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गर्मी से मिलेगी राहत! पंजाब में अगले 4 दिनों तक बारिश-आंधी की चेतावनी

चंडीगढ़. पंजाब में भीषण गर्मी के बीच मौसम को लेकर नई अपडेट सामने आई है। गुरुवार को भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) चंडीगढ़ के अनुसार, राज्य के कई जिलों में अगले 4 दिनों तक बारिश, तेज़ हवाओं और गरज-चमक की संभावना है, जिस कारण विभाग ने कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, 18 जून को पूरे पंजाब में किसी भी तरह की मौसम संबंधी चेतावनी जारी नहीं की गई है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है। हालांकि, 19 जून से जिला फिरोजपुर, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, बठिंडा, मानसा, संगरूर, बरनाला, लुधियाना, मोगा, पटियाला और एस.ए.एस. नगर (मोहाली) में बारिश के साथ तेज़ हवाएं चलने की संभावना है। कहा जा रहा है कि अगले 48 घंटों के दौरान इन इलाकों में मौसम अचानक खराब हो सकता है।   20 और 21 जून को भी जारी रहेगा खराब मौसम 20 और 21 जून के दौरान भी पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर समेत उत्तर और सीमावर्ती जिलों में मौसम खराब रहने के आसार हैं। इन क्षेत्रों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं विभाग  ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। तेज़ हवाओं और आंधी के समय पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर ढांचों के पास जाने से बचने तथा आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है।

सात समंदर पार पहुंचेगी पठानकोट की मशहूर लीची, बंपर फसल से निर्यात को मिली रफ्तार

पठानकोट  पंजाब के पठानकोट की मशहूर लीची इस बार देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी मिठास बिखेरने जा रही है. अनुकूल मौसम और बेहतर उत्पादन के चलते इस बार लीची की बंपर फसल हुई है. यही वजह है कि अब पठानकोट की लीची की सप्लाई देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ लंदन, दुबई और सिंगापुर तक करने की तैयारी शुरू हो गई है. पठानकोट लंबे समय से अपनी उच्च गुणवत्ता वाली लीची के लिए जाना जाता है. जिले का वातावरण लीची की खेती के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. यही कारण है कि पंजाब में पठानकोट को लीची जोन घोषित किया गया है. यहां बड़े पैमाने पर लीची की खेती की जाती है और बागवानी विभाग भी किसानों को पूरा सहयोग देता है।  जानकारी के अनुसार इस समय पठानकोट में करीब 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लीची की खेती हो रही है. इस बार मौसम लीची के लिए अनुकूल रहा, जिसके चलते उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है. बागवानी विभाग का भी कहना है कि इस बार लीची की फसल बंपर हुई है. पठानकोट में मुख्य रूप से तीन किस्मों की लीची की पैदावार होती है. इनमें देहरादूनी, कलकती और सीडलेस लीची शामिल हैं. इन तीनों किस्मों की बाजार में अच्छी मांग रहती है. जून महीने में लीची की तुड़ाई का काम शुरू हो जाता है और इसके बाद इसे विभिन्न बाजारों तक पहुंचाया जाता है।  मौसम बना मेहरबान, पठानकोट में लीची की बंपर पैदावार एक व्यापारी ने बताया कि उन्होंने लीची का बाग ठेके पर लिया हुआ है. उनके अनुसार यहां से लीची पहले दिल्ली भेजी जाती है और उसके बाद विदेशों में निर्यात की जाती है. इस बार भी बड़े स्तर पर लीची की खेप तैयार की जा रही है, जिसे देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाया जाएगा. वहीं एक बागवान ने बताया कि इस साल लीची की फसल काफी अच्छी हुई है. हालांकि पिछले दिनों आए तूफान और ओलावृष्टि के कारण कुछ नुकसान जरूर हुआ, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा. उन्होंने कहा कि पठानकोट की लीची की मांग पूरे देश में रहती है और अब विदेशों में भी इसकी पहुंच बढ़ रही है।  बागवानों का कहना है कि विदेशी बाजारों में पहुंच मिलने से किसानों को बेहतर अवसर मिलेंगे. इससे पठानकोट की लीची को नई पहचान मिलने की उम्मीद है. इस संबंध में बागवानी विभाग के अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि पठानकोट की लीची पहले से ही देश के विभिन्न हिस्सों में भेजी जा रही है. अब विभाग के सहयोग और बागवानों के प्रयासों से इसे सिंगापुर, दुबई और लंदन भेजने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि जिले की जलवायु और मिट्टी लीची उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त।  बागवानों और बागवानी विभाग की मेहनत से खुला विदेशी बाजार इसी वजह से यहां की लीची की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है. विभाग लगातार किसानों के संपर्क में है और उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है. पठानकोट की लीची की बढ़ती मांग और इस बार की बंपर पैदावार ने किसानों और व्यापारियों दोनों के चेहरे पर खुशी ला दी है. अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि विदेशों के बाजारों में पठानकोट की यह मिठास कितना असर छोड़ती है।   

