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सेना दिवस को लेकर भोपाल में तैयारियां तेज, CM यादव से सैन्य अधिकारियों ने की मुलाकात

भोपाल में सेना दिवस पर होंगे भव्य और आकर्षक आयोजन केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आगमन भी प्रस्तावित मुख्यमंत्री डॉ. यादव से वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भेंट कर दी तैयारियों की जानकारी भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुख्यमंत्री निवास (समत्व भवन) में ले. जनरल अरविंद चौहान और मेजर जनरल विकास लाल सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सेना दिवस 15 जनवरी 2027 का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर "आर्मी डे परेड- 2027 आपकी सेना आपके पास" की अवधारणा की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया गया कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस आयोजन में आने की संभावना है। इसके अलावा अन्य विशिष्ट अतिथि भी भोपाल में हो रहे सेना दिवस कार्यक्रमों में सम्मिलित होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सेना दिवस के अवसर पर होने वाले प्रस्तावित कार्यक्रमों और विविध गतिविधियों और इस संबंध में की जा रही तैयारियों के बारे में भी अवगत करवाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेना दिवस के अवसर पर आयोजनों को गरिमामय बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा आवश्यक सहयोग किया जाएगा। विभिन्न आयोजनों में राज्य शासन के विभाग सहभागी होंगे। वर्ष 2027 प्रदेश में युवा वर्ष होगा। इसमें युवाओं की भागीदारी के समुचित प्रयास किए जाएंगे। कार्यक्रमों की रूपरेखा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने जानकारी दी कि सेना दिवस के अंतर्गत 1 नवम्बर 2026 को संकल्प वृक्ष आयोजन में शौर्य स्मारक परिसर में पौध-रोपण किया जाएगा। माह जनवरी 2027 में सैन्य प्रदर्शनी और एकीकृत युद्ध प्रदर्शन प्रस्तावित है। भोपाल के भेल क्षेत्र में कालीबाड़ी मार्ग पर आर्मी डे मुख्य परेड का आयोजन 15 जनवरी को होगा। साथ ही तात्या टोपे नगर स्टेडियम में 15 जनवरी की शाम देशभक्ति से और ओतप्रोत शौर्य संध्या, रण हुंकार का आयोजन किया जाएगा। भेल के जंबूरी मैदान में भारतीय सेना के अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों के प्रदर्शन और भोजताल स्थित वीआईपी बोट क्लब क्षेत्र में सेना के शौर्य, सामरिक क्षमता और रणनीतिक कौशल पर आधारित इंटीग्रेटेड कॉम्बैट डिस्प्ले भी किया जाएगा। मुख्य परेड एवं उससे जुड़े कार्यक्रमों में लगभग 50 हजार प्रतिनिधियों के मौजूद रहने की संभावना है। इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। युवा शक्ति और नागरिक सहभागिता के प्रयास किए जा रहे हैं।  

‘मध्यप्रदेश की विरासत अद्भुत’, CM डॉ. यादव ने ट्रैवल मार्ट में इन्फ्लुएंसर्स से किया संवाद

