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VIP कल्चर पर लगाम: CM मोहन यादव का छोटा काफिला चर्चा में, मंत्री एक कार से पहुंचे

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करने की अपील के बाद एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव ने अपने काफिले में से 5 वाहन कम कर दिए हैं। सीएम के कारकेड में अब तक 13 वाहन चलते थे अब 8 वाहन ही साथ रहेंगे। सीएम के काफिले में सिर्फ 8 वाहन रहे भोपाल से नरसिंहपुर रवाना होते वक्त सीएम डॉ. मोहन यादव के काफिले में आज सिर्फ आठ वाहन ही नजर आए। डिप्टी सीएम शुक्ल का ऐलान कम से कम गाड़ियां काफिले में रहेंगी सीएम के बाद अब डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल ने अपने काफिले में कम से कम गाड़ियां चलाने का ऐलान किया है। डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल ने सोशल मीडिया पर लिखा- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर राष्ट्रहित में ईंधन संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस दिशा में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग भी पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ योगदान देगा। आगामी आदेश तक विभागीय भ्रमण, निरीक्षण एवं अन्य शासकीय गतिविधियों में न्यूनतम वाहनों का उपयोग किया जाएगा। अनावश्यक वाहन रैली, अतिरिक्त काफिले और ईंधन की खपत वाले आयोजनों से परहेज किया जाए। विभाग के अफसर कार पुलिंग को प्राथमिकता दें डिप्टी सीएम ने कहा कि विभाग के सभी अधिकारी भी शासकीय कार्यों में सादगी अपनाते हुए सार्वजनिक परिवहन अथवा साझा वाहन व्यवस्था को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित भोजन का भी सीधा संबंध है। इसी दृष्टि से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है, जिससे रासायनिक उर्वरकों (जो अधिकांश आयातित होते हैं) का उपयोग कम हो, भूमि और जल की गुणवत्ता सुरक्षित रहे तथा आमजन को स्वास्थ्य कर अन्न उपलब्ध हो। यह जनस्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा है कि ऊर्जा संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण के इस संदेश को भी जनजागरूकता अभियानों में शामिल करें। ईंधन की बचत, स्वच्छ पर्यावरण और प्राकृतिक कृषि, ये सभी स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र के आधार हैं। राष्ट्रहित सर्वोपरि है। प्रत्येक छोटी बचत, देश की बड़ी शक्ति बनती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर मध्यप्रदेश राष्ट्रहित में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए संकल्पित है। आगामी आदेश तक मेरे कारकेड में सुरक्षा की दृष्टि से न्यूनतम वाहन होंगे और भ्रमण के दौरान कोई वाहन रैली नहीं होगी। सभी मंत्रीगण भी यात्रा के समय न्यूनतम वाहनों का उपयोग करेंगे। साथ ही, नवनियुक्त निगम-मंडल पदाधिकारी सादगी से कार्यभार ग्रहण करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों से भी आग्रह है कि वे सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं। राष्ट्रहित सर्वोपरि है। मुख्यमंत्री  मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रहित में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई अपील को मध्यप्रदेश में पूरी गंभीरता के साथ अमल में लाया जाएगा। राज्य शासन ने जारी किए निर्देश * आगामी आदेश तक मुख्यमंत्री जी के कारकेड में 13 वाहनों के स्थान पर सिर्फ 8 वाहन रहेंगे। * मुख्यमंत्री जी के भ्रमण के समय कोई वाहन रैली आयोजित नहीं की जाएगी। * सभी मंत्रिगण यात्रा के समय न्यूनतम वाहनों का प्रयोग करेंगे। * नव नियुक्त निगम-मंडल के पदाधिकारी सादगी से कार्यभार ग्रहण करें और कोई वाहन रैली इसमें नहीं रहेगी। एक कार से मंत्रालय गए खेल मंत्री खेल और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने भी सुरक्षा में चलने वाले पायलेट और फॉलो वाहन को हटा दिया है। मंत्री सारंग एक कार से स्टाफ के साथ मंत्रालय के लिए रवाना हुए। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान अर्थव्यवस्था का सुधारने करने के लिए है। इस देश के लिए यदि हम कुछ करना चाहते हैं तो यह हमारा दायित्व है कि प्रधानमंत्री मोदी की सलाह और आवाहन को स्वीकार करें। कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि कम से कम पेट्रोल डीजल का उपयोग करें। यह इस देश के नवनिर्माण के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी का यह नया प्रयास है। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा इस देश को खड़ा करने का काम किया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कोरोना के समय इतने बड़े देश में महामारी से जीतने का काम हुआ। आगे आने वाली पीढ़ी एक विकसित हिंदुस्तान में रहे, स्वावलंबी हिंदुस्तान का निर्माण करें यह हम सबका कर्तव्य है। मंत्रियों ने भी कम की गाड़ियां सीएम मोहन के अलावा दूसरे नेताओं ने भी गाड़ियां कम कर दी हैं. डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने काफिले में कम से गाड़ियां चलाने की बात कही है. वहीं मंत्रियों ने भी अपना काफिला कम कर दिया है. मंत्री विश्वास सारंग ने भोपाल में महज एक गाड़ी का इस्तेमाल किया. मंत्रियों ने सुरक्षा में चलने वाले पायलेट और फॉलो वाहन को हटा दिया है. वह केवल एक कार से ही मंत्रालय के लिए रवाना हुए और इसी तरह से भ्रमण भी किया था. प्रदेश के दूसरे मंत्रियों ने भी काफिले में कमी की है।  प्रधानमंत्री मोदी ने की जनता से ये अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से अपील है कि वे पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करें. सार्वजनिक परिवहन या कारपूलिंग का इस्तेमाल करें. एक साल तक सोना न खरीदें. ताकि, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके. जनता विदेशी ब्रांड की जगह स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करे। संभव हो सके तो जनता वर्क फ्रॉम होम करें. जनता अगले एक साल तक गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचे. किसान रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करें और प्राकृतिक खेती अपनाएं. खाने में जरूरत के अनुसार ही खाद्य तेल का उपयोग करें। 

