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Punjab News: पटियाला में पूरी पंचायत निलंबित, सरपंच सहित सभी सदस्य पर गिरी गाज

पटियाला. पटियाला देहाती क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव लंग की ग्राम पंचायत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) पटियाला द्वारा अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए की गई है। पंचायत के खिलाफ की गई थी शिकायत इस आदेश के तहत जसविंदर कौर (सरपंच), गुरमीत कौर (पंच), मनप्रीत सिंह (पंच), अमनदीप सिंह (पंच), मस्त खान (पंच), गुरदीप सिंह (पंच) और गुरमेल कौर (पंच) को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई गांव निवासी मेवा सिंह पुत्र स्वर्गीय राम ईश्वर सिंह द्वारा पंचायत के खिलाफ की गई शिकायत के आधार पर की गई है। बैठक या कार्यवाही में नहीं ले सकेंगे हिस्सा शिकायतकर्ता ने पंचायत पर कई तरह के आरोप लगाए हैं, जिनकी जांच विभाग द्वारा शुरू कर दी गई है। डीडीपीओ ने निलंबन के साथ यह निर्देश भी जारी किए हैं कि संबंधित सरपंच और पंचायत सदस्य अब ग्राम पंचायत लंग की किसी भी बैठक या कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। इसके अलावा, पंचायत के बैंक खातों से संबंधित किसी भी प्रकार की लेन-देन या कार्रवाई पर भी रोक लगा दी गई है।

धमकियों से बढ़ी सुरक्षा चिंता: मजीठिया केस में विदेशी कॉल्स का खुलासा

चंडीगढ़. शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को विदेशी नंबरों से धमकियां मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, जिस दिन शंभू के पास रेलवे लाइन पर ब्लास्ट की घटना हुई, उसी दिन मजीठिया को एक विदेशी नंबर से धमकी भरा काॅल आया। काॅल करने वाले ने कथित तौर पर कहा कि उनका भी जल्द इसी तरह का हाल किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने उनकी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, मजीठिया को इस प्रकार की धमकियां लगातार मिल रही हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। सुरक्षा को लेकर मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन उल्लेखनीय है कि मजीठिया की सुरक्षा का मामला फिलहाल पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है और इस पर सुनवाई जारी है। ऐसे में ताजा धमकियों ने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। समय-समय पर खुफिया एजेंसी आईबी (आईबी) की ओर से भी इनपुट दिए जाते रहे हैं, जिनमें मजीठिया की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे की आशंका जताई गई है। मजीठिया की जान को खतरे का इनपुट इन इनपुट्स में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उनकी जान को खतरा हो सकता है और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान किए जाने की जरूरत है। इसके बावजूद पिछले वर्ष उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई थी, जिसके बाद से यह मुद्दा लगातार उठता रहा है। मौजूदा हालात में विदेशी नंबरों से मिल रही ताजा धमकियों ने एक बार फिर इस पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में पुलिस के उच्च अधिकारियों को पहले ही सूचित किया जा चुका है, ताकि स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। हालांकि, अब तक इस मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

बेअदबी कानून को लेकर नया विवाद, स्पीकर संधवां को श्री अकाल तख्त ने आठ मई को तलब किया, सीएम मान का SGPC पर हमला

