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खंडवा: इल्लियों से भरे खाने पर विरोध, वार्डन ने दी धमकी- प्राइवेट बातें सार्वजनिक कर दूंगी

खंडवा खंडवा के सीनियर कॉलेज जनजातीय कन्या छात्रावास की 20-25 छात्राओं ने साहस की एक नई मिसाल पेश की. हॉस्टल के नरकीय हालातों और वार्डन की तानाशाही से तंग आकर ये आदिवासी छात्राएं 8 किलोमीटर पैदल चलकर कलक्ट्रेट पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं. दरअसल, कलेक्टर कार्यालय के बाहर बीते दिन 15 से 18 वर्ष की 20-25 आदिवासी छात्राएं यहां धरने पर बैठ गईं और नारेबाजी करने लगीं. वे अपने हॉस्टल की वार्डन की गंभीर शिकायतें लेकर आई थीं, जो वे कलेक्टर को बताना चाहती थीं. उनकी मुख्य शिकायत भोजन को लेकर थी, जिसमें आए दिन इल्लियां निकलती रहती हैं. शिकायत करने पर वार्डन रेखा प्रजापति उन्हें एडजस्ट करने की ही सलाह देती हैं. छात्राओं के सब्र का बांध तब टूट गया, जब 5 छात्राओं की थालियों में 3 इंच लंबी इल्लियां समेत कीड़े निकलने लगे. इसके बाद कई छात्राओं को उल्टी होने लगी, कुछ की तबीयत इतनी बिगड़ी कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा, लेकिन वहां भी इलाज से पहले पुलिस को सूचना देने की ताकीद की गई. गहरी हताशा में ये सभी छात्राएं हॉस्टल से पैदल ही 8 किलोमीटर दूर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं ताकि अपनी व्यथा बता सकें. वार्डन ने उन्हें रोकने का भरसक प्रयास किया, धमकाया भी, लेकिन वे इतने गुस्से में थीं कि कहीं नहीं रुकीं. कलेक्टर कार्यालय के बाहर लड़कियों ने मीडिया को अपनी समस्या बताई, हालांकि उनके चेहरों पर वार्डन की धमकी का खौफ नजर आ रहा था. एक घंटे तक प्रदर्शन और नारेबाजी के बावजूद जब कलेक्टर नहीं आए, तो छात्राएं उठीं और सभागार की तरफ दौड़ लगाई. हंगामा देखकर अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख मौके पर पहुंचीं और छात्राओं की समस्या सुनी. एक पीड़ित छात्रा मनीषा रंगीले ने बताया, ''हम सीनियर महाविद्यालय जनजातीय कन्या छात्रावास से आए हैं. यह अनुसूचित जाति का छात्रावास है. हमारी वार्डन रेखा प्रजापति मैम हैं. कुछ दिनों से लगातार भोजन में इल्लियां निकल रही हैं. आज तो हद हो गई, जब इतनी बड़ी इल्ली निकली वो गोंच वाली. हम मैम के पास लेकर गए तो वे बोलीं, 'बेटा, आज एडजस्ट कर लो, फिर देखेंगे. बहुत सारी लड़कियां उल्टी करने लगीं, उन्हें अस्पताल में एडमिट करना पड़ा. अस्पताल में इलाज करने से मना कर दिया, बोले पुलिस को इन्फॉर्म करो. हम कहां जाते सर? उल्टी कर-कर के… हमने बहुत बार मैम से कहा कि कुछ एक्शन लो, लेकिन वे बहाना बनाकर टाल देती हैं.'' थप्पड़, धमकी और ब्लैकमेलिंग का आरोप छात्रा ने बताया, ''आज 5 बच्चे बीमार थे- रक्षा, खुशबू, भारती, मनू, साक्षी और सलोनी दीदी. मैं खुद खाना खाया तो उल्टी हो गई, लेकिन कॉलेज चली गई. शिकायत करने पर वार्डन मैम डांटती हैं, उल्टा लड़कियों को धमकाती हैं- ''मैं तुम्हारे घर पर तुम्हारी प्राइवेट बातें बता दूंगी.'' यही नहीं, छात्राओं का आरोप है कि खाना बच जाता है तो भी नहीं देते. तीन रोटी मिलेंगी तो तीन ही मिलेंगी. सब्जी बस इतनी कि थाली का पेंदा ढंक जाए. पेट भरकर खाना भी नहीं देते. आज किसी ने भी खाना नहीं खाया. आज आलू की सब्जी में इल्ली मिली थी. हॉस्टल में 100 छात्राएं हैं, लेकिन 60 के करीब ही रहती हैं. पीड़ित छात्राओं का आरोप है, ''आज भी हमें यहां आने से बहुत रोका. हम दो बजे से आने की कोशिश कर रहे थे. जहां भी शिकायत करें, उल्टा हमें ही समझाते हैं- ''बेटा, एडजस्ट कर लो.'' इन छात्राओं ने अपर कलेक्टर को बताया कि वे सभी शहर के लालचौकी स्थित सीनियर ट्राइबल गर्ल्स हॉस्टल की छात्राएं हैं. उन्हें जेल में कैदियों को परोसे जाने वाले भोजन से भी बदतर खाना दिया जाता है. पीने का पानी भी साफ नहीं आता. हॉस्टल की साफ-सफाई भी समय पर नहीं होती. छात्राओं ने कहा कि पहले भी कई बार जनजातीय कार्य विभाग के दफ्तर में शिकायत की, लेकिन कोई हल नहीं निकला. सहायक संचालक नीरज पाराशर निरीक्षण पर आते हैं और उल्टा एडजस्ट करने को कहकर चले जाते हैं. फिर वार्डन धमकाती हैं. घरवालों को फोन करके कहती हैं कि तुम्हारी लड़की स्कूल नहीं जाती, बाहर घूमती है. खराब खाने का विरोध करने पर थप्पड़ मारती हैं. कहती हैं- ''जहां जाना हो, चले जाओ. मेरी बहुत पहचान है, मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा.'' अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख ने आश्वासन दिया कि वे हॉस्टल का निरीक्षण करेंगी और सभी समस्याओं का जल्द समाधान कराएंगी. इसके बाद छात्राओं ने प्रदर्शन खत्म किया.

