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रेलवे ट्रैक पर ड्रोन से होगी निगरानी, CCTV कैमरे लगवाने का फैसला: रवनीत बिट्टू

पटियाला/चंडीगढ़ रेलवे लाइनों पर ड्रोन से नजर रखी जाएगी। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने शंभू के निकट हाल ही में हुए विस्फोट स्थल का बीते दिन दौरा किया और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) के साथ सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री ने पंजाब में रेलवे को निशाना बनाकर हो रही बार-बार की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की और सुरक्षा व निगरानी को मजबूत करने के लिए सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया। रवनीत सिंह ने घोषणा की कि रेलवे ईडीएफसी पर 24 घंटे गश्त को और सघन करेगा तथा निगरानी व्यवस्था का व्यापक विस्तार किया जाएगा। वर्तमान में अंबाला मंडल के पंजाब क्षेत्र में 173 सीसीटीवी कैमरे पहले ही लगाए जा चुके हैं और अतिरिक्त कैमरों की स्थापना जारी है। कॉरिडोर के एकांत एवं संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां ड्रोन निगरानी सहित उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे के की-मैन द्वारा निरंतर जमीनी गश्त की जाएगी। मंत्री ने बताया कि यह घटना पिछले 3 महीनों में लगभग 35 किलोमीटर के दायरे में दूसरी घटना है। पहली घटना 23 जनवरी को हुई थी, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से लगभग 800–900 मीटर की दूरी पर थी, जबकि ताजा विस्फोट स्थल इसी राजमार्ग से लगभग 300 मीटर दूर स्थित है। प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि असामाजिक तत्व राजमार्ग से आसान पहुंच का उपयोग कर रेलवे ट्रैक को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि बाहरी तत्वों की संलिप्तता के संकेत मिल रहे हैं, जो रेलवे जैसी महत्वपूर्ण अवसंरचना को निशाना बनाकर क्षेत्र को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं न केवल सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने का भी प्रयास हैं। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जो साहनेवाल को पश्चिम बंगाल से जोड़ता है, एक महत्वपूर्ण आर्थिक धुरी है, जहां प्रतिदिन लगभग 30 ट्रेनें औद्योगिक और कृषि उत्पादों का परिवहन करती हैं। इस नेटवर्क में किसी भी प्रकार का व्यवधान राज्य और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है। मंत्री ने लोको पायलट की सतर्कता की सराहना की, जिन्होंने झटका महसूस होते ही तुरंत ट्रेन को रोक दिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। तत्पश्चात सुरक्षा एवं आपातकालीन दलों को तुरंत मौके पर भेजा गया। सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मंत्री ने कहा कि रेलवे संपत्तियों की सुरक्षा, यात्रियों और मालगाड़ियों की सुरक्षित आवाजाही तथा आर्थिक गतिविधियों को निर्बाध बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

अमृतसर में 6 किलो हेरोइन सहित तस्कर गिरफ्तार, दुबई से चल रहा नेटवर्क, मास्टरमाइंड अंतरप्रीत का था हाथ

चंडीगढ़  पंजाब में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गुरुवार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। अमृतसर की काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने अमृतसर-जालंधर हाईवे पर अड्डा मानावाला के पास कार्रवाई करते हुए एक ड्रग तस्कर को गिरफ्तार किया और उसके कब्जे से 6 किलोग्राम हेरोइन बरामद की। डीजीपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपी दुबई में बैठे एक हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहा था। इस हैंडलर की पहचान सुल्तानविंड निवासी अंतरप्रीत सिंह के रूप में हुई है, जो पहले से ही नशीले पदार्थों की तस्करी के कई मामलों में वांछित है। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय है और पंजाब में नशे की सप्लाई करने में संलिप्त रहा है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और सप्लाई चैन की जानकारी जुटाई जा रही है। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे की जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है। बरामद नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। यूएई में बैठे हैंडलर के निर्देश पर कर रहा था काम प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपी दुबई (यूएई) में बैठे एक हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहा था। इस हैंडलर की पहचान अमृतसर के सुल्तानविंड इलाके के निवासी अंतरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अंतरप्रीत सिंह पहले भी नशा तस्करी के कई मामलों में शामिल रहा है और उसके खिलाफ कई केस दर्ज हैं। पुलिस ने नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू की पुलिस ने आरोपी के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस प्रतिबद्ध पुलिस का कहना है कि नशा तस्करों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस दिशा में आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इससे पहले पंजाब पुलिस ने 23 अप्रैल को सीमा पार से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी करने वाले तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था, जिनके पास से 915 ग्राम 'आइस' (मेथैम्फेटामाइन), पांच पिस्तौल और कारतूस बरामद किए गए थे। पुलिस के मुताबिक गिरोह में संलिप्त लोग पाकिस्तान में बैठे लोगों के संपर्क में थे और उन्हें अपने यहां से हथियार व नशीले पदार्थों की आपूर्ति किया करते थे। इसके बाद पुलिस ने इस गिरोह को चिह्नित कर इसमें संलिप्त आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई से पहले इस मामले को लेकर गेट हकीमा पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अब आगे इस गिरोह को कैसे पूरी तरह से खत्म किया जाए। इस दिशा में जल्द से जल्द कदम उठाए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह को पूरी तरह से खत्म करने के लिए पूरी रूपरेखा तैयार की जा चुकी है, जिसके तहत मौजूदा समय में काम किया जा रहा है। इस गिरोह में संलिप्त किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।

