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पंजाब के नए DGP पर जल्द फैसला! UPSC की अहम बैठक से साफ होगी तस्वीर

चंडीगढ़. पंजाब में आज परमानेंट डीजीपी नियुक्त होने का रास्ता साफ हो जाएगा। UPSC ने डीजीपी का पैनल शॉर्टलिस्ट करने के लिए आज बैठक बुलाई है। इस बैठक में तीन अधिकारियों का पैनल तैयार कर पंजाब सरकार को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर सरकार एक अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करेगी। जुलाई 2022 में पंजाब सरकार ने गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया था। इसके बाद से ही उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए जा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद पंजाब में स्थायी डीजीपी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों का पैनल तय कर पंजाब सरकार को भेजेगी इसी साल फरवरी में यूपीएससी ने पंजाब सरकार से स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए अधिकारियों के नाम मांगे थे। इसके बाद पंजाब सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजी थी। इनमें से यूपीएससी आज तीन अधिकारियों का पैनल तय कर पंजाब सरकार को भेजेगी। अब पढ़ें 14 अफसरों की लिस्ट में किन-किन का नाम:- वर्तमान डीजीपी गौरव यादव समेत 14 अफसरों के नाम भेजे: पंजाब सरकार ने 6 अप्रैल को यूपीएससी को 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की सूची भेजी थी, जिसमें वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव (1992 बैच) का नाम भी शामिल है। सरकार द्वारा भेजी गई इस सूची में वरिष्ठता के आधार पर गौरव यादव का नाम तीसरे स्थान पर है। इस बैच के सबसे वरिष्ठ अधिकारी शरद सत्य चौहान हैं, जिनके बाद क्रमशः हरप्रीत सिंह सिद्धू, गौरव यादव और कुलदीप सिंह का स्थान आता है। इस प्रस्ताव में 1993 बैच के तीन और 1994 बैच के सात अधिकारी भी शामिल हैं। तीन अफसरों का पैनल तय करेगा यूपीएससी: यूपीएससी, पंजाब सरकार की ओर से भेजी गई 14 आईपीएस अधिकारियों की सूची में से तीन अधिकारियों का पैनल शॉर्टलिस्ट कर सरकार को भेजेगा। इस पैनल में शामिल किसी भी एक अधिकारी को पंजाब सरकार स्थायी डीजीपी नियुक्त कर सकती है। सूची में सबसे ऊपर डॉ. शरद सत्य चौहान का नाम है, जबकि दूसरे स्थान पर हरप्रीत सिंह सिद्धू का नाम है, जो 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं व वरिष्ठता सूची में दूसरे स्थान पर आते हैं। वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव का नाम तीसरे स्थान पर है। यदि यूपीएससी ने वरिष्ठता के आधार पर पैनल तैयार किया, तो यही तीन नाम इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके बाद पंजाब सरकार एक बार फिर गौरव यादव को डीजीपी नियुक्त करने का निर्णय ले सकती है। इन अधिकारियों के सूची में नाम भेजे: सरकार की ओर से स्थायी डीजीपी के लिए भेजे गए अधिकारियों के पैनल को तीन बैचों में बांटा गया है। 1992 बैच में गौरव यादव (वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी), शरद सत्य चौहान, कुलदीप सिंह और हरप्रीत सिंह सिद्धू के नाम शामिल हैं। 1993 बैच में गुरप्रीत कौर देव, जितेंद्र कुमार जैन और शशि प्रभा द्विवेदी का नाम है। वहीं 1994 बैच में सुधांशु शेखर श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार सिन्हा, अमरदीप सिंह राय, वी. नीरजा, अनिता पुंज, नरेश कुमार और राम सिंह के नाम शामिल हैं। इसके अलावा 1989 बैच के सामंत गोयल ने इस पद के लिए अनिच्छा जताई है, जबकि अर्पित शुक्ला और ईश्वर सिंह अपनी सेवानिवृत्ति के करीब होने के कारण इस दौड़ से बाहर हैं। ऐसे होती है सिलेक्शन प्रक्रिया सरकार की ओर से पैनल भेजे जाने के बाद उस पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित की जाती है। इसमें UPSC के अध्यक्ष (अध्यक्ष के रूप में), केंद्रीय गृह सचिव या उनके प्रतिनिधि, राज्य के मुख्य सचिव, राज्य के वर्तमान डीजीपी तथा किसी केंद्रीय पुलिस संगठन के प्रमुख (जो संबंधित राज्य कैडर से न हों) शामिल होते हैं। यह कमेटी तीन नामों को अंतिम रूप देती है और उन्हें राज्य सरकार को भेजती है, जिसके बाद सरकार अंतिम नियुक्ति पर निर्णय लेती है।

School Reopen Update: 1 जुलाई से स्कूल खुलेंगे या बढ़ेगा अवकाश? गर्मी-बिजली संकट पर फैसला बाकी

