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ट्राईसिटी को बड़ी सौगात! अक्टूबर से मोहाली-अंबाला के बीच घटेगा सफर का समय, बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था

मोहाली ट्राईसिटी क्षेत्र (चंडीगढ़, पंचकूला व मोहाली) के यात्रियों को आने वाले महीनों में यातायात जाम से बड़ी राहत मिलने वाली है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार अक्टूबर तक मोहाली की आईटी सिटी से अंबाला तक का सफर करीब 30 मिनट कम हो जाएगा। अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के तहत बनने वाला 30 किलोमीटर लंबा अंबाला-आईटी सिटी खंड लगभग 89 प्रतिशत पूरा हो चुका है और इसके अक्टूबर तक शुरू होने की संभावना है। इसके चालू होने से यात्रियों का समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। इससे पहले सितंबर तक मोहाली-सरहिंद कॉरिडोर भी जनता के लिए खोल दिया जाएगा। 27.37 किलोमीटर लंबा यह मार्ग 91 प्रतिशत तैयार हो चुका है और इसके शुरू होने पर यात्रियों का लगभग 30 मिनट का समय बचेगा। इस बीच आईटी सिटी-कुराली सेक्शन पहले ही यातायात के लिए खोल दिया गया है। इस मार्ग के शुरू होने से वाहन चालकों को खरड़ और मोहाली एयरपोर्ट रोड पर लगने वाले जाम से राहत मिली है तथा लगभग 45 मिनट का समय बच रहा है। बठिंडा मार्ग पर सबसे बड़ी राहत का इंतजार NHAI अधिकारियों के अनुसार 106.92 किलोमीटर लंबे सरहिंद-सेहना विस्तार परियोजना को अभी केंद्रीय आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद मोहाली/चंडीगढ़ से बठिंडा तक का सफर करीब 90 मिनट कम हो जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरे रिंग रोड नेटवर्क का सबसे बड़ा समय बचाने वाला हिस्सा होगा। जीरकपुर-पंचकूला बाईपास को मिली मंजूरी हाल ही में NHAI ने 1,878.31 करोड़ रुपये की लागत वाले जीरकपुर-पंचकूला बाईपास और 1,463.95 करोड़ रुपये की लागत वाले ग्रीनफील्ड स्पर प्रोजेक्ट के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) जारी कर दिए हैं। इससे दोनों परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जीरकपुर-पंचकूला बाईपास बनने के बाद यात्रियों को वर्तमान में एनएच-5 और एयरपोर्ट रोड पर लगने वाले भारी जाम से राहत मिलेगी तथा सफर का समय 30 से 40 मिनट तक कम हो सकता है। वहीं 10.3 किलोमीटर लंबा नया ग्रीनफील्ड स्पर अंबाला-चंडीगढ़ एक्सप्रेसवे को जीरकपुर बाईपास से जोड़ेगा। यह एक सीधा और सिग्नल-फ्री कॉरिडोर होगा, जिससे अंबाला, दिल्ली, चंडीगढ़, जीरकपुर, पंचकूला, बद्दी और शिमला के बीच आवाजाही अधिक सुगम हो जाएगी। गडकरी ने बताई परियोजना की अहमियत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि यह छह लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड स्पर ट्राईसिटी रिंग रोड परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मोहाली, चंडीगढ़ और पंचकूला के प्रमुख शहरी चौराहों पर यातायात का दबाव कम होगा तथा हिमाचल प्रदेश, विशेषकर शिमला क्षेत्र तक तेज और निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा। पूरी रिंग रोड से चार घंटे तक की बचत NHAI के अनुसार पिंजौर बाईपास पहले ही चालू हो चुका है, जबकि पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ खंड के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। कुछ अन्य लिंक अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और व्यवहार्यता अध्ययन के चरण में हैं। अधिकारियों का कहना है कि ट्राईसिटी रिंग रोड का पूरा 244 किलोमीटर का नेटवर्क तैयार होने के बाद विभिन्न मार्गों पर यात्रा समय 30 मिनट से लेकर डेढ़ घंटे तक कम हो जाएगा। पूरे रिंग रोड का उपयोग करने वाले वाहन चालकों को कुल मिलाकर लगभग चार घंटे की बचत होगी। NHAI का मानना है कि परियोजना पूरी तरह शुरू होने के बाद हजारों वाहन प्रतिदिन चंडीगढ़ शहर के अंदरूनी मार्गों के बजाय रिंग रोड का उपयोग करेंगे, जिससे ट्राईसिटी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था काफी बेहतर हो जाएगी।  

महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी! मावां-धीयां सत्कार योजना की रकम जल्द होगी जारी, जानें पात्रता और तारीख

चंडीगढ़  पंजाब सरकार मावां-धीयां सत्कार योजना के तहत महिलाओं को एडवांस राशि देने की तैयारी कर रही है। योजना का लाभ 1 जुलाई से शुरू करने के लिए वित्त विभाग अंतिम चरण की तैयारियों में जुटा है। सरकार तिमाही या छमाही आधार पर भुगतान करने के विकल्प पर विचार कर रही है। इसके चलते लाभार्थी महिलाओं के खातों में एडवांस राशि के साथ अप्रैल से देय बकाया रकम भी सीधे ट्रांसफर की जा सकती है।  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस योजना की घोषणा 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विधानसभा के विशेष सत्र में की थी। इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 9300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। सरकार का दावा है कि इससे राज्य की करीब 97 फीसदी वयस्क महिलाओं को लाभ मिलेगा। योजना के तहत अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह और सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। यह राशि डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में पहुंचेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि योजना तिमाही आधार पर लागू होती है तो महिलाओं के खातों में एक साथ 4,000 से 6,000 रुपये तक एडवांस राशि भेजी जा सकती है। चूंकि सरकार ने योजना का लाभ 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना है इसलिए अप्रैल, मई और जून की बकाया राशि भी लाभार्थियों को दिए जाने की तैयारी है। महिलाओं की सहायता के लिए गांवों और मोहल्लों में महिला सत्कार सखियां तैनात की गई हैं। ये घर-घर जाकर आवेदन प्रक्रिया में मदद कर रही हैं ताकि पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ समय पर पहुंच सके। क्या है मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना? मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण महिला कल्याण योजना है. इस योजना की घोषणा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब बजट 2026–27 के दौरान की थी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये और दलित महिलाओं को 1,500 रुपये की सहायता दी जाएगी. योजना की राशि महिलाओं के बैंक खाते में Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।  योजना के लिए कौन-कौन पात्र हैं, किसे मिलेगा लाभ? मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना के लिए महिला पंजाब की निवासी होनी चाहिए. साथ ही योजना के लिए केवल वे महिलाएं पात्र हैं जिनकी उम्र 18 या उससे ज्यादा है. इसके अलावा आर्थिक सहायता पाने के लिए आधार कार्ड बैंक अकाउंट के साथ जरूर लिंक होना चाहिए।  जरूरी डॉक्यूमेंट मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना के लिए अप्लाई करने के लिए महिला के पास आधार कार्ड, बैंक पासबुक (फोटोकॉपी), पंजाब का रिहायशी प्रमाण पत्र वोटर आईडी या राशन कार्ड और आधार से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर जरूर होना चाहिए।  कैसे करें अप्लाई? मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना के लिए आवेदन ऑफलाइन किया जा सकता है. पात्र महिलाएं आंगनवाड़ी केंद्रों, सेवा केंद्रों, या नगर निगम कार्यालयों में जाकर आवेदन कर सकती हैं. अन्य जानकारी पाने के लिए आप योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://mukhyamantrimawandhiyansatkaryojana.com/ पर विजिट कर सकते हैं।  प्रतिनिधियों को खाते खुलवाने के निर्देश आम आदमी पार्टी ने अपने सभी जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पात्र महिलाओं के बैंक खाते जल्द खुलवाना सुनिश्चित करें। कई इलाकों से खाते खुलवाने में आ रही दिक्कतों की शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंची थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को बैंकों के प्रतिनिधियों से समन्वय कर समस्याओं का समाधान कराने के निर्देश दिए। यह जानना जरूरी     योजना का लाभ लेने के लिए महिला की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।     महिला का पंजाब की स्थायी निवासी होना और उसके पास वैध वोटर आईडी व आधार कार्ड होना जरूरी है।     एक ही परिवार की एक से अधिक पात्र महिलाएं अलग-अलग लाभ प्राप्त कर सकेंगी।     सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी पेंशन के अतिरिक्त यह राशि मिलेगी।     सरकारी नौकरी करने वाली या सेवानिवृत्त कर्मचारी इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगी।     आयकर दाता महिलाएं तथा वर्तमान या पूर्व सांसद और विधायक भी योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे।     पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है। महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों, सेवा केंद्रों और विशेष पंजीकरण शिविरों में आवेदन कर सकती हैं।  

