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Punjab Crime: यूरोप से गैंगस्टर अमृत दलम की भारत वापसी, जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़ा नाम

                                                                                              पठानकोट पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. जग्गू भगवानपुरिया गैंग से जुड़े कुख्यात गैंगस्टर और पंजाब में मोस्ट वॉन्टेड अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम को प्रत्यर्पित करके भारत लाया गया है. पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी उसे प्रत्यर्पण करके यूरोपीय देश मोल्दोवा से भारत वापस लाए हैं. यह पहली बार है जब पंजाब पुलिस ने किसी किसी आरोपी को किसी यूरोपीय देश से प्रत्यर्पित कराकर वापस पंजाब लाया गया है. अमृत दलम पर 21 मामले दर्ज थे, जिसमें अमृतसर में कई व्यापारियों को धमकाने के मामले भी दर्ज थे. उसे वापस भारत लाना बड़ी सफलता माना जा रहा है।  भारत से 2024 में हुआ था फरार अमृत दलम जग्गू भगवानपुरिया के मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब में कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं, इनमें 4 मामले ट्रायल में हैं, जबकि 17 मामलों में जांच चल रही है. अक्टूबर 2024 के आखिरी सप्ताह में भारत से फरार हुआ था, उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था. इस पासपोर्ट में उसकी पहचान गुरपाल सिंह के नाम से बताई गई थी. भारत से निकलने के बाद वह सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचा और इसके बाद कई देशों से होते हुए मोल्दोवा पहुंच गया।  यूक्रेन भागने वाला था अमृत दलम  बताया जा रहा है कि अमृत दलम यूक्रेन भागने की फिराक में था. इसी चक्कर में वह मोल्दोवा में पकड़ा गया. अमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय पकड़ लिया, जब वह ओटासी स्टेट बॉर्डर से यूक्रेन जाने की कोशिश कर रहा था. इसके बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कोशिशों से उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई. अमृत दलम को अजरबैजान के बाकू के ट्रांजिट रूट से भारत लाया गया. पंजाब पुलिस की टीम और आरोपी आज सुबह 12 जून 2026 को नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पहुंचे थे. पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह के फर्जी पासपोर्ट की जानकारी और उसके संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की. इसके आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई और नोटिस हासिल किया गया।  21 आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड दबोचा गया गैंगस्टर, जग्गू भगवानपुरिया के मुख्य हिटमैन के तौर पर काम करता था। पंजाब पुलिस ने विदेश भागे आरोपी अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम उर्फ गुरपाल सिंह को मोल्दोवा से भारत वापस ला दिया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब में कुल 21 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 4 मामले ट्रायल में हैं, जबकि 17 मामलों में जांच चल रही है।  फर्जी पहचान से भारत से फरार हुआ था पुलिस के मुताबिक अमृतपाल सिंह करीब अक्टूबर 2024 के आखिरी सप्ताह में भारत से फरार हुआ था। उसने चंडीगढ़ से जारी फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था। इस पासपोर्ट में उसकी पहचान ‘गुरपाल सिंह’ के नाम से बताई गई थी।  