बुढलाडा  पंजाब में पड़ रही भीषण गर्मी, लगातार बढ़ते तापमान और बार-बार लग रहे बिजली कटों के बीच 1 जुलाई से पूरे राज्य में स्कूल खुलने जा रहे हैं। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाने का ऐलान करेगी। दूसरी ओर, सरकार और शिक्षा विभाग से गर्मियों की छुट्टियों में 10 दिन और बढ़ोतरी करने की मांग उठने लगी है, ताकि बच्चों की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। आने वाले दिनों में बढ़ेगा और तापमान उक्त मांग समाजसेवी गुरलाभ सिंह माहल, भाजपा नेता काका अमरिंदर सिंह दातेवास समेत बड़ी संख्या में लोगों ने उठाई है। उनका कहना है कि सरकार ने पहले ही 1 जून से 30 जून तक गर्मियों की छुट्टियों की घोषणा की थी, लेकिन मौजूदा समय में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना जताई है। ऐसे हालात में स्कूल खोलना बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। स्कूलों में छुट्टियां और बढ़ाने की मांग  उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के कारण लू लगने, दस्त, उल्टी, पेट संबंधी बीमारियों और अन्य मौसमी रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। छोटे बच्चे इन बीमारियों की चपेट में सबसे ज्यादा आते हैं, इसलिए सरकार को विद्यार्थियों की सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका कहना है कि हर साल मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए गर्मियों की छुट्टियों में बढ़ोतरी की जाती रही है। इस वर्ष भीषण गर्मी के साथ-साथ बिजली संकट ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को गंभीरता से देखते हुए स्कूलों की गर्मियों की छुट्टियों में कम से कम 10 दिन का और विस्तार किया जाए। उनका कहना है कि यह फैसला विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के हित में होगा। इस मौके पर अभिभावकों और समाजसेवियों ने भी सरकार से इस मांग पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। 

NIHEA की 7 करोड़ रुपये सालाना की परियोजना फाइलों में कैद, चंडीगढ़ में काम लटका

चंडीगढ़. देश में आधुनिक अस्पतालों की बढ़ती जरूरत के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए विशेषज्ञ इंजीनियर और आर्किटेक्ट तैयार करने की महत्वाकांक्षी योजना दो दशक बाद भी शुरू नहीं हो सकी। वर्ष 2006 में पीजीआइ में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थकेयर इंजीनियरिंग एंड आर्किटेक्चर (एनआइएचईए) स्थापित करने की घोषणा हुई थी। उम्मीद थी कि यहां ऐसे विशेषज्ञ तैयार होंगे, जो भविष्य के अस्पतालों की बेहतर डिजाइन, सुरक्षित निर्माण और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की योजना बना सकेंगे। लेकिन 20 साल बाद भी यह परियोजना केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2007 में पीजीआइ को संस्थान स्थापित करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ हर वर्ष सात करोड़ रुपये तक का बजट उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया था। योजना के तहत हेल्थ फैसिलिटी प्लानिंग एंड डिजाइनिंग तथा हेल्थकेयर इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट जैसे विशेष मास्टर डिग्री कोर्स शुरू किए जाने थे। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य ऐसे विशेषज्ञ तैयार करना था, जो अस्पतालों की योजना, निर्माण, तकनीकी प्रबंधन और स्वास्थ्य अवसंरचना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित कर सकें। हालांकि, परियोजना शुरुआत से ही असमंजस में रही। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने यह कहते हुए प्रस्ताव रोक दिया कि इसमें पीजीआइ की भूमिका स्पष्ट नहीं है। बाद में गवर्निंग बाडी ने भी माना कि इस तरह का संस्थान स्थापित करना पीजीआइ के मूल दायित्व यानी कोर मैंडेट का हिस्सा नहीं है। समितियों ने शुरू की मास्टर डिग्री इसके बाद भी योजना को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए गए। वर्ष 2016 से 2021 के बीच गठित विभिन्न समितियों ने एमबीए की जगह मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करने, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक), चंडीगढ़ कालेज आफ आर्किटेक्चर और यूआइईटी के सहयोग से पाठ्यक्रम तैयार करने तथा एम्स-जोधपुर और आइआइटी-जोधपुर के संयुक्त माडल को अपनाने जैसी सिफारिशें कीं। लेकिन इन सुझावों के बावजूद परियोजना मंजूरी की दहलीज पार नहीं कर सकी।मार्च 2024 में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि एनआइएचईए की स्थापना पीजीआइ के कोर मैंडेट में नहीं आती। समिति ने सुझाव दिया कि इस तरह का संस्थान आइआइटी रोपड़ या चंडीगढ़ कालेज आफ आर्किटेक्चर जैसे संस्थानों में स्थापित किया जाना अधिक उपयुक्त होगा। प्रस्तावों और समितियों के बावजूद परियोजना के बाद भी नहीं निकला हल ऑडिट रिपोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। दो दशक तक बैठकों, प्रस्तावों और समितियों के बावजूद परियोजना का धरातल पर नहीं उतरना यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र की महत्वपूर्ण योजनाएं कई बार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाती हैं। यदि यह संस्थान समय पर स्थापित हो जाता, तो देश को अस्पतालों के निर्माण और स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए विशेष प्रशिक्षित विशेषज्ञों की एक नई पीढ़ी मिल सकती थी। आज भी महत्वाकांक्षी योजना फाइलों से बाहर आने का इंतजार कर रही है।

मोहर्रम पर लुधियाना में DJ और डांस का VIDEO चर्चा में, शाही इमाम बोले- शोक के दिन जश्न शर्मनाक