मध्यप्रदेश की विरासत है अद्भुत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (एमपीटीएम) 2026 में इन्फ्लुएंसर्स से किया सीधा संवाद मध्यप्रदेश की धरोहर की कहानियों को पहुंचाया जाएगा देश-दुनिया तक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश वीरांगना रानी दुर्गावती जैसी साहसी नारियों की कर्मभूमि है जिसने राष्ट्र की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मैत्री अतुलनीय है। यही नहीं आज के दौर की बात करें तो जो चीते विलुप्त प्राय: हो गए थे उनकी मध्यप्रदेश में बसाहट को सफलता मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, वन सम्पदा और सांस्कृतिक विशेषताओं को बढ़ावा देने के लिए देश के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (एमपीटीएम) 2026 को संबोधित कर रहे थे। स्थानीय सयाजी होटल में हुई राष्ट्रीय स्तर की इन्फ्लुएंसर्स मीट में देशभर से लगभग 200 से अधिक इन्फ्लुएंसर्स पहुंचे और मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज की पीढ़ी को इतिहास के गौरवशाली पक्ष से परिचित करवाना आवश्यक है। इसमें इन्फ्लुएंसर्स की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में ही पर्यटन के क्षेत्र में स्कूल की पुरानी इमारत को सम्राट विक्रमादित्य होटल में परिवर्तित करने का सफल नवाचार हुआ है। होमस्टे लोकप्रिय हो रहे हैं। श्रीनगर की डल झील में ही नहीं अब भोपाल के भोजताल में शिकारे पर्यटकों को सैर करवाने का कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम में डॉ. इलैया राजा टी., प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि मध्यप्रदेश में फिल्म निर्माण के लिए एक समृद्ध और अनुकूल इको-सिस्टम विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर हो रहा है। मध्यप्रदेश को केवल फिल्म शूटिंग ही नहीं, बल्कि पोस्ट-प्रोडक्शन सहित संपूर्ण फिल्म निर्माण का हब बनाने के प्रयास किया जा रहे हैं। मध्यप्रदेश की विविध लोकेशन्स, समृद्ध संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य इसे फिल्म निर्माताओं के लिए एक विशिष्ट डेस्टिनेशन बनाते हैं। प्रसिद्ध शेफ एवं टेलीविजन पर्सनल्टी रणवीर बरार , अभिनेता अमित सियाल, कंटेंट क्रिएटर्स मारूफ कलमन ने कहा कि मध्यप्रदेश से जुड़ी वास्तविक और खूबसूरत कहानियों को समझने के लिए मध्यप्रदेश में आना होगा। यहां के लोगों से मिलकर अनुभव प्राप्त करने होंगे। हम जब किसी जगह को स्थानीय नजरिए से देखते हैं, तभी उसकी असली पहचान और उसकी अनकही कहानियां सामने आती हैं। 9 श्रेणियों में हुए इन्फ्लुएंसर्स सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विभिन्न गतिविधियों के दौरान उत्कृष्ट योगदान देने वाले इन्फ्लुएंसर्स को सम्मानित किया। इस इन्फ्लुएंसर्स मीट का उद्देश्य मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों, स्थानीय अनुभवों और प्रदेश की अनूठी कहानियों को सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है। देश और प्रदेश के इन्फ्लुएंसर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मध्यप्रदेश की विविध पर्यटन संभावनाओं को पर्यटकों तक पहुंचाएंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के लिए मनोरंजक एवं ज्ञानवर्धक फन क्विज़ का आयोजन किया गया, जिसमें मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, पर्यटन स्थलों और खान-पान से जुड़े रोचक प्रश्न पूछे गए। इन्फ्लुएंसर्स ने उत्साह के साथ इसमें भाग लिया और प्रदेश की विविधताओं के बारे में नई जानकारियां साझा कीं। इस गतिविधि ने कार्यक्रम को संवादात्मक बनाने के साथ-साथ प्रतिभागियों को मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत से और करीब से जोड़ा। हैंडलूम और आर्ट एंड क्राफ्ट को केंद्र में रखकर विशेष फैशन शो का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्राणपुर, महेश्वर, कुक्षी, धार, केरियाखेड़ी और भैरवगढ़ क्राफ्ट एवं हैंडलूम विलेज की थीम को आधुनिक फैशन के साथ प्रस्तुत किया गया। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की परियोजना का उद्देश्य प्रदेश के विशिष्ट स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक शिल्प एवं हथकरघा को पर्यटन से जोड़ते हुए इन्हें व्यापक बाजार और नए उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाना है। इन्फ्लुएंसर्स मीट के माध्यम से इन स्थानीय उत्पादों और शिल्प परंपराओं को देशभर से आए डिजिटल क्रिएटर्स के सामने प्रस्तुत किया गया, जिससे इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी। संवाद के दौरान मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, खान-पान, वन्य-जीवन, विरासत और स्थानीय पर्यटन अनुभवों को डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ।  

PNG कनेक्शन को बढ़ावा देने चलेगा विशेष अभियान, अधिकारियों को दिए निर्देश

भोपाल भारत सरकार शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन में वृद्धि किए जाने के लिये देश भर में एक अभियान चला रही है। इसमें उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहाँ सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संबंधी अधोसंरचना उपलब्ध है। इस संबंध में जरूरी कार्यवाही के निर्देश कलेक्टर्स को दिये गये हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार एक ही समय पर एलपीजी और पीएनजी कनेक्शन रखने पर रोक लगाई गई है तथा ऐसे घरों में जहां पीएनजी सप्लाई उपलब्ध है, यदि उनके द्वारा पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया जाता है तो उन घरों को एलपीजी सप्लाई बंद करने का प्रावधान किया गया है। इस फ्रेमवर्क को समय-सीमा में लागू करने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा सभी अधिकृत सीजीडी संस्थाओं और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र (GA) में एक पीएनजी समन्वय समिति (PCC) गठित करने के निर्देश दिये गये हैं। जिला स्तर पर जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी को समिति का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। समिति नगरीय निकाय, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन से संबंधित कंपनियों से समन्वय कर शहर का एक्शन प्लान तैयार करेगी। पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने दी गई सुविधा सभी सीजीडी संस्थाओं द्वारा जिन कॉलोनियों में सीजीडी अधोसंरचना उपलब्ध है, उन कॉलोनी के घरों में पीएनजी कनेक्शन के लिये आवेदन करने तथा पीएनजी कनेक्शन स्थापित करने के लिए जिलावार सीजीडी संस्थाएं कार्यरत है। घरेलू एवं कमर्शियल कनेक्शन की मांग/शिकायत दर्ज करने तथा निराकरण करने के लिए आम जनता निम्नानुसार दूरभाष क्रमांक पर संपर्क कर सकते हैं – 1. अवंतिका गैस लिमिटेड- पीथमपुर (9753905737), इंदौर (9810750088), इंदौर (8085682649), उज्जैन (7091688388), ग्वालियर (8949647203) 2. गैल गैस लिमिटेड- देवास (9424098887,07272250879), रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788) 3. नवेरिया गैस लिमिटेड- धार (07292-223311) 4. थिंक गैस- भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-3000-0046) 5. इण्डियन आयल कंपनी – गुना (9425991090), मऊगंज, रीवा (9424836488), अशोकनगर (9425119522), मुरैना (7223982333) 6. भारत पेट्रोलियम कंपनी- मैहर, सतना, शहडोल (9424738607), सीधी, सिंगरौली (9424341954) 7. गुजरात गैस लि. – उज्जैन, देवास, इंदौर (7342990916), रतलाम, झाबुआ (7412230292) प्रदेश के अन्य जिलों में पाईपलाईन का विस्तार होने के उपरांत पीएनजी कनेक्शन प्रदाय किये जा सकेंगे।

शहरी विकास से डिजिटल गवर्नेंस तक, इन अहम विषयों पर आधारित होगा अर्बन कॉन्क्लेव

शहरी विकास, निवेश, डिजिटल गवर्नेंस और पर्यावरण अनुकूल शहरों सहित विभिन्न विषयों पर आधारित होगा अर्बन कॉन्क्लेव इंदौर नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में अर्बन कॉन्क्लेव 28 अक्टूबर को आयोजित होगा। नगरीय विकास को नई गति देने, शहरी अधोसंरचना में निवेश को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से शहरों को अधिक सुविधायुक्त और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस कॉन्क्लेव में राज्य सरकार के विजन को साझा किया जाएगा। श्रेणी-2 के शहरों के विकास एवं डिजिटल गवर्नेंस पर विचार-मंथन कॉन्क्लेव में महानगरों से आगे बढ़कर श्रेणी-2 के शहरों के विकास पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें पुनःघनीकरण, परिवहन आधारित विकास (टीओडी), टीडीआर, आवास, पुनर्विकास, मास्टर प्लान, विकास गलियारे, रेरा स्वीकृतियां, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, अनापत्ति प्रमाण-पत्रों में कमी (एनओसी) तथा एफएआर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा। नगरीय प्रशासन में सुधार और डिजिटल सशक्तिकरण पर केंद्रित सत्र में स्वचालित भवन अनुज्ञा अनुमोदन प्रणाली (एबीपीएएस), ऑनलाइन एनओसी एवं विकास अनुज्ञा प्रणाली, कॉलोनी अधिनियम, डिजिटल गवर्नेंस, जीआईएस आधारित नियोजन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा परियोजना प्रबंधन सूचना प्रणाली जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। जलवायु अनुकूल शहर, जल सुरक्षा और ग्रीन फाइनेंसिंग जलवायु अनुकूल शहर, जल सुरक्षा और सर्कुलर एकॉनामी विषय पर आयोजित सत्रों में विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में शहरी जल पुनः उपयोग एवं जल प्रबंधन, अमृत 2.0, बीआरएसआर फ्रेमवर्क, नमो हरित नगर योजना, सिटी फॉरेस्ट एवं सेंट्रल पार्क, वायु गुणवत्ता सुधार की पहल, ईज ऑफ लिविंग एवं लिवेबिलिटी इंडेक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, एमआरएफ, कचरे से ऊर्जा, सौर ऊर्जा परियोजनाएं तथा सीबीजी इकोसिस्टम शामिल हैं। कॉन्क्लेव में शहरी निवेश, वित्तीय संसाधन, साझेदारी और वैश्विक विशेषज्ञता के अवसरों पर भी मंथन होगा। इसमें अर्बन चैलेंज फंड की परियोजनाएं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), वित्तीय मॉडलिंग, टेंपल बॉन्ड, ग्रीन बॉन्ड, नगर पालिका बॉन्ड, संयुक्त उपक्रम, बहुपक्षीय बैंकों से वित्त पोषण, अनुदान और वायबिलिटी गैप फंडिंग सहित विभिन्न वित्तीय विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सिंहस्थ-2028: विश्वस्तरीय तीर्थ नगरी के निर्माण पर होगा विशेष सत्र कॉन्क्लेव में सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन को विश्वस्तरीय तीर्थ नगरी के रूप में विकसित करने पर विशेष सत्र आयोजित होगा। इसमें नियोजन, प्राथमिकता वाली अधोसंरचना में निवेश, टेंपल बॉन्ड, सीएसआर, डिजिटल ट्विन मॉडलिंग तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन की कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी। साथ ही तकनीक आधारित भीड़ प्रबंधन, यातायात एवं आयोजन प्रबंधन को भी सत्र में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। अर्बन कॉन्क्लेव प्रदेश में नगरीय अधोसंरचना, नवाचार, टिकाऊ शहरी विकास और रोजगार सृजन को एक नई दिशा एवं गति प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।  

7 अक्टूबर को ‘सेवा भाव’ पर होगा खास ऑनलाइन सत्र, नीति आयोग सदस्य से जुड़ेंगे प्रतिभागी

‘सेवा भाव’ पर विशेष ऑनलाइन सत्र 7 अक्टूबर को नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम करेंगे संवाद प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों से सत्र में भाग लेने की अपील सत्र में सहभागिता पर मिलेंगे ‘Service Orientation’ competency के विशेष क्रेडिट भोपाल  कर्मयोगी भारत द्वारा नागरिक केन्द्रित शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से ‘सेवा भाव’ विषय पर बुधवार 7 अक्टूबर 2026 को विशेष ऑनलाइन सत्र आयोजित किया जाएगा। सत्र का संचालन नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम करेंगे। सत्र में शासकीय सेवकों में संवेदनशीलता, जवाबदेही और नागरिक केन्द्रित दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने के साथ लोक सेवा प्रदाय में ‘सेवा भाव’ की भावना विकसित करने पर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त और कलेक्टर्स को इस संबंध में निर्देश जारी कर अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को ऑनलाइन सत्र में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है। सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक होगा सत्र विशेष ऑनलाइन सत्र 7 अक्टूबर को सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक आयोजित होगा। सीधा प्रसारण iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा। इससे केन्द्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के शासकीय अधिकारी-कर्मचारी भी ऑनलाइन सत्र में शामिल हो सकेंगे। सत्र की लिंक iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म के Events Section में उपलब्ध कराई जाएगी। सहभागी अधिकारी-कर्मचारियों को मिलेंगे विशेष क्रेडिट अधिकारी-कर्मचारियों की सहभागिता और सीखने के प्रति उनकी सक्रियता को प्रोत्साहित करने के लिए 7 अक्टूबर को सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म के माध्यम से सत्र में शामिल होने वाले सभी उपयोगकर्ताओं को ‘Service Orientation’ competency के अंतर्गत विशेष क्रेडिट प्रदान किए जाएंगे। नागरिकों को शासन के केन्द्र में रखने पर जोर मिशन कर्मयोगी में नागरिक केन्द्रितता को प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया गया है। उद्देश्य ऐसी पेशेवर, सक्षम और उत्तरदायी सिविल सेवा का निर्माण करना है, जो शासन और लोक सेवा प्रदाय में नागरिकों को केन्द्र में रखे। iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म पर नागरिक केन्द्रितता और सेवा उन्मुखीकरण से संबंधित विभिन्न पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं जिन्हें बड़ी संख्या में शासकीय कर्मचारियों द्वारा पूरा किया जा चुका है। विशेष सत्र के माध्यम से शासकीय सेवकों में सहानुभूति, जवाबदेही और नागरिक केन्द्रित दृष्टिकोण को और मजबूत करने तथा लोक सेवा प्रदाय में ‘सेवा भाव’ की भावना को आत्मसात करने पर जोर दिया जाएगा। कर्मयोगी भारत ने सभी स्तरों के अधिकारियों-कर्मचारियों की अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है जिससे शासन के सभी स्तरों पर सेवा, संवेदनशीलता और नागरिक केन्द्रित प्रशासन की साझा कार्य-संस्कृति को सुदृढ़ किया जा सके।  

इंदौर के MY अस्पताल में फ्री बोटोक्स ट्रीटमेंट, लकवे से जकड़े अंगों को मिल रही नई जिंदगी

 इंदौर  इंटरनेट मीडिया पर बोटोक्स को लेकर तरह-तरह के दावे वायरल हो रहे हैं। कहीं इसे लकवे का इलाज बताया जा रहा है तो कहीं कुछ घंटे या दो दिन में हाथ-पैरों की हरकत पूरी तरह लौट आने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, इंदौर में स्ट्रोक या लकवे के बाद हाथ-पैरों में होने वाली स्पास्टिसिटी यानी मांसपेशियों के असामान्य कड़ापन से परेशान पात्र मरीजों को एमवाय अस्पताल में बोटुलिनम टॉक्सिन (बोटोक्स) का उपचार नि:शुल्क दिया जा रहा है। निजी अस्पतालों में महंगा पड़ने वाला यह उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। अस्पताल में अब तक 1000 से अधिक मरीज इसका लाभ ले चुके हैं।विशेषज्ञों के अनुसार बोटोक्स लकवे का इलाज नहीं है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से लकवे के बाद विकसित होने वाली स्पास्टिसिटी को कम करने के लिए किया जाता है। स्पास्टिसिटी से हाथ मुट्ठी की तरह बंद, पैर जमीन पर रखने में परेशानी स्ट्रोक के बाद कुछ मरीजों में प्रभावित हिस्से की मांसपेशियां समय के साथ असामान्य रूप से सख्त होने लगती हैं। इसे स्पास्टिसिटी कहा जाता है। ऐसे मरीजों में हाथ लगातार मुड़ा रह सकता है, उंगलियां मुट्ठी की तरह बंद हो सकती हैं और कोहनी सीधी करने में परेशानी हो सकती है। पैरों में कड़ापन बढ़ने पर पैर सामान्य तरीके से जमीन पर नहीं पड़ता, जिससे चलने में परेशानी हो सकती है। कई बार यह कड़ापन फिजियोथेरेपी और रोजमर्रा के कामों में भी बाधा बनता है। ऐसे चुनिंदा मरीजों में विशेषज्ञ बोटुलिनम टॉक्सिन का इस्तेमाल करते हैं। प्रभावित मांसपेशी की पहचान के बाद लगाया जाता है इंजेक्शन डॉ. मोनिका पोरवाल बागुल मरीज की जांच कर यह देखती हैं कि किस मांसपेशी में असामान्य खिंचाव या कड़ापन है। इसके बाद जरूरत के अनुसार उन्हीं चुनिंदा मांसपेशियों में बोटोक्स लगाया जाता है। इसका उद्देश्य मांसपेशियों की अत्यधिक सक्रियता को अस्थायी रूप से कम करना होता है। 3 से 6 महीने तक रह सकता है असर बोटोक्स का असर स्थायी नहीं होता। मरीज की स्थिति, मांसपेशियों की प्रतिक्रिया और स्पास्टिसिटी की गंभीरता के आधार पर कुछ मरीजों को तीन से छह महीने बाद दोबारा उपचार की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, हर मरीज को तय अंतराल पर दोबारा इंजेक्शन लगाना जरूरी नहीं है। दोबारा बोटोक्स देना है या नहीं, कितनी मात्रा में देना है और किन मांसपेशियों में देना है, इसका निर्णय डॉक्टर मरीज की दोबारा जांच के बाद करते हैं। मरीज बोले- यहां आकर पता चला बोटोक्स मुफ्त है एमवाय अस्पताल में उपचार करा रहे एक मरीज ने बताया कि उसे पहले जानकारी नहीं थी कि यहां बोटोक्स की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। लकवे के बाद हाथ ठीक से नहीं उठता था और पैर से चलने में भी परेशानी थी। अलग-अलग जगह इलाज कराने के बाद एमवाय अस्पताल में बोटोक्स लगाया गया। इसके बाद हाथ में कुछ हरकत आने लगी और चलने में भी सुधार महसूस हुआ।मरीज ने कहा कि यदि इस सुविधा की जानकारी पहले होती तो इलाज के लिए अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ता। सरकारी अस्पताल में उपचार निशुल्क मिलने से मरीज और परिवार पर इलाज का आर्थिक बोझ भी कम होता है। दिसंबर 2025 में आया था लकवा, बोटोक्स के बाद हाथ में राहत एक महिला ने बताया कि उसके पिता को दिसंबर 2025 में लकवा आया था। इसके बाद उनका हाथ ठीक से नहीं उठता था। इलाज और पुनर्वास के दौरान बोटोक्स दिया गया। महिला के मुताबिक, इसके बाद हाथ में पहले की तुलना में राहत महसूस हुई और हरकत में सुधार आया। दो महीने पहले बोटोक्स लगा, हाथ का कड़ापन हुआ कम दादी को उपचार के लिए एमवाय अस्पताल लेकर आए एक युवक ने बताया कि करीब दो महीने पहले बोटोक्स लगाया गया था। इससे पहले हाथ काफी कड़क रहते थे।अब हाथ पहले की तुलना में लूज हुआ है और मूवमेंट भी आने लगी है। पैर में भी पहले हरकत नहीं थी, लेकिन उपचार के बाद उसमें भी मूवमेंट महसूस हो रही है। डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि एमवाय अस्पताल में बोटोक्स थेरेपी निशुल्क की जा रही है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल रहा है। मरीज किसी भी भ्रामक जानकारी में आकर खुद से कोई इंजेक्शन न लगवाएं। उन्होंने बताया कि यहां 10 साल से यह थेरेपी दी जा रही है।

Kuno Cheetah Update: जंगल से बाहर निकलने वाले चीतों की होगी खास निगरानी, 10 साल का लैंडस्केप प्लान तैयार

ग्वालियर  श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ अब उनके दायरे की निगरानी भी कूनो की सीमाओं से आगे बढ़ाई जा रही है। चीते जब पार्क से निकलकर आसपास के जंगलों या दूसरे जिलों की ओर रुख करें तो उनकी सुरक्षित निगरानी और बेहतर प्रबंधन के लिए ‘चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान’ तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और देहरादून के वन विशेषज्ञ ग्वालियर-चंबल संभाग के वन अधिकारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दे रहे हैं। योजना का मकसद ऐसे वन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां चीतों के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद है। साथ ही, किसी चीते के दूसरे जिले में पहुंचने की स्थिति में वन अमले को उसकी निगरानी और प्रबंधन के लिए तैयार किया जाएगा। 5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन में जुटेगा पूरा डेटा योजना के तहत वन क्षेत्रों में 5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन बनाए जाएंगे। प्रत्येक जोन में सिर्फ चीतों की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का डेटा जुटाया जाएगा। इसमें पेड़-पौधे, घास, मवेशी, शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों के साथ पक्षियों की मौजूदगी तक दर्ज की जाएगी। क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति और उपलब्ध संसाधनों का भी रिकॉर्ड तैयार होगा। इसी विस्तृत डेटा के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि संबंधित क्षेत्र चीतों के लिए कितना अनुकूल है और वहां उनकी मौजूदगी की स्थिति में किस तरह के प्रबंधन की जरूरत होगी। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शुरू होगा सर्वे चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान के तहत डेटा कलेक्शन और अन्य प्रक्रिया अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। पूरी प्रक्रिया में करीब दो महीने लगने का अनुमान है। फिलहाल यह योजना आगामी 10 वर्षों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इसके लागू होने के बाद चीतों की आवाजाही वाले इलाकों में वन विभाग के पास उनके आवास, भोजन, पानी और आसपास मौजूद वन्यजीवों से जुड़ा विस्तृत डेटा उपलब्ध रहेगा। इससे किसी चीते के कूनो से बाहर निकलने पर तत्काल प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलेगी। दूसरे जिले और राज्य तक पहुंच चुके हैं चीते कूनो से चीतों का बाहर निकलना कोई नई बात नहीं है। अब तक कुछ चीते कूनो की सीमा से बाहर निकलकर पड़ोसी जिलों और यहां तक कि दूसरे राज्य के इलाकों तक पहुंच चुके हैं और बाद में वापस लौटे हैं। फिलहाल बाहर निकलने वाले चीतों की ट्रैकिंग मुख्य रूप से कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन की टीम करती है। नए लैंडस्केप प्लान के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग के दूसरे वन क्षेत्रों में भी स्थानीय अमले को इस जिम्मेदारी के लिए तैयार किया जाएगा। कूनो की टीम जैसा प्रशिक्षित होगा स्थानीय वन अमला इस योजना का एक अहम हिस्सा वन अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष ट्रेनिंग है। कूनो के विशेषज्ञों की तरह ही ग्वालियर-चंबल के वन अमले को चीतों के व्यवहार और उनकी शारीरिक स्थिति को समझने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में चीते की चाल, बैठने का तरीका, व्यवहार और गतिविधियों से उसकी स्थिति का अंदाजा लगाने जैसी बारीकियां सिखाई जाएंगी। यहां तक कि उसके पेट की स्थिति, शिकार करने की स्थिति, पानी की जरूरत और किसी तरह की परेशानी के संकेतों को भी पहचानने पर जोर रहेगा। इसका फायदा यह होगा कि यदि कोई चीता कूनो से निकलकर संभाग के किसी दूसरे वन क्षेत्र में पहुंचता है तो वहां तैनात कर्मचारी शुरुआती स्तर पर ही उसकी स्थिति को समझकर जरूरी कदम उठा सकेंगे। हर सैंपल जोन का बनेगा अलग रिकॉर्ड प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को अलग-अलग सैंपल जोन आवंटित कर डेटा कलेक्शन कराया जाएगा। इसमें क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राकृतिक परिस्थितियां, वनस्पति, वन्यजीव और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी। आने वाले समय में यही डेटा चीतों की निगरानी और उनके प्रबंधन का आधार बनेगा।  

ऊर्जा मंत्री तोमर का बड़ा ऐलान, MP ट्रांसको ने HTLS कंडक्टर से बढ़ाई ट्रांसमिशन क्षमता

एमपी ट्रांसको ने शुरू किया एचटीएलएस कंडक्टर से क्षमता उन्नयन: ऊर्जा मंत्री तोमर भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि ग्वालियर शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती विद्युत मांग तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क पर बढ़ते पावर फ्लो को देखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने ग्वालियर के महत्वपूर्ण 132 केवी पारेषण नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने का कार्य शुरू कर दिया है। इसके तहत मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों में लगे एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को अत्याधुनिक हाई टेम्परेचर लो सैग (एचटीएलएस) कंडक्टरों से बदला जा रहा है। कार्य पूर्ण होने पर इन लाइनों की विद्युत पारेषण क्षमता करीब तीन गुना तक बढ़ सकेगी। 39.8 सर्किट किलोमीटर लाइन में शुरू हुआ क्षमता उन्नयन कार्य ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत 220 केवी महलगांव सबस्टेशन से जुड़े 132 केवी डीसीडीएस महलगांव-तिघरा तथा महलगांव-मोतीझील सर्किटों में कंडक्टर बदलने का कार्य शुरू हो गया है। कुल लगभग 39.8 सर्किट किलोमीटर लाइन में मौजूदा एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों के स्थान पर पैंथर समतुल्य एचटीएलएस कंडक्टर लगाए जा रहे हैं। इससे इन महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइनों की करंट वहन क्षमता बढ़ेगी और मौजूदा नेटवर्क से अधिक विद्युत शक्ति का पारेषण संभव हो सकेगा। सबस्टेशनों मे भी होगा अपरेटिंग का कार्य कंडक्टर बदलने के साथ संबंधित सबस्टेशनों के फीडर बे और उपकरणों की क्षमता का भी उन्नयन किया जा रहा है। इसके तहत 220 केवी महलगांव सबस्टेशन में दो 132 केवी फीडर बे, 132 केवी मोतीझील सबस्टेशन में एक तथा 132 केवी तिघरा सबस्टेशन में एक फीडर बे के अपरेटिंग का कार्य भी शुरू किया गया है। इससे लाइन और सबस्टेशन उपकरणों की क्षमता में आवश्यक सामंजस्य स्थापित होगा।  मौजूदा कॉरिडोर से ही बढ़ेगी  तीन गुना पारेषण क्षमता एचटीएलएस कंडक्टरों की करंट वहन क्षमता पारंपरिक एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में काफी अधिक होती है। इसके कारण मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन के उसी कॉरिडोर में करीब तीन गुना अधिक पावर का पारेषण किया जा सकेगा। इस तकनीक के माध्यम से बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए मौजूदा नेटवर्क की क्षमता बढ़ाई जा रही है। बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर किया जा रहा उन्नयन ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि ग्वालियर में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और बढ़ती निर्माण एवं औद्योगिक गतिविधियों के कारण विद्युत मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं नए ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) उपलब्ध कराना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर में ही क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प है। पावर फ्लो का बेहतर प्रबंधन होगा संभव एचटीएलएस कंडक्टरों के माध्यम से महत्वपूर्ण 132 केवी लाइनों की क्षमता बढ़ने से पावर फ्लो का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा और इन लाइनों पर अतिरिक्त ऑपरेशनल मार्जिन उपलब्ध होगा। संबंधित स्विचयार्ड और फीडर बे उपकरणों के उन्नयन से बढ़ी हुई पारेषण क्षमता का प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित होगा। ग्वालियर शहर के बढ़ते लोड को पूरा करने में होगा सहायक  ट्रांसमिशन लाइन की इस क्षमता उन्नयन से ग्वालियर शहर और आसपास के क्षेत्रों की बढ़ती विद्युत आवश्यकताओं के अनुरूप पारेषण नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर और उससे जुड़े स्विचयार्ड एवं फीडर बे इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा। ज्यादा लोड वहन करने व अधिक तापमान पर कार्य करने में सक्षम उल्लेखनीय है कि एचटीएलएस कंडक्टर पारंपरिक एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में अधिक तापमान पर कार्य करने में सक्षम होते हैं और उच्च तापमान पर भी इनका सैग अपेक्षाकृत कम रहता है। कंडक्टर की अधिक थर्मल करंट वहन क्षमता के कारण मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क से अधिक पावर का पारेषण किया जा सकता है।  

बुंदेलखंड में चीतों की नई दहाड़, CM मोहन यादव आज 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती रिजर्व में छोड़ेंगे 2 चीते

सागर  वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर आज सात अक्तूबर को सागर के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस रिजर्व में दो चीतों को खुले वातावरण में छोड़ेंगे। इस पहल से बुंदेलखंड की धरती पर वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी। उक्त आशय की जानकारी खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दी है। उन्होंने कहा कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों का आगमन सागर सहित पूरे बुंदेलखंड के लिए अत्यंत गौरव की बात है। खुले मैदानों और घास के क्षेत्रों के प्रमुख वन्यजीव चीते की मौजूदगी से इस क्षेत्र की जैव विविधता को एक विशिष्ट पहचान मिलेगी। वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर सागर और बुंदेलखंड के लिए वन्यजीव संरक्षण का एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से लाए गए दो चीतों को विमुक्त करेंगे। इसके साथ ही यह मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन जाएगा। चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर सृजित होंगे। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों के यहां पहुंचेंगे, जिससे होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसाय और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। सागर और बुंदेलखंड के लिए बड़ी सौगात मंत्री राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। यह योजना केवल वन्यजीवों को बसाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सागर और बुंदेलखंड में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। चीतों की सुरक्षा और मेहमाननवाजी के लिए रिजर्व क्षेत्र में लगभग 439 हेक्टेयर का विशेष सुरक्षित और अनुकूल वातावरण वाला क्षेत्र विकसित किया गया है। वन विभाग द्वारा चीतों की सतत निगरानी, सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सभी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों के लिए विशेष व्यवस्थाएं कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को मध्यप्रदेश में चीतों के तीसरे आवास के रूप में विकसित किया गया है। चीतों की सुरक्षा और अनुकूलन के लिए लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आधुनिक बाड़ों (बोमा) और अन्य सुविधाओं से युक्त सुरक्षित आवास तैयार किया गया है। वन विभाग द्वारा चीतों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही, क्षेत्र में मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है। प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। वर्ष 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के साथ एकीकृत करने के बाद 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू सहित विविध वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है तथा संकटग्रस्त भारतीय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। चीता पुनर्स्थापना अभियान को मिला नया विस्तार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए। अब यह अभियान मध्यप्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक विस्तार ले रहा है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की विमुक्ति इसी व्यापक संरक्षण अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 5 अक्टूबर 2026 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं। 7 अक्टूबर को कूनो से नर थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीतें रहेंगे। गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक, मादा धीरा तथा सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाकर विमुक्त की गई मादा राधा मौजूद हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों की विमुक्ति के साथ मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान एक नए चरण में प्रवेश करेगा। बढ़ेगा वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय रोजगार मंत्री राजपूत के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की ओर आकर्षित होंगे। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसायी और हस्तशिल्प कलाकारों को रोजगार तथा आय के नए अवसर मिलेंगे। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों को तीव्र गति मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को छोड़कर देश में चीता पुनर्स्थापना अभियान की ऐतिहासिक शुरुआत की थी। उसी व्यापक अभियान की अगली कड़ी के रूप में अब प्रदेश के अन्य उपयुक्त वनों में चीतों को बसाया जा रहा है। 