डॉ. यादव का नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट नागपुर दौरा, अस्पताल की सेवाओं को सराहा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट नागपुर का किया दौरा अस्पताल की व्यवस्थाओं को सराहा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नागपुर स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान के विभिन्न क्लिनिकल विभागों में जाकर डॉक्टरों और स्टाफ से संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चिकित्सकों की सेवाभावना और स्टाफ द्वारा मरीजों की देखभाल के प्रति समर्पण भावना की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश से आए उन मरीजों से भी मुलाकात की जो एनसीआई में उपचाररत हैं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने मरीजों और उनके परिजन से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की ओर से उपचार करवा रहे नागरिकों को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। इंस्टिट्यूट के जनरल सेक्रेटरी और सीईओ शैलेश जोगलेकर तथा मेडिकल डायरेक्टर डॉ. आनंद पाठक ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को संस्थान के विकास और मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही समग्र कैंसर उपचार सेवाओं की जानकारी दी।  

भिंड प्रशासन ने मनरेगा मजदूरों पर सख्ती, 70% मजदूरों को छोड़ा जाएगा, 84 हजार मजदूर प्रभावित

भिंड पंचायतों में फर्जी जॉब कार्ड बनवाकर मनरेगा की मजदूरी हड़पने वाले लोगों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिला पंचायत के माध्यम से सभी पंचायतों में सचिव और जीआरएस ने मजदूरों की ई-केवाइसी की जा रही है। जॉब कार्ड धारी मजदूर के आधार से उसका फेस मैच किए जा रहे हैं। दोनों का मिलान न होने पर संबंधित मजदूर को मनरेगा योजना की मजदूरी से बेदखल किया जा रहा है। 10 हजार मजदूर ही सही बता दें जिले में कुल डेढ़ लाख मजदूरों के मनरेगा के तहत पंचायतों में जॉब कार्ड बनाए गए है। इनमें से 84 हजार एक्टिव मजदूर है। एक माह में 38 हजार मजदूरों की केवाईसी हुई है, जिसमें से महज 10 हजार मजदूर ही सही पाए गए हैं। स्थिति यह है कि जिस पंचायत में 100 मजदूर दर्ज है, वहां केवाईसी के बाद 20 से 25 कामगार ही रह गए है।  30 जनवरी तक मनरेगा में कार्यरत सभी मजदूरों की केवाईसी का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। ऐसे में जानकारों का मानना है कि पंचायतों में सरपंच और सचिवों द्वारा बनाए फर्जी जॉबकार्ड धारी 70 प्रतिशत तक मजदूर इस योजना से बेदखल किए जा सकते हैं। इस तरह चल रही केवाईसी मनरेगा के तहत पंचायतों में किए जा रहे कार्य में जॉब कार्ड धारी मजदूर कार्य करने पहुंचते हैं तो सबसे पहले उनकी ई-केवाईसी की जा रही है। सार्वजनिक कार्यक्षेत्र पर पोर्टल से आधार लिंक कर मजदूर का फोटो खींचा जा रहा है, जो आधार में लगे फोटो से मैच किया जा रहा है। इतना ही नहीं कार्यक्षेत्र पर मजदूर की सुबह-शाम नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) एप से उपस्थिति दर्ज की जा रही है। जिससे मनरेगा में अब फर्जी मजदूर कार्य नहीं कर पाएंगे। पंचायतों में भी असल मजदूर ही रह गए हैं। अब मजदूर के खाते में जाएगी मजदूरी मनरेगा में प्रतिदिन की 261 रुपए मजदूरी दी जा रही है। ग्राम पंचायतों में चेक डेम, पीएम आवास योजना, पंचायत में पौधरोपण, पशु शेड निर्माण, शांतिधाम निर्माण, तालाब निर्माण, खेत तालाब, नाला निर्माण, सड़क निर्माण, स्कूल भवन का निर्माण, आंगनबाड़ी भवन का निर्माण, गोशाला, चारागाह विकास, बायोगैस निर्माण, सामुदायिक स्वच्छता, सीसी रोड निर्माण सहित आदि कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों को मनरेगा के मजदूर करते हैं, लेकिन अभी तक पंचायत द्वारा मजदूर के दस्तावेज लगाकर सीधे खाते में पैमेंट डाल दिया जाता था। शासन की सख्ती के बाद अब मनरेगा में कार्य करने वाले मजदूर के आधार से लिंक खाते में ही मजदूरी भेजी जाएगी। मनरेगा मजदूरों की ई-केवाईसी की जा रही है। जो कार्य करने वाले मजदूर हैं, वही रह जाएंगे। केवाइसी पूरी होते ही मजदूरों की छटनी करेंगे। – सुनील दुबे, सीईओ, जिपं भिण्ड ये भी जानिए…. 1.5 लाख मजदूर मनरेगा में दर्ज। 84 हजार पंचायतों में हैं एक्टिव । 38 हजार की ई-केवाईसी पूरी। 28 हजार मजदूर नहीं आए। 30 जनवरी तक पूरी होगी जांच।

नई रेललाइन तैयार, रामगंज मंडी-भोपाल ट्रैक पर ट्रायल रन की तारीख तय, जल्द शुरू होंगी ट्रेनें

भोपाल  मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित रामगंज मंडी- भोपाल रेल लाइन (bhopal ramganj mandi railway line) का काम अब अपने निर्णायक चरण में पहुंचता नजर आ रहा है। करीब 3035 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट में अब काम की रफ्तार काफी तेज है। रेलवे ने मार्च-2026 तक अलग-अलग सेक्शन में ट्रैक बिछाने और ट्रायल रन शुरू करने की डेडलाइन तय कर दी है। जिसके तहत जिले में खिलचीपुर से आगे राजगढ़ और ब्यावरा के साथ ही सोनकच्छ तक मार्च तक ट्रायल रन के लिए ट्रैक तैयार होगा। केवल सोनकच्छ से नरसिंहगढ़ और कुरावर वाला हिस्सा ही इसके बाद शेष रह जाएगा। जिसे भी सितंबर-अक्टूबर तक पूरा करने की योजना है। राजस्थान के हिस्से का काम पूरा बता दें कि राजस्थान में काफी पहले काम पूरा हो चुका है, लेकिन मप्र की सीमा में प्रशासकीय और रेलवे के ढीले रवैये के चलते काम पिछड़ा है। राजगढ़ जिले की बात करे यहां जमीन अधिग्रहण के कारण भी काम में देरी हुई है। यहीं कारण है कि वर्ष-2022 में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट अभी तक अधूरा है। हालांकि अब काम निर्णायक मोड में पहुंचता नजर आ रहा है। अर्थवर्क नरसिंहगढ़ के एक सेक्शन को छोड़कर लगभग सभी जगह पूरा हो चुका है। अब केवल ट्रैक बिछाने के साथ ही विद्युतीकरण का काम शेष है। खिलचीपुर और ब्यावरा में बिछीं पटरियां कोटा मंडल में आने वाले रामगंज मंडी से ब्यावरा का काम मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य है। 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। खिलचीपुर से करीब 12 किमी आगे तक पटरियां बिछाई जा चुकी है। इसके साथ ही ब्यावरा राजगढ़ सेक्शन में भी ट्रैक बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं भोपाल मंडल में ब्यावरा से आगे सोनकच्छ सेक्शन के लिए भी मार्च की डेडलाइन तय की है। जिसके तहत ब्यावरा से करीब चार किमी आगे तक पटरियां बिछाई जा चुकी है। उधर श्यामपुर से आगे अब कुरावर तक भी ट्रैक तैयार होने वाला है। ब्यावरा से सोनकच्छ तक ट्रैक तैयार होने के बाद करीब 80 फीसदी काम भोपाल मंडल का भी पूरा हो जाएगा। केवल नरसिंहगढ़ के बीच का करीब 22-25 किमी सेक्शन में ही काम अधिक बाकी है। राजगढ़ जिले में रहेंगे ये स्टेशन रेल लाइन पर जिले में ब्यावरा जंक्शन सहित छह स्टेशन रहेंगे। राजस्थान तरफ से खिलचीपुर के भोजपुर से एंट्री करने वाले ट्रैक पर पहला स्टेशन भोजपुर ही है। इसके बाद खिलचीपुर, राजगढ़, ब्यावरा जंक्शन, नरसिंहगढ़ और कुरावर शामिल है। इसके आगे श्यामपुर होते हुए हिरदाराम और भोपाल लाइन जुड़ेगी। ट्रैक की बात करे तो खिलचीपुर से राजगढ़ और एनएच-52 के सामानांतर और राजगढ़-ब्यावरा के बीच हाईवे को क्रॉस कर ब्यावरा पहुंचेगी। जहां से ब्यावरा से पांच किमी आगे मक्सी-रुठियाई ट्रैक के सामांतर और फिर ट्रैक पूर्व में अलग होकर करीब सात सौ मीटर आगे देवास हाईवे को क्रॉस करेगी, इसके बाद एनएच-46 के साइड में होते हुए कुरावर के पास फिर फोरलेन क्रॉस करेगी भोपाल रेल मंडल के डीआरएम पंकज त्यागी ने बताया कि मार्च तक ब्यावरा से सोनकच्छ तक ट्रायल ट्रैक तैयार कर लिया जाएगा। इस सेक्शन में अर्थवर्क लगभग पूरा हो चुका है। पटरियां बिछाने के साथ ही विद्युतीकरण किया जा रहा है। मार्च तक 80 प्रतिशत हमारा काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद केवल एक ही सेक्शन का काम रह जाएगा। जिसे भी अक्टूबर तक पूरा करा लिया जाएगा। कोटा मंडल के ट्रैक इंजीनियर गौरव मिश्रा का कहना है लगभग 90 फीसदी काम हमारा पूरा हो चुका है। अब केवल राजगढ़ ब्यावरा के बीच ट्रैक और कुछ हिस्सा खिलचीपुर से राजगढ़ के बीच बाकी है। जिसे भी मार्च तक पूरा कराने की डेडलाइन तय है।

