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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि मंत्री के निवास पर पहुंचकर वर-वधू को दिया आशीर्वाद

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुरैना में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंषाना के निवास पहुंचकर उनकी नातिनी आयुष्मति दीपिका (पुत्री स्वर्गीय भूरा सिंह कंषाना) एवं आयुष्मान यतेन्द्र (पुत्र राव राजेश्वर सिंह, निवासी सिरसौद दयेली, ग्वालियर) को विवाह अवसर पर आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवदंपति को शुभाशीष देते हुए उन्हें उपहार भी भेंट किए और उनके सुखद एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की। इस अवसर पर वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, सांसद शिव मंगल सिंह तोमर, महापौर श्रीमती शारदा सोलंकी सहित जनप्रतिनिधि एवं परिजन उपस्थित थे।  

पानी बचाना हमारी जरूरत भी है और जिम्मेदारी भी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से प्रदेश में जल संरक्षण को मिली नई गति राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुंचा मध्यप्रदेश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। पानी बचाना बेहद जरूरी है। यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के इस अनमोल वरदान से कभी भी कमी महसूस नहीं करें। इसके लिए हमें अपने वर्तमान जल स्रोतों के साथ सूख चुके जल स्रोतों को संरक्षित करना ही होगा। उन्होंने कहा कि पानी बचाने के लिए प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। सरकार और समाज के साझा प्रयासों से हो रहे इस अभियान में बीते एक माह में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया है। प्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ ने अल्प समय में ही उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विगत 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हुआ यह अभियान जल संरक्षण, जल संरचनाओं के संवर्धन और जनभागीदारी का एक व्यापक जन-आंदोलन बनता जा रहा है। इस अभियान के प्रभाव से ही मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रैंकिंग सुधारकर अब तीसरे स्थान पर आ गया है। अभियान से पहले मध्यप्रदेश नेशनल रैंकिंग में छठवें स्थान पर था। राज्य सरकार द्वारा आगामी 30 जून तक चलाए जा रहे इस अभियान में 16 विभागों की 58 गतिविधियां नियत की गई हैं। इसके लिए लगभग 6 हजार 278 करोड़ रुपये का वित्तीय लक्ष्य तय किया गया है। इस अभियान में कुल 2 लाख 44 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों को चिन्हित कर लगभग 6 हजार 236 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्यों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। अभियान की मॉनिटरिंग एकीकृत डैश बोर्ड से आयुक्त, मनरेगा ने बताया कि अभियान की एक ही प्लेटफार्म पर नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक एकीकृत डैश बोर्ड तैयार किया गया है, जिससे सभी विभाग अपनी-अपनी विभागीय गतिविधियों की प्रगति दर्ज कर रहे हैं। इस डैश बोर्ड से जिलेवार रैंकिंग भी सुनिश्चित की जा रही है। इस डैश बोर्ड से प्रशासनिक एवं विभागीय पारदर्शिता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अभियान अंतर्गत 39 हज़ार 977 खेत तालाबों का निर्माण, 59 हज़ार 577 कूप-रीचार्ज संरचनाओं तथा 21 हज़ार 950 से अधिक पहले से निर्मित जल संरचनाओं को पुनर्जीवित भी किया गया है। इसके साथ ही अमृत सरोवरों के निर्माण और उनके उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण नगरीय क्षेत्रों में भी जल संरक्षण को लेकर व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा तालाब, कुएं और पुरानी बावड़ियों के संवर्धन, नालों की सफाई और सौंदर्यीकरण तथा रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त तेज़ गर्मी को देखते हुए नगरीय निकायों द्वारा विभिन्न स्थानों पर प्याऊ की स्थापना भी की गई है। म.प्र. जन अभियान परिषद चला रही जनजागरूकता गतिविधियाँ म.प्र. जन अभियान परिषद के माध्यम से राज्य में जल संरक्षण को लेकर व्यापक जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में 5 लाख 25 हजार से अधिक व्यक्तियों की सक्रिय सहभागिता दर्ज की गई। साथ ही प्रदेश के विभिन्न विकासखंडों में 2 हज़ार 682 जल मंदिर (प्याऊ) स्थापित किए गए हैं। स्कूलों में जागरूकता गतिविधियां स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भी इस अभियान में व्यापक तौर पर भागीदारी की जा रही है। राज्य के हजारों विद्यालयों में जल रैलियां, निबंध, पोस्टर प्रतियोगिताएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों और अभिभावकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया है। तकनीकी नवाचार अंतर्गत वॉटरशेड विकास कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन स्वीकृति और मोबाइल ऐप आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की गई है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो रही है। वन और पर्यावरण विभाग द्वारा भी जल संरक्षण के साथ पारिस्थितिकीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विभिन्न फील्ड गतिविधियां की जा रही हैं। नदियों के जल की गुणवत्ता का परीक्षण, जल संरचनाओं का निर्माण तथा पौधरोपण की तैयारी जैसे कार्य इसमें शामिल किए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा सतत् मॉनिटरिंग और नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। इससे धरातल पर मौजूद व्यावहारिक कमियों को दूर करने में भी मदद मिल रही है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में ठोस परिणाम मिलने शुरू हो गए है। मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल देश के दूसरे राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनती जा रही है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का रीवा में हुआ आत्मीय स्वागत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लखनऊ से विमान द्वारा रीवा एयरपोर्ट पहुंचे। रीवा एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत किया गया। रीवा एयरपोर्ट पर विधायक त्योंथर श्री सिद्धार्थ तिवारी, कमिश्नर बीएस जामोद, आईजी गौरव राजपूत, डीआईजी हेमंत सिंह चौहान, प्रभारी कलेक्टर सपना त्रिपाठी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री रीवा में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रीवा एयरपोर्ट से सुबह 10:05 बजे रीवा से तमिलनाडु के कोयंबटूर के लिए रवाना होंगे।  

मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का हो रहा है निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

फिरोजिया ट्रॉफी विजेताओं के लिये अतिरिक्त पुरस्कार की घोषणा की फिरोजिया ट्रॉफी का फाइनल मैच देखा, खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। शासन का प्रयास है कि खिलाड़ियों को हर स्तर पर आधुनिक खेल संरचना, प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों। शासन के इन प्रयासों से मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाएं विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उज्जैन में भी विभिन्न खेल मैदानों में खेल व्यवस्थाओं का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। उज्जैन के क्षीर सागर मैदान को भी नगर निगम और खेल विभाग द्वारा विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को देर रात उज्जैन में फिरोजिया ट्रॉफी का फाइनल मैच देखा और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने इस अवसर पर फिरोजिया ट्रॉफी की विजेता टीम को रुपए 1 लाख और उप विजेता टीम को 51 हजार रुपए के अतिरिक्त नगद पुरस्कार की घोषणा भी की। फिरोजिया ट्रॉफी का आयोजन 12 अप्रैल से 19 अप्रैल तक उज्जैन के क्षीर सागर मैदान पर किया गया। फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों के बीच रोमांचक संघर्ष देखने को मिला, जिससे दर्शक अंत तक मैच का आनंद लेते रहे। सांसद श्री अनिल फिरोजिया ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का फिरोजिया ट्रॉफी में प्रत्येक वर्ष पधारने और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने पर आभार व्यक्त किया। फिरोजिया ट्रॉफी सांसद श्री अनिल फिरोजिया के पिता स्व. भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति में विगत 21 वर्षों से हर वर्ष आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार रुपए 5 लाख 51 हजार है और द्वितीय पुरस्कार 2 लाख 51 हजार रुपये है। प्रतियोगिता में इस वर्ष नारी शक्ति वंदन की भावना को साकार करते हुए महिला क्रिकेट मैच और मातृशक्ति सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, श्री रवि सोलंकी और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।  

