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पहली मुलाकात में दिखी गर्मजोशी: सम्राट और नीतीश साथ आए नजर

पटना. बिहार की राजनीति में हलचल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को देशरत्न मार्ग स्थित सरकारी आवास पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। यह मुलाकात करीब 20 मिनट तक चली, जिसमें देश और राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और सरकार के कामकाज पर चर्चा हुई। दोनों ड‍िप्‍टी सीएम से भी मुलाकात  15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह पहली बार है जब सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार आमने-सामने मिले। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव से भी बातचीत हुई। मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस मुलाकात की तस्वीरें सम्राट चौधरी ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर साझा कीं। तस्वीरों में नीतीश कुमार सहज और प्रसन्न नजर आए। यहां तक कि उन्होंने सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर आत्मीयता भी दिखाई। सम्राट चौधरी ने पोस्ट में लिखा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री से मार्गदर्शन प्राप्त किया। शराबबंदी पर सरकार का सख्त रुख बरकरार मुलाकात के बीच राज्य की शराबबंदी नीति भी चर्चा के केंद्र में रही। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि बिहार में शराबबंदी कानून सख्ती से जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच का हिस्सा है और प्रधानमंत्री Narendra Modi भी इस पहल की सराहना कर चुके हैं। अनंत सिंह समेत कई नेताओं ने उठाए सवाल इधर, मोकामा से जदयू विधायक Anant Singh लगातार शराबबंदी खत्म करने की मांग उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि प्रतिबंध के बावजूद लोग शराब का सेवन कर रहे हैं। और इसके स्थान पर अन्य खतरनाक नशे की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे समाज पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। कई अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं, जिससे राज्य में शराबबंदी को लेकर बहस तेज हो गई है। संदेश साफ: फिलहाल नहीं बदलेगी नीति इन तमाम चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री का बयान यह संकेत देता है कि बिहार में फिलहाल शराबबंदी कानून में किसी तरह की ढील या बदलाव की संभावना नहीं है। सरकार इस नीति को जारी रखने के पक्ष में मजबूती से खड़ी नजर आ रही है।

सम्राट चौधरी ने अपनाई योगी की राह, पहले बुलडोजर फिर टोपी, बिहार CM का बड़ा बयान

पटना बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक बार फिर अपने तेवरों को लेकर चर्चा में हैं. वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राह पर चल पड़े हैं. पहले उन्होंने प्रदेश में योगी मॉडल की तरह ही बुलडोजर एक्शन शुरू किया था. उसके बाद अब टोपी पहनने से इनकार कर दिया. दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान सम्राट चौधरी ने मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार कर दिया. टोपी पहनाने वाले शख्स को तुरंत रोक दिया. वाक्ये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।  मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद एनडीए के कई नेता सम्राट चौधरी से मिलने पहुंच रहे हैं. हाल ही में जनता दरबार के दौरान कई लोग उनसे मिलने पहुंचे. सम्राट से मुलाकात के दौरान लोगों ने अलग-अलग तरीके से उनका स्वागत किया. किसी ने फूल-माला पहनाई तो किसी ने शॉल ओढ़ाकर सम्मान दिया. इसी बीच मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधि ने उन्हें टोपी पहनाने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री ने टोपी पहनने से इनकार करते हुए उसे हाथ में ले लिया और गमछा ओढ़कर सम्मान स्वीकार किया. बाद में उन्होंने टोपी पीछे खड़े गार्ड को दे दी. वीडियो में दिखता है कि व्यक्ति बार-बार टोपी पहनाने की कोशिश करता है, लेकिन सम्राट चौधरी ने उसे नहीं पहना. हालांकि, उन्होंने उसी व्यक्ति का गमछा स्वीकार किया।  टोपी न पहनने में छिपा क्या सियासी संदेश मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के टोपी न पहनने पर कई कयास लगाए जा रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सम्राट की पॉलिटिक्स अक्सर हिंदुत्व और अपने लव-कुश (कुशवाहा) वोट बैंक को मजबूत करने पर केंद्रित रहती है. बीजेपी के कई बड़े नेता सार्वजनिक रूप से मुस्लिम टोपी पहनने से बचते दिखते हैं. इसे तुष्टिकरण की राजनीति के विरोध के रूप में देखा जाता है. मालूम हो कि, बीते दिनों नीतीश कुमार ने भी मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार किया था।  सीएम बनते ही एक्शन में सम्राट बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी एक्शन मोड में हैं. वह नीतीश कुमार की तरह ही जनता दरबार के जरिए लोगों से सीधे मुलाकात कर रहे हैं. उनकी समस्याएं भी सुन रहे हैं. शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचे और कई अहम फाइलों की समीक्षा की थी. उन्होंने प्रशासनिक कामकाज को गति देने से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और मुख्य सचिव समेत सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली औपचारिक बैठक की थी। 