भारत से निकलने के बाद वह सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचा और इसके बाद कई देशों से होते हुए मोल्दोवा पहुंच गया। यूक्रेन भागने की कोशिश के दौरान मोल्दोवा में पकड़ा गया अमृतपाल सिंह को 24 फरवरी 2026 को मोल्दोवा के अधिकारियों ने उस समय पकड़ लिया, जब वह ओटासी स्टेट बॉर्डर से यूक्रेन जाने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कोशिशों से उसे भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।   इसके बाद अमृत दलम को अजरबैजान के बाकू के ट्रांजिट रूट से भारत लाया गया। पंजाब पुलिस की टीम और आरोपी आज सुबह 12 जून 2026 को नई दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर पहुंचे। फर्जी पासपोर्ट और लोकेशन के आधार पर रेड कॉर्नर नोटिस पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह के फर्जी पासपोर्ट की जानकारी और उसके संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा की। इसके आधार पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई और नोटिस हासिल किया गया।  छह महीने तक चला इंटरनेशनल ऑपरेशन अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस की AGTF और OFTEC Punjab ने करीब छह महीने तक इंटेलिजेंस आधारित अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया। इस ऑपरेशन का नाम ‘Operation Eastern Reach’ रखा गया था। इसमें लगातार निगरानी के साथ देश और विदेश की अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय किया गया।  मोल्दोवा की अदालत से मिली भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी अमृतपाल सिंह को भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया के दौरान 26 मई 2026 को अदालत ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी। इसके बाद उसने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन 16 जुलाई 2026 को Court of Appeal Centru ने उसकी अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही प्रत्यर्पण का आदेश अंतिम हो गया।  चार सदस्यीय पंजाब पुलिस टीम मोल्दोवा पहुंची प्रत्यर्पण का रास्ता साफ होने के बाद पंजाब पुलिस की चार सदस्यीय टीम मोल्दोवा पहुंची। टीम ने 11 सितंबर 2026 को चिशिनाउ एयरपोर्ट पर अमृतपाल सिंह को अपनी हिरासत में लिया और उसे पंजाब वापस लाया।  पंजाब में 21 केस, कई गंभीर धाराओं से जुड़े मामले पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक अमृतपाल सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों में UAPA/Explosives, हत्या, Arms Act, NDPS, जबरन वसूली, Passport Act और अन्य BNS से जुड़े मामले शामिल हैं। रिकॉर्ड में हत्या से जुड़े 5, Arms Act के 9, NDPS का 1 और UAPA/Explosives का 1 मामला दर्ज बताया गया है।  किन जिलों में दर्ज हैं मामले? जांच के तहत चल रहे 17 मामलों में सबसे ज्यादा 7 FIR बटाला, 4 गुरदासपुर, 2 अमृतसर कमिश्नरेट, 2 होशियारपुर, 1 लुधियाना कमिश्नरेट और 1 FIR SSOC अमृतसर से जुड़ी बताई गई है। वहीं ट्रायल में चल रहे 4 मामले बटाला में दर्ज हैं।  यानी करीब दो साल पहले फर्जी पहचान और पासपोर्ट के जरिए देश से फरार हुआ अमृतपाल सिंह मोल्दोवा में पकड़ा गया। छह महीने चले अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन, कानूनी प्रक्रिया और प्रत्यर्पण के बाद … Read more

