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बिहार में पूर्णिया एयरपोर्ट से 4 महीने में 1 लाख यात्रियों ने भरी उड़ान

पटना. पटना और दरभंगा के बाद अब पूर्णिया एयरपोर्ट ने बिहार के विमानन क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है. उद्घाटन के महज चार महीनों के भीतर 1.10 लाख यात्रियों को उड़ान भरवाकर पूर्णिया एयरपोर्ट ने न सिर्फ रिकॉर्ड बनाया है. बढ़ती भीड़ और फुल फ्लाइट्स को देखते हुए इसे इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की दिशा में कदम तेज हो गए हैं. चार महीने में बदली सीमांचल की तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2025 को उद्घाटन के बाद से ही पूर्णिया एयरपोर्ट यात्रियों की पहली पसंद बनता गया. सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों के लिए यह एयरपोर्ट सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि वर्षों पुराने इंतजार का अंत साबित हुआ. चार महीनों में 1.10 लाख से अधिक यात्रियों का सफर करना इस बात का संकेत है कि यहां की डिमांड अनुमान से कहीं ज्यादा है. पूर्णिया एयरपोर्ट से दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद और हैदराबाद के लिए इंडिगो और स्टार एयर की पांच नियमित उड़ानें संचालित हो रही हैं. यात्रियों का उत्साह ऐसा है कि लगभग सभी फ्लाइट्स लगातार फुल बुकिंग के साथ उड़ान भर रही हैं. स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि एयरपोर्ट से न केवल पूर्णिया, बल्कि नेपाल सीमा से सटे इलाकों और पश्चिम बंगाल के करीब एक दर्जन जिलों को सीधा लाभ मिल रहा है. आंकड़े बताते हैं सफलता की रफ्तार एयरपोर्ट डायरेक्टर दीप प्रकाश गुप्ता के मुताबिक 12 दिसंबर तक यात्रियों की संख्या 50 हजार थी, लेकिन जनवरी खत्म होते-होते यह आंकड़ा एक लाख के पार पहुंच गया. मनिहारी-साहिबगंज पुल के पूरा होने के बाद यात्रियों की संख्या में और उछाल आने की उम्मीद जताई जा रही है. बढ़ती भीड़ को देखते हुए पूर्णिया एयरपोर्ट के विस्तार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. 15 एकड़ अतिरिक्त जमीन एयरपोर्ट को सौंपी जा चुकी है, जहां अत्याधुनिक और स्थायी टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण प्रस्तावित है. अगले महीने टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है. नए टर्मिनल में विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ 500 गाड़ियों की पार्किंग क्षमता होगी. अधिकारियों का लक्ष्य भविष्य में यहां से मुंबई, बेंगलुरु और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ानें शुरू करना है. सीमांचल का नया पावरहाउस पूर्णिया एयरपोर्ट अब सिर्फ एक घरेलू हवाई अड्डा नहीं, बल्कि बिहार के एविएशन भविष्य का मजबूत स्तंभ बनता जा रहा है. जिस इलाके को कभी पिछड़ेपन की पहचान से जाना जाता था, वही आज विकास की उड़ान भरता दिख रहा है.

‘हमने देश को ऑक्सीजन दी और उन्होंने हमारी फैक्ट्रियों पर कब्जा किया’: CM हेमंत सोरेन

