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मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट: 11-12 जनवरी को आयोजित होगा, स्टार्ट-अप्स को मिलेगा समर्थन

मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को समिट से सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘विकसित एम.पी. @2047’विज़न को सकारात्मक गति देने और अधिक सुदृढ़ करने के साथ ही स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को अगले स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से 11 एवं 12 जनवरी 2026 को रवींद्र भवन, भोपाल में मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 2026 का आयोजन होने जा रहा है। सोमवार 12 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसमें सहभागिता करेंगे। समिट में राज्य एवं देश भर से स्टार्ट-अप्स, निवेशक, इनक्यूबेटर्स, उद्योग प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थान एवं अन्य हितधारक सहभागिता करेंगे। यह समिट स्टार्ट-अप्स को निवेश, नेटवर्किंग, नीति संवाद एवं नवाचार प्रदर्शन का एक सशक्त मंच प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति–2025 का फ़रवरी 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में विमोचन के साथ राज्य में नवाचार एवं उद्यमिता को एक नई दिशा प्राप्त हुई। नीति के सफल क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप प्रदेश के स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान एवं तीव्र गति प्राप्त हुई है। नवीन नीति से स्टार्ट-अप्स के प्रत्येक चरण के लिए वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, निवेश, पेटेंट सहयोग एवं बाजार से जुड़ाव जैसे अनेक सशक्त प्रावधान सुनिश्चित किए गए, जिससे प्रदेश में नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को गति मिली है। आयुक्त एमएसएमई दिलीप कुमार ने स्टार्ट-अप्स, नव प्रवर्तकों, उद्यमियों, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स एवं स्टार्ट-अप इको-सिस्टम से जुड़े हितधारकों का आह्वान किया है कि वे इस स्टार्ट-अप समिट में सक्रिय रूप से सहभागिता करें। आयुक्त एमएसएमई ने कहा कि स्टार्ट-अप्स नवाचार-आधारित विकास एवं रोजगार सृजन की आधारशिला है। यह समिट स्टार्ट-अप्स के लिए अपने विचारों, उत्पादों एवं समाधानों को प्रदर्शित करने, निवेशकों एवं नीति-निर्माताओं से संवाद स्थापित करने तथा मध्यप्रदेश के सशक्त स्टार्ट-अप इको-सिस्टम का हिस्सा बनने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।  

मध्य प्रदेश के सरकारी शिक्षकों के लिए खुशखबरी, सैलरी में 3-5 हजार रुपए की बढ़ोतरी

भोपाल  मध्य प्रदेश के करीब सवा से डेढ़ लाख सरकारी शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. पिछले 3 वर्षों से जिस चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान (Fourth time-scale-based promotional pay scale) का इंतजार किया जा रहा था, उस पर अब स्कूल शिक्षा विभाग ने अंतिम तैयारी पूरी कर ली है. 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को इसका लाभ देने के लिए 300 करोड़ से अधिक का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा. मंजूरी मिलते ही शिक्षकों की सैलरी में हर माह 3 से 5 हजार रुपए की बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी. प्रक्रिया पूरी, सवा लाख शिक्षकों को मिलेगा लाभ स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के बाद प्रदेश में सरकारी शिक्षकों के लिए चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान का रास्ता साफ हो गया है. शिक्षा विभाग ने 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को यह लाभ देने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है. विभाग के अनुसार इस योजना से प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक शिक्षकों के साथ-साथ व्याख्याता, प्राचार्य, प्रधानाध्यापक और सहायक संचालक स्तर तक के करीब सवा लाख कर्मचारी लाभान्वित होंगे. वहीं इस पर सरकार को करीब 312 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा. सीएम ने किया था चतुर्थ समयमान का ऐलान चतुर्थ समयमान देने की घोषणा सबसे पहले वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी. घोषणा के तहत सभी विभागों में 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके लोक सेवकों को यह लाभ दिया जाना था. कई विभागों में प्रक्रिया आगे बढ़ी और स्कूल शिक्षा विभाग में भी सीधी भर्ती के व्याख्याता और प्राचार्यों को यह सुविधा मिल गई, लेकिन पदोन्नति से आए शिक्षकों, व्याख्याताओं, प्राचार्यों और अन्य अधिकारियों को इससे वंचित रखा गया. इसी वर्ग में करीब सवा लाख शिक्षक आते हैं, जो अब तक इस लाभ का इंतजार कर रहे थे. कैबिनेट में जल्द आएगा प्रस्ताव स्कूल शिक्षा विभाग में 35 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारी लंबे समय से चतुर्थ समयमान देने की मांग कर रहे थे. इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी शिक्षक संघों की कई बार मुलाकात हुई. आखिरकार 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर सीएम ने बचे हुए लोगों को चतुर्थ समयमान देने की घोषणा की थी, लेकिन 5 महीने बाद भी अब तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ. हालांकि हाल में स्कूल शिक्षा मंत्री के साथ हुई शिक्षक संगठनों की बैठक में मंत्री ने बताया कि इसे कैबिनेट की बैठक में लेकर जाएंगे. कैबिनेट में प्रस्ताव पास होने के बाद शिक्षकों को इसका लाभ मिलने लगेगा. हर माह 3 से 5 हजार रुपए का नुकसान मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौर ने बताया कि "मुख्यमंत्री ने 5 महीने पहले चतुर्थ समयमान की घोषणा की थी, लेकिन विभाग के अधिकारी आज तक इस प्रक्रिया को पूरी नहीं कर सके. हमारी मांग है कि इसे विभाग द्वारा तुरंत लागू किया जाए. राठौर ने बताया कि चतुर्थ समयमान लागू होने से शिक्षकों को हर माह 3 से 5 हजार रुपए का सीधा लाभ मिलेगा. अब तक इस सुविधा के अभाव में उन्हें मासिक नुकसान उठाना पड़ रहा था." विभाग पर 312 करोड़ रुपए अतिरिक्त भार स्कूल शिक्षा विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी कमल सिंह सोलंकी ने बताया कि "शिक्षकों को चतुर्थ समयमान-क्रमोन्नत वेतनमान देने की तैयारी पूरी कर ली गई है. इसका प्रस्ताव बनाकर कैबिनेट में चर्चा के लिए भेजा गया है. यहां से अनुमति मिलते ही चतुर्थ समयमान के आदेश जारी कर दिए जाएंगे और पात्र शिक्षकों को इसका लाभ मिलने लगेगा. सोलंकी ने बताया कि इस प्रक्रिया में स्कूल शिक्षा विभाग पर करीब 312 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा."

