samacharsecretary.com

नीतीश कुमार का सख्त रुख, पटना-राजगीर रोड प्रोजेक्ट में देरी पर अधिकारियों को चेतावनी

राजगीर. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी (Vijay Kumar Choudhary) मंगलवार को एक दिवसीय दौरे पर नालंदा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सालेपुर-राजगीर निर्माणाधीन सड़क परियोजना के प्रथम खंड का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया और मौके पर मौजूद निर्माण एजेंसी तथा वरीय अधिकारियों को कार्य में तेजी लाकर निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने का निर्देश दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सड़क परियोजना बिहार के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद राजगीर से पटना की दूरी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। लोगों को राजगीर से राजधानी पटना तक का सफर लगभग दो घंटे में तय करने की सुविधा मिलेगी। इस नई सड़क के चालू होने से क्षेत्र के अन्य वैकल्पिक मार्गों पर वाहनों का दबाव भी कम होगा। साथ ही राजगीर का सीधा और बेहतर संपर्क पटना से स्थापित होगा, जिससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री को परियोजना की वर्तमान स्थिति और निर्माण कार्य की प्रगति से अवगत कराया। पूर्व मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता के साथ समय पर कार्य पूरा करने पर विशेष जोर दिया। यह सड़क परियोजना नालंदा और आसपास के क्षेत्रों के लिए विकास की नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाली मानी जा रही है।

मॉनसून सक्रिय, कई जिलों में बारिश की संभावना, पलामू में लू का खतरा

रांची  मॉनसून की रुक-रुक कर बारिश से जहां रांची, मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान 4.7 डिग्री सेल्सियस और चाईबासा का अधिकतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस गिर गया है. वहीं पलामू, गढ़वा और चतरा में 23, 24 और 25 को लू चलने की संभावना व्यक्त की गई है. जबकि झारखंड के अन्य इलाकों में 28 तक जून मेघ गर्जन, वज्रपात और तेज हवा के तक मेघ साथ बारिश होने की संभावना है. वज्रपात से तीन की मौत इस बीच सोमवार को वज्रपात से तीन लोगों की मौत हो गई है. इनमें हजारीबाग जिला अंतर्गत विष्णुगढ़ के नरकी पंचायत स्थित नावाडीह टोला में वज्रपात से गोवर्धन महतो (68 वर्ष) की मौत हो गई वह बकरियों को चराने गए थे. वहीं गढ़वा के मेराल थाना क्षेत्र अंतर्गत विकताम गांव में वज्रपात से महिला ममता कुंवर (53 वर्ष) की मौत हो गई. सिमडेगा जिले के केरसई थाना के भंडारटोली गांव में वज्रपात से 15 वर्षीय किशोरी की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे घायल हो गए. राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश सोमवार को सबसे अधिक चाईबासा (जगन्नाथपुर) में 14 मिमी, सिमडेगा में 10 मिमी, खूंटी में चार मिमी, देवघर और सरायकेला में दो-दो मिमी, बहरागोड़ा में 2.5 मिमी, लोहरदगा में एक मिमी, रांची में छिटपुट बारिश हुई. अधिकतम तापमान की स्थिति     रांची –  28.4     जमशेदपुर – 31.8     मेदिनीनगर – 37.1     बोकारो – 36.1     चाईबासा – 30.8 झारखंड में 60% कम बारिश मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले 24 घंटे में राज्य के कई इलाकों में मॉनसून के सक्रिय होने से अच्छी बारिश हो सकती है. मॉनसून के आने के बाद भी झारखंड में 22 दिनों में 60 प्रतिशत कम बारिश हुई है. 1 जून 2026 से 22 जून 2026 तक सामान्य वर्षापात 112.1 मिमी है, जबकि इस दौरान वास्तविक वर्षापात 44.7 मिमी हुई है. रांची में सामान्य से दो मिमी अधिक बारिश हो गयी है. वहीं 23 जिलों सामान्य से कम बारिश हुई है. गढ़वा में में 99% कम बारिश हुई है. रांची में सामान्य वर्षापात 115.6 मिमी है, है, जबकि इस दौरान 118.2 मिमी बारिश हो गई है.