NEET घोटाले की जांच में नया मोड़: सीहोर से जुड़ा निकला मास्टमाइंड शुभम का कनेक्शन

सीहोर NEET 2026 पेपर लीक मामले की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है. अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का कनेक्शन सामने आया है. राजस्थान पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक से डॉक्टर शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया है, जो कभी सीहोर स्थित श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी में बीएएमएस का छात्र रह चुका है. इस गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां पेपर लीक नेटवर्क के तार मध्य प्रदेश तक जुड़े होने की आशंका पर भी जांच कर रही हैं।  3 मई को हुई थी शुभम की गिरफ्तारी जानकारी के मुताबिक राजस्थान पुलिस ने 3 मई 2026 को शुभम खैरनार को हिरासत में लिया था. तब से उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शुभम का सीहोर की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से संबंध रहा है. इसके बाद पुलिस ने यूनिवर्सिटी से भी संपर्क कर आरोपी के शैक्षणिक रिकॉर्ड और गतिविधियों की जानकारी जुटाई।  सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या शुभम किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था और क्या उसने मेडिकल शिक्षा संस्थानों के माध्यम से किसी तरह का संपर्क या नेटवर्क तैयार किया था. पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि पेपर लीक से जुड़े अन्य आरोपियों के साथ उसका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।  हालांकि इस पूरे मामले में श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने आरोपी शुभम खैरनार से खुद को अलग कर लिया है. यूनिवर्सिटी के कुलपति मुकेश तिवारी ने स्पष्ट कहा कि शुभम ने वर्ष 2021 में बीएएमएस पाठ्यक्रम में प्रवेश जरूर लिया था, लेकिन प्रवेश के बाद वह कभी नियमित रूप से यूनिवर्सिटी नहीं आया. कुलपति के मुताबिक उसने न तो किसी परीक्षा में हिस्सा लिया और न ही किसी शैक्षणिक या अन्य गतिविधि में भागीदारी की।  यूनिवर्सिटी का दावा, कभी क्लास में नहीं आया था आरोपी यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि आरोपी का संस्थान से केवल नाममात्र का संबंध था और उसका कैंपस गतिविधियों से कोई जुड़ाव नहीं रहा. इसके बावजूद पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी की भूमिका केवल सीमित थी या वह बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा था।  गौरतलब है कि NEET 2026 पेपर लीक मामले में राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां हो रही हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसमें बड़ी रकम के लेनदेन के जरिए अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाए गए।  अब सीहोर कनेक्शन सामने आने के बाद जांच और तेज हो गई है. राजस्थान पुलिस आरोपी शुभम खैरनार से पूछताछ के आधार पर उसके संपर्कों, आर्थिक लेनदेन और शैक्षणिक नेटवर्क की पड़ताल कर रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। 