अशोकनगर की नेनशु का प्यार भरा फैसला, अनीता से शादी के लिए लड़का बनी, इंदौर में हुआ इश्क

अशोकनगर  प्रेम गली अति सांकरी, जा में दो न समाय… संत कबीरदास की इन पंक्तियों का अर्थ बड़ा ही गहरा है। इन पंक्तियों में संत कबीरदास कहते हैं कि प्रेम का मार्ग इतना संकरा यानी कि तंग होता है कि उसमें दो व्यक्ति 'मैं' और 'तुम' एक साथ नहीं रह सकते। यहां 'मैं' से उनका अर्थ अहंकार से है। सच है कि प्रेम के लिए आपको व्यक्तिगत पहचान से निकलकर एक होना पड़ता है। अशोकनगर में प्रेम की इसी पराकाष्ठा को पार करते हुए 25 साल की नेनशु ने अपनी पहचान ही बदल दी। नेनशु अब 'नेनशु' न होकर नमन बन गई हैं। कहानी बड़ी दिलचस्प है, आइए जानते हैं। 6 लाख खर्च, तीन ऑपरेशन हुए मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की 25 वर्षीय नेनशु ने अपने प्यार को पाने के लिए लिंग परिवर्तन करवाया और अनीता से शादी कर ली है। उन्होंने छह लाख रुपये खर्च कर यह सर्जरी करवाई, जिसमें तीन जटिल ऑपरेशन शामिल थे। यह कहानी प्यार की ताकत और सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने का एक उदाहरण है। नेनशु (नमन) अशोकनगर की पिपरई तहसील के बरखेड़ा गांव की रहने वाली हैं। नेनशु ने अपने प्यार को मुकम्मल करने के लिए समाज की रूढ़ियों से लड़ाई लड़ी और अपना जेंडर भी बदलवाया। अब नेनशु ‘नमन’ बनकर अपनी जीवनसंगिनी अनीता के साथ नई जिंदगी शुरू कर चुके हैं। इंदौर में हुई थी दोनों की मुलाकात उन्होंने बताया कि वह जन्म से लड़की थीं, लेकिन उनकी भावनाएं हमेशा लड़कों जैसी रहीं। यह उनके लिए एक आंतरिक संघर्ष था जिसे उन्होंने अपने प्यार के लिए दूर किया। करीब तीन साल पहले पढ़ाई के लिए इंदौर गई थीं, जहां सोशल मीडिया के जरिये असम की अनीता राजवर से उनकी पहचान हुई। यह मुलाकात उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। उनकी दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई। दोनों एक-दूसरे के प्रति गहरा लगाव महसूस करने लगे। नौकरी करते हुए बचाए सर्जरी के लिए पैसे दोनों साथ रहना चाहते थे, लेकिन समाज में पति-पत्नी के रूप में पहचान पाने के लिए जेंडर चेंज सर्जरी ही एकमात्र रास्ता था। यह एक बड़ी चुनौती थी जिसे उन्होंने स्वीकार किया। दिल्ली के डाक्टरों ने सर्जरी पर करीब छह लाख रुपये खर्च बताया। यह राशि उनके लिए बहुत बड़ी थी। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह बड़ी रकम थी, लेकिन नमन और अनीता ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का दृढ़ निश्चय किया। दोनों ने इंदौर में छोटी-छोटी नौकरियां कीं, खर्च कम किए और तीन साल में पैसे जुटाये। यह उनकी लगन और समर्पण का प्रमाण है। पैसे पूरे होते ही दिल्ली में कराई सर्जरी पैसे पूरे होने पर नेनशु यानी नमन दिल्ली गई। यह उनके जीवन का एक निर्णायक कदम था। पांच महीनों में तीन जटिल सर्जरियां हुईं। यह प्रक्रिया शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कठिन थी। दर्द और तनाव के बीच अनीता हर कदम पर साथ रहीं। उनका साथ नमन के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद नेनशु आधिकारिक रूप से ‘नमन’ बन गई है। यह उनके नए जीवन की शुरुआत है।

मध्य प्रदेश में मावठा का असर, ठंड बढ़ाएगा वेस्टर्न डिस्टरबेंस, मौसम में बदलाव

भोपाल:  मध्य प्रदेश में करीब दो हफ्ते तक कड़ाके की ठंड के बाद लोगों को राहत मिलती दिख रही है. दिन के समय तेज धूप निकलने से तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है. लेकिन रात और सुबह के वक्त अब भी ठंड का असर बना हुआ है. हालांकि एक मजबूत वेस्टर्न डिस्टरबेंस एमपी की तरफ बढ़ता दिख रहा है, जिसकी वजह से पहाड़ों पर बर्फबारी होगी, इसका सीधा असर एमपी में मावठा गिरने के रूप में सामने आएगा. जिससे ठंड एक बार फिर से बढ़ सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक 19 या 20 जनवरी से पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने की संभावना है. जिसके बाद भोपाल, ग्वालियर चंबल और जबलपुर डिवीजन में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. इसी दौरान मावठा गिरने का भी आसार हैं. मध्य प्रदेश में सर्दी का सीजन आखिरी दौर में पहुंच रहा है, लेकिन इस बार अब तक मावठा नहीं गिरा है. ठंड के आखिरी दौर में हल्की से मध्यम बारिश रबी फसलों में विशेषकर गेहूं, चना, सरसों और मसूर के लिए बोनस साबित होगी. शहडोल सबसे ठंडा इलाका रहा पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के तापमान में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके बावजूद शहडोल जिले का कल्याणपुर एक बार फिर सबसे ठंडा इलाका रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पहाड़ी क्षेत्रों में भी रातें ठंडी बनी हुई हैं, हालांकि पहले जैसी कंपकंपाने वाली सर्दी नहीं रही। कोहरा अभी भी बढ़ा रहा लोगों की मुश्किलें राजधानी भोपाल में रात का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री दर्ज किया गया. हिल स्टेशन पचमढ़ी में तापमान 5.8 डिग्री, इंदौर और ग्वालियर में भी पारा 7-8 डिग्री के आसपास रहा. उज्जैन और जबलपुर में भी सर्दी का असर कम हुआ है. शीतलहर भले ही कमजोर पड़ी हो, लेकिन कोहरा अभी भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है. राजगढ़, सतना, सीधी, दतिया, ग्वालियर, रतलाम और खजुराहो में सुबह के समय हल्का कोहरा छाया रहा. मौसम विभाग की तरफ से श्योपुर, मुरैना, भिंड, आगर-मालवा, मंदसौर, राजगढ़ और नीमच समेत करीब आठ जिलों में कोहरे की चेतावनी जारी की गई है.  मौसम के पीछे क्या है कारण भोपाल मौसम केंद्र के अनुसार, इस समय पश्चिमी विक्षोभ और जेट स्ट्रीम हवाओं का असर बना हुआ है. सब-ट्रॉपिकल जेट स्ट्रीम की सक्रियता के कारण वातावरण शुष्क है, जिससे रात में ठंड बनी रहती है. हालांकि आने वाले दिनों में सुबह और रात के तापमान में धीरे-धीरे स्थिरता आने की संभावना जताई जा रही है. 

ICMR का बड़ा खुलासा, 700 सडन डेथ मामलों पर रिसर्च ने कोविड वैक्सीन को लेकर भ्रांतियों को नकारा

