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सीनियर्स की टॉर्चर की शिकायत पर इंदौर डेंटल कॉलेज में 3 छात्राओं को सस्पेंड किया गया

इंदौर  एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला अभी थमा ही नहीं था कि दूसरा मामला इंदौर के शासकीय डेंटल कॉलेज से सामने आया है. यहां पर एमडीएस फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स ने यूजीसी को रैगिंग के संबंध में शिकायत की, जिसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने बड़ा एक्शन लिया है. शासकीय डेंटल कॉलेज प्रबंधन द्वारा जांच कर तीन सीनियर छात्राओं को सस्पेंड कर दिया गया है. इस तरह रैगिंग कर रही थीं सीनियर छात्राएं शासकीय डेंटल कॉलेज एमडीएस प्रथम वर्ष की छात्राओं द्वारा यूजीसी को रैगिंग के संबंध में एक मेल भेजा गया था. इस मेल में उन्होंने जानकारी दी कि कॉलेज की ही डेंटल की सीनियर छात्राएं उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं. वह उनसे डिपार्टमेंट खोलने का काम करवाती हैं और शाम को छुट्टी होने के बाद भी काफी देर तक कॉलेज में ही बिठाए रखती हैं. साथ ही जब खाना खाने की बारी आती है तो सीनियर के द्वारा बाद में खाने का दबाव बनाया जाता है. यूजीसी के दखल के बाद कॉलेज प्रबंधन का एक्शन जैसे ही यूजीसी को पूरे मामले की जानकारी लगी तो अधिकारियों ने कॉलेज प्रबंधन को इस पूरे मामले से अवगत करवाया. इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने जूनियर छात्राओं की शिकायत पर रैगिंग की आरोपी तीन छात्राओं की जांच पड़ताल शुरू की. जांच पड़ताल के दौरान सीनियर छात्राओं ने कॉलेज प्रबंधन को यह जवाब दिया कि उन्होंने सिर्फ अनुशासन बनाए रखने के लिए इस तरह की हरकत की थी. इस पर कॉलेज प्रबंधन ने छात्राओं को बताया कि अनुशासन बनाने के लिए इस तरह का दबाव बनाना भी रैगिंग की श्रेणी में आता है. डेंटल फर्स्ट ईयर में केवल 6 छात्र शासकीय डेंटल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉक्टर अलका गुप्ता ने बताया, '' रैगिंग से संबंधित शिकायत कॉलेज की जूनियर छात्राओं द्वारा यूजीसी को की गई थी. उसी के बाद जांच कर तीन छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया है और पूरे मामले की जानकारी भी यूजीसी को दे दी गई है.'' इंदौर के शासकीय डेंटल कॉलेज के एमडीएस प्रथम वर्ष की बैच में 6 ही छात्र हैं, जिसमें एक छात्र और 5 छात्राएं हैं और इन्हीं लोगों ने तीन सीनियर छात्राओं की रैगिंग को लेकर शिकायत की थी.

कोहरे का असर रेल ट्रांसपोर्ट पर, MP-मुंबई स्पेशल ट्रेनें लेट, यात्री परेशान

भोपाल  कोहरे का असर आम जनजीवन के अलावा रेल यातायात पर नजर आ रहा है। दिल्ली, नागपुर, जबलपुर और मुंबई की तरफ से आने वाली ट्रेनें अपने समय से लेट चल रही है। सोमवार को 18238 छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (Chhattisgarh Express) अपने निर्धारित समय से 1 घंटे की देरी से इटारसी रेलवे स्टेशन पहुंची। इसके अलावा 22533 यशवंतपुर सुपर फास्ट (Yesvantpur Superfast) 2 घंटे लेट चली। 12715 सचखंड एक्सप्रेस (Sachkhand Express) अपने तय समय से तीन घंटे की देरी से इटारसी स्टेशन पर पहुंची। कोहरे के कारण दिल्ली से आने वाली ट्रेनें लेट इधर, ठंड बढ़ने के साथ ही शहर में सुबह सूर्यउदय के समय घना कोहरा छाया रहा। जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। लोग ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आ रहे हैं। कोहरे की वजह से दिल्ली से आने वाली कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं। नगरपालिका ने शहर के जयस्तंभचौक, रेलवे स्टेशन के सामने रेन बसेरा के पास सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाए हैं। जिससे लोग राहत महसूस कर रहे हैं। रीवा-मुंबई के बीच चलेंगी दो स्पेशल ट्रेन रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और बढ़ती मांग को देखते हुए रीवा और मुंबई (सीएसएमटी) के बीच दो-दो ट्रिप स्पेशल ट्रेनें (Rewa-CSMT Special Trains) चलाने का निर्णय लिया है। ये ट्रेनें इटारसी होकर गुजरेंगी, जिससे नर्मदापुरम और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। पीआरओ रेलवे ने बताया कि रीवा से सीएसएमटी के लिए स्पेशल ट्रेन गुरुवार 1 जनवरी और 8 जनवरी को रवाना होगी। वापसी में सीएसएमटी से रीवा के लिए यह ट्रेन शुक्रवार 2 जनवरी और 9 जनवरी को चलाई जाएगी। 02187 रीवा-सीएसएमटी स्पेशल ट्रेन रीवा से दोपहर 3.50 बजे प्रस्थान करेगी।

