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भोपाल मेट्रो ब्लू लाइन का रास्ता साफ, मालवीय नगर समेत कई इलाकों में तोड़फोड़ की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो ट्रेन की ब्लू लाइन के लिए अब न्यू मार्केट से लगे रोशनपुरा, मालवीय नगर में दुकानों की बड़ी तोड़फोड़ होगी। यहां दरवेश बर्तन भंडार की लाइन और इसके आसपास के क्षेत्र की दुकानों को नोटिस देकर आगाह किया गया है। अगले दो माह में यहां काम शुरू होगा। मेट्रो ट्रेन के इन नोटिस से पूरे क्षेत्र में लोगों में डर है। ये मेट्रो ट्रेन अफसरों से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं। यहां सरकारी जमीन है और प्रोजेक्ट की डिजाइन में बदलाव कर दुकानों को बचाने की गुहार लगा रहे हैं। न्यू मार्केट और मालवीय नगर में स्टेशन की डिजाइन में पहले ही बदलाव किया जा चुका है। छोटी बड़ी 15 दुकानें इससे प्रभावित होने की स्थिति है। रोशनपुरा मेट्रो स्टेशन कांग्रेस के जवाहर भवन के पास है। इसकी डिजाइन को लेकर कई आपत्तियां आईं। कुछ बड़े कॉम्प्लेक्स इसमें जा रहे थे, जिन्हें डिजाइन बदलकर बचाया गया। मालवीय नगर की ओर बड़ी संख्या में स्लम है। जहांगीराबाद बाजार और आवासीय क्षेत्र भी चिंता में मेट्रो की तोड़फोड़ से सिर्फ न्यू मार्केट मालवीय नगर ही नहीं, जहांगीराबाद बाजार से लेकर आवासीय क्षेत्र तक चिंता में है। यहां 600 मीटर लंबा हिस्सा मेट्रो के लिए तोड़ा जाएगा। इसमें कई बड़े व्यवसायिक भवन शामिल है। दुकानों के अंदर तक निशान लगाए हुए हैं। 20 मकान भी है, जिन्हें तोड़ा जाएगा। इसके लिए लोगों ने कलेक्ट्रेट से लेकर कोर्ट तक याचिका लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। रेलवे लाइन के किनारे से हटाई गईं 85 झुग्गिया जिला प्रशासन व नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई में छोला रेलवे लाइन के पास 85 झुग्गियों को हटाया गया। इन्हें हटाने के लिए रेलवे ने प्रक्रिया की थी। जिस जगह झुग्गियां बना ली थी वह रेलवे की जमीन है। यहां हाल में ही तेजी से जमीन पर कब्जा करने के लिए झुग्गियां बनाई जा रही थी। रेलवे ने जिला प्रशासन व नगर निगम की मदद से इन झुग्गियों को हटवाया। इस दौरान पुलिस बल उपस्थित रहा। रेलवे के लिए खतरा थी झुग्गियां गोविंदपुरा एसडीएम भुवन गुप्ता के अनुसार ये अभी नई झुग्गियां बनी थी। रेलवे की सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी। इसके साथ ही रेलवे यहां अपनी जमीन को संरक्षित करने फेंसिंग का काम शुरू करने वाला है। मौके पर प्रशासन व पुलिस बल सुबह ही पहुंच गया था। इन झुग्गियों में से अधिकतर में छोटी दुकानें संचालित की जा रही थी। ये लोग पास की ही कॉलोनी के थे। इन्हें हटाया गया। जमीन खाली कराई, अब रेलवे यहां फेंङ्क्षसग कर जमीन को संरक्षित करेगा।  