गुरु ग्रंथ साहिब कानून पर हाई कोर्ट में सुनवाई, समानता और धर्मनिरपेक्षता पर उठे गंभीर सवाल

चंडीगढ़  पंजाब सरकार के बहुचर्चित “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026” के खिलाफ अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक और संवैधानिक चुनौती पहुंच गई है। एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया (सीआईपीबीसी) ने इस संशोधन कानून को धर्म-विशेष आधारित, भेदभावपूर्ण और संविधान विरोधी बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इसके क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने तथा इसे रद्द घोषित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि पंजाब सरकार ने एक विशेष धार्मिक ग्रंथ को पृथक और अधिक कठोर दंडात्मक संरक्षण देकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन किया है। चर्च का तर्क है कि राज्य किसी एक धर्म या उसके पवित्र प्रतीक को ऐसा विशिष्ट विधायी संरक्षण नहीं दे सकता, जिससे अन्य धार्मिक समुदायों के बीच असमानता की भावना उत्पन्न हो। याचिका में इसे संविधान की मूल संरचना में शामिल धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कदम बताया गया है। अन्य धर्म भी प्रभावित हो सकते हैं इंडियन चर्च एक्ट, 1927 के तहत गठित धार्मिक निकाय होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पंजाब सरकार स्वयं अपने पूर्व प्रस्तावित “पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ऑफेंसेज अगेंस्ट होली स्क्रिप्चर्स बिल, 2025” में स्वीकार कर चुकी थी कि पवित्र ग्रंथों के अपमान की घटनाएं केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब तक सीमित नहीं, बल्कि गीता, कुरान और अन्य धार्मिक ग्रंथ भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में 2026 के संशोधन के जरिए केवल एक धार्मिक ग्रंथ के लिए पृथक कठोर आपराधिक ढांचा तैयार करना राज्य की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। प्रावधानों पर विशेष आपत्ति याचिका में संशोधन कानून के उन प्रावधानों पर विशेष आपत्ति जताई गई है, जिनमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की प्रिंटिंग, प्रकाशन, भंडारण और वितरण पर कड़ा नियामक नियंत्रण, एसजीपीसी के माध्यम से केंद्रीय रजिस्टर, अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाना तथा गंभीर मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा शामिल है। चर्च का कहना है कि इस प्रकार का विशेष दंड विधान अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों को तुलनात्मक रूप से कमतर कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। एसआर बोम्मई, केशवानंद भारती और शायरा बानो जैसे सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि राज्य धार्मिक तटस्थता से विचलित नहीं हो सकता। एक धर्मग्रंथ को कानून संरक्षण साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 सहित मौजूदा केंद्रीय कानून धार्मिक भावनाओं से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं, इसलिए पृथक राज्य कानून विधायी संतुलन और संवैधानिक वैधता दोनों पर सवाल खड़े करता है। चर्च की जनरल काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि वह सभी धर्मग्रंथों के सम्मान और अंतर-धार्मिक सौहार्द के पक्ष में है, लेकिन किसी एक धर्मग्रंथ को विशिष्ट कानूनी संरक्षण देकर अन्य आस्थाओं को अपेक्षाकृत कमतर दर्जा देना संवैधानिक समानता के विरुद्ध है।  

ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट भारतीयों की फ्लाइट दिल्ली पहुंची, पंजाब सरकार ने भेजे टेंपो ट्रैवलर और गाड़ियाँ

चंडीगढ़  स्ट्रेलिया से 15 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है, उनमें एक महिला समेत 11 पंजाबी हैं। इन लोगों की फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गई है। वहीं, पंजाब सरकार की टीमें भी उन्हें लेने के लिए दिल्ली पहुंची है। उनके लिए वाहनों का इंतजाम किया गया है।  इन जिलों के रहने वाले हैं लोग मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक जो लोग डिपोर्ट किए गए हैं, वह जांलधर, होशियारपुर, खन्ना, मोगा, नवांशहर, गढ़शंकर, तरनतारन, फिरोजपुर और रूपनगर के रहने वाले हैं। सीएम भगवंत मान पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इन लोगों ने आस्ट्रेलिया में जाकर वहां के नियम तोड़े हैं, जिस वजह से उन्हें डिपोर्ट किया गया है। इन लोगों की पहचान जसवंत सिंह (34 वर्ष), अंग्रेज सिंह (32 वर्ष), सतिंदरजीत सिंह शेरगिल (31 वर्ष), गुरप्रीत सिंह संधू (30 वर्ष), जगजीत सिंह (35 वर्ष), जसप्रत सिंह (35 वर्ष), निर्मल सिंह (38 वर्ष), श्रुति शर्मा (35 वर्ष), रणजी सिंह (35 वर्ष), हरप्रीत सिंह (41 वर्ष) और गगनदीप सिंह (25 वर्ष) शामिल हैं। पंजाब के 11 लोगों समेत कुल 15 भारतीय नई दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे। इनमें एक महिला भी शामिल है। यह कार्रवाई अवैध रूप से ऑस्ट्रेलिया में रहने या वीजा नियमों के उल्लंघन के चलते की जा रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह आज उन्हें रिसीव करने नई दिल्ली जा रहे हैं। डिपोर्ट किए गए कुल 15 लोगों में पंजाब के 11, तेलंगाना के दो और हरियाणा-उत्तराखण्ड के एक एक लोग शामिल हैं। ये सभी आज रात दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। पहले अमेरिका से डिपोर्ट किए गए थे पंजाबी इससे पहले अमेरिका ने एक साल पहले नई इमिग्रेशन पॉलिसी के तहत 104 अवैध प्रवासी भारतीयों को जबरन डिपोर्ट कर दिया था। अमेरिकी एयरफोर्स का विमान सी-17 ग्लोबमास्टर इन्हें लेकर अमृतसर में एयरफोर्स के एयरबेस पर उतरा था। इनमें पंजाब के 30, हरियाणा-गुजरात के 33-33 लोग शामिल थे। इनके कुछ परिवार और 8-10 साल के बच्चे भी शामिल थे। अमृतसर एयरपोर्ट के सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इन लोगों का वैरिफिकेशन किया गया। यहां से इमिग्रेशन और कस्टम से क्लियरेंस के बाद पंजाब पुलिस को सौंप दिया गया। करीब साढ़े 3 घंटे बाद US एयरफोर्स विमान वापस लौट गया था।

पंजाब के मुख्यमंत्री की राष्ट्रपति से अकेली मुलाकात, 6 सांसदों के राइट टू रिकॉल पर करेंगे चर्चा