श्री हरमंदिर साहिब पहुंचे तरुण चुघ और केवल सिंह ढिल्लों, की अरदास और सेवा

अमृतसर. BJP के नए बने राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ और पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने आज अमृतसर दौरे के दौरान श्री दरबार साहिब में मत्था टेका। इस दौरान तरुण चुघ और केवल सिंह ढिल्लों ने गुरु घर में मत्था टेका और सभी की भलाई के लिए प्रार्थना की। दोनों नेताओं के साथ BJP के सीनियर नेता और दूसरे BJP कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। आपको बता दें कि राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ और पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों का अपने-अपने पद संभालने के बाद श्री दरबार साहिब का यह पहला दौरा है। इसलिए आज का दिन दोनों नेताओं के लिए अहम है। जानकारी के मुताबिक, श्री दरबार साहिब में दर्शन करने के बाद दोनों नेता जलियांवाला बाग, दुर्ग्याना मंदिर और श्री राम तीर्थ में भी मत्था टेकेंगे। इस मौके पर केवल सिंह ढिल्लों BJP कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग भी करेंगे। आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। वहीं इस दौरे को लेकर भओाजपा नेताओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

भाजपा कार्यकर्ता बनेंगे जनता की आवाज, समस्याओं का होगा निराकरण : जग्गा

राजपुरा भारतीय जनता पार्टी ने इलाका प्रभारी जगदीश जग्गा की अगुवाई में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए गांव-गांव जग्गा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। अभियान के तहत भाजपा कार्यकर्ता प्रतिदिन गांवों में पहुंचकर लोगों से सीधा संवाद करेंगे तथा उनकी समस्याओं को सुन कर संबंधित विभागों तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए प्रयास करेंगे।  इस संबंध में जानकारी देते हुए भाजपा इलाका प्रभारी जगदीश जग्गा बताया कि वे पिछले बीस वर्षों से निस्वार्थ भाव से क्षेत्र के लोगों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए नगर काउंसिल चुनावों में जनता की ओर से उन्हें अच्छा समर्थन मिला, जिसके बाद अब बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने भी उनसे संपर्क करना शुरू किया।  ग्रामीणों ने उन्हें गांवों में बढ़ रही समस्याओं, कानून व्यवस्था की स्थिति, नशे के बढ़ते प्रकोप तथा अन्य जनहित के मुद्दों की ओर ध्यान देने की मांग की। जग्गा ने बताया कि लोगों की मांग और समस्याओं को देखते हुए भाजपा ने गांव-गांव जग्गा अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रतिदिन शाम 5 बजे से लेकर रात 8-9 बजे तक क्षेत्र के एक या दो गांवों का दौरा किया जाएगा। इस दौरान गांवों के लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी जाएंगी और उनके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।  उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। इस अवसर पर रूपिंदर रूपी, प्रदीप नंदा, जसवीर जस्सी सहित अन्य मौजूद थे।

