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छात्राओं के लिए खुशखबरी: Jharkhand में प्रोफेशनल कोर्स पर मिलेगी ₹30,000 तक की सहायता

रांची. अब डिप्लोमा तथा इंजीनियरिंग के साथ-साथ सभी प्रोफेशनल कोर्स करने वाली छात्राओं को Manki Munda Scholarship Scheme का लाभ मिलेगा। इसके तहत डिप्लोमा में नामांकित छात्राओं को प्रतिमाह 15 हजार रुपये तथा स्नातक पाठ्यक्रमों में नामांकित छात्राओं को 30 हजार रुपये छात्रवृत्ति मिलेगी। पहले इस योजना के तहत सिर्फ डिप्लोमा (पॉलीटेक्निक) तथा इंजीनियरिंग की छात्राओं को इसका लाभ दिए जाने का प्रविधान था। राज्य सरकार ने अब इस योजना में व्यापक बदलाव करते हुए डिप्लोमा के अलावा सभी प्रोफेशनल फुल टाइम रेगुलर कोर्स में नामांकन लेनेवाली छात्राओं को छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया है। योजना में किए गए बदलाव के अनुसार, फुल टाइम रेगुलर कोर्स में इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, फार्मेसी, आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग, अप्लाइड आर्ट्स एंड क्रॉफ्ट्स, डिजाइन, मैनेजमेंट, होटल मैनेजमेंट एंड कैटिरिंग टेक्नोलॉजी आदि सम्मिलित होंगे। इनके अलावा उभरते तकनीकी पाठ्यक्रमों जैसे, फारेंसिंक साइंस, कंप्यूटर अप्लीकेशन, साइबर सेक्यूरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डीफेंस स्टडीज, पुलिस टेक्नोलॉजी, मेरीटाइम सेक्यूरिटी, सेक्यूरिटी मैनेजमेंट आदि कोर्स करने वाली छात्राओं को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा। किन छात्राओं को मिलेगा लाभ झारखंड विज्ञान एवं प्रावैधिकी परिषद प्रत्येक वर्ष इन तकनीकी पाठ्यक्रमों को अनुमाेदित कर अधिसूचित करेगा। साथ ही वैसे सभी संस्था, जो झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अलावा अन्य किसी विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं, उनमें नामांकित छात्राओं को भी इसका लाभ मिलेगा। बशर्तें संस्थान झारखंड में संचालित हो। साथ ही दूसरे राज्यों से 10वीं व 12वीं उत्तीर्ण छात्राओं को भी इस योजना का लाभ मिलेगा, सिर्फ छात्रा का झारखंड का स्थानीय होना जरूरी होगा। अब इस योजना का संचालन झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की जगह झारखंड राज्य उच्च शिक्षा परिषद द्वारा किया जाएगा। आवेदन संबंधित संस्थान द्वारा मांगे जाएंगे, जिसे परिषद अनुमोदित करेगा। छात्रवृत्ति की राशि भी परिषद द्वारा दी जाएगी 2025-26 सत्र से पूर्व पढ़ाई कर रही छात्राओं को भी लाभ इस योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 से पूर्व के शैक्षणिक सत्र में भी नामांकित छात्राओं काे भी इस योजना के तहत शेष अवधि के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी, बशर्ते वह पूर्व के सेमेस्टर में किसी भी विषय में फेल नहीं हुई हो। बता दें कि इस योजना के तहत किसी सेमेस्टर में एक भी विषय में फेल होने पर छात्रवृत्ति बंद कर दी जाएगी। PFMS की जगह डीबीटी से भुगतान छात्रवृत्ति की राशि पीएफएमएस की जगह डीबीटी के माध्यम से छात्राओं की आधार लिंक बैंक खाता में हस्तांतरित की जाएगी। इसमें भी बदलाव किया गया है। पहले 4,200 छात्राओं को ही मिलना था लाभ, अब 15 हजार को पहले इस योजना का लाभ प्रतिवर्ष 4,200 छात्राओं को ही दिया जाना था। लेकिन अब कोर्स का दायरा बढ़ने से इसका लाभ 15 हजार छात्राओं को मिलेगा। इसके तहत डिप्लोमा स्तर के कोर्स में नामांकित पांच हजार तथा इंजीनियरिंग एवं अन्य स्नातक स्तरीय प्रोफेशनल कोर्स में नामांकित 10 हजार छात्राओं को इस योजना का लाभ मिलेगा।