पंजाब में बिजली संकट गहराया, 10-11 घंटे तक कटौती; राजपुरा में 3 तो तलवंडी साबो में 7 दिन का कोयला

जालंधर पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। बिजली की मांग 16,619 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। शुक्रवार को राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई। पहले से कई थर्मल और हाइडल यूनिटों के ठप होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित है। बारिश की कमी और उमस भरी गर्मी के बीच बढ़ी मांग के कारण उद्योगों, जिला मुख्यालयों, गांवों और कृषि क्षेत्र में बिजली कटौती करनी पड़ी। बिजली संकट के कारण उद्योगों में सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर तीन से चार घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल पांच से छह घंटे बिजली मिल सकी। शुक्रवार को तकनीकी खराबी से राजपुरा थर्मल की 700 मेगावाट की यूनिट नंबर-1 बंद हो गई। पहले से रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीआईडीसी की तीन यूनिटें ठप हैं। हाइडल से 345 मेगावाट उत्पादन प्रभावित है।  पंजाब में बिजली संकट और गहरा गया है। शुक्रवार को बिजली की मांग रिकॉर्ड 16,619 मेगावाट तक पहुंच गई। प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में 7 दिन और राजपुरा थर्मल प्लांट में 3 दिन का कोयला बचा है। तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात दिन का कोयला बचा थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट भी बरकरार है। तलवंडी साबो में चार, राजपुरा में सात, लहरा मोहब्बत में 11 और गोइंदवाल में 18 दिन का कोयला बचा है। पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। शुक्रवार की मांग 2025 के 11,404 मेगावाट और 2024 के 14,481 मेगावाट से भी काफी अधिक रही।  थर्मल और हाइडल यूनिटों के बंद होने से राज्य में कुल 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। बिजली संकट के कारण उद्योगों में करीब सवा चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर 3 से 4 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1 घंटे के कट लगाने पड़े। कृषि क्षेत्र को भी केवल 5 से 6 घंटे बिजली मिल सकी। इधर, जालंधर के इंडस्ट्रियल एरिया में 10 से 11 घंटे के लंबे बिजली कट से परेशान लोगों ने देर रात करीब साढ़े 11 बजे सोढल चौक पर जाम लगा दिया। लोगों ने सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि शाम 7 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक लगातार 10 से 11 घंटे के कट लगाए जा रहे हैं। बिजली नहीं होने से पीने के पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि लंबे बिजली कट के कारण लोग रात में ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं। राजपुरा में 3 दिन का कोयला बाकी जानकारी के अनुसार, हर प्लांट में 20 दिन के कोयले का स्टॉक होना जरूरी होता है। लेकिन प्राइवेट थर्मल प्लांट तलवंडी साबो में टोटल स्टॉक 23 प्रतिशत कोयला बचा है, जो कि 7 दिन के लिए है। इसी तरह राजपुरा में स्टॉक का 18 प्रतिशत कोयला बचा है, जो 3 दिन ही चलेगा। हालांकि दोनों थर्मल प्लांटों को कोयले की सप्लाई प्रति दिन खपत के अनुसार निरंतर मिल रही है। इसी तरह सरकारी थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत में 68 प्रतिशत कोयला स्टॉक में है, जो कि खपत के हिसाब से 12 दिन के लिए है। वहीं गोइंदवाल में 93 प्रतिशत स्टॉक है, जो कि 32 दिन के लिए है। इसी तरह रोपड़ में 169 प्रतिशत कोयले का स्टॉक है, जो कि खपत के हिसाब से 66 दिन के लिए है। इन प्लांटों की यूनिटें बंद पावरकॉम के अपने सभी साधनों से शुक्रवार को केवल 4,162 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही, जबकि मांग पूरी करने के लिए नॉर्दर्न ग्रिड से 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी। रोपड़ थर्मल की 210 मेगावाट यूनिट नंबर-6 और तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट यूनिट नंबर-2 बंद हैं। हाइडल परियोजनाओं में रणजीत सागर बांध की 300 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट नंबर-3 व 4 तथा यूबीडीसी की तीन यूनिटें बंद हैं। शिकायत पर JE और XEN नहीं करते सुनवाई जालंधर में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारियों (JE और XEN) को शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती। अधिकारी पटियाला मुख्यालय से मैसेज आने और ऊपर से ही कट लगाए जाने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले औद्योगिक क्षेत्र का ऐसा हाल होने पर स्थानीय कारोबारियों ने रोष व्यक्त किया कि बिना बिजली के न तो फैक्ट्रियां चल पा रही हैं और न ही घरों में कोई काम हो पा रहा है। मुफ्त के बजाय 24 घंटे बिजली दे सरकार प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकार मुफ्त बिजली और बिजली बिल माफ जैसे बड़े-बड़े दावे करना बंद करे और 24 घंटे बिजली देने का प्रबंध करे। जब भी अधिकारियों से बात करते हैं तो एक ही जवाब मिलता है कि पटियाला से आदेश है। अगर जल्द ही बिजली कटौती की समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया गया, तो वे अपने इस आंदोलन को और उग्र करेंगे और सड़कों पर पक्का धरना देने के लिए मजबूर होंगे। 5 दिन पहले ही बिजली मंत्री ने दी थी चेतावनी बिजली मंत्री तरणप्रीत सिंह सौंद ने कोयले की कमी से पैदा हुए बिजली संकट पर 5 दिन पहले वीडियो जारी किया था। इसमें कहा था कि पूरे भारत में कोयले की कमी के कारण सूबे को घरेलू और इंडस्ट्री सेक्टर में कट लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। देशभर में लगभग 63 गीगावाट (GW) क्षमता के थर्मल पावर प्लांट कोयले की किल्लत से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और अधिकांश निजी बिजली प्लांट के पास केवल 3 से 4 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है, जिसके कारण वे अपनी आधी क्षमता (हाफ कैपेसिटी) पर चलने को मजबूर हैं। बिजली मंत्री ने कहा कि नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर प्लांट (मानसा) पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा सप्लाई किए जाने वाले … Read more