गर्मी से मिलेगी राहत! पंजाब में अगले 4 दिनों तक बारिश-आंधी की चेतावनी

चंडीगढ़. पंजाब में भीषण गर्मी के बीच मौसम को लेकर नई अपडेट सामने आई है। गुरुवार को भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) चंडीगढ़ के अनुसार, राज्य के कई जिलों में अगले 4 दिनों तक बारिश, तेज़ हवाओं और गरज-चमक की संभावना है, जिस कारण विभाग ने कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, 18 जून को पूरे पंजाब में किसी भी तरह की मौसम संबंधी चेतावनी जारी नहीं की गई है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है। हालांकि, 19 जून से जिला फिरोजपुर, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, बठिंडा, मानसा, संगरूर, बरनाला, लुधियाना, मोगा, पटियाला और एस.ए.एस. नगर (मोहाली) में बारिश के साथ तेज़ हवाएं चलने की संभावना है। कहा जा रहा है कि अगले 48 घंटों के दौरान इन इलाकों में मौसम अचानक खराब हो सकता है।   20 और 21 जून को भी जारी रहेगा खराब मौसम 20 और 21 जून के दौरान भी पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर समेत उत्तर और सीमावर्ती जिलों में मौसम खराब रहने के आसार हैं। इन क्षेत्रों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं विभाग  ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। तेज़ हवाओं और आंधी के समय पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर ढांचों के पास जाने से बचने तथा आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है।

सात समंदर पार पहुंचेगी पठानकोट की मशहूर लीची, बंपर फसल से निर्यात को मिली रफ्तार

पठानकोट  पंजाब के पठानकोट की मशहूर लीची इस बार देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी मिठास बिखेरने जा रही है. अनुकूल मौसम और बेहतर उत्पादन के चलते इस बार लीची की बंपर फसल हुई है. यही वजह है कि अब पठानकोट की लीची की सप्लाई देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ लंदन, दुबई और सिंगापुर तक करने की तैयारी शुरू हो गई है. पठानकोट लंबे समय से अपनी उच्च गुणवत्ता वाली लीची के लिए जाना जाता है. जिले का वातावरण लीची की खेती के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. यही कारण है कि पंजाब में पठानकोट को लीची जोन घोषित किया गया है. यहां बड़े पैमाने पर लीची की खेती की जाती है और बागवानी विभाग भी किसानों को पूरा सहयोग देता है।  जानकारी के अनुसार इस समय पठानकोट में करीब 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लीची की खेती हो रही है. इस बार मौसम लीची के लिए अनुकूल रहा, जिसके चलते उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है. बागवानी विभाग का भी कहना है कि इस बार लीची की फसल बंपर हुई है. पठानकोट में मुख्य रूप से तीन किस्मों की लीची की पैदावार होती है. इनमें देहरादूनी, कलकती और सीडलेस लीची शामिल हैं. इन तीनों किस्मों की बाजार में अच्छी मांग रहती है. जून महीने में लीची की तुड़ाई का काम शुरू हो जाता है और इसके बाद इसे विभिन्न बाजारों तक पहुंचाया जाता है।  मौसम बना मेहरबान, पठानकोट में लीची की बंपर पैदावार एक व्यापारी ने बताया कि उन्होंने लीची का बाग ठेके पर लिया हुआ है. उनके अनुसार यहां से लीची पहले दिल्ली भेजी जाती है और उसके बाद विदेशों में निर्यात की जाती है. इस बार भी बड़े स्तर पर लीची की खेप तैयार की जा रही है, जिसे देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाया जाएगा. वहीं एक बागवान ने बताया कि इस साल लीची की फसल काफी अच्छी हुई है. हालांकि पिछले दिनों आए तूफान और ओलावृष्टि के कारण कुछ नुकसान जरूर हुआ, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा. उन्होंने कहा कि पठानकोट की लीची की मांग पूरे देश में रहती है और अब विदेशों में भी इसकी पहुंच बढ़ रही है।  बागवानों का कहना है कि विदेशी बाजारों में पहुंच मिलने से किसानों को बेहतर अवसर मिलेंगे. इससे पठानकोट की लीची को नई पहचान मिलने की उम्मीद है. इस संबंध में बागवानी विभाग के अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि पठानकोट की लीची पहले से ही देश के विभिन्न हिस्सों में भेजी जा रही है. अब विभाग के सहयोग और बागवानों के प्रयासों से इसे सिंगापुर, दुबई और लंदन भेजने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि जिले की जलवायु और मिट्टी लीची उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त।  बागवानों और बागवानी विभाग की मेहनत से खुला विदेशी बाजार इसी वजह से यहां की लीची की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है. विभाग लगातार किसानों के संपर्क में है और उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है. पठानकोट की लीची की बढ़ती मांग और इस बार की बंपर पैदावार ने किसानों और व्यापारियों दोनों के चेहरे पर खुशी ला दी है. अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि विदेशों के बाजारों में पठानकोट की यह मिठास कितना असर छोड़ती है।   