अमृतसर   श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को तलब किया है। यह निर्णय  बेअदबी मामलों में पंजाब सरकार की ओर से बनाए गए कानून पर बुलाई गई बैठक में लिया गया। बैठक में सिख बुद्धिजीवियों, विद्वानों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों ने भाग लिया।  जत्थेदार ने कहा कि संधवां 8 मई सुबह 11 बजे अकाल तख्त साहिब में पेश होकर अपना स्पष्टीकरण दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े किसी भी निर्णय के लिए अकाल तख्त साहिब की स्वीकृति अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि जागत जोत एक्ट में संशोधन करते समय न तो अकाल तख्त साहिब और न ही एसजीपीसी को विश्वास में लिया गया। सीएम मान भड़के वहीं मामले पर मुख्यमंत्री मान ने कहा कि अगर सरकार ने कानून बनाकर दिया है तो आपको उसका स्वागत करना चाहिए था। अब कहते हैं कि एसजीपीसी से पूछे बिना कानून बना दिया। मान ने कहा कि एक परिवार ने एसजीपीसी को दबा कर रखा हुआ है। एसजीपीसी का प्रधान खुद को सुखबीर का सिपाही बताता है।   बिना विचार विमर्श लागू कानून स्वीकार्य नहीं जत्थेदार ने कहा कि पंथ बेअदबी के दोषियों को सख्त सजा देने के पक्ष में है, लेकिन धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों में बिना विचार-विमर्श कानून लागू करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। कुछ प्रावधानों खासकर धार्मिक जानकारी को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर डालने पर भी आपत्ति जताई गई और इसे श्रद्धालुओं की सुरक्षा व निजता के लिए खतरा बताया गया। बैठक में 2015 से लंबित बेअदबी मामलों और न्याय में देरी पर भी चिंता जताई गई। उन्होंने कहा कि कई सरकारें बदलने के बावजूद मुख्य आरोपियों तक पहुंच नहीं बन पाई। मौड़ मंडी बम कांड के पीड़ितों को न्याय न मिलने पर भी सवाल उठाए गए। सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों की रिहाई का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। राजोआणा के मामले में समान मापदंड अपनाने की मांग बलवंत सिंह राजोआणा के मामले में लंबित याचिका का जिक्र करते हुए समान मापदंड अपनाने की मांग की गई। जत्थेदार ने कहा कि केंद्र ने 2019 में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का आश्वासन दिया था जो अब तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पंथ आज भी जगतार सिंह हवारा और दविंदरपाल सिंह भुल्लर समेत अन्य बंद सिखों के साथ खड़ा है। बैठक में बुढ्ढा दल, तरना दल, दमदमी टकसाल, निर्मले, उदासी और मिशनरी कालेजों सहित विभिन्न संप्रदायों ने एकजुटता दिखाई। जत्थेदार ने चेतावनी दी कि पंथ की सहमति के बिना गुरु साहिब से जुड़े मामलों में कोई भी कानून लागू नहीं होने दिया जाएगा। 

पढ़ाई पहले! जनगणना में स्कूल कंप्यूटर के इस्तेमाल पर शिक्षा विभाग का प्रतिबंध

चंडीगढ़. पंजाब में चल रहे जनगणना कार्य के बीच स्कूलों के कंप्यूटर और लैब के उपयोग को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। ऑफिस डायरेक्टर जनरल स्कूल शिक्षा पंजाब की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी विभाग को सरकारी स्कूलों के कंप्यूटर या कंप्यूटर लैब का इस्तेमाल गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए नहीं करने दिया जाएगा। जारी पत्र के अनुसार, इन दिनों जनगणना का कार्य जारी है, जिसके चलते विभिन्न विभागों की ओर से स्कूलों की कंप्यूटर लैब में काम करने और कंप्यूटर लेने की मांग की जा रही थी। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने कहा है कि इससे विद्यार्थियों की कंप्यूटर शिक्षा प्रभावित हो रही है और हार्डवेयर को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। स्कूलों में चल रही दाखिले की प्रक्रिया विभाग ने यह भी उल्लेख किया है कि इस समय स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में यदि स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध नहीं होंगे, तो प्रवेश प्रक्रिया पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कंप्यूटर शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए किसी भी विभाग को जनगणना या अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए स्कूलों से कंप्यूटर ले जाने या कंप्यूटर लैब के उपयोग की अनुमति न दी जाए। पढ़ाई में बाधा न डालने के आदेश यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया गया है। साथ ही, इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों को सूचना देकर निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सभी स्कूल प्रमुखों और संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रवेश प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।

कनाडा से खालिस्तानी हिंसा को मिलती है फंडिंग, CSIS रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बताया