विज्ञान मंथन यात्रा से विद्यार्थियों की तीक्ष्ण होगी वैज्ञानिक दृष्टि

इसरो एवं सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के भ्रमण से मिलेगा व्यावहारिक ज्ञान 375 विद्यार्थी एवं 27 शिक्षक चयनित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीं शुभकामनाएं भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने “विज्ञान मंथन यात्रा : 2025-26” के लिए चयनित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे विद्यार्थी भविष्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहतर योगदान देने के लिए प्रेरित होंगे। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा मिशन एक्सीलेंस अभियान के अंतर्गत “विज्ञान मंथन यात्रा 2025-26” का आयोजन किया जा रहा है। यह पहल विद्यार्थियों को विज्ञान के व्यावहारिक पक्ष से जोड़ने तथा उनके ज्ञान-विस्तार में सहायक सिद्ध होगी। यात्रा आज से प्रारंभ होकर 27 अप्रैल, 2026 तक संचालित की जाएगी। योजना में शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के कक्षा 10वीं के मेधावी विद्यार्थी तथा कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विज्ञान संकाय के विद्यार्थी शामिल हैं। इस भ्रमण कार्यक्रम के लिए वही विद्यार्थी पात्र हैं, जिन्होंने पिछली कक्षा में न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों। इस वर्ष कुल 375 विद्यार्थियों एवं 27 शिक्षकों का चयन किया गया है। चयनित विद्यार्थियों के साथ विज्ञान शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भी यात्रा में शामिल हैं। यात्रा में विद्यार्थियों को देश के प्रतिष्ठित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु तथा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा सहित प्रमुख अनुसंधान संस्थानों एवं प्रयोगशालाओं का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा। विद्यार्थियों को वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं के समाधान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। छात्र-छात्राएं चंद्रयान मिशन सहित विभिन्न उपकरणों के मॉडल एवं उनकी कार्य-प्रणाली को नजदीक से समझ सकेंगे। साथ ही, वे उन वैज्ञानिकों से भी मुलाकात करेंगे, जिन्होंने मिशन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।  

मध्य प्रदेश के जंगलों में आग का तांडव, 60 स्थानों पर जल रही आग, अमरकंटक के बाद इन शहरों पर खतरा

भोपाल  भीषण गर्मी की दस्तक के साथ ही मध्य प्रदेश के जंगलों से डराने वाली खबरें आने लगी हैं। पिछले तीन सालों से मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में शीर्ष पर बना हुआ है जहां जंगल की आग ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक साल 2025-26 में मध्य प्रदेश 14,506 आग की घटनाओं के साथ देश में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि पिछले साल राज्य इस मामले में नंबर-1 पर था। हर दिन 60 जगह धधक रही है आग मध्य प्रदेश में औसतन हर दिन 60 जगहों पर आग की लपटें दिखाई दे रही हैं। पिछले हफ्ते अमरकंटक के जंगलों में लगी भीषण आग ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी थी। वन विभाग ने देवास, सीहोर, रायसेन, बैतूल, सिवनी, छिंदवाड़ा, सागर, दमोह और कटनी के पास के जंगलों को अति संवेदनशील घोषित किया है। फॉरेस्ट विभाग का पराली वाला तर्क हैरानी की बात यह है कि एमपी फॉरेस्ट विभाग इन आंकड़ों के पीछे एक तकनीकी थ्योरी दे रहा है। अधिकारियों का दावा है कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI), देहरादून के सैटेलाइट खेतों में जलने वाली पराली और जंगल की आग में अंतर नहीं कर पाते। चूंकि मध्य प्रदेश पराली जलाने के मामले में भी देश में टॉप पर है, इसलिए खेत की आग को अक्सर जंगल की आग मान लिया जाता है, जिससे राज्य की रैंकिंग खराब हो रही है। बचाव के लिए क्या हो रहा है काम? विभाग का कहना है कि वे सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए कर रहे हैं। ग्राउंड स्टाफ को तुरंत सूचना भेजी जाती है ताकि वे मौके पर पहुंच सकें। इसके अलावा:करीब 1 लाख किलोमीटर लंबी फायर लाइन (साफ की गई जमीन की पट्टियां) बनाई गई हैं।संवेदनशील इलाकों में विशेष वॉच टावर स्थापित किए गए हैं।सैटेलाइट अलर्ट सीधे फॉरेस्ट गार्ड के मोबाइल तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