संस्थान का अजीब फरमान: ट्रेनिंग के दौरान शादी पर लगी रोक

गोपालगंज बिहार में गोपालगंज के हथुआ में स्थित जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि ट्रेनिंग के दौरान कोई भी छात्रा शादी नहीं कर सकती. यदि कोई छात्रा इस नियम का उल्लंघन करती है, तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।  यह आदेश कॉलेज परिसर में नोटिस के रूप में चस्पा किया गया था, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वायरल होते ही इस फरमान को लेकर लोगों में नाराजगी फैल गई और इसे छात्राओं की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया जाने लगा।  संस्थान की प्राचार्या मानसी सिंह ने इस आदेश को लेकर सफाई भी दी है. उनका कहना है कि नर्सिंग की पढ़ाई पूरी तरह आवासीय होती है, जहां छात्राएं संस्थान की निगरानी में रहकर प्रशिक्षण लेती हैं।  ऐसे में यदि छात्राएं शादी कर लेती हैं, तो उनकी पढ़ाई और प्रशिक्षण प्रभावित हो सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि यह नियम कोई नया नहीं है, बल्कि विभागीय दिशा-निर्देशों के तहत पहले से ही लागू है. नामांकन के समय ही छात्राओं से एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं, जिसमें यह शर्त शामिल होती है कि वे प्रशिक्षण के तीन वर्षों के दौरान शादी नहीं करेंगी।  हालांकि, यह तर्क लोगों को रास नहीं आया और मामला तूल पकड़ता चला गया. सोशल मीडिया पर इस आदेश को ‘अजीबोगरीब’ बताते हुए आलोचना की जा रही है. कई लोगों ने इसे छात्राओं के व्यक्तिगत जीवन और अधिकारों में दखल बताया है।  मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है. गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने कहा है कि वायरल नोटिस की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. उन्होंने हथुआ एसडीएम को 24 घंटे के भीतर जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. डीएम ने साफ किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  इधर, स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया गया है. गोपालगंज के सिविल सर्जन डॉ. बीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी मिलने के बाद तुरंत जांच कराई गई. जांच के बाद प्राचार्य द्वारा जारी आदेश को रद्द कर दिया गया है. साथ ही प्राचार्य से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है. उन्होंने कहा कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  सवाल उठ रहे हैं कि क्या किसी छात्रा के निजी जीवन से जुड़े ऐसे फैसलों पर संस्थान रोक लगा सकता है? क्या इस तरह के नियम संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हैं? फिलहाल प्रशासन जांच में जुटा है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। 