चंडीगढ़   राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ 5 मई की मुलाकात से पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता के जनादेश और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद जो होगा, उससे आगे की रणनीति तय की जाएगी। राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों के आम आदमी पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें पंजाब का गद्दार बताया था। इसके साथ ही, भगवंत मान ने दलबदल से जुड़े विषय को लेकर राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा था। खास बात है कि भगवंत मान ने राष्ट्रपति से अपने सारे विधायकों संग मिलने का समय मांगा था, लेकिन राष्ट्रपति ने सिर्फ भगवंत मान को अकेले मिलने का समय दिया है। अब भगवंत मान ने कहा है कि वह अपने सारे विधायकों के साथ दिल्ली राष्ट्रपति भवन जाएंगे। राष्ट्रपति ने भगवंत मान के अकेले मिलने का समय दिया गुरुवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी कि राष्ट्रपति ने उन्हें 5 मई को दोपहर 12 बजे मिलने का समय दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लिखा, 'पंजाब की जनता के जनादेश और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 5 मई को दोपहर 12 बजे मिलने का समय दिया है। हालांकि, हमने सभी विधायकों के लिए समय मांगा था, लेकिन मुझे अकेले ही मिलने का निमंत्रण मिला है।' राष्ट्रपति से मिलने के बाद बनाएंगे रणनीति भगवंत मान ने कहा कि वह अपने साथी विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन जाएंगे। उनके सारे विधायक बाहर इंतजार करेंगे और वह अकेले राष्ट्रपति से मिलने अंदर जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं अंदर जाकर राष्ट्रपति के समक्ष सभी की ओर से पंजाब की आवाज और जनता का पक्ष मजबूती से रखूंगा। बैठक के बाद अगली रणनीति साझा की जाएगी। यह कीमती समय देने के लिए माननीय राष्ट्रपति का तहे दिल से धन्यवाद। राघव चड्ढा को लेकर भगवंत मान ने क्या कहा इससे पहले, सीएम मान ने बुधवार को अपने एक बयान में कहा कि जो लोग इस दलबदल को सामान्य बात या परंपरा बता रहे हैं, वे जनता के फैसले की घोर अवहेलना को उचित ठहरा रहे हैं। यह अस्वीकार्य है, और इस तरह बोलने वाले लोग अपनी निष्ठा बदलने की तैयारी में दिख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के जनादेश का अपमान करने वाले ये सांसद किसी भी दया के पात्र नहीं हैं, क्योंकि वे पंजाब और पंजाबियों के गद्दार हैं। राष्ट्रपति से क्यों मिलने जा रहे CM मान आम आदमी पार्टी (AAP) के कुल 7 व पंजाब से राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी में बड़ी फूट की खबरें सामने आई थीं। पालिटिकल एक्सपर्ट डॉ. कृपाल सिंह औलख की मानें तो विधायकों को साथ ले जाकर मान यह दिखाना चाहते हैं कि पंजाब के विधायक अभी भी उनके और अरविंद केजरीवाल के साथ पूरी तरह एकजुट हैं। इसके अलावा वह पंजाब में भी मैसेज देने की कोशिश करेंगे कि उनकी पार्टी के 6 सांसदों ने पार्टी बदली तो उन्होंने उनकी मेंबरशिप खारिज करने तक की लड़ाई लड़ी। इससे इस बात का भी डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश होगी कि AAP ने गैर पंजाबियों को चुनकर राज्यसभा भेजा था। चूंकि राज्यसभा के लिए विधायक वोटिंग करते हैं, इसलिए इसमें लोगों का सीधा दखल नहीं है। इस फैसले की जिम्मेदार उन्हें राज्यसभा भेजने वाली पार्टी ही होती है। कल विधायकों की जालंधर मीटिंग की इनसाइड स्टोरी भी पढ़िए… कल आम आदमी पार्टी (AAP) ने जालंधर में मीटिंग बुलाई थी। सवा घंटे चली इस मीटिंग में विधायकों ने इकट्ठा होकर शक्ति प्रदर्शन किया। राघव चड्ढा के सवाल पर हर विधायक चिढ़ता नजर आया। खुद सिसोदिया यह कहकर निकल गए कि BJP बहुत घटिया और झूठी पार्टी है। उसकी बातों में मत आया करो। मीटिंग में CM भगवंत मान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे। इस दौरान CM ने सुखपाल खैहरा का उदाहरण देते हुए विधायकों को अप्रत्यक्ष तौर पर चेतावनी दी। CM ने कहा- कुछ गड़बी पानी निकलने से नदी नहीं सूखती। खैहरा को भी गलतफहमी हुई थी कि AAP को छोड़ने से AAP खत्म हो जाएगी। खैहरा के न रहते भी 92 MLA आए। जो गए, उन्हें भी यही भ्रम है, लेकिन अच्छा हुआ वे वक्त से गए। इनके जाने से जो निगेटिविटी फैली है, उसे अगले कुछ महीनों में दूर कर लिया जाएगा। पार्टी सूत्र ने दावा किया की मीटिंग में 80 से ज्यादा विधायक आए थे। कुछ हाजिरी लगाकर निकल गए, क्योंकि उनके कार्यक्रम पहले से शेड्यूल थे। AAP की मीटिंग के क्या राजनीतिक मायने…     कार्यकर्ताओं-विधायकों को बुलाकर विरोधियों को जवाब: पंजाब की AAP सरकार ने जालंधर में करीब 1 हजार ऑब्जर्वर और विधायकों की मीटिंग बुलाई। पार्टी सूत्रों ने बताया कि राघव चड्ढा के साथ हुए विवाद और फिर पार्टी के 6 राज्यसभा सांसदों के टूटने से बॉटम लाइन वर्करों में मैसेज जा रहा था कि पार्टी में गड़बड़ी है। विरोधी कई दिन से AAP पर हमलावर थे। मीटिंग के जरिए उन्हें जवाब दिया गया।     वर्करों के बीच जाकर साथ खड़े होने का संदेश: BJP ने AAP के राज्यसभा सांसदों को तोड़कर बड़ा डेंट दिया है। सूत्र बताते हैं कि मीटिंग में वर्करों की निराशा को दूर करने पर काम किया गया। उन्हें गेम खिलाना इसी का हिस्सा रहा। खुद सिसोदिया ने एक-एक के पास जाकर हाथ मिलाया।     विधायकों-ऑब्जर्वर्स की बॉन्डिंग चेक की: पार्टी के ही एक जिला लेवल वर्कर ने बताया कि मीटिंग और गेम्स के जरिए विधायकों और ऑब्जर्वर्स के बीच की बॉन्डिंग भी चेक की गई। चुनाव सामने हैं और पार्टी इससे पहले हर तरह का नाराजगी को दूर करना चाहती है। इसलिए, सबको एक मंच पर लाया गया, ताकि ऊपर से भेजे मैसेज का नीचे तक असर हो।     एक्टिविटी करवाकर जोश भरा: पार्टी की तरफ से विधायकों और ऑब्जर्वर्स के बीच 20 मिनट तक गेम करवाए गए। इसमें रस्साकसी और रिंग के बीच से शरीर निकालने का कंपीटिशन करवाया गया। खुद मनीष सिसोदिया ने वर्करों और विधायकों के … Read more