कोडरमा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज एक दिवसीय दौरे पर कोडरमा पहुंचे। कोडरमा के लोकाई मैदान में झामुमो द्वारा आयोजित सदस्यता ग्रहण समारोह में वो बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान उन्होंनो सभा में मौजूद पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि 25 साल का झारखंड आज स्वाभिमान से जी रहा है। एकीकृत बिहार में यह काफी पिछड़ा हुआ था। गुरु जी शिबू सोरेन ने लंबे संघर्ष कर अलग राज्य बनाया। जब भारत आजादी का सपना भी नहीं देखता था उसे समय झारखंड के लोग अंग्रेजों से लड़ रहे थे। यहां के सेनानी सिद्धू कानू चांद भैरव बिरसा ने लंबा संघर्ष किया। आजादी की लड़ाई झारखंड से शुरू उन्होंने आगे कहा आजादी की लड़ाई तो यहां के संघर्ष के बाद शुरू हुई। हम ऐसे वीर भूमि में पैदा हुए जहां लोगों जल जंगल जमीन की रक्षा करने की कुर्बानी दी। यह प्रदेश सैकड़ों वर्षों से सिर्फ देने का काम किया। कोई ऐसा खनिज नहीं जो यहां नहीं मिलता है। यहां की बेशकीमती खनिजों का सही तरीके से खनन कार्य हो तो कोई बेकारी नहीं रहती। कोडरमा में सबसे अधिक बाल मजदूर इसके साथ ही उन्होंने कि दुखद है कि कोडरमा में सबसे अधिक बाल मजदूर है। दूसरे राज्य चमकते रहे यहां के खनिज से और हमारे हिस्से में गरीबी बेकारी मिली। आजादी के बाद यहां  कल कारखाना लगे लेकिन यहां के लोग कोई लाभ नहीं हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि एक साजिश के तहत झारखंड को मजदूर प्रदेश बनाया गया।  कोरोना आने के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि कितने बड़े पैमाने पर लोग बाहर में रहते हैं। मजदूरी करते हैं। लॉकडाउन आने के बाद इसका खुलासा हुआ। झारखंड के कितने लोग कोरोना में रास्तों पर मर गए। आपका बेटा हेमंत  पहला मुख्यमंत्री रहा जो यहां के मजदूरों के लिए अपने खर्चे से ट्रेन से लाया। दूसरे राज्य के लोग मर रहे थे और हम अपने मजदूरों को झारखंड ला रहे थे। केंद्र सरकार ने फैक्ट्री में कब्जा कर लिया उन्होंने दावा करते हुए कहा कि झारखंड में कोविड कैसे आया कैसे चला गया इसका भनक भी हमने नहीं लगने दिया। हमने झारखंड से पूरे देश को ऑक्सीजन सप्लाई करके लोगों को बचाया। बाद में केंद्र सरकार ने हमारे ऑक्सीजन फैक्ट्री में कब्जा कर लिया। हमारे लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिलने लगा।