धनबाद-बोकारो सड़क हादस,गैस रिसाव और भू-धंसान के बाद विस्थापन ही अंतिम विकल्प

धनबाद केंदुआडीह में धनबाद-बोकारो सड़क धंसने के दूसरे दिन वहां बड़े पैमाने पर गैस रिसाव शुरू हो जाने से हड़कंप मच गया है। गैस रिसाव की सूचना पर पहुंचे धनबाद डीसी आदित्य रंजन एवं बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि विस्थापन ही अब अंतिम विकल्प है। अधिकारियों ने साइंटिफिक एजेंसियों की स्टडी के हवाले से बताया कि यह इलाका डेंजर जोन है। भूमिगत आग, भू-धंसान और गैस रिसाव पर नियंत्रण संभव नहीं लग रहा है। इसलिए बेलगड़िया शिफ्टिंग ही विकल्प है। एसएसपी प्रभात कुमार भी मौके पर मौजूद थे। डीसी ने कहा कि भूमिगत आग के कारण गैस रिसाव बंद नहीं होगा। समय के साथ-साथ इसका दायरा बढ़ेगा। आईआईटी आईएसएम, खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस), सिंफर सहित अन्य तकनीकी संस्थानों ने इस स्थान का निरीक्षण कर निष्कर्ष निकला है कि पूरा क्षेत्र डेंजर जोन है। भविष्य में इससे भी अधिक भयावह स्थित हो सकती है। इसलिए सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रभावित क्षेत्र से परिवारों का शिफ्ट होना ही एकमात्र विकल्प है। प्रभावितों को दिए जाएंगे दो फ्लैट झरिया मास्टर प्लान 2.0 में सरकार के स्पष्ट निर्देशानुसार प्रभावित परिवारों को बेलगड़िया में दो फ्लैट दिए जा रहे हैं। उनके रोजगार के लिए कौशल विकास केंद्र भी बनाया गया है। बिजली, पानी, सोलर स्ट्रीट लाइट, आवागमन के लिए बस का परिचालन, ई-रिक्शा, विद्यालय, हेल्थ सेंटर, रानी रोड का चौड़ीकरण, गुणवत्तापूर्ण कंस्ट्रक्शन सहित सभी बुनियादी सुविधाएं प्रदान की गई हैं। आनेवाले दिनों में यहां के निवासियों को किसी भी निजी सोसाइटी से अधिक सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के कारण डेंजर जोन में रहने वाले भोले-भाले परिवारों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। 535 परिवार प्रभावित डीसी ने बताया कि प्रभावितों की सूची में 535 परिवार हैं, लेकिन सर्वे में कुछ परिवार छूट गए हैं। जिला प्रशासन को अग्नि प्रभावित क्षेत्र में रहनेवाले हर परिवार की सुरक्षा की चिंता है। इसलिए प्रशासन का प्रभावित परिवारों से अनुरोध है कि वे तत्काल बेलगड़िया में शिफ्ट हो जाएं। वहीं अग्नि एवं भू-धंसान से प्रभावित धनबाद-बोकारो सड़क को लेकर डीसी ने लोगों से वैकल्पिक मार्ग का प्रयोग करने का अनुरोध किया। साथ में कहा कि एनएचएआई एवं आरसीडी नई सड़क का आकलन कर रहे हैं। यह सड़क अब उपयोग के लायक नहीं है। मौके पर निदेशक तकनीकी (संचालन) संजय कुमार सिंह भी मौजूद थे। रूट होगा डायवर्ट, थाना दूसरी जगह शिफ्ट होगा आरसीडी की रिपोर्ट के अनुसार सड़क को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। डायवर्ट रूट पर विचार किया जाएगा। अधिकारियों ने गैस रिसाव स्थल का भ्रमण किया। इसके बाद डीसी, सीएमडी एवं एसएसपी सहित जीएम आदि की मौजूदगी में बैठक की गई। डीसी ने बताया कि अग्नि एवं भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र से परिवारों को बेलगड़िया शिफ्ट करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। साथ में सोमवार तक केंदुआडीह थाना, जो भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र में है, उसे भी दो दिन में केंदुआ स्थित पुराने बीएसएनएल के टेलीफोन एक्सचेंज में शिफ्ट कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने बैठक के बाद उक्त स्थल का भी निरीक्षण किया।