मंत्री राजपूत ने बताया, एक लाख 45 हजार 71 किसानों से 63 लाख 27 हजार 410 क्विंटल गेहूँ की खरीदी

एमएसपी पर गेहूँ की खरीदी जारी एक लाख 45 हज़ार 71 किसानों से की जा चुकी है 63 लाख 27 हजार 410 क्विंटल गेहूँ की खरीदी : मंत्री राजपूत भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक एक लाख 45 हज़ार 71 किसानों से 63 लाख 27 हजार 410 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 920 करोड़ 7 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। अभी तक 5 लाख 36 हजार 367 किसानों द्वारा 2 करोड़ 25 लाख 96 हजार 450 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। किसानों की सुविधा के लिए उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़कर 6 कर दी गई है। इससे समय पर किसानों द्वारा लाये गए गेहूं की तुलाई हो सकेगी। खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूँ की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। सेटेलाइट ई-मेल में मिलान नहीं पाए गए खसरों को छोड़कर उसी किसान के शेष खसरों पर गेहूँ की फसल विक्रय हेतु स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी गई है। स्लॉट बुकिंग की क्षमता बढ़ाई उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूँ विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 1500 क्विंटल की गई है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूँ बिक्री की सभी सुविधाएं मंत्री राजपूत ने बताया है कि उपार्जन केंद्रों में गेहूँ विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने, तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। समर्थन मूल्य के साथ बोनस भी मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूँ में से 51 लाख 75 हजार 370 क्विंटल गेहूँ का परिवहन किया जा चुका है। उपार्जन के लिए रिकार्ड पंजीयन प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।  