Chandigarh Summer Break: 16 मई से 15 जुलाई तक छुट्टियां घोषित, PGI Chandigarh का नोटिफिकेशन

चंडीगढ़. PGI प्रशासन ने इस साल टीचिंग फैकल्टी के लिए गर्मी की छुट्टियों का शेड्यूल जारी कर दिया है। ये छुट्टियां 16 मई से 15 जुलाई तक रहेंगी, लेकिन मरीज की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इन्हें 2 फेज में बांटा गया है। पहला फेज 16 मई से 14 जून तक और दूसरा 16 जून से 15 जुलाई तक होगा, जबकि 15 जून को सभी फैकल्टी मेंबर्स ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे। PGI एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच-1 की तरफ से जारी आदेशों के मुताबिक, मरीजों के ट्रीटमेंट और हॉस्पिटल सर्विसेज पर असर न पड़े, इसके लिए कम से कम 50 फीसदी फैकल्टी का हर समय ड्यूटी पर रहना जरूरी कर दिया गया है। सभी डिपार्टमेंट हेड्स को 15 दिनों के अंदर ड्यूटी रोस्टर बनाकर प्रशासन को भेजने को कहा गया है। आदेशों में साफ किया गया है कि कोई भी फैकल्टी मेंबर दोनों फेज की छुट्टियां एक साथ नहीं ले सकेगा और न ही उन्हें छोटे-छोटे हिस्सों में बांट सकेगा। इसके अलावा, एक फेज में छुट्टी लेने के बाद दूसरे फेज में कोई कॉन्फ्रेंस, LTC या अर्न्ड लीव नहीं मिलेगी। PGI प्रशासन का कहना है कि इस पूरी व्यवस्था का मकसद यह पक्का करना है कि फैकल्टी छुट्टी के दौरान बिना किसी रुकावट के मरीजों को सर्विस देती रहे। गर्मियों की छुट्टियों के नए शेड्यूल में मरीजों की सुविधा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी गई है। 

Dengue Alert: संजीव अरोड़ा ने दिए सख्त आदेश, फॉगिंग में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