बिहार आदेश: टीसी के आधार पर बच्चों का नामांकन नहीं रोका जाएगा

 सुपौल  जिले में अब निजी स्कूलों से स्थानांतरण प्रमाण-पत्र अर्थात टीसी लेकर आने वाले बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला नहीं रोका जा सकेगा। जिला शिक्षा विभाग ने इसे लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान प्रवीण कुमार ने इसको लेकर सभी सरकारी व निजी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को पत्र भेजकर कहा कि कई अभिभावकों से शिकायत मिली है कि निजी स्कूल की टीसी के आधार पर सरकारी स्कूलों में बच्चों का नामांकन नहीं लिया जा रहा। तुरंत लिया जाएगा एक्शन विभाग ने इसे विभागीय निर्देशों की अवहेलना माना है। कहा है कि ऐसी शिकायत पर अब सीधे कार्रवाई की जाएगी। जारी निर्देश में डीपीओ ने कहा है कि निजी स्कूल की टीसी के आधार पर सरकारी स्कूल में बच्चे का एडमिशन होगा। अगर बच्चे का आधार नहीं बना है, तो जन्म प्रमाण-पत्र या अन्य पहचान पत्र देखकर भी दाखिला देना होगा। आधार के नाम पर किसी का नामांकन नहीं रोका जाएगा। नामांकन लटकाना गलत जिला कार्यालय से टीसी सत्यापित कराने के नाम पर दाखिले को लटकाना गलत है। यदि टीसी में वर्णित जानकारी पर कोई शक होता है तो सरकारी स्कूल के प्रधान निजी स्कूल से मौखिक या पत्राचार से एक सप्ताह में सत्यापन करा लेंगे। हालांकि, निजी विद्यालयों को भी इसमें कुछ बिंदुओं को अंकित करना अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने कहा है कि ट्रांसफर सर्टिफिकेट पर स्कूल का यू-डायस कोड, मान्यता अवधि आदि अंकित रहना अनिवार्य होगा। विभाग ने साफ किया है कि सभी स्कूल सरकार के नियम से बंधे हैं। किसी बच्चे का दाखिला रोकना अब कार्रवाई के दायरे में आएगा। दरअसल, कई निजी स्कूल संचालक सरकारी स्कूल में जाने वाले बच्चों को टीसी देने में आनाकानी करते हैं या सरकारी स्कूल टीसी को अमान्य बता देते थे। इससे बच्चों का एक साल बर्बाद होने का खतरा रहता था। नए आदेश से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी।  

शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन,कंप्यूटर शिक्षकों की फाइलों की जांच तेज

 भागलपुर  जिले में कार्यरत कंप्यूटर शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता की जांच को लेकर शिक्षा विभाग एक्शन मोड में आ गया है। कुल 282 कंप्यूटर शिक्षकों की शैक्षणिक कुंडली खंगालने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस प्रक्रिया के तहत विभाग ने सभी संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है, जिससे नियुक्ति और योग्यता की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। 207 शिक्षकों की फाइल उपलब्ध, 75 की मांगी गई जानकारी जिला शिक्षा विभाग के पास फिलहाल 207 कंप्यूटर शिक्षकों की शैक्षणिक फाइल उपलब्ध है, जबकि ट्रांसफर होकर आए 75 शिक्षकों की फाइल अब तक विभाग को प्राप्त नहीं हो सकी है। इसको लेकर डीपीओ स्थापना ने सभी संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर 24 घंटे के भीतर फाइल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही सभी शिक्षकों की सूची भी भेजी गई है, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न हो। प्रधानाध्यापक करेंगे काउंटर सिग्नेचर जारी निर्देश के अनुसार, संबंधित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों वाली फाइल पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक का काउंटर सिग्नेचर अनिवार्य किया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जमा किए गए दस्तावेज सत्यापित और प्रमाणिक हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना काउंटर सिग्नेचर के फाइल को अधूरा माना जाएगा। हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में हो रही कार्रवाई डीपीओ स्थापना द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि यह पूरी कार्रवाई उपनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा के पत्रांक 383 दिनांक 13 अप्रैल 2026 तथा माननीय उच्च न्यायालय में लंबित सीडब्ल्यूजेसी संख्या 874/2024 (निरंजन कुमार एवं अन्य बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) में 14 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश के आलोक में की जा रही है। विभाग ने इस आदेश को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की है। लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई शिक्षा विभाग ने इस कार्य को ‘अति आवश्यक’ श्रेणी में रखा है और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर फाइल उपलब्ध नहीं कराने वाले संबंधित विद्यालयों और प्रधानाध्यापकों पर कार्रवाई की जा सकती है। आदेश जारी होते ही विद्यालयों में बढ़ी हलचल जैसे ही विभाग की ओर से यह आदेश जारी हुआ, जिले के विभिन्न विद्यालयों में हलचल तेज हो गई। प्रधानाध्यापक संबंधित शिक्षकों के दस्तावेज जुटाने और उन्हें व्यवस्थित करने में जुट गए हैं। कई स्कूलों में रिकॉर्ड को अपडेट करने का काम तेजी से चल रहा है। इन प्रखंडों से मांगी गई है फाइल जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार ट्रांसफर होकर आए 75 कंप्यूटर शिक्षकों की शैक्षणिक फाइल विभिन्न प्रखंडों से मांगी गई है। इनमें बिहपुर से तीन, गोपालपुर से चार, गोराडीह और जगदीशपुर से एक-एक, इस्माइलपुर से तीन, कहलगांव और खरीक से सात-सात शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा नगर निगम क्षेत्र से 11, नारायणपुर से चार, नाथनगर से तीन, नवगछिया से एक, पीरपैंती से नौ, रंगरा चौक से दो, सबौर से तीन, सन्हौला से सात, शाहकुंड से पांच और सुल्तानगंज से चार शिक्षक शामिल हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करना विभाग का उद्देश्य शिक्षा विभाग का मानना है कि इस जांच के जरिए नियुक्ति प्रक्रिया और शिक्षकों की योग्यता में पारदर्शिता लाई जा सकेगी। साथ ही भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।  