बाप-दादा के नाम वाली जमीन की वंशावली के आधार पर बनेगी किसानों की ID

भागलपुर. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत ई-केवाईसी व फार्मर आईडी बनाने में कृषि व राजस्व विभाग की टीम हांफ रही है। नियमों में ढील मिलने की वजह से मंगलवार को जहां 25337 किसानों के फार्मर आईडी बनाए गए। वहीं, बुधवार को नियमों में फिर से सख्ती होने पर 4405 किसानों के ही फार्मर आईडी बनाए जा सके। फार्मर आईडी बनाने के मामले में भागलपुर नंबर वन पर था, यह पांचवें स्थान पर पहुंच गया। पीरपैंती में ई-केवाईसी व फार्मर रजिस्ट्री की स्थिति अच्छी नहीं है। खराब परफॉरमेंस के कारण खवासपुर पीरपैंती के किसान सलाहकार रामाशीष यादव, कोदवार कहलगांव के किसान सलाहकार सच्चिदानंद मंडल, महेशी अजगैवीनाथ के किसान सलाहकार रजनीकांत मिश्र व धर्मेंद्र कुमार को मुख्यालय बुला लिया गया है। उन्हें कारण बताओ नोटिस देकर 24 घंटे में उसका स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है। जिले में अबतक दो लाख 74 हजार 158 के विरुद्ध एक लाख तीन हजार 745 किसानों के फार्मर आईडी बन चुके हैं। कहलगांव के प्रखंड विकास पदाधिकारी राजीव रंजन ने बताया कि खतियान यदि पिता, दादा या पूर्वजों के नाम है तो संबंधित किसानों का फार्मर रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। संयुक्त जमाबंदी में भी अलग अलग परिवार के सदस्यों का रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। पहले जिन किसानों के नाम खतियान में थे सिर्फ उन्हीं के रजिस्ट्रेशन किए जा रहे थे। जानकारी के अनुसार, मंगलवार को किसानों के एफआर बनने के कार्य में काफी तेजी आ गई थी। इसकी मूल वजह मूल जमाबंदी में आवेदक का नाम नहीं रहने के बाद भी वंशावली के आधार पर लाभ ले रहे नामों को साफ्टवेयर स्वीकार करने लगा था। सूत्र के अनुसार, जमाबंदी दादा और पिता के नाम से होने के बाद भी आवेदक का एफआर बनने लगा था। इसका निर्देश मुख्यालय से प्राप्त हुआ था। हालांकि, उसमें कुछ गलत एफआर बनने की सूचना मिलते ही बुधवार को इसे बंद कर दिया गया है। इससे फार्मर रजिस्ट्री का कार्य बुघवार को कम हुआ। सबौर के प्रखंड कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार पाल ने बताया कि कल नाम में विसंगतियां होने के बाद भी किसानों का एफआर बन रहा था। बुधवार को पुन: पहले जैसी स्थिति हो गई है। नाम और जमाबंदी के नाम में अंतर होने पर सॉफ्टवेयर एक्सेप्ट नहीं कर रहा है। उन्होंने बताया कि सबौर का एफआर 50 प्रतिशत होना चाहिए था, जो हो गया है। सबौर प्रखंड में टोटल 7271 पीएम किसान लाभार्थी हैं। उनमें से अबतक 6547 किसानों के केवाईसी हो चुके हैं। जबकि 3956 किसानों के एफआर कर लिए गए हैं। इधर, जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी व उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह ई-केवाईसी व फार्मर रजिस्ट्री की लगातार मानीटरिंग कर रहे हैं। समीक्षा भवन में कृषि व राजस्व विभाग के अधिकारी लगातार इस कार्य पर नजर बनाए हुए हैं। बुधवार को छुट्टी के दिन भी जिलाधिकारी सहित सभी वरीय पदाधिकारी समीक्षा भवन में मौजूद रहे। इसमें लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।

जमशेदपुर के मानगो निकाय चुनाव में बन्ना और सरयू में सिंदूर पर महाभारत!