लुधियाना लुधियाना में मोहर्रम के दिन मुस्लिम युवकों ने एक कार्यक्रम करवाया। जिसमें डीजे पर मियां-मियां भाई बज रहा था और मुस्लिम युवक हाथों में तलवारें, लाठियां, डंडे लेकर हंसते हुए डांस करते रहे। वीडियो वायरल हुआ तो पंजाब के शाही इमाम मोहम्मद उस्मान उर रहमानी ने दी सफाई।  शाही इमाम ने कहा कि मोहर्रम पर इस तरह का हुड़दंग व बेअदबी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। शाही इमाम ने देशभर के मुस्लिम नेताओं व उलेमाओं से अपील की है कि जहां-जहां मोहर्रम पर इस तरह की घटनाएं हुई, वहां पर आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाए ताकि भविष्य में ऐसा न हो। शाही इमाम यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के लिए यह शर्म की बात है। शोक वाले दिन पर जश्न मनाया जा रहा है। शराब पी रहे हैं, सरे आम लाठियां डंडे व तलवारें लहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैर मुस्लिमों को क्या जवाब देंगे? शाही इमाम ने वीडियो जारी कर कही ये अहम बातें…     व्यवस्था और जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते उलेमा: शाही इमाम ने देश के सभी तबकों के उलेमाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मोहर्रम का दिन निकल चुका है और सबने अपने-अपने तरीके से शहीदों को याद किया। लेकिन अब मोहर्रम मनाने वालों पर किसी की निगरानी या कंट्रोल नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा, "मैं मानता हूँ कि बहुत सी चीजें शरियत में लिखित रूप में नहीं होतीं। जैसे अगर कोई जलसा होता है, तो यह शरियत में नहीं लिखा कि गेट पर कौन खड़ा होगा या मेहमानों को कौन रिसीव करेगा—यह एक प्रशासनिक व्यवस्था होती है जो हमें खुद बनानी पड़ती है।" उन्होंने सवाल उठाया कि उलेमा और जिम्मेदार लोग अपनी इस जिम्मेदारी से कैसे भाग सकते हैं?     शराब के ठेकों पर भीड़ शर्मनाक: शाही इमाम ने लुधियाना की जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि मोहर्रम के मौके पर बहुत से लोग बेतरतीब तरीके से लाठी, डंडे और तलवारें लेकर सड़कों पर निकले। डीजे लगाकर गाने बजाए जा रहे थे, औरतें बेपर्दा गुजर रही थीं और सबसे ज्यादा शर्म की बात यह थी कि शराब के ठेकों पर ऐसे हुड़दंगियों की भीड़ लगी हुई थी।     गैर-मुस्लिमों को क्या मुंह दिखाएंगे?: उन्होंने भावुक होकर कहा, "आप अंदाजा लगाएं, जब गैर-मुस्लिम लोग हमसे पूछते हैं कि आज मोहर्रम का कौन सा दिन है, तो हम उन्हें क्या बताएं? क्या हम उन्हें यह बताएं कि आज हमारे धर्म में शहादत का दिन है, आज के दिन पैगंबर के बड़े घराने ने मानवता के लिए कुर्बानी दी थी? एक तरफ यह इज्जत और शालीनता का दिन है, और दूसरी तरफ सड़कों पर यह तमाशा हो रहा है!"     गलत काम करने वाले का हाथ पहले हम पकड़ेंगे: शाही इमाम ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि हम मुसलमान हैं। अगर कोई मुसलमान गलत काम करेगा, तो उसका हाथ सबसे पहले हम ही पकड़ेंगे, कोई और नहीं पकड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मोहर्रम के नाम पर पीपीणियां बजाईं, लाठियां भांजीं, नाचे-गाए और शराब पीकर मर्यादा तार-तार की, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।     आयोजकों और हुड़दंगियों पर होगी FIR: उन्होंने देश भर के मुसलमानों से अपील की कि जिन भी कमेटियों या लोगों ने इन कार्यक्रमों के लिए सरकारी परमिशन ली थी, और वहां मर्यादा का उल्लंघन हुआ, उनके खिलाफ पुलिस को लिखित में शिकायत दें ताकि मुकदमा दर्ज हो सके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "कान खोलकर सुन लें, अब ऐसी बेअदबी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार के जरिए ऐसी गुंडागर्दी और बदमाशी करने वालों पर एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।"     जो अहले-बैत को नहीं मानता, वह मुसलमान कैसा?: शाही इमाम ने अंत में धर्म की बुनियादी बात याद दिलाते हुए कहा कि जो इंसान अहले-बैत का सम्मान नहीं करता, जो कर्बला की शहादत और उसके संदेश को नहीं मानता, वह मुसलमान कैसे हो सकता है? मोहर्रम शोक का दिन है, इसमें जश्न मनाना पूरी तरह से इस्लामियत के खिलाफ है। शाही इमाम को क्यों आया गुस्सा दरअसल, पूरा विवाद लुधियाना के दाना मंडी में मोहर्रम के दिन आयोजित एक कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ। इस कार्यक्रम का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिस पर लोगों ने सवाल खड़े करने शुरू किए। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ मुस्लिम युवा हाथों में डंडे और नंगी तलवारें लहरा रहे हैं। पृष्ठभूमि में लाउडस्पीकर पर 'मियां भाई' जैसे फिल्मी और रैप गाने बज रहे हैं, जिस पर यह युवक शोक मनाने के बजाय थिरक रहे हैं और हुल्लड़बाजी कर रहे हैं। इसके अलावा शहर के कई हिस्सों में पटाखे चलाने, गाड़ियों को बेतरतीब तरीके से दौड़ाने और जिस्म पर तेल डालकर अजीब हरकतें करने के मामले भी सामने आए। इस वीडियो के शाही इमाम के पास पहुंचने के बाद आम मुस्लिम समाज और शिया समुदाय ने भी इस पर कड़ा एतराज जताया है। पंजाब के शिया संप्रदाय से भी अपील की गई है कि अजादारी की एक अपनी तहजीब और मुकाम है, इस तरह का हुड़दंग अजादारी और इस्लाम दोनों का अपमान है।