ऐतिहासिक भोजशाला में भक्तों की भारी भीड़, HC फैसले के बाद दर्शन को उमड़े लोग

धार  धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण फैसले के बाद यहां आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अभूतपूर्व वातावरण देखने को मिल रहा है। फैसले के बाद से भोजशाला में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है। स्थिति यह है कि पिछले मात्र 11 दिनों में यहां दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच चुके हैं। विशेष बात यह है कि भोजशाला में अब केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि दिल्ली सहित प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भोज उत्सव समिति के संरक्षक विश्वास पांडेय ने बताया कि भीषण गर्मी के बावजूद सुबह से शाम तक दर्शनार्थियों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव के साथ मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं। अब तक यह स्थिति मुख्य रूप से मंगलवार तक सीमित रहती थी, लेकिन हाई कोर्ट के फैसले के बाद सप्ताह के हर दिन भोजशाला में श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक नियमित पूजा-अर्चना और आरती का क्रम जारी है, जिससे पूरे परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण और अधिक सशक्त हुआ है। मुख्यमंत्री के प्रवास के बाद से लोगों की उम्मीदें भी और बढ़ गई हैं मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के हालिया भोजशाला प्रवास के बाद लोगों की उम्मीदें भी और बढ़ गई हैं। श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों को अब इस बात का इंतजार है कि यहां प्रस्तावित शोध संस्थान को किस स्वरूप में विकसित किया जाएगा तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा भविष्य में कौन-कौन सी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी। लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं के विस्तार की मांग भी तेज हो गई है। श्रद्धालुओं का मानना है कि भोजशाला केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और ज्ञान परंपरा का गौरवशाली प्रतीक है। राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री भोजशाला आएंगी हिंदू फ्रंट फार जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री का इंदौर-धार प्रवास 27 से 30 मई तक प्रस्तावित है। भोजशाला प्रकरण की कानूनी लड़ाई की सूत्रधार, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता एवं याचिकाकर्ता रंजना अग्निहोत्री इंदौर-धार प्रवास के दौरान भोजशाला में दर्शन-पूजन के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगी। रंजना अपने साथ लखनऊ के प्रसिद्ध महादेव मंदिर के तालाब से 108 कमल पुष्प मां वाग्देवी के चरणों में अर्पित करने के लिए ला रही हैं। हिंदू फ्रंट फार जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने बताया कि अग्निहोत्री ने श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मथुरा के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ी है।

हुजूर-बैरसिया में मकान गणना अभियान सम्पन्न, 2.10 लाख घरों का हुआ सर्वे

भोपाल जिले में जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानों के सूचीकरण का काम किया जा रहा है।इसमें नगरीय क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में तहसील व पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके तहत हुजूर, कोलार, बैरसिया ग्रामीण और नगर पालिका क्षेत्र में जनगणना का काम पूरा कर लिया गया है। इन क्षेत्रों में 956 ब्लाक के 919 प्रगणकों ने करीब दो लाख दस हजार से अधिक मकानों की गिनती पूरी कर ली है। इन मकानों में रहने वाले परिवारों से 33 तरह के सवाल भी रिकार्ड में दर्ज किए गए है।बता दें कि देश में 15 साल बाद जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानाें के सूचीकरण का काम किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार नगर निगम के 85 वार्ड में जनगणना के पहले चरण में मकानों का सूचीकरण किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 80 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। यह काम 30 मई तक पूरा करना पड़ेगा। इसी बीच जनणना कार्य का निरीक्षण करने केंद्र से टीम आने वाली है, जो कि नगर निगम, पंचायत व नगर पालिका इलाके में पहुंचकर जनगणना के कार्य का सर्वे करेगी। जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि जिले में नगर निगम, बैरसिया नगर पालिका, बैरसिया ग्रामीण, हुजूर और कोलार क्षेत्र में अलग-अलग जनगणना का काम किया गया है। चार चार्ज अधिकारियों ने काम पूरा कर लिया है। नगर निगम क्षेत्र में कुछ काम बाकी है। इन मकानों की गणना के बाद डिजिटल जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। जिसके आधार पर जनगणना के दूसरे चरण का काम शुरु किया जाएगा। 7.10 लाख मकानों की गणना नगर निगम के शहरी क्षेत्र में दो हजार 900 प्रगणकों ने सात लाख 10 हजार से अधिक मकानों की गणना का काम पूरा कर लिया है।नगर जनगणना अधिकारी हीरेन्द्र सिंह कुशवाहा की लापरवाही की वजह से निगम क्षेत्र में जनगणना के काम में देरी हो रही है, हालांकि 30 मई तक काम पूरा किया जाना है। टीम नहीं आई तो 1855 पर करें काॅल जनगणना में मकानों पर नंबरिंग करने के बाद उनकी जानकारी को अपलोड कर दिया गया है। अगर अब तक किसी मकान की गणना और परिवार से जुड़ी 33 सवालों की जानकारी नहीं ली गई है, तो आम लोग 1855 पर काल कर जानकारी दे सकते हैं। आनलाइन जानकारी को सत्यापन किया जाएगा। कलेक्टर ने किया चार्ज अधिकारी का सम्मान कोलार ग्रामीण क्षेत्र व नगरीय क्षेत्र बैरसिया में जनगणना के प्रथम चरण “मकान सूचीकरण व मकानों की गणना” का कार्य शत प्रतिशत हो गया है।इस पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बुधवार को कोलार ग्रामीण क्षेत्र के चार्ज अधिकारी यशवर्धन सिंह और सीएमओ बैरसिया नगर परिषद राजेन्द्र कुमार सक्सेना को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया ।  