कॉपी दोबारा जांची गई तो मिले पूरे 500 नंबर, रांची की अवनी केजरीवाल ने रचा इतिहास

रांची  CBSE 12वीं री-इवैल्यूएशन का रिजल्ट जारी कर दिया गया है. जब री-इवैल्यूएशन प्रोसेस के दौरान दोबारा कॉपी चेक हुई तो, रांची की अवनी केजरीवाल ने 100 प्रतिशत नंबर हासिल कर लिए. 13 मई को जारी किए गए बोर्ड रिजल्ट में अवनी को कम नंबर मिले थे लेकिन अब जब दोबारा से कॉपी चेक हुई तो, उन्होंने टॉप कर दिया. अवनी को अंग्रेजी कोर, अकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडीज, इकोनॉमिक्स और एप्लाइड मैथेमेटिक्स में शत-प्रतिशत अंक मिले हैं. वहीं, अतिरिक्त विषय ग्राफिक्स में उन्होंने 99 अंक हासिल किए हैं।  आगे बिजनेस मैंनेजमेंट के क्षेत्र में बनाना चाहती हैं करियर  अवनी के पिता मितेश केजरीवाल व्यवसायी हैं जबकि मां पूनम केजरीवाल गृहिणी हैं. अवनी आगे बिजनेस मैनेजमेंट के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं और इसके लिए सीयूईटी-यूजी 2026 की परीक्षा भी दे चुकी हैं. अपनी सफलता पर अवनी ने कहा कि उन्हें अपनी मेहनत और प्रदर्शन पर पूरा भरोसा था, इसलिए उन्होंने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया. उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और अपने मेंटर सचित सर को दिया है. अवनी की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार और स्कूल के लिए गर्व का विषय है, बल्कि झारखंड के हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा भी बन गई है।  पहले आए थे 94 फीसदी  बता दें कि जब अवनी का 13 मई को रिजल्ट आया था तो, उन्हें 94 प्रतिशत मिले थे लेकिन वह अपने नंबरों से खुश नहीं थीं. उन्हें अपनी मेहनत पर पूरा यकीन था इसलिए उन्होंने दोबारा से री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया था. अब जब रिजल्ट आया है तो उन्हें बेहद खुशी है।  मिले 500 में से 500 नंबर  दोबारा कॉपी चेकिंग के बाद जब 21 जून को रिजल्ट आया तो, अवनी ने 500 में से 500 नंबर हासिल किए. 21 जून के 87 प्रतिशत से अधिक छात्रों के परिणाम घोषित हुए हैं. अवनी की ये सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व का पल है। 