तकनीकी खराबी से AIIMS बठिंडा में हड़कंप, ब्लड सैंपल और रजिस्ट्रेशन सेवाएं प्रभावित

बठिंडा. पंजाब के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल AIIMS बठिंडा में गुरुवार सुबह तकनीकी गड़बड़ी के कारण पूरा डिजिटल सिस्टम अचानक ठप पड़ गया। सर्वर बंद होने से ओपीडी पर्चियां बनाने, मरीजों के पंजीकरण, जांच संबंधी प्रक्रियाओं और ब्लड सैंपल लेने जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। इसके चलते दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्यों से इलाज के लिए पहुंचे हजारों मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात यूपीएस (अनइंटरप्टेड पावर सप्लाई) में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे सर्वर को मिलने वाली बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इसके बाद अस्पताल का केंद्रीय कंप्यूटर नेटवर्क काम करना बंद कर गया और लगभग पूरा डिजिटल सिस्टम ठप हो गया। सुबह से लगी लंबी कतारें गुरुवार सुबह जैसे ही मरीज इलाज और जांच के लिए AIIMS पहुंचे तो उन्हें पता चला कि कंप्यूटर सिस्टम बंद होने के कारण पर्चियां नहीं बन पा रही हैं। OPD के बाहर लंबी कतारें लग गईं और मरीज घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कई बुजुर्ग, महिलाएं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज परेशान होकर इधर-उधर भटकते नजर आए। सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हुई जो सुबह खाली पेट ब्लड टेस्ट कराने पहुंचे थे। ब्लड सैंपल लेने की प्रक्रिया प्रभावित होने से उन्हें लंबे समय तक भूखे-प्यासे इंतजार करना पड़ा। कई मरीजों और उनके परिजनों ने अव्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। सूत्रों के मुताबिक, AIIMS बठिंडा में यह पहला मौका है जब केंद्रीय सर्वर प्रभावित होने से लगभग पूरा डिजिटल सिस्टम ही ठप पड़ गया हो। अस्पताल की अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन प्रणाली पर आधारित होने के कारण एक तकनीकी खराबी ने पूरे कामकाज को प्रभावित कर दिया। घटना के बाद अस्पताल की तकनीकी टीमें सर्वर को दोबारा चालू करने और सिस्टम को बहाल करने में जुटी रहीं, लेकिन कई घंटों तक सामान्य व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी। इस घटना ने AIIMS की बैकअप व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में इस प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी तकनीकी खराबी का खामियाजा मरीजों को न भुगतना पड़े। हैरानी की बात यह रही कि हजारों मरीजों की परेशानी के बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से देर शाम तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। अधिकारियों ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना रहा कि यदि भविष्य में इससे भी बड़ा तकनीकी संकट पैदा हो जाए तो उससे निपटने के लिए संस्थान के पास क्या वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद है।