भोपाल प्रशासन की नई पहल: घर-घर पानी कनेक्शन और स्मार्ट मीटर, शादी पंजीकरण शुल्क अब सिर्फ 130 रुपए

भोपाल   नवविवाहित जोड़ों के लिए नए साल में भोपाल नगर निगम बड़ी राहत और खुशखबरी लेकर आया है। अब विवाह पंजीयन यानी मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना न सिर्फ आसान होगा, बल्कि बेहद सस्ता भी। नगर निगम ने मैरिज सर्टिफिकेट की फीस में भारी कटौती का प्रस्ताव तैयार कर मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) के समक्ष रखा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही नवदंपत्तियों को मैरिज सर्टिफिकेट के लिए अब 1100 रुपये की जगह मात्र 130 रुपये ही चुकाने होंगे। सबसे खास कुल 829 कॉलोनियों में पानी के बल्क कनेक्शन से व्यक्तिगत कनेक्शन मिलेंगे। इन दोनों बड़े फैसलों को 2 जनवरी को हुई मेयर इन कौंसिल (एमआईसी) की मीटिंग में मंजूरी मिल गई। अब 13 जनवरी को होने वाली निगम परिषद की बैठक में इन्हें रखा जाएगा। मैरिज रजिस्ट्रेशन फीस में 3900 रुपए की कटौती निगम के मुताबिक, अब तक निर्धारित शुल्क 1100 रुपए है। विलंब शुल्क 500 रुपए प्रति वर्ष और अधिकतम विलंब शुल्क 5 हजार रुपए लिया जाता था। प्रस्ताव पास होने के बाद रजिस्ट्रेशन फीस 130 रुपए लगेगी। ये राशि 30 दिन के अंदर आवेदन करने पर देना होगी। यदि 30 दिन के बाद आवेदन किया तो 1100 रुपए लगेंगे। यानी, पहले अधिकतम राशि 5 हजार रुपए थी, उसमें 3900 रुपए की कटौती की जा रही है। पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन नगर निगम में मैरिज सर्टिफिकेट के लिए 16 प्रकार की जानकारियों के साथ आवेदन करना होता है। अभी ऑनलाइन सुविधा होने के बावजूद अधिकांश लोग निगम कार्यालय जाकर आवेदन करते हैं। इसे देखते हुए निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने निर्देश दिए हैं कि अब सभी आवेदन अनिवार्य रूप से ऑनलाइन लिए जाएंगे और प्रमाण पत्र भी ऑनलाइन ही जारी किए जाएंगे। वार्ड कार्यालय से मिलेगा मैरिज सर्टिफिकेट विवाह पंजीयन प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए इसे विकेंद्रीकृत किया जा रहा है। अब सिर्फ एक केंद्र के बजाय नगर निगम के सभी 85 वार्ड कार्यालयों से मैरिज सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे। ऑनलाइन आवेदन करने पर संबंधित वार्ड कार्यालय की टीम घर जाकर सत्यापन करेगी। इससे नवदंपत्तियों को माता मंदिर स्थित विवाह पंजीयन शाखा के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नगर निगम की इस पहल को नए साल में आम नागरिकों के लिए बड़ी सुविधा और राहत के रूप में देखा जा रहा है। एमआईसी की मुहर के बाद लागू होगा नया नियम वर्तमान व्यवस्था में विवाह के एक साल बाद आवेदन करने पर 500 रुपये अतिरिक्त लेट फीस देनी पड़ती है। नए प्रस्ताव के अनुसार, यदि विवाह के एक महीने के भीतर आवेदन किया जाता है तो शुल्क सिर्फ 130 रुपये रहेगा। वहीं, एक महीने के बाद आवेदन करने पर अधिकतम 500 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। इस तरह किसी भी स्थिति में कुल शुल्क 630 रुपये से अधिक नहीं होगा।  