बिहार में सख्ती: Bhagalpur के 1.03 लाख वाहन प्रदूषण टेस्ट में फेल, HSRP अनिवार्य

भागलपुर. राज्य में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) के लंबित मामलों को लेकर परिवहन विभाग सख्त हो गया है। देश भर में 16 अप्रैल से नया नियम लागू हो गया है। अब बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के गाड़ी का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा। जिले में 16 अप्रैल तक के रिकॉर्ड के मुताबिक एक लाख 3028 वाहनों का पॉल्यूशन फेल है। जबकि जनवरी से 16 अप्रैल तक इस साल 240 वाहनों का पॉल्यूशन फेल हुआ है। परिवहन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में अब भी 40 से 45000 ओन रोड वाहन ऐसे हैं, जिनमें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं है। इसमें 80% से अधिक 2019 से पहले के वाहन हैं। 20 प्रतिशत ऐसे वाहन है जो 2019 के बाद के हैं। एचएसआरपी लेजर कोड अपडेट में भी भागलपुर पीछे विभागीय समीक्षा में पूरे बिहार में 63 हजार से अधिक वाहन ऐसे पाए गए हैं, जिनका एचएसआरपी लेजर कोड अब तक अपडेट नहीं हुआ है। इस सूची में भागलपुर जिले में 1796 मामले लंबित हैं। इसे गंभीर मानते हुए विभाग ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक कर लंबित मामलों को जल्द समाप्त करने का निर्देश दिया है। भागलपुर के जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) जनार्दन कुमार ने बताया कि विभाग के निर्देश पर जिले में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। संबंधित एजेंसियों को पेंडिंग कार्य जल्द पूरा करने के लिए कहा गया है। सड़कों पर चलेगा विशेष जांच अभियान डीटीओ ने बताया कि जिले में एक विशेष टीम गठित की जाएगी, जो शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों पर वाहनों की जांच करेगी। टीम यह सुनिश्चित करेगी कि सभी वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगी हो। इसके अलावा जो साधारण तौर पर नंबर बनाते हैं, उन पर भी कार्रवाई होगी। बिना एचएसआरपी नंबर प्लेट वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्पष्ट किया है कि कोई भी नया वाहन बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के एजेंसी या शोरूम से बाहर नहीं निकलना चाहिए। यदि ऐसा पाया गया तो एजेंसी संचालक और वाहन स्वामी दोनों पर कार्रवाई होगी। जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 16 जिलों के प्रदर्शन पर विशेष नजर परिवहन विभाग ने जिन 16 जिलों में एचएसआरपी लेजर कोड अपडेट की लंबित मामलों की संख्या अधिक पाई है, उनमें पटना, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सिवान, सीतामढ़ी, गया, भागलपुर, पूर्णिया, गोपालगंज, छपरा, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सुपौल और बेगूसराय शामिल हैं। इन जिलों के अधिकारियों को अलग से चेतावनी देते हुए अभियान मोड में काम करने को कहा गया है।

बिहार की राजनीति में नई चाल: Nitish Kumar साध रहे ‘लव-कुश’ समीकरण, सम्राट पर बड़ा भरोसा