फरीदकोट में 22 हजार लीटर नकली देसी घी का खुलासा, ग्रेटर नोएडा से पहुंची थी खेप

फरीदकोट फरीदकोट स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोटकपूरा में सूचना के आधार पर पकड़े गए 22 हजार लीटर संदिग्ध देसी घी से भरे टैंकर से लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट फेल आई है। रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टैंकर चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही विभाग की ओर से पुलिस को शिकायत देकर आपराधिक मामला दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस मामले में फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल ने बताया कि जांच रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद विभाग की ओर से नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।जानकारी के मुताबिक, जीएसटी विभाग की इंटेलिजेंस विंग को सूचना मिली थी कि ग्रेटर नोएडा से देसी घी से भरा टैंकर कोटकपूरा आ रहा है। इस संबंध में जीएसटी विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया।  इसके बाद गुरुवार रात फूड कमिश्नर अमित जोशी के नेतृत्व में चंडीगढ़ से टीम कोटकपूरा पहुंची। टीम ने फरीदकोट के फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल के नेतृत्व वाली टीम के साथ मिलकर फरीदकोट रोड स्थित फैक्ट्री में पहुंचे टैंकर को कब्जे में लिया। टैंकर से घी के सैंपल एकत्रित कर जांच के लिए भेजे गए।  .फूड सेफ्टी अधिकारी नवदीप सिंह चहल ने बताया कि टैंकर से लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट फेल आई है। रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टैंकर चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

जौली, गगन और नारंग को पछाड़ गुजराल ने मारी बाजी, 661 वोटों से अध्यक्ष निर्वाचित

चंडीगढ़. करीब डेढ़ साल के इंतजार के बाद चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन को शुक्रवार को नया प्रधान मिल गया। जिला अदालत परिसर में हुए चुनाव के परिणाम देर रात घोषित किए गए। अध्यक्ष पद पर एएस गुजराल ने 661 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने गगन अग्रवाल (450), रविंदर सिंह बस्सी उर्फ जौली (464) और सुनील नारंग (327) को पीछे छोड़ा। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर अभय जोशी ने बाजी मारी। जोशी को 1071 वोट पड़े जबकि उनके मुकाबले धर्मिंदर सिंह को 801 वोट मिले। जोशी 270 वोट से विजयी रहे। उन्होंने पहले राउंड से ही बढ़त बना ली थी। सचिव पद पर तेजविंदर सिंह गिल 1147 वोट हासिल कर विजयी रहे, जबकि नरेश कुमार को 733 वोट मिले। ज्वाॅइंट सेक्रेटरी पद पर पुष्पिंदर सिंह ने बाजी मारी। उन्हें 836 वोट मिले। वहीं कोषाध्यक्ष पद पर प्रतीक गर्ग ने 1043 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी पुनीत छाबड़ा को 867 वोट मिले।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व पर सजा Golden Temple, दर्शन को जुटे हजारों श्रद्धालु