भोपाल   देश में कोविड वैक्सीन के बाद अचानक मौतों (सडन डेथ) को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. सवाल ये कि क्या केविड-19 वैक्सीन और सडन डेथ के बीच कोई कनेक्शन है? इन सवालों पर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के महानिदेशक और केंद्रीय अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने रिसर्च आधारित आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने साफ कहा, '' कोविड वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इससे मृत्यु का खतरा नहीं, बल्कि गंभीर कोविड में मौत की संभावना 90 प्रतिशत तक कम हुई है.'' 700 अचानक मौत के मामलों पर रिसर्च ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के अनुसार, '' आईसीएमआर द्वारा की गई केस-कंट्रोल स्टडी में सामने आया कि जिन लोगों ने वैक्सीन ली थी, उनमें अचानक मृत्यु का जोखिम उन लोगों की तुलना में 50 प्रतिशत कम था, जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली थी. यह अध्ययन 700 सडन डेथ मामलों पर आधारित था, जिसने वैक्सीन को लेकर फैल रही भ्रांतियों को काफी हद तक खारिज किया है. कोई भी वैक्सीन काफी रिसर्च के बाद बनाई जाती है जिसमें साइड इफेक्ट व एफेकेसी पर खासा ध्यान दिया जाता है, ऐसा हर देश में होता है. आप अगर देखें तो देश में कोविडशील्ड और कोवैक्सीन ने कई लाख लोगों की जान बचाई है'' साइड इफेक्ट्स को लेकर फिर हुईं कई रिसर्च आईसीएमआर महानिदेशक ने कहा, '' वैक्सीन को लेकर शुरुआत में कुछ रेयर साइड इफेक्ट थे पर अब तो कोविड भी खत्म हो चुका है. लेकिन लोगों ने कई तरह से चीजों को वैक्सीन के साथ जोड़ लिया और कहने लगे कि ये वैक्सीन की वजह से है. इसके बाद हमने कोविड वैक्सीन को लेकर फिर कई तरह की रिसर्च की, जिसमें 700 से ज्यादा अचानक मौत के मामलों पर भी रिसर्च की गई. सडन डेथ और वैक्सीन के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीें था.'' एम्स ने भी की थी सडन डेथ पर रिसर्च इससे पहले ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने भी युवाओं में बढ़ते सडन डेथ व हार्ट अटैक के मामलों पर रिसर्च की थी. इसमें भी कोविड वैक्सीन और सडन डेथ पर फोकस किया गया. हालांकि, यहां भी रिसर्च में साफ कहा गया कि वैक्सीन और सडन डेथ के मामलों में कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं था. रिसर्च में बताया गया कि युवाओं में अचानक मौत का सबसे बड़ा कारण कोरोनरी आर्टरी डिसीज यानी ह्रदय रोग हैं. सडन डेथ के मामलों में बढ़ोत्तरी को लेकर कहा गया कि ये युवाओं की खराब होती लाइफ स्टाइल का नतीजा है. पब्लिक हेल्थ को लेकर चल रही खास रिसर्च आईसीएमआर देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट एलाइड और टैरिफ पर काम कर रहा है. एलाइड स्कीम 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए है, जबकि टैरिफ प्रोजेक्ट शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों पर केंद्रित है. इन प्रोजेक्ट्स के तहत स्वस्थ लोगों के हीमोग्लोबिन, बायोकेमेस्ट्री और अन्य हेल्थ पैरामीटर्स का व्यापक डेटा एकत्र किया जा रहा है, जिससे भारत की विविध जनसंख्या के अनुरूप नई स्वास्थ्य नीतियां बनाई जा सकें. डॉ. बहल के अनुसार, '' इन अध्ययनों के लिए देश के हर क्षेत्र जैसे उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य भारत से एक-एक साइट चुनी गई है, जिससे खान-पान और जीवनशैली की विविधता को सही तरीके से दर्शाया जा सके. एम्स भोपाल का पीडियाट्रिक्स विभाग भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है और अगले दो वर्षों में इसके नतीजे सामने आएंगे.'' बेअसर साबित हो रहीं एंटीबायोटिक दवाएं इस रिसर्च के साथ ही आईसीएमआर डीजी ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (एएमआर) को देश के लिए गंभीर खतरा बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा, '' इसे लेकर कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भी लोगों से अपील की है. एंटीबायोटिक का ओवरयूज और मिसयूज यानी जरूरत न होने पर और गलत तरीके से इस्तेमाल बैक्टीरिया को मजबूत बना रहा है. आज आम सर्दी-खांसी में भी लोग बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक ले लेते हैं, जिससे बैक्टीरिया रेजिस्टेंस विकसित कर लेते हैं. इसका नतीजा यह है कि यूटीआई, निमोनिया जैसी सामान्य बीमारियों में भी दवाएं बेअसर होने लगी हैं. उन्होंने साफ संदेश दिया कि एंटीबायोटिक केवल डॉक्टर की सलाह पर, सही खुराक और तय अवधि तक ही ली जानी चाहिए. डाक्टरों की रिसर्च में कम रुचि, चिंता का विषय डॉ. बहल ने मेडिकल क्षेत्र में रिसर्च को मजबूत करने के लिए डॉक्टरों को पीएचडी के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि अमेरिका में हर 100 में से तीन डॉक्टर पीएचडी करते हैं, जबकि भारत में यह संख्या बहुत कम है. यह चिंता का विषय है. इसे बढ़ाने के लिए आईसीएमआर ने एम्स, पीजीआई जैसे संस्थानों के युवा फैकल्टी को पीएचडी के लिए ग्रांट और रजिस्ट्रेशन की सुविधा दी है. उनका मानना है कि यदि 10-20 प्रतिशत मेडिकल फैकल्टी भी पीएचडी करती है, तो देश में मेडिकल रिसर्च को नई दिशा मिलेगी. कैंसर के अर्ली डिटेक्शन और इम्यून थेरेपी पर फोकस डॉ. बहल ने बताया कि कैंसर को लेकर आईसीएमआर की प्राथमिकता अर्ली डिटेक्शन है. डॉ. बहल ने कहा, '' यदि कैंसर शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए, तो इसके पूरी तरह ठीक होने की संभावना बहुत अधिक होती है. देर से पता चलने पर मृत्यु दर बढ़ जाती है.इलाज के क्षेत्र में इम्यून थेरेपी पिछले एक दशक की बड़ी उपलब्धि है. इसमें मोनोक्लोनल एंटीबॉडी और कार-टी सेल जैसी तकनीकें शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल पहचानने और नष्ट करने के लिए प्रशिक्षित करती हैं. इसके साथ ही कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए नई जांच विधियों पर भी काम चल रहा है.''

मकर संक्रांति के मौके पर मेट्रो के नए टाइम शेड्यूल की शुरुआत, भोपाल और इंदौर ट्रेन्स में बदलाव