परिवहन व्यवस्था पर मंडराया साइबर संकट, सारथी पोर्टल को निशाना बनाने की आशंका

जालंधर. पिछले तीन दिनों से पंजाब सहित देशभर में परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहने के पीछे केवल तकनीकी खराबी ही नहीं, बल्कि संभावित विदेशी साइबर हमले की आशंका भी सामने आई है। नैशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एन.आई.सी.) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि सारथी पोर्टल को पाकिस्तान और चीन से संचालित हैकरों द्वारा निशाना बनाए जाने की संभावना है। इस खुलासे ने देश की महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सारथी पोर्टल, जो केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन संचालित होता है, देशभर में ड्राइविंग लाइसैंस, लर्निंग लाइसैंस, स्लॉट बुकिंग, लाइसैंस नवीनीकरण, अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट और ड्राइविंग स्कूलों की निगरानी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करता है। इसी पोर्टल में आई तकनीकी बाधा के कारण पंजाब के सभी आर.टी.ए. कार्यालयों और ऑटोमेटेड ड्राइविंग टैस्ट केंद्रों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। सारथी पोर्टल में आई खराबी का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ा। पंजाब के विभिन्न जिलों में लर्निंग लाइसैंस, स्थायी ड्राइविंग लाइसैंस, वाहन पंजीकरण और अन्य सेवाओं के लिए पहले से समय लेकर पहुंचे हजारों आवेदकों को घंटों इंतजार करना पड़ा। जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला, होशियारपुर और अन्य जिलों के आर.टी.ए. कार्यालयों में पिछले तीन दिनों से आवेदकों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई स्थानों पर ड्राइविंग ट्रैक टेस्ट के लिए पहुंचे आवेदकों के बायोमैट्रिक सत्यापन नहीं हो सके, जिससे उनके परीक्षण स्थगित करने पड़े। जिस वजह से बड़ी संख्या में लोगों को बिना काम करवाए लौटना पड़ा। वहीं, तेलंगाना में एन.आई.सी. के राज्य समन्वयक एस. कासी रेड्डी के अनुसार सोमवार को सारथी पोर्टल पर सामान्य 5 हजार उपयोगकर्त्ताओं की तुलना में अचानक 95 हजार उपयोगकर्त्ताओं का ट्रैफिक दर्ज किया गया। इस असामान्य गतिविधि ने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया। उन्होंने बताया कि साइबर सुरक्षा टीम ने संभावित खतरे को देखते हुए एहतियातन पोर्टल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। बाद में सेवाएं बहाल कर दी गईं, लेकिन सर्वर पर पड़े अतिरिक्त दबाव के कारण सिस्टम सामान्य क्षमता प्राप्त नहीं कर पाया और बार-बार बाधित होता रहा। चीन और पाकिस्तान से लगातार होते हैं हमले एन.आई.सी. अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले से ही इस बात से अवगत है कि पाकिस्तान और चीन से जुड़े साइबर अपराधी तथा हैकर समूह समय-समय पर भारत के सरकारी पोर्टलों को निशाना बनाने का प्रयास करते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन सरकारी पोर्टलों पर ऑनलाइन भुगतान सुविधा उपलब्ध होती है, वे साइबर अपराधियों के लिए सबसे आकर्षक लक्ष्य बन जाते हैं। ऐसे पोर्टलों को ठप कर प्रशासनिक अव्यवस्था पैदा करना, डेटा चोरी का प्रयास करना या डिजिटल सेवाओं को बाधित करना हमलावरों के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हो सकता है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा मामले में किसी भी प्रकार के डेटा लीक या नागरिकों की निजी जानकारी के चोरी होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। मजबूत फ़ायरवॉल और साइबर सुरक्षा तंत्र ने किसी भी संभावित घुसपैठ को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साइबर युद्ध का बदलता स्वरूप साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी पोर्टलों पर हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, सीईआरटी-इन (सी.ई.आर.टी.-इन) तथा अन्य एजैंसियां ऐसे खतरों की पहचान और रोकथाम के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। स्मार्ट कोड टैक्नोलॉजीज के संस्थापक सूर्यनारायण रेड्डी के अनुसार आज साइबर अपराधियों के पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), चैटबॉट और अत्याधुनिक मैलवेयर जैसे नए हथियार मौजूद हैं। इनके माध्यम से पहले की तुलना में अधिक जटिल और संगठित हमले किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक दौर में साइबर सुरक्षा एक निरंतर चलने वाला युद्ध बन चुकी है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। डिजिटल इंडिया के लिए चेतावनी  सारथी पोर्टल प्रकरण ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल इंडिया की बढ़ती निर्भरता के साथ साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। देश की परिवहन, बैंकिंग, कराधान, स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं से जुड़े पोर्टल करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि नागरिकों का डाटा पूरी तरह सुरक्षित है और सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं, लेकिन इस घटना ने यह संकेत अवश्य दिया है कि भारत के महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे पर विदेशी साइबर खतरों की निगाह लगातार बनी हुई है। ऐसे में साइबर सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाना तथा सरकारी पोर्टलों की निगरानी को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बनकर उभरा है।