अमृतसर  पंजाब के अमृतसर में मौजूद गोल्डन टेंपल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व को लेकर आज धार्मिक समागम करवाए जा रहे हैं। गोल्डन टेंपल को फूलों से सजाया गया है। यहां बड़ी संख्या में लग नतमस्तक होने के लिए पहुंचे रहे हैं। गोल्डन टेंपल और श्री अकाल तख्त साहिब व गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब में जलौ सजाएं जाएंगे। हरमंदिर साहिब में तैयारियां किस तरह चल रही हैं। उसे इन तस्वीरों में देखा जा सकता है।अमृतसर, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश गुरु पर्व पर गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन हुआ शुरू। गोल्डन टेंपल को सुंदर फूलों से सजाया गया है, जो विदेश से लाए गए हैं। ये फूल थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया से इंपोर्ट किए गए हैं। 100 कारीगर दिन-रात सजावट के काम में जुटे हैं। गोल्डन टेंपल को सजाने के लिए 60 टन से अधिक फूलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें 10 ट्रकों में लादकर अमृतसर लाया गया। सिखों के 5वें गुरु अर्जन देव जी ने सन् 1604 में दरबार साहिब में पहली बार  श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश गुरु पर्व के अवसर पर श्री हरिमंदिर साहिब में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं।  गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन कुछ समय बाद आरंभ होगा।  गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े ये तथ्य, जानिए…     बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की थी: सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में दरबार साहिब में पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया था। 1430 अंग (पन्ने) वाले इस ग्रंथ के पहले प्रकाश पर संगत ने कीर्तन दीवान सजाए और बाबा बुड्ढा जी ने बाणी पढ़ने की शुरुआत की।     बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने: पहली पातशाही से छठी पातशाही तक अपना जीवन सिख धर्म की सेवा को समर्पित करने वाले बाबा बुड्ढा जी इस ग्रंथ के पहले ग्रंथी बने। आगे चलकर इसी के संबंध में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हुक्म जारी किया, "सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।"     गुरु अर्जन देव बोलते गए, भाई गुरदास लिखते गए: 1603 में 5वें गुरु अर्जन देव ने भाई गुरदास से गुरु ग्रंथ साहिब को लिखवाना शुरू करवाया, जो 1604 में संपन्न हुआ। नाम दिया ‘आदि ग्रंथ’। 1705 में गुरु गोबिंद सिंह ने दमदमा साहिब में गुरु तेग बहादुर के 116 शबद जोड़कर इन्हें पूर्ण किया। 1708 में दशम गुरु गोबिंद सिंह ने हजूर साहिब में फरमान जारी किया था, “सब सिखन को हुकम है गुरु मान्यो ग्रंथ।”     समूची मानवता को एक लड़ी में पिरोने का संदेश है गुरु ग्रंथ साहिब: सिखों में जीवंत गुरु के रूप में मान्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब केवल सिख कौम ही नहीं, बल्कि समूची मानवता के लिए आदर्श व पथ प्रदर्शक हैं। दुनिया में यह इकलौते ऐसे पावन ग्रंथ हैं, जो तमाम तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी सद्भाव, भाईचारे, मानवता व समरसता का संदेश देते हैं। गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में गुरमत समागम आयोजित गुरुवार को गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब आरंभ किए गए, जिनके भोग 12 सितंबर को डाले जाएंगे। बता दें, आज (11 सितंबर) गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में गुरमत समागम आयोजित किया जाएगा। इसमें सिंह साहिबान और पंथ प्रसिद्ध रागी जत्थे संगत को गुरबाणी और गुर-इतिहास से जोड़ेंगे। श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन सजाया जाएगा वहीं, 12 सितंबर को पुरातन परंपरा के अनुसार गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब से सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब तक नगर कीर्तन सजाया जाएगा। नगर कीर्तन सुबह 7 बजे रामसर साहिब से निकलेगा और स्वर्ण मंदिर पहुंचेगा। इस दौरान शिरोमणि कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी समेत सिंह साहिबान और प्रमुख शख्सियतें हाजिरी भरेंगी।  

पंजाब में सियासी खींचतान के बीच दिल्ली पहुंचे भारत भूषण आशु, सचिन पायलट से की मुलाकात

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) के महासचिव सचिन पायलट से नई दिल्ली में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भारत भूषण आशू ने शुक्रवार को नई दिल्ली में सचिन पायलट से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठनात्मक मामलों और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनाए जाने के बाद पिछले कुछ दिनों में प्रदेश कांग्रेस के कई प्रमुख नेता उनसे मुलाकात कर चुके हैं। पंजाब कांग्रेस में समन्वय बढ़ाने की कोशिश पायलट से मुलाकात करने वालों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा प्रमुख हैं। इन मुलाकातों को पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। भारत भूषण ने पायलट के साथ मुलाकात के बाद कहा कि दोनों के बीच पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन से जुड़े विषयों और प्रदेश में कांग्रेस को और मजबूत करने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। उन्होंने पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद संगठन को मजबूत करने के प्रयासों में सहयोग का संकेत दिया। चुनाव से पहले सभी धड़ों को एक करना चुनौती कांग्रेस हाईकमान ने पांच सितंबर को भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया था। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर लंबे समय से मतभेद सामने आते रहे हैं। पायलट के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न धड़ों को साथ लेकर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी आगे बढ़ाने की है। पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करने और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। ऐसे में पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ पायलट की लगातार हो रही मुलाकातों को खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