छात्र संख्या के आधार पर बिहार के विद्यालयों में तय होंगे शिक्षकों के पद

पटना बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने राज्य के स्कूलों में टीचरों की न्यूनतम संख्या तय कर दी है। शिक्षा विभाग की तरफ से कहा गया है कि पहली से पांचवीं तक के क्लास में 60 छात्रों पर 2 शिक्षकों का होना जरूरी है तो वहीं 61 से 90 छात्रों पर 3 टीचरों का स्कूल में होना अनिवार्य है। बिहार के सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों की न्यूनतम संख्या कर दी गई है। वास्तविक नामांकन, कक्षा संरचना और विषयगत आवश्यकता के आधार पर इनकी संख्या तय की जाएगी। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार समीक्षा में पाया गया है कि राज्य के अनेक विद्यालयों में निर्धारित मानक के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध नहीं है। कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है। ऐसे में पूरे राज्य में शिक्षकों के युक्तिकरण और संतुलित वितरण के लिए नया मानक तैयार किया गया है। आदेश में अहम प्रवाधान किए गए हैं कि पहली से आठवीं तक संचालित विद्यालयों में शिक्षक आवश्यकता निर्धारण के लिए कक्षा 1-5 और कक्षा 6-8 को अलग-अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा। हालांकि, विद्यालय में एक ही प्रधानाध्यापक होंगे। छठी से आठवीं तक छठी से आठवीं तक के लिए प्रत्येक विद्यालय में कम से कम एक-एक शिक्षक विज्ञापन एवं गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा (सामान्यत: हिंदी) में होंगे। 105 से 140 छात्रों के बीच नामांकन होने पर चौथ शिक्षक अंग्रेजी विषय का होगा। जबकि 140 से 175 छात्रों के बीच नामांकन होने पर पांचवां शिक्षक संस्कृत या उर्दू का होगा। इसी तरह 175 से अधिक छात्रों पर आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त शिक्षक दिए जाएंगे। पहली से पांचवी तक के छात्र और शिक्षकों की संख्या कुछ इस तरह निर्धारित की गई है। 61 से 90 – 2 91 से 120 – 4 121 से 150 – 5 150 से अधिक – 5 शिक्षक, 1 प्रधान 150 से अधिक छात्रों वाले विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:30 से अधिक नहीं होगा। शिक्षा विभाग के छह अफसरों पर वित्तीय गड़बड़ियों में गाज वित्तीय अनियमितता और लापरवाही के आरोप में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सोमवार को छह अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है। अधिकारियों में से कुछ की वेतन-पेंशन से कटौती और वेतन वृद्धि पर रोक की भी अनुशंसा की गई है। यह आदेश 8 मई 2026 से प्रभावी होगा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि बांका के पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) पवन कुमार पर लापरवाही का आरोप है। वे अभी पूर्वी चंपारण के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी हैं। भोजपुर के पूर्व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मो. इरशाद अंसारी को वित्तीय अनियमितता में बर्खास्त करने की अनुशंसा की गई है। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पूर्व सचिव राजेश कुमार पर लापरवाही का आरोप है। शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी में सुपौल के पूर्व डीईओ रामाशीष महतो पर कार्रवाई की गई है। बांका के पूर्व डीईओ रह चुके देवेन्द्र कुमार झा पर भी वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं। मधुबनी के मधेपुर की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मरजीना खातून को विद्यालय परित्याग प्रमाणपत्र पर प्रतिहस्ताक्षर के लिए अवैध राशि लेने के आरोप हैं।

