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कोयल नदी पुल की मरम्मत पूरी होने से यात्रियों को मिली बड़ी राहत

रांची रांची-लोहरदगा रेललाइन पर शनिवार से परिचालन सामान्य हो जाएगा। पहली ट्रेन रांची-लोहरदगा-टोरी पैसेंजर सुबह 5.15 बजे रवाना होगी। शुक्रवार को इस लाइन में लाइट इंजन ट्रेन चलाई गई। गौरतलब है कि रांची रेल मंडल के रांची-लोहरदगा-टोरी खंड पर नागजुआ व लोहरदगा स्टेशनों के मध्य कोयल नदी पर स्थित क्षतिग्रस्त पुल संख्या-115 की मरम्मत चल रही थी। इस कारण इरगांव से लोहरदगा के बीच ट्रेनों का परिचालन बंद था। हजारों यात्रियों को हो रही थी दिक्कत इस मार्ग के बाधित रहने से कई ट्रेनों को बदले मार्ग से चलाया जा रहा था। वहीं पुलिया में दरार की सूचना के बाद कुछ ट्रेनों को आंशिक समापन के जरिए भी चलाया गया था। इससे इस रूट में सफर करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना भी करना पड़ा रहा था। रेलवे ने की थी वैकल्पिक व्यवस्था वहीं, रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस तय मार्ग टोरी-लोहरदगा-रांची के स्थान पर टोरी-बरकाकाना-मेसरा-टाटीसिलवे-रांची होकर चल रही थी। रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के अलावा रांची-चोपन-रांची एक्सप्रेस, सासाराम-रांची-सासाराम एक्सप्रेस व अजमेर-सांतरागाछी-अजमेर एक्सप्रेस भी परिवर्तित मार्ग से चल रही थी। आस-पास के इलाकों के लिए है लाइफलाइन बता दें कि रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड लोहरदगा और आसपास के इलाकों के लिए लाइफलाइन माना जाता है। पुलिया में दरार की वजह से इस मार्ग से जनवरी से परिचालन ठप था। इस रूट पर चलने वाली लोहरदगा-रांची और रांची-लोहरदगा मेमू पैसेंजर ट्रेनों से हर दिन लगभग आठ हजार यात्री सफर करते हैं। इसके अलावे सासाराम एक्सप्रेस और राजधानी का लाभ यात्रियों को मिलता है। ट्रेन परिचालन ठप होने के बाद इन यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अचानक ट्रेन रुकने की सूचना मिलते ही लोहरदगा स्टेशन और आसपास के इलाकों में यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया। मजबूरी में लोग बसों और अन्य निजी वाहनों की ओर दौड़ पड़े, जिससे बस स्टैंड और सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ी। लोहरदगा रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा पसर गया।

झारखंड में 103 प्रशासनिक पदों पर भर्ती के लिए जेपीएससी ने जारी किया नोटिस जानें परीक्षा का नया शेड्यूल