वीआईपी कल्चर छोड़ बस में सफर: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारियों ने अपनाई सादगी

उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ईंधन बचाओ' अपील और मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों के बाद प्रशासन ने काम करने का तरीका भी बदल दिया है। अब अधिकारी अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही बस में बैठकर सिंहस्थ कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं। करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के बीच प्रशासन का यह कदम चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार, कमिश्नर – अधिकारी निरिक्षण के लिए अलग वाहन नहीं बल्कि ट्रेवलर से पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान, आशीष सिंह ने मितव्ययिता के नियमों के अनुरूप, अन्य अधिकारियों के साथ एक ही बस में यात्रा करके सिंहस्थ से संबंधित कार्यों का नियमित निरीक्षण शुरू किया। इससे पहले, अधिकारी अलग-अलग वाहनों का उपयोग करते थे। नियमित दौरे के हिस्से के रूप में, व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और नए घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच मार्गों के विकास की निगरानी करने हेतु गौ घाट से अन्य घाटों तक निरीक्षण किए गए। सिंहस्थ के कार्यों का पिछले एक सप्ताह से अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। रोज कमिश्नर, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी अलग-अलग 15 वाहनों से पहुंचते थे। वे करीब 16 किमी का सफर करते हैं। अब समझिए कैसे हुई खर्च में कटौती 15 अधिकारी रोज सिंहस्थ क्षेत्र के 16 किमी का सफर तय करते हैं। उससे पहले अपने बंगले से घाट तक पहुंचते हैं, यह भी पांच से सात किमी होता है। ज्यादातर इनोवा कार हैं, जिनका एवरेज 10 किमी प्रति लीटर होता है। वहीं जब अधिकारी निरीक्षण करते हैं, वाहनों के एसी चालू रहते हैं। इस हिसाब से देखें तो प्रत्येक वाहन पर चार लीटर पेट्रोल या डीजल खर्च होता है। 450 रुपए प्रति कार के हिसाब से मानें तो 6750 रुपए प्रतिदिन खर्च होते थे। अधिकारियों ने बुधवार से ट्रैवलर बस से सफर शुरू किया है। इस बस में पहले दिन वे 12 किमी गए। जिसमें ढाई लीटर डीजल खर्च हुआ, जो करीब 250 रुपए से भी कम का होता है। हालांकि ट्रैवलर बस 4100 रुपए प्रतिदिन के किराए पर ली गई है। रोज सुबह किया जा रहा निरीक्षण सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय है। घाटों से जुड़ने वाले प्रस्तावित एप्रोच रोड के स्थान चिन्हित करने के लिए अधिकारी रोज सुबह 6 बजे से निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान वे करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं। टीम भावना भी मजबूत होगी मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले अलग-अलग विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी गाड़ियों से आते थे, जिससे अनावश्यक ईंधन और शासकीय धन का अपव्यय होता था। अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे, जिससे टीम भावना भी मजबूत होगी और ईंधन की खपत में भी भारी कमी आएगी। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि अलग-अलग गाड़ियों का काफिला बनने से ट्रैफिक पर भी असर पड़ता था। अब एक बस में सभी अधिकारियों के साथ जाने से ईंधन की बचत के साथ जाम जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी। उन्होंने इसे बेहतर और अनुकरणीय पहल बताया। सिंहस्थ के लिए इतना बजट है प्रस्तावित बता दें कि, आगामी सिंहस्थ के लिए, ₹3,060 करोड़ के विकास कार्यों का प्रस्ताव किया गया है। कंठल चौराहे से सती गेट तक सड़क चौड़ीकरण का काम पहले ही शुरू हो चुका है। निर्माण कार्य की समय सीमा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य 2027 तक, यानी सिंहस्थ आयोजन से 6 महीने पहले ही पूरे कर लिए जाएं, ताकि आखिरी समय में कोई समस्या न हो। 90 प्रवेश द्वारों से जुड़ेगा घाट क्षेत्र शिप्रा नदी के बाएं तट पर निर्मित हो रहे 14.5 किमी लंबे नवीन घाटों पर श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन हेतु 65 प्रवेश-निर्गम मार्ग चिन्हित किए गए हैं। कुल 90 प्रवेश द्वारों को एप्रोच मार्गों और पार्किंग से जोड़ा जाएगा।  