मध्यप्रदेश में लंबी छुट्टियों का असर! बैंक-स्कूल समेत सरकारी कार्यालय रहेंगे बंद

भोपाल एमपीवासियों के लिए इस वक्त एक अहम खबर सामने आ रही है। दरअसल, जून का महीना शुरू होने वाला है। जून के महीने में स्कूलों और बैंक आदि में निम्नलिखित अनुसार छुट्टी रहेगी। ऐसे में आपको बैंक से जुड़े जरूरी काम करने से पहले छुट्टियों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। वहीं, स्कूली बच्चों के लिए भी छुट्टी किसी त्योहार से कम नहीं है। जी हां आपको बता दें कि जून 2026 में स्कूल, बैंक और सार्वजनिक अवकाश कितने दिन रहने वाले हैं और किन-किन तारीखों में छुट्टी मिलेगी। जून में छात्रों को वैकल्पिक व सरकारी अवकाश रहेगा 17 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – छत्रसाल जयंती / महाराणा प्रताप जयंती 23 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – महेश नवमी 24 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – वीरांगना दुर्गावती बलिदान दिवस 26 जून 2026 – सरकारी अवकाश  – मुहर्रम 29 जून 2026 – सरकारी अवकाश  – कबीर जयंती MP में इस दिन रहेगा सार्वजनिक अवकाश 26 जून 2026 – मुहर्रम यहां जानिए बैंकों में कितने दिन रहेगी छुट्टी 7 जून 2026  – साप्ताहिक अवकाश (रविवार) 13 जून 2026 – दूसरा शनिवार 14 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार) 21 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार) 26 जून 2026 – मुहर्रम 27 जून 2026 – चौथा शनिवार 28 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार) यदि आप बैंक से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो इन तारीखों को ध्यान में रखते हुए अपनी योजना तैयार करें। इस जानकारी से आप जून महीने में बैंकिंग कार्यों में किसी तरह की असुविधा से बच सकते हैं।

हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, बोला- सभी इंटरफेथ मैरिज मामलों में सुरक्षा नहीं दी जा सकती

जबलपुर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अंतरधार्मिक दंपती को 24 घंटे पुलिस सुरक्षा देने से इनकार करते हुए कहा है कि केवल सामान्य आशंकाओं या संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर लगातार व्यक्तिगत सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता। सुरक्षा की मांग के लिए स्पष्ट और ठोस खतरे के प्रमाण होना जरूरी है। इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने 14 मई को रतलाम निवासी दंपती द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। दंपती ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि एक अज्ञात व्यक्ति ने उनकी कार रोकने की कोशिश की, उनके घर के पास संदिग्ध वाहन घूमते रहे और अन्य संदिग्ध घटनाएं हुईं। इसके आधार पर उन्होंने 24 घंटे पुलिस सुरक्षा और रात में विशेष सुरक्षा की मांग की थी। हाईकोर्ट ने कहा, “ऐसी असाधारण सुरक्षा मांगने वाली प्रत्येक याचिका में स्पष्ट खतरे के पुख्ता प्रमाण होना जरूरी है। केवल सामान्य आशंकाएं या संदिग्ध वाहनों की आइसोलेटेड घटनाएं व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड तैनात करने का आधार नहीं बन सकतीं। ऐसे मामलों में नियमित पुलिस गश्त और जांच पर्याप्त होती है। याचिका के अनुसार, दंपती ने वर्ष 2019 में दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। महिला विवाह से पहले इस्लाम धर्म मानती थी और उसने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म अपनाया था। महिला ने जब अपने परिवार को विवाह और धर्म परिवर्तन की जानकारी दी, तब से उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। धमकियां जारी रहने पर महिला ने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट का रुख किया था। उस समय अदालत ने रतलाम पुलिस अधीक्षक को दंपती के आवेदन पर कानून के अनुसार विचार करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। पहले कड़ी जांच आवश्यक-हाईकोर्ट वर्तमान याचिका में दंपती ने अदालत को बताया कि 13 अप्रैल को बिना किसी प्रशासनिक कारण के उनकी सुरक्षा में तैनात सशस्त्र गार्ड हटा दिया गया और उसकी जगह एक होमगार्ड जवान को तैनात कर दिया गया, जिसके पास न हथियार था और न मोबाइल फोन। अदालत ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में लगभग हर अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह के मामले में दंपती लगातार पुलिस सुरक्षा की मांग को लेकर याचिका दायर कर रहे हैं, जबकि कई मामलों में किसी आसन्न खतरे के ठोस और निर्विवाद प्रमाण नहीं होते। तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के दिए गए निर्देश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 में उसने केवल पुलिस अधीक्षक को आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था, इसे दंपती को स्थायी 24 घंटे सुरक्षा देने का न्यायिक आदेश नहीं माना जा सकता।याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का सूक्ष्म प्रबंधन (माइक्रोमैनेजमेंट) रिट क्षेत्राधिकार के तहत संभव नहीं है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का यह संवैधानिक और वैधानिक दायित्व है कि ऐसी शिकायत मिलने पर वह तुरंत और उचित कार्रवाई करे। हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश भी दिए।  

