक से इंडिया गेट तक कर्तव्य पथ पूरी तरह बंद रहेगा. ऐसे में एडवायजरी में घर से निकलने से पहले रूट के बारे में जानकारी लेने की सलाह दी गई है. ट्रैफिक पुलिस का नया अभियान दिल्ली में लगातार बढ़ती जाम की समस्या और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर लगाम कसने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने नए अभियान की शुरुआत की है. पुलिस ने शहर के छह ऐसे स्थानों का चयन किया है, जहां दिनभर वाहन चालकों को जाम से जूझना पड़ता है. इन स्थानों को जीरो टोलरेंस जोन बनाकर यहां दिनभर ट्रैफिक पुलिस की टीमें तैनात की गई हैं जिससे जाम से राहत मिल सके. शनिवार से शुरू किए अभियान के बाद रविवार को सभी स्थानों पर लोगों को जाम से निजात मिल गई. बड़े जाम प्वाइंट आनंद विहार बस अड्डा के बाहर भी पुलिस टीमें तैनात रहीं और ट्रैफिक का संचालन सुचारू रहा. दरअसल, ट्रैफिक पुलिस ने उन स्थानों को नो टोलरेंस जोन बनाया है, जहां आए दिन जाम की शिकायत मिलती थी. आनंद विहार और अन्य स्थानों पर अवैध बस पार्किंग से जाम का मुद्दा अक्‍सर ही उठता रहता है. इन स्थानों पर बस, ऑटो और ई-रिक्शा चालक अवैध पार्किंग कर सवारी चढ़ाते-उतारते थे जिससे जाम लग जाता था.