लुधियाना कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) की ताजा रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थकों को कनाडा की नेशनल सिक्योरिटी को खतरा बताया है। यही नहीं रिपोर्ट में यह भी बात सामने आई कि खालिस्तान समर्थक कनाडा में फंड जुटाकर भारत में हिंसा फैलाते हैं। CSIS ने एक मई को एक पब्लिक रिपोर्ट-2025 जारी की, जिसमें स्पष्ट तौर पर लिखा है कि खालिस्तान समर्थक कनाडाई नागरिकों से जुड़कर यहां की संस्थाओं का फायदा उठाते हैं। वो कनाडा में सिख संगठनों व आम लोगों से फंड जुटाते हैं। लोग उन्हें धार्मिक कार्यों के लिए फंड देते हैं, लेकिन वो उसका इस्तेमाल बाद में हिंसक गतिविधियों में करते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा है कि कनाडा में खालिस्तान समर्थकों का एक छोटा सा ग्रुप है। CSIS ने 49 पेजों की रिपोर्ट जारी की है, जिसके पेज नंबर पर 25 पर कनाडा बेस्ड खालिस्तान एक्सट्रिमिस्ट (CBKE) यानि कनाडा में रहने वाले खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियों के बारे में लिखा है। CSIS की रिपोर्ट में खालिस्तान समर्थकों के लिए क्या-क्या लिखा, जानिए.. एयर इंडिया हमले का जिक्र: रिपोर्ट में 1985 के एयर इंडिया फ्लाइट-182 बम विस्फोट की 40वीं वर्षगांठ का खास उल्लेख है। CSIS ने इसे कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला बताया, जिसमें 329 लोग मारे गए थे। हमले के संदिग्ध कनाडा-आधारित खालिस्तान समर्थक चरमपंथी संगठनों से जुड़े थे। खालिस्तान समर्थक संगठनों पर सख्त रुख: रिपोर्ट में पॉलिटिकली मोटिवेटेड वायलेंट एक्सट्रीमिज्म (PMVE) की विस्तार से चर्चा की गई है। CSIS ने लिखा है कि 2025 में कनाडा में कनाडा बेस्ड खालिस्तान एक्सट्रिमिस्ट (CBKE) से जुड़ा कोई हमला नहीं हुआ, लेकिन CBKE की हिंसक गतिविधियां लगातार कनाडा की नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा बनी हैं। फंडिंग और भारत में हिंसा का खुलासा: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कुछ CBKE कनाडाई नागरिकों से जुड़कर कनाडा की संस्थाओं का फायदा उठाते हैं और अनजान समुदाय के लोगों से फंड इकट्ठा करते हैं। यह फंड बाद में भारत में हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल होता है। CSIS ने स्पष्ट किया कि केवल एक छोटा समूह कनाडा को आधार बनाकर मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, फंड जुटाने और हमलों की योजना बनाने का काम करता है। इन्हीं लोगों को खालिस्तानी एक्सट्रिमिस्ट माना जाता है। कनाडा में खालिस्तान की मांग पर आपत्ति नहीं: रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा में खालिस्तान राज्य की मांग के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अभियान चलाना चरमपंथ नहीं है। CSIS केवल हिंसा और फंडिंग वाले हिस्से को खतरा मानती है। कनाड़ा में 2025 में 12 नए आतंकी संगठन: CSIS की मदद से कनाडा सरकार ने इस साल 12 नए संगठनों को आतंकवादी घोषित किया, जिनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग, 764, मेनियक मर्डर कल्ट, टेररग्राम कलेक्टिव आदि शामिल हैं। आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा पर चिंता: रिपोर्ट में 2025 को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बदलाव का साल बताया गया। बढ़ती जियो पॉलिटिकल टेंशन और नई तकनीकों की होड़ से कनाडा की सुरक्षा को खतरा बढ़ा है। विदेशी राज्य खुलेआम और गुप्त तरीके से कनाडा के हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बैंकिंग क्षेत्र को अलर्ट: CSIS ने बैंकिंग और बीमा कंपनियों को विदेशी हस्तक्षेप पर ब्रिफिंग दी। ऑफिस ऑफ द सुपरिंटेंडेंट ऑफ फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस (OSFI) के साथ मिलकर नेशनल सिक्योरिटी थ्रेट फोरम बनाया गया है, ताकि वित्तीय क्षेत्र मजबूत बना रहे। क्रिप्टोकरेंसी का बढ़ता खतरा: रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रिप्टोकरेंसी अब सुरक्षा के लिए नया खतरा बन गई है। विदेशी कंपनियों की पहचान छुपाकर मार्केट में क्रिप्टो करंसी के जरिए हेराफेरी कर रहे हैं, जो दुश्मनों के लिए खतरनाक हथियार साबित हो सकता है। इस पर नकेल कसे जाने की जरूरत है। CSIS आतंकवादी फंडिंग की जांच, नए पैटर्न का विश्लेषण और FINTRAC, वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है। खालिस्तान समर्थकों पर CSIS की नजर: CSIS की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि कनाडा खालिस्तानी चरमपंथ, फंडिंग के जरिए भारत में हिंसा की योजना और आर्थिक जासूसी को बहुत गंभीर चुनौती मानता है। एजेंसी इन सभी खतरों पर लगातार नजर रख रही है और जरूरी कार्रवाई करने के लिए तैयार है। रिपोर्ट के आधार पर कनाडा सरकार बनाएगी नीतियां कनेडियन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार CSIS की रिपोर्ट पर संसद व मंत्री समीक्षा करेंगे। एजेंसी ने रिपोर्ट पब्लिक सेफ्टी मिनिस्टर को सौंप दी है और संसद में इसे पेश किया जाएगा। उसके आधार पर सरकार खालस्तानी कट्‌टपंथियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की पॉलिसी तैयार कर सकती है। विक्रमजीत साहनी बोले- PM मोदी के प्रयासों से हुआ आप से भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी ने कनाडा के इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि उग्रवादी तत्वों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित करना बेहतर कदम है। उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है और भारत के निरंतर कूटनीतिक प्रयासों को दर्शाता है। साहनी ने कहा कि यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण हुआ है। उन्होंने इस मुद्दे को लगातार और मजबूती से वैश्विक मंचों पर अपने समकक्षों के सामने उठाया। यह भी स्पष्ट करता है कि ऐसे तत्व बेहद छोटे और हाशिए पर मौजूद समूह हैं, जिनका बड़े समुदाय द्वारा अपनाए गए शांति के मूल्यों से कोई संबंध नहीं है।  