पटना. नीतीश कुमार की एक-एक गतिविधि राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बनती रही है। वह अनायस कोई बात आगे नहीं बढ़ाते। बिहार की राजनीति में इन दिनों वह पूरी सोची-समझी नीति के तहत लव-कुश समीकरण को आगे कर रहे। पिछले दिनों अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान जब वे चंपारण के इलाके में थे, तब वह लव-कुश पार्क गए थे। उस समय सम्राट चौधरी भी बतौर उपमुख्यमंत्री उनके साथ थे। दोनों ने पार्क में अपनी तस्वीर भी करायी। वह अनायास ही नहीं था। यहां से भी लव-कुश समीकरण को आगे किए जाने का साफ संदेश था। नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान नियमित रूप से सम्राट चौधरी साथ में रहे। इस दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के बारे में कई बार कहा कि अब यही लोग आगे संभालेंगे। कई तरह से उन्होंने इशारे में यह साफ किया था कि सम्राट को वह अपना उत्तराधिकारी बनाने की चाहत रखते हैं। जिस समय नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा को लेकर सक्रिय थे, उस समय उनके एग्जिट प्लान पर विशेष चर्चा नहीं थी। बाद के चरण में जब वह निकले तो राज्यसभा के लिए उनका नाम तय हो गया था। उस समय भी सम्राट चौधरी के साथ उनकी यात्राएं हुईं। बाद में यह चर्चा हुई कि सम्राट चौधरी ही मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार की पसंद हैं। शपथ ग्रहण के दिन सम्राट चौधरी ने जिस तरह से नीतीश कुमार का लोकभवन में अभिवादन किया, उस पर लोगों ने गौर किया। उपेंद्र कुशवाहा पर लगा चुके हैं दांव लव-कुश समीकरण को लेकर नीतीश कुमार अपने आरंभिक दिनों से ही सक्रिय दिखते रहे हैं। आरंभिक दिनों में उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा को आगे किया था। उन्हीं की पहल पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर आए उपेंद्र कुशवाहा को नीतीश कुमार ने नेता प्रतिपक्ष बनाया। बाद के दिनों में कुशवाहा समाज से आने वाले उमेश कुशवाहा को उन्होंने जदयू का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। जदयू के एक राष्ट्रीय महासचिव भी कुशवाहा समाज से बनाए गए। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद शनिवार को नीतीश सबुह 10.30 बजे के करीब सम्राट चौधरी के सरकारी आवास पर पहुंच गए। उनके साथ नीतीश कुमार के विश्वस्त व उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी भी थे। यह भी अनायास नहीं था। जिस तरह से नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के साथ कई फ्रेम में तस्वीर करायी, उसमें उनका लव-कुश समीकरण स्पष्ट तौर पर झलक रहा था।

बिहार विधानसभा में सम्राट चौधरी पेश करेंगे विश्वास मत, विशेष सत्र की तारीख का ऐलान

पटना  बिहार में नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गठित एनडीए की नई सरकार के विश्वास मत पेश करने की तारीख आ गई है। बिहार विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र की तिथि का ऐलान हो गया है। विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। यह विशेष सत्र आगामी शुक्रवार, 24 अप्रैल को बुलाया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सीएम सम्राट चौधरी विधानसभा में अपनी सरकार का विश्वास मत पेश करेंगे। बिहार विधानसभा सचिवालय ने सभी सदस्यों को 24 अप्रैल सुबह 11 बजे सदन में उपस्थित होने के लिए अनुरोध किया है। विधानसभा के निदेशक राजीव कुमार ने शनिवार को इस संबंध में आह्वान पत्र जारी किया। यह विशेष सत्र एक दिन का ही रहेगा। एनडीए के पास सदन में भारी बहुमत है। ऐसे में सरकार के सामने बहुमत परीक्षण का कोई संकट नहीं आएगा। सम्राट चौधरी आसानी से सदन में अपना विश्वास मत पेश कर देंगे। नई सरकार के कैबिनेट विस्तार का इंतजार सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए की नई सरकार के कैबिनेट का विस्तार अभी नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण हुआ था। इसमें सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद और जदयू के दो वरीय नेताओं विजय चौधरी एवं बिजेंद्र प्रसाद यादव ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी। माना जा रहा है कि सदन में विश्वास मत पेश करने के बाद ही सम्राट कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा। मंत्रिमंडल विस्तार अगले महीने होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने के बाद बिहार में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण होगा। तब तक मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम मिलकर ही सरकार चलाएंगे। एनडीए के पास सदन में भारी बहुमत 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन के पास भारी बहुमत है। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा, जदयू समेत पांचों सहयोगी दलों ने मिलकर 202 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वह पटना की बांकीपुर सीट से विधायक थे, जो अभी खाली है। इस तरह, एनडीए के पास अभी विधानसभा में 201 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 88, जदयू के 85, लोजपा (रामविलास) के 19, हम के 5 और रालोमो के 4 विधायक शामिल हैं। जबकि सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों का समर्थन ही चाहिए होता है। वहीं, विपक्षी दलों के महागठबंधन के 35 विधायक ही हैं। पिछले महीने हुए राज्यसभा चुनाव में इनमें से कांग्रेस के 3 विधायकों ने वोटिंग से दूरी बनाई थी, जिसके बाद महागठबंधन में भी टूट की चर्चा होने लगी थी। क्या है विश्वास मत की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 163, 164 और 175 के तहत नई सरकार के गठन के बाद राज्यपाल बहुमत परीक्षण के लिए विधानसभा सत्र बुलाने का निर्देश देते हैं। नई सरकार को सदन में विश्वास मत के जरिए यह साबित करना होता है कि उसे विधानसभा के कुल सदस्य संख्या का बहुमत हासिल है। मुख्यमंत्री खुद सदन में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश करते हैं। फिर इस पर सदन में चर्चा होती है। इसके बाद ध्वनि मत या वोटिंग से इस प्रस्ताव को पारित या खारिज करने का फैसला होता है।