36 लाख लोगों के खाते में पहुंचेगी राहत, पंजाब सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए जारी किए ₹1583 करोड़

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने राज्य के बुजुर्गों, विधवाओं, निराश्रित महिलाओं, अनाथ एवं आश्रित बच्चों तथा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1,583 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है। सरकार का कहना है कि इस राशि के माध्यम से लाखों पात्र लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उन्हें दैनिक जीवन की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल सके। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने सोमवार को बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण योजनाओं के तहत कुल 6,131.91 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस बजट का उद्देश्य राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को नियमित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। हर व्यक्ति तक पहुंचे आर्थिक सहायता उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से पंजाब के लगभग 36 लाख लाभार्थियों को लाभ मिल रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक बिना किसी देरी के आर्थिक सहायता पहुंचे और किसी भी लाभार्थी को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक जारी की गई कुल राशि में से 1,048 करोड़ रुपये से अधिक बुजुर्ग पेंशन के रूप में सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए हैं। 535 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी जारी इसके अलावा विधवाओं, बेसहारा महिलाओं, अनाथ एवं आश्रित बच्चों तथा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संचालित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत 535 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। डाॅ. बलजीत कौर ने कहा कि राज्य सरकार के लिए सामाजिक सुरक्षा केवल बजटीय प्रावधान नहीं, बल्कि जरूरतमंद वर्गों के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विभाग ने लाभ वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुचारु बनाया है, ताकि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक बिना किसी देरी के सहायता पहुंच सके।

रेड लाइट तोड़ते ट्रक ने ली नाबालिग की जान, चंडीगढ़ में बड़ा सड़क हादसा

चंडीगढ़. हल्लोमाजरा लाइट प्वाइंट पर सोमवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में 14 वर्षीय सुशांत की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब वह अपने पिता के साथ हल्लोमाजरा स्थित एक दुकान से सामान लेकर साइकिल पर घर लौट रहा था। पिता बाइक पर आगे चल रहे थे, जबकि सुशांत साइकिल से उनके साथ-साथ चल रहा था। इसी दौरान रेड लाइट जंप कर आए तेज रफ्तार ट्रक ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रक सुशांत के ऊपर से गुजर गया। गंभीर रूप से घायल किशोर ने अपने पिता के सामने ही दम तोड़ दिया। बेटे की आंखों के सामने हुई इस दर्दनाक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। ड्राइवर पर लापरवाही का आरोप प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसा ट्रक चालक की लापरवाही के कारण हुआ। आरोप है कि चालक ने रेड लाइट की अनदेखी करते हुए तेज गति से ट्रक निकालने की कोशिश की, जिससे साइकिल सवार सुशांत उसकी चपेट में आ गया। हादसे के बाद चालक ट्रक समेत मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में नाकाबंदी कर तलाश शुरू की और कुछ ही समय बाद आरोपी ट्रक चालक को डेराबस्सी से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने व मौत का कारण बनने सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही दुर्घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि हादसे की पूरी परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। ट्रक ने की रेड लाइट जंप स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्लोमाजरा लाइट प्वाइंट पर अक्सर भारी वाहन ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हुए रेड लाइट जंप करते हैं। लोगों ने इस चौराहे पर सख्त निगरानी और ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।