 झारखंड झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) ने स्टेट पीसीएस प्रीलिम्स परीक्षा 2026 की नई तारीख घोषित कर दी है. इस परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले हजारों उम्मीदवार काफी समय से एग्जाम डेट (JPSC Pre Exam Date) का इंतजार कर रहे थे. अब उनका इंतजार खत्म हो गया है. आयोग की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक JPSC प्रीलिम्स परीक्षा अब 19 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी. इससे पहले परीक्षा की तारीख 12 अप्रैल तय की गई थी, लेकिन बाद में इसे बदलकर नई तारीख घोषित कर दी गई. JPSC Pre Exam से 103 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के जरिए झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 103 पदों को भरा जाएगा. इसमें कई अहम प्रशासनिक पद शामिल हैं. डिप्टी कलेक्टर के 28 पद, डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस यानी DSP के 42 पद और डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर के 2 पद शामिल हैं. इसके अलावा असिस्टेंट रजिस्ट्रार के 2 पद, असिस्टेंट म्यूनिसिपल कमिश्नर या एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के 10 पद और जेल सुपरिटेंडेंट के 2 पद भी इस भर्ती में शामिल हैं. साथ ही असिस्टेंट डायरेक्टर-कम-डिस्ट्रिक्ट पब्लिक रिलेशन ऑफिसर के 10 पद, प्रोबेशन ऑफिसर के 4 पद और असिस्टेंट डायरेक्टर के 3 पद भी भरे जाएंगे. चयन प्रक्रिया JPSC PCS भर्ती प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले उम्मीदवारों को प्रीलिम्स परीक्षा देनी होती है. जो उम्मीदवार इस चरण में सफल होते हैं, उन्हें मेन्स परीक्षा के लिए बुलाया जाता है. इसके बाद मेन्स में सफल उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है. इन तीनों चरणों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों का फाइनल सेलेक्शन किया जाता है. इसके बाद उन्हें झारखंड राज्य की अलग-अलग प्रशासनिक सेवाओं में नियुक्ति दी जाती है.

राजधानी रांची में पीएनजी सप्लाई की रफ्तार हुई धीमी 78 हजार घरों में ढांचा तैयार पर हजारों उपभोक्ता अब भी परेशान