मॉडल स्कूलों में नौवीं से शुरू होगी डॉक्टर और इंजीनियर बनने की तैयारी

पटना बिहारी प्रतिभा अब उच्च विद्यालयों में ही तराशे जाएंगे। राज्य की सम्राट चौधरी सरकार ने अपने प्रतिभावान बच्चों को मैट्रिक के पहले नौवीं कक्षा से ही करियर चुनने का अवसर उपलब्ध कराएगी। सरकार का प्लान है कि स्कूलों में इसके लिए स्पेशल क्लास कराए जाएं ताकि वो (छात्र) डॉक्टर बनना या इंजीनियर, यह तय कर सकेंगे। राज्य सरकार ने इसकी तैयारी कर ली है। जानकरी के मुताबिक, फिलहाल राज्य के मॉडल स्कूलों से इसका प्रारंभिक प्रयोग प्रारंभ होगा। प्रयोग सफल होने पर आगे इसका विस्तार किया जाएगा। शिक्षा विभाग मॉडल स्कूल को बच्चों की प्रतिभा निखारने का प्लेटफॉर्म बनाना चाहता है। विभाग ने कक्षा 9वीं से ही इच्छुक बच्चों को मनपसंद करियर चुनने और इसके लिए विशेष अध्ययन की व्यवस्था करने की योजना बनाई है। उन्हें 9वीं से ही मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए सुविधा मिलेगी। उनके लिए न केवल विशेष कक्षाएं चलेंगी, बल्कि हर तरह की शैक्षणिक मदद की जाएगी। सम्राट चौधरी के नए फैसले के तहत वे नियमित वर्ग के बाद मेडिकल या इंजीनियरिंग की तैयारी की बुनियादी पढ़ाई कर सकेंगे। सामान्यत: मैट्रिक के बाद यानी 11वीं में बच्चे तय करते हैं कि उन्हें विज्ञान, कला या फिर वाणिज्य की दिशा में आगे बढ़ना है। अगर विज्ञान का चयन करते हैं तो इसमें भी दो विकल्प गणित या जीव विज्ञान का रहता है। इन दोनों से मेडिकल या इंजीनियरिंग का कॅरियर चुन पाते हैं। अब सरकार ने मॉडल स्कूल के जरिये बच्चों को 9वीं में ही तैयार करने की योजना बनायी है। विभाग के मुताबिक, इस सुविधा से बच्चों को कॅरियर बनाने में काफी मदद मिलेगी। बिहार सरकार ने सात निश्चय-तीन के तहत राज्य के सभी 534 प्रखंडों में एक-एक अत्याधुनिक मॉडल स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। यह सरस्वती विद्या निकेतन के नाम से जाना जाएगा। इन स्कूलों में कॉन्वेंट से बेहतर विश्वस्तरीय शिक्षा और सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इन उच्च विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई होगी। कक्षा 9 में नामांकन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से मेरिट लिस्ट के आधार पर होगा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस संबंध में कहा कि हम मॉडल स्कूल को सही मायने में बेहतर शैक्षणिक केन्द्र बनाना चाहते हैं। हमारा लक्ष्य है कि बच्चों को वहां न केवल उन्नत शिक्षा और अन्य सारी सुविधा मिले, बल्कि उन्हें बेहतर कॅरियर चुनने में भी मदद मिले। जाहिर है सरकार के इस फैसले से बिहार में छात्रों को बड़ा फायदा पहुंचेगा। छात्र अपने भविष्य को लेकर नए सिरे से तैयारी कर सकते हैं।

गन्ना किसानों के लिए बड़ी सौगात: बिहार में बढ़ेगा निवेश, रोजगार और चीनी उत्पादन

पटना बिहार के लोगों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में गन्ना आधारित उद्योगों के विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य की बंद पड़ी नौ चीनी मिलों के पुनर्जीवन और 25 नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें। मुख्यमंत्री ने सोमवार को लोक सेवक आवास में गन्ना उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक की और राज्य में चीनी उद्योग के पुनरुद्धार, निवेश को बढ़ावा देने तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकारियों को निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रैयाम, सकरी, सासामुसा, मधौरा, मोतीपुर, समस्तीपुर, चकिया, चनपटिया एवं मोतिहारी सहित बंद चीनी मिलों वाले क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए तेजी से काम करें। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि चंपारण को देश के प्रमुख गन्ना उत्पादन क्षेत्रों में विकसित करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर तेजी से काम करपे की जरूरत है। गन्ना उत्पादन बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार लाने तथा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठायें। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक-से-अधिक निवेश आकर्षित करने, निवेशकों को प्रोत्साहित करने तथा चीनी उद्योग के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान देना होगा। राज्य सरकार किसानों की समृद्धि, औद्योगिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार, आदि उपस्थित थे। हाजीपुर में आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगेगी औद्योगिक क्षेत्र गोरौल फेज-1 हाजीपुर में अत्याधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित होगी। लगभग 17 करोड़ 25 लाख के निवेश से विकसित होने वाली इस परियोजना से 200 लोगों को रोजगार का मौका मिलेगा। बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार की परियोजना समाशोधन समिति की बैठक में खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की स्वीकृति दी गई। उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में आवेदकों को राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि एवं प्लग एंड प्ले शेड्स आवंटित करने के प्रस्तावों को स्वीकृत किया गया। प्रस्तावित इकाई 2 एकड़ क्षेत्र में स्थापित की होगी। यहां कुरकुरे, पफ्स एवं अन्य रेडी-टू-ईट स्नैक उत्पादों का निर्माण होगा। उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि इस प्रकार की परियोजनाएं संसाधनों के बेहतर उपयोग, रोजगार सृजन तथा खाद्य विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार हैं। बिहार को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए सरकार निवेशकों को हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है।