हाईकोर्ट में ट्राइडेंट मामला: फैसला सुरक्षित, प्रदूषण बोर्ड की कार्रवाई पर उठे सवाल

चंडीगढ़. ट्राइडेंट समूह और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच चल रहे विवाद पर उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में ट्राइडेंट समूह ने बोर्ड की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया है, जबकि बोर्ड ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे नियमों के तहत की गई सामान्य जांच बताया है। ट्राइडेंट ग्रुप हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसके संस्थापक एवं राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता के राजनीतिक पाला बदलने के तुरंत बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने बदले की भावना से फैक्टरी पर असामान्य कार्रवाई शुरू कर दी व उसकी सुरक्षा भी वापिस ले ली गई है। सोमवार को याचिकाकर्ता ट्राइडेंट ग्रुप की ओर से  हाई कोर्ट के समक्ष यह प्रमुख तर्क रखा कि ट्राइडेंट ग्रुप पर कार्रवाई पर्यावरणीय उल्लंघन के बजाय “राजनीतिक प्रतिशोध” से प्रेरित प्रतीत होती है। अदालत को बताया गया कि कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस के राजनीतिक रुख बदलने के बाद ही अचानक कड़ी कार्रवाई शुरू हुई। ट्राइडेंट ग्रुप ने कहा कि ट्राइडेंट ग्रुप के यार्न और अन्य डिवीजनों को 7 अप्रैल और 13 अप्रैल 2026 तक वैध कंसेंट/क्लियरेंस प्राप्त थे, जबकि पेपर डिवीजन का पूर्व अनुमति रिकॉर्ड भी मौजूद है और टॉवल डिवीजन के लिए आवेदन 30 जनवरी 2026 से लंबित है। निरीक्षण विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी कहा कि निरीक्षण करने की शक्ति पर कोई विवाद नहीं, लेकिन निरीक्षण भी विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। आरोप लगाया गया कि 30 अप्रैल की शाम लगभग 7:30 बजे 30 सदस्यीय टीम ने अचानक परिसर में प्रवेश किया, स्टाफ पर दबाव बनाया, नमूने लिए और प्रक्रिया का उचित पालन नहीं किया गया। अदालत को बताया कि सैंपलिंग रिपोर्ट पर उन्होंने “प्रोटेस्ट” के साथ हस्ताक्षर किए थे क्योंकि उन्हें आशंका थी कि कार्रवाई पूर्वाग्रहपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाई जा रही है। साथ ही, अदालत के समक्ष ई-फाइल की गई अतिरिक्त दस्तावेजी सामग्री पेश कर यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि नियामक संस्थाएं पूर्व में लगातार निरीक्षण करती रही हैं और ट्राइडेंट ग्रुप को हालिया समय तक आवश्यक स्वीकृतियां मिलती रही हैं। बोर्ड ने आरोप खारिज किए दूसरी ओर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इस पूरे आरोप को “कल्पना” करार दिया गया। बोर्ड के वकील ने स्पष्ट कहा कि यह कोई “रेड” नहीं बल्कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के तहत नियमित निरीक्षण था। अदालत को बताया गया कि वाटर एक्ट की धारा 23 के तहत रेड कैटेगरी और बड़े औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच अनिवार्य है तथा पिछले छह महीनों में लगभग 450 निरीक्षण किए जा चुके हैं। बोर्ड ने जोर देकर कहा कि अभी तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित ही नहीं हुआ है, इसलिए याचिका समयपूर्व है। उनका तर्क था कि ट्राइडेंट ग्रुप अदालत से मूलतः यह आदेश