रांची झारखंड की राजधानी रांची के कई इलाकों में पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) की पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन हजारों उपभोक्ता आज भी कनेक्शन के इंतजार में हैं. कहीं तकनीकी बाधाएं हैं, तो कहीं मैनपावर की कमी है. शहर में अब तक लगभग 78,000 घरों के लिए घरेलू पीएनजी (डीपीएनजी) का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है. इनमें से कुल 54,000 घरों में पीएनजी पहुंचाना अभी बाकी है. अलग-अलग विभागों से अनुमति नहीं मिलने के कारण गैस पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं. कई घरों के किचन में पाइपलाइन लग चुकी है, लेकिन गैस सप्लाई नहीं होने से कनेक्शन चालू नहीं हो पा रहा है. किचन तक पहुंची पाइपलाइन, पर गैस नहीं रांची के सुरेंद्रनाथ सेंटेनरी स्कूल के सामने हेरिटेज गार्डन निवासी कुमुद झा बताती हैं कि तीन साल से अधिक समय हो गए हैं. किचन तक पाइपलाइन लग चुकी है. मुख्य सड़कों तक भी पाइपलाइन बिछ गई है, लेकिन अब तक गैस सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है. 24,000 घरों में गैस आपूर्ति शुरू खबर यह भी है कि पेट्रोलियम कंपनी गेल ने रांची शहर में लगभग 24,000 घरों तक गैस आपूर्ति शुरू कर दी है. इनमें लगभग 18,000 उपभोक्ता ही पीएनजी का नियमित इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं, 6,000 घरों में उपभोक्ताओं ने अब तक पीएनजी चालू नहीं कराया है. इनमें कई लोग किरायेदार हैं, तो कई लोग इन घरों में नहीं रह रहे हैं. रोजाना दिए जा रहे 60-75 घरेलू पीएनजी कनेक्शन इस समय रांची में रोजाना औसतन लगभग 60-75 घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए जा रहे हैं. पिछले 15 दिनों में लगभग 900 घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं. वहीं, हर दिन औसतन लगभग 100 नए उपभोक्ता रजिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा कर रहे हैं. कनेक्शन देने के लिए 20 एजेंसियों को लगाया गया है, लेकिन काम की गति धीमी है. इनसे हर दिन लगभग 60-75 कनेक्शन हो पा रहे हैं, जबकि लक्ष्य हर दिन 200-300 कनेक्शन देने का है. इसके लिए लगभग 150 लोगों की जरूरत है. सेल सिटी में 1808 फ्लैट, लेकिन पीएनजी कनेक्शन नहीं रांची की सेल सिटी में रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी है. यहां कुल 1808 फ्लैट हैं, लेकिन अब तक पीएनजी कनेक्शन की सुविधा नहीं है. इसी तरह बोड़ेया रोड स्थित बैंक कॉलोनी के एसोटेक हिल्स के कई फ्लैटों में भी यह सुविधा शुरू नहीं हुई है. इन इलाकों में अधूरा है पीएनजी कनेक्शन रांची में पुलिस लाइन कांके, लालपुर, टाटीसिल्वे, किशोरगंज, कांटाटोली से बूटी मोड़ रोड, बोड़ेया रोड सहित कई इलाकों में पीएनजी कनेक्शन अधूरा है. इन इलाकों में पीएनजी चालू होने से कनेक्शन की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो सकती है. कई क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क चार्ज गेल अधिकारियों ने बताया कि रांची के कई क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क चार्ज किया जा चुका है. इनमें बरियातू, हरमू, अशोक नगर, मेकन कॉलोनी, अरगोड़ा, पुंदाग, हटिया, धुर्वा, तुपुदाना, पटेल नगर, प्रेम नगर, दिनकर नगर, नामकुम, अमेठिया नगर, खेलगांव, टाटीसिल्वे, चायबागान, काली नगर, खरसीदाग और कांके शामिल हैं. लालपुर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भी गैस आपूर्ति शुरू हो चुकी है. बाकी क्षेत्रों में कार्य प्रगति पर है. कटहल मोड़ से अरगोड़ा तक, चेशायर होम रोड में कई अपार्टमेंट हैं. किरायेदार होने या अपार्टमेंट खाली होने के कारण कनेक्शन नहीं हो पा रहा है, जबकि इन इलाकों में पीएनजी सप्लाई चालू है. रजिस्ट्रेशन के समय सिक्योरिटी डिपॉजिट जरूरी घरेलू पीएनजी कनेक्शन का रजिस्ट्रेशन कराते समय केवल 500 रुपये या 4500 रुपये (विभिन्न योजनाओं के अनुसार) का सिक्योरिटी डिपॉजिट देना होता है. यह भुगतान ऑनलाइन, पीओएस मशीन या चेक से किया जा सकता है. गेल नकद भुगतान स्वीकार नहीं करता है. यदि कोई नकद मांग करता है, तो उपभोक्ता टोल फ्री नंबर 1800123121111 पर संपर्क कर सकते हैं. कई क्षेत्रों में पाइपलाइन के लिए अनुमति मिली गेल को फिरायालाल चौक, सुजाता चौक से सिरमटोली होते हुए स्टेशन रोड, जेल मोड़ से लालपुर चौक तक और करमटोली चौक से जेल मोड़ तक पाइपलाइन बिछाने की पथ निर्माण विभाग से अनुमति मिली है. इस क्षेत्र में काम होने से 10 हजार से अधिक लोगों को कनेक्शन मिल सकेगा. रातू रोड तक पीएनजी पहुंच चुका है, लेकिन बजरा, पिस्का मोड़, पंडरा और कमड़े तक पाइपलाइन पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं. गेल झिरी रिंग रोड के पीछे-पीछे पाइपलाइन बिछाने पर विचार कर रहा है.

मेदिनीनगर और गिरिडीह में निकली भव्य शोभायात्रा जैन समाज ने दिया जियो और जीने दो का संदेश