करोंद में आग का तांडव: बिल्डिंग से उठीं ऊंची लपटें, AC और फर्नीचर जलकर खाक

भोपाल भोपाल के करोंद इलाके में बुधवार को अचानक आग लग गई। जानकारी के अनुसार, आग चार मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में लगी, जहां KFC आउटलेट और इलेक्ट्रॉनिक शोरूम मौजूद हैं। आग की ऊंची लपटें और काला धुआं देखकर इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।  बताया जा रहा है कि, आग बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर में लगी। इसके चलते फर्नीचर भी जल गया।  राहत की बात यह है कि कोई जनहानि नहीं हुई लेकिन इस आग के चलते आर्थिक नुकसान जरूर हुआ है। इसका आंकलन किया जाएगा। बड़ा हादसा टला आग लगते ही फायर ब्रिगेड को कॉल किया गया। पीपुल्स हॉस्पिटल की फायर ब्रिगेड टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई। नगर-निगम की दमकल गाड़ी भी मौके पर पहुंची थी। गनीमत रही कि, बिल्डिंग में ज्यादा लोग मौजूद नहीं थे। इस वजह से बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन अब हादसे की जांच कर रहा है। आग की वजह से इलाके में हड़कंप मच गया। अफरा-तफरी के माहौल के बीच आग पर काबू पाया गया। इससे कोई जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपए का नुकसान हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग लगने के दौरान बिल्डिंग में भीड़ नहीं थी। इस वजह से बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन नुकसान का आंकलन लगा रहा है। क्रोमा के इलेक्ट्रॉनिक शोरूम के जनरेटर से भड़की आग नगर निगम के फायर प्रभारी सौरभ पटेल ने बताया कि बिल्डिंग में क्रोमा का इलेक्ट्रॉनिक शोरूम है। इसके पास में रखे जनरेटर में आग लगी थी। इस वजह से कई एसी भी जल गए। जहां आग लगी थी, वहां पर केएफसी का आउटलेट भी है। हालांकि, उसे नुकसान नहीं पहुंचा। 20 मिनट में काबू में आई आग की वजह जनरेटर में शार्ट सर्किट होने को बताया जा रहा है। आग लगने की जानकारी मिलते ही पास में पीपुल्स हॉस्पिटल की फायर ब्रिगेड पहुंची और उसे बुझाने लगी। इसी दौरान नगर निगम की दमकल भी आ गई। दोनों ने मिलकर आग को काबू में लिया। इस वजह से आग ज्यादा नहीं फैली। बिल्डिंग के सामने लगी भीड़ करोंद में पीपुल्स हॉस्पिटल के सामने स्थित यह बिल्डिंग है। अचानक लगी आग से इलाके में हड़कंप मच गया। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और दूर तक फैलता काला धुआं देखकर इलाके में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। इससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। निशातपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। जनरेटर में लगी थी आग नगर निगम के फायर प्रभारी के अनुसार, बिल्डिंग में क्रोमा का इलेक्ट्रॉनिक शोरूम था। इसके पास रखे जनरेटर में आग लगी थी। इसके चलते कई एसी भी जल गए। जहां आग लगी वहीं केएफसी का आउटलेट है लेकिन इसे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है। करोंद इलाके में यह बिल्डिंग पीपुल्स हॉस्पिटल के बिलकुल सामने है। आग की ऊंची लपटें दूर से ही देखी जा सकती थीं। आग लगाने की सूचना मिलने पर आसपास के लोग भी पहुंचे। निशातपुरा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को संभाला।