चाहता है कि भविष्य में संभावित प्रतिकूल रिपोर्ट के आधार पर भी कोई कार्रवाई न हो, जबकि अभी केवल निरीक्षण हुआ है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। याचिका की वैधता पर भी उठा सवाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सबसे पहले याचिका की वैधता  पर तीखा सवाल उठाया गया। बोर्ड के वकील ने अदालत को स्पष्ट कहा कि अभी तक उद्योग के खिलाफ कोई अंतिम या दंडात्मक आदेश पारित ही नहीं हुआ, इसलिए याचिका समयपूर्व  है। उनका तर्क था कि केवल आशंका के आधार पर अदालत से यह मांग नहीं की जा सकती कि भविष्य में संभावित कार्रवाई रोकी जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कोई प्रतिकूल आदेश पारित होता है तो एनजीटी की धारा 14 के तहत वैकल्पिक वैधानिक उपाय उपलब्ध है, इसलिए सीधे हाई कोर्ट का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए। सैंपल लेने के दौरान नहीं हुई नियमों की पालना याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत के समक्ष विस्तार से कहा कि सैंपल लेने की शक्ति पर विवाद नहीं है, लेकिन कानून में निर्धारित प्रक्रिया बाध्यकारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि निरीक्षण टीम ने मौके पर विधिसम्मत नोटिस नहीं दिया, नमूनों को दो भागों में विभाजित नहीं किया, न ही उन्हें विधिवत सील कर उद्योग प्रतिनिधि के हस्ताक्षर लिए गए। धारा 21(3) का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यदि यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई तो ऐसे नमूनों की विश्लेषण रिपोर्ट कानूनी साक्ष्य के रूप में भी संदिग्ध हो सकती है। कोर्ट में अन्य सांसदों का भी उठा मुद्दा याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि पीपीसीबी के अपने रिकॉर्ड के अनुसार 25 मार्च 2026 तक उद्योग के विभिन्न मानक निर्धारित सीमा के भीतर थे और 13 अप्रैल 2026 तक सहमति आदेश भी जारी किया गया था। ऐसे में एक महीने के भीतर अचानक कठोर रुख अपनाने पर संदेह स्वाभाविक है। अदालत ने एक ओर माना कि राजनीतिक समय-क्रम से आशंका पैदा हो सकती है, लेकिन साथ ही कहा कि अंतिम सुरक्षा कानून सम्मत प्रक्रिया के भीतर ही दी जाएगी। कोर्ट को एक मीडिया हाउस के खिलाफ कार्रवाई ओर क्रिकेटर हरभजन सिंह व संदीप पाठक के खिलाफ कार्रवाई का भी हवाला दिया गया। कंपनी का दावा- वैध कंसेंट मौजूद कंपनी के पास अब भी वैध कंसेंट मौजूद हैं, हालिया निरीक्षण से पहले तक उसके अनुपालन रिकॉर्ड बोर्ड के दस्तावेजों में संतोषजनक हैं, और इसलिए बिना निष्पक्ष संयुक्त निरीक्षण के किसी भी कठोर कदम- विशेषकर बिजली कटौती, बंदी या 33A के तहत दमनात्मक आदेश- से 15,000 कर्मचारियों वाली सूचीबद्ध कंपनी को अपूरणीय क्षति हो सकती है। उसने अदालत से कम-से-कम इतना संरक्षण मांगा कि बिना शो-कॉज नोटिस या निष्पक्ष प्रक्रिया कोई कठोर कदम न उठाया जाए। इसके विपरीत, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अत्यंत आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि याचिका वस्तुतः अदालत से यह निर्देश चाहती है कि एक वैधानिक प्राधिकरण अपनी शक्तियों का उपयोग किस प्रकार करे जो न्यायिक मर्यादा के विपरीत है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपन फैसला सुरक्षित रख लिया।