पलामू झारखंड के पलामू जिले के मेदिनीनगर और गिरीडीह जिले में जैन समाज ने 24वें तीर्थकंर भगवान महावीर की जयंती को हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया. महावीर जयंती के मौके पर मेदिनीनगर और गिरिडीह में जैन समाज द्वारा शोभा यात्राएं निकाली गईं. शोभायात्रा में जैन समाज के महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए. मेदिनीनगर में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई महावीर जयंती मेदिनीनगर में भगवान महावीर ने अनुयायियों ने सुबह में जैन मंदिर में विधि विधान से पूजा अर्चना किया. सजे हुए रथ पर भगवान महावीर को विराजमान किया गया. इसके बाद बाजे गाजे के साथ शोभायात्रा शुरू हुआ. मुख्य अतिथि नगर निगम की मेयर अरुणा शंकर ने भगवान महावीर की पूजा आरती करने के बाद शोभा यात्रा रवाना किया. मेयर ने भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपनाने की जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि उनके बताए रास्ते पर चलने से ही समाज में बेहतर वातावरण तैयार होगा और मानव जीवन का कल्याण होगा. शोभायात्रा जैन मंदिर से निकलकर शहर थाना रोड, गीता भवन, शहीद भगत सिंह चौक, सतार सेठ चौक सहित और निर्धारित रास्तों से होते हुए वापस हुआ. शोभायात्रा के पूरे होने के बाद भगवान महावीर की पूजा आरती की गई. शोभायात्रा के दौरान अनुयायियों ने भगवान महावीर के सिद्धांतों और संदेशों को बताया. कार्यक्रम में वार्ड पार्षद रौशन कुमार, जैन समाज के सरस जैन, सुभाष जैन, मनोज पहाड़िया, सुभाष चंद्र जैन, रोहित जैन सहित काफी संख्या में अनुयायी शामिल रहे. गिरिडीह में गाजे-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा गिरिडीह में भी महावीर जयंती के अवसर पर जैन समाज के लोगों ने शोभायात्रा निकाली. बड़ा चौक स्थित दिगंबर जैन मंदिर से शोभायात्रा की शुरुआत हुई. गाजे-बाजे के साथ भगवान महावरी को पालकी पर बैठाकर शोभा यात्रा निकाली. यह शोभा यात्रा शहर के टुंडी रोड, गद्दी मोहल्ला होते हुए वापस जैन मंदिर में समाप्त हुई. शोभा यात्रा के दौरान भगवान महावीर के जयकारे से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा. शोभा यात्रा के दौरान जैन समाज के लोगों ने कहा कि भगवान महावीर ने पृथ्वी पर सभी मनुष्यों को जियो और जीने दो का उपदेश दिया है. उन्होनें कहा कि विश्व कल्याण के लिए 24वें तीर्थकंर भगवान महावीर ने जन्म लिया था. महावीर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने में विजय सेठी अध्यक्ष ,अशोक पांड्या,अजय सेठी, अजय जैन, धीरज जैन, राजन जैन, राकेश जैन, सरोज सेठी, हेमलता सेठी और अन्य ने भूमिका निभाई.

बिहार में CM पद को लेकर बयानबाजी तेज, पप्पू यादव ने रखी अपनी पसंद

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के MLA पद से इस्तीफे के बाद बिहार में सियासत तेज हो गई है और नए सीएम के नामों को लेकर अटकलें लगना शुरू हो गई हैं। इस बीच पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बड़ी डिमांड कर दी है। पप्पू यादव का कहना है कि बिहार का सीएम नीतीश कुमार को ही होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो नया चेहरा जेडीयू का ही हो। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार नैतिक मूल्यों से चलते हैं। उनका विचार गांधी और कर्पूरी के विचार हैं। जिस प्रकार के नीतीश कुमार को घेरा गया, वह गलत है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को बिहार नहीं छोड़ना चाहिए। अगर वो छोड़ें भी तो जदयू के चेहरे को नामित करें। अगर नीतीश कुमार भाजपा को मुख्यमंत्री पद सौंप रहे हैं तो ये भाजपा की भी दुर्गति होगी और JDU की भी दुर्गति होगी। पप्पू यादव ने कहा कि कायदे से जनता ने जिसे वोट दिया उसे ही मुख्यमंत्री रहना चाहिए। क्योंकि वोट नीतीश कुमार के नाम पर लिया गया है, नरेंद्र मोदी के नाम पर नहीं, फिर बिहार की जनता की पीठ में खंजर क्यों घोंपा जा रहा है। उन्होंने जदयू नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा कि विधान परिषद से इस्तीफा दिए हैं। भाजपा के सारथी लोग इतने परेशान क्यों हैं? अभी दिल्ली दूर है। आंख मिचौली का खेल देखते चलिए।