नशे के खिलाफ एक्शन मोड में CM भगवंत मान, DC-SSP को दिए सख्त निर्देश और चेतावनी

बठिंडा पंजाब में चल रहे ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बीते सोमवार डिप्टी कमिश्नरों, पुलिस कमिश्नरों तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि जब तक पंजाब नशे की बुराई से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाता, तब तक इस अभियान को और अधिक तेज किया जाए। विलेज डिफेंस कमेटियों के कार्यों की समीक्षा के लिए आयोजित वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान ने नशों की सप्लाई लाइन तोड़ने और बड़े तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में सफलता हासिल की है, जिससे नशे के अभिशाप की कमर टूट गई है। उन्होंने कहा कि इस अभियान में किसी भी प्रकार की ढील नहीं बरती जानी चाहिए तथा जमीनी स्तर पर अधिक सशक्त कार्रवाई, अधिक जनभागीदारी और गांवों में विश्वास बहाली के प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि इस गति को बनाए रखते हुए नशों के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल की जा सके। बैठक के कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक्स पर लिखा, “आज बठिंडा के लेक व्यू गेस्ट हाउस से मैंने ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान के अंतर्गत सभी डिप्टी कमिश्नरों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। सभी अधिकारियों को नशों के पूर्ण उन्मूलन के लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई तेज करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। हमारी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। पंजाब की युवा पीढ़ी को बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आइए, हम सभी मिलकर पंजाब को नशामुक्त बनाएं और राज्य को प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।” इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “नशों की सप्लाई लाइन पहले ही तोड़ी जा चुकी है और इस घिनौने अपराध में शामिल बड़े तस्करों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। इस अभियान की गति को बनाए रखना होगा और समय की मांग है कि इसे तब तक और तेज किया जाए, जब तक पंजाब पूरी तरह नशामुक्त नहीं हो जाता।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि विलेज डिफेंस कमेटियों के सदस्य अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर रहे हैं और उन्होंने पिछले तीन महीनों में ही नशा तस्करों के खिलाफ 13,000 से अधिक शिकायतें दर्ज करवाई हैं। उन्होंने कहा, “जिन जिलों में विलेज डिफेंस कमेटियां अपेक्षाकृत कम सक्रिय हैं, उन्हें इस जनहित के मिशन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। प्रत्येक जिले में हर महीने विलेज डिफेंस कमेटियों की बैठकें आयोजित की जानी चाहिए और मैं स्वयं मासिक राज्य स्तरीय बैठकों में उनके कार्यों की समीक्षा करूंगा।” मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की समस्या एक वैश्विक चुनौती है, लेकिन दुनिया में कहीं भी इसके खिलाफ इतनी दृढ़ और व्यापक मुहिम नहीं चलाई गई है। उन्होंने कहा, “पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए विलेज डिफेंस कमेटियों के 1.50 लाख सदस्यों की एक मजबूत शक्ति तैयार की गई है। जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है क्योंकि नशों के खिलाफ इस लड़ाई को जन आंदोलन का रूप देना होगा। नशा एक सामाजिक समस्या है और इस अभियान की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए लोगों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने डीसीज़ और एसएसपीज़ को निर्देश दिए कि वे समाज के प्रत्येक वर्ग का सहयोग प्राप्त करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके क्षेत्रों में कहीं भी नशे की बिक्री न हो और प्रत्येक नशा पीड़ित व्यक्ति को इस दलदल से बाहर निकाला जा सके।  

PGI चंडीगढ़ में पानी की बोतलों पर MRP से ज्यादा कीमत, अतिरिक्त वसूली का मामला सामने आया

चंडीगढ़. पीजीआई की न्यू ओपीडी और कार्डियक सेंटर में बनी कैंटीन में ठेकेदारों की ओर से पानी की बोतलों पर एमआरपी बढ़ाकर लोगों से लूट का खेल चल रहा है। मरीजों व तीमारदारों पहले की इलाज के चलते पैसों की किल्लत झेल रहे होते हैं, लेकिन मजबूरी का फायदा उठा कर कैंटीन संचालक उनकी जेब पर सेंधमारी कर रहे है। न्यू ओपीडी और कार्डियक सेंटर में बनी कैंटीन में 20 रुपये की पानी की बोतल पर 30 रुपये वसूले जा रहे हैं। पूरे शहर में पानी की बोतल 20 रुपये में उपलब्ध है और ऑनलाइन 15 रुपये में उपलब्ध है। इस प्रकार के कई मामलों की शिकायतें पीजीआई प्रशासन के पास पहुंच चुकी है, लेकिन कैंटीन संचालकों पर किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हर दिन पीजीआई में इलाज के लिए पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से 12 से 15 हजार मरीज आते हैं। मरीजों के साथ ही तीमारदारों की संख्या भी इतनी ही है। यानी हर दिन अस्पताल में 28 से 30 हजार लोग आ रहे हैं। ऐसे में कैंटीन संचालकों की ओर से हजारों लोगों को लूटने का काम किया जा रहा है। बाहर से आने वाले लोगों को आस पास खाने पीने का सामान कहा मिलेगा इसकी जानकारी नहीं होती है, इसका फायदा उठाकर ही कैंटीन संचालक लोगों की जेब पर डाका डाल रहे है। ओवरचार्जिंग के बहुत सारे वीडियो इंटरनेट पर भी वायरल हो चुके है। प्रिंट रेट पर पानी बेचा जा रहा- वीडियो बनाने वाले लोग फ्री बहुत है। 20 रुपये प्रिंट रेट वाली बोतल के 20 और 30 रुपए वाली प्रिंट वाली बोतल के 30 रुपये लिए जा रहे है। पीजीआइ के टेंडर के मुताबिक प्रिंट रेट पर पानी बेचा जा रहा है। -पवन छाबड़ा, कैंटीन संचालक, कार्डियक सेंटर, पीजीआई प्रीमियम पानी है – 20 रुपये में बिकने वाला पानी सामान्य पानी है, जो हर जगह 20 का ही मिलता है। इसके साथ जो पानी की बोतल 30 रुपये की बेची जा रही है। वही प्रीमियम पानी है। -धीरज धवन, कैंटीन संचालक, न्यू ओपीडी, पीजीआई ब्रांच को कार्रवाई के दिए निर्देश- मामला संज्ञान में आ गया है। संबंधित ब्रांच को कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए गए है। नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। -पंकज राय, डिप्टी डायरेक्टर, पीजीआई विक्रेता के खिलाफ की जा सकती है कार्रवाई – उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट संदीप भारद्वाज बताते हैं कि किसी भी उत्पाद की मूल एमआरपी या लेबल में बदलाव कर अधिक कीमत वसूलना उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों में खरीद का बिल सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है। हर उपभोक्ता को खरीदारी के समय बिल अवश्य लेना चाहिए और उस पर दर्ज कीमत का मिलान उत्पाद पर अंकित एमआरपी से करना चाहिए। यदि अधिक कीमत वसूली गई है तो बिल और उत्पाद की फोटो सुरक्षित रखकर उपभोक्ता आयोग या संबंधित विभाग में शिकायत की जा सकती है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