राष्ट्रपति भवन में शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान, परिवार ग्रहण करेगा

रांची  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित अलंकरण समारोह में दिशाेम गुरू शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान प्रदान करेंगी। उनकी पत्नी रूपी सोरेन यह सम्मान ग्रहण करेंगी। रूपी सोरेन अस्वस्थ हैं, फिर भी वह सम्मान लेने दिल्ली गई हैं। विधायक कल्पना सोरेन सोमवार को अपनी सास को लेकर दिल्ली गईं। अलंकरण समारोह में परिवार के अन्य सदस्य भी हो सम्मिलित हो सकते हैं। राज्य गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले शिबू सोरेन को देश का यह तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना झारखंड के लिए गौरव की बात है। उन्हें यह मरणोपरांत सम्मान लोक कल्याण और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण के लिए उनके आजीवन संघर्ष और योगदान को देखते हुए प्रदान किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने इसी वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने उन्हें यह सम्मान देने की घोषणा की थी। नशा छोड़ो, खेती करो, मुर्गी-बत्तख पालन करो और शिक्षा को गले लगाओ झारखंड के नायक दिशोम गुरू शिबू सोरेन नशे को विनाश का कारण मानते थे। उनके अधिसंख्य भाषण नशा छोड़ने, खेती तथा मुर्गी-बत्तख पालन करने तथा शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहते थे। नशे के खिलाफ उनकी कट्टर सोच, शिक्षा के प्रति प्रबल समर्थन और खेती-पशुपालन से आत्मनिर्भरता की उनकी अपील ने लाखों आदिवासियों का प्रेरणा स्रोत बन गया। उनके भाषणों ने लाखों आदिवासियों के जीवन की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। तभी तो उनका पूरा जीवन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष का पर्याय रहा। गुरूजी हमेशा कहते थे कि नशा आदिवासी समाज को खोखला कर रहा है। यह हमें कमजोर बनाता है, हमारी जमीन और सम्मान छीनता है। वे अपनी सभाओं में हमेशा कहते थे कि नौकरी के पीछे मत भागो। पशुपालन करो। उनका कहना था कि आदिवासी समाज की असली ताकत उसकी जमीन, संस्कृति और मेहनत है। झारखंड के कई गांवों में उनके अनुयायी आज भी खेती और पशुपालन को अपनाकर उनके बताए रास्तों पर चल रहे हैं। शिक्षा के संबंध में उनका कहना था कि शिक्षा ही वह चाबी है, जो आदिवासियों को शोषण से मुक्ति दिला सकती है। … जब उनकी अंत्येष्ठि में उमड़ा जनसैलाब, मिट गया था आम और खास का भेद दिशोम गुरू शिबू सोरेन की लोकप्रियता का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि उनकी अंत्येष्टि के मौके पर नेमरा में पूरा जनसैलाब उमड़ पड़ा था। क्या आम और क्या खास, लाखों लोग वहां पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने नम आंखों से उन्हें “अंतिम जोहार” किया था। पूरे झारखंड समेत पड़ोसी राज्यों से लोग अपने प्रियनेता को विदाई देने पहुंचे थे। माटी पुत्र को विदाई देते समय प्रकृृति भी रो पड़ी थी। लोग अपने प्रिय नेता की एक झलक पाने को उतावला दिखे।

टेट अनिवार्यता पर झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, विशेष परीक्षा की मांग कर रहे शिक्षक