2938 स्थानों पर जांच, 4547 गैस सिलेंडर जब्त, प्रशासन का बड़ा एक्शन

अब तक 2938 स्थानों पर हुई जाँच, 4547 गैस सिलेण्डर किये गये जब्त भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिये निरंतर कार्यवाही की जा रही है, अभी तक 2938 स्थानों पर जांच की गई, 4547 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किये गए तथा 12 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रदेश के 765 रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) की जांच कराई गई है। इसमें 2 प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। प्रदेश के समस्त जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को सतत् रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध है। मंत्री राजपूत ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि पीएनजी पाइपलाइन जिन क्षेत्रों में बिछ चुकी है, उस क्षेत्र के उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन जरूर लें। इससे उन्हें गैस सिलेंडर लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गैस की सतत आपूर्ति होगी। उपभोक्ताओं से आग्रह है कि किसी तरह का भ्रम नहीं पालें। पीएनजी पूरी तरह से सुरक्षित है। भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भण्डार है, देश एवं प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की निरंतर सप्लाई हो सके एवं सप्लाई में कोई रुकावट न आए। मध्यप्रदेश और पूरे देश में एलपीजी (LPG) पेट्रोल, डीजल, पीएनजी एवं सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मंत्री राजपूत ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित 70% सीमा के अधीन संस्थाओं एवं प्रतिष्ठानों को तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार सप्लाई निरंतर जारी रखने के निर्देश दिये हैं। यह भी ध्यान रखा जाये कि सड़क पर कारोबार कर रहे छोटे व्यवसायी (स्ट्रीट वेण्डर) को भी उक्त अनुसार कमर्शियल सिलेण्डर प्रदाय किये जायें। ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय (Extended Hours) तक काम कर रहे हैं। प्रदेश के जिलों में स्थित बॉटलिंग प्लांट तथा वितरकों के पास उपलब्धता एवं प्रदाय की सतत् रूप से समीक्षा की जा रही है। साथ ही माइग्रेन्ट लेबर, छात्रों आदि के लिए खाना पकाने के लिये 05kg के सिलेण्डेर ऑयल कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आम जनता से अपील की गई है कि वह वैकल्पिक साधनों, जैसे इंडक्शन, सोलर कुकर, बायो गैस, गोबर धन तथा स्वससहायता समूहों द्वारा उत्पादित गो-काष्ठ का उपयोग करें। वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग को उनके यहां रजिस्‍टर्ड 44 कम्‍प्रेस्‍ड बायोगैस (सीबीजी) प्रोजेक्‍ट को चालू करने के निर्देश दिये गये हैं। इसी प्रकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 44 जिलों में 136 बायोगैस प्‍लांट संचालित होना बताया गया है। इन बायोगैस प्‍लांटों को क्रियाशील करने के निर्देश भी दिये गये हैं। रसोई गैस की स्थिति रसोई गैस का प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के विरूद्ध एलपीजी सिलेण्डर का प्रदाय निरंतर रूप से किया जा रहा है। साथ ही कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार आवंटन प्रतिशत के आधार पर कॉमर्शियल गैस सिलेण्डरों की सप्लाई सतत् रूप से की जा रही है। घरेलू एवं कॉमर्शियल की सप्लाई में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। घरेलू एवं कॉमर्शियल सिलेण्डर की सप्लाई एवं वितरण सामान्य है। पीएनजी गैस सीजीडी संस्थाओं तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिन घरों में पाइप लाइन की अधोसंरचना उपलब्ध है, एवं सप्लाई प्राप्त नहीं कर रहे है, ऐसे घरों को आगामी 03 माह में पीएनजी से कनेक्ट करने के लिये निर्देशित किया गया। इस के लिये सभी सीजीडी संस्था एवं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कैम्प लगाए जाएं, जिसमें जिला प्रशासन, खाद्य विभाग नगर निगम/नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी संस्थाओं के जिला अधिका‍री को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे सभी घरों एवं व्यवसाईयों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराई जाये। अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन स्थानों पर पूर्व से पीएनजी की पाइप लाइन है, सर्वप्रथम उन्हें प्राथमिकता से कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही नई पाइन लाइन डालकर कनेक्श‍न का कार्य भी साथ-साथ किया जाए। सीजीडी संस्थाओं द्वारा अवगत कराया गया कि उन्होंने जिला कलेक्टर्स के माध्यम से आवश्यक मैन पॉवर प्राप्त करने की कार्यवाही कर ली है तथा आगामी माहों में लक्ष्य् के अनुसार नये पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध करा दिए जाएंगे। भारत सरकार के निर्देशानुसार जिन स्थानों से पीएनजी की पाइन लाइन गई है, उसके आस पास के घरेलू एवं कॉमर्शियल उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन प्राप्त कर लें क्योंकि पीएनजी कनेक्शन प्राप्त न करने की स्थिति में आगामी 03 माह में एलपीजी की सप्लाई बंद की जा सकती है। समस्त सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरूद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शन की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य शासन द्वारा पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिए सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन किये जाने के 24 घंटे के अंदर पाइप लाइन बिछाने की आरओयू स्वी्कृतियां जारी की जा रही हैं। अभी तक प्राप्त सभी स्वीकृतियां जारी की जा चुकी है तथा कोई भी आवेदन शेष नहीं है। गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थाओं/सुधार ग़ृ़हों के साथ-साथ पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्यं प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय, पुलिस कॉलोनी, आदि में जहां से आस-पास पाइप लाइन बिछी हुई है, उनको प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में जहां आस-पास पाइप लाइन गई है, उन क्षेत्रों की औद्योगिक इकाइयों की पहचान की जाकर पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश सीजीडी संस्थाओं को दिये गये हैं।  