तेज आंधी और वज्रपात की चेतावनी के बीच बिहार के कई जिलों में ओलावृष्टि का बड़ा खतरा

पटना। ​बिहार में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। जहां मार्च के अंत में गर्मी चरम पर होनी चाहिए थी, वहीं अब आसमान में चक्रवाती जाल बुन रहा है। मौसम विभाग (IMD) ने 31 मार्च और 1 अप्रैल को लेकर राज्य में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें बिजली गिरने और तेज आंधी की गंभीर चेतावनी दी गई है। जान-माल का खतरा ​बिहार के अधिकांश जिलों में हवा की गति 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने के आसार हैं। यह रफ्तार इतनी तेज है कि कच्चे मकानों, टीन शेड और पुराने पेड़ों को उखाड़ सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मौसमी उलटफेर अचानक बने कम दबाव के क्षेत्र और चक्रवाती परिसंचरण का परिणाम है। ​ वज्रपात और ओलावृष्टि ​राज्य में केवल बारिश ही नहीं, बल्कि वज्रपात का भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। खुले खेतों में काम करने वाले किसानों और मवेशियों के लिए यह समय बेहद जोखिम भरा है। इसके साथ ही कई हिस्सों में होने वाली ओलावृष्टि रबी की तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान बिजली के खंभों और ऊंचे पेड़ों से दूर रहें। ​ सावधानी ही बचाव है ​बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने गाइडलाइन जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि वे मेघगर्जन के समय सुरक्षित पक्के मकानों में शरण लें। मार्च का यह तूफानी अंत आने वाले गर्मी के सीजन के लिए एक असामान्य शुरुआत का संकेत दे रहा है।

JMM का शक्ति प्रदर्शन: गिरिडीह में 53वां स्थापना दिवस, CM हेमंत सोरेन पहुंचे

गिरिडीह. झारखंड मुक्ति माेर्चा का 53वां स्थापना दिवस समारोह आज सोमवार को शहर के झंडा मैदान में मनाया जाएगा। इसे लेकर पार्टी की ओर से व्यापक तैयारी की गई है। समारोह को लेकर झंडा मैदान में जहां भव्य और आकर्षक पंडाल बनाया गया है, वहीं मुख्य मार्गों में जगह-जगह तोरणद्वार भी बनाए गए हैं। बैनर, होर्डिंग और पोस्टर भी लगाए गए हैं। समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन होंगे। साथ ही नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू,गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सहित पार्टी के अन्य मंत्री, सांसद और विधायक समारोह में शिरकत करेंगे। समारोह में पूरे जिला से पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल होंगे। न केवल ग्रामीण क्षेत्रों, बल्कि शहरी क्षेत्र से भी भारी संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक और आमलोग भाग लेंगे। चूंकि हाल के दिनों में शहरी क्षेत्र में भी झामुमो का जनाधार बढ़ा है। बता दें कि इस बार का स्थापना दिवस समारोह कई मायनों में अलग होगा। पहली बार यह समारोह यहां 30 मार्च को मनाया जा रहा है, जबकि प्रत्येक वर्ष इसे चार मार्च को मनाया जाता रहा है। इस बार चार मार्च को होली रहने के कारण इसकी तिथि में परिवर्तन हुआ है। पहली बार दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अनुपस्थिति में यह समारोह मनेगा, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इस बार नहीं होगा। पहली बार झामुमो के अपना मेयर और उप मेयर भी मौजूद रह कर समारोह की शोभा बढ़ाएंगे। झामुमो नेता सह पूर्व विधायक केदार हाजरा ने बताया कि स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि सीएम हेमंत सोरेन, गाडैय विधायक कल्पना सोरेन, मंत्री सुदिव्य सोनू समेत पार्टी के कई दिग्गज शामिल होंगे। सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। गांव से शहर तक से जनसैलाब उमड़ेगा। इधर, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने झंडा मैदान पहुंच समारोह की तैयारी का जायजा लिया। उन्होंने मंच, पंडाल आदि का का जायजा लेते हुए पाई गई कमियों को पूरा कर व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया। मौके पर झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह, मेयर प्रमिला मेहरा, उप मेयर सुमित कुमार, जिला प्रवक्ता कृष्ण मुरारी शर्मा के अलावा अजीत कुमार पप्पू, शाहनवाज अंसारी आदि उपस्थित थे।