धान किसानों की बढ़ी चिंता, हरियाणा में पिछैती फसल पर सूखे की मार

बहादुरगढ़. धान उत्पादक किसान इस बार आशा और निराशा के बीच झूल रहे हैं। मानसून की बेरुखी ने खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। समय पर रोपाई या बिजाई की गई धान की फसल फिलहाल संभली हुई है, लेकिन उसे बचाए रखने के लिए किसान दिन-रात ट्यूबवेल चला रहे हैं। दूसरी ओर, पिछैती रोपाई वाले खेतों में सूखे का असर पहले ही दिखाई दे चुका है। कहीं फसल की जुताई की जा चुकी है तो कहीं किसान उसे पशु चारे के लिए काटने को मजबूर हैं। बहादुरगढ़ क्षेत्र में इस बार करीब 20 हजार हेक्टेयर में धान की फसल है। मानसून कमजोर रहने और लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों के सामने खेतों में नमी बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। समय पर रोपी गई फसल की स्थिति ठीक समय पर रोपी गई फसल की स्थिति अभी अपेक्षाकृत ठीक है, मगर इसके लिए लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि धान को पानी की जरूरत के समय नहरों में भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। ऐसे में ट्यूबवेल ही एकमात्र सहारा है। इससे डीजल और बिजली के साथ सिंचाई का खर्च बढ़ रहा है। किसान आनंद के अनुसार, पिछले सप्ताह तीन-चार दिन बूंदाबांदी हुई, जिससे कुछ राहत मिली, लेकिन खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई। तापमान बढ़ने के साथ पानी की जरूरत और बढ़ गई है। यदि ट्यूबवेल से सिंचाई नहीं की जाए तो फसल पर असर पड़ने का डर है। क्या इस बार बचेगा मुनाफा? लगातार सिंचाई के बावजूद इस बात की चिंता है कि अंत में उत्पादन कितना होगा और बढ़ी हुई लागत के बाद हाथ में मुनाफा कितना बचेगा। पिछैती रोपाई वाली फसल पर संकट सूखे की सबसे ज्यादा मार पिछैती रोपाई वाली फसल पर पड़ी है। मौसम में अगले एक-दो दिन में बदलाव और बारिश की संभावना से किसानों को उम्मीद बंधी है। अब देखना यह है कि आसमान से कितनी राहत मिलती है और खेतों में खड़ी धान की फसल किसानों की उम्मीद को उत्पादन और मुनाफे में कितना बदल पाती है। इधर, कृ़षि विभाग के एसडीओ डा. सुनील कौशिक ने बताया कि अभी फसल की स्थिति ठीक है।

CM सेहत योजना: पंजाब में 33 लाख हेल्थ कार्ड बांटने की तैयारी, घर-घर पहुंचेंगे अधिकारी

चंडीगढ़. पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्डों के वितरण में अब तेजी आने वाली है, करीब 33 लाख कार्ड जल्द ही जिलों में उपलब्ध होने की उम्मीद है। राज्य सरकार सभी पात्र लाभार्थियों को योजना के दायरे में लाने के लिए कार्य कर रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि करीब 31 लाख मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्ड पहले ही जिलों में उपलब्ध हो चुके हैं, जबकि लगभग 2 लाख और कार्ड जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है। सरकार ने करीब 2,008 गांवों और वार्डों की पहचान की है, जहां 400 या उससे अधिक लाभार्थी कार्ड के लिए पात्र हैं। इन स्थानों पर विशेष वितरण शिविर लगाए जाएंगे, ताकि कार्ड वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और लाभार्थियों को अपने क्षेत्र में ही कार्ड प्राप्त करने की सुविधा मिल सके। लाभार्थियों को शिविरों के बारे में दी गई सूचना लाभार्थियों को शिविरों के बारे में पहले से सूचित किया जाएगा। आशा कार्यकर्ताओं, आशा फैसिलिटेटरों, सेहत मित्रों और अन्य फील्ड स्टाफ को लाभार्थियों को शिविरों तक लाने तथा अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्ड वितरण कार्यक्रम के औपचारिक शुभारंभ के बाद शिविर आधारित वितरण शुरू होगा। सरकार ने कार्यक्रम शुरू होने के एक सप्ताह के भीतर इन शिविरों में कार्ड वितरण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिन गांवों और वार्डों में 400 से कम लाभार्थी हैं, वहां पहले से चल रही घर-घर कार्ड वितरण व्यवस्था जारी रहेगी। शिविरों के बाद भी जो कार्ड वितरित नहीं हो पाएँगे, उन्हें भी आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों के माध्यम से लाभार्थियों के घरों तक पहुंचाया जाएगा। अंतिम स्तर तक कार्ड पहुंचाने को प्रोत्साहित करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रत्येक सफलतापूर्वक वितरित कार्ड के लिए 10 रुपये, जबकि आशा फैसिलिटेटरों को प्रति कार्ड ₹2 दिए जाएंगे। घर-घर कार्ड वितरण का रिकॉर्ड रखा जाएगा और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा प्रोत्साहन राशि के दावों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। दो सप्ताह के भीतर घरों तक पहुंचाए जाएंगे कार्ड शिविर आधारित वितरण अभियान पूरा होने के बाद शेष कार्डों को अगले दो सप्ताह के भीतर घर-घर वितरण व्यवस्था के माध्यम से वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा जिलों को कार्ड तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) सामग्री पहले ही उपलब्ध करवाई जा चुकी है, इसमें कार्ड जैकेट, लिफाफे और ब्रोशर भी शामिल हैं। अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया की करीबी निगरानी करने तथा निर्धारित समयसीमा और मानक संचालन प्रक्रिया (स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्डों का वितरण पूरा करना है, सरकार का विशेष जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजना के लाभ से वंचित न रहे।