बिहार में सियासी हलचल: सम्राट चौधरी कब लाएंगे विश्वास मत? बिहार विधानसभा सत्र का ऐलान

पटना बिहार में नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गठित एनडीए की नई सरकार के विश्वास मत पेश करने की तारीख आ गई है। बिहार विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र की तिथि का ऐलान हो गया है। विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। यह विशेष सत्र आगामी शुक्रवार, 24 अप्रैल को बुलाया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सीएम सम्राट चौधरी विधानसभा में अपनी सरकार का विश्वास मत पेश करेंगे। बिहार विधानसभा सचिवालय ने सभी सदस्यों को 24 अप्रैल सुबह 11 बजे सदन में उपस्थित होने के लिए अनुरोध किया है। विधानसभा के निदेशक राजीव कुमार ने शनिवार को इस संबंध में आह्वान पत्र जारी किया। यह विशेष सत्र एक दिन का ही रहेगा। एनडीए के पास सदन में भारी बहुमत है। ऐसे में सरकार के सामने बहुमत परीक्षण का कोई संकट नहीं आएगा। सम्राट चौधरी आसानी से सदन में अपना विश्वास मत पेश कर देंगे। नई सरकार के कैबिनेट विस्तार का इंतजार सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए की नई सरकार के कैबिनेट का विस्तार अभी नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण हुआ था। इसमें सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद और जदयू के दो वरीय नेताओं विजय चौधरी एवं बिजेंद्र प्रसाद यादव ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी। माना जा रहा है कि सदन में विश्वास मत पेश करने के बाद ही सम्राट कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा। मंत्रिमंडल विस्तार अगले महीने होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने के बाद बिहार में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण होगा। तब तक मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम मिलकर ही सरकार चलाएंगे। एनडीए के पास सदन में भारी बहुमत 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन के पास भारी बहुमत है। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा, जदयू समेत पांचों सहयोगी दलों ने मिलकर 202 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वह पटना की बांकीपुर सीट से विधायक थे, जो अभी खाली है। इस तरह, एनडीए के पास अभी विधानसभा में 201 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 88, जदयू के 85, लोजपा (रामविलास) के 19, हम के 5 और रालोमो के 4 विधायक शामिल हैं। जबकि सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों का समर्थन ही चाहिए होता है। वहीं, विपक्षी दलों के महागठबंधन के 35 विधायक ही हैं। पिछले महीने हुए राज्यसभा चुनाव में इनमें से कांग्रेस के 3 विधायकों ने वोटिंग से दूरी बनाई थी, जिसके बाद महागठबंधन में भी टूट की चर्चा होने लगी थी। क्या है विश्वास मत की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 163, 164 और 175 के तहत नई सरकार के गठन के बाद राज्यपाल बहुमत परीक्षण के लिए विधानसभा सत्र बुलाने का निर्देश देते हैं। नई सरकार को सदन में विश्वास मत के जरिए यह साबित करना होता है कि उसे विधानसभा के कुल सदस्य संख्या का बहुमत हासिल है। मुख्यमंत्री खुद सदन में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश करते हैं। फिर इस पर सदन में चर्चा होती है। इसके बाद ध्वनि मत या वोटिंग से इस प्रस्ताव को पारित या खारिज करने का फैसला होता है।