बांकीपुर विधायक नितिन नवीन का इस्तीफा मंजूर होने के बाद अब विधानसभा सीट पर होगा उपचुनाव

पटना भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को उनका इस्तीफा सौंपा। जिसे मंजूर कर लिया गया है। नितिन नवीन का विधायक पद से इस्तीफा; राज्यसभा में शुरू होगा नया सियासी सफर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को उनका इस्तीफा सौंपा। जिसे मंजूर कर लिया गया है। इससे पहले कल इस्तीफा नहीं देने के बाद राजनीतिक गलियारों में बिहार के अगले सीएम को लेकर नितिन के नाम की चर्चा होने लगी थी। इस्तीफा देने के बदले वे असम चले गए थे। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के कारण अब नितिन नवीन राज्य की राजनीति से केंद्र की ओर रुख किया। बांकीपुर सीट पर अब उपचुनाव कराया जाएगा। एक्स पर नितिन नवीन ने साझा किया संदेश इससे पहले नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर एक्स पर किए पोस्ट में अपने संदेश में कहा कि वह अपने क्षेत्र और पूरे बिहार के विकास के लिए पहले की तरह ही समर्पित रहेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता के साथ अपने मजबूत रिश्ते को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया और कहा कि यही संबंध उन्हें लगातार ऊर्जा और प्रेरणा देता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत और विकसित बिहार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वह पूरी निष्ठा से कार्य करते रहेंगे। बांकीपुर और बिहार के मेरे सभी परिवारजन एवं कार्यकर्ता साथी, जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया और दिनांक 27 अप्रैल 2006 को मैं पहली बार पटना पश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित होकर सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत नितिन नवीन ने लिखा कि मैंने सदैव अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य किया । इसी का प्रतिफल है कि यहाँ की देवतुल्य जनता ने मुझे लगातार 5 बार सदन में अपना प्रतिनिधि चुनकर सेवा का सौभाग्य प्रदान किया। सदन के अंदर हो या सदन के बाहर, दोनों ही स्थानों का उपयोग मैंने अपने क्षेत्र और बिहार की जनता की आवाज़ उठाने और उनकी समस्याओं के समाधान का मार्ग निकालने के लिए किया।बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में मुझे सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ विधायकों से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। सीएम नीतीश का जताया आभार मैंने अपने क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विषयों का समाधान जनता और कार्यकर्ताओं के सुझावों से ही निकाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी ने जब मुझे बिहार सरकार के मंत्री के रूप में काम करने का अवसर दिया, तब मुझे कई अहम फैसलों, नीतियों और योजनाओं का क्रियान्वयन करने में सफलता मिली। इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद व्यक्त करता हूं। आपको बता दें नितिन नवीन रविवार को असम के मार्गरिटा और जोनाई में आयोजित चुनावी रैलियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने असम की जनता से लगातार तीसरी बार प्रचंड बहुमत से भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज असम राज्य तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