चंडीगढ़. राज्य में डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उद्योग एवं वाणिज्य, निवेश प्रोत्साहन, बिजली और स्थानीय निकाय मंत्री संजीव अरोड़ा ने राज्य भर के नगर निगम कमिश्नरों और अतिरिक्त उपायुक्तों (जनरल व शहरी विकास) को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में समय पर और व्यापक स्तर पर फॉगिंग अभियान सुनिश्चित किया जाए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां, जो मच्छरों के जरिए फैलती हैं, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह जानलेवा साबित हो सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अधिकारियों को तुरंत फॉगिंग अभियान शुरू करने के निर्देश दिए। अरोड़ा ने कहा कि फॉगिंग केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि इसे नियमित और प्रभावी ढंग से चलाया जाए। उन्होंने खास तौर पर यह सुनिश्चित करने को कहा कि यह अभियान पीक सीजन से पहले ही पूरी तरह सक्रिय हो जाए और अक्टूबर तक लगातार जारी रहे, ताकि मच्छरों के प्रजनन और बीमारियों के फैलाव पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अधिकारियों को स्थिति पर कड़ी नजर रखने के आरोप उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति पर कड़ी नजर रखें और फील्ड स्तर पर चल रही गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग करें। इसके साथ ही सभी संबंधित अधिकारी जल्द से जल्द अपने-अपने क्षेत्रों में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट उनके कार्यालय को सौंपें, ताकि जवाबदेही तय की जा सके और काम में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। सरकार के इस कदम को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हर साल मानसून से पहले और उसके दौरान डेंगू-मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है, ऐसे में समय रहते फॉगिंग और रोकथाम के उपाय लागू करना बेहद जरूरी होता है। मंत्री के निर्देशों के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और विभिन्न शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में फॉगिंग अभियान को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस बार पहले से बेहतर रणनीति और सख्ती के साथ इन बीमारियों पर काबू पाया जा सकेगा।

7 MPs की ‘घर वापसी’ के मुद्दे पर राष्ट्रपति से मिलेंगे CM भगवंत मान, मनीष सिसोदिया का बयान- AAP एकजुट है

  चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगने के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ऐलान किया है कि वो 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर राज्यसभा सांसदों के पाला बदलने का मुद्दा उठाएंगे. उन्होंने कहा, ''मैं 5 मई को दोपहर 12 बजे राष्ट्रपति से मिलने जा रहा हूं और इस मुद्दे को उनके सामने रखूंगा।  उन्होंने कहा कि वह सांसदों को वापस बुलाने के सवाल पर भी राष्ट्रपति से चर्चा करेंगे, भले ही मौजूदा कानून में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान न हो. हाल ही में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने पाला बदलकर BJP का दामन थाम लिया. इनमें राघव चड्ढा, राजिंदर गुप्ता, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल आदि सांसद शामिल थे।  इनमें से छह सांसद पंजाब से थे. CM भगवंत मान ने इन नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें एक बार फिर गद्दार करार दिया. BJP की ओर से इस शब्द पर आपत्ति जताए जाने पर उन्होंने कहा, ''जो लोग जनता के जनादेश का दुरुपयोग करते हैं, वे निश्चित रूप से गद्दार हैं.'' इस घटनाक्रम के बाद AAP ने कई जगह विरोध प्रदर्शन किए थे।  हरभजन सिंह समेत कुछ सांसदों के घरों के बाहर गद्दार तक लिख दिया गया था. इस पूरे विवाद के बीच मनीष सिसौदिया ने पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ''हम सब एकजुट हैं. हम सब साथ हैं. कुछ लोगों के जाने से AAP को कोई नुकसान नहीं होगा. ये मामला विचाराधीन है और हमने अपनी आपत्तियां पहले ही दर्ज करा दी हैं।  पंजाब के AAP अध्यक्ष अमन अरोरा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ''ये लोग पीठ में छुरा घोंपने वाले हैं. राघव चड्ढा और संदीप पाठक कई विधायकों को पार्टी में लाए थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विधायक भी पार्टी छोड़ देंगे.'' वहीं जालंधर के नकोदर से विधायक इंद्रजीत कौर ने इस पूरे मामले को ज्यादा तूल न देने की बात कही है।   उन्होंने कहा, ''पार्टी नेताओं से बड़ी होती है. नेता आते-जाते रहते हैं, लेकिन संगठन कायम रहता है.'' उन्होंने BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ऐसे नेताओं का इस्तेमाल कर बाद में उन्हें छोड़ देती है, जैसा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के मामले में हुआ. उन्होंने कहा कि उनसे किसी ने पार्टी छोड़ने के लिए संपर्क नहीं किया है. वो AAP के साथ खड़ी हैं। 