तकनीकी खराबी से AIIMS बठिंडा में हड़कंप, ब्लड सैंपल और रजिस्ट्रेशन सेवाएं प्रभावित

बठिंडा. पंजाब के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल AIIMS बठिंडा में गुरुवार सुबह तकनीकी गड़बड़ी के कारण पूरा डिजिटल सिस्टम अचानक ठप पड़ गया। सर्वर बंद होने से ओपीडी पर्चियां बनाने, मरीजों के पंजीकरण, जांच संबंधी प्रक्रियाओं और ब्लड सैंपल लेने जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। इसके चलते दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्यों से इलाज के लिए पहुंचे हजारों मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात यूपीएस (अनइंटरप्टेड पावर सप्लाई) में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे सर्वर को मिलने वाली बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इसके बाद अस्पताल का केंद्रीय कंप्यूटर नेटवर्क काम करना बंद कर गया और लगभग पूरा डिजिटल सिस्टम ठप हो गया। सुबह से लगी लंबी कतारें गुरुवार सुबह जैसे ही मरीज इलाज और जांच के लिए AIIMS पहुंचे तो उन्हें पता चला कि कंप्यूटर सिस्टम बंद होने के कारण पर्चियां नहीं बन पा रही हैं। OPD के बाहर लंबी कतारें लग गईं और मरीज घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कई बुजुर्ग, महिलाएं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज परेशान होकर इधर-उधर भटकते नजर आए। सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हुई जो सुबह खाली पेट ब्लड टेस्ट कराने पहुंचे थे। ब्लड सैंपल लेने की प्रक्रिया प्रभावित होने से उन्हें लंबे समय तक भूखे-प्यासे इंतजार करना पड़ा। कई मरीजों और उनके परिजनों ने अव्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। सूत्रों के मुताबिक, AIIMS बठिंडा में यह पहला मौका है जब केंद्रीय सर्वर प्रभावित होने से लगभग पूरा डिजिटल सिस्टम ही ठप पड़ गया हो। अस्पताल की अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन प्रणाली पर आधारित होने के कारण एक तकनीकी खराबी ने पूरे कामकाज को प्रभावित कर दिया। घटना के बाद अस्पताल की तकनीकी टीमें सर्वर को दोबारा चालू करने और सिस्टम को बहाल करने में जुटी रहीं, लेकिन कई घंटों तक सामान्य व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी। इस घटना ने AIIMS की बैकअप व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में इस प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी तकनीकी खराबी का खामियाजा मरीजों को न भुगतना पड़े। हैरानी की बात यह रही कि हजारों मरीजों की परेशानी के बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से देर शाम तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। अधिकारियों ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना रहा कि यदि भविष्य में इससे भी बड़ा तकनीकी संकट पैदा हो जाए तो उससे निपटने के लिए संस्थान के पास क्या वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद है।