जमशेदपुर. मानगो नगर निगम चुनाव के अखाड़े में अब विकास के मुद्दे आइसीयू में चले गए हैं, उनकी जगह एक चुटकी सिंदूर और व्यक्तिगत चरित्र हनन ने ले ली है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गुरुवार को पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के उन आपत्तिजनक आरोपों का चुन-चुनकर जवाब दिया, जिन्होंने शहर की राजनीति में भूचाल ला दिया था। राय ने दो टूक कहा कि जो व्यक्ति हर नारी को केवल देह की दृष्टि से देखता हो, उससे मर्यादा की उम्मीद करना ही बेमानी है। सियासी दंगल में गुरुवार को सरयू राय के तेवर रुद्र नजर आए। उन्होंने बन्ना गुप्ता को अल्पज्ञानी बताते हुए कहा कि किसी महिला के चरित्र पर अंगुली उठाना अक्षम्य अपराध है। राय ने स्पष्ट किया कि मधु और उनका पूरा शिक्षित परिवार (माता, बेटा और बेटी) उनके साथ रहता है। उन्होंने कहा, मैं रामार्चा पूजा में बैठता हूं, पंडित पूजा कराते हैं और संकल्प के समय कई महिलाएं मौजूद रहती हैं। बन्ना की सोच इतनी विकृत है कि उन्हें पवित्र संकल्प में भी केवल पति-पत्नी का रिश्ता दिखता है। बेहुदगी की भी एक सीमा होती है। सरयू राय ने बन्ना गुप्ता को आईना दिखाते हुए उनका वह अश्लील वीडियो याद दिलाया, जो विधानसभा चुनाव के कुछ दिन पहले रिलीज हुआ था। राय ने तीखा हमला करते हुए कहा, बन्ना गुप्ता को उस वीडियो वाली महिला को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए, क्योंकि सच्चाई सबके सामने है। जिसका अपना दामन दागों से भरा हो, वह दूसरों के सिंदूर और पूजा पर सवाल उठा रहा है। राय ने तंज कसा कि बन्ना गुप्ता मेयर पति बनकर नगर निगम के पैसों को लूटने की फिराक में हैं और इसी बौखलाहट में वे मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। दरअसल, इस विवाद की पटकथा बुधवार को बन्ना गुप्ता ने लिखी थी। एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बन्ना ने सरयू राय के निजी जीवन पर सीधा हमला करते हुए ''आपरेशन सिंदूर'' छेड़ा था। बन्ना ने सार्वजनिक रूप से पूछा था कि सरयू राय जिस महिला के साथ सालों से रामार्चा पूजा में पति-पत्नी के रूप में बैठते हैं, उनके सम्मान में अपनी चुप्पी क्यों नहीं तोड़ते? बन्ना ने व्यंग्य करते हुए कहा था कि अगर रिश्ता इतना ही गहरा है, तो सरयू राय उस महिला की मांग में सिंदूर क्यों नहीं भर देते और उन्हें समाज में पत्नी का दर्जा क्यों नहीं देते? बन्ना ने राय पर दोहरा चरित्र जीने का आरोप लगाते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से इस रिश्ते को स्वीकार करने की चुनौती दी थी। अब मानगो की चुनावी जंग पूरी तरह व्यक्तिगत ईगो और चरित्र हनन की भेंट चढ़ चुकी है। एक तरफ बन्ना गुप्ता ने सिंदूर को हथियार बनाया, तो दूसरी तरफ सरयू राय ने नैतिकता और पुराने वीडियो के जरिए पलटवार किया। मानगो की राजनीति में अब कीचड़ इतना गहरा हो गया है कि जनता विकास के कम और विवादों के चर्चे ज्यादा कर रही है। अब देखना यह है कि मानगो की महारानियों की इस लड़ाई में यह व्यक्तिगत हमला किसे ले डूबता है।

बिहार में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने 15 एयरपोर्ट्स का होगा रिनोवेशन

पटना. बिहार सरकार ने राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए 15 हवाई अड्डों के विकास की तैयारी शुरू कर दी है. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) से इन एयरपोर्ट्स की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है. रिपोर्ट मिलते ही जमीन पर निर्माण और विस्तार का काम शुरू होगा. सरकार का फोकस केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन इलाकों को भी हवाई सेवा से जोड़ने की योजना है, जहां अब तक उड़ान की सुविधा नहीं थी. मधुबनी, वीरपुर, मुंगेर, वाल्मीकिनगर, भागलपुर और सहरसा जैसे शहरों में 19-सीटर विमानों के परिचालन की संभावना का अध्ययन कराया जा रहा है. इसके लिए 2.43 करोड़ रुपये का भुगतान AAI को किया है. छोटे शहर, बड़ी उड़ान की तैयारी मोतिहारी और छपरा जैसे शहरों के लिए अलग से व्यवहार्यता अध्ययन कराया जा रहा है, जिस पर 1.21 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. वहीं, बेगूसराय के उलाव और गोपालगंज के सबेया सैन्य हवाई अड्डे को नागरिक उड़ानों के लिए उपयोगी बनाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. हवाई अड्डों के विकास में सुरक्षा सबसे अहम कड़ी है. भागलपुर के सुल्तानगंज, बीरपुर, मुंगेर, वाल्मीकिनगर, मुजफ्फरपुर और सहरसा में ऑब्स्टेकल लिमिटेशन सरफेस सर्वे के लिए 2.90 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. इससे उड़ान मार्ग में आने वाली बाधाओं की पहचान होगी. दरभंगा बनेगा लॉजिस्टिक और कार्गो हब दरभंगा एयरपोर्ट को सिर्फ यात्री सेवा तक सीमित नहीं रखा जाएगा. यहां 50 एकड़ भूमि पर लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो हब विकसित करने की योजना है, जिसके लिए 138 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. सहरसा में रनवे विस्तार के लिए 12 एकड़ अतिरिक्त भूमि पर 147 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. भागलपुर के सुल्तानगंज में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए 931 करोड़ रुपये की लागत से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. सोनपुर में 4228 एकड़ भूमि पर नए हवाई अड्डे की योजना है, जबकि रक्सौल और बिहटा में भी विस्तार के लिए राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है. रोजगार और निवेश को मिलेगी उड़ान इन परियोजनाओं से न सिर्फ हवाई सफर आसान होगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. बिहार सरकार का मानना है कि एयर कनेक्टिविटी मजबूत होने से राज्य की आर्थिक तस्वीर तेजी से बदलेगी.