होने वाली एमआईसी बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। व्यक्तिगत कनेक्शन पर 'शहर सरकार' का बड़ा फैसला एमआईसी में मंजूरी के बाद यदि परिषद की बैठक में व्यक्तिगत कनेक्शन का प्रस्ताव पास होता है तो यह शहर सरकार का बड़ा फैसला होगा। निगम चुनाव के दौरान बीजेपी ने इसे लेकर वादा किया था। वहीं, समय-समय पर सांसद-विधायक भी ये मांग उठा चुके हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार मांग करती आ रही है। ताकि, आम लोगों को फायदा मिल सके। कई बैठकों में यह मुद्दा उठ चुका है। बता दें कि बल्क कनेक्शन का मुद्दा कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी उठ चुका है। खासकर होशंगाबाद रोड की कॉलोनियों में बल्क कनेक्शन की बाध्यता होने से लोग कनेक्शन नहीं ले पा रहे हैं। लोग मांग उठा रहे हैं कि उन्हें सिंगल यानी व्यक्तिगत कनेक्शन दिए जाए। इससे बेवजह का बोझ नहीं पड़ेगा। यही प्रस्ताव अब 13 जनवरी की बैठक में आने वाला है। इसे लेकर जल कार्य अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट भी महापौर मालती राय को सौंप दी है। व्यक्तिगत कनेक्शन व्यवस्था लागू करने पर इतना खर्च भोपाल शहर में कुल 1566 कॉलोनियों हैं। जिनमें से 829 कॉलोनियां ऐसी हैं, जिनमें नगर निगम बल्क कनेक्शन के माध्यम से जलप्रदाय करता है। इन कॉलोनियों में व्यक्तिगत कनेक्शन के माध्यम से जल उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। यदि इन कॉलोनियों में नगर निगम संचालन करता है तो वाल्वमैन, ऑपरेटर, सुपरवाइजर, पाइपलाइन बिछाये जाने और इंटर कनेक्शन किए जाने पर कुल 801 करोड़ रुपए खर्च आएगा। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी बन गई है। इन कॉलोनियों के 74 हजार 905 घरों में स्मार्ट मीटर के माध्यम से जल उपलब्ध कराने पर प्रति आवास 9709 रुपए का खर्च होगा। कुल राशि 72.73 करोड़ रुपए खर्च आएगा। स्मार्ट मीटर लगाने सहित कुल व्यय राशि 874.43 करोड़ रुपए होगी। इनमें जलप्रदाय के संधारण/संचालन के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से कॉलोनी वासियों द्वारा कार्य कराया जा सकता है। जिसके लिए बल्क कनेक्शन का निर्धारित शुल्क 17 रुपए प्रति हजार लीटर नगर निगम को एजेंसी द्वारा दिया जाएगा। अतिरिक्त राशि एजेंसी द्वारा संबंधित कॉलोनी से ली जाएगी। इन कॉलोनियों में व्यक्तिगत कनेक्शन लिए जाने के लिए लोगों की सहमति जरूरी है। 70 प्रतिशत से अधिक सहमति प्राप्त होने पर ही व्यक्तिगत कनेक्शन प्रदान करने की कार्रवाई होगी। इन कॉलोनियों में प्रथम आओ प्रथम पाओ पद्धति के आधार पर व्यक्तिगत कनेक्शन प्रदान करने की प्रक्रिया की जा सकेगी। भोपाल में 2.30 लाख से ज्यादा कनेक्शन भोपाल में दो लाख 30 हजार से ज्यादा नल कनेक्शन हैं। इसके जरिए नगर निगम घर-घर तक सुबह और शाम पानी पहुंचाता है। इनमें बल्क कनेक्शन भी शामिल हैं। बल्क कनेक्शन की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए वे बल्क की जगह व्यक्तिगत यानी सिंगल कनेक्शन की मांग उठा रहे हैं। बहुत सारे उपभोक्ताओं को मिलाकर निगम बल्क कनेक्शन दे रहा है। इसमें कई व्यावहारिक दिक्कतें भी लोगों के सामने आ रही हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि व्यक्तिगत कनेक्शन मिलें। इससे लोग अपने हिसाब से कनेक्शन ले लेंगे और उन्हें ज्यादा कीमत भी नहीं चुकाना पड़ेगी। कांग्रेस भी चाहती है कि बाध्यता हटे बल्क के स्थान पर व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन दिए जाने के लिए कांग्रेस भी मुद्दा उठा रही थी। पिछली दो मीटिंगों में कांग्रेस पार्षद हंगामा भी कर चुके हैं। अमृत 2.0 से जुड़ा तीसरा प्रस्ताव एजेंडे में जो तीसरा प्रस्ताव शामिल हैं, वह अमृत 2.0 से संबंधित … Read more

नई रेलवे परियोजना के लिए 277 पेड़ों की कटाई, MP प्रशासन ने तय की शर्तें

इंदौर  इंदौर-बुधनी नई रेलवे लाइन परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण किया जाना है। इसे लेकर जिला प्रशासन ने तेजी से प्रक्रिया करने में लगा है। प्रोजेक्ट के अंतर्गत डकाच्या और सांवेर में आने वाले गांव से रेलवे लाइन गुजरना है। निर्माण के दौरान बाधक पेड़ों को चिन्हित कर लिया है। 35 प्रजातियों के 277 पेड़ों को काटा जाएगा। जिला प्रशासन की तरफ से सशर्त पेड़ों की कटाई को लेकर निर्देश दिए है। यह अनुमति रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) भोपाल के मुख्य परियोजना प्रबंधक के आवेदन पर दी गई है। रेल लाइन प्रोजेक्ट में वन विभाग की कोई जमीन नहीं आ रही है, बल्कि पटरियां राजस्व भूमि में बिछाई जाना है। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने इंदौर वनमंडल के दायरे में आने वाले गांवों में पेड़ काटने के लिए वन विभाग को दिए है। डाकच्या, लसूडिया परमार, मेलकलमा, डकाच्या, कदवाली बुजुर्ग, कदवाली खेर्द, बीसाखेडी सहित अन्य गावों में लाइन निकलेगी। यहां 35 प्रजातियों के 277 से अधिक पेड़ है। मार्च 2025 में जमीन अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन को पत्र दिया गया। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सांवेर ने पहले वन विभाग से राय मांगी गई थी, लेकिन समय-सीमा में कोई जवाब नहीं मिलने के कारण इसे मौन स्वीकृति माना गया। इसके बाद नायब तहसीलदार के माध्यम से प्रकरण आगे बढ़ाया गया और सभी पहलुओं पर विचार के बाद अनुमति प्रदान की गई। वनमंडलाधिकारी प्रदीप मिश्रा का कहना है कि पूरे प्रोजेक्ट में वन विभाग की कोई भूमि नहीं है। सिर्फ पेड़ों को काटने के लिए विभाग को निगरानी की जिम्मेदारी दी। इन शर्तों पर दी अनुमति प्रशासन ने पेड़ों की कटाई को लेकर कड़ी शर्तें लगाई हैं ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो सके। इसके लिए वन विभाग को निगरानी करने की जिम्मेदारी दी है। पेड़ काटते समय वन विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे और केवल चिन्हित पेड़ ही काटे जाएंगे। पहले ट्रांसप्लांट की कोशिश पेड़ों को काटने से पहले उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित (ट्रांसप्लांट) करने का प्रयास किया जाएगा। असफल होने पर ही कटाई होगी। इस बारे में वन विभाग को निगरानी करना है। उचित मूल्यांकन और नीलामी पेड़ों का मूल्यांकन संबंधित विभाग से कराया जाएगा और तय मूल्य से कम पर नीलामी नहीं होगी। कटाई का खर्च अलग से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक जितने पेड़ काटे जाएंगे। उनसे तीन गुना अधिक नए पेड़ रेलवे मार्ग के दोनों ओर लगाए जाएंगे। वहीं लगाए जाने वाले पेड़ कम से कम 3 साल पुराने होंगे। उन्हें ट्री गार्ड या वायर फेंसिंग से सुरक्षित किया जाएगा और 5 साल तक उनकी देखभाल की जाएगी। बकायादा हर साल वीडियोग्राफी कर रिपोर्ट वन समिति और एसडीएम कार्यालय को दी जाएगी। अन्य पेड़ों की कटाई पर रोक बबूल, नारियल, खजूर, आम, जाम, नीम, इमली सहित 35 प्रजातियों के पेड़ों को चिन्हित किया है। इनकी सूची बनाई गई है। इन पेड़ों के अलावा कोई भी अन्य पेड़ नहीं काटा जाएगा। जबकि निजी जमीन के पेड़ों और सागौन (टीक) के पेड़ों की कटाई पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। वहीं यदि भूमि या पेड़ों से जुड़ा कोई मामला कोर्ट में लंबित है, तो न्यायालय का आदेश सर्वोपरि होगा। जबकि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर यह अनुमति अपने आप रद्द मानी जाएगी। यह होगा फायदा इंदौर-बुधनी नई रेलवे लाइन से इंदौर और भोपाल के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। यहां तक कि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।माल परिवहन आसान होगा। क्षेत्रीय विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को मोदी जी जमीन पर उतार रहे हैं

– वीबी-जी रामजी योजना वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार कर गांवों को बनाएगी समृद्ध – वीबी-जी रामजी योजना में 125 दिन के रोजगार की गारंटी, मनरेगा में मिलता था सिर्फ 100 दिन का काम – ग्रामीण क्षेत्र के समुचित विकास में मील का पत्थर साबित होगी वीबी-जी रामजी योजना – प्रधानमंत्री जी ने 35 हजार करोड़ से 95 हजार करोड़ कर योजना का बजट करीब तीन गुना बढ़ाया – कृषि वर्ष 2026 में कृषि को उद्योग और रोजगार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाएगी सरकार – कृषि वर्ष में वीबी-जी रामजी योजना से कृषि आधारित उद्योगों को मिलेगा नया विस्तार – 15 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना से खेती बनेगी रोजगार और उद्योग का सशक्त माध्यम – ‘विकसित भारत‘ संकल्प को धरातल पर उतारने वाला मिशन बनेगी वीबी-जी रामजी योजना – वीबी-जी रामजी योजना से गांवों में अधोसंरचना का होगा विकास, आएगी विकास की क्रांति भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में वीबी-जी रामजी योजना को लेकर पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच का प्रतिफल है वीबी-जी रामजी जी योजना। प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच से आज दुनिया भारत की ओर देख रही हैं। वीबी-जी रामजी योजना वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार कर गांवों को समृद्ध बनाएगी। इस योजना में 125 दिन के रोजगार की गारंटी है, जबकि मनरेगा में सिर्फ 100 दिन काम मिलता था। यह योजना ग्रामीण क्षेत्र के समुचित विकास में मील का पत्थर साबित होगी। कांग्रेस के शासनकाल में इस योजना में 35 हजार करोड़ मिलते थे, जिसे बढ़ाकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 74 हजार करोड़ किया और अब सुधारों के साथ लागू की जा रही इस योजना का बजट बढ़ाकर 95 हजार करोड़ कर दिया है। बजट में यह बढ़ोत्तरी कांग्रेस के शासनकाल के समय से लगभग तीन गुना अधिक है। प्रधानमंत्री जी महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को जमीन पर उतार रहे हैं। कृषि वर्ष 2026 में कृषि को उद्योग और रोजगार से जोड़कर सरकार किसानों की आय बढ़ाने का कार्य करेगी। कृषि वर्ष में वीबी-जी रामजी योजना से कृषि आधारित उद्योगों को नया विस्तार मिलेगा। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार 15 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना बनाकर कृषि को रोजगार और उद्योग का सशक्त माध्यम बनाएगी। यह सुधार प्रक्रिया का एक हिस्सा है, कांग्रेस को इस योजना का विरोध की बजाय तथ्यात्मक बात करनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि वीबी-जी रामजी अधिनियम से गांवों में अधोसंरचना का विकास होगा और विकास की नई क्रांति आएगी। वीबी-जी रामजी योजना में गरीबों, मजदूरों को अब 100 दिन के बजाय बजाय 125 दिन मजदूरी मिलेगी। कांग्रेस योजना को लेकर भ्रम फैलाकर ग्रामीणों को गुमराह कर रही है। इस योजना में पंचायतों को भी कार्य करने का अधिकार दिया गया है। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “विकसित भारत” संकल्प को धरातल पर उतारने वाला राष्ट्रीय स्तर का मिशन है। अधोसंरचना के स्थाई निर्माण के साथ आजीविका का दायरा भी बढ़ाया गया है- डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का आभार मानता हूं कि उन्होंने महात्मा गांधी नरेगा योजना को आवश्यकता के अनुरूप सुधार करके देश भर में लागू किया है। इस योजना को लेकर छह माह में राज्य सरकारों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया पूरी करनी है। अब मजदूरों को 125 दिन के रोजगार की गारंटी निश्चित रूप से रोजगार को बढ़ावा देने वाला है। कौशल और उद्यमिता के साथ इस योजना को जोड़कर रोजगार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सुधारों के साथ लागू की जा रही नई योजना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब वर्ष में कभी भी मजदूरी प्राप्त कर सकते हैं। केंद्र सरकार 60 और राज्य सरकार 40 प्रतिशत की राशि वहन करेगी। कई मामलों में पहले केंद्र सरकार ही निर्णय लेता था, लेकिन अब राज्य सरकारें भी गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों के समुचित विकास को ध्यान में रखकर कार्यों को शामिल कर सकते हैं। नरेगा में विद्यालय भवन, पुस्तकालय, कोल्ड स्टोरेज, ग्रामीण पार्किंग, सौर ऊर्जा, नवकरणीय ऊजा, जैविक खाद इकाई, बाढ़ आश्रय स्थल, आपदा में क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत, जल जीवन मिशन के कार्यों में सुधार एवं रखरखाव जैसे कार्य शामिल नहीं थे। नई योजना में यह सभी कार्य शामिल किए गए हैं। जैविक खाद निर्माण इकाइयां, पशुपालन, मुर्गी-पालन शेड, मत्स्य पालन संबंधी निर्माण कार्यां, नर्सरी निर्माण, भवन-निर्माण सामग्री उत्पादन इकाई निर्माण का प्रावधान भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका को बढ़ाने के लिए किया गया है। योजना में पारदर्शिता को और बढ़ाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीबी-जी रामजी योजना में और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए होने वाले कार्यों की जियो-टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्डिंग एवं सूचना प्रबंधन प्रणाली तथा नियोजित सभी श्रमिकों को त्वरित एवं उचित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तथा बायोमेट्रिक भुगतान प्रणाली का प्रावधान किया गया है। पारदर्शिता के लिए ग्राम-सभा द्वारा सोशल ऑडिट भी कराने का प्रावधान है। नई योजना में पंचायतीराज संस्थाओं  जैसे ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत तथा राज्य परिषद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। श्रीमिकों का पंजीकरण करने, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करने तथा कार्यों की प्राथमिकता के आधार पर कम से कम 50 प्रतिशत कार्यों के निष्पादन की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। भौगोलिक स्थिति, नगरीकरकण की दिशा में प्रगति जैसी बातों को योजना निर्माण के दौरान ध्यान में रखा जाएगा। नई योजना से जनकल्याणकारी कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार को कानूनी अधिकार बनाया गया है, काम नहीं तो बेरोजगारी भत्ता मिलेगा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीबी-जी रामजी योजना में प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को न्यूनतम 125 दिन रोजगार या आजीविका का अवसर वैधानिक अधिकार है। महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों, खानाबदोस, महिला मुखिया परिवार, दिव्यांग मुखिया परिवार, छोटे व सीमांत किसानों के लिए भी रोजगार का प्रावधान किया गया है। अकुशल शारीरिक कार्यों की मजदूरी दरें केंद्र सरकार … Read more

देश विदेश की 25 महिला विभूतियों को ऊर्जस्विता सम्मान, जयश्री कियावत को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

भोपाल. अनुनय एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान भोपाल में बुधवार को 25 महिला विभूतियों को ऊर्जस्विता सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री निर्मला भूरिया ने की और मुख्य अतिथि की भूमिका पशुपालन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने निभाई। महापौर मालती राय और भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी परांजपे विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद थे। इस अवसर पर कई जिलों में कलेक्टर की भूमिका निभाने वाली जयश्री कियावत को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।   महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि महिलाएं घर का काम तो करती हैं, लेकिन जब बाहर निकलती हैं तो औरों को भी प्रेरणा देने का काम करती हैं। आज जिन महिलाओं को सम्मानित किया गया है, वह अपने-अपने क्षेत्रों में अलग मुकाम बना चुकी है। इससे निश्चित ही बड़ी संख्या में महिलाओं को और भी बेहतर काम करने की प्रेरणा मिल रही है। हमारी सरकार भी महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर योजनाओं को क्रियान्वित कर रही हैं।  इस अवसर पर श्री पटेल ने कहा कि भागवत कथा का आयोजन हो या समाज की बेहतरी के लिए कुछ अन्य आयोजन, बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी उसमें होती है। इस तरह के आयोजन होते रहना चाहिए, जिससे महिलाओं को प्रेरणा मिलती है। अनुनय संस्था की अध्यक्ष माही भजनी ने संस्था के साथ ही पुरस्कारों की जानकारी दी। संस्था के सचिव रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी डॉ. एके भट्टाचार्य ने पुरस्कार के लिए चुनी गई महिलाओं के साथ ही प्रक्रिया की जानकारी दी। इस अवसर पर पार्षद अरविंद वर्मा भी मौजूद थे। इन महिला विभूतियों का किया गया सम्मानः स्विट्जरलैंड से इजाबेल (इकोटूरिज्म), इंदौर से डॉ. सीमा अलावा (प्रशासनिक सेवा), उज्जैन से महामंडलेश्वर देवी माँ शिवांगी नंद गिरी जी (अध्यात्म), उत्तराखंड से अनुपमा जोशी (डिफेंस सर्विसेस), नीतू शर्मा (सामाजिक नेतृत्व), नर्मदापुरम से डॉ. स्मिता रिछारिया (लेखक), यूके से सोफी हार्टमैन (कम्युनिटी डेवलपमेंट), ग्वालियर से डॉ. महिमा तारे (महिला सशक्तिकरण), छत्तीसगढ़ से तान्या मरावी (आदिवासी कला) और दीप्ति ओग्रे (जनजातीय संस्कृति एवं उद्यमिता), शाजापुर से अनुज्ञा शर्मा (स्पोर्ट्स), भोपाल से श्रीमती डॉली शर्मा (समाज सेवा), प्रीति शर्मा जैन (प्रिंट मीडिया), डॉ. प्रिया सिंह कुशवाह (स्वास्थ्य सेवा), सुश्री गुंजन चौकसे (राजनीति), विनीता सिंह तोमर (समाज सेवा), जया शर्मा (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया), मुद्रा केसवानी (इन्फ्लुएंसर), तरु सक्सेना (आतिथ्य शिक्षा), अविशी श्रीवास्तव (शिक्षा और प्रशिक्षण), डॉ. मनेन्द्र कटियार (लोक स्वास्थ्य), डॉ. राखी माहेश्वरी (स्वास्थ्य सेवा प्रशासन), दिल्ली से नमिता छेत्री (सामाजिक उद्यमिता), छतरपुर से डॉ. श्वेता गर्ग (सामुदायिक विकास)। 

उड़ान के दौरान बिगड़ी तबीयत: इंदौर में एयर इंडिया एक्सप्रेस विमान की आपात लैंडिंग, मासूम ने तोड़ा दम

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जयपुर से बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट (IX-1240) को उस वक्त इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी, जब विमान में सवार एक साल के मासूम बच्चे की तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई। मंगलवार शाम उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। परिजनों ने तत्काल केबिन क्रू को सूचना दी। हालात बिगड़ते देख पायलट ने शाम करीब 7:20 बजे इंदौर एयरपोर्ट से संपर्क कर मेडिकल इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने तुरंत इंदौर एयरपोर्ट पर मेडिकल इमरजेंसी घोषित की। एयरोब्रिज पर डॉक्टरों और एम्बुलेंस की टीम पहले से तैनात कर दी गई।   शाम 7:50 बजे जैसे ही विमान इंदौर में उतरा, बच्चे को तुरंत बाहर निकाला गया। विमान में मौजूद एक डॉक्टर पहले से ही सीपीआर दे रहे थे। एयरपोर्ट पर तैनात मेडिकल टीम ने भी लगातार प्रयास किए और बच्चे को एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। बच्चे को पहले नजदीकी अस्पताल और फिर डॉल्फिन हॉस्पिटल रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही मासूम ने दम तोड़ दिया।   कौन था मासूम? हॉस्पिटल प्रबंधन के अनुसार, बच्चे का नाम मोहम्मद अबरार, उम्र एक साल थी। वह अपने पिता मोहम्मद अजलान, मां फिरोजा और बड़े भाई के साथ जयपुर से बेंगलुरु अपने घर लौट रहा था। क्या रही वजह? जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट में बैठने से पहले ही बच्चे की तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं थी। आशंका जताई जा रही है कि उड़ान के दौरान पानी या दूध पिलाते समय तरल पदार्थ श्वासनली में चला गया, जिससे उसकी हालत अचानक बिगड़ गई। मासूम की मौत ने कई सवाल छोड़े इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर हवाई यात्रा के दौरान शिशुओं की मेडिकल सुरक्षा, प्राथमिक उपचार और जागरूकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक परिवार खुशियों के साथ घर लौट रहा था… लेकिन सफर के बीच आसमान में ही उनकी दुनिया उजड़ गई।  

नर्सिंग कॉलेजों में अब महिलाओं को नहीं मिलेगा 100% आरक्षण, पुरुष उम्मीदवारों को 13 जनवरी तक करने होंगे आवेदन

जबलपुर  मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और ट्यूटर के कुल 286 पदों पर अब महिला उम्मीदवारों को 100% आरक्षण नहीं मिलेगा। एमपी हाईकोर्ट ने पुरुष उम्मीदवारों की याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में विभिन्न फैकल्टी की भर्ती में पुरुष अभ्यर्थियों को शामिल किया जाएगा। यह जानकारी मंगलवार को हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) की ओर से दी गई। ईएसबी के अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है, किंतु लिखित निर्देश की कॉपी अभी नहीं मिली। जबलपुर निवासी याचिकाकर्ता नौशाद अली द्वारा इस भर्ती में महिला अभ्यर्थियों को दिए जा रहे 100 फीसद आरक्षण को चुनौती दी गई है। सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 पदों पर सीधी भर्ती वकील विशाल बघेल ने कहा- 16 दिसंबर को प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 अकादमिक पदों पर सीधी भर्ती के जरिए विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर के सभी पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए थे। आवेदन की अंतिम तिथि 7 जनवरी थी। पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर किया गया था बघेल ने बताया कि इस मामले में जितने भी पुरुष उम्मीदवार हैं, जो मध्य प्रदेश से डिग्रीधारी हैं और वो महिलाओं के बराबर ही योग्यता रखते हैं। उन्हें सिर्फ इस आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया गया था कि वह पुरुष हैं। जबलपुर निवासी नौशाद अली और अन्य याचिकाकर्ताओं ने याचिका दाखिल की। कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में इन भर्तियों में पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया। जबकि भर्ती नियम और अपेक्स काउंसिल आईएनसी के सभी मापदंड लिंग भेद की अनुमति नहीं देते हैं। इन सबके बाद भी लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से की जा रही भर्ती में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 (2) और भर्ती के नियमों की अनदेखी की जा रही है। याचिका में आरोप- 50% आरक्षण सीमा का उल्लंघन हुआ याचिका में आरोप लगाया गया कि सरकार की इस भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50% आरक्षण सीमा का उल्लंघन किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 16(2) के तहत यह सीधे-सीधे लिंग भेदभाव है। इसके अलावा मध्य प्रदेश शासन ने आरक्षण नीति बनाई हुई है। महिलाओं को आरक्षण देने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। उसके साथ-साथ भर्ती नियम-2023 बनाया है। इनमें भी कहीं ये नहीं लिखा है कि पुरुषों को सिर्फ पुरुष होने के आधार पर भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जाएगा। इस मामले में 29 दिसंबर को हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया था। मंगलवार को भी प्रिंसिपल बेंच में सुनवाई हुई। सरकार ने मौखिक रूप से कहा कि अब भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को भी शामिल किया जाएगा। 68 पदों पर भर्ती में पुरुषों को अपात्र करार दिया था बता दें मामला सामने आने के बाद सरकार ने ट्यूटर के 218 विज्ञापित पदों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया था, लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के कुल 68 पदों पर भर्ती में पुरुषों को अपात्र करार देते हुए भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी। उनकी ओर से बताया गया कि आवेदन की अंतिम तिथि सात जनवरी है। ऐसे में कोर्ट ने अगली सुनवाई सात जनवरी को निर्धारित कर सरकार को लिखित जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने पक्ष रखा। उनका आरोप है कि 16 दिसंबर को ईएसबी द्वारा जारी ग्रुप-1 सब ग्रुप-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 के विज्ञापन में 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर सहित कुल 286 पदों पर महिला उम्मीदवारों को 100 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इनमें पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर किया जाना न सिर्फ भर्ती नियम तथा इंडियन नेशनल काउंसिल के मापदंडों का उल्लंघन है। बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 और सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का भी उल्लंघन है। विज्ञापन के अनुसार, आवेदन 24 दिसंबर से आमंत्रित किए गए थे। सात जनवरी, 2026 इसकी अंतिम तिथि है।

MP में पानी का संकट गहराया: गांवों में भी सप्लाई हो रहा दूषित पानी, रिपोर्ट ने खोली पोल

भोपाल इंदौर के भागीरथपुरा में काल बने पीने के पानी ने अब तक 20 लोगों की जिंदगियां लील ली हैं और जो इससे बच गए, उनका अस्पताल में इलाज जारी है। सरकार कटघरे में है तो विपक्ष भी इस मुद्दे पर हावी है। इस बीच मध्य प्रदेश के गांवों में पीने के पानी पर आई एक रिपोर्ट आपको भी हैरान कर देगी। केंद्र सरकार के 'जल जीवन मिशन' की एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक-तिहाई से अधिक पीने का पानी इंसानों के इस्तेमाल के लायक नहीं है, जिससे लाखों लोग अनदेखे लेकिन जानलेवा खतरों की चपेट में हैं।   रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े 4 जनवरी 2026 को जारी 'फंक्शनैलिटी असेसमेंट रिपोर्ट' (कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्ट) के अनुसार मध्य प्रदेश में पानी के केवल 63.3% नमूने ही गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 76% है। इसका मतलब है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में 36.7% पानी के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। इनमें हानिकारक बैक्टीरिया (कीटाणु) या रासायनिक मिलावट पाई गई है। ये नमूने सितंबर-अक्टूबर 2024 के दौरान मध्य प्रदेश के 15,000 से अधिक ग्रामीण घरों से इकट्ठा किए गए थे। यह स्थिति उन जगहों पर और भी अधिक चिंताजनक है जो सुरक्षा और इलाज के लिए बनी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में पानी के केवल 12% नमूने ही सूक्ष्मजीवविज्ञानी (microbiological) सुरक्षा जांच में पास हो पाए, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 83.1% है। इसका मतलब है कि मध्य प्रदेश के लगभग 88% अस्पतालों में मरीजों को असुरक्षित पानी दिया जा रहा है। स्कूलों में 26.7% नमूने माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट में फेल हो गए, जिससे बच्चे हर दिन दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इन जिलों की हालत सबसे खराब अनूपपुर और डिंडोरी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में स्थिति सबसे खराब है, जहां एक भी पानी का नमूना सुरक्षित नहीं पाया गया। बालाघाट, बैतुल और छिंदवाड़ा में 50% से अधिक पानी के नमूने दूषित मिले हैं। मध्य प्रदेश में केवल 31.5% घरों में नल के कनेक्शन हैं, जो कि 70.9% के राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। जहां पाइपलाइन बिछी भी है, वहां व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है; राज्य के 99.1% गांवों में पाइप से जलापूर्ति की व्यवस्था तो है, लेकिन केवल 76.6% घरों में ही चालू हालत में नल लगे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हर चौथे घर में या तो नल खराब है या पानी ही नहीं आता। इससे भी बदतर बात यह है कि नल से पानी आने का मतलब सुरक्षित पानी होना नहीं है। इंदौर जिला, जिसे आधिकारिक तौर पर 100% नल कनेक्शन वाला घोषित किया गया है, वहां भी केवल 33% घरों को ही सुरक्षित पीने का पानी मिल रहा है। पूरे राज्य में 33% पानी के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हो गए, जो इस बात की पुष्टि करता है कि संकट केवल पानी की पहुंच का नहीं, बल्कि 'जहरीली सप्लाई' का है। केंद्र सरकार ने इस स्थिति को "सिस्टम की ओर से पैदा की गई आपदा" करार दिया है और चेतावनी दी है कि यदि पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो इस साल फंड (बजट) में कटौती की जा सकती है। यह चेतावनी एक बड़ी त्रासदी के बाद आई है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत हो गई। 429 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से 16 आईसीयू (ICU) में हैं और तीन वेंटिलेटर पर हैं। अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने औपचारिक रूप से इस संकट को 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' (सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल) घोषित कर दिया है। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि "अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में साफ पीने का पानी पाने का अधिकार भी शामिल है" और वर्तमान स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दायरे में आती है।  

एम.पी. ट्रांसको की डिजिटल पहल, पेंशनर्स को अब वेबसाइट से मिलेंगी पेंशन स्लिप्स

पेंशनर्स के लिए एम.पी. ट्रांसको की एक और डिजिटल पहल पेंशनर्स को अब वेबसाइट पर मिलेगी पेंशन स्लिप भोपाल  मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने अपने पेंशनर्स की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक और महत्वपूर्ण डिजिटल पहल की है। कंपनी की आईटी सेल एवं पेंशन विभाग की संयुक्त टीम के प्रयासों से अब एम.पी. ट्रांसको के तकरीबन 4500 पेंशनर्स, चाहे वो किसी भी बैंक से पेंशन प्राप्त करते हों, कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी पेंशन स्लिप ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे। एम.पी. ट्रांसको के मुख्य वित्तीय अधिकारी मुकुल मेहरोत्रा ने बताया कि अब तक केवल यूनियन बैंक से पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनर्स को ही वेबसाइट पर पेंशन स्लिप उपलब्ध कराने की सुविधा थी। लेकिन अब भारतीय स्टेट बैंक सहित अन्य बैंकों से पेंशन लेने वाले पेंशनर्स के लिए भी यह व्यवस्था सफलतापूर्वक विकसित कर ली गई है। ऐसे प्राप्त करें स्लिप कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध पेंशन पोर्टल में “पेंशन स्लिप प्राप्त करें” नामक विकल्प जोड़ा गया है। इसके माध्यम से पेंशनर अपने न्यूमेरिक पीपीओ नंबर , बैंक खाता संख्या तथा माह का चयन कर आसानी से पेंशन स्लिप ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में दिसंबर 2025 से संबंधित पेंशन स्लिप उपलब्ध कराई गई हैं, शीध्र ही वर्ष 2025 से पूर्व अवधि की पेंशन स्लिप भी वेबसाइट पर उपलब्ध करवा दी जायेगी।