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कोर्ट के निर्णय के अनुरूप होगी अगली विधिक कार्रवाई, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही बड़ी बात

न्यायालय के निर्णय के संदर्भ में आगामी विधिक कार्यवाही सुनिश्चित करेगी सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि माननीय उच्‍च न्‍यायालय ने ओबीसी को 27% आरक्षण देने से जुड़े प्रकरण में वर्ष 2019-22 के बीच की गई नियुक्तियों के संबंध में महत्‍वपूर्ण निर्णय दिया है। राज्‍य सरकार मान. उच्‍च न्‍यायालय के इस निर्णय का विधिक परीक्षण कर आगामी विधिक कार्यवाही सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा कि माननीय न्‍यायालय ने 13% अतिरिक्‍त नियुक्तियों को संरक्षित करते हुए आगामी भर्ती में समायोजित करने का निर्देश दिया है। माननीय न्‍यायालय ने वर्ष 2022 के पश्‍चात निर्णय दिनांक तक की गई भर्तियों के संबंध में 13% होल्‍ड किए पदों पर सामान्‍य वर्ग के अभ्‍यर्थियों को नियुक्ति प्रदान करने का निर्देश दिया है। तत्‍कालीन सरकार द्वारा अध्‍यादेश के माध्‍यम से लागू 27% आरक्षण का नोटिफिकेशन लचर और त्रुटिपूर्ण था। यह माननीय न्‍यायालय के इस निर्णय से सिद्ध हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तत्‍कालीन सरकार ने कतिपय कारणों से अत्‍यंत जल्‍दबाजी में यह अध्‍यादेश लाने का कार्य किया था। इस संबंध में राष्‍ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी सलाह नहीं ली गई थी। माननीय न्‍यायालय के फैसले से तत्कालीन सरकार के 27% आरक्षण देने की मंशा पर संदेह उत्‍पन्‍न हुआ है।  

मध्यप्रदेश में 10 ग्रामीणों को मिला संपत्ति का मालिकाना अधिकार, मुख्यमंत्री ने वितरित किए रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों को वितरित किये रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र स्वामित्व अधिकार अभिलेख हस्तांतरण योजना से मिला 10 हितग्राहियों को मालिकाना हक भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को हरदा जिले में आयोजित कार्यक्रम में स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के हस्तांतरण विलेख के निष्पादन योजना के अंतर्गत वर्ष 2026 के हितग्राहियों को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र वितरित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम गोंदागांव के ग्रामीण निर्भयदास एवं भैयालाल को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र प्रदान किये। इस दौरान अन्य आठ हितग्राहियों को भी रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र ग्रामीणजन को उसकी भूमि का अधिकार मिले। स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को न केवल कानूनी सुरक्षा मिल रही है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रहे हैं। रजिस्ट्री मिलने से उनकी संपत्ति की कीमत बढ़ेगी और वे शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकेंगे। रजिस्ट्री प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अपनी भूमि का विधिवत मालिकाना हक मिलने से उन्हें अब बैंक से ऋण लेने में आसानी होगी तथा अपनी भूमि पर वे निर्भय होकर निर्माण एवं अन्य कार्य कर सकेंगे। उन्होंने सरकार की इस योजना की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर को निर्देश दिये कि भू-स्वामित्व के अंतर्गत रजिस्ट्री के कार्य में गति बढ़ाएं एवं पटवारियों को बताए कि शासकीय कार्य निष्पादन में किसी के भी विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी, जिसमें वह राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में निष्पादन अधिकारी घोषित है। रजिस्ट्री का निष्पादन अधिकार अभिलेख में उल्लेखित जानकारी के आधार पर ही किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति के स्वामित्व का निर्धारण अथवा नई जानकारी का सृजन नहीं किया जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके, पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय सुदाम खाड़े तथा कमिश्नर नर्मदापुरम श्रीकांत बनोठ, आईजी चंद्रशेखर सोलंकी, कलेक्टर सिद्धार्थ जैन, पुलिस अधीक्षक शशांक सहित अन्य जनप्रतिनिधि, हितग्राही और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  

मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 में दिखी प्रदेश की स्वादिष्ट विरासत, विदेशी मेहमानों ने चखे स्थानीय पकवान

मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026: अंतर्राष्ट्रीय अतिथियों ने चखा मध्यप्रदेश के पारंपरिक स्वाद का जायका ‘मां की रसोई’ में स्थानीय व्यंजनों की खुशबू और स्वाद ने जीता मेहमानों का दिल भोपाल  मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 मे अंतर्राष्ट्रीय स्टेकहोल्डर्स, टूर ऑपरेटर्स, हॉस्पिटेलिटी प्रतिनिधियों और डेलीगेट्स को प्रदेश की समृद्ध पर्यटन विरासत के साथ-साथ यहां के पारंपरिक खाने का स्वाद भी चखने का मौका मिला। ट्रैवल मार्ट में परोसे गए अलग-अलग व्यंजनों से मेहमानों को मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों के स्वाद का अनुभव मिला। पारंपरिक मसालों की खुशबू, देसी खाने और घर के स्वाद ने भोजन के अनुभव को खास बना दिया। ‘मां की रसोई’ में सजे मध्यप्रदेश के पारंपरिक स्वाद ट्रैवल मार्ट में ‘मां की रसोई’ लाइव फूड काउंटर विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यहां मेहमानों ने मध्यप्रदेश के अलग-अलग इलाकों के पारंपरिक खाने और खास स्वाद का आनंद लिया। मिलेट ब्रेड, घर की बनी चटनियां, मट्ठे के आलू, चक्की का साग, निघौना, उड़द की दाल जैसे पारंपरिक व्यंजनों ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए मेहमानों को प्रदेश के ग्रामीण और घरेलू स्वाद से रूबरू कराया। स्थानीय अनाज और देसी स्वाद का संगम विशेष रूप से कोदो मेथी भात ने मेहमानों को मध्यप्रदेश के पारंपरिक अनाज और स्थानीय खान-पान की समृद्ध परंपरा का अनुभव कराया। वहीं मट्ठे के आलू और चक्की के साग में देसी मसालों का संतुलित स्वाद और पारंपरिक पकाने की विधि की झलक दिखाई दी। घर में तैयार की जाने वाली चटनियों ने इन व्यंजनों के स्वाद को और अधिक समृद्ध किया। मिलेट से तैयार ब्रेड ने पारंपरिक अनाजों को आधुनिक प्रस्तुति के साथ जोड़ते हुए मेहमानों का ध्यान आकर्षित किया। दाल-बाफला में घुला मालवा का पारंपरिक स्वाद मध्यप्रदेश के पारंपरिक स्वाद के साथ मेहमानों को दाल बाफला, भटे का भरता और चूरमा के लड्डू का भी स्वाद मिला। मालवा की पहचान से जुड़े इस पारंपरिक भोजन ने खास तौर पर मेहमानों को आकर्षित किया। बुरहानपुर की मावा जलेबी ने बढ़ाई मिठास बुरहानपुर की मावा जलेबी और रबड़ी, मावा बाटी, दूध का हलवा जैसे पारंपरिक मिष्ठानों ने भोजन को मिठास से भर दिया। विशेष रूप से बुरहानपुर की मावा जलेबी का स्वाद मेहमानों के लिए मध्यप्रदेश की मिठास और स्थानीय खाने की विरासत का यादगार अनुभव रहा। मध्यप्रदेश के स्वाद से लेकर वैश्विक जायके तक ट्रैवल मार्ट में पारंपरिक व्यंजनों के साथ आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्वादों का भी समावेश किया गया। लाइव पास्ता काउंटर, विभिन्न प्रकार के सलाद, और अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों ने देश-विदेश से आए मेहमानों की अलग-अलग स्वाद पसंद का ध्यान रखा। इस तरह भोजन की पूरी श्रृंखला में मध्यप्रदेश की पारंपरिक रसोई से लेकर आधुनिक वैश्विक खान-पान तक की विविधता देखने को मिली।  

विधायकों के विरोध के बावजूद भोपाल में रजिस्ट्री महंगी करने की तैयारी, कॉलोनियों में बढ़ेंगी दरें