बिहार के 12 जिलों में कोहरे का यलो अलर्ट

पटना. बिहार में कुदरत के मिजाज ने करवट ले ली है. उत्तर बिहार से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक सफेद चादर पसरी नजर आ रही है. IMD ने राज्य के 12 जिलों के लिए ‘यलो अलर्ट’ जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है, बीते 24 घंटों में भागलपुर ने सबको ठिठुरने पर मजबूर कर दिया, जहां न्यूनतम तापमान गिरकर 9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. आलम यह है कि सूरज ढलते ही कनकनी बढ़ जाती है और सुबह की शुरुआत घने कोहरे के साथ हो रही है, जिसने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. IMD के अनुसार एक-दो दिनों तक यही स्थिति बनी रहने की संभावना है. घने कोहरे से बिगड़े हालात, विजिबिलिटी 100 मीटर तक सिमटी पिछले 24 घंटे में उत्तर बिहार के कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा. कई इलाकों में सुबह के समय विजिबिलिटी 50 से 100 मीटर के बीच दर्ज की गई. मौसम विभाग ने वाहन चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी है, खासकर हाइवे और ग्रामीण सड़कों पर सुबह-शाम अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है. भागलपुर में सबसे ज्यादा ठंड, उत्तर बिहार ज्यादा प्रभावित IMD के आंकड़ों के मुताबिक, भागलपुर में न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो राज्य में सबसे कम रहा. उत्तर बिहार के जिलों में उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं और वातावरण में नमी की वजह से कोहरे का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इसी कारण सुबह के वक्त घना कोहरा बन रहा है. पश्चिमी विक्षोभ नहीं, इसलिए बारिश के आसार नहीं मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल कोई पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं है. इसी वजह से बिहार में बारिश की संभावना नहीं जताई गई है. हालांकि, ठंड और कोहरे का यह दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है. दिन में धूप निकलने से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन सुबह और शाम कनकनी बनी रहेगी. पटना में कोहरा हल्का, पर ठंड का एहसास रहेगा राजधानी पटना में यलो अलर्ट तो जारी नहीं किया गया है, लेकिन सुबह के समय हल्का कोहरा और ठंडी हवा लोगों को ठिठुरन का एहसास कराएगी. दिन में धूप निकलने के बाद मौसम साफ हो जाएगा. पटना में न्यूनतम तापमान 10 से 12 डिग्री और अधिकतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रह सकता है. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 2 से 3 दिनों तक उत्तर बिहार के सीमावर्ती जिलों में कोहरे का असर बना रह सकता है. धीरे-धीरे तापमान में हल्की बढ़ोतरी संभव है. दक्षिण बिहार के जिलों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहेगा और दिन में धूप लोगों को राहत देगी. फिलहाल किसी बड़े मौसमी बदलाव के संकेत नहीं हैं.

उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने भूमि सर्वे पर ‘लास्ट चांस’ का प्लान किया लॉक

पटना. बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और उलझनों को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ शब्दों में एलान किया है कि राज्य में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण किसी भी हाल में वर्ष 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा. इस लक्ष्य में अब कोई ढिलाई, बहाना या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. 2011 में रखी गई नींव, अब दिखेगा जमीन पर असर विजय कुमार सिन्हा ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2011 में बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण की नींव रखी थी. उद्देश्य स्पष्ट था—भूमि अभिलेखों को दुरुस्त करना, मालिकाना हक को साफ करना और दशकों से चले आ रहे जमीन विवादों का समाधान निकालना. अब सरकार चाहती है कि यह लंबित काम तय समय सीमा में अपने अंजाम तक पहुंचे. उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी. यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी, त्रुटि या मनमानी सामने आती है तो लोग विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं. ऐसी शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लिया जाएगा और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. उनका कहना साफ था—सर्वे सुधार का माध्यम बने, विवाद का नहीं. पहले चरण में लगभग पूरा, दूसरे चरण में रिकॉर्ड स्वघोषणाएं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों में किस्तवार का काम 99.92 प्रतिशत और खानापुरी 94.4 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है. करीब 31 प्रतिशत गांवों में अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं. वहीं दूसरे चरण में 36 जिलों के 444 अंचलों में हवाई सर्वेक्षण और ग्राम सभा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और रैयतों से 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं. जमीन से जुड़ी अनिश्चितता खत्म करने की कोशिश भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के अनुसार शुरुआती दौर में तकनीकी मार्गदर्शिका में देरी से काम प्रभावित हुआ, लेकिन अब प्रक्रिया रफ्तार पकड़ चुकी है. सरकार का दावा है कि सर्वे पूरा होते ही जमीन से जुड़े मुकदमे, धोखाधड़ी और भ्रम की बड़ी समस्या का समाधान संभव हो सकेगा.

बिहार विधानसभा में चर्चा के केंद्र में NEET मामला और बजट

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र का आज तीसरा दिन है और सदन का माहौल गरम रहने के आसार हैं। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के साथ ही नीतीश सरकार द्वारा पेश बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे। वहीं NEET छात्रा की मौत के मामले में विपक्ष सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है, जिससे सदन में हंगामे की संभावना जताई जा रही है। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नोत्तर काल से शुरू होगी। इस दौरान विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों का संबंधित मंत्री जवाब देंगे। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत विधायक श्याम रजक ने उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े सवाल उठाए हैं, जिन पर विभागीय प्रभारी मंत्री को जवाब देना होगा। इसके अलावा जल संसाधन विभाग से जुड़े मुद्दों पर विधायक राणा रंधीर, अनिल सिंह समेत पांच विधायकों ने सरकार का ध्यान खींचा है। NEET छात्रा मौत पर विपक्ष का आक्रामक रुख NEET परीक्षा से जुड़ी छात्रा की मौत का मामला आज सदन में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में खामियों के कारण छात्र मानसिक दबाव में हैं। सरकार से इस मामले पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्ष हंगामा कर सकता है। बजट पर होगी तीखी बहस बजट सत्र के दूसरे दिन नीतीश सरकार ने 2026-27 के लिए 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। यह पिछले बजट से करीब 30,694 करोड़ रुपये अधिक है। सरकार ने बजट को विकासोन्मुख बताते हुए पांच नए एक्सप्रेस-वे, सिंगल लेन सड़कों को डबल लेन करने और पटना मेट्रो के विस्तार जैसी घोषणाएं की हैं। शिक्षा और किसानों पर खास फोकस इस बजट में शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग को सबसे अधिक 68,216.95 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं किसानों के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की गई है। इसके तहत केंद्र की पीएम किसान सम्मान निधि के साथ मिलाकर अब किसानों को सालाना 3,000 रुपये मिलेंगे। इससे 75 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने का दावा किया गया है। कल्याण, स्वास्थ्य और उद्योग की बड़ी योजनाएं स्वास्थ्य विभाग के लिए 21,270 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। PMCH में पहले चरण में 1100 बेड तैयार हो चुके हैं और 10 नए जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा हुई है। इसके साथ ही बंद चीनी मिलों को चालू करने, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर पार्क और मेगा टेक सिटी जैसे औद्योगिक प्रोजेक्ट्स का भी ऐलान किया गया है। सदन में सियासी तल्खी भी दिखी बजट पर चर्चा के दौरान सियासी तल्खी भी सामने आई। बीजेपी विधायक भगवान कुशवाहा ने राजद विधायकों पर तीखा हमला बोलते हुए पुराने दौर के नरसंहार और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया। इस बयान से सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया। आज के सत्र पर सबकी नजर राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा, बजट की समीक्षा और NEET मामले पर संभावित हंगामे के चलते आज का सत्र काफी अहम माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विपक्ष के सवालों का कैसे जवाब देती है और सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।