सिख मंत्रियों और विधायकों की पेशी के बाद अकाल तख्त का सख्त रुख, AAP-अकाली दल को दिए 8 बड़े संदेश

अमृतसर  पंजाब की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा मामला गरमाया हुआ है जिसने सियासत से लेकर धर्म तक हलचल मचा दी है. दरअसल, श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार को एक महीने के भीतर बेअदबी कानून में संशोधन करने का आदेश दिया है. 29 जून को पंजाब के सभी दलों के सिख विधायक और कैबिनेट मंत्री नंगे पैर अकाल तख्त पहुंचे और लिखित सफाई के साथ पांच सिंह साहिबानों के सामने पेश हुए. आम आदमी पार्टी के विधायकों ने यहां तक कबूला कि उन्होंने बिना पढ़े ही मसौदा साइन कर दिया. आखिर क्या है अकाल तख्त, कैसे मुख्यमंत्री को दे सकता है आदेश और क्यों बड़ी से बड़ी हस्ती भी झुक जाती है… अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब में सिख मंत्रियों-विधायकों की पेशी के बाद ये साफ हो गया कि सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो, वह पंथ को नजरअंदाज नहीं कर सकती। सभी दलों के विधायक एक सामान्य सिख की तरह अकाल तख्त पर पेश हुए।  इस दौरान जत्थेदार के सवालों के आगे बेअदबी कानून को विधायकों की बिना पढ़े मंजूरी से जहां AAP सरकार एक्सपोज हुई। वहीं जत्थेदार ने सरकार को पंजाब में पंथ की अहमियत का भी पाठ पढ़ाया। जत्थेदार ने अकाली दल को भी घेरा तो कांग्रेस खुद को कानून से किनारे करने की कोशिश करते दिखी। पेशी के दौरान ही मीडिया मैनेजमेंट तक को लेकर जत्थेदार ने सरकार घेर ली। हालांकि आखिर में जत्थेदार ने 6 एतराज जताते हुए कहा कि कानून बनाना और सजा देना सरकार का काम है लेकिन ये एतराज दूर होने चाहिए। इसके लिए एक महीने का टाइम दिया। तब तक कानून होल्ड करने को कहा। पेशी से बाहर निकले पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार संधवां और वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि जब अकाल तख्त से लिखित एतराज आएंगे तो सरकार उस पर चर्चा करेगी। उसके बाद कानून में बदलाव पर फैसला लेंगे। जानिए, अकाल तख्त में हुई पेशी के असल मायने क्या हैं, इसका आने वाले चुनाव पर क्या असर पड़ेगा।  श्री अकाल तख्त में मंत्रियों-MLA की पेशी के 8 मायने:- 1. पंजाब में पंथ सुप्रीम, राजनीति धर्म के की नैतिकता माने श्री अकाल तख्त साहिब में बेअदबी कानून को लेकर सिख एमएलए व मंत्रियों की पेशी के दौरान अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज स्पष्ट मैसेज दे दिया कि पंजाब में सिख पंथ (धर्म) सुप्रीम है। उन्होंने पेशी के समय स्पष्ट कहा कि सिख इतिहास और दर्शन में 'मीरी-पीरी' (राजनीति और धर्म) का सिद्धांत सर्वोपरि रहा है, जिसके तहत राजनीति हमेशा धर्म के नैतिकता के दायरे में चलती है। जत्थेदार गड़गज ने कहा कि आज राजनीति धर्म के पास आई है, जब राजनीति धर्म के साथ चलती है तो इंसाफ होता है। पूरी कैबिनेट व एमएलए का नंगे पैर अकाल तख्त के सामने हाजिर होना यह साबित करता है कि सिख मामलों में आज भी पंजाब की कोई भी चुनी हुई सरकार सर्वोच्च धार्मिक सत्ता श्री अकाल तख्त से ऊपर नहीं है। 