संजीव अरोड़ा को नहीं मिली राहत, अदालत बोली- जमानत मिलने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ का खतरा

चंडीगढ़  . पंजाब सरकार में मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा को बड़ा झटका लगा है. ट्रायल कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जमानत देने से गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है और साक्ष्‍य भी प्रभावति हो सकते हैं. इसलिए जमानत याचिका खारिज कर दी गयी है।  कोर्ट ने अपने आदेश में विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि आरोपी पहले भी मामले से जुड़े एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर चुका है. अदालत के अनुसार, संजीव अरोड़ा ने एक गवाह को उसका बयान वापस लेने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के लिए 35 हजार रुपये का भुगतान किया था. अदालत ने इस पहलू को गंभीर मानते हुए कहा कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है तो उसके द्वारा दोबारा गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।  खारिज करने की बताई वजह अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. ऐसे में यदि किसी आरोपी के खिलाफ गवाहों को प्रभावित करने के प्रयास के आरोप सामने आते हैं, तो उसे जमानत देने से जांच और सुनवाई प्रभावित हो सकती है. इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने माना कि संजीव अरोड़ा नियमित जमानत पाने के हकदार नहीं हैं और उनकी याचिका खारिज कर दी।  पहले भी गवाह प्रभावित कर चुका है कोर्ट ने आदेश के अंत में विशेष रूप से उल्लेख किया कि आरोपी पहले भी एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास कर चुका है. अदालत के अनुसार, आरोपी ने गवाह को अपना बयान वापस लेने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के लिए 35,000 रुपये का भुगतान किया था।  क्‍या है मामला संजीव अरोड़ा पंजाब की राजनीति में एक चर्चित चेहरा हैं और वर्तमान में राज्य सरकार में मंत्री हैं. उनके खिलाफ चल रहे मामले को लेकर पिछले कुछ समय से कानूनी कार्यवाही जारी है. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष यह दलील दी थी कि आरोपी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई है. इसी आधार पर जमानत का विरोध किया गया था।  अब बचा है ये विकल्‍प अब ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद संजीव अरोड़ा को राहत नहीं मिली है. हालांकि, उनके पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प खुला हुआ है. फिलहाल अदालत के इस फैसले ने मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों में चर्चा तेज कर दी है। 

पूर्व सिविल जज केस की सुनवाई में CJI सूर्यकांत का सख्त रुख, अदालत में वकीलों को लगाई फटकार