देवघर की शिव बरात में साइबर ठगी के खिलाफ ‘हैकर दैत्य’ झांकी करेगी जागरूक

देवघर. महाशिवरात्रि 15 फरवरी को है। इस माैके पर देवघर में शाम में निकलने वाली शिव बरात में समाज से भटक गयी पीढ़ी को संदेश देने वाली झांकी आपको अपनी ओर खींच लेगी। साइबर अपराध में देवघर पहचान बना रहा है। द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक बाबा बैद्यनाथ की नगरी में महाशिवरात्रि के दिन 32 साल से अदभुत शिव बारात निकलता है। बारात में हर साल आकर्षक झांकी निकलती है। वह किसी ना किसी थीम पर आधारित होती है। साल 2026 के शिव बरात का मुख्य आकर्षण में एक समाज को जागरूक करता हैकर दैत्य होगा। कलाकार ने साइबर क्राइम करने वाले को दानव के तुल्य माना है। जिसकी झांकी तैयार हो रही है। हैकर दैत्य को लैपटाप पर क्राइम करते दर्शाया जाएगा। कलाकार लक्ष्मण राउत बताते हैं कि युवा पीढ़ी में आए भटकाव को रोकने के लिए यह जागरूक करती झांकी होगी। साइबर क्राइम करने वाले समाज में दैत्य की तरह हैं जो किसी की खून-पसीने की कमाई को चट कर जाते हैं। आज बदलते जमाने में साइबर ठगी की घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गयी है। एक से एक तकनीक का इजात कर वह भोले भाले लोगों को मिनटों में ठग लेते हैं। उनकी जीवन भर की गाढ़ी कमाई को उनके बैंक एकाउंट से उड़ा देते हैं। इधर सरकारी रिपोर्ट को देखें तो साइबर ठगी में देवघर तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है। नेशनल क्राइम इंडेक्स की मानें तो साइबर ठगी के मामले में देवघर देश में पांचवें स्थान पर पहुंच चुका है। सुलगता मुंड के माथा से आग और मुंह से निकलेगा धुंआ शिव बरात में निकलने वाली झांकी व साज-सज्जा के अध्यक्ष मार्कण्डेय जजवाड़े बताते हैं कि बरात की हर एक झांकी समाज को संदेश देने वाली होगी। सबसे भयावह और डरावना सुलगता मुंड होगा। जो 12 फीट लंबा और पांच फीट चौड़ा होगा। सुलगता मुंड चारों ओर घूमता रहेगा। जिसके माथा और कान से आग निकलेगा। जबकि वह मुंह खोलेगा तो धुंआ निकलेगा। एक झांकी में यह दिखाया जाएगा कि पिंजरा में एक झूला लगा है और उस पर कंकाल झूल रहा है। यह उन युवाओं को सचेत करेगा जो नशा का सेवन कर रहे हैं। एक समय ऐसा आएगा कि वह इसी तरह एक पिंजरे में बंद होकर बैठे रहेंगे। अंतरिक्ष में शिव की पूजा का एक दृश्य होगा। यह बाबा मंदिर में स्थापित शिवलिंग को केंद्रित कर होगी।  पहली बार महाकाल का विकराल आकार शिव बरात में पहली बार महाकाल का विकराल आकार दिखेगा। यह लाइव होगा। जिसकी तैयारी चल रही है। शिव बारात को 1999 से आकार देने वाले और झांकी को नयी दिशा देने वाले ख्याति प्राप्त कलाकार मार्कण्डेय जजवाड़े बताते हैं कि नारी शक्ति को केंद्रत करती एक झांकी होगी। भारत ने अभी विश्व कप जीता है। समिति के अध्यक्ष अभिषेक आनंद के सुझाव पर नारी शक्ति को खेल में आगे बढ़ाने वाली झांकी होगी। झांकी में नरभक्षिणी को गुड्डा राउत आकार दे रहे हैं। जिसमें नरभक्षिणी बारात में खड़े लोगों पर झपट्टा मारती दिखेगी।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट में रखे जाएंगे एक दर्जन प्रस्ताव