 रांची  शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) अनिवार्य किए जाने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सामान्य अभ्यर्थियों के लिए आयोजित होनेवाली झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में ही कार्यरत शिक्षकों को भी सम्मिलित करने का निर्णय लिया है। विभाग ने बकायदा इसके निर्देश झारखंड एकेडमिक काउंसिल को दिए हैं, लेकिन कार्यरत शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश लागू ही करना है तो कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा पृथक रूप से आयोजित हो। शिक्षकों ने तमिलनाडु तथा उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला भी दिया है, जहां न्यायालय के आदेश आने के बाद कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष पात्रता परीक्षा आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। तमिलनाडु में जहां इसपर निर्णय लिया जा चुका है, जबकि उत्तर प्रदेश में इसे लेकर रिपोर्ट मांगी गई है कि कितने शिक्षक यह परीक्षा उत्तीर्ण हैं तथा कितने को यह परीक्षा उत्तीर्ण होना बाकी है। इसे लेकर जारी पत्र में कहा गया कि सरकार कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष पात्रता परीक्षा आयोजित करने पर विचार कर रही है। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव राममूर्ति ठाकुर के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में सभी राज्यों से कार्यरत शिक्षकों के लिए वर्ष में दो शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने को कहा है। दूसरी तरफ, झारखंड में सामान्य अभ्यर्थियों के लिए हो रही परीक्षा में ही शामिल करने का निर्णय लिया गया है जो उचित नहीं है। इधर, अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ सहित कई अन्य संघ सर्वोच्च न्यायालय में क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने की भी तैयारी कर रहे हैं बताते चलें कि न्यायालय ने कक्षा एक से आठ के उन शिक्षकों के लिए भी यह पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया है जो आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त हैं। हालांकि शिक्षक नियुक्त होने के लिए पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का प्रविधान आरटीई में ही किया गया है।

फसल नुकसान झेल रहे किसानों को सरकार का तोहफा, 13 जिलों में कृषि इनपुट अनुदान जारी

पटना खेतों में लगी फसल की क्षति के बाद मुआवजे के इंतजार कर रहे बिहार के किसानों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री मंत्री सम्राट चौधरी ने इन किसानों को फसल क्षति की राशि सीधे उनके खाते में भेज दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को 13 जिलों के 3.96 लाख किसानों के खाते में 200 करोड़ की अनुदान राशि हस्तांतरित की है। यह राशि फसल क्षति के लिए कृषि इनपुट अनुदान के रूप में दी गई है। लोक सेवक आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि है आगे भी जिन किसानों के आवेदन आए हैं, उन्हें कृष इनपुट अनुदान की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है की डबल इंजन की सरकार बिहार के किसानों के लाभ के लिए काम कर रही है। आपको बता दें कि हाल ही में बिहार समेत देश भर के करोड़ों किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त आई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून को करीब साढ़े नौ लाख किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। अब आज बिहार के किसानों को फसल क्षति अनुदान सीएम सम्राट चौधरी ने ट्रांसफर किया है। दरअसल 2025-26 के दौरान जिन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा था। उन्हीं किसानों को सरकार द्वारा यह जरूरी मदद दी जा रही है। मार्च के तीसरे और चौथे हफ्ते में अचानक आंधी-तूफान और बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि से रबी की फसल को बिहार में काफी नुकसान पहुंचा था। जिन किसानों के फसल का नुकसान हुआ है सीएम ने उनके खाते में मुआवजे की राशि भेजी है। आपको बता दें कि कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत सरकार आंधी, बारिश या सूखाड़ समेत अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों के फसल का नुकसान होने पर उन्हें मुआवजा देती है। यह योजना करीब 2 हेक्टेयर भूमि में हुए फसल के नुकसान तक के लिए मान्य है। कृषि इनपुट अनुदान योजना में कितनी राशि मिलती है आपको यहां बता दें कि इस योजना के तहत सरकार ने न्यूनतम सहायता राशि भी तय कर दी है। इसके तहत असिंचित क्षेत्र के लिए कम से कम 1,000 रुपये, सिंचित क्षेत्र के लिए 2,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए न्यूनतम 2,500 रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसकी एक खास बात यह भी है कि इस योजना का लाभ सिर्फ भू-स्वामी किसान ही नहीं बल्कि रैयत और गैर रैयत (बटाईदार या पट्टे पर खेती करने वाले) किसान भी ले सकते हैं।