लाड़ली बहना और किसान सम्मान निधि के बीच MP पर कर्ज का पहाड़, आंकड़ा ₹4.97 लाख करोड़ पार

भोपाल  एमपी की धरती पर पैदा होने वाले हर बेटा-बेटी पर 55323 रुपए का कर्ज है। यह कर्ज उसने या उसके मां-बाप का नहीं बल्कि राज्य सरकार द्वारा बाजार से लिए जा रहे कर्ज के रूप में है जिसकी भरपाई सरकार प्रदेश वासियों से वसूले जाने वाले टैक्स के रूप में करती है. प्रदेश की आबादी के वास्तविक आंकड़े फरवरी 2027 में आएंगे पर राज्य सरकार द्वारा जो औसत आबादी मानी जा रही है वह नौ करोड़ है। इसके आधार पर एमपी के हर व्यक्ति पर कर्ज की यह राशि सामने आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि 31 मार्च 2025 की स्थिति में एमपी सरकार पर कर्ज की राशि 488714.17 करोड़ रुपए हैं जो इसके बाद के दो महीने में लिए गए 9200 करोड़ के कर्ज के चलते बढ़कर अब 497914 करोड़ रुपए हो गई है। बता दें कि सरकार ने पिछले साल 2025-26 में लिए गए कर्ज के मुकाबले 29 हजार करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाए हैं। माना जा रहा है कि यह किसी बड़ी योजना के बराबर की राशि है जिसका ब्याज सरकार ने चुकाया है। प्रदेश सरकार का मौजूदा कर्ज और कर्ज देने वाली संस्थाओं पर बकाया राशि     वित्त विभाग ने कहा है कि प्रदेश सरकार पर वर्तमान में 488714.17 करोड़ का कर्ज है। कर्ज की यह राशि सरकार ने अलग-अलग सेक्टर से ली है।     राज्य सरकार ने बाजार से 333278.21 करोड रुपए का लोन लिया है। कंपनसेशन और अदर बॉन्ड जिसमें पावर बांड्स भी शामिल हैं, के जरिये सरकार ने 4416. 45 करोड़ रुपए उधार लिए हैं।     साथ ही वित्तीय संस्थानों से 17737.58 करोड़ रुपए सरकार ने लिए हैं। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से लोन और एडवांस राशि के रूप में 81152.31 करोड़ रुपए ले रखे हैं।     इसके अलावा अदर लायबिलिटी कैटेगरी में 13951.57 करोड़ रुपए का कर्ज होने की जानकारी दी गई है।     केंद्र सरकार के नेशनल स्मॉल सेविंग फंड से भी सरकार ने 38178.05 करोड़ रुपए ले रखे हैं। इस तरह कुल 488714.17 करोड रुपए का कर्ज राज्य सरकार पर है। 31 मार्च 2025 की स्थिति में था 421740 करोड़ का कर्ज पिछले साल 31 मार्च 2025 की स्थिति में राज्य सरकार पर कुल कर्ज 421740.27 करोड़ रुपए था। अगर 31 मार्च 2025 की स्थिति में एमपी की आबादी 8.80 करोड़ मानी जाए तो प्रदेश के हर व्यक्ति पर कुल कर्ज 47925 रुपए होता है। यानी एक साल में प्रति व्यक्ति कर्ज घटने के बजाय छह हजार रुपए बढ़ गया है और इस स्थिति में सुधार आने की कोई गुंजाइश फिलहाल दिखाई नहीं देती है क्योंकि योजनाओं की पूर्ति के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 में अप्रेल से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया है। लाड़ली बहना, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने बढ़ाया कर्ज राज्य सरकार पर कर्ज की बढ़ती राशि के पीछे मुफ्त में बांटी जाने वाली राशि को भी कारण बताया जा रहा है। सरकार भले ही दावे करे कि जो भी कर्ज लिया जा रहा है वह अधोसंरचना विकास और प्रदेश के विकास के लिए खर्च हो रहा है लेकिन हकीकत यही है कि हर माह ली जाने वाली कर्ज की रकम लाड़ली बहना योजना, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि, उज्जवला योजना जैसे अन्य योजनाओं पर खर्च की जा रही है और प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने ले लिया है 9200 करोड़ का कर्ज मोहन सरकार ने पिछले साल लिए गए 488714 करोड़ रुपए के कर्ज के बाद चालू वित्त वर्ष में अप्रेल और मई के महीनों में 9200 करोड़ रुपए का कर्ज चार बार में ले लिया है। अगर इसे भी कर्ज की कुल राशि में जोड़ दिया जाए तो वर्तमान में सरकार पर कुल कर्ज 4 लाख 97 हजार 914 करोड़ रुपए हो जाता है। इस नजरिये से देखें तो प्रदेश के हर नागरिक पर कर्ज का आंकड़ा 54301 से बढ़कर 55323 रुपए हो जाता है।