बड़ी खबर: निशांत कुमार की सुरक्षा बढ़ी, विजय सिन्हा की घटी, श्रवण कुमार को Y+ सुरक्षा मिली

पटना जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जदयू नेता निशांत को अब जेड श्रेणी की सुरक्षा मिलेगी। वहीं, पिछली नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम रहे विजय कुमार सिन्हा की सुरक्षा घटा दी गई है। उन्हें भी अब जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जाएगी। पहले उनकी सुरक्षा श्रेणी जेड प्लस थी। इसके अलावा जदयू के वरीय नेता एवं पूर्व मंत्री श्रवण कुमार की सुरक्षा में भी इजाफा किया गया है। उन्हें एस्कॉर्ड के साथ वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला लिया गया है। बिहार के गृह विभाग ने राज्य सुरक्षा समिति की अनुशंसा पर इन सभी नेताओं की सुरक्षा में बदलाव के लिए डीजीपी विनय कुमार और डीजी विशेष शाखा को पत्र लिखा है। हाल ही में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद लगातार बड़े नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। दोनों नए डिप्टी सीएम को जेड सुरक्षा एक दिन पहले ही खबर आई थी कि सम्राट चौधरी सरकार में डिप्टी सीएम बनाए गए जदयू के दोनों वरीय नेता विजय कुमार चौधरी एवं बिजेंद्र प्रसाद यादव की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। दोनों उपमुख्यमंत्रियों को जेड श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला लिया गया। अब जदयू के नेता निशांत कुमार भी इसी स्तर के सुरक्षा घेरे में रहेंगे। जेड श्रेणी की सुरक्षा में कुल 22 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इनमें से 4-6 एनएसजी, सीआरपीएफ या आईटीबीपी के कमांडों भी शामिल हैं। इसके अलावा, जेड श्रेणी की सुरक्षा पाने वाले नेताओं को एस्कॉर्ट की सुविधा भी मिलती है। विजय सिन्हा की सुरक्षा घटी पूर्ववर्ती नीतीश सरकार में सम्राट के साथ डिप्टी सीएम रहे विजय कुमार सिन्हा की सुरक्षा जेड प्लस से घटाकर जेड कर दी गई है। नई सरकार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनने के चलते उन्हें फिर से डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया है। इस कारण उनकी सुरक्षा घटाई गई है। नीतीश कुमार को जेड प्लस सुरक्षा लगभग दो दशक तक बिहार के मुख्यमंत्री पद पर रहे जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार को सरकार ने जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला पिछले दिनों लिया गया था। नीतीश अभी राज्यसभा सांसद हैं। मुख्यमंत्री रहते उनकी सीएम वाली विशेष सुरक्षा रहती थी। 14 अप्रैल को उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। अब वे जेड प्लस श्रेणी के सुरक्षा कवर में रहेंगे। यह श्रेणी सुरक्षा व्यवस्था की सबसे उच्चतम श्रेणी मानी जाती है, जिसमें लगभग 55 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।

झारखंड के दलमा में वन्यजीवों की वापसी: 38 हाथियों का झुंड पुराने रास्ते से पहुंचा