परिवहन व्यवस्था पर मंडराया साइबर संकट, सारथी पोर्टल को निशाना बनाने की आशंका

जालंधर. पिछले तीन दिनों से पंजाब सहित देशभर में परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहने के पीछे केवल तकनीकी खराबी ही नहीं, बल्कि संभावित विदेशी साइबर हमले की आशंका भी सामने आई है। नैशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एन.आई.सी.) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि सारथी पोर्टल को पाकिस्तान और चीन से संचालित हैकरों द्वारा निशाना बनाए जाने की संभावना है। इस खुलासे ने देश की महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सारथी पोर्टल, जो केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन संचालित होता है, देशभर में ड्राइविंग लाइसैंस, लर्निंग लाइसैंस, स्लॉट बुकिंग, लाइसैंस नवीनीकरण, अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट और ड्राइविंग स्कूलों की निगरानी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करता है। इसी पोर्टल में आई तकनीकी बाधा के कारण पंजाब के सभी आर.टी.ए. कार्यालयों और ऑटोमेटेड ड्राइविंग टैस्ट केंद्रों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। सारथी पोर्टल में आई खराबी का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ा। पंजाब के विभिन्न जिलों में लर्निंग लाइसैंस, स्थायी ड्राइविंग लाइसैंस, वाहन पंजीकरण और अन्य सेवाओं के लिए पहले से समय लेकर पहुंचे हजारों आवेदकों को घंटों इंतजार करना पड़ा। जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला, होशियारपुर और अन्य जिलों के आर.टी.ए. कार्यालयों में पिछले तीन दिनों से आवेदकों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई स्थानों पर ड्राइविंग ट्रैक टेस्ट के लिए पहुंचे आवेदकों के बायोमैट्रिक सत्यापन नहीं हो सके, जिससे उनके परीक्षण स्थगित करने पड़े। जिस वजह से बड़ी संख्या में लोगों को बिना काम करवाए लौटना पड़ा। वहीं, तेलंगाना में एन.आई.सी. के राज्य समन्वयक एस. कासी रेड्डी के अनुसार सोमवार को सारथी पोर्टल पर सामान्य 5 हजार उपयोगकर्त्ताओं की तुलना में अचानक 95 हजार उपयोगकर्त्ताओं का ट्रैफिक दर्ज किया गया। इस असामान्य गतिविधि ने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया। उन्होंने बताया कि साइबर सुरक्षा टीम ने संभावित खतरे को देखते हुए एहतियातन पोर्टल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। बाद में सेवाएं बहाल कर दी गईं, लेकिन सर्वर पर पड़े अतिरिक्त दबाव के कारण सिस्टम सामान्य क्षमता प्राप्त नहीं कर पाया और बार-बार बाधित होता रहा। चीन और पाकिस्तान से लगातार होते हैं हमले एन.आई.सी. अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले से ही इस बात से अवगत है कि पाकिस्तान और चीन से जुड़े साइबर अपराधी तथा हैकर समूह समय-समय पर भारत के सरकारी पोर्टलों को निशाना बनाने का प्रयास करते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन सरकारी पोर्टलों पर ऑनलाइन भुगतान सुविधा उपलब्ध होती है, वे साइबर अपराधियों के लिए सबसे आकर्षक लक्ष्य बन जाते हैं। ऐसे पोर्टलों को ठप कर प्रशासनिक अव्यवस्था पैदा करना, डेटा चोरी का प्रयास करना या डिजिटल सेवाओं को बाधित करना हमलावरों के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हो सकता है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा मामले में किसी भी प्रकार के डेटा लीक या नागरिकों की निजी जानकारी के चोरी होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। मजबूत फ़ायरवॉल और साइबर सुरक्षा तंत्र ने किसी भी संभावित घुसपैठ को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साइबर युद्ध का बदलता स्वरूप साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी पोर्टलों पर हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, सीईआरटी-इन (सी.ई.आर.टी.-इन) तथा अन्य एजैंसियां ऐसे खतरों की पहचान और रोकथाम के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। स्मार्ट कोड टैक्नोलॉजीज के संस्थापक सूर्यनारायण रेड्डी के अनुसार आज साइबर अपराधियों के पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), चैटबॉट और अत्याधुनिक मैलवेयर जैसे नए हथियार मौजूद हैं। इनके माध्यम से पहले की तुलना में अधिक जटिल और संगठित हमले किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक दौर में साइबर सुरक्षा एक निरंतर चलने वाला युद्ध बन चुकी है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। डिजिटल इंडिया के लिए चेतावनी  सारथी पोर्टल प्रकरण ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल इंडिया की बढ़ती निर्भरता के साथ साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। देश की परिवहन, बैंकिंग, कराधान, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं से जुड़े पोर्टल करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि नागरिकों का डाटा पूरी तरह सुरक्षित है और सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं, लेकिन इस घटना ने यह संकेत अवश्य दिया है कि भारत के महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे पर विदेशी साइबर खतरों की निगाह लगातार बनी हुई है। ऐसे में साइबर सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाना तथा सरकारी पोर्टलों की निगरानी को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बनकर उभरा है।