लाड़ली बहना 41वीं किस्त: दुर्गा पूजा से पहले मिल सकते हैं ₹1,500, लाभार्थी जरूर करें ये काम

भोपाल  त्योहार के समय लोगों को उम्मीद है कि सरकारी योजनाओं के पैसे जल्द मिलेंगे. मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना चलायी जाती है. जिसमें हर महीने 1500 रुपये की किस्त सीधे बैंक अकाउंट में भेजे जाते हैं. सितंबर महीने में मध्य प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना की 40वीं किस्त जारी की गई थी, जो 13 सितंबर को महिलाओं के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया था. वहीं अब महिलाओं को अक्टूबर महीने में आने वाली 41वीं किस्त का इंतजार है।  'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' राज्य की करीब 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं के लिए एक बड़ा आर्थिक संबल बन चुकी है. अब सभी लाभार्थियों को योजना की 41वीं किस्त का दुर्गा पूजा से पहले मिलने का बेसब्री से इंतजार है।  कब आएगी लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त? सरकार हर महीने लाड़ली बहना योजना की किस्त 10 से 15 तारीख के बीच जारी करती है. ऐसे में लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त 10 से 12 अक्टूबर के बीच जारी करने की पूरी संभावना है. सरकार ने कई बार त्योहार के अवसर पर समय से पहले योजना के पैसे जारी करती है. 11 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू होने वाली है तो माना जा रहा है कि सरकार दुर्गा पूजा से पहले ही महिलाओं के अकाउंट में 41वीं किस्त भेज सकती है. आधिकारिक घोषणा होते ही राशि सीधे महिलाओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से जमा कर दी जाएगी।  किस्त आने से पहले कर लें जरूरी काम कई बार तकनीकी समस्याओं या बैंक की जानकारी में गड़बड़ी की वजह से किस्त रुक जाती है. ऐसे में पैसे ट्रांसफर होने से पहले ये जरूरी काम जरूर जांच लें।  पात्र महिलाओं का बैंक अकाउंट आधार से लिंक होना जरूरी है. वरना किस्त रोकी जा सकती है।  बैंक में जाकर सुनिश्चित करें कि आपके खाते पर डीबीटी (Direct Benefit Transfer) सुविधा चालू है।  समग्र पोर्टल पर आपकी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए. अधूरा ई-केवाईसी होने पर अगली किस्त रुक सकती है।  कैसे चेक करे किस्त का स्टेटस? अगर आप देखना चाहते हैं आपका आवेदन स्वीकृत है या नहीं या पिछली किस्तों का स्टेटस क्या है, तो आप योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibehna.mp.gov.in पर जाएं. यहां आप आवेदन एवं भुगतान की स्थिति के ऑप्शन पर क्लिक करें और अपने समग्र आईडी या आवेदन नंबर दर्ज करें. आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा उससे वेरिफाई करें. इसके बाद आपके सामने भुगतान की सारी जानकारी दिखने लगेगी।  बैंक अकाउंट में किस्त नहीं आने पर कहां करें शिकायत? अगर सरकार द्वारा किस्त की घोषणा के बाद भी आपके अकाउंट में पैसा नहीं आता है, तो आप राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर 0755-2700800 या 181 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकती हैं. इसके अलावा अपनी ग्राम पंचायत, वार्ड कार्यालय या महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के स्थानीय ऑफिस में संपर्क करके भी समस्या का तुरंत समाधान पा सकती हैं।  किस्त से पहले ये काम जरूर जांच लें किस्त आने से पहले लाभार्थी महिलाओं को अपने बैंक खाते और योजना की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए. सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है. संयुक्त बैंक खाता मान्य नहीं है. बैंक खाते में आधार लिंक होना चाहिए और डीबीटी भी चालू होना जरूरी है. इसके अलावा समग्र पोर्टल पर आधार की ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए. अगर बैंक खाते, आधार, मोबाइल नंबर या समग्र की जानकारी में कोई गलती है, तो उसे समय रहते ठीक करा लेना चाहिए. इससे किस्त आने के समय परेशानी नहीं होगी।  ऐसे चेक करें 41वीं किस्त का स्टेटस     सबसे पहले लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट (cmladlibehna.mp.gov.in) खोलें.     वहां ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ विकल्प पर क्लिक करें.     अब अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी डालें     इसके बाद कैप्चा भरें.     रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को डालकर वेरिफिकेशन करें.     वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद स्क्रीन पर आवेदन और किस्त से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी.     लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आएगी? जानें लेटेस्ट अपडेट पैसा नहीं आए तो क्या करें? अगर किस्त जारी होने के बाद भी खाते में पैसा नहीं पहुंचता है तो महिला लाड़ली बहना योजना के हेल्पडेस्क नंबर 0755-2700800 पर संपर्क कर सकती है. योजना के आधिकारिक पोर्टल पर भी हेल्पडेस्क की जानकारी दी गई है।  इसके अलावा भुगतान से जुड़ी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 के जरिए भी दर्ज कराई जा सकती है. इसलिए किस्त जारी होने के बाद सबसे पहले बैंक खाते की स्थिति और योजना के भुगतान स्टेटस की जांच जरूर करें।