रांची. हजारीबाग जिले के बड़कागांव एवं केरेडारी प्रखंड तथा रामगढ़ जिले के पतरातू क्षेत्र में खनन परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों की समस्याओं को लेकर झारखंड कांग्रेस द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच समिति की गतिविधियों में आंशिक बदलाव किया गया है। एकाएक राज्य कैबिनेट की बैठक आहूत होने के कारण पांच फरवरी को प्रस्तावित कांग्रेस जांच दल का बड़कागांव–केरेडारी दौरा फिलहाल टाल दिया गया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि यह दौरा दो-तीन दिनों के भीतर नई तिथि तय कर किया जाएगा। गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में इससे जुड़ा मुद्दा उठेगा। बुधवार को रांची में झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू और जांच समिति के संयोजक सह मंत्री राधाकृष्ण किशोर की उपस्थिति में एक अहम उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव एवं पूर्व विधायक अंबा प्रसाद भी मौजूद रहे। बैठक में बड़कागांव, केरेडारी और पतरातू क्षेत्र में खनन कंपनियों द्वारा विस्थापितों के कथित शोषण और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीरता से चर्चा की गई। कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने विस्थापन से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं की विस्तृत समीक्षा की और निर्देश दिया कि गठित जांच समिति कांग्रेस मुख्यालय, रांची में गुरुवार को आंतरिक बैठक करे। इस बैठक में विस्थापितों से जुड़े मुद्दों, कानूनी पहलुओं और समाधान के संभावित रास्तों पर चर्चा करते हुए राज्य कैबिनेट में प्रस्ताव रखने की रणनीति तय की जाएगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बृहस्पतिवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र की विस्थापन संबंधी समस्याओं को औपचारिक रूप से रखा जाएगा। कांग्रेस का उद्देश्य है कि मुख्यमंत्री के स्तर पर भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन, विस्थापन आयोग की भूमिका, स्थानीय मजदूरों को एचपीसी नियमों के तहत भुगतान, पतरातू विद्युत निगम लिमिटेड और पतरातू छाई डैम से जुड़े मुद्दों का समग्र समाधान निकाला जा सके। जांच समिति ने जानकारी दी कि कैबिनेट बैठक से संबंधित पत्र मिलने के बाद दौरा स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा। हालांकि मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भरोसा दिलाया कि कैबिनेट में मुद्दे रखने के तुरंत बाद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया जाएगा। इसके पश्चात विस्थापितों की समस्याओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कांग्रेस प्रभारी के. राजू के माध्यम से सरकार को सौंपी जाएगी और त्रिपक्षीय वार्ता के जरिए ठोस निर्णय सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जाएगा।