भोपाल रीजन में CBSE 12वीं का रिजल्ट जारी, इतने फीसदी स्टूडेंट्स ने मारी बाजी

भोपाल  सीबीएससी 12वीं के लिए बुधवार का बड़ा दिन है। सीबीएससी ने 12वीं का रिजल्ट घोषित कर दिया है। यह रिजल्ट बोर्ड की वेबसाइट पर जारी कर दिया गया है। इसे उमंग एप पर भी देखा जा सकता है। भोपाल रीजन के 79.43 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए हैं। मध्यप्रदेश के स्टूडेंट्स का इंतजार बुधवार को खत्म हो गया। सीबीएसई बोर्ड ने 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए। जैसा कि पहले ही उम्मीद की जा रही थी कि मई के दूसरे सप्ताह तक यानी 15 मई से पहले रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। पत्रिका ने भी दूसरे सप्ताह में रिजल्ट जारी होने की खबरें प्रकाशित की थी। मध्यप्रदेश से 80 हजार 454 स्टूडेंट्स 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से भोपाल जिले के 9 हजार 399 स्टूडेंट शामिल हैं। भोपाल रीजन 19वें स्थान पर क्षेत्रवार प्रतिशत देखें तो देश में पहले नंबर पर त्रिवेंद्रम रहा, जहां का रिजल्ट 95.62 प्रतिशत रहा। वहीं भोपाल 79.43 प्रतिशत के साथ 19वें नंबर पर रहा। सीबीएसई बोर्ड के भोपाल रीजन में 79.43 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए हैं।  12वीं का रिजल्ट 85.20 प्रतिशत रहा देशभर में CBSE के रिजल्ट की बात करें तो 12वीं का कुल परिणाम 85.20 प्रतिशत रहा। इसमें लड़कियों का पास परसेंट 88.86% और लड़कों का उत्तीर्ण प्रतिशत 82.13% रहा। यानी लड़कियों ने लड़कों की तुलना में 6.73% बेहतर प्रदर्शन किया है। इस बार भी लड़कियों ने बाजी मार ली। सीबीएसई 12वीं पर एक नजर देशभर के 17 हजार से अधिक स्टूडेंट्स 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाए हैं। इस साल कुल 85.20 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए हैं। लड़कियों का प्रदर्शन 88.86 प्रतिशत रहा। लड़कों का प्रदर्शन 82.13 प्रतिशत रहा। आधिकारिक वेबसाइट पर देखें रिजल्ट स्टूडेंट्स अपने रिजल्ट cbse.gov.in और cbseresults.nic.in पर देख सकते हैं। वहीं स्कोरकार्ड के लिए डिजिलॉकर और उमंग एप पर भी देखा जा सकता है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपना एडमिट कार्ड (Roll Number, School Code और Admit Card ID) निकालकर रखें। कैसा था 2025 में 12वीं का रिजल्ट CBSE 12th Results: पिछले साल 2025 की बात करें तो 12वीं की परीक्षा में मध्य प्रदेश का रिजल्ट 82.46 प्रतिशत था। मध्यप्रदेश से कुल 74,502 विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से लड़कों की संख्या 38,974 और लड़कियों की संख्या 35,528 थी। एमपी में 12वीं तक सीबीएसई के कुल 1252 स्कूल हैं और कुल 475 एग्जाम सेंटर बनाए गए थे। 13वें नंबर पर था भोपाल रीजन इससे पहले 2023 की बात करें तो 12वीं का रिजल्ट 83.54 प्रतिशत था और भोपाल 12वें नबर पर था। उस समय भोपाल 12वीं के 12 हजार स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी।