भोजपुरी, अंगिका और मगही विवाद में अटका झारखंड टीईटी 2026 का विज्ञापन

रांची झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा का विज्ञापन रद्द होगा। भाषाई विवाद (भोजपुरी, अंगिका व मगही) नहीं सुलझने की वजह से विज्ञापन रद्द किया जाएगा। 21 अप्रैल से 21 मई तक आवेदन की प्रक्रिया के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने पिछले महीने ही विज्ञापन निकाला था। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति की प्रत्याशा में विज्ञापन निकाला गया था, लेकिन गुरुवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में इस पर सहमति नहीं बन सकी। क्यों रद्द हुआ विज्ञापन झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 को स्थगित रखा गया है। स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अनुमोदन के बाद कैबिनेट की प्रत्याशा में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 की मंजूरी करते हुए अधिसूचना 26 मार्च को ही जारी कर दी थी। इसके साथ संकल्प और आवेदन करने की तिथि भी जारी कर दी गई थी। 21 अप्रैल से 21 मई तक आवेदन लिये जाने थे। नियमावली में क्षेत्रीय भाषाओं में 10 से ज्यादा जिलों में बोली जाने वाली भोजपुरी, अंगिका और मगही को जगह नहीं दी गई थी, जबकि सिर्फ दो जिलों के कुछ क्षेत्रों में बोली जाने वाली उड़िया को क्षेत्रीय भाषाओं में जगह मिली थी। इसका राजनीतिक दलों के साथ-साथ अन्य संगठनों ने विरोध किया। कैबिनेट की बैठक में भी मंत्री राधाकृष्ण किशोर, दीपक बिरुआ और दीपिका पांडेय सिंह ने इसका खुल कर विरोध किया। मंथन के बावजूद अंतिम सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में इस प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया। संशोधन होने पर भी वापस लेगा होगा विज्ञापन राज्य सरकार अगर झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 को प्रस्ताव के अनुसार 20 अप्रैल तक लागू कर देती है तो क्षेत्रीय भाषा में भोजपुरी, मगही और अंगिका के बिना आवेदन लिये जाने लगेंगे। अगर इसमें संशोधन होता है और इन तीनों क्षेत्रीय भाषा को जोड़ा जाता है तो विज्ञापन वापस लेना होगा। 2016 के बाद नहीं हुई है टीईटी झारखंड में अब तक 2012 और 2026 में ही शिक्षक पात्रता परीक्षा हुई है। पिछले 10 साल से टीईटी का आयोजन नहीं हुआ है। पूर्व में ही नियम बनाया गया था कि हर साल टीईटी का आयोजन होगा, लेकिन अब तक नहीं हो पा रहा है। इसका खामियाजा 2016 के बाद बीएड करने वाले अभ्यर्थियों को उठाना पड़ रहा है। इससे वे न तो शिक्षक पात्रता परीक्षा दे पा रहे हैं और न ही स्थानीय शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में भाग ले पा रहे हैं।