गेहूं खरीदी में बड़ा आंकड़ा पार, लघु और सीमांत किसानों से भी लाखों मीट्रिक टन खरीद जारी

अब तक कुल 13.36 लाख किसानों से 103 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित सीमांत एवं लघु कृषकों से हुआ 32.14 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी भोपाल मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 13 लाख 36 हजार किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में अव्वल है। अब तक 103 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। इसमें से 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन गेहूँ खरीदी की गई है। गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। मुख्यमंत्री कर रहे सतत मॉनिटरिंग मंत्री राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन लक्ष्य को केन्द्र सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य से अधिक गेहूँ का उपार्जन हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये हैं, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी है। किसानों को 22,842.9 करोड़ से अधिक का भुगतान किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 22,842.9 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया है। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया जा रहा है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल काटें, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई।  

MP में शराब कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें, सरकार करेगी ओवरचार्जिंग और अवैध अहातों पर सख्ती

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत शराब दुकानों और अवैध गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेशभर में आबकारी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि शराब दुकानों पर ओवर रेटिंग, तय समय के बाद बिक्री और अवैध रूप से संचालित शॉप बार जैसी गतिविधियों के खिलाफ राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले मदिरा ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह “ऑफ श्रेणी” घोषित किया गया है। इसके तहत दुकान परिसर या आसपास शराब सेवन की अनुमति नहीं होगी। अवैध अहातों और उपभोग स्थलों को बंद कराने के लिए विशेष दल गठित कर औचक निरीक्षण किए जाएंगे।   उप मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब दुकानों के खुलने और बंद होने के निर्धारित समय का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इसके लिए पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें निगरानी करेंगी। वहीं उपभोक्ताओं से तय कीमत से अधिक राशि वसूलने की शिकायतों को रोकने के लिए दुकानों पर शराब की दरें प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही पारदर्शिता के लिए दुकानों पर क्यूआर कोड भी लगाए जाएंगे, ताकि ग्राहक वास्तविक कीमत की जांच कर सकें। उन्होंने कहा कि निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर शराब बेचने वालों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के पवित्र घोषित नगरों और क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।  