जमशेदपुर. दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी में तीन वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 38 हाथियों का झुंड अपने पारंपरिक एलीफेंट कोरिडोर से वापस पहुंचा है। 38 हाथियों के झुंड में पांच बच्चा शामिल है। इससे वन विभाग के अधिकारियों और कर्मियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। लंबे समय बाद दलमा जंगल में हाथियों की चिंघाड़ गूंजने लगी है, जो प्राकृतिक संतुलन के लिहाज से भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हाथियों का यह यह झुंड पश्चिम बंगाल सीमा के पास स्थित काकराझोर-बुरूडीह-नरसिंहपुर-सुकलाड़ा-डालापानी-आमदा पहाड़ी मार्ग से होते हुए दलमा के अंदर जलस्रोत मंझला बांध के पास पहुंच गया। यह वही पुराना रास्ता है, जिससे होकर हाथी वर्षों से अपने प्राकृतिक आवास तक आते-जाते रहे हैं। जमशेदपुर वन प्रमंडल के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि बीते तीन वर्षों में हाथियों के भटकने के कारण चाकुलिया, बहरागोड़ा और घाटशिला के रिहायशी इलाकों में जान-माल का नुकसान बढ़ गया था। हाथियों का अपने पारंपरिक मार्ग से विचलित होना ही मानव-हाथी संघर्ष की बड़ी वजह बना। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों से वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम लगातार सक्रिय थी। रात के समय मशाल, धुआं, पटाखे और ड्रैगन टार्च का इस्तेमाल कर हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने की कोशिश की गई। अब जब हाथियों का झुंड अपने पुराने कोरिडोर से दलमा लौट आया है, तो उम्मीद है कि भविष्य में जान-माल का नुकसान में कमी आएगी। स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी – तीन साल बाद एक साथ 38 हाथियों का अपने प्राकृतिक मार्ग पर लौटना न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए जरूरी है, बल्कि इससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। यदि प्राकृतिक मार्ग सुरक्षित और संरक्षित रहें, तो वन्यजीव अपने आप संतुलन बनाए रखते हैं। – सबा आलम अंसारी, डीएफओ, जमशेदपुर

शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ: झारखंड में TET नियम नहीं हुए रद्द, 21 अप्रैल से फॉर्म

रांची. राज्य सरकार ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली, 2026 को अभी रद नहीं किया है। इस नियमावली की स्वीकृति के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा गया था, जिसमें भाषा का लेकर मामला उठने के बाद प्रस्ताव को स्थगित रखा गया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के एक जिम्मेदार पदाधिकारी के अनुसार, भाषा को लेकर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है। इसका समाधान निकलने के बाद प्रस्ताव को दोबारा कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। इससे पहले मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद कैबिनेट की स्वीकृति की प्रत्याशा में यह नियमावली अधिसूचित कर दी गई थी। इसके बाद जैक ने इस पात्रता परीक्षा का विज्ञापन जारी किया। इसके तहत इस परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए 21 अप्रैल से आवेदन भरे जाने हैं। इधर, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने न तो नियमावली को रद किया है और न ही आवेदन प्रक्रिया रोकने का कोई आदेश ही झारखंड एकेडमिक काउंसिल को दिया है। ऐसे में 21 अप्रैल से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बताते चलें कि कैबिनेट की बैठक में इस नियमावली में क्षेत्रीय भाषा की सूची में भोजपुरी और अंगिका को शामिल नहीं किए जाने पर दो मंत्रियों राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय ने आपत्ति की थी। इससे पहले पलामू एवं अन्य जिलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल नहीं करने का विरोध हो रहा था। अब कैबिनेट की बैठक में इन भाषाओं को शामिल करने की मांग का भी विरोध हो रहा है। स्पष्ट नियमावली गठित कर ली जाए जेटेट परीक्षा : सुदेश आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो ने स्पष्ट नीति और नियमावली गठित कर जेटेट परीक्षा आयोजित करने की मांग की है। उन्हाेंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि राज्य में वर्ष 2016 से यह पात्रता परीक्षा आयोजित नहीं हुई है, जिससे लाखों बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने जेटेट के अलावा अन्य सभी प्रतियोगिता परीक्षाएं भी समय पर पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित करने का अनुरोध किया है।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: महिला रोजगार योजना में अब ₹20,000 की दूसरी किस्त मिलेगी