इंदौर/ भोपाल    मध्य प्रदेश के दो शहर अब मेट्रो सिटी की श्रेणी में आ चुके हैं. इंदौर और भोपाल की पटरियों पर धड़ाधड़ मेट्रो दौड़ रही है. बताया जा रहा है कि मकर संक्रांति पर इंदौर मेट्रो के समय में कुछ परिवर्तन लाए गए हैं. मेट्रो प्रबंधन ने 11 जनवरी को नई समय सारणी जारी कर दी है. इंदौर में मेट्रो ट्रेन गांधीनगर सुपर कॉरिडोर से चलकर मालवीय नगर स्थित रेडिसन स्क्वायर तक का सफर तय करेगी. वहीं मकर संक्रांति पर इंदौर मेट्रो में क्या बदलाव लाए गए हैं, पढ़िए. इंदौर मेट्रो में आए ये बदलाव इंदौर और भोपाल मेट्रो को इतने यात्री नहीं मिल रहे हैं. इसलिए बताया जा रहा है कि मकर संक्रांति से मेट्रो ट्रेन के संचालन में बदलाव किया जा रहा है. यात्रियों की कम संख्या को देखते हुए मेट्रो का संचालन अब केवल एक फेरे में ही किया जाएगा. जिसके परिचालन का समय अब सिर्फ 25 मिनट का होगा. पहले दोपहर 1 से शाम 7 बजे तक एक घंटे के अंतराल से ट्रेन का संचालन होता था. अब मेट्रो का संचालन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक कर दिया गया है. 11 किलोमीटर का ट्रैक तैयार करने का लक्ष्य मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के मुताबिक, मेट्रो रेल के संपूर्ण प्राथमिकता कॉरिडोर (गांधी नगर से मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन चौराहे तक निर्माण कार्यों को जल्द पूरा करने के लिए समय में बदलाव किया गया है. पूरे ट्रैक यानी 16 स्टेशन तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है. अभी तक मेट्रो का संचालन गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर स्टेशन 3 तक हो रहा है, लेकिन अब 11 किलोमीटर लंबा ट्रैक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. एमपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंधक ने इंदौर मेट्रो के प्रबंधक के साथ बैठक की. बैठक में कॉरिडोर के तहत आने वाले सभी स्टेशनों का निरीक्षण किया गया. मेट्रो कॉर्पोरेशन की तैयारी प्रॉयोरिटी कॉरिडोर को जल्द पूरा करने की है. बताया जा रहा है कि 11 किलोमीटर के ट्रैक को फरवरी के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं लंबे इंतजार के बाद साल 2025 दिसंबर के आखिरी तक भोपाल मेट्रो को भी शुरू कर दिया गया है. 21 दिसंबर 2025 को भोपाल मेट्रो की शुरुआत की गई. जो शुरुआती दौर में सुभाष नगर से एम्स तक 7 किलोमीटर तक चल रही है. इस दौरान 8 स्टेशन पड़ते हैं. भोपाल मेट्रो अभी सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक संचालित हो रही है, हालांकि भोपाल मेट्रो का हाल भी इंदौर मेट्रो से कुछ अलग नहीं है. यहां भी मेट्रो को उतनी सवारी नहीं मिल रही है. भोपाल-इंदौर मेट्रो में शुरू होगी AFC सुविधा बताया जा रहा है कि अगले कुछ सप्ताह में भोपाल मेट्रो में एएफसी यानि ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन लागू हो जाएगा. जबकि इंदौर में 7-8 हफ्तों में डिजिटल टिकट सिस्टम प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. डीएमआरसी यानि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और एमपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के बीए एक समझौता हुआ है. जिसके तहत यह सुविधाएं शुरू होने जा रही है. एएफसी व डिजिटल टिकट प्रक्रिया में ऑनलाइन टिकट बुकिंग होती है. इस प्रक्रिया में नकद और पेपर टिकट पर निर्भरता कम हो जाती है. जैसे पैसेंजर क्यूआर कोड, स्मार्ट कार्ड, मोबाइल, यूपीआई, डिजिटल पेमेंट के जरिए टिकट बुक कर सकता है.

दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिये जिला स्तर पर शिविर आयोजित होंगे

भोपाल दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिये जिला स्तर पर स्कीनिंग कैम्प आयोजित किए जाएंगे। शिविरों में स्वास्थ्य विभाग जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता बच्चों को चिन्हित कर प्रमाण-पत्र प्रदान करने की कर्रवाई करेंगे। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के निर्देशानुसार कोई भी दिव्यांग बच्चा चिन्हांकन एवं लाभ से वंचित न रहे, के ध्येय वाक्य के आधार पर प्रत्येक दिव्यांग बच्चे की पहचान, स्क्रीनिंग एवं प्रमाणन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। सभी जिले में स्क्रीनिंग कैम्प आयोजित करने के निर्देश जिला कलेक्टर्स को दिया गया है। यह कैम्प आगामी एक माह में आयोजित किया जाना है। शिविरों के आयोजन में विधिक सेवा प्राधिकरण, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं स्कूल शिक्षा समन्वित प्रयास करेंगे। उन्होंने निर्देश दिये है कि शिविर आयोजन की तिथियों को प्रचार-प्रसार किया जाए इससे अधिकाधिक सहभागिता हो सकें। प्रत्येक जिला अपनी माइक्रो प्लानिंग की जानकारी सामाजिक न्याय विभाग के साथ-साथ रजिस्टार/सचिव जुवेनाइल जस्टिस कमेटी उच्च न्यायालय जलबलपुर को भी भेजे।  

मुख्यमंत्री ने किया स्टार्ट-अप प्रदर्शनी का शुभारंभ

नवाचारों को प्रोत्साहन हमारा संकल्प, युवा ही देश को देते हैं नई दिशा 156 स्टार्ट-अप को 2.5 करोड़ प्रोत्साहन राशि और 21 स्टार्ट-अप को 8.17 करोड़ ऋण राशि की अंतरित एमएसएमई और 4 प्रमुख संस्थाओं के बीच हुए लांग टर्म एमओयू रवीन्द्र भवन में हुई मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट-2026 भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राचीन काल से ही हम व्यापार-व्यवसाय की भरपूर समझ रखते हैं, क्योंकि पुरूषार्थ, उद्यमिता, नवाचार और व्यापार हम भारतीयों के संस्कारों में ही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नए-नए अवसरों का प्रदेश है। युवा ही देश को नई सोच और नई दिशा की ओर ले जाते हैं। इनके नवाचार ही विकास का आधार बनते हैं। इसलिए नवाचारों को प्रोत्साहन देना, हमने हमारा संकल्प निहित किया है। भारत में 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई है, जो देश की जीडीपी में 30 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं। कुल निर्यात में एमएसएमई की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत तक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में स्टार्ट-अप का योगदान अतुलनीय है। भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इको-सिस्टम बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हमारा देश, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के सबके सहयोग से भारत जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित 2 दिवसीय मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट-2026 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिट के दौरान 156 स्टार्ट-अप को 2.5 करोड़ रूपए से अधिक की प्रोत्साहन राशि तथा मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में 21 स्टार्ट-अप को 8.17 करोड़ रूपए से अधिक की ऋण राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न सफल और विकासशील स्टार्ट-अप के फाउंडर्स और इंक्यूबेटर्स को सम्मानित किया। समिट में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के साथ फेडरेशन ऑफ इंडिया एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन के साथ पंचवर्षीय एमओयू सहित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कार्वी स्टार्ट-अप लैब्स और स्टार्ट-अप मिडिल ईस्ट के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी हस्ताक्षरित किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में स्थापित सफल स्टार्ट-अप पर केंद्रित एक बुकलेट का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से 4 स्टार्ट-अप के फाउंडर्स को मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना एवं म.प्र. स्टार्ट-अप नीति तथा कार्यान्वयन योजना-2025 में क्रमश: बैंक ऋण और निवेश सहायता राशि प्रदान की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि युवा साथियों के स्टार्ट-अप के प्रोत्साहन के लिए यह 2 दिवसीय आयोजन अद्भुत है। अपनी क्षमता और योग्यता के बल पर भारत ने आज नया मुकाम हासिल किया है। इसमें सभी कुशाग्र बुद्धिवाले युवाओं का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि देश के महान वैज्ञानिक डॉ. जगदीश चंद्र बोस ने सबसे पहले दुनिया को बताया कि पौधों में प्राण होते हैं। उन्होंने कैस्ट्रोग्राफी के माध्यम से पौधों जीवन से जुड़े कई रहस्यों से पर्दा उठाया था। वैज्ञानिक डॉ. बोस वर्ष 1895 में कलकत्ता में तरंगों की खोज का डेमोस्ट्रेशन किया था। इसके बाद मार्कोनी को इसी खोज के लिए नोबेल पुरस्कार मिला, यद्यपि यह खोज डॉ. बोस ने ही की थी। अंतर सिर्फ इतना था कि उनके स्टार्ट-अप को हमारे लोगों ने पहचान नहीं दिलाई। उनके कार्य को दो-दो वैज्ञानिकों ने अनुसरण किया। लेकिन अब प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में देशभर में सभी तरह के स्टार्ट-अप और रिसर्च को प्रोत्साहन मिल रहा है। वर्ष 2022 में इंदौर से इस कार्य के लिए एक पोर्टल लॉन्च किया गया। नवाचारों और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां मध्यप्रदेश में लागू हैं। आज इंदौर में ही 2200 से अधिक स्टार्ट-अप काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के युवा निरंतर नवाचार कर रहे हैं। राज्य सरकार जीवन की मूलभूल समस्याओं का समाधान करने के साथ सभी प्रकार के नवाचारों को भी प्रोत्साहित कर रही है। भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए केन्द्र सरकार के साथ राज्य सरकारों भी लगातार प्रयास कर रही हैं। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं के दम पर हम बहुत जल्द दुनिया की तीसरी और फिर नंबर-1 अर्थव्यवस्था बनकर रहेंगे।  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि युवा शक्ति अपनी क्षमताओं के बल पर दुनिया को बदल सकती है। स्वामी विवेकानंद ऐसे संत थे, जिन्होंने युवा शक्ति को पहचाना और उन्हें राष्ट्र के विकास के लिए प्रेरित किया। बाल्यकाल में मिलने वाली हार-जीत से हमें भविष्य की सीख मिलती है। राज्य सरकार ने स्टार्ट-अप पॉलिसी 2025में नवाचारों को प्रोत्साहित करने की शुरुआत की है। नए विचारों के साथ स्टार्ट-अप शुरू करने वाले उद्यमियों को इन्क्यूबेशन सेंटर के माध्यम से 10 हजार रुपए की प्राथमिक सहायता प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार हर वक्त नए स्टार्ट-अप और नए आइडियाज के साथ खड़ी है। प्रदेश में कृषि, उद्यमिता, नगरीय निकायों में नवाचारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश अब नवाचारों और अवसरों का प्रदेश बन चुका है। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए प्रेरणा थे। आज जेन-जी और जेन-अल्फा की दुनिया के युवा स्टार्ट-अप स्थापित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पहली बार 16 जनवरी 2016 को भारत में स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया की शुरुआत की। अब राज्य सरकार की नीतियां ऐसी हैं कि स्टार्ट-अप की सभी समस्याएं इनमें समाहित हो गई हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप को विभिन्न प्रकार के अनुदान दिए जाने के साथ कंपनी स्थापना में भी सहयोग प्रदान किया जाता है। प्रदेश में अब एक दिन में कोई कंपनी शुरू हो सकती है, जबकि जर्मनी जैसे विकसित देश में इसके लिए 22 दिन लगते हैं। देश के युवाओं की कल्पना को आकार देने का काम स्टार्ट-अप ने किया है। युवाओं के सपनों को नए पंख लग गए हैं और वे जॉब क्रिएटर बन चुके हैं। भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इको-सिस्टम है। स्टार्ट-अप ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊड़ान दी है। हमारी समस्याओं को हमारे बीच के नवाचारी उद्यमी ही समझ सकते हैं। युवा उद्यमी समाज की समास्याओं को पहचानें और स्टार्ट-अप के माध्यम से उन्हें सॉल्व करें। तकनीक से स्वयं को हमेशा अपडेट रखें। असफलता से कभी न डरें। राज्य सरकार युवाओं के साथ … Read more