संजीव अरोड़ा को नहीं मिली राहत, अदालत बोली- जमानत मिलने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ का खतरा

चंडीगढ़  . पंजाब सरकार में मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा को बड़ा झटका लगा है. ट्रायल कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जमानत देने से गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है और साक्ष्‍य भी प्रभावति हो सकते हैं. इसलिए जमानत याचिका खारिज कर दी गयी है।  कोर्ट ने अपने आदेश में विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि आरोपी पहले भी मामले से जुड़े एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर चुका है. अदालत के अनुसार, संजीव अरोड़ा ने एक गवाह को उसका बयान वापस लेने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के लिए 35 हजार रुपये का भुगतान किया था. अदालत ने इस पहलू को गंभीर मानते हुए कहा कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है तो उसके द्वारा दोबारा गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।  खारिज करने की बताई वजह अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. ऐसे में यदि किसी आरोपी के खिलाफ गवाहों को प्रभावित करने के प्रयास के आरोप सामने आते हैं, तो उसे जमानत देने से जांच और सुनवाई प्रभावित हो सकती है. इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने माना कि संजीव अरोड़ा नियमित जमानत पाने के हकदार नहीं हैं और उनकी याचिका खारिज कर दी।  पहले भी गवाह प्रभावित कर चुका है कोर्ट ने आदेश के अंत में विशेष रूप से उल्लेख किया कि आरोपी पहले भी एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर चुका है. अदालत के अनुसार, आरोपी ने गवाह को अपना बयान वापस लेने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के लिए 35,000 रुपये का भुगतान किया था।  क्‍या है मामला संजीव अरोड़ा पंजाब की राजनीति में एक चर्चित चेहरा हैं और वर्तमान में राज्य सरकार में मंत्री हैं. उनके खिलाफ चल रहे मामले को लेकर पिछले कुछ समय से कानूनी कार्यवाही जारी है. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष यह दलील दी थी कि आरोपी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई है. इसी आधार पर जमानत का विरोध किया गया था।  अब बचा है ये विकल्‍प अब ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद संजीव अरोड़ा को राहत नहीं मिली है. हालांकि, उनके पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प खुला हुआ है. फिलहाल अदालत के इस फैसले ने मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों में चर्चा तेज कर दी है। 

पूर्व सिविल जज केस की सुनवाई में CJI सूर्यकांत का सख्त रुख, अदालत में वकीलों को लगाई फटकार

चंडीगढ़   सुप्रीम कोर्ट में एक अनोखे मामले की सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने काफी अहम और सख्‍त टिप्‍पणी की है. CJI जस्टिस सूर्यकांत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि 3 से 4 तथाकथित सीनियर वकील माहौल खराब कर रहे हैं. साथ ही उन्‍होंने कहा कि इस मामले पर वे खुद नजर रखे हुए हैं. यह मामला एक पूर्व सिविल जज से जुड़ा है. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की 4 बेंच इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर चुकी है. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, जहां CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने इसपर सुनवाई की. शीर्ष अदालत ने पंजाब-हर‍ियाणा हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस को मामले की सुनवाई करने के लिए तत्‍काल दो जजों की खंडपीठ गठित करने का निर्देश दिया है।  पूर्व सिविल जज अमरीश कुमार जैन की सेवा समाप्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को उनकी याचिका की सुनवाई के लिए नया डिवीजन बेंच गठित करने का निर्देश दिया है. यह मामला उस समय शीर्ष अदालत पहुंचा जब हाईकोर्ट की चार अलग-अलग पीठ ने इस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई में अब और देरी नहीं होनी चाहिए और इसे जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में अंतिम रूप से सुना जाए. भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने बुधवार को सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस को निर्देश दिया कि वे दो जजों वाली एक पीठ का गठन करें, जो अमरीश कुमार जैन की याचिका पर सुनवाई करे. अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित जजों को सलाह दी जाए कि किसी भी परिस्थिति में वे मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग न करें।  हाईकोर्ट के रजिस्‍ट्रार को रिपोर्ट देने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई प्रतिदिन के आधार पर की जाए और 13 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में इसे अंतिम रूप से सुना जाए. साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सुनवाई पूरी होने और फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद अनुपालन रिपोर्ट सर्वोच्च अदालत में प्रस्तुत करने को कहा गया है. सुनवाई के दौरान अमरीश कुमार जैन अपने वकील अभय प्रताप सिंह के साथ अदालत में उपस्थित हुए. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने उनसे उन जजों के नाम पूछे जिन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया था. इस पर जैन ने बताया कि सबसे पहले जस्टिस लिसा गिल ने खुद को अलग किया, इसके बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस ने फैसला 6 महीने तक सुरक्षित रखने के बाद मामले से दूरी बना ली. बाद में जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा तथा जस्टिस दीपक सिब्बल की अध्यक्षता वाली पीठ ने भी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. जैन ने अदालत को यह भी बताया कि उन्होंने वर्ष 2024 में अपने पेंशन संबंधी लाभ जारी करने के लिए आवेदन दिया था, ताकि वह अपने बेटे की एलएलबी की अंतिम वर्ष की फीस जमा कर सकें, लेकिन उनकी यह मांग भी स्वीकार नहीं की गई।  CJI की सीनियर वकीलों पर सख्‍त टिप्‍पणी CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वे खुद मामले की निगरानी करेंगे और हाईकोर्ट को पीठ गठित करने का निर्देश देंगे. उन्होंने जैन को चेतावनी भी दी कि यदि वह किसी प्रकार की अनुचित गतिविधि या शरारत करने की कोशिश करेंगे तो उसके गंभीर परिणाम होंगे. अदालत ने कहा कि मामले का निष्पक्ष और समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा. ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, CJI ने यह भी टिप्पणी की कि जैन को अपना पक्ष स्वयं रखना चाहिए. उन्होंने संकेत दिया कि कुछ वरिष्ठ वकील जजों के बार-बार खुद को अलग करने जैसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं. CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वह ऐसे मामलों पर करीबी नजर रखे हुए हैं और कुछ तथाकथित वरिष्ठ वकील न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं. इस पर जैन ने कहा कि वह पहले भी दो पीठों के समक्ष स्वयं बहस कर चुके हैं और आगे भी खुद अपना पक्ष रखने के लिए तैयार हैं।  दो दशक पुराना मामला अमरीश कुमार जैन ने नवंबर 2005 में पंजाब ज्‍यूडिशियल सर्विसेज में प्रवेश किया था और सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर कार्यरत थे. वर्ष 2009 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की प्रशासनिक सिफारिशों के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं. जैन ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि वर्ष 2007 में जालंधर के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश उनके प्रति पूर्वाग्रह रखते थे और इसी कारण उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज की गईं. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अक्टूबर 2018 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें सेवा में बहाल करने का आदेश दिया था. अदालत ने उन्हें वरिष्ठता, सेवा की निरंतरता, वेतनवृद्धि और प्रमोशन जैसे सभी लाभ देने का निर्देश दिया था, हालांकि बकाया वेतन देने से इनकार कर दिया गया था।  दोबारा टर्मिनेशन हाईकोर्ट के इस फैसले को जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था. इसके बाद मार्च 2019 में जैन को फिर से सेवा में बहाल कर दिया गया. हालांकि, मार्च 2022 में हाईकोर्ट ने प्रशासनिक पक्ष से एक बार फिर उनकी सेवा समाप्त करने की सिफारिश की और 18 अप्रैल 2022 को उन्हें दोबारा पद से हटा दिया गया. जैन का कहना है कि इस कार्रवाई से न केवल उनका रोजगार छिन गया बल्कि वे पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से भी वंचित हो गए. अब इस पूरे विवाद की सुनवाई नए सिरे से हाईकोर्ट की विशेष पीठ के समक्ष होगी, जिसकी निगरानी स्वयं सुप्रीम कोर्ट करेगा। 

रेलवे का बड़ा फैसला! मेंटेनेंस के चलते हर शुक्रवार बंद रहेगा पठानकोट नैरोगेज सेक्शन, 2 जोड़ी ट्रेनें भी रद्द