चंडीगढ़   सुप्रीम कोर्ट में एक अनोखे मामले की सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने काफी अहम और सख्‍त टिप्‍पणी की है. CJI जस्टिस सूर्यकांत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि 3 से 4 तथाकथित सीनियर वकील माहौल खराब कर रहे हैं. साथ ही उन्‍होंने कहा कि इस मामले पर वे खुद नजर रखे हुए हैं. यह मामला एक पूर्व सिविल जज से जुड़ा है. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की 4 बेंच इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर चुकी है. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, जहां CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने इसपर सुनवाई की. शीर्ष अदालत ने पंजाब-हर‍ियाणा हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस को मामले की सुनवाई करने के लिए तत्‍काल दो जजों की खंडपीठ गठित करने का निर्देश दिया है।  पूर्व सिविल जज अमरीश कुमार जैन की सेवा समाप्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को उनकी याचिका की सुनवाई के लिए नया डिवीजन बेंच गठित करने का निर्देश दिया है. यह मामला उस समय शीर्ष अदालत पहुंचा जब हाईकोर्ट की चार अलग-अलग पीठ ने इस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई में अब और देरी नहीं होनी चाहिए और इसे जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में अंतिम रूप से सुना जाए. भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने बुधवार को सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस को निर्देश दिया कि वे दो जजों वाली एक पीठ का गठन करें, जो अमरीश कुमार जैन की याचिका पर सुनवाई करे. अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित जजों को सलाह दी जाए कि किसी भी परिस्थिति में वे मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग न करें।  हाईकोर्ट के रजिस्‍ट्रार को रिपोर्ट देने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई प्रतिदिन के आधार पर की जाए और 13 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में इसे अंतिम रूप से सुना जाए. साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सुनवाई पूरी होने और फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद अनुपालन रिपोर्ट सर्वोच्च अदालत में प्रस्तुत करने को कहा गया है. सुनवाई के दौरान अमरीश कुमार जैन अपने वकील अभय प्रताप सिंह के साथ अदालत में उपस्थित हुए. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने उनसे उन जजों के नाम पूछे जिन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया था. इस पर जैन ने बताया कि सबसे पहले जस्टिस लिसा गिल ने खुद को अलग किया, इसके बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस ने फैसला 6 महीने तक सुरक्षित रखने के बाद मामले से दूरी बना ली. बाद में जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा तथा जस्टिस दीपक सिब्बल की अध्यक्षता वाली पीठ ने भी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. जैन ने अदालत को यह भी बताया कि उन्होंने वर्ष 2024 में अपने पेंशन संबंधी लाभ जारी करने के लिए आवेदन दिया था, ताकि वह अपने बेटे की एलएलबी की अंतिम वर्ष की फीस जमा कर सकें, लेकिन उनकी यह मांग भी स्वीकार नहीं की गई।  CJI की सीनियर वकीलों पर सख्‍त टिप्‍पणी CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वे खुद मामले की निगरानी करेंगे और हाईकोर्ट को पीठ गठित करने का निर्देश देंगे. उन्होंने जैन को चेतावनी भी दी कि यदि वह किसी प्रकार की अनुचित गतिविधि या शरारत करने की कोशिश करेंगे तो उसके गंभीर परिणाम होंगे. अदालत ने कहा कि मामले का निष्पक्ष और समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा. ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, CJI ने यह भी टिप्पणी की कि जैन को अपना पक्ष स्वयं रखना चाहिए. उन्होंने संकेत दिया कि कुछ वरिष्ठ वकील जजों के बार-बार खुद को अलग करने जैसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं. CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वह ऐसे मामलों पर करीबी नजर रखे हुए हैं और कुछ तथाकथित वरिष्ठ वकील न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं. इस पर जैन ने कहा कि वह पहले भी दो पीठों के समक्ष स्वयं बहस कर चुके हैं और आगे भी खुद अपना पक्ष रखने के लिए तैयार हैं।  दो दशक पुराना मामला अमरीश कुमार जैन ने नवंबर 2005 में पंजाब ज्‍यूडिशियल सर्विसेज में प्रवेश किया था और सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर कार्यरत थे. वर्ष 2009 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की प्रशासनिक सिफारिशों के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं. जैन ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि वर्ष 2007 में जालंधर के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश उनके प्रति पूर्वाग्रह रखते थे और इसी कारण उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज की गईं. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अक्टूबर 2018 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें सेवा में बहाल करने का आदेश दिया था. अदालत ने उन्हें वरिष्ठता, सेवा की निरंतरता, वेतनवृद्धि और प्रमोशन जैसे सभी लाभ देने का निर्देश दिया था, हालांकि बकाया वेतन देने से इनकार कर दिया गया था।  दोबारा टर्मिनेशन हाईकोर्ट के इस फैसले को जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था. इसके बाद मार्च 2019 में जैन को फिर से सेवा में बहाल कर दिया गया. हालांकि, मार्च 2022 में हाईकोर्ट ने प्रशासनिक पक्ष से एक बार फिर उनकी सेवा समाप्त करने की सिफारिश की और 18 अप्रैल 2022 को उन्हें दोबारा पद से हटा दिया गया. जैन का कहना है कि इस कार्रवाई से न केवल उनका रोजगार छिन गया बल्कि वे पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से भी वंचित हो गए. अब इस पूरे विवाद की सुनवाई नए सिरे से हाईकोर्ट की विशेष पीठ के समक्ष होगी, जिसकी निगरानी स्वयं सुप्रीम कोर्ट करेगा।