2. अकाल तख्त के आगे सियासी ताकत बेअसर पेशी के दौरान जत्थेदार ज्ञानी गड़गज ने नेताओं को श्री अकाल तख्त की पावर दिखाई और साफ कर दिया कि यहां पर जो वो कहेंगे उसके हिसाब से ही प्रोसिडिंग चलेगी। जब सुखपाल खैहरा कह रहे थे तो उसी दौरान आम आदमी पार्टी के कुछ विधायकों व मंत्रियों ने खड़े होकर विरोध करना शुरू किया तो जत्थेदार गड़गज ने दो टूक कह दिया कि यह विधानसभा नहीं है, श्री अकाल तख्त साहिब है। यहां ये व्यवहार नहीं चलेगा बैठ जाओ। जत्थेदार ने जैसे ही दबका मारा सभी बैठ गए। उन्होंने सुखपाल खैहरा को भी बोलने से रोका। जब खैहरा ने प्रार्थना की तो उसे एक मिनट का समय दिया। टाइम पूरा होते ही खैहरा को भी रोक दिया। यही नहीं जब आप सरकार के मंत्री गुरमीत सिंह खुडि्डयां सरकार के पक्ष में बोलने लगे तो जत्थेदार ने उन्हें भी टोकर बैठा दिया। 3. AAP सरकार एक्सपोज, बिना पढ़े कानून को मंजूरी पेशी के दौरान जत्थेदार ज्ञानी गड़गज ने कानून के संबंध में एक-एक विधायक से सवाल किए। आम आदमी पार्टी के विधायकों ने कहा कि उन्होंने इस पर सहमति दी थी। लेकिन ज्ञानी गड़गज ने जब पूछा कि उन्होंने कानून पढ़ा था तो ज्यादातर ने कह दिया कि नहीं पढ़ा। विधायक मनजीत सिंह ने कहा कि उन्होंने कानून पढ़ा है तो जत्थेदार ने उनसे कस्टोडियन की परिभाषा पूछ ली। जिस पर उन्होंने कहा कि अगर कोई पागल या बच्चा बेअदबी करता है तो उसके माता पिता कस्टोडियन होंगे और उन्हें सजा दी जाएगी। इस पर ज्ञानी गड़गज ने कटाक्ष करते हुए कहा कि शाबाश ऐसे बुद्धिमान सभी होने चाहिए। कई विधायकों का इस तरह कहना कि उन्होंने कानून पढ़ा ही नहीं, सरकार के लिए भारी शर्मिंदगी का कारण बन गया है। विधायकों के इस कबूलनामे से आप सरकार पूरी तरह से एक्सपोज हो गई कि विधायक व मंत्री कानून पास करने से पहले उसे पढ़ते नहीं हैं। 4. पंथ में सरकार का हस्तक्षेप मंजूर नहीं जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने सरकार को आगाह कर दिया कि पंथ से जुड़े मामलों में कोई दखलंदाजी स्वीकार नहीं होगी। पंथ को क्या करना है और क्या नहीं करना है यह सरकार तय नहीं करेगी। जत्थेदार ने कहा कि सिख होने के नाते सुझाव दे सकते हैं, उन्हें मानना या न मानना वो पंथ तय करेगा। जत्थेदार ने 'बीड़' की जगह 'स्वरूप' शब्द का इस्तेमाल करने और वेबसाइट पर पवित्र स्वरूपों का रिकॉर्ड डालने के लिए 'यूनिक नंबर' जारी करने पर तकनीकी एतराज जताया है। इसका सीधा मायना यह है कि पंजाब विधानसभा या कोई भी सेक्युलर कोर्ट सिख रहित मर्यादा और पंथक शब्दावली को डिक्टेट नहीं कर सकती। यह अधिकार केवल अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) जैसी पंथक संस्थाओं के पास सुरक्षित है। सरकार केवल गुनहगारों को सजा देने के लिए क्रिमिनल एक्ट बना सकती है, मर्यादा तय करने के लिए नहीं। 5.अकाली दल के रवैये पर सवाल सुनवाई के दौरान ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने बेअदबी कानून का विरोध न करने पर अकाली दल के रवैये पर भी सवाल खड़े किए। ज्ञानी गड़गज ने अकाली विधायक गनीव कौर मजीठिया से सवाल पूछा कि आपने इसका विरोध किया?, तो उन्होंने … Read more