श्री हरमंदिर साहिब की बेअदबी के आरोप में एआई से बनाई तस्वीर, एसजीपीसी ने जांच शुरू की

अमृतसर तीन युवकों की ओर से एआई के जरिए तस्वीर बनाकर श्री हरमंदिर साहब की बेअदबी करने का मामला सामने आया है। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में तीन व्यक्तियों को परिक्रमा क्षेत्र में चप्पल पहने हुए दिखाया गया है, जबकि उनके सिर भी ढके नहीं हैं। सिख मर्यादा के विपरीत इस तरह के दृश्य को लेकर लोगों ने आपत्ति जताई है।  जानकारी के अनुसार, यह तस्वीर एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट की गई थी। तस्वीर में एक व्यक्ति नई स्कूटी के साथ हाथ में स्कूटी की चाबी पकड़े खड़ा है। जबकि दो अन्य उसके बगल में खड़े दिखाई दे रहे हैं। पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है।  सिख संगठनों की ओर से  जब संबंधित व्यक्ति से संपर्क किया गया तो उसने तस्वीर हटाने और माफी मांगने की बात कही। पोस्ट डालने वाले ने इसे अनजाने में हुई गलती बताया ओर माफ करने की अपील की। यह पहला मामला नहीं है, जब इस तरह की सामग्री सामने आई हो। इससे पहले भी एआई तकनीक का इस्तेमाल कर एक वीडियो तैयार किया गया था, जिसमें एक कंकाल को पगड़ी पहनाकर परिक्रमा क्षेत्र में दिखाया गया था। उसी वीडियो में लंगर हॉल में जूते पहनकर भोजन करते हुए दृश्य भी जोड़े गए थे। इसके अलावा एक अन्य वीडियो में एक युवक को वाहन सहित परिक्रमा में दिखाया गया था, जिसे लेकर भी विवाद हुआ था। कुछ समय पहले एक युवक द्वारा पवित्र सरोवर में प्रवेश कर कुल्ला करता हुए रील बनाने का मामला भी सामने आया था, जिस पर धार्मिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने जांच शुरू कर दी है।  एसजीपीसी के कानूनी सलाहकार अमन बीर सिंह ने बताया कि संबंधित तस्वीर मंगवाई गई है और इसकी तकनीकी जांच एआई कमेटी के माध्यम से कराई जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। धार्मिक संस्थाओं का कहना है कि इस तरह की डिजिटल सामग्री न केवल धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करती है, बल्कि तकनीक के दुरुपयोग का भी उदाहरण है। ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करना और आवश्यक कदम उठाना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। 

दिल्ली में अहम बैठक: राष्ट्रपति मुर्मु से मिलेंगे मान और चड्ढा, पंजाब के मुद्दे उठाएंगे

चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी के छह राज्यसभा सदस्यों के साथ भाजपा में शामिल होने वाले राघव चड्ढा मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलेंगे। चड्ढा ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगा था और राष्ट्रपति ने उन्हें मंगलवार को सुबह 10.40 बजे का समय दिया है। चड्ढा के साथ दो अन्य राज्यसभा सदस्य भी राष्ट्रपति से मिलेंगे। खास बात यह है कि इसी दिन दोपहर 12 बजे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी राष्ट्रपति से मिलने वाले हैं। पता चला है कि राघव चड्ढा राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान उन्हें पंजाब सरकार की ओर से भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्यों पर की जा रही कार्रवाई से अवगत करवाएंगे। उधर, मुख्यमंत्री भगवंत मान की राष्ट्रपति से मुलाकात को भी अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान एक मई को विधानसभा के बुलाए गए विशेष सत्र में पहले ही कह चुके हैं कि वे राष्ट्रपति से मिलकर दल बदल कानून में संशोधन की मांग करेंगे। इसके साथ ही वे विधानसभा में पास हुए विश्वास प्रस्ताव से भी उन्हें अवगत करवाएंगे। मान ने कहा था कि पंजाब देश का पहला राज्य बन जाएगा जो दल बदल कानून में बदलाव की मांग करेगा।

पंजाब के अहम मुद्दों पर राष्ट्रपति मुर्मु से मिलेंगे राघव चड्ढा और सीएम भगवंत मान