मोनालिसा गर्भवती, केरल से खाली हाथ लौटी MP पुलिस, पेशी की संभावना नहीं

खंडवा  प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान वायरल हुई मोनालिसा भोंसले और उसके पति मोहम्मद फरमान को हिरासत में लेने के लिए कुछ दिन पहले केरल के कोच्चि पहुंची मध्य प्रदेश पुलिस की एक टीम को वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार फरमान ने पुलिस को बताया कि मोनालिसा गर्भवती है इसलिए वह पुलिस के सामने तुरंत पेश होने में असमर्थ है। जिसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस फिलहाल वहां से लौट गई। इस टीम में एक महिला अधिकारी सहित कुल पांच सदस्य थे। मनोरमा न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार MP पुलिस की टीम 17 मार्च को यहां पहुंची थी और इस जोड़े का पता लगाने में नाकाम रही। इसके अलावा पुलिस को फरमान के एक दोस्त जोशुआ की तलाश थी, हालांकि उसे खोज पाने में भी पुलिस नाकाम रही। जोशुआ पर आरोप है कि उसने शादी कराने से लेकर वहां रहने का इंतजाम करने तक में इस जोड़े की मदद की। फरमान ने दी MP पुलिस को जानकारी रिपोर्ट के अनुसार MP से आई महेश्वर पुलिस एक महिला सब-इंस्पेक्टर को मोहम्मद फरमान ने अपनी पत्नी के गर्भवती होने की जानकारी दी। इस जोड़े ने 11 मार्च को तिरुवनंतपुरम के एक मंदिर में शादी की थी। इसके तुरंत बाद, लड़की के पिता ने मध्य प्रदेश में एक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें दावा किया गया कि लड़की की उम्र सिर्फ 16 साल है। इसके बाद मोहम्मद फरमान के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। हालांकि, लड़की का दावा है कि वह बालिग है। मोनालिसा ने सरकार से की थी सुरक्षा की मांग मध्य प्रदेश पुलिस के कोच्चि पहुंचने के बाद मोनालिसा ने केरल के मुख्यमंत्री और कोच्चि शहर के पुलिस प्रमुख को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की थी। वहीं मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा जारी फरमान के गिरफ्तारी वारंट पर केरल हाई कोर्ट ने पहले ही आगे की कार्यवाही तक रोक लगा दी थी। यह रोक 20 मई तक के लिए लगाई गई है। ST आयोग की जांच में नाबालिग निकली थी मोनालिसा मध्य प्रदेश की रहने वाली मोनालिसा भोसले ने पिछले महीने तिरुवनंतपुरम के एक मंदिर में यूपी के पालरा के रहने वाले फरमान खान से शादी कर ली थी। इस मामले ने उस वक्त तूल पकड़ लिया था, जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच में मोनालिसा को नाबालिग पाया गया था। उधर लड़की के माता-पिता ने भी दावा किया था कि उनकी बेटी की उम्र अभी सिर्फ 16 साल है, जिसके बाद फरमान के खिलाफ महेश्वर पुलिस ने मोनालिसा के अपहरण का मामला दर्ज कर लिया था। मोनालिसा खुद को बता रही 18 साल का MP पुलिस के कोच्चि पहुंचने पर मोनालिसा ने राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और कोच्चि के पुलिस कमिश्नर को एक आवेदन सौंपकर सुरक्षा की मांग की थी। उस आवेदन में मोनालिसा ने दावा किया है कि उसकी उम्र 18 साल है और आरोप लगाया था कि उसे जबरन मध्य प्रदेश ले जाने की कोशिशें की जा सकती हैं। ऐसे में उसने ऐसी किसी भी कोशिश को रोकने के लिए अपने और फरमान के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। इससे पहले लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने 25 मार्च को मध्य प्रदेश के महेश्वर थाने में खान के खिलाफ कथित अपहरण और पॉक्सो अधिनियम और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। 

राज्यपाल पटेल का बयान: प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण में ही सेवा का असली उद्देश्य