PM मोदी की अपील का असर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कारकेड में कम किए वाहन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर अपने कारकेड में घटाई वाहनों की संख्या राष्ट्र हित में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने पर मध्यप्रदेश में होगा अमल, निर्देश जारी भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आहवान पर आगामी आदेश तक अपने कारकेड में वाहनों की संख्या कम कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को राज्य मंत्री परिषद की बैठक में मंत्री परिषद के सदस्यों से वर्तमान वैश्विक संकट को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने सहित राष्ट्र हित में सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने की अपील की थी। मध्यप्रदेश गंभीरता से इस पर अमल करेगा। इस तारतम्य में राज्य सरकार ने आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री के काफिले में चलेंगे 8 वाहन आगामी आदेश तक मुख्यमंत्री के कारकेड में 13 वाहनों के स्थान पर 8 वाहन ही चलेंगे। उनके भ्रमण के समय वाहन रैली आयोजित नहीं की जाएगी। सभी मंत्रीगण यात्रा में न्यूनतम वाहनों का प्रयोग करेंगे। यह भी निर्देश जारी किए गए हैं कि नव नियुक्त निगम-मंडल के पदाधिकारी सादगी से कार्यभार ग्रहण करें और वाहन रैली आयेाजित न करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के आहवान और दिए गए सुझावों के अनुरूप मध्यप्रदेश में शासकीय कार्यों में मितव्ययता के उपायों पर अमल करने को कहा है। मंत्रीगण सहित निगम-मंडल के पदाधिकारियों और आम नागरिकों से वाहनों के कम से कम प्रयोग करने, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और अनावश्यक रूप से वाहनों का उपयोग न किए जाने को कहा गया है।  

गांव-गांव मुनादी कर पशुपालकों को करें जागरूक, ज्यादा से ज्यादा पशुओं का हो टीकाकरण

गांव-गांव में मुनादी कराकर ग्रामीणों को करें जागरूक, जिससे अधिक से अधिक पशुपालक अपने पशुओं का करा सकें टीकाकरण पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने डिंडोरी जिले की ग्राम पंचायत बरगांव में वृहद पशु टीकाकरण अभियान का किया शुभारंभ 35 गांवों में पहुंचेगी 50 टीमें भोपाल  पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने डिंडोरी जिले के विकासखंड शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बरगांव में मंगलवार को वृहद पशु टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। अभियान के अंतर्गत 35 गांवों में 50 टीमों द्वारा घर-घर पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा। इस टीकाकरण अभियान का उद्देश्य गलघोंटू जैसे संक्रामक रोगों की रोकथाम कर पशुधन को सुरक्षित रखना है, जिससे पशुपालकों को होने वाली आर्थिक हानि से बचाया जा सके। इस अवसर पर मुख्य अतिथियों ने 4 बसों एवं 18 चार पहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन वाहनों में पशु चिकित्सक, पैराबेट, सहायक एवं अन्य तकनीकी कर्मचारी शामिल हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण करेंगे। कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उईके, सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते, विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम सहित राजकुमार मटाले (अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख), कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, डॉ. राखी वैश्य (डीन, वेटरनरी कॉलेज जबलपुर), डॉ. मंजीत शर्मा (कुलगुरु, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय), मनोहर लाल साहू, सुनील कांत, एच.पी. शुक्ला, डॉ. आदित्य मिश्रा, डॉ. सुनील मिश्रा, डॉ. कृष्ण कुमार एवं सतीश चौबे राष्ट्रीय संयोजक अखिल भारतीय सहित अन्य अधिकारी एवं चिकित्सक उपस्थित रहे। पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री पटेल ने टीकाकरण शिविर का अवलोकन कर अधिकारियों को अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन पशुपालकों के हित में लगातार कार्य कर रहा है तथा पशुओं को रोगमुक्त रखने के लिए यह अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा गांव-गांव में मुनादी कराकर ग्रामीणों को जागरूक किया जाए, जिससे अधिक से अधिक पशुपालक अपने पशुओं का टीकाकरण करा सकें। इस अभियान में नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर, पशुपालन विभाग जबलपुर एवं पशुपालन विभाग डिंडोरी के चिकित्सकों एवं तकनीकी टीम का विशेष सहयोग रहा।  