गृह मंत्रालय का बड़ा आदेश: बिहार से अवैध घुसपैठियों को हटाने की तैयारी तेज

मुजफ्फरपुर. बांग्लादेश में नई सरकार की गठन के बाद भारत सरकार ने अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों और रोहिंग्या पर निगरानी तेज कर दी है। इन्हें डिपोर्ट कर बांग्लादेश और म्यांमार भेजा जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व में जारी आदेश के आलोक में बिहार से अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या को डिपोर्ट करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस संबंध में गृह विभाग के अपर सचिव मो. शादाब मुस्ताक ने सभी राज्य के डीएम, एसएसपी और एसपी को पत्र भेजा है। इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय के जारी पत्र का हवाला देते हुए उन सभी बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की पहचान करने को कहा गया है जो यहां अवैध रूप से रह रहे हैं। पहचान के बाद इन्हें बांग्लादेश और म्यांमार के सीमा सुरक्षा बल को सौंप देना है। माना जा रहा कि पिछले माह केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमाई जिलों की डेमोग्राफी में बदलाव को लेकर भी समीक्षा की थी। इसके बाद से इस दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है। डिपोर्ट करने के साथ ली जाएगी बायोमीट्रिक पहचान बिहार के सीमाई जिले किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार की डेमोग्राफी में सबसे अधिक बदलाव आया है। ऐसा अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या के कारण हुआ है। इसके अलावा अन्य जिलों में भी इनकी कुछ संख्या है। पिछले एक दशक में तेजी से बदलाव आया है। बिहार में 25 से 30 लाख ऐसे लोगों के रहने का अनुमान है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के पिछले साल जारी आदेश के बाद भी इस दिशा में बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई। गृह मंत्री की समीक्षा बैठक के बाद सक्रियता बढ़ी है। जारी आदेश के अनुसार, डिपोर्ट किए जाने वाले बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की बायोमीट्रिक पहचान भी ली जाएगी। यह रिकार्ड गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। इससे डिपोर्ट किए गए लोगों पुनर्वापसी मुश्किल हो जाएगी। जिलों में विशेष टास्क फोर्स का गठित कर यह कार्य करना है। इसकी प्रतिमाह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जानी है।