एटीएस अधिकारी बनकर साइबर शातिरों ने दंपती को डराया, लगातार कॉल पर रखकर ठगा

 मुजफ्फरपुर बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित भगवानपुर स्थित एलएन मिश्रा बिजनेस मैनेजमेंट कॉलेज के रिटायर कर्मचारी हरेंद्र कुमार व उनकी पत्नी कांति देवी को लगातार 17 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर साइबर शातिरों ने करीब 19 लाख रुपये ठग लिए। 26 मार्च की शाम साढ़े चार बजे से लेकर 11 अप्रैल तक उनको कॉल पर रखा। शातिर लगातार 24 घंटे कॉल पर रहा। इस दौरान मुश्किल से दो घंटे भी दंपती सोए नहीं पाते थे। इस संबंध में हरेंद्र ने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया है कि एंटी टेरेरिस्ट स्क्वैड (एटीएस) अधिकारी बनकर साइबर शातिरों ने उन्हें 26 मार्च को पहली बार व्हाट्सअप कॉल की। उसने आधार नंबर बताते हुए झांसा दिया कि आपके इस आधार से एक सिम निकाली गई है। इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधि में की गई है। इसी आधार से केनरा बैंक में एक खाता खोला गया है, जिसमें आतंकी गतिविधि के लिए लेनदेन किए गए हैं। इस तरह एटीएस अधिकारी बनकर गिरफ्तारी की बात बताकर डराने धमकाने लगा। लगातार कॉल पर रखा और इस दौरान वीडियो कॉलिंग भी की। इसके लिए अलग-अलग दो मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल साइबर शातिरों ने किया। 25 मार्च से पांच अप्रैल तक हरेंद्र के मोबाइल पर कॉल की गई। वहीं, उनकी पत्नी के मोबाइल नंबर पर पांच से 11 अप्रैल तक लगातार व्हाटसअप कॉल की गई। इस दौरान उसने कहा कि एक आवेदन दीजिए कि केस की जांच कर मुझे माफ कर दिया जाए। तब हरेंद्र ने यह आवेदन भी दिया। उसने कहा कि इसके लिए रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार बैंक खाते में रुपये भेजने होंगे। डर के कारण हरेंद्र कुमार ने आरटीजीएस के माध्यम से साइबर शातिरों को रुपये भेजे। बीते 30 मार्च को हरेंद्र बैंक गए। केरला के कोची शहर में किकोरा एक्सपोर्ट लि. के खाते में 5.60 लाख रुपये लिए। 31 मार्च और एक अप्रैल को बैंक में क्लोजिंग के कारण लेनदेन बंद रहने पर पुन: दो अप्रैल को हरेंद्र को लाइन पर रखकर बैंक ले गया। मुम्बई के गोरेगांव स्थित जेटी शूकर प्रा.लि. के खाते में 7.10 लाख और कर्नाटक के अमीन रोड लाइन एंड इंटरप्राइजेज के खाते में 6.15 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए डालवाए। 18.85 लाख रुपये भेजने के बाद भी केस से निजात दिलाने के नाम पर और रुपये की मांग करने लगा तब हरेंद्र को साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट का आभास हुआ। उन्होंने कॉल काटने के बाद रिश्तेदारों से संपर्क किया और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा बेटों ने बंधाया ढांढ़स ठगी के बाद जब सारी कहानी पुत्रों को बताई तो उन्होंने हरेंद्र और उनकी पत्नी को ढांढ़स बंधाया। उन्हें डर था कि शोक व खौफ में कहीं उनके माता-पिता आत्महत्या न कर लें। बेटों ने कहा, रुपये चला गया तो फिर आ जाएंगे। 17 दिनों तक जान जोखिम में, लगता था कुछ कर लेंगे रिटायर कर्मी हरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें दो पुत्र है। एक इलाहाबाद और एक कोलकाता में बैंक में पोस्टेड है। सभी अपने परिवार के साथ उसी शहर में रहते हैं। वह पति-पत्नी सदर थाना के भगवानपुर यादव नगर के निकट श्रीकृष्ण बिहार कॉलोनी स्थित आवास में रहते हैं। बताया कि 17 दिनों के डिजिटल अरेस्ट के दौरान जान जोखिम में पड़ी रही। साइबर शातिरों के पास उनका केवल आधार कार्ड ही नहीं था। वह पूरे परिवार का ब्योरा लिए हुए थे। इस दौरान किसी रिश्तेदार की कॉल भी आई तो केवल खैरियत वगैर तक ही बात करने दिया। साइबर डीएसपी बोले डिजिटल अरेस्ट की एफआईआर दर्ज कर इंस्पेक्टर आशुतोष प्रसाद को जांच की जिम्मेवारी सौंपी गई है। बैंक खातों का डिटेल लिया जा रहा है। आशंका है कि फर्जी कंपनी के नाम म्यूल एकाउंट खोलकर ठगी की गई है। -हिमांशु कुमार, साइबर डीएसपी