पंजीकृत श्रमिकों के लिए वरदान बनीं सरकारी योजनाएं: शिक्षा, इलाज और आवास की मिल रही गारंटी

पंजीकृत श्रमिकों के लिए संजीवनी बनीं शासकीय योजनाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की गारंटी भोपाल प्रदेश के पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा व्यापक कल्याणकारी कदम उठाए जा रहे हैं। श्रम विभाग और विभिन्न बोर्ड्स के माध्यम से अब श्रमिकों को जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक हर कदम पर आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है। इनमें प्रसूति सहायता ₹16 हजार, बेटियों के विवाह के लिये अनुदान 49 हजार रूपये और 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क चिकित्सा लाभ (आयुष्मान भारत) शामिल है। इसके अतिरिक्त श्रमिकों के बच्चों को वैश्विक स्तर की शिक्षा देने के लिए 'विदेश अध्ययन योजना' के तहत 40 हज़ार डॉलर तक की सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही अधिकतम 10 हजार यू.एस. डॉलर प्रतिवर्ष बतौर वार्षिक निर्वाह भत्‍ता भी प्रदान किया जाता है। राज्‍य एवं संघ लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 50 हज़ार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। श्रमिकों के आवास निर्माण के लिए एक लाख रूपये तक, ई-स्कूटर खरीदी के लिए 40 हजार रूपये तक और औजार अनुदान भी सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में भेजा जा रहा है। पात्र श्रमिक निर्धारित समय-सीमा के भीतर 'श्रम सेवा पोर्टल' या 'लोक सेवा केंद्र' के माध्यम से इन योजनाओं का लाभ ले सकते हैं। 'श्री' और 'श्रमणा' पहल से मिल रहा सम्मान सुरक्षा और संपूर्ण गारंटी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी इन योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए शासन द्वारा '(SHREE)' अभियान चलाया जा रहा है। इस विशेष जनसंपर्क और आउटरीच अभियान के माध्यम से ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर जागरूकता फैलाई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक श्रमिकों का पंजीयन हो और कोई भी शिक्षा, स्वास्थ्य या पेंशन के लाभ से वंचित न रहे। इसके साथ ही कार्यस्थल पर श्रमिकों विशेषकर महिला श्रमिकों की गरिमा, सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए 'श्रमणा' योजना भी संचालित की जा रही है। योजना में कार्यस्थलों पर पेयजल, विश्राम स्थल, बच्चों की देखभाल (चाइल्डकेयर) और सुरक्षित वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, जिससे महिला श्रमिकों को एक अनुकूल और सुरक्षित वातावरण मिल सके।  