सभी कम्पोजिट दुकानें 'ऑफ श्रेणी' की घोषित, अवैध अहाते होंगे बंद उप मुख्यमंत्री ने नीतिगत प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह 'ऑफ श्रेणी' का घोषित किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब दुकान परिसर या उसके आसपास मदिरा सेवन (शराब पीने) की सुविधा उपलब्ध कराना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों के उल्लंघन की शिकायतों की सघन जांच के लिए विशेष दलों का गठन किया गया है, जो औचक निरीक्षण करेंगे। इस दौरान मिलने वाले सभी अवैध अहातों और उपभोग स्थलों को तुरंत बंद कराने के निर्देश मुख्यालय द्वारा बिंदुवार दिशा-निर्देशों के माध्यम से जारी कर दिए गए हैं। देर रात तक शराब बिक्री पर रोक, क्यूआर कोड से थमेगी ओवर रेटिंग दुकानों के निर्धारित समय से पहले खुलने और तय वक्त के बाद देर रात तक मदिरा बेचने के मामलों को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। राजपत्र में निर्धारित समय सीमा का पालन कराने के लिए अब पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें मिलकर गश्त करेंगी। इसके साथ ही उपभोक्ताओं से तय मूल्य से अधिक राशि वसूलने (ओवर रेटिंग) की शिकायतों पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक दुकान पर विक्रय दरों का प्रदर्शन अनिवार्य किया गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दुकानों पर क्यूआर कोड चस्पा किए जाएंगे, जिससे मदिरा की वास्तविक दरों का सत्यापन हो सकेगा। यदि कोई ठेकेदार निर्धारित दर से अधिक कीमत पर मदिरा बेचता पाया गया, तो उस पर भारी जुर्माना और लाइसेंस निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई होगी। पवित्र नगरों और क्षेत्रों में अवैध परिवहन व बिक्री पर रहेगी पैनी नजर  देवड़ा ने कहा कि प्रदेश के जिन नगरों और क्षेत्रों को 'पॉली / पवित्र' घोषित किया गया है, वहाँ मदिरा की अवैध बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में पहले से ही मदिरा दुकानों को पूरी तरह बंद रखने के आदेश लागू हैं। अब इन क्षेत्रों में शराब के किसी भी प्रकार के अवैध परिवहन या बिक्री को रोकने के लिए निगरानी तंत्र (सुरक्षा और इंटेलिजेंस) को और अधिक मजबूत किया जा रहा है, ताकि सरकार के इन कदमों से अवैध रूप से मदिरा का विक्रय और उपभोग कराने वाले तत्वों पर पूरी तरह शिकंजा कसा जा सके।

उज्जैन के डायल-112 हीरोज घर की राह भटके मानसिक रूप से अस्वस्थ बालक को सुरक्षित संरक्षण में लेकर थाने पहुँचाया

भोपाल उज्जैन जिले के थाना चिंतामन गणेश क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से घर का रास्ता भटक गए मानसिक रूप से अस्वस्थ 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित संरक्षण में लेकर थाना पहुँचाया गया। 26 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना चिंतामन गणेश क्षेत्र अंतर्गत कंदरिया चौराहा के पास एक मानसिक रूप से अस्वस्थ बालक अकेला मिला है, जो घर का रास्ता भटक गया है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल चिंतामन गणेश थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक सागर सिंह एवं पायलट लाल सिंह ने मौके पर पहुंचकर बालक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। डायल-112 जवानों ने बालक से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया, किन्तु मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह अपने परिजनों के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा था। डायल-112 जवानों ने बालक को सुरक्षित डायल 112 वाहन में बैठाकर आसपास क्षेत्र में परिजनों की तलाश एवं पूछताछ की, किन्तु परिजनों के संबंध में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इसके बाद डायल-112 टीम द्वारा बालक को सुरक्षित थाना चिंतामन गणेश पहुँचाया गया।  