Chandigarh Municipal Election: सात वार्ड SC के लिए रिजर्व, चुनावी समीकरण बदले

चंडीगढ़. दिसंबर में होने वाले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव को लेकर आज यानी शुक्रवार को वार्ड रिजर्वेशन का ड्रॉ निकाला गया। सेक्टर-6 स्थित यूटी गेस्ट हाउस में स्टेट इलेक्शन कमिश्नर की निगरानी में ड्रॉ हुआ। वार्ड आरक्षण ड्राॅ में सात वार्ड अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें वार्ड-29, वार्ड-4, वार्ड-9, वार्ड-15, वार्ड-1, वार्ड-3 और वार्ड-32 शामिल हैं। इन सात एससी वार्डों में से वार्ड-29, वार्ड-3 और वार्ड-32 एससी महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि बाकी चार वार्ड एससी महिला और पुरुष दोनों के लिए खुले रहेंगे। आरक्षण की इस तस्वीर से कई मौजूदा पार्षदों की चुनावी तैयारी और राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। इस बार आरक्षण ड्राॅ की प्रक्रिया में नगर निगम के कुल 35 वार्डों में से पहले से आरक्षित 16 वार्डों को शामिल नहीं किया गया। इन 16 वार्डों को बाहर करने के बाद बचे 19 वार्डों में ही नया ड्राॅ हुआ। इसी ड्राॅ में सात वार्ड एससी और नौ वार्ड सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए। यानी बचे 19 वार्डों में से कुल 16 वार्ड आरक्षित हो गए, जबकि सिर्फ तीन वार्ड सामान्य श्रेणी के लिए बचे। वर्ष 2021 के चुनाव में एससी के लिए वार्ड-7, 16, 19, 24, 26, 28 और 31 आरक्षित थे। इनमें वार्ड-16, 19 और 28 एससी महिला के लिए आरक्षित किए गए थे। इस बार एससी आरक्षण पूरी तरह नए वार्डों में चला गया है। वार्ड-29, 4, 9, 15, 1, 3 और 32 को एससी के लिए आरक्षित किए जाने से इन वार्डों में अब एससी वर्ग के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा। आरक्षण का सबसे बड़ा असर मौजूदा पार्षदों पर दिखाई देगा। वार्ड-3 से भाजपा के पार्षद दलिप शर्मा लगातार तीसरी जीत की तैयारी में थे, लेकिन वार्ड एससी के लिए आरक्षित होने से अब उन्हें दूसरे वार्ड से चुनावी जमीन तलाशनी पड़ सकती है। वार्ड-4 की पार्षद और डिप्टी मेयर सुमन शर्मा के सामने भी यही चुनौती खड़ी हो गई है। वार्ड-9 की भाजपा पार्षद बिमला दुबे भी अब अपने मौजूदा वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। वार्ड-15 के रामचंद्र यादव के लिए भी आरक्षण बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यादव हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं। अब वार्ड एससी के लिए आरक्षित होने के बाद उन्हें भी नई सीट तलाशनी होगी। वार्ड-29 में आप के टिकट पर जीतकर बाद में कांग्रेस में शामिल हुए मुन्नवर के लिए भी मौजूदा वार्ड की सीट बदल गई है। वहीं वार्ड-32 के भाजपा पार्षद और सीनियर डिप्टी मेयर जसमानप्रीत सिंह के सामने भी अब नई राजनीतिक जमीन तलाशने की चुनौती होगी। एससी महिला के लिए आरक्षित तीन वार्डों में वार्ड-29, वार्ड-3 और वार्ड-32 शामिल होने से इन सीटों पर अब एससी महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगी। वहीं नौ सामान्य महिला वार्डों के आरक्षण से भी कई मौजूदा पुरुष पार्षदों को अपनी सीट छोड़कर नए वार्ड में जाना पड़ सकता है। ऐसे में आरक्षण ड्राॅ ने चुनाव से पहले ही नगर निगम की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं।