नीतीश कुमार और नितिन नवीन का इस्तीफा, राज्यसभा में उनके नए सफर की शुरुआत

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज से अपने राजनीतिक जीवन के एक नए चैप्टर की शुरुआत किए। बिहार विधान परिषद की सदस्यता से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया। उनके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी अपनी विधानसभा सदस्यता छोड़ दिया। 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद, इन दोनों नेताओं का अब उच्च सदन में जाना का फैसला किया। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना इसलिए भी खास है क्योंकि वो अब उन गिने-चुने नेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए, जिन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद इन चारों सदनों का प्रतिनिधित्व किया है। चारों सदनों के सदस्य बनने का गौरव नीतीश कुमार का विधायी सफर 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से शुरू हुआ था। इसके बाद 1989 में वे नौवीं लोकसभा के सदस्य बने। 2006 से वे लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। अब पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में वे अपनी नई पारी की शुरुआत करने वाले है।इस्तीफे से ठीक पहले रविवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर सरगर्मी तेज रही। जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे कद्दावर नेता मौजूद रहे। सीएम आवास में भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई। नीतीश कुमार का राजनीति करियर     नीतीश कुमार ने 1985 में हरनौत (नालंदा) से पहली बार विधायक बनकर करियर की शुरुआत की। 1989 में बाढ़ (पटना) से पहली बार लोकसभा पहुंचे।     नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जहां उन्होंने रेलवे में व्यापक सुधार लागू किए।     साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार ने 'सुशासन बाबू' के रूप में अपनी पहचान बनाई।     शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण जैसे क्रांतिकारी फैसलों का श्रेय नीतीश कुमार को दिया जाता है।     2026 में राज्यसभा निर्वाचित होने के साथ ही उन नेताओं में शामिल हो गए, जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा चारों के सदस्य रहे हैं। नितिन का बांकीपुर से राज्यसभा तक का सफर भाजपा नेता नितिन नवीन भी आज विधानसभा की सदस्यता त्याग दिया। साल 2006 से लगातार बांकीपुर सीट (पटना) का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के कारण अब वे राज्य की राजनीति से केंद्र की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे बांकीपुर सीट पर अब उपचुनाव की स्थिति बनेगी। माना जा रहा है कि इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। उनका वर्तमान विधान परिषद कार्यकाल 2030 तक था, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका के लिए उन्होंने समय से पहले ये पद छोड़ने का फैसला लिया। नीतीश कुमार का अनोखा रिकॉर्ड इस इस्तीफे के साथ ही नीतीश कुमार ने भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल कर ली है। वह अब देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने संसद और राज्य विधानमंडल के चारों सदनों (लोकसभा, राज्य सभा, विधानसभा और विधान परिषद) की सदस्यता ग्रहण की है। नितिन नवीन ने भी छोड़ी विधायकी इधर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी अपनी बांकीपुर विधानसभा सीट से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्याग पत्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को रविवार को ही दे दिया था, जो संजय सरावगी आज विधानसभा में जमा कराएंगे। नितिन नवीन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि वह अब राज्य सभा में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनके इस्तीफे के साथ ही बांकीपुर सीट अब रिक्त हो गई है, जहां जल्द ही उपचुनाव कराए जाएंगे। नितिन नवीन का राजनीतिक करियर     नितिन नवीन ने अपने पिता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की राजनीतिक विरासत को संभाला और पटना की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई।     2006 में पहली बार बांकीपुर सीट से विधायक बने। तब से लेकर 2026 में राज्यसभा के लिए चुने जाने तक, वे लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे।     नितिन नवीन ने भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन का अनुभव हासिल हुआ।     बिहार में पथ निर्माण मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे और छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह-प्रभारी के रूप में भी सक्रिय रहे, जहां जबर्दस्त कामयाबी मिली।     मार्च 2026 में बिहार से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद, अब वे विधानसभा की सदस्यता छोड़कर उच्च सदन में अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं। रविवार को इस्तीफे का प्रोग्राम नितिन ने टाला नितिन नवीन के रविवार को ही इस्तीफा देने की सूचना थी। इसके लिए बिहार विधानसभा सचिवालय ने मीडिया को सूचना भी जारी कर दी। इसमें कहा गया कि सुबह 8:40 बजे नितिन नवीन विधानसभा अध्यक्ष के ऑफिस में इस्तीफा सौपेंगे। मीडिया में खबरें भी आ गई। नितिन नवीन के इस्तीफे के लिए विधानसभा ऑफिस को रविवार को खोला गया।  नीतीश अब भी 6 महीने रह सकते हैं सीएम संविधान के मुताबिक राज्यसभा सदस्य बनने के 14 दिन में राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है. इस हिसाब से उन्हें विधान परिषद से इस्तीफा देना पड़ रहा, क्योंकि अगर वह इस्तीफा नहीं देते तो फिर उनकी एक सदस्यता खुद ही समाप्त हो जाती. एमएलसी पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार सीएम की कुर्सी पर बने रह सकते हैं. एक सांसद मुख्यमंत्री बन सकता है, लेकिन 6 महीने के भीतर राज्य की सदस्यता लेना जरूरी होता है।  बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा, संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति बिना निर्वाचन के भी 6 महीने तक बिहार का मुख्यमंत्री रह सकता है.नीतीश कुमार को केवल विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना जरूरी है, मुख्यमंत्री पद से नहीं. वे चाहें तो अगले छह महीने तक सीएम पद पर बने रह सकते हैं. बावजूद इसके नीतीश ने अब दिल्ली की राजनीति करने का फैसला कर लिया है।  बीजेपी को लेना होगा तुरंत फैसला नीतीश के विधान परिषद से इस्तीफा देने के साथ ही उनके सियासी उत्तराधिकारी के चुनने … Read more