रांची में एचईसी की संपत्ति पर अतिक्रमण, हजारों एकड़ जमीन पर निगरानी पर सवाल

रांची हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) की जमीन अब अवैध निर्माण और किराये के कारोबार का अड्डा बनती जा रही है। कंपनी की खाली पड़ी जमीन पर कब्जा कर कई लोगों ने पक्के मकान, दुकान और छोटे-छोटे व्यावसायिक परिसर तक खड़े कर दिए हैं। स्थिति यह है कि जमीन कंपनी की, संसाधन कंपनी के और कमाई किसी और की हो रही है। एचईसी के आवासीय और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं, जहां लोग बिना किसी वैध अधिकार के कंपनी की जमीन पर निर्माण कर उसे किराये पर देकर हर माह हजारों रुपये कमा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की बताई जा रही है जिनका एचईसी से प्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है। कई लोग वर्षों पहले रोजगार की तलाश में रांची आए थे और धीरे-धीरे खाली जमीन पर कब्जा कर स्थायी निवासी बन गए। किराये से लाखों की कमाई, कंपनी को नुकसान स्थानीय लोगों के अनुसार, कई अवैध कब्जाधारियों ने एक से अधिक कमरे बनाकर किराये पर दे रखे हैं। कुछ जगहों पर दुकानें, गोदाम और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी संचालित हो रहे हैं। ऐसे निर्माणों से कब्जाधारियों को हर माह हजारों रुपये की आमदनी हो रही है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कई मामलों में अवैध निर्माण करने वाले लोग खुद उस परिसर में नहीं रहते। उन्होंने कंपनी की जमीन पर मकान या दुकान बनाकर किराये पर दे दिया है और दूसरे स्थानों पर रहने लगे हैं। यानी एचईसी की संपत्ति निजी आय का साधन बन गई है। बिजली-पानी का भी हो रहा दुरुपयोग अवैध निर्माण के साथ-साथ बिजली और पानी के कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कई अवैध बस्तियों और निर्माण स्थलों पर कंपनी के संसाधनों का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कई जगह बिना अनुमति पानी और बिजली की व्यवस्था कर ली गई है। जानकारों का कहना है कि किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान की जमीन पर अवैध कब्जा सिर्फ जमीन का मामला नहीं होता, बल्कि इससे सुरक्षा, भविष्य की विकास योजनाओं और कंपनी की संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। हजारों एकड़ जमीन की सुरक्षा चुनौती एचईसी की स्थापना के समय कंपनी को बड़े क्षेत्रफल में जमीन उपलब्ध कराई गई थी। कंपनी के पास करीब हजारों एकड़ जमीन का बड़ा भू-भाग रहा है, जिसमें फैक्ट्री परिसर, आवासीय क्षेत्र और खाली जमीन शामिल हैं। समय के साथ आर्थिक संकट और निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण कई क्षेत्रों में अतिक्रमण बढ़ता गया। कंपनी के आवासीय परिसर में हजारों क्वार्टर हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीनों पर धीरे-धीरे अवैध बस्तियां विकसित हो गईं। कुछ स्थानों पर तो स्थायी बाजार और बहुमंजिली निर्माण तक हो चुके हैं। नगर प्रशासन विभाग पर भी सवाल अवैध निर्माण को लेकर एचईसी नगर प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के कारण कब्जाधारियों के हौसले बढ़ते गए। कुछ मामलों में विभागीय स्तर पर जांच भी चल रही है। हालांकि कंपनी प्रबंधन समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता रहा है, लेकिन जमीन की निगरानी और अवैध निर्माण रोकना बड़ी चुनौती बना हुआ है। कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगा संकट एचईसी की जमीन पर बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर अब ठोस नीति की जरूरत महसूस की जा रही है। कंपनी की संपत्ति की पहचान, सीमांकन, डिजिटल रिकॉर्ड और नियमित निगरानी के बिना अतिक्रमण रोकना मुश्किल होगा। एचईसी की जमीन भविष्य की औद्योगिक गतिविधियों और पुनरुद्धार योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में जमीन को अवैध कब्जे और निजी कमाई के साधन से बचाना कंपनी के अस्तित्व और भविष्य दोनों के लिए जरूरी है।