प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण प्रयासों में ही सेवा की सार्थकता : राज्यपाल पटेल राज्यपाल से भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी मिले लोकभवन में भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय वन सेवा, महज प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि मानवता, प्रकृति, वन्य जीव, सांस्कृतिक धरोहर और भावी पीढ़ियों के प्रति भी एक उत्तरदायित्व है। आप सभी सौभाग्यशाली है, जिन्हें जीवन भर प्रकृति की गोद में रहकर उसके संरक्षण और संवर्धन का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारी, वन कानूनों और जनजातीय कल्याण के प्रावधानों का गहनता से अध्ययन करें, उन्हें समझे और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लागू करें। प्रशिक्षण की सीख को प्रकृति, वन, वन्य जीव और स्थानीय जन जीवन की बेहतरी में उपयोग करें। उनके कल्याण प्रयासों में ही आपकी सेवा की सार्थकता है। यह याद रखें कि आपका आत्मीय व्यवहार, वंचितों के प्रति समानुभूति और संवेदनशीलता ही आपकी सफलता का अंतिम पैमाना होगी। राज्यपाल पटेल सोमवार को भारतीय वन सेवा के 2024-26 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों के सौजन्य भेंट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा में चयन की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। लोकभवन के बैंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। पर्यावरण संरक्षण के लिए सोच, संकल्प और सेवा भाव जरूरी राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्राकृतिक असंतुलन, पर्यावरणीय चुनौतियों आदि के कारण वन एवं वन्य जीवन के संकट का समाधान अत्यंत जरूरी है। वन अधिकारी के रूप में पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन आपका प्राथमिक दायित्व है। इसके लिए आपकी सोच, संकल्प और सेवा का भाव सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ हमेशा आत्मीय, सरल और सहज व्यवहार करें। अपने अच्छे व्यवहार और सहयोग से उनका विश्वास जीते। वनों की अवैधानिक कटाई, शिकार आदि समस्याओं के समाधान में स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त करें। राज्यपाल पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “एक पेड़-माँ के नाम” अभियान की चर्चा की। इसे स्थानीय सहभागिता से प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की सराहनीय पहल बताया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ की वन भूमि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के साथ हमारी गौरवशाली सभ्यता, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी संजोए हुए हैं। प्रदेश में विस्तृत और विश्व प्रसिद्ध वन, अनेक राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य है। मध्यप्रदेश बाघ, चीतल, तेंदुआ, गिद्ध, घड़ियाल और चीता स्टेट के रूप में प्रसिद्ध है। राज्य में गैंडा, हाथी आदि वन्य जीवों के पुनर्वास के अभूतपूर्व प्रयास भी चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग के वैज्ञानिक प्रबंधन प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश आज वन-वन्य जीव प्रबंधन में अग्रणी राज्य है। सतत्-समावेशी विकास और संरक्षण, आपकी जिम्मेदारी राज्यपाल पटेल ने कहा कि देश में जनजातीय आबादी और वनों में मध्यप्रदेश प्रथम है। यहाँ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सतत्-समावेशी विकास और संरक्षण के द्वारा और अधिक समृद्ध बनाना आपकी जिम्मेदारी है। जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, विश्वास, मान्यताओं और मौलिकता के प्रति सम्मान के भाव के साथ कार्य करना, आपका नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय के प्राकृतिक और संवैधानिक अधिकारों के रक्षक के रूप में उनके सशक्तिकरण और कल्याण में आपकी भूमिका बहुत प्रभावी है। अपनी प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, घटते वन क्षेत्र, जैव विविधता के संकटों के समाधान में करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग के साथ वन, वन्य जीवों और स्थानीय लोगों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य करें। जनजातीय समुदाय की प्रकृति आधारित जीवन शैली, जड़ी-बूटियों के ज्ञान और कला की मौलिकता से आधुनिक जगत को परिचित कराएं। उनके लिए सतत आजीविका के प्रयासों में सहयोग करें। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का महत्व बताएं राज्यपाल पटेल ने कहा कि जब भी मैदानी भ्रमण पर जाएं तो स्थानीय लोगों से उनके बच्चों की शिक्षा की जानकारी जरूर लें। उन्हें शिक्षा का महत्व बताएं। अभिभावकों और बच्चों के साथ शिक्षा से जीवन में होने वाले बदलावों के संबंध में प्रेरक संवाद करें। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय की नई पीढ़ी को शिक्षा, कौशल उन्नयन तथा स्वास्थ्य और आजीविका की कल्याणकारी योजनाओं, कानूनों और प्रावधानों का लाभ लेने प्रेरित और प्रोत्साहित करें। राज्यपाल पटेल का प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने पुष्प गुच्छ से स्वागत किया। उनका यादव और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल पटेल ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों से परिचय प्राप्त किया। स्वागत उद्बोधन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एच.आर.डी.) डॉ. बी.एस अन्निगेरी ने दिया। प्रशिक्षु अधिकारी सुसौम्या ने प्रशिक्षण के अनुभवों को साझा किया। उप वन संरक्षक मयंक सिंह गुर्जर ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन, वन विभाग-लोकभवन के अधिकारी और प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित रहे।