Defection Row: अमन अरोड़ा बोले- नेताओं का जाना ‘पुरानी बात’, पार्टी मजबूत

जालंधर. कैबिनेट मंत्री अमन अरोरा जालंधर में आम आदमी पार्टी का बैठक में पहुंचे। आम आदमी पार्टी के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा राघव चड्ढा और संदीप पाठक पार्टी के लिए 24 घंटे पुरानी बात हो चुकी है। पार्टी एकजुट है और जालंधर में आयोजित की मीटिंग पार्टी ऑब्जर्वर के संबंध में को लेकर है। पार्टी इस संबंध में चिंतित नहीं के कोई राघव चड्ढा और संदीप पाठक के साथ जाने वाले हैं। अमन अरोडा में इस मीटिंग को रूटीन बताया और उन्होंने कहा ये एक बड़ी मीटिंग है इसलिए मीडिया में चर्चा का केंद्र है। कुछ दिन पहले राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने साथ-साथ छह और सासंदों के आप छोड़क बीजेपी में शामिल होने की बात कही थी। आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी झटका था। राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, स्वाति मालिवाल, हर भजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता आदि बीजेपी में शामिल हो गए थे। कुछ दिन पहले बीजेपी में शामिल हुए थे सांसद राघव कुछ दिन पहले एक वीडियो शेयर करते हुए राघव चड्ढा ने आरोप लगाया था कि पार्टी का माहौल टॉक्सिक हो गया था और अब भी वे जनहित के मुद्दे उठाते रहेंगे। अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। जिसमें उन्होंने कहा कि पॉलिटिक्स में आने से पहले मैं सीए था, मेरे सामने एक बेहतर करियर था, उसे छोड़कर मैं राजनीति में आया। अपना करियर को बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया। एक पॉलिटिकल पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना, जिस पार्टी को मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए। पिछले कुछ सालों से मैं यह महसूस कर रहा था कि शायद मैं एक गलत पार्टी में एक सही आदमी हूं। इसी के चलते मेरे सामने सिर्फ तीन विकल्प थे; पहला विकल्प कि मैं राजनीति ही छोड़ दूं। दूसरा विकल्प कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं, जो कि हुआ नहीं।

CM भगवंत मान की राष्ट्रपति से अहम बैठक तय, डिपोर्टेशन और दलबदल मुद्दे एजेंडे में

चंडीगढ़. पंजाब की सियासत में राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर घमासान के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान 5 मई को राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को संवैधानिक स्तर पर उठाया जाएगा ताकि जनता के जनादेश का सम्मान सुनिश्चित किया जा सके। पत्रकारों के साथ बातचीत में मान ने कहा कि जिन सदस्यों को पार्टी और जनता के भरोसे उच्च सदन में भेजा गया, उनका दल बदलना गंभीर विषय है। सरकार इस पर सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस बीच मुख्यमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट किए जा रहे भारतीयों के मुद्दे पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज 15 लोगों को डिपोर्ट किया जा रहा है, जिनमें 11 पंजाब के हैं और एक महिला भी शामिल है। दिल्ली जाएंगे सीएम भगवंत मान अन्य में 2 तेलंगाना, 1 हरियाणा और 2 उत्तराखंड के रहने वाले हैं। मान ने कहा कि वह खुद दिल्ली जाकर इन लोगों को रिसीव करेंगे। उन्होंने कहा कि जैसे ही ये पंजाब पहुंचेंगे, पूरे मामले की गहन पड़ताल की जाएगी और जो भी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पटियाला में रेलवे लाइन पर हुए धमाके के मामले में भी मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर की जा रही है। अब तक कुछ आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है और पूछताछ जारी है। मान ने बताया कि जांच में अमृतपाल सिंह से जुड़े कुछ नाम सामने आने की बात सामने आई है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। कानून व्यवस्था पर भी दिया बयान उन्होंने दोहराया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। चाहे किसी का भी राजनीतिक या सामाजिक समर्थन हो, अगर जांच में दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उधर, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में राज्यसभा विवाद, सुरक्षा मामलों और डिपोर्टी जैसे मुद्दों पर सियासी हलचल और बढ़ने के संकेत हैं।