60 बोरिंग सूखे, अब टैंकरों के सहारे चलेगा इंदौर का जल प्रबंधन

इंदौर  देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर गंभीर जलसंकट से गुजर रहा है। हालत यह है कि 35 लाख से ज्यादा जनसंख्या वाला यह शहर आज भी पानी के मामले में 70 किमी दूर बहने वाली नर्मदा नदी के भरोसे है। शहर में सवा लाख से ज्यादा बोरिंग हैं, लेकिन वर्षाजल को जमीन में सहेजने की प्रवृत्ति नहीं होने की वजह से इनमें से ज्यादातर सूख चुके हैं। वर्ष 2013 में नर्मदा का तीसरा चरण इंदौर आया था जो वर्ष 2024 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था। पिछले 13 साल में भविष्य की आवश्यकता को लेकर कोई काम ही नहीं हुआ। स्थिति यह है कि आज शहर का बड़ा हिस्सा टैंकरों के भरोसे है। रोज किसी न किसी क्षेत्र में जलसंकट को लेकर चक्काजाम और प्रदर्शन हो रहे हैं। नींद से जागे नगर निगम ने नर्मदा के चौथे चरण को लेकर काम तो शुरू कर दिया है, लेकिन इसे पूरा होने में कम से कम तीन साल लगेंगे। मतलब साफ है कि शहरवासियों को आने वाले तीन साल जलसंकट झेलना ही पड़ेगा। इन वजहों से बिगड़े हालात 1970 के आसपास इंदौर में सूखे के हालात बने थे। 70 किमी दूर बहने वाली नर्मदा का जल इंदौर लाने के लिए आंदोलन हुआ, जिसके बाद नर्मदा परियोजना को स्वीकृति मिली। वर्ष 1978 में नर्मदा का पहला चरण इंदौर आया और शहर को 90 एमएलडी पानी मिलने लगा। वर्ष 1990 में नर्मदा का दूसरा चरण इंदौर आया और 90 एमएलडी पानी और मिलने लगा। वर्ष 2013 में तीसरा चरण इंदौर आया और इंदौर को 430 एमएलडी पानी मिलने लगा। पिछले दो दशक में शहर का विस्तार तेजी से हुआ। नई कॉलोनियां, टाउनशिप आईं, जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई, लेकिन पानी की मात्रा बढ़ाने को लेकर कोई काम नहीं हुआ। हाल ही में नर्मदा के चौथे चरण का काम शुरू हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि वर्ष 2029 के अंत तक यह पूरा हो जाएगा। इसके बाद इंदौर को कुल 900 एमएलडी पानी मिलने लगेगा। बोरिंग या तो सूख गए या दूषित पानी दे रहे हैं शहर के 25 प्रतिशत हिस्से में आज भी नर्मदा लाइनें नहीं हैं। ये क्षेत्र पूरी तरह से बोरिंग पर निर्भर हैं। गर्मी के चलते ज्यादातर बोरिंग या तो सूख चुके हैं या दूषित पानी दे रहे हैं। इसके चलते ये क्षेत्र अब पूरी तरह से टैंकरों पर आश्रित हो गए हैं। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला प्रदूषित पानी खुले में छोड़ने से आसपास के क्षेत्रों का भू-जल दूषित हो गया। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 36 मौतें हुईं। नए तालाबों की योजना नहीं बनी, पुरानों का गहरीकरण नहीं हुआ लगभग 87 वर्ष पहले होलकरकाल में इंदौर की पानी की आवश्यकता पूरी करने के लिए यशवंत सागर जलाशय बनाया गया था। इसके बाद किसी नए तालाब की योजना तक नहीं बनी। शहर में सिरपुर, बिलावली, पिपल्याहाना तालाब हैं, लेकिन इनके गहरीकरण को लेकर काम ही नहीं हुआ। प्रति व्यक्ति 100 लीटर पानी भी नहीं मिल रहा नर्मदा के तीन चरण इंदौर लाने के बाद अधिकारियों का अनुमान था कि शहर में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 180 लीटर पानी की आपूर्ति हो सकेगी, लेकिन तेजी से बढ़ती जनसंख्या की वजह से ऐसा नहीं हो सका। नर्मदा का तीसरा चरण 25 लाख जनसंख्या की आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, लेकिन नगर निगम सीमा में 29 गांव शामिल करने के बाद इन गांवों में नर्मदा पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी नगर निगम पर आ गई। जनसंख्या भी 35 लाख से अधिक हो गई। यही वजह है कि शहर को इस वर्ष शहर में जबरदस्त जलसंकट झेलना पड़ रहा है। चौथा चरण आने के बाद मिलेगी राहत नर्मदा के चौथे चरण पर नगर निगम लगभग 2300 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसके बाद इंदौर को 900 एमएलडी पानी मिलने लगेगा। अमृत 2.0 योजना के तहत किए जा रहे इस कार्य में शहर में 1500 किमी नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी। दो लाख से ज्यादा पुराने जल कनेक्शन की लाइन भी बदली जाएगी। 1.47 लाख नए कनेक्शन भी दिए जाएंगे। इसके अलावा 40 नई टंकियां बनाई जाएंगी। अनुमान है कि नर्मदा के चौथे चरण से इंदौर की वर्ष 2045 तक की आवश्यकता पूरी होगी।