सरकारी खर्चों पर लगाम की तैयारी, सीएम काफिले में वाहनों की कटौती पर विचार

 भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेट्रोल-डीजल उपयोग का उपयोग कम करने की अपील का असर मध्य प्रदेश सरकार में दिखने लगा है। राज्य सरकार ने तय किया है कि अब शासकीय कार्यों में उपयोग के लिए निजी एजेंसी के माध्यम से पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को टैक्सी के रूप में लिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने काफिले में से वाहनों की संख्या कम कर सकते हैं। इसके अलावा वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों की विदेश यात्रा पर भी रोक लगा रखी है। मुख्यमंत्री के काफिले में बदलाव की तैयारी मुख्यमंत्री के काफिले में लगभग 13 गाड़ियां हैं। इसमें से पांच से छह गाड़ियां कम की जा सकती हैं। सुरक्षा के हिसाब से कुछ वाहन काफिले में खाली चलते हैं, इन्हें कम किया जा सकता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री जहां भी दौरे पर जाते हैं उनके स्वागत के लिए वाहनों से जुटने वाली भीड़ पर भी रोक लगाई जा सकती है। इस बीच, वन विभाग और पुलिस को छोड़कर सभी विभागों में नए वाहन क्रय करने पर रोक लगा दी गई है। खर्चों में कटौती के सख्त निर्देश जल्द ही कम खपत वाले वाहनों के उपयोग के निर्देश जारी किए जाएंगे। वित्त विभाग यह भी निर्धारित करने जा रहा है कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का कितना और कब उपयोग हो, जल्द ही इसको लेकर निर्णय लिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मंत्रियों से कहा है कि पेट्रोल-डीजल के मद में खर्च कम करें और खुद के खर्चों में भी कटौती करें। मंत्रियों के काफिले पर स्थिति केवल जनता से पेट्रोल-डीजल के किफायती उपयोग की अपील की जा रही है, लेकिन मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या घटाने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदेश में मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्रियों को मिलाकर कुल 30 मंत्री हैं। मंत्रियों के काफिले में तीन से चार वाहन चलते हैं। स्टेट गैराज से इन्हें वाहन आवंटित होता है और पेट्रोल-डीजल भी मिलता है।  

जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा अव्वल: अब सड़कों से बहने वाला पानी भी होगा संरक्षित

खंडवा  जल संरक्षण और भूजल संवर्धन की दिशा में खंडवा नई पहचान बना रहा है. जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन के लिए अनोखी पहल की जा रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में पहाड़ों पर लाखों कंटूर खोदने के बाद अब सड़कों के किनारों पर भी कंटूर (गड्ढा) खोदकर जल संरचनाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि बारिश का पानी व्यर्थ बहने के बजाय जमीन में समा सके और भूजल स्तर में वृद्धि हो। प्रदेश में खंडवा का पहला स्थान जल संचय जन भागीदारी अभियान में खंडवा ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी रैंकिंग में खंडवा देशभर में दूसरे स्थान पर पहुंचा है, जबकि जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा पूरे मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान पर चल रहा है. खंडवा में प्रशासन द्वारा जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से लगातार व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। मिशन मोड में चल रहा अभियान वर्षा जल संरक्षण और जल बचाने के लिए जिला प्रशासन मिशन मोड में अभियान चला रहा है. कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि "जिले में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है. खेत तालाब, कुएं रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर, रिचार्ज शाफ्ट, बोरवेल रिचार्ज सिस्टम और रूफटॉप वर्षा जल संचयन जैसी योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। सड़कों के किनारों पर भी कंटूर पुराने तालाबों, जलाशयों और गड्ढों को भी नए तरीके से ठीक किया जा रहा है. अब सड़कों के किनारों पर भी कंटूर बनाए जा रहे हैं, जिससे बारिश का पानी सीधे नालों में बहने के बजाय जमीन में रिस सके. इससे आने वाले समय में भूजल स्तर में सुधार होने के साथ जल संकट से भी राहत मिलने की उम्मीद है। अब तक एक लाख कंटूर खोदे जिले में अब तक एक लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जबकि करीब ढाई लाख संरचनाएं तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वर्ष 2025 में भी खंडवा ने जल संचय करने वाले जिलों में देश में पहला स्थान हासिल किया था. प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी और सतत प्रयासों से खंडवा आने वाले वर्षों में जल संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।