भोपाल  भोपाल में कलेक्टर गाइडलाइन में पिछले दरवाजे से दरवृद्धि की फिर से तैयारी है। इस बार 200 से अधिक क्षेत्र मर्ज करने की तैयारी की जा रही है। मुख्य मार्ग से जोड़ने से अंदरूनी क्षेत्रों में दर 40 फीसदी तक बढ़ जाएगी। यहां रजिस्ट्री महंगी होगी। प्रशासन दो साल से सीधे दरों में बढ़ोतरी के साथ क्षेत्रों की संख्या घटाकर अप्रत्यक्ष रूप से भी रजिस्ट्री महंगी कर रहा है। 2025 में तो 1000 क्षेत्रों को मर्ज कर दिया था। इससे कई क्षेत्रों में 200 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई थी। यहां के क्षेत्र मर्ज करेंगे अयोध्या बायपास से जुड़े 40 क्षेत्रों को मुख्यमार्ग व अंदरूनी क्षेत्रों की मर्जिंग होगी। इसके साथ संतनगर मुख्यमार्ग के 32 क्षेत्रों को अंदरूनी क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा। रातीबढ़ से लेकर नीलबड़, कलखेड़ा, बरखेड़ा नाथू में मुख्यमार्ग से 600 मीटर अंदर तक के क्षेत्र की एक समान दर की जा रही। यहां 18 क्षेत्र मर्ज करेंगे। कोलार रोड के साथ सनखेड़ी मास्टर प्लान रोड से अंदर वाले क्षेत्र मुख्यमार्ग से जोड़े जा रहे। ये भी 35 क्षेत्र है। ऐसे होगा असर क्षेत्रों को मर्ज करने की इस नीति का सबसे बड़ा नुकसान मध्यमवर्गीय और आम गृह खरीदारों पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी मुख्य मार्ग की गाइडलाइन दर 4,000 प्रति वर्गफीट है और उसके अंदर स्थित कॉलोनी की दर 2,500 प्रति वर्गफुट थी, तो विलय के बाद कॉलोनी के अंदरूनी मकान की दर भी 4,000 प्रति वर्ग फुट मानी जाएगी। जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य भले ही कम हो, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में दरें मुख्य मार्ग के बराबर होने से स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क का बोझ सीधा खरीदार की जेब पर पड़ेगा। विरोध भी बेअसर कलेक्टर गाइडलाइन तय करने के लिए आयोजित होने वाली जिला मूल्यांकन समिति की बैठकों में स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने लगातार इस नीति का कड़ा विरोध किया है। विधायकों का तर्क रहा है कि मुख्य मार्ग और अंदरूनी क्षेत्रों का व्यावसायिक और आवासीय मूल्य कभी एक समान नहीं हो सकता। ये है स्थिति 2024: 3900 क्षेत्रों के आधार पर 25 से 95 फीसदी दरवृद्धि की थी 2025 में 2885 क्षेत्रों के आधार पर दरें तय की थी। 18 फीसदी बढ़ोतरी तय की थी। 2026 में अब 2680 क्षेत्र करने की स्थिति

मध्यप्रदेश में मौसम बना जानलेवा, एक साल में 537 मौतें; बढ़ती गर्मी और कंक्रीट से बढ़ी चिंता

भोपाल  आप इस बात की कल्पना कीजिए कि लगभग हर सुबह की शुरुआत किसी ना किसी प्राकृतिक आपदा की खबर से हो. कहीं भीषण गर्मी, कहीं तूफान, कहीं बाढ़ तो कहीं भूस्खलन. भारत के लिए साल 2025 में यह कल्पना नहीं, बल्कि सच्चाई बन चुकी थी. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) और पत्रिका डाउन टू अर्थ के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 के बीच 334 में से 331 दिन ऐसे रहे, जब देश के किसी ना किसी हिस्से में अत्यधिक मौसमीय घटना (Extreme Weather Event) दर्ज की गई. यानी पूरे साल का लगभग 99 प्रतिशत समय. अगर 2024 से तुलना करें तो पिछले साल यह आंकड़ा 295 दिनों का था. इन आपदाओं में 4400 से अधिक लोगों की जान गई और करीब 1.74 करोड़ हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई, जो बदलते जलवायु संकट की भयावह तस्वीर पेश करती है।  साल 2025 में मौसम संबंधी घटनाओं की वजह से मध्यप्रदेश में 537 लोगों की मौत हुई। पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर काम करने वाले संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की ओर से यह रिपोर्ट जारी की गई है।कहीं गर्मी, कहीं बारिश, कहीं सूखा तो कई जगहों पर भूजल और बोरवेल का दबाव लोगों के सामने चुनौती बनकर आया है। इसका असर लोगों की आजीविका और कमाई पर भी पड़ा है।अलग-अलग इलाकों की अपनी समस्याएं हैं। ऐसे में वहां की जरूरत के हिसाब से तैयारी भी जरूरी है।इसी को समझने के लिए वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (WRI) ने मध्यप्रदेश में जलवायु जोखिमों का अध्ययन किया और उनसे निपटने के उपायों पर रिपोर्ट तैयार की है। कंक्रीट और बदलता मौसम पैटर्न WRI की रिसर्च में सबसे अहम बात यह सामने आई है। दावा किया गया है कि मध्यप्रदेश में जलवायु जोखिम एक जैसा नहीं है। शहरों में बढ़ती गर्मी और कंक्रीट का विस्तार चुनौती बन रहा है। वहीं ग्रामीण इलाकों में बारिश का बदलता पैटर्न, सूखा, पानी की उपलब्धता और खेती की बदलती परिस्थितियां बड़ा जोखिम हैं। जंगल वाले क्षेत्रों में आग, पानी और वन आधारित आजीविका पर असर पड़ रहा है। इसी वजह से WRI की रिसर्च में जगह के हिसाब से जोखिम की पहचान और उसी के अनुसार समाधान तैयार करने पर जोर दिया गया है। 5 बड़े शहरों के हाल जानें 1. भोपाल : शहर एक, अंदर 4 से 6 डिग्री तक का अंतर WRI की नई हीट रिसर्च में भोपाल का उदाहरण बताता है कि गर्मी का असर शहर के हर हिस्से में एक जैसा नहीं है। झीलों और हरित क्षेत्रों के कारण कई हिस्सों को प्राकृतिक ठंडक मिलती है, लेकिन घनी बसाहट और कम छायादार इलाकों में हालात बदल जाते हैं। यहां तापमान आसपास के रिहायशी क्षेत्रों की तुलना में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा पाया गया। यानी शहर में रहने की जगह और आसपास की हरियाली यह तय करने लगी है कि एक ही गर्मी में किस व्यक्ति को कितनी गर्मी झेलनी पड़ेगी। 2. इंदौर : कंक्रीट और कामकाजी आबादी पर दबाव इंदौर में तेजी से बढ़ता शहरी क्षेत्र, बढ़ती निर्माण गतिविधियां और घनी होती बसाहट गर्मी के जोखिम को बढ़ा रही हैं। WRI ने खास तौर पर औद्योगिक और कामकाजी क्षेत्रों में बाहर काम करने वाले लोगों के लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने को जोखिम से जोड़ा है। यानी गर्मी का असर सिर्फ तापमान के आंकड़े तक सीमित नहीं है। इसका असर काम के घंटों, उत्पादकता और परिवार की आय तक पहुंच सकता है। 3. ग्वालियर : शहर का घना हिस्सा ज्यादा गर्म ग्वालियर में WRI ने शहर के घने निर्मित हिस्से को गर्मी रोकने वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। घनी इमारतें, सड़कें और कम खुले स्थान गर्मी को लंबे समय तक बनाए रखते हैं। इससे शहर के मध्य हिस्से में गर्मी का संपर्क ज्यादा देर तक बना रह सकता है। यहां भी जोखिम पूरे शहर में बराबर नहीं है। 4. जबलपुर : आधी आबादी को हरियाली का लाभ नहीं जबलपुर की स्थिति कुछ अलग है। यहां जंगल, खुले क्षेत्र और जलस्रोत शहर को गर्मी से प्राकृतिक राहत देते हैं। इसके बावजूद WRI के मुताबिक करीब 49 प्रतिशत आबादी के आसपास गर्मी से राहत देने वाली पर्याप्त हरियाली उपलब्ध नहीं है। इसका मतलब यह है कि प्राकृतिक संसाधन मौजूद होने के बावजूद शहर के हर हिस्से तक उनका फायदा नहीं पहुंच रहा है। 5. उज्जैन : बाहर रहने वालों का जोखिम ज्यादा उज्जैन में धार्मिक पर्यटन के कारण बड़ी संख्या में लोग खुले स्थानों में समय बिताते हैं। WRI ने शिप्रा के रामघाट जैसे पर्यटन क्षेत्रों का उदाहरण दिया है, जहां छाया सीमित है। ऐसे स्थानों पर बढ़ती गर्मी का सीधा असर स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर पड़ता है। गांवों में बारिश बदली तो खेती और पानी दोनों प्रभावित WRI की ग्रामीण रिसर्च के मुताबिक किसान पानी की कमी से ही नहीं, गर्मी और अनियमित बारिश से भी परेशान हैं। बेमौसम बारिश से फसल में फूल आने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, दाना कमजोर बन सकता है और कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। वहीं मानसून में देरी से भूजल रिचार्ज कम होता है, जिससे गर्मियों में ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या बढ़ सकती है।     बड़वानी : जमीन-पानी बचाने से जुड़ी ग्रामीण आय – WRI ने बड़वानी में जलवायु जोखिम को सिर्फ खेती के नुकसान तक सीमित नहीं माना है। अध्ययन में बताया गया है कि जमीन और पानी की स्थिति सीधे ग्रामीण परिवारों की आय पर असर डालती है। इसलिए स्थानीय लोगों की भागीदारी से जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को बहाल करने पर जोर दिया गया है।     सीधी : जमीन की खराब होती स्थिति भी जलवायु जोखिम – सीधी में WRI ने जमीन, पानी और खेती को ग्रामीण आजीविका से जोड़कर देखा है। जमीन की गुणवत्ता या पानी की उपलब्धता प्रभावित होने पर खेती और परिवार की कमाई पर भी असर पड़ता है। इसलिए जलवायु से निपटने की योजना में मौसम के साथ जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को बचाना भी जरूरी बताया गया है। एक ही जिले में अलग-अलग जोखिम बैतूल WRI की रिसर्च में इस बदलाव को समझने का एक जमीनी मॉडल है। अध्ययन में जिले के दो ब्लॉकों … Read more

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, NSA के लापरवाह इस्तेमाल पर जताई नाराजगी

भोपाल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के मनमाने और लापरवाह तरीके से इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने दो भाइयों की निवारक हिरासत को रद करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है और चेतावनी दी है कि संविधान के इस बेहद कड़े कानून का इस्तेमाल अब सामान्य प्रक्रिया की तरह लापरवाही से किया जा रहा है। मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक अग्रवाल की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने राजेंद्र ठाकुर और राजेश ठाकुर नाम के दो सगे भाइयों की नजरबंदी को खारिज करते हुए उन्हें छोड़ने का आदेश दिया है। जानिए दोनों भाईयों पर क्यों लगाया गया था NSA? बता दें कि जबलपुर के जिला कलेक्टर ने सार्वजनिक शांति के लिए खतरा बताते हुए 6 जनवरी को इन दोनों भाइयों को तीन महीने के लिए हिरासत में लेने का आदेश दिया था, जिसे बाद में बढ़ा दिया गया था। हाई कोर्ट ने यह फैसला 11 सितंबर को सुनाया था, जिसे 5 अक्टूबर को सार्वजनिक किया गया। हाई कोर्ट ने क्या कहा? पहले तो अदालत ने पाया कि दोनों भाइयों पर कुल 14 मामले दर्ज थे, जिनमें से 11 मामलों में वे पहले ही बरी हो चुके थे। बाकी बचे 3 मामलों में मारपीट, अछूत हरकत और मामूली बमबाजी जैसे आरोप थे। ऐसे में अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने बिना दिमाग लगाए और बिना सही तथ्य जाने ही उन पर NSA लगा दिया। एक ही दिन में कागजी कार्रवाई पूरी होने पर सवाल दूसरी ओर बेंच ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि सिटी एसपी के प्रस्ताव से लेकर कलेक्टर के नजरबंदी आदेश तक की पूरी फाइल चार अधिकारियों से गुजरी और महज़ एक ही दिन में सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। अदालत ने कहा कि इतनी जल्दबाजी यह साबित करती है कि अधिकारियों ने स्वतंत्र रूप से सोच-समझकर फैसला नहीं लिया। संविधान के नियमों का दिया हवाला साथ ही सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 ,जो नागरिकों को मौलिक अधिकार देते हैं, के तहत मिले सुरक्षा उपायों का पालन किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी नागरिक को मनमाने ढंग से हिरासत में न रखा जाए।  

मध्यप्रदेश में सूखे जैसे हालात से किसान परेशान, 12 जिलों में बारिश की भारी कमी; फसल सर्वे और राहत पैकेज की मांग

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश की कमी ने किसानों के सामने रबी की फसल का संकट खड़ा कर दिया है। प्रदेश में पूरे सीजन में सामान्य से 4% कम बारिश हुई, लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश में यह कमी 12% तक रही। प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से 20 से 59% तक कम बारिश दर्ज की गई है। अब सरकार कम बारिश वाले क्षेत्रों में फसलों की स्थिति का आकलन करने के लिए सर्वे कराने की तैयारी कर रही है। इस बीच किसानों ने खरीफ फसलों में नुकसान, गिरते भूजल स्तर और सिंचाई के पानी की कमी का मुद्दा उठाते हुए राहत, वैकल्पिक फसलों के बीज और सिंचाई व्यवस्था की मांग की है। नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर के किसान लखन गौर के मुताबिक, क्षेत्र में कम बारिश के कारण इस बार मक्का की फसल प्रभावित हुई है। लागत बढ़ी और उत्पादन में आई कमी किसान लखन गौर के मुताबिक फसल आड़ी होने से लागत बढ़ गई और उत्पादन भी कम हुआ। अब नलकूपों का जलस्तर गिरने से आगामी रबी सीजन में गेहूं की बोनी और सिंचाई को लेकर चिंता है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास पर्याप्त पानी नहीं है, उन्हें गेहूं के बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। गौर ने पंचायत स्तर पर उन्नत बीज उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कम सिंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को चने की जेजी 52, जेजी 18 और जेजी 24 जैसी किस्मों के बीज प्राथमिकता से दिए जाएं, ताकि पानी की कमी के बीच भी किसान रबी की फसल ले सकें। नेताप्रतिपक्ष ने सीएम को लिखा पत्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जिले को सूखा प्रभावित घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने, खरीफ फसलों का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को राहत पैकेज देने की मांग की है। सिंघार के अनुसार, धार में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 42% कम बारिश हुई है। इससे खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बची और रबी की बोनी के लिए सिंचाई का संकट गहराने की आशंका है। सिंघार ने बाग विकासखंड में पाइपलाइन के जरिए नर्मदा नदी का पानी जलाशयों तक पहुंचाने की मांग भी की है। उमंग सिंघार ने धार के अलावा प्रदेश के दूसरे प्रभावित जिलों में भी सर्वे कराकर जरूरत के अनुसार राहत देने की मांग की है। अब चुनौती सिर्फ खरीफ फसलों में हुए नुकसान का पता लगाने की नहीं, बल्कि रबी सीजन में पानी की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए समय पर बीज और सिंचाई के विकल्प उपलब्ध कराने की भी है।  प्रदेश का औसत सुधरा, लेकिन कई जिलों में कमी बरकरार मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, पूरे मानसून सीजन में प्रदेश की बारिश सामान्य के करीब पहुंच गई, लेकिन कई जिलों में कमी बनी रही। अगस्त की शुरुआत में प्रदेश सामान्य से 19% पीछे था। बाद में हुई बारिश से औसत में सुधार आया, लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में पर्याप्त पानी नहीं बरसा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अलीराजपुर में सामान्य से करीब 50%, धार में 39%, रतलाम में 34% और इंदौर व उज्जैन में 26-26% कम बारिश दर्ज की गई। नर्मदापुरम संभाग के कुछ जिलों में भी कमी रही, जबकि सागर, रीवा, जबलपुर और ग्वालियर-चंबल संभाग के कई जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हुई। बारिश की कमी का असर सोयाबीन, मूंग, मक्का और दूसरी खरीफ फसलों पर कितना पड़ा, यह खेतों की वास्तविक स्थिति देखने के बाद ही स्पष्ट होगा। सोयाबीन में नमी की कमी से फलियों के विकास और दाने भरने पर असर पड़ सकता है, जबकि मक्का की पैदावार भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, केवल बारिश के आंकड़ों के आधार पर पूरे जिले या प्रदेश में फसल नुकसान का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। सर्वे के बाद तय होगी नुकसान की स्थिति कम बारिश वाले 12 जिलों में सर्वे के जरिए फसलों की स्थिति और संभावित नुकसान का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। किसानों की मांग है कि सर्वे में देरी न हो और नुकसान के आकलन के साथ राहत, बीज तथा सिंचाई के इंतजाम भी किए जाएं। मानसून की विदाई के बाद पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में अगले तीन दिन गरज-चमक के साथ बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में अगले पांच दिन मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है। ऐसे में कम बारिश वाले पश्चिमी जिलों में रबी की बोनी से पहले मिट्टी की नमी और सिंचाई के उपलब्ध साधनों का आकलन किसानों के लिए अहम होगा। 

भोपाल के हज यात्रियों के लिए खुशखबरी, मक्का में मुफ्त ठहर सकेंगे हाजी; 4 साल बाद लौटी सुविधा

भोपाल  भोपाल के आजमीन-ए-हज के लिए राहत की खबर है। करीब चार साल बाद मक्का मुकर्रमा स्थित ऐतिहासिक भोपाल रुबात में हज यात्रियों के ठहरने की सुविधा फिर बहाल हो गई है। हज 2027 के लिए रुबात में ठहरने वाले हाजियों का कुर्रा शनिवार, 17 अक्टूबर को सुबह 10 बजे मोती मस्जिद में निकाला जाएगा। औकाफ-ए-शाही, भोपाल की कार्यकारी-सह-सलाहकार कमेटी की बैठक में हज 2027 की तैयारियों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। कमेटी के अनुसार सऊदी सरकार के नए दिशा-निर्देशों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत रुबात में हाजियों के ठहरने से संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं और व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं। रुबात की सुविधा बहाल होने की जानकारी अधिकारिक रूप से सिकंदर हाफिज ने वीडियो जारी कर भी दी। अफवाहों से दूर रहने की सलाह हाफिज ने बताया कि आजमीन-ए-हज को मुबारकबाद देते हुए कहा कि शहर में रुबात को लेकर कुछ लोगों द्वारा गलत अफवाहें फैलाई जा रही थीं, जबकि ऐसी कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि मदीना मुनव्वरा की रुबात का मामला वहां की अदालत में है और जल्द ही इसके भी सुलझने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही वे भोपाल, सीहोर और रायसेन के लोगों को वहां निशुल्क ठहरने की व्यवस्था की जानकारी देंगे। वर्षभर मिले सुविधा हाजी इमरान रुबात खुलने के फैसले का स्वागत करते हुए कौमी खिदमतगार भोपाल के हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने मांग की है कि वक्फ रुबात की सुविधा केवल हज के दिनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सराहनीय पहल उन्होंने कहा कि उमरा सहित पूरे वर्ष मक्का-मदीना जाने वाले भोपाल के यात्रियों को भी पूर्व की तरह रुबात में ठहरने की सुविधा मिलनी चाहिए। हाजी इमरान हारून ने कहा कि भोपाल के हज यात्रियों और अन्य यात्रियों के लिए रुबात में लंबे समय से ठहरने की सुविधा पहले उपलब्ध रही है। करीब चार वर्ष बाद हज यात्रियों के लिए इसे दोबारा खोला जाना सराहनीय पहल है। औकाफ-ए-शाही ने जनता और हाजियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। कमेटी ने कहा कि हाजियों की सुविधा और कल्याण के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं और सभी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया के अनुसार पूरी की जा रही हैं।  

MP के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में उमड़ी पर्यटकों की भीड़, 8 दिन में 4598 लोगों ने देखा जंगल

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटन सीजन 2026-27 की शुरुआत पर्यटकों के लिए खास उत्साह लेकर आई है. कोर क्षेत्र के पर्यटन द्वार खुलने के बाद जंगल सफारी के लिए देश-विदेश से पर्यटक बड़ी संख्या में बांधवगढ़ पहुंच रहे हैं. पर्यटन सीजन के शुरुआती 8 दिनों से ही 4598 पर्यटकों ने टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया है।  गेट खुलते ही बांधवगढ़ पहुंच रहे पर्यटक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के पर्यटन द्वारा 1 अक्टूबर 2026 से नए पर्यटन सीजन के लिए खोल दिए गए थे. इसके पहले करीब तीन माह तक केवल बफर क्षेत्र के पर्यटन द्वारों से ही पर्यटकों को जंगल सफारी की अनुमति थी. कोर और बफर क्षेत्र एक साथ शुरू होने के बाद पर्यटकों की संख्या उत्साह जनक रुझान देखने को मिली है।  4598 पर्यटकों ने की जंगल सफारी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि, ''1 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक कुल 926 वाहनों से 4598 पर्यटकों ने बांधवगढ़ के जंगलों का भ्रमण किया. इसमें 4461 भारतीय पर्यटक शामिल रहे, जबकि 137 विदेशी पर्यटकों ने भी बांधवगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों को करीब से देखने का अनुभव लिया।  पर्यटकों को हो रहे बाघों के दीदार बांधवगढ़ की पहचान बाघों की शानदार दीदार के लिए देश-विदेश में है. पर्यटन सीजन की शुरुआत के साथ कोर क्षेत्र के विभिन्न जोन के साथ बफर क्षेत्र में भी पर्यटकों को बाघों के दीदार हो रहे हैं. जंगल सफारी के दौरान बाघ नजर आने से पर्यटकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. कई पर्यटक बांधवगढ़ के प्राकृतिक वातावरण वन्य जीवों और जंगल की खूबसूरती को अपने कैमरे में कैद कर रहे हैं।     पर्यटकों की सुविधा का ख्याल रख रहा वन विभाग बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि, ''पर्यटन गतिविधियों का संचालन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है. कोर और बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के साथ वन्य जीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा पर भी ध्यान दिया जा रहा है।  शुरुआती 8 दिनों में 4598 पर्यटकों का बांधवगढ़ पहुंचना आगामी पर्यटन सीजन को लेकर पर्यटकों की रुचि को दर्शाता है. आने वाले दिनों में छुट्टियों और पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने के साथ पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है. बांधवगढ़ का जंगल बाघों की मौजूदगी और प्राकृतिक वातावरण एक बार फिर देशी विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। 

मध्यप्रदेश में रेल कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार, 500 किमी रेल लाइन का सर्वे जल्द पूरा होने की उम्मीद

भोपाल  पश्चिम मध्य रेलवे में लगातार बढ़ते रेल यातायात के दबाव से निपटने के लिए तीसरी रेल लाइन के विस्तार पर काम किया जा रहा है। रेलवे 500 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की तैयारी है। बताया जाता है कि परियोजना का सर्वे अंतिम चरण में है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद काम शुरु किया जाएगा। करीब तीन साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तीसरी लाइन बनने के बाद यात्री और मालगाड़ियों के लिए नया रेल पाथ उपलब्ध होगा। इससे ट्रेनों को रोकने और लाइन क्लियर होने के इंतजार की समस्या कम होगी। ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ परिचालन को भी व्यवस्थित किया जा सकेगा। कार्य अंतिम स्तर पर थर्ड लाइन को लेकर सर्वे का कार्य अंतिम स्तर पर है। इसके तैयार होने से न केवल ट्रेनों की संख्या में इजाफा होगा, बल्कि पंक्चुअलिटी भी बेहतर होगी। इससे औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा। – डॉ. मधुर वर्मा, सीपीआरओ, पमरे रोजाना 450 से अधिक ट्रेनों का दबाव पश्चिम मध्य रेलवे का इटारसी जंक्शन प्रमुख रेल केंद्रों में शामिल है। यहां से रोजाना 450 से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है। यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी इस नेटवर्क से गुजरती हैं। मौजूदा दो लाइनों पर बढ़ते यातायात के कारण कई बार ट्रेनों को लाइन क्लियरेंस के लिए रोकना पड़ता है। तीसरी लाइन बनने के बाद परिचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। 7 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान सूत्रों के अनुसार, तीसरी लाइन परियोजना पर करीब 7 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान है। रेलवे के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, एक किलोमीटर रेल लाइन बिछाने में करीब 12 से 15 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकता है। यह खर्च भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करेगा। इसमें ट्रैक निर्माण के साथ सिग्नलिंग, विद्युतीकरण और अन्य जरूरी रेल अधोसंरचना के काम भी शामिल होंगे। जबलपुर को भी मिलेगा फायदा इस रेलखंड से जबलपुर होकर कई लंबी दूरी की ट्रेनें संचालित होती हैं। यह रेलखंड माल परिवहन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। तीसरी लाइन बनने के बाद ट्रेनों के संचालन में सुधार का लाभ बड़ी संख्या में यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। यात्री ट्रेनों के कारण मालगाड़ियों को लंबे समय तक रोकने की जरूरत कम होगी। इससे माल परिवहन की गति बढ़ने के साथ औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है। यह है स्थिति 500 किलोमीटर लंबी रेल लाइन। 07 हजार करोड़ रुपए अनुमानित लागत। 450 से अधिक ट्रेनों का होता है आवागमन। 300 यात्री ट्रेनें, और 150 मालगाड़ियों की आवाजाही यह होगा फायदा ट्रैक मेंटेनेंस के लिए समय मिलेगा। ट्रैक का रखरखाव आसान होगा। ट्रेनों की गति बढ़ेगी। परिचालन व्यवस्था बेहतर होगी। कोचिंग ट्रेनों की संख्या बढ़ सकेगी।