पठानकोट  करीब पौने चार साल तक बंद रहने के बाद दोबारा शुरू हुई नैरोगेज ट्रेन सेवा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। रेलवे ने ट्रैक की मरम्मत और रखरखाव का हवाला देते हुए नूरपुर रोड-बैजनाथ के बीच चल रही दो जोड़ी ट्रेनों को अगले आदेश तक रद्द कर दिया है। रेलवे के इस फैसले से यात्रियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जिस ट्रैक को लगभग पौने चार वर्षों तक बंद रखा गया, उसकी मरम्मत और रखरखाव का कार्य उसी दौरान पूरा किया जाना चाहिए था। अब जब रेल सेवा बहाल हो चुकी है और लोग फिर से ट्रेन का उपयोग करने लगे हैं, तो हर सप्ताह ट्रेनों का संचालन बंद रखने का फैसला उनकी समझ से परे है। फरवरी में ही मिल गई थी सेफ्टी क्लीयरेंस फरवरी में चक्की पुल को मंजूरी मिलने के बाद रेलवे अधिकारियों ने कई बार इस सेक्शन पर रेल सेवा जल्द बहाल करने का दावा किया था। फरवरी से मई तक मौसम भी अनुकूल रहा, जिससे ट्रैक की व्यापक मरम्मत और रखरखाव का कार्य आसानी से किया जा सकता था। इसके बावजूद उस दौरान कोई विशेष मेंटेनेंस अभियान नहीं चलाया गया। अब, ट्रेन सेवा शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद रखरखाव का हवाला देकर सेवाएं बंद किए जाने से लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेलवे अपनी प्रशासनिक खामियों और अधूरे कार्यों को छिपाने की कीमत यात्रियों से वसूल रहा है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में बसों का लेना होगा सहारा ट्रेन सेवाएं बंद होने से पठानकोट, नूरपुर, ज्वालामुखी, कांगड़ा, पालमपुर और बैजनाथ की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को मजबूरन बसों का सहारा लेना पड़ेगा। इससे उन्हें रेल किराए की तुलना में कई गुना अधिक खर्च वहन करना होगा। रेलवे के आदेश के अनुसार ट्रेन संख्या 52462 (बैजनाथ पपरोला-नूरपुर रोड) और 52474 (नूरपुर रोड-बैजनाथ पपरोला) को अगले आदेश तक रद्द रखा जाएगा। इसके अलावा, ट्रैक और अन्य संरचनाओं के रखरखाव के लिए प्रत्येक शुक्रवार कांगड़ा वैली रेलवे सेक्शन में सभी नैरोगेज यात्री ट्रेन सेवाएं बंद रहेंगी। फैसले पर पुनर्विचार करे रेलवे रेल यात्रियों और स्थानीय संगठनों ने रेलवे मंत्रालय से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमित रखरखाव आवश्यक है, तो इसके लिए पूरे दिन ट्रेन सेवाएं बंद करने के बजाय कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि हजारों यात्रियों को असुविधा का सामना न करना पड़े। यात्रियों का सवाल है कि जब रेलवे को ट्रैक की स्थिति और रखरखाव की जरूरतों की पहले से जानकारी थी, तो सेक्शन शुरू करने से पहले सभी जरूरी कार्य पूरे क्यों नहीं किए गए। उनका मानना है कि सेवा बहाल होने के कुछ ही समय बाद लिया गया यह फैसला रेलवे की कार्यप्रणाली और योजना निर्माण पर सवाल खड़े करता है। वहीं, इस मामले में रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण विभाग को यह कदम उठाना पड़ रहा है।  

रूपनगर के पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ पर पुलिस का शिकंजा, देह व्यापार केस में भेजा समन

 रूपनगर देह व्यापार से जुड़े एक मामले में रूपनगर के पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ को पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। उन्हें 22 जून को सुबह 11 बजे संबंधित जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। रूपनगर पुलिस की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि थाना आनंदपुर साहिब में 17 फरवरी 2026 को दर्ज एफआईआर नंबर 32 की जांच जारी है। एसएसपी रूपनगर मनिंदर सिंह ने मामले की जांच थाना आनंदपुर साहिब और थाना सदर के एसएचओ को सौंपी है। डीएसपी दीपइंदर सिंह द्वारा जारी नोटिस के अनुसार पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ को 22 जून को सुबह 11 बजे जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इसके लिए थाना सदर रूपनगर के एसएचओ को आवश्यक कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, थाना आनंदपुर साहिब के एसएचओ को एफआईआर से संबंधित रिकॉर्ड के साथ निर्धारित समय पर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। मामले में सभी संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। नोटिस जारी होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में मामले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच पूरी होने तक विस्तृत टिप्पणी करने से इन्कार किया है।  