चंडीगढ़ में मानसून की विदाई, अब सुहाने मौसम में घूमने का मिलेगा भरपूर मजा

चंडीगढ़. सड़कों के किनारे पेड़ों की वजह से हरियाली, चौक-चौराहे एक जैसे और स्मूथली ट्रैफिक मैनेजमेंट। चंडीगढ़ यानी स्मार्टसिटी में प्रवेश करते ही एक अलग तरह का अहसास होता है। सितंबर महीने में इस शहर में काफी कुछ बदला-बदला सा नजर आता है। शहर के मुख्य पर्यटन स्थल अपने सबसे खूबसूरत रूप में होते हैं। यह महीना मानसून की विदाई का होता है। वर्षा की वजह से इस समय पूरा शहर बारिश के बाद हरी-भरी चादर ओढ़ लेता है, जिससे आउटडोर एक्टिविटीज और घूमने का मजा दोगुना हो जाता है। टेम्प्रेचर 23 से 31 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की वजह से मौसम सुहावना होता है। मौसम अच्छा होने के कारण सेक्टर 17 की ओपन-एयर मार्केट में शाम बिताना, स्ट्रीट फूड का लुत्फ उठाना और लाइव म्यूजिकल फाउंटेन देखना बेहद सुखद होता है। इनडोर शॉपिंग के लिए आप एलांते मॉल भी जा सकते हैं। इस महीने ट्राईसिटी का एंटरटेनमेंट कैलेंडर भी लाइव म्यूजिक, कॉमेडी और लाइफस्टाइल प्रदर्शनियों से भरा हुआ है। यदि आपको होम डेकोर और आर्किटेक्चर में रुचि है, तो 25 सितंबर से सेक्टर-15 के परेड ग्राउंड में सबसे बड़ा इंटीरियर शो शुरू हो रहा है। त्योहारों और शादियों के सीजन की खरीदारी के लिए 12 से 14 सितंबर तक सेक्टर-35 स्थित किसान भवन में वेडिंग लाइफस्टाइल और होम डेकोर एग्जीबिशन का आयोजन किया जा रहा है। सुखना लेक: मानसून के बाद झील पानी से पूरी तरह भरी होती है। सुबह और शाम के समय सुहावनी हवाओं के बीच बोटिंग (शिकारा राइड) करना और शिवालिक की पहाड़ियों का नजारा देखना इस महीने सबसे खास अनुभव है। रॉक गार्डन: वेस्ट मटेरियल से बनी नेकचंद की जादुई दुनिया सितंबर की हल्की धूप और खिले मौसम में फोटोग्राफी के लिए बिल्कुल सटीक है। यहां के मानव निर्मित झरने इस समय पूरे वेग से बहते हैं। रोज गार्डन और लेजर वैली: एशिया का सबसे बड़ा जाकिर हुसैन रोज़ गार्डन और लेजर वैली बारिश के बाद पूरी तरह हरे-भरे हो जाते हैं, जो शांतिपूर्ण वॉक और पिकनिक के लिए बेहतरीन हैं।