Punjab Lecturer Recruitment 2026: 1013 पदों पर निकली भर्ती, 1 जुलाई से रजिस्ट्रेशन; जानें योग्यता और पूरी डिटेल

लुधियाना  पंजाब शिक्षा भर्ती निदेशालय ने पंजाब लेक्चरर भर्ती 2026 की विस्तृत अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें लेक्चरर पदों के लिए 1,013 रिक्तियों की घोषणा की गई है। इनमें 1013 रिक्तियां शामिल हैं, जिनमें 829 नियमित नई रिक्तियां और 184 बैकलॉग रिक्तियां शामिल हैं। ये रिक्तियां भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, भूगोल, हिंदी, इतिहास, गणित, राजनीति विज्ञान और पंजाबी सहित 12 विषयों में हैं। पंजाब लेक्चरर कैडर भर्ती 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 जुलाई 2026 से 31 जुलाई 2026 तक खुली रहेगी। संबंधित विषय में मास्टर डिग्री और बी.एड. वाले उम्मीदवार नीचे दी गई जानकारी, पात्रता, पाठ्यक्रम और ऑनलाइन आवेदन की समय सारिणी देख सकते हैं।     शैक्षणिक योग्यता: किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री, जिसमें 55% अंक (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 50%) प्राप्त किए हों।     आयु सीमा: पंजाब सरकार के मानदंडों के अनुसार आयु सीमा 18 से 37 वर्ष है। साथ ही, इस भर्ती अभियान में राज्य मंत्रिमंडल द्वारा ऊपरी आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट प्रदान की गई है।     शामिल विषय: अंग्रेजी, पंजाबी, हिंदी, इतिहास, राजनीति विज्ञान, गणित, अर्थशास्त्र, वाणिज्य, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान और भूगोल। पंजाब शिक्षा भर्ती निदेशालय ने अंग्रेजी, पंजाबी, हिंदी, इतिहास, राजनीति विज्ञान और अन्य विषयों में 1,013 रिक्तियों के लिए पंजाब नियमित और बैकलॉग रिक्तियों हेतु विस्तृत अधिसूचना जारी की है। उम्मीदवार दोनों अधिसूचनाओं के लिए संपूर्ण नियम और शर्तें विभाग की आधिकारिक वेबसाइट erd.punjab.gov.in पर देख सकते हैं।     पंजाब लेक्चरर कैडर भर्ती 2026 की अधिसूचना में कुल 1,013 पदों को शामिल किया गया है – जिनमें 829 नियमित रिक्तियां और 184 लंबित रिक्तियां शामिल हैं – ये रिक्तियां 12 विषयों से संबंधित हैं। आवेदन का लिंक 1 जुलाई 2026 से erd.punjab.gov.in पर सक्रिय हो जाएगा और 31 जुलाई 2026 तक उपलब्ध रहेगा। पंजाब लेक्चरर कैडर भर्ती 2026: अवलोकन पंजाब राज्य में सरकारी स्कूलों में लेक्चरर के पदों को भरने के लिए शिक्षा भर्ती निदेशालय, पंजाब द्वारा भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जा रही है। त्वरित संदर्भ के लिए नीचे दी गई तालिका में इस भर्ती प्रक्रिया के मुख्य विवरण दिए गए हैं। 12 विषयों में होगी भर्ती इस भर्ती के तहत 12 अलग-अलग विषयों में लेक्चररों की नियुक्ति की जाएगी। सबसे अधिक 210 पद हिस्ट्री विषय के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा इंग्लिश के 141, पॉलिटिकल साइंस के 131, मैथ्स के 105, पंजाबी के 99, कॉमर्स के 98, फिजिक्स के 58, इकोनॉमिक्स के 50, केमिस्ट्री के 41, बायोलॉजी के 37, हिंदी के 29 और जियोग्राफी के 14 पदों पर भर्ती की जाएगी। 10वीं में पंजाबी भाषा पास होना अनिवार्य आवेदकों के लिए शैक्षणिक योग्यता के तहत संबंधित विषय में मास्टर डिग्री के साथ न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक और किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से बीएड डिग्री अनिवार्य है। इसके अलावा यह शर्त भी रखी गई है कि उम्मीदवार ने मैट्रिक (10वीं) स्तर पर पंजाबी भाषा को अनिवार्य या वैकल्पिक विषय के रूप में उत्तीर्ण किया हो। आवेदन करने वाले उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना भी आवश्यक है। 18 से 37 वर्ष की आयु के युवा कर सकेंगे आवेदन इस भर्ती के लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि, पंजाब सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षित श्रेणियों जैसे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), दिव्यांग उम्मीदवारों और सरकारी कर्मचारियों को ऊपरी आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी। दो चरणों में होगी परीक्षा, नहीं होगी नेगेटिव मार्किंग योग्य उम्मीदवारों का चयन पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में 300 अंकों की ऑफलाइन ओएमआर आधारित लिखित परीक्षा आयोजित होगी, जो दो भागों में विभाजित होगी। इस परीक्षा में कोई नकारात्मक अंकन (नेगेटिव मार्किंग) नहीं होगा। मेरिट सूची में स्थान पाने के लिए उम्मीदवारों को दोनों सेक्शन में अलग-अलग न्यूनतम कट-ऑफ अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को दूसरे चरण में दस्तावेज सत्यापन (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) के लिए बुलाया जाएगा। प्रोबेशन पीरियड में मिलेगा फिक्स वेतन भर्ती प्रक्रिया में अंतिम रूप से चयनित होने वाले लेक्चरर्स को शुरुआत के 3 साल के प्रोबेशन पीरियड के दौरान ₹34,500 से ₹35,400 प्रति माह का एक निश्चित मूल वेतन दिया जाएगा। इस शुरुआती अवधि में कोई भी सरकारी भत्ता जैसे डीए या एचआरए देय नहीं होगा। 3 साल का प्रोबेशन सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को नियमित वेतनमान के साथ सभी सरकारी भत्तों का लाभ मिलने लगेगा।   विवरण विवरण संगठन शिक्षा भर्ती निदेशालय, पंजाब डाक व्याख्याता पद (नए पद) नई रिक्तियां 829 लंबित रिक्तियां 184 कुल रिक्तियां 1013 अधिसूचना दिनांक 18.06.2026 Application Start Date 1- 31 July 2026 Application Mode Online Official Website erd.punjab.gov.in Notification Regular Vacancy Notice: Download PDF Backlog Vacancy Notice: Download PDF Revised Notification Revised Schedule Notice for 829 Posts Revised Schedule Notice for 184 Posts Join our Telegram Channel for the Latest Updates Punjab Lecturer Cadre Vacancy 2026 The 1013 vacancies (regular and backlog) are distributed across 12 subjects under the new Lecturer Cadre. History and Political Science carry the highest number of posts among the listed subjects, while Geography has the fewest. Candidates should check the subject-wise distribution of the Punjab Lecturer Vacancy below before applying. Subject Regular Vacancies Backlog Vacancies Total Vacancies English 111 30 141 Punjabi 71 28 99 Hindi 25 4 29 History 200 10 210 Political Science 118 13 131 Math 91 14 105 Economics 35 15 50 Commerce 71 27 98 Chemistry 28 13 41 Biology 25 12 37 Physics 46 12 58 Geography 8 6 14 Total 829 184 1,013