गयाजी. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत रोजगार शुरू करने वाली पात्र महिलाओं को जल्द ही द्वितीय किस्त का भुगतान किया जाएगा। बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति ने सभी जिला परियोजना इकाइयों को इस दिशा में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। जिला परियोजना प्रबंधक आचार्य मम्मट ने वर्चुअल बैठक के माध्यम से जिला एवं प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को पात्र लाभुकों का चयन कर विवरण शीघ्र भेजने का निर्देश दिया है। योजना का उद्देश्य प्रत्येक परिवार की एक महिला को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के तहत प्रथम किस्त के रूप में 10,000 रुपया पहले ही दिए जा चुके हैं। अब निर्धारित शर्तें पूरी करने वाली महिलाओं को द्वितीय किस्त के रूप में 20,000 रुपया प्रदान किए जाएंगे। इसके लिए लाभुकों को राशि का सही उपयोग, एमआईएस में प्रविष्टि, वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण, समूह बैठकों में भागीदारी, नियमित बचत और व्यवसायिक योजना तैयार करना अनिवार्य है। द्वितीय किस्त का भुगतान तीन चरणों में किया जाएगा। ग्राम संगठन द्वारा सत्यापन के बाद प्रखंड स्तर पर मूल्यांकन होगा और अंततः डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभुकों के खाते में राशि भेजी जाएगी। जिले में अब तक 6 लाख 89 हजार से अधिक महिलाओं को 10,000 रुपया की प्रारंभिक राशि दी जा चुकी है। जांच के बाद पात्र लाभुकों को चरणबद्ध तरीके से पांच चरणों में 2 लाख 10 तक की सहायता प्रदान की जाएगी, जिसमें लाभुकों का अंशदान भी शामिल होगा। डीपीएम मम्मट ने बताया कि योजना के तहत महिलाएं फल-सब्जी, किराना, सिलाई, नाश्ता दुकान, पशुपालन व कृषि जैसे विभिन्न रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

कपल्स के लिए पुलिस विभाग का कदम: 33 ट्रांसफर, पति-पत्नी एक ही जिले में करेंगे सेवा

रोहतास  शाहाबाद पुलिस प्रक्षेत्र के चारों जिलों रोहतास, भोजपुर, बक्सर और कैमूर में तैनात 33 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण किया गया है। इस निर्णय के बाद अब प्रक्षेत्र में कार्यरत पति-पत्नी एक ही जिले में रहकर अपनी ड्यूटी कर सकेंगे। प्रक्षेत्र के डीआईजी डॉ. सत्यप्रकाश के अनुसार, पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर यह तबादला आदेश जारी किया गया है। यह कदम पुलिसकर्मियों के मानसिक तनाव को कम करने और उनके पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। पांच वर्ष की सेवा का तय था पैमाना  तबादलों के लिए कड़े मानक निर्धारित किए गए थे। इसके तहत केवल उन्हीं कर्मियों के आवेदनों पर विचार किया गया, जिन्होंने अपनी वर्तमान तैनाती स्थल पर कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। नियमानुसार किसी भी पुलिसकर्मी को उसके गृह जिले में पोस्टिंग नहीं दी गई है। साथ ही, पूरे सेवाकाल में इस आधार पर अधिकतम दो बार ही स्थानांतरण की सुविधा दी जाएगी। चूंकि ये सभी तबादले कर्मियों के स्वयं के अनुरोध पर किए गए हैं, इसलिए विभाग की ओर से किसी प्रकार का यात्रा या स्थानांतरण भत्ता नहीं दिया जाएगा। इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा। मुख्यालय के निर्देशानुसार, कर्मियों को नए जिले के लिए विरमित करने से पहले संबंधित कार्यालय प्रमुख उनकी सर्विस बुक और अन्य अभिलेखों की गहन जांच करेंगे। किसी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर स्थानांतरण रोक दिया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत कुल 70 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 37 आवेदनों को तकनीकी कारणों से निरस्त कर दिया गया। पात्रता पूरी करने वाले 33 पुलिसकर्मियों के तबादले की सूची जारी की गई है। पारिवारिक आधार पर प्रमुख तबादले     अनि राधिका रमण का सारण से कैमूर जिला बल में तबादला किया गया है। उनकी पत्नी रोहतास में शिक्षिका हैं।     अनि रश्मि का रोहतास से बांका जिला बल में स्थानांतरण हुआ है। उनके पति भागलपुर में पदस्थापित हैं।     अनि रणधीर कुमार का सहरसा से रोहतास जिला बल में तबादला किया गया है। उनकी पत्नी औरंगाबाद में शिक्षिका हैं।     सिपाही स्मृति का रोहतास से जमुई जिला बल में स्थानांतरण हुआ है। उनके पति जमुई में सहायक प्राध्यापक हैं। क्यों खारिज हुए 37 आवेदन? पुलिस मुख्यालय की समिति ने 70 में से 37 आवेदनों को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया। इसके प्रमुख कारण रहे: