samacharsecretary.com

मिशन चीता: बोत्सवाना से 9 चीते कूनो पहुंचे, भारत में कुल संख्या 48

श्योपुर  श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में शनिवार एक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। बोत्सवाना से अफ्रीकी महाद्वीप के 9 नए चीते विशेष विमान से भारत पहुंचे हैं। यह चीतों का तीसरा बड़ा जत्था है, जो 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत भारत लाया गया है। भारतीय वायुसेना के विमान से रात में ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के बाद सुबह भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से इन्हें कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया। केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन चीतों को क्वारंटाइन बाड़ों में रिलीज किया। इनके आने से भारत में चीतों की कुल संख्या 48 हो गई है। कूनो में पहले से मौजूद चीतों की सफल प्रजनन दर और शावकों का जन्म इस प्रोजेक्ट की मजबूती दिखाता है। यह कदम न सिर्फ चीता संरक्षण की दिशा में बड़ा है, बल्कि भारत में विलुप्त हो चुके इस राजसी जानवर को वापस लाने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। पार्क में विशेष तैयारियां की गई, जहां चीतों को एक महीने तक क्वारंटाइन में रखकर स्वास्थ्य जांच और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद इन्हें मुख्य बाड़े में छोड़ दिया जाएगा। बोत्सवाना से लाये चीते कूनो में किए रिलीज बता दें कि, बोत्सवाना से कूनो लाए गए सभी 9 चीतों में से 6 मादा हैं, जबकि 3 नर चीते। इस तरह अब कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 45 हो चुकी है। खास बात ये है कि, इनमें से 28 चीते भारत में पैदा हुए हैं। इसके अलावा 3 चीते कूनो से ही गांधीसागर वन्य क्षेत्र में छोड़े गए हैं। इस तरह देशभर में इनकी संख्या बढ़कर कुल 48 हो गई है। फिलहाल, बोत्सवाना से लाए गए सभी 9 चीतों को एक महीने के लिए पहले क्वारंटीन किया जाएगा। इके बाद ही इन्हें मुख्य क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। वयस्क चीतों में बदला समीकरण कूनो में 12 महीने से अधिक उम्र के चीतों का गणित अब साफ तौर पर बदल गया है। पहले यहां 26 वयस्क चीते थे 14 नर और 12 मादा। अब 9 नए चीतों के जुड़ने से वयस्कों की संख्या 35 हो गई है। मादा: 18 नर: 17 यानी अब मादाओं का पलड़ा थोड़ा आगे है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे बेहद अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि मादाओं की संख्या बढ़ने से क्षेत्रीय टकराव कम होगा और शावकों के जन्म की संभावना बढ़ेगी। एक माह का क्वारंटीन, फिर खुले जंगल का टिकट आए हुए सभी 9 चीतों को एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा। इस दौरान उनकी सेहत, व्यवहार और अनुकूलन क्षमता पर लगातार नजर रहेगी। इसके बाद चीता स्टीयरिंग समिति तय करेगी कि किन चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जाए और किन्हें निगरानी में रखा जाए। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, हर चीते को जंगल में उतारने से पहले उसके मूवमेंट, शिकार प्रवृत्ति और इंसानी दखल से दूरी जैसे पहलुओं की बारीकी से जांच की जाती है। मजबूत हुई जेनेटिक ताकत अब कूनो एक पार्क नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जेनेटिक प्रयोगशाला बन चुका है। यहां नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना तीन अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के चीते मौजूद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अलग-अलग मूल के चीतों के मेल से इनब्रीडिंग का खतरा घटता है और शावकों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। यही वजह है कि भारत में चीता पुनर्वास को लंबे समय तक टिकाऊ माना जा रहा है। भारत में चीतों की मौजूदा तस्वीर कुल चीते: 48 कूनो नेशनल पार्क: 36 गांधी सागर अभयारण्य: 3 नामीबियाई मूल (स्थापित + शावक): 20 दक्षिण अफ्रीकी मूल (स्थापित + शावक): 19 भारत में जन्मे शावक: 28 आज आए (बोत्सवाना): 9

एचपीवी टीकाकरण अभियान का आगाज, पहले चरण में 8 लाख बेटियों को लगेंगे टीके

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजस्थान के अजमेर से राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया, उन्होंने कहा ये अभियान देश की नारीशक्ति को सशक्त करने की दिशा में अहम कदम है। ये अभियान महिलाओं में होने वाले  सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए शुरू किया गया है, मध्य प्रदेश में भी आज इसकी शुरुआत की गई। राजधानी भोपाल के कैलाशनाथ काटजू अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में प्रादेशिक स्तर पर इसकी शुरुआत की गई, उप मुख्यमंत्री एवं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला कार्यक्रम में शामिल हुए, वहीं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित किया। सरकार करा रही निःशुल्क टीकाकरण  सीएम ने कहा महिलाओं में होने वाले गर्भाशय के कैंसर यानि सर्वाइकल कैंसर से जीवन बचाने के लिए ये राष्ट्रव्यापी अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया है, उन्होंने बताया कि हमने 8 लाख टीकों का लक्ष्य रखा है इसमें से 7 लाख 55 हजार डोज हमें केंद्र से मिले है, सीएम ने बताया कि बाजार में 4 हजार रुपए का डोज है लेकिन सरकारी अस्पतालों में ये निःशुल्क लगाया जाएगा। पहले चरण में 8 लाख बच्चियों को लगेंगे टीके   कार्यक्रम में शामिल स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मीडिया को बताया कि पहले चरण में 14 से 15 साल उम्र की  8 लाख बेटियों फ्री टीके लगाने का लक्ष्य रखा गया है, उन्होंने कहा कि इस टीकाकरण के लिए बच्चियों के परिजनों की सहमति लेना अनिवार्य है।

महाकाल धाम में होली पर प्रतिबंध, हर्बल गुलाल अर्पित होगा, उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर के धाम में इस वर्ष भी होली खेलने पर प्रतिबंध रहेगा. श्रद्धालु रंग गुलाल मंदिर में नहीं ले जा सकेंगे. क्योंकि दो साल पहले वर्ष 2024 में होली पर्व के दौरान होने वाली भस्म आरती में केमिकल युक्त गुलाल से गर्भ गृह में भड़की आग के कारण 14 लोग झुलस गए थे. दो साल पहले मंदिर में मचे आग के तांडव और भयावह दृश्य को कोई नहीं भूल पाया है. उसी बात को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति पिछले साल से मंदिर में होली खेलने पर प्रतिबंध लगा रही है. मंदिर में रंग गुलाल नहीं ले जा सकेंगे भक्त इस बार भी मंदिर समिति ने निणर्य लेते हुए स्पष्ट किया है कि मंदिर में कोई भी श्रद्धालु होली पर्व के दौरान रंग गुलाल नहीं ले जा सकेगा. भगवान के लिए तय मात्रा में हर्बल गुलाल मंदिर समिति उपलब्ध करवाएगी. श्रद्धालुओं को प्रवेश के पूर्व चेक किया जाएगा व नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जानी है. श्रद्धालुओं के होली खेलने पर लगा प्रतिबंध मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि, ''मंदिर में प्रतिबंध होली रंगों के उपयोग का आदेश सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, मंदिर से जुड़े हर कर्मचारियों, अधिकारियों सब पर है. सिर्फ भगवान को अर्पित होने वाले रंगों के अलावा कोई भी मंदिर में रंग गुलाल नहीं ले जा सकेगा. आपस में भी कोई मंदिर में रंग नहीं लगाएगा. सभी प्रवेश द्वार पर जांच के निर्देश दे दिए हैं. 2 व 3 मार्च को जांच होनी है. वहीं, CCTV से भी निगरानी सतत जारी रहेगी.'' बाबा महाकाल को चढ़ेगा 1 किलो गुलाल सहायक प्रशासक मंदिर आशीष फलवादिया ने कहा, ''मंदिर समिति पुजारी परिवार को 1-1 किलो हर्बल गुलाल भगवान महाकाल के लिए उपलब्ध करवा रही है. जो कि भस्म आरती, संध्या आरती, शयन आरती में उपयोग में लिया जाएगा. मंदिर में रंगों के प्रतिबंध आदेश की जो बात हुई है उसमें पूरे मंदिर परिसर में मतलब नंदी हाल, गणेश मंडप, कार्तिक मंडप, सभा मंडप व अन्य जगह सभी शामिल हैं.''

बोत्सवाना से उड़कर भारत पहुंचे 9 चीते, कूनो पार्क में क्वारंटीन, केंद्रीय मंत्री ने किया प्रतीकात्मक रिलीज

श्योपुर चीता परियोजना के लिए दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना से 9 चीते सुरक्षित रूप से कूनो नेशनल पार्क पहुंच चुके हैं। लगभग 12 घंटे की हवाई यात्रा के बाद वे ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे, जहां से तीन हेलीकॉप्टरों के जरिए उन्हें कूनो लाया गया। नई खेप के साथ देश में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 48 हो गई है।  हेलीकॉप्टर से पहुंची 9 चीतों की खेप कुनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से आए 9 चीतों की खेप पहुंचने के बाद भारत में चीता प्रोजेक्ट के इतिहास में एक और नया अध्याय जुड़ गया है. 2022 में पहली बार भारत की धरती पर चीतों की वापसी हुई थी. इसके बाद से लगातार चीतों के बढ़ने का सफर जारी है. शनिवार सुबह करीब 9.30 पर हेलीकॉप्टर से चीतों की खेप बोत्सवाना से ग्वालियर एयरबेस पर पहुंची. केंद्रीय मंत्री ने किया प्रतीकात्मक रिलीज इस मौके पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव कूनो में मौजूद रहे। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से क्रेट का हैंडल घुमाकर चीतों को विशेष क्वारंटीन बाड़ों में छोड़ा। नई खेप में 6 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे कूनो में लिंगानुपात संतुलित होगा और भविष्य में प्रजनन की संभावनाएं मजबूत होंगी। निर्धारित कार्यक्रम के तहत केंद्रीय मंत्री सुबह नई दिल्ली से रवाना होकर ग्वालियर पहुंचे। वहां से वे हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो पहुंचे और सुबह करीब 9:30 बजे चीतों को पार्क में रिलीज किया गया। बढ़ गया कूनो में चीतों का कुनबा नए चीतों के आने से अब भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 48 हो चुकी है. अब तक कूनो नेशनल पार्क में 36 चीते थे, जिनमें 26 व्यस्क और 10 शावक थे. व्यस्कों में 14 नर चीते और 12 मादा चीता रह रही हैं. वहीं अब 9 नए वयस्क चीतों के आने से कूनो में कुल 45 वयस्क चीते हो गए हैं, वहीं नर चीतों की संख्या 17 और मादा चीतों की संख्या 18 हो गई है. इनके अलावा मध्य प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य में भी 3 चीते शिफ्ट किए जा चुके हैं. फरवरी के माह में ही चीता प्रोजेक्ट के लिए दूसरी खुशखबरी है. इससे पहले हाल ही में कूनो में रह रही मादा चीता गामिनी ने शावकों को जन्म दिया था. पहले तीन शावक पैदा होने की जानकारी सामने आई थी. लेकिन शुक्रवार को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने चौथे चीता शावक की अधिकारिक जानकारी सोशल मीडिया के जरिए साझा की थी. जेनेटिक विविधता होगी मजबूत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद अब बोत्सवाना से चीतों के आने से कूनो में जेनेटिक विविधता और सुदृढ़ होगी। पार्क में अब 18 मादा और 16 नर वयस्क चीते हैं। सभी नए चीतों को लगभग एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाएगा। संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि तीन अलग-अलग देशों के चीतों का संगम परियोजना की सफलता के लिए निर्णायक साबित होगा। गामिनी ने दिए 4 शावक परियोजना के लिए एक और खुशखबरी यह रही कि मादा चीता गामिनी ने 18 फरवरी को तीन नहीं बल्कि चार शावकों को जन्म दिया। घनी झाड़ियों के कारण चौथा शावक पहले नजर नहीं आया था लेकिन मॉनिटरिंग टीम और पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसकी पुष्टि हो गई। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था। गौरतलब है कि 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए थे, जबकि 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो पहुंचे थे। अब बोत्सवाना से आए 9 नए चीतों के साथ परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण चरण पार कर लिया है। 

भोपाल के बड़ा तालाब में 50 मीटर के दायरे में अवैध निर्माण, खानूगांव में 15 सरकारी जमीनों पर कब्जे

भोपाल: SDM की लीडरशिप में डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन की टीमें अपर लेक के फुल टैंक लेवल से नो-कंस्ट्रक्शन जोन की पहचान करने और उस एरिया में कब्ज़ों की पहचान करने के लिए एक और सर्वे कर रही हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह काम आखिरकार अपने लॉजिकल नतीजे पर पहुंचेगा। अपर लेक के आसपास के कब्ज़ों को हटाने का काम नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और कोर्ट के निर्देश पर पहले कम से कम तीन बार किया जा चुका है और फिर भी अपर लेक के किनारों पर कब्जे साल भर में बढ़ते रहे हैं। ये इलाके हैं नो-कंस्ट्रक्शन जोन लेक के फुल टैंक लेवल से 50 मीटर का एरिया, जो भोज वेटलैंड और रामसर साइट का भी हिस्सा है, वेटलैंड नियमों के तहत नो-कंस्ट्रक्शन जोन है और अभी भी इस जोन में सैकड़ों फार्म हाउस, बंगले, मैरिज हॉल, रेस्टोरेंट से लेकर छोटे घर और झुग्गियां बनी हुई हैं। इन सब में बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव, बैरागढ़ और ऐसे एरिया सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। टास्क फोर्स ने नया सर्वे शुरू किया डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर द्वारा बनाई गई 17 लोगों की टास्क फोर्स को ADM अंकुर मेश्राम लीड कर रहे हैं। यह टीम झील के आसपास के मना किए गए एरिया में सर्वे और डिमार्केशन और बाद में पहचाने गए अतिक्रमणों को हटाने के प्रोसेस पर नजर रखेगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन इस बार अतिक्रमण हटाने को लेकर सीरियस है, तो उन्होंने कहा, 'प्रोसेस पहले ही शुरू हो चुका है। अगर आपके मन में कोई खास स्ट्रक्चर है और जब उसे गिरा दिया जाता है, तभी आप मानेंगे कि अतिक्रमण हटाया जा रहा है, यह एक अलग बात है।' उन्होंने कहा कि, 'मैं यह साफ कर दूं कि टास्क फोर्स न तो सर्वे में शामिल होगी और न ही अतिक्रमणों को गिराने में शामिल होगी। यह काम संबंधित SDM की लीडरशिप वाली टीमों को करना है और वे काम पर हैं। जब हम बात कर रहे हैं, तब SDM, टी टी नगर, अपने अधिकार क्षेत्र में कहीं न कहीं तोड़फोड़ कर रही हैं।' जब उनसे पूछा गया कि जब हाल ही में दो बार सर्वे हो चुका है, तो सर्वे क्यों जरूरी है, तो उन्होंने कहा, 'अगर कोई SDM कहता है कि उसके पास इलाके में अतिक्रमण की पूरी लिस्ट है और इलाके में सीमांकन भी पूरा हो गया है, तो हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन जहां काम अधूरा है, उन्हें इसे पूरा करके टास्क फोर्स को रिपोर्ट करना होगा. टास्क फोर्स में कौन-कौन? उन्होंने बताया कि टास्क फोर्स में रेवेन्यू, बीएमसी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, MP पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड जैसे सभी संबंधित डिपार्टमेंट के सदस्य, सभी SDM, पुलिस अधिकारी और दो प्राइवेट सदस्य हैं, जो एनवायरनमेंट एक्टिविस्ट हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में लोकल MP आलोक शर्मा की मीटिंग के बाद टास्क फोर्स बनाई गई थी, जिसमें अपर लेक के आस-पास से अतिक्रमण हटाने पर चर्चा की गई थी। सांसद क्या बोले? भोपाल से सांसद आलोक शर्मा ने पर्यावरण पर संसद की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य के तौर पर पहल की थी। जब उनसे पूछा गया कि यह काम कितना आगे जाएगा, तो उन्होंने कहा, 'मैं अपर लेक को बचाना चाहता हूं। मेरे लिए, यह भोपाल की शान है। अजीब बात है, राजा भोज ने 11वीं सदी में यह खूबसूरत इंसानों की बनाई बड़ी झील बनवाई और हम इसे बर्बाद कर रहे हैं, जबकि यह हमारे लिए पीने के पानी का सोर्स है।' कब्जा हटाना क्यों है मुश्किल? कमेटी के प्राइवेट मेंबर नितिन श्रीवास्तव ने कहा, 'अगर कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की नीयत भी अच्छी हो, तो भी इस काम में दो बड़ी दिक्कतें हैं। एक, कुछ लोग भोपाल के पुराने राजाओं के हबीनामा या इनायतनामा दिखाते हैं या कागजात दिखाते हैं कि जिस जमीन पर उनका कब्जा है, वह वक्फ बोर्ड की है। आपके पास अमीर और ताकतवर लोग हैं, जिनके जमीन पर फार्महाउस और बंगले या होटल या मैरिज गार्डन हैं और एडमिनिस्ट्रेशन उन पर एक्शन लेने से कतराता है।' पहले भी जारी हुए हैं आदेश NGT की सेंट्रल बेंच ने 15 फरवरी को आर्या श्रीवास्तव की पिटीशन पर अपने ऑर्डर में भोपाल म्युनिसिपल कमीशन (BMC) के वकील से सख्ती से कहा था कि वह जमीन पर टाइटल या हक तय करने के लिए नहीं है, बल्कि अतिक्रमण हटाना चाहता है। उन्होंने कहा कि भदभदा की तरफ अपर लेक के किनारे 35 अतिक्रमण पहचाने गए थे, लेकिन लोकल लोगों के विरोध के कारण सिर्फ 9 ही हटाए जा सके। कुछ मामलों में, पार्टियों के अधिकार, टाइटल और हित को लेकर कोर्ट में केस पेंडिंग है। 5 प्वॉइंट में पढ़िए पूरी खबर का सार 1. रामसर साइट और वेटलैंड नियमों के तहत तालाब के FTL (Full Tank Level) से 50 मीटर तक कोई भी पक्का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। 2. बिशनखेड़ी, सूरज नगर, खानूगांव और बैरागढ़ में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जिनमें रसूखदारों के बंगले और मैरिज हॉल शामिल हैं। 3. NGT के निर्देशों पर पहले भी तीन बार सर्वे हो चुका है, लेकिन इस बार टास्क फोर्स में राजस्व, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ पर्यावरणविद भी शामिल हैं। 4. हब्बीनामा, इनायतनामा और वक्फ बोर्ड की जमीनों के दावों के कारण प्रशासन को कड़ी चुनौती मिल रही है, जिसे लेकर NGT पहले ही नाराजगी जता चुका है। 5. SDM टी.टी. नगर ने अपने क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है, जो संकेत है कि इस बार मामला केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा

होली पर मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलेगा, आंधी और बारिश की संभावना, ग्वालियर-चंबल में असर

भोपाल   मध्य प्रदेश में होली के आसपास एक बार फिर मौसम करवट ले सकता है। दो मार्च से हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय हो रहा वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) प्रदेश पर भी प्रभाव डाल सकता है। इसका असर विशेष रूप से ग्वालियर-चंबल अंचल में देखने को मिल सकता है, जहां बादल छाने और आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती परिसंचरण) सिस्टम सक्रिय हैं। इसके साथ ही एक ट्रफ लाइन की गतिविधि भी बनी हुई है। इसी कारण शुक्रवार को भोपाल समेत कई जिलों में बादल छाए रहे। हालांकि, तापमान में कोई खास गिरावट दर्ज नहीं की गई। अब 2 मार्च के बाद मौसम एक बार फिर करवट बदलेगा और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण होली पर प्रदेश में मावठा यानि हल्की बारिश के आसार है। 34°C पार रहा तापमान, खरगोन सबसे गर्म आंधी-बारिश और ओले का दौर थमने के बाद प्रदेश में अप्रैल जैसी गर्मी पड़ रही है। गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी कई शहरों में दिन का तापमान 34 डिग्री के पार रहा। वहीं, रात में यह 18 डिग्री से ज्यादा पहुंच गया है। शुक्रवार को प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में ही पारा 27.6 डिग्री दर्ज किया गया। बाकी शहरों में तापमान 30 डिग्री या इससे अधिक ही रहे। सबसे गर्म खरगोन में तापमान 34.8 डिग्री पहुंच गया। वहीं, 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 32.4 डिग्री, इंदौर में 31.2 डिग्री, ग्वालियर में 32.7 डिग्री, उज्जैन-जबलपुर में 33 डिग्री रहा। रात के तापमान की बात करें तो पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री दर्ज किया गया। सागर में सबसे ज्यादा 18.4 डिग्री और नर्मदापुरम में 18.2 डिग्री रहा। श्योपुर, सिवनी, गुना, खंडवा-टीकमगढ़ में 16 डिग्री और रतलाम-धार में 17 डिग्री या इससे ज्यादा पहुंच गया। इधर, आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का दौर थमने के बाद प्रदेश में गर्मी ने भी रफ्तार पकड़ ली है। गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी कई शहरों में दिन का तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा, जबकि रात का तापमान 18 डिग्री से अधिक दर्ज किया गया। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में अधिकतम तापमान 27.6 डिग्री दर्ज हुआ, जबकि अन्य शहरों में पारा 30 डिग्री या उससे ज्यादा रहा। खरगोन सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 34.8 डिग्री तक पहुंच गया। पांच बड़े प्रमुख शहरों के तापमान की बात करें तो भोपाल में 32.4 डिग्री, इंदौर में 31.2 डिग्री, ग्वालियर में 32.7 डिग्री, उज्जैन में 33 डिग्री और जबलपुर में 33 डिग्री दर्ज किया गया। रात के तापमान में पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री दर्ज किया गया। सागर में 18.4 डिग्री और नर्मदापुरम में 18.2 डिग्री रहा। श्योपुर, सिवनी, गुना, खंडवा और टीकमगढ़ में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया, जबकि रतलाम और धार में यह 17 डिग्री या उससे अधिक रहा। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को मौसम साफ रहने की संभावना है और फिलहाल कहीं भी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। फरवरी में 4 बार बदला बारिश का दौर बता दें कि इस बार फरवरी में मौसम का मिजाज चार बार बदला है। शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर रह चुका है। इससे फसलों को खासा नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश भीग गया है। 19, 20 और 21 फरवरी को भी असर रहा। फिर चौथी बार 23-24 फरवरी को भी ओले-बारिश का दौर रहा। 20 जिलों में बिगड़ चुका मौसम इससे पहले 24 और 25 फरवरी को साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) और ट्रफ की वजह से प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला रहा। 2 दिन में 20 से ज्यादा जिलों में तेज आंधी-बारिश का दौर रहा। कुछ में ओले भी गिरे। इस वजह से गेहूं-चने की फसलों पर असर पड़ा। मौसम विभाग की माने तो शनिवार को मौसम साफ रहेगा। कहीं भी बारिश का अलर्ट नहीं है।  

भोपाल केस में पीड़िता का आरोप: धर्मांतरण वाली बहनें गरीब युवतियों को सेक्स रैकेट में धकेलती थीं

भोपाल  भोपाल में धर्मांतरण, रेप और देह व्यापार के आरोपों में घिरी दो बहनें आफरीन और अमरीन चार साल पहले अब्बास नगर की झुग्गी बस्ती छोड़ चुकी थीं। इसके बाद भी स्थानीय रहवासी उनकी करतूतों के कारण परेशान थे।भोपाल में धर्म परिवर्तन करवाकर सैक्स रैकेट चलाने का मामला सामने आया था, जिसमें दो सगी बहनें अपने साथियों के साथ मिलकर मासूस लड़कियों को फंसाती थीं और फिर उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता था. भोपाल में इन लोगों ने किराए पर एक कमरा भी लिया था, जो अय्याशी का अड्डा बना हुआ था. अब भोपाल केस में बड़ा खुलासा हुआ है, जब मीडिया के सामने अमरीन और आफरीन गैंग की शिकार बनी पीड़िताएं सामने आई हैं. पीड़िताओं ने लगाए गंभीर आरोप अब इसको लेकर दो पीड़िताएं सामने आई हैं, जहां वह बजरंग दल के लोगों के साथ पुलिस कंट्रोलरूम पहुंची हैं. उन्होंने अमरीन, आफरीन और चंदन यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इनमें धर्म परिवर्तन का दवाब बनाने, गौ मांस खिलाने के आरोप शामिल हैं. पीड़िताओं की तरफ से बताया गया है कि दोनों सगी बहनों के बैग में हमेशा एमडी ड्रग्स के पाउच रहते थे. कई लोग सागर विला वाले घर पर ड्रग्स लेने आते थे. इसके अलावा उन्होंने कहा कि अमरीन ने भोपाल से ही 6 से 7 लड़कियों को अपना शिकार बनाया है. वह हिंदू देवी देवताओं को गंदी गालियां देते हुए कहती थी कि तुम्हारा भगवान किसी काम का नहीं है. अल्लाह को बहुत ताकतवर बताते हुए कहती थी कि गौ मांस खा चुकीं. अब तुम हिंदू कहां हो. अब्बास नगर में रहने वाले पड़ोसी ताज मोहम्मद ने बताया कि दोनों बहनें कभी भी देर रात युवक और युवतियों को लेकर मोहल्ले में आती थीं। यहां पार्टी के नाम पर हुड़दंग करती थीं। मोहल्ले वाले विरोध करते तो वे उनके खिलाफ थाने में शिकायत कर देती थीं। इतना ही नहीं, ज्यादा विरोध करने पर रेप के झूठे केस में जेल भिजवाने की धमकी देती थीं। ताज का कहना है कि 2006 में दोनों बहनें पिता और मां के साथ मोहल्ले में रहने आई थीं। पिता की मौत के बाद अचानक दोनों का आचरण बदल गया। उनके घर बड़ी संख्या में अनजान युवक और युवतियां आने लगे। चार साल पहले दोनों बहनें फतेहगढ़ में रहने चली गईं। कुछ समय बाद भाई बिलाल भी चला गया और मां ने दूसरा निकाह कर लिया। वह भी कहीं और रहने लगी। पब और लाउंज में लड़कियों से कराती थीं ड्रग डिलीवरी आफरीन और अमरीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाली दोनों युवतियां शुक्रवार शाम को पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचीं। उन्होंने बताया कि दोनों बहनें ड्रग तस्करी का काम करती हैं। चंदन सहित कई अन्य लोग उनके इस धंधे में शामिल हैं। ड्रग की डिलीवरी भी लड़कियों से कराई जाती है। ग्राहकों को खास कोड वर्ड देकर डिलीवरी दी जाती थी। शहर के नामचीन पब और लाउंज में ड्रग को शर्ट कहा जाता था, वहीं पीड़िताओं के इस खुलासे के बाद पुलिस ने एमडी ड्रग तस्करी के नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस अमरीन और चंदन से ड्रग तस्करी के संबंध में भी पूछताछ करेगी। फ्लैट की सर्चिंग में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिले बागसेवनिया पुलिस ने अमरीन के फ्लैट से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए हैं। इसमें दो मोबाइल फोन हैं। इसके साथ अहमदाबाद में भी पुलिस ने उस स्पॉट का वेरिफिकेशन किया, जहां दोनों पीड़िता का रेप कराया गया। बागसेवनिया पुलिस यासिर की तलाश में अहमदाबाद में दबिश दे रही है। पुलिस रिमांड पर चल रहे आरोपी चंदन और अमरीन पुलिस टीम के साथ ही हैं। पहले मदद करतीं, फिर रईसजादों के सामने परोस देतीं अमरीन और आफरीन ने पुलिस को बताया कि वे गरीब घरों की लड़कियों को टारगेट करती थीं। पहले मदद के नाम पर घरेलू काम के लिए रखतीं। फिर हाई प्रोफाइल लाइफ स्टाइल का सपना दिखाकर बड़ी पार्टियों में ले जातीं। वहां उन्हें रईसजादों के आगे परोस दिया करती थीं। चार साल पहले मिसरोद में अमरीन एक स्पा संचालक के संपर्क में आई और स्पा में जॉब करने लगी। मिसरोद के स्पा में हुई चंदन से मुलाकात स्पा में ही जॉब के दौरान उसकी रायसेन के रहने वाले चंदन से मुलाकात हुई। बाद में दोनों ने मिलकर सेक्स रैकेट का संचालन शुरू किया। इस दौरान अमरीन ने अपनी कट्टर शिया विचारधारा का प्रचार कर अपने गिरोह की युवतियों को मुस्लिम बनने के लिए ब्रेनवॉश किया। चंदन का भी धर्मांतरण कराया। शराब और ड्रग्स लेने के लिए दबाव डालती थीं पीड़िताओं ने एफआईआर में बताया है कि चंदन यादव सागर रॉयल विला में अमरीन-आफरीन के साथ रहता है। दोनों बहनों के संपर्क में आने के बाद इस्लाम अपना चुका है। अमरीन और आफरीन दोनों पीड़िताओं को गुजरात और मुंबई ले गई थीं। वहां भी उन्होंने अनजान लोगों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। वे शराब पीने और एमडी ड्रग्स लेने के लिए भी दबाव डालती थीं। अमरीन के मोबाइल में कई संदिग्ध वॉट्सएप ग्रुप पुलिस ने अमरीन, आफरीन और चंदन के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। इनकी जांच कराई जाएगी। अमरीन के मोबाइल में कई संदिग्ध वॉट्सएप ग्रुप मिले हैं। उनमें कई युवतियों के फोटो भी हैं। पुलिस को अमरीन और आफरीन के देह व्यापार गिरोह से जुड़े होने के भी सबूत मिले हैं। उनके गिरोह में चंदन यादव के अलावा बिलाल और यासिर भी काम करते थे। दोनों पीड़िताओं से तीनों युवक कई बार रेप कर चुके हैं। वे किसी को भी वारदात के बारे में बताने पर बदनाम करने की धमकी देते थे। चंदन ने कहा- मुस्लिम बनो, अच्छी जगह शादी कराऊंगा भोपाल की रहने वाली पीड़िता ने पुलिस को बताया- मैं अमरीन के घर काम करती थी। एक दिन चंदन और अमरीन के बीच विवाद हो गया। चंदन नाराज होकर कहीं चला गया। अमरीन ने मुझे कहा कि चंदन को तलाशने चलना है। मैं उसके साथ चली गई। हम दोनों नारायण नगर में रहने वाली चंदन की बहन के घर पहुंचे। वहां चंदन मिला। कुछ देर बाद अमरीन कहीं चली गई। इस दौरान चंदन ने पहली बार मेरे साथ रेप किया। किसी को भी बताने पर जान से मारने की धमकी दी। बदनामी का डर भी दिखाया। … Read more

भील समुदाय से निशानेबाजी सीखे थे आजाद, उनके जन्मस्थान पर होगा बड़ा पार्क, CM का ऐलान

आलीराजपुर महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की विरासत को सहेजने के लिए मध्य प्रदेश सरकार उनकी जन्मस्थली भाभरा में एक बड़ा पार्क बनाएगी। इस बात की घोषणा प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने  की। आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ में स्थित भाभरा में हुआ था और उन्होंने 27 फरवरी, 1931 को देश के लिए अपनी जान दे दी थी। महानायक की पुण्यतिथि पर भाभरा में आयोजित 'आजाद स्मृति समारोह' में बोलते हुए, यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद नगर (भाभरा) में उनके नाम पर एक बड़ा पार्क बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद 14 साल की छोटी सी उम्र में स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे और आजादी की लड़ाई में उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। भील समुदाय से सीखी थी निशानेबाजी यादव ने आजाद को एक बेहतरीन निशानेबाज बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना बचपन अलीराजपुर के भील समुदाय के बच्चों के बीच बिताया था और उनसे ही निशानेबाजी की कला भी सीखी थी। यादव ने कहा, ' आजाद की विरासत से जुड़ी जगहों को भी संस्कृति विभाग की मदद से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।' आदिवासी नायकों से जुड़ी जगहों को संजोया जा रहा यादव ने कहा, 'राज्य सरकार आदिवासी महापुरुषों की विरासत को बचाने के लिए समर्पित है। खरगोन में टंट्या भील के नाम पर एक यूनिवर्सिटी बनाई गई है। इसी तरह, आजादी की लड़ाई के दूसरे आदिवासी नायकों से जुड़ी जगहों को भी संजोकर रखा जा रहा है।' आलीराजपुर जिले को मिली 171 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात इस दौरान मुख्यमंत्री ने आदिवासी बहुल अलीराजपुर जिले में 171 करोड़ रुपए की लागत वाले 49 विकास कार्यों का उद्घाटन और भूमिपूजन भी किया। उन्होंने कहा कि जिले में 1,800 करोड़ रुपए की लागत वाले नर्मदा सिंचाई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, और इसके पूरा होने पर 170 गांवों को पानी मिलेगा। उदगढ़ में मशहूर आदिवासी त्योहार भगोरिया में शामिल हुए यादव ने कहा कि इस अनुभव ने उनका दिल खुशी से भर दिया। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि MP सरकार ने भगोरिया को राष्ट्रीय त्योहार के तौर पर मनाने का फैसला किया है। भगोरिया त्योहार होली से ठीक पहले मनाया जाता है, जिसमें हर हफ़्ते मेले लगते हैं जो पश्चिमी मध्य प्रदेश के आदिवासियों के रंगीन त्योहारों को दिखाते हैं। ये मेले अलीराजपुर, झाबुआ, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में 100 से ज्यादा जगहों पर लगते हैं।

‘कपड़ा नहीं तो क्या हुआ, वर्दी तो है’: 6 कॉन्स्टेबल की रील्स पर विवाद, नोटिस जारी

रीवा खाकी पर इन दिनों रील बनाने की ऐसी सनक सवार है कि वर्दी की गरिमा और अनुशासन का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। ताजा मामला रीवा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर से सामने आया है, जहां पुलिस आरक्षक प्रशिक्षण ले रहे 6 नव आरक्षकों ने वर्दी में फूहड़ रील (Viral Police Reel) बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी। रील में आरक्षकों ने वर्दी का रौब दिखाते हुए कहा, शक्ल अच्छी नहीं है तो क्या हुआ, सरकारी नौकरी तो है। हमारे पास पैसा नहीं तो क्या हुआ, मंथली तो आता है। हमारे पास कपड़ा नहीं तो क्या, वर्दी तो है ना। आरक्षकों द्वारा यह रील सोशल मीडिया पर डालते ही वायरल हो गई। इसके बाद लोगों ने वर्दी की गरिमा, अनुशासन और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। रीवा के पुलिस ट्रेनिंग सेंटर से यहां पर ट्रेनिंग ले रहें 6 नव आरक्षकों का एक वीडियो सोशल मीडिया में सर्कुलेट हुआ. वीडियो पर एसपी की नजर जा पड़ी, जिसके बाद इन नव आरक्षकों को भी रील का रियल खामियाजा भुगतना पडा. 6 नव आरक्षकों को कारण बताओ नोटिस रीवा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे 6 नव आरक्षकों का एक वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से सर्कुलेट हो रहा है. वीडियो में 6 नव आरक्षकों ने एक साथ मिलकर एक रील तैयार बनाई. बाद में जिसे सोशल मीडिया पोस्ट किया. देखते ही देखते रील सर्कुलेट हो गई और हजारों लोगों ने उसे देखा. वीडियो PTS एसपी के पास पहुंचा, अधिकारियों ने इस कृत्य को अनुशासनहीनता माना. इसके बाद एसपी ने कार्रवाई करते हुए प्रशिक्षण ले रहे सभी नव आरक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. रील सर्कुलेट होने के बाद एसपी ने लिया एक्शन रील मे सभी 6 नव आरक्षक एक साथ दिखाई दे रहें हैं उनके द्वारा मस्ती भरे अंदाज मे एक वीडियो रिकॉर्ड किया गया. जिसमे कहा गया की" "शक्ल अच्छी नहीं है तो क्या हुआ, सरकारी नौकरी तो है न" "हमारे पास पैसा नहीं है तो क्या हुआ, मंथली तो आता है न" "हमारे पास कपड़े नहीं तो क्या हुआ वर्दी तो हैं न" वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस प्रशिक्षण सेंटर मे पदस्थ PTS एसपी सुरेन्द्र कुमार जैन ने एक्शन लेते हुए सभी 6 नव आरक्षकों को नोटिस जारी करते हुए पत्र जारी किया है. पुलिस मुख्यालय से जारी हो चुके है सख्त निर्देश विभाग की ओर से जारी किए गए पत्र में उल्लेख किया गया की." समय-समय पर पुलिस मुख्यालय भोपाल से सोशल मीडिया में शासकीय कार्य के अतिरिक्त किसी भी प्रकार के वीडियो वर्दी में वायरल नहीं करने के निर्देश प्रसारित किये गये हैं. इस संबंध में प्रशिक्षण के दौरान आंतरिक व बाह्य प्रशिक्षकों द्वारा भी समय-समय पर आप सबको अवगत कराया गया है, वर्दी में रील्स न बनाये जाने के संबंध में निर्देशित भी किया गया है. वीडियो में नवआरक्षक बोले, "हमारे पास पैसा नहीं है तो क्या हुआ सख्त निर्देशों के बाद भी इसका पालन नहीं किया गया. दिनांक 25 फरवरी 2026 को समय 03:04 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' ( ट्विटर) पर बने "मटियामेट ग्रुप" में आपके द्वारा उक्त निर्देशों का उल्लंघन करते हुए विभाग की छवि धूमिल करने वाली रील प्रदर्शित की गई है. रील में ग्रुप के सदस्यों द्वारा वर्दी में एक्टिंग करते हुए कहा जा रहा है कि "शक्ल अच्छी नहीं है तो क्या हुआ, सरकारी नौकरी तो है न. हमारे पास पैसा नहीं है तो क्या हुआ, मंथली तो आता है न. हमारे पास कपड़े नहीं है तो क्या हुआ, वर्दी तो है ना" रील को 25 फरवरी 2026 को रात 08:04 बजे तक तकरीबन 5,010 लोगों द्वारा देखा जा चुका है. साथ ही पुलिस विभाग के प्रति निगेटिव कमेंट भी किए जा रहे हैं. पुलिस विभाग की क्षवि को धूमिल कर रहे रील में बोले गए शब्द PTS एसपी के द्वारा जारी किए गए पत्र में यह भी जिक्र किया गया कि रील में बोले गए शब्द व सभी सदस्यों का अभिनव पुलिस विभाग जैसे अनुशासित विभाग के लिए प्रतिकूल है. साथ ही यह विभाग की क्षवि को भी धूमिल कर रहा है. आज ही स्पष्ट करें की क्यों न आपके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए. 25 फरवरी को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पुलिस प्रशिक्षण शाला से सभी 6 नव आरक्षकों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. उसी दिनांक को जवाब भी मांगा गया था. सभी 6 नव आरक्षकों को PTS एसपी ने जारी किया नोटिस     नव आरक्षक 1108 (चेस्ट नंबर 301) अनिल कड़ोदिया पदस्थापना जिला देवास     नव आरक्षक 4943 (चेस्ट नंबर 313 ) आनंद कुलवरे पदस्थापना जिला इंदौर     नव आरक्षक 1706 (चेस्ट नंबर 316) प्रदीप यादव पदस्थापना जिला उज्जैन     नव आरक्षक 788 (चेस्ट नंबर 317) राज कुमार सैन्धव पदस्थापना जिला उज्जैन     नव आरक्षक 677 ( चेस्ट नंबर 318 ) गोनू सतबाढ़िया पदस्थापना जिला उज्जैन     नव आरक्षक 692 (चेस्ट नंबर 320 ) सुरजीत गर्ग पदस्थापना जिला विदिशा

शिवराज सिंह ने सड़क पर घायल युवक को मदद दी, अपनी गाड़ी से भेजवाया अस्पताल

 भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक फिर मिशाल पेश की है. जिसकी लोग तारीफ कर रहे हैं. हुआ ये कि वह भोपाल से ग्वालियर जा रहे थे, इस दौरान एक युवक सड़क पर घायल पड़ा था, जबकि उसे भीड़ ने घेरकर रखा था. इस दौरान जब शिवराज सिंह की नजर पड़ी तो उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया और खुद अपनी गाड़ी से युवक को अस्पताल पहुंचवाया. इसको लेकर उन्होंने खुद एक्स पर एक पोस्ट किया है. एक्स पर किए पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मैं भोपाल से ग्वालियर की ओर एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा था. रास्ते में सड़क किनारे एक घायल युवक अचेत अवस्था में दिखाई दिया. चारों ओर भीड़ थी, लोग खड़े थे, देख रहे थे. पर कोई आगे नहीं बढ़ रहा था. मैंने तुरंत गाड़ी रुकवाई. घायल युवक के पास पहुंचा और अपनी गाड़ी में तत्काल अस्पताल पहुंचाया. साथ ही डॉक्टर से बातचीत कर समुचित उपचार की व्यवस्था की.  श्यामला हिल्स के पास रुका काफिला जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री का काफिला श्यामला हिल्स क्षेत्र से गुजर रहा था. किलोल पार्क के पास सड़क किनारे एक व्यक्ति घायल अवस्था में दिखाई दिया. यह देखते ही शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल काफिला रुकवाया और स्वयं वाहन से उतरकर घायल के पास पहुंचे. उन्होंने आसपास मौजूद लोगों से तुरंत अस्पताल ले जाने को कहा. इतना ही नहीं, मंत्री ने घायल युवक को खुद सहारा देकर उठाया और अपने ही काफिले की गाड़ी से अस्पताल भिजवाया. जाते समय उन्होंने घायल से कहा कि तुम अस्पताल जाओ, हम फोन करवा रहे हैं. एक्स पर लिखा, नर सेवा ही नारायण सेवा इस घटना के बाद शिवराज सिंह चौहान ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ''नर सेवा ही नारायण सेवा.'' उन्होंने कहा कि, ''मानवीय संवेदना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है. ग्वालियर के लिए रवाना होते समय रास्ते में घायल युवक को देखकर उन्होंने तत्काल मदद सुनिश्चित की.''   वीडियो वायरल , सोशल मीडिया पर सराहना घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. समर्थकों और आम नागरिकों ने केंद्रीय मंत्री की संवेदनशीलता और तत्परता की सराहना की. कई लोगों ने इसे जनप्रतिनिधि के कर्तव्य और मानवीय मूल्यों का उदाहरण बताया. बताया जा रहा है कि मंत्री अपने आवास से एयरपोर्ट जा रहे थे, तभी उनके सामने यह घटना दिखी. जिसके बाद केंद्रीय मंत्री ने प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर घायल को मदद पहुंचाई. पहले भी दिखा चुके हैं संवेदनशीलता यह पहला मौका नहीं है जब शिवराज सिंह चौहान ने इस तरह मानवीय पहल की हो. जुलाई 2025 में भी भोपाल के अवधपुरी इलाके में एक कार्यक्रम में जाते समय चेतक ब्रिज पर हादसे में घायल युवक की उन्होंने मदद की थी. उस समय भी उन्होंने काफिला रुकवाकर घायल को अस्पताल पहुंचाया और उपचार की व्यवस्था कराई थी.  शिवराज ने लोगों से की ये अपील हमने अक्सर देखा है कि इस तरह की घटनाओं में हम मदद के लिए हाथ बढ़ाने की बजाय तमाशबीन बनकर देखते रहते हैं, जिससे कीमती समय व्यर्थ हो जाता है और घायल व्यक्ति का जीवन खतरे में पड़ जाता है. एक अध्ययन के अनुसार हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि घायल को ‘गोल्डन ऑवर’ में उपचार मिल जाए, तो लगभग 50% जीवन बचाए जा सकते हैं. सोचिए, हमारी छोटी सी मदद और समय पर बढ़ाया गया एक हाथ कितनी माताओं की गोद सूनी होने से बचा सकता है. कितने बच्चों के सिर से पिता का साया हटने से रोक सकता है और कितनी बहनों के विश्वास को टूटने से बचा सकता है. मित्रों, किसी का जीवन बचाना सबसे बड़ा पुण्य है. सेवा ही सच्चा धर्म है और परोपकार ही हमारा कर्तव्य है. जब भी ऐसी स्थिति सामने आए तो आगे बढ़िए और मदद कीजिए. आपकी एक मदद किसी का जीवन बचा सकती है.