वन क्षेत्रों के पास स्टोन माइनिंग पर सख्ती, हाईकोर्ट ने सरकार का फैसला किया रद्द

रांची झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के जंगलों और वन भूमि के आसपास होने वाली पत्थर माइनिंग (Stone Mining) और स्टोन क्रशर (Stone Crusher) के संचालन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सरकार द्वारा पहले घटा दी गई न्यूनतम दूरी को निरस्त कर दिया है. अब नए आदेश के तहत, वन भूमि की सीमा से स्टोन माइनिंग के लिए 500 मीटर और स्टोन क्रशर के लिए 400 मीटर की न्यूनतम दूरी का पालन करना अनिवार्य होगा. विशेषज्ञ समिति पर उठाए सवाल सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें दूरी को 500 मीटर से घटाकर 250 मीटर करने का समर्थन किया गया था. कोर्ट ने पाया कि यह निर्णय बिना किसी ठोस वैज्ञानिक अध्ययन के लिया गया था. खंडपीठ ने टिप्पणी की कि सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति में वन और पर्यावरण क्षेत्र के जानकारों की कमी थी. कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि पर्यावरणीय नुकसान को कम करने के लिए ‘सतर्कता का सिद्धांत’ अपनाना जरूरी है. राष्ट्रीय उद्यानों के लिए 1 किमी का सुरक्षा घेरा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय उद्यानों (National Parks) और वन्यजीव अभ्यारण्यों (Wildlife Sanctuaries) के चारों ओर एक किलोमीटर का ‘इको सेंसिटिव जोन’ (ESZ) पूरी तरह प्रभावी रहेगा. यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्देशों के अनुरूप जारी रहेगी ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप या प्रदूषण न फैले. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिला ‘टास्क’ कोर्ट ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को एक विस्तृत सर्वे करने का आदेश दिया है. बोर्ड को उन सभी माइनिंग और क्रशर यूनिट्स की सूची तैयार करनी होगी, जिन्हें पहले की रियायती दूरी के आधार पर अनुमति दी गई थी. यह सर्वे रिपोर्ट 1 जून 2026 तक अदालत में जमा करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की गई है, तब तक हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा.

कटाई के बाद खलिहान में रखी फसल जली, किसान विजय कुमार मेहता को भारी नुकसान

 चतरा  झारखंड राज्य के चतरा जिले सोकी गांव में एक किसान की मेहनत पर अचानक लगी आग ने पानी फेर दिया. खेत-खलिहान में मड़ाई के लिए रखे करीब 500 से अधिक गेहूं के बोझे जलकर राख हो गए, जिससे किसान विजय कुमार मेहता को भारी आर्थिक नुकसान हुआ. किसान ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है. खलिहान में रखे गेहूं में अचानक लगी आग किसान विजय कुमार मेहता ने बताया कि गेहूं की कटाई के बाद थ्रेसर से मड़ाई के लिए फसल को खेत के खलिहान में रखा गया था. इसी दौरान अचानक आग लग गई, जिससे देखते ही देखते सैकड़ों बोझा गेहूं जलकर राख हो गया और उन्हें हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. ग्रामीणों ने आग बुझाने का किया प्रयास आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उपलब्ध साधनों से आग बुझाने का प्रयास किया. हालांकि तब तक अधिकतर गेहूं जल चुका था, जिससे नुकसान को रोका नहीं जा सका. अंचल कार्यालय व थाना में मुआवजे की मांग घटना के बाद पीड़ित किसान ने अंचल कार्यालय और संबंधित थाना में आवेदन देकर मुआवजे की मांग की है. फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है, जिससे ग्रामीणों में भी चिंता का माहौल बना हुआ है.