चंडीगढ़  आम आदमी पार्टी के छह राज्यसभा सदस्यों के साथ भाजपा में शामिल होने वाले राघव चड्ढा मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलेंगे। चड्ढा ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगा था और राष्ट्रपति ने उन्हें मंगलवार को सुबह 10:40 बजे का समय दिया है। चड्ढा के साथ दो अन्य राज्यसभा सदस्य भी राष्ट्रपति से मिलेंगे। खास बात यह है कि इसी दिन दोपहर 12 बजे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी राष्ट्रपति से मिलने वाले हैं। पता चला है कि राघव चड्ढा राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान उन्हें पंजाब सरकार की ओर से भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्यों पर की जा रही कार्रवाई से अवगत करवाएंगे। उधर, मुख्यमंत्री भगवंत मान की राष्ट्रपति से मुलाकात को भी अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान एक मई को विधानसभा के बुलाए गए विशेष सत्र में पहले ही कह चुके हैं कि वे राष्ट्रपति से मिलकर दल बदल कानून में संशोधन की मांग करेंगे। इसके साथ ही वे विधानसभा में पास हुए विश्वास प्रस्ताव से भी उन्हें अवगत करवाएंगे। मान ने कहा था कि पंजाब देश का पहला राज्य बन जाएगा जो दल बदल कानून में बदलाव की मांग करेगा। भगवंत मान भी राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात इसी दिन दोपहर 12 बजे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे. उनकी इस मुलाकात को भी काफी अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि वह दल-बदल कानून को लेकर अपनी सरकार का रुख साफ करेंगे और उसमें बदलाव की मांग उठाएंगे।  दल-बदल कानून में बदलाव की मांग भगवंत मान पहले ही विधानसभा के विशेष सत्र में यह संकेत दे चुके हैं कि वह राष्ट्रपति से मिलकर दल-बदल कानून में संशोधन की मांग करेंगे. उनका कहना है कि मौजूदा कानून में कई खामियां हैं, जिनका फायदा उठाकर जनादेश के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. मान ने यह भी कहा था कि पंजाब ऐसा पहला राज्य बन सकता है, जो इस कानून में बदलाव की पहल करेगा।  विश्वास प्रस्ताव का भी जिक्र मुख्यमंत्री मान राष्ट्रपति को विधानसभा में पास हुए विश्वास प्रस्ताव की जानकारी भी देंगे. उनका उद्देश्य यह दिखाना है कि सरकार के पास स्पष्ट बहुमत है और वह स्थिर स्थिति में काम कर रही है।  एक ही दिन में राघव चड्ढा और भगवंत मान की राष्ट्रपति से मुलाकात को राजनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे साफ है कि आम आदमी पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर है और केंद्र स्तर पर अपनी बात मजबूती से रखना चाहती है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.

हरपाल चीमा का दावा: पंजाब में वैट और पीएसडीटी राजस्व में हुई बड़ी वृद्धि

चंडीगढ़  वित्त मंत्री पंजाब हरपाल सिंह चीमा ने आज चंडीगढ़ में राजस्व उत्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि का दावा करते हुए कहा है कि राज्य ने इस वर्ष अप्रैल में वैट और पीएसडीटी प्राप्ति में प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने कहा कि राज्य ने इन दोनों क्षेत्रों से लगभग 265 करोड़ रुपये का कुल अतिरिक्त राजस्व हासिल किया है, जो बेहतर निगरानी प्रणालियों और पारदर्शी कर प्रशासन के कारण संभव हुआ है। वित्त मंत्री ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि अप्रैल में वैट संग्रह में 23.28% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे राज्य के खजाने में लगभग 230 करोड़ रुपये का अतिरिक्त इजाफा हुआ है। यह कर प्रशासन और अनुपालन में निरंतर सुधार का परिणाम है। पीएसडीटी संग्रह के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भी 20.43% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे लगभग 35 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी हुई है। यह वृद्धि बेहतर निगरानी और सख्त प्रवर्तन प्रणाली का प्रत्यक्ष परिणाम है। हरपाल सिंह चीमा ने इस आर्थिक प्रगति का श्रेय उन्नत निगरानी रणनीतियों और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दिया। उन्होंने कहा कि वैट और पीएसडीटी में यह मजबूत प्रदर्शन तकनीक-आधारित प्रवर्तन और करदाताओं को दी जा रही सुविधाओं के संतुलन का परिणाम है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि कर चोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और साथ ही ईमानदार करदाताओं के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी कर प्रणाली सुनिश्चित की जाती रहेगी।