पाकिस्तान समर्थित साजिश का खुलासा, लश्कर के इशारे पर खड़ा हुआ नेटवर्क; NIA ने कसी नकेल

अमृतसर  पंजाब के अमृतसर में रहने वाला अंकुश कपूर पूरी तरह पाकिस्‍तान की कठपुतली बन चुका था. पाकिस्‍तान में बैठे आकाओं के इशारे पर उसने अमृतसर में नार्को-टेरर की पूरी लंका तैयार कर ली थी. उसकी इस लंका के तार सिर्फ अमृतसर या पंजाब तक सीमित नहीं थे, बल्कि उसका नेटवर्क इटली, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तक फैल चुका था. अब नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने उसकी इस लंका के दहन की पूरी तैयारी कर ली है. इसकी सिलसिले में एनआईए ने अंकुश के अमृतसर स्थिति बंगले को जब्‍त कर लिया है।  एनआईए का दावा है कि इस बंगले को नार्को-टेरर की काली कमाई से तैयार किया गया था. जांच में सामने आया है कि आरोपी अंकुश कपूर ही लश्‍कर-ए-तैयबा के नार्को-टेरर नेटवर्क को भारत में संभाल रहा था. अंकुश कपूर के संबंध दुबई में बैठे उन लोगों से थे, जिनके तार सीधे तौर पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे. एनआईए का मानना है कि यह नेटवर्क केवल नशीले पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका मकसद ड्रग्स से होने वाली कमाई को आतंकी गतिविधियों तक पहुंचाना भी था।  सूत्रों के अनुसार, पाकिस्‍तान ड्रग से होने वाली कमाई का इस्‍तेमाल आतंक की जड़ों को मजबूत करने के लिए करता आया है. आरोपी अंकुश कपूर भी इसी कड़ी का एक अहम चेहरा था. वह लश्‍कर के इशारे पर ड्रग्‍स की तस्करी के साथ स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में अहम भूमिका निभाता था. एनआईए की जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क के तार सिर्फ भारत और पाकिस्तान तक सीमित नहीं थे. इसका नेटवर्क इटली, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तक फैला हुआ था।  जांच में यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की कमाई को अगल अगल तरीके से विभिन्न देशों में भेजा जाता था. बाद में, इसी कमाई का इस्‍तेमाल आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता था. मंगलवार को जिस मकान को जब्त किया गया, उसे यूएपीए के तहत आतंक से अर्जित संपत्ति माना गया है. जांच एजेंसी के अनुसार, अंकुश कपूर को टेरर फंडिंग, आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियों के तहत गिरफ्तार किया गया था. उस पर एनडीपीएस एक्ट और भारतीय दंड संहिता (आईपीएस) की विभिन्न धाराओं के तहत भी मामले दर्ज हैं. इस पूरे मामले में अब तक 26 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। 

BJP प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद का अमृतसर दौरा, ढिल्लों-चुघ का पैदल मार्च आज चर्चा में

अमृतसर भाजपा पंजाब के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तथा नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद तरुण चुघ आज अमृतसर प्रवास पर पहुंच रहे हैं। अपने दौरे की शुरुआत दोनों नेता सुबह करीब साढ़े नौ बजे भंडारी पुल से करेंगे। इसके बाद दोनों वरिष्ठ नेता कार्यकर्ताओं के साथ पैदल मार्च करते हुए सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचेंगे और वहां माथा टेककर प्रदेश की शांति, खुशहाली और विकास के लिए अरदास करेंगे। इसके उपरांत वे श्री दुर्ग्याणा तीर्थ और श्री राम तीर्थ में भी नतमस्तक होंगे। तरुण चुघ राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं भाजपा नेताओं के इस धार्मिक दौरे को पार्टी संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति हुई है और तरुण चुघ राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। यह दौरा संगठन को और मजबूत करेगा भाजपा कार्यकर्ताओं में इस दौरे को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह दौरा संगठन को और मजबूत करने तथा कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने की दिशा में अहम कदम साबित होगा। अपने अमृतसर प्रवास के दौरान दोनों पदाधिकारी दोपहर तीन बजे कंपनी बाग स्थित महाराजा रणजीत सिंह पैनोरमा में पत्रकार वार्ता को भी संबोधित करेंगे। इस दौरान प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर उनकी प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है।