सागर: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में एक साथ बनेंगे 10 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर

सागर  बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) सागर में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। सागर विधायक शैलेंद्र जैन के सतत प्रयासों से अस्पताल परिसर में एक साथ 10 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे एक ही समय में 10 अलग-अलग विधाओं के ऑपरेशन संभव हो सकेंगे। 16 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण विधायक जैन ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से 60,000 वर्गफुट क्षेत्रफल में आधुनिक स्ट्रक्चर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 10 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर की स्थापना के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि से अत्याधुनिक सुविधाओं का निर्माण प्रस्तावित है। सागर के स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि साबित होगी उन्होंने कहा कि यह परियोजना सागर के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी। विधायक जैन ने बताया कि वर्तमान में ऑपरेशन थिएटर की कमी के कारण कई मरीजों को अपने ऑपरेशन के लिए कई दिनों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। 10 नए मॉड्यूलर ओटी के निर्माण से न केवल मरीजों को समय पर उपचार मिलेगा, बल्कि चिकित्सकों को भी बेहतर और सुगम कार्य वातावरण उपलब्ध होगा। विभिन्न प्रकार के रोगियों के ऑपरेशन एक साथ इससे विभिन्न प्रकार के रोगियों के ऑपरेशन एक साथ और अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। मंगलवार को विधायक जैन ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पीएस ठाकुर के साथ निर्माणाधीन ऑपरेशन थिएटर भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए ठेकेदार को कार्य शीघ्र, गुणवत्तापूर्ण एवं समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के अधिकारी, चिकित्सक एवं निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। परियोजना के पूर्ण होने पर क्षेत्र के हजारों मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा लाभ मिलेगा।

भोपाल में रोड विस्तार के लिए 7 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई, NHAI के दावे पर उठे सवाल

भोपाल देश में विकास बनाम पर्यावरण की बहस अभी थमी भी नहीं थी कि अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक और चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आ रही है. झीलों और हरियाली के लिए पहचाने जाने वाले भोपाल में अब विकास के नाम पर हज़ारों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने वाली है. मामला शहर के बीचोबीच स्थित अयोध्या बायपास का है, जहां सड़क चौड़ीकरण की आड़ में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई शुरू हो चुकी है. जिस विकास की बात की जा रही है, उसकी कीमत भोपाल की हरियाली को चुकानी पड़ रही है. अयोध्या बायपास, जो भोपाल के सबसे व्यस्त और अहम मार्गों में से एक है, अब फोर लेन से सिक्स लेन बनने जा रहा है. इसके साथ ही दोनों ओर दो-दो लेन की सर्विस रोड भी तैयार की जाएगीए जिसके बाद यह सड़क 10 लेन की हो जाएगी. इस परियोजना के तहत हजारों पेड़ों की कटाई होनी है. जैसे ही यह जानकारी सामने आई, पर्यावरणविदों, प्रकृति प्रेमियों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी फैल गई. सवाल उठने लगे कि क्या ट्रैफिक समाधान का यही एकमात्र रास्ता है, और क्या हर बार विकास की कीमत पेड़ों को चुकानी पड़ेगी? इस पूरे प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI के पास है. एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर देवांश नुवल का तर्क है कि आने वाले वर्षों में ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ेगा और सड़क चौड़ीकरण से जाम की समस्या से राहत मिलेगी.  मामला NGT तक पहुंचा और NGT के निर्देश पर एक विशेष समिति का गठन किया गया, जिसने पूरे प्रोजेक्ट और पेड़ों की स्थिति की जांच की. जांच के बाद समिति ने 10 हजार की बजाय 7,871 पेड़ों की कटाई को सशर्त मंजूरी दी. इन शर्तों के मुताबिक, काटे जाने वाले हर एक पेड़ के बदले 10 नए पौधे लगाए जाएंगे. यानी लगभग 80 हज़ार पौधरोपण का दावा किया गया है. NHAI का कहना है कि पौधरोपण सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसकी निगरानी भी की जाएगी और पौधों के जीवित रहने की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञ इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि वर्षों पुराने, बड़े और छायादार पेड़ों की भरपाई केवल पौधे लगाकर नहीं की जा सकती. एक पेड़ बनने में दशकों लगते हैं और उसका पर्यावरणीय योगदान किसी नए पौधे से तुरंत पूरा नहीं हो सकता. भोपाल के रहने वाने नितिन सक्सेना ने इन पेड़ों की कटाई को लेकर एनजीटी में याचिका भी लगाई लेकिन पेड़ों की कटाई को रोक नहीं पाए विकास की रफ्तार तेज है, लेकिन उसकी कीमत भी कम नहीं. आज सड़कें चौड़ी होंगी, ट्रैफिक सुगम होगा, लेकिन क्या कल शहर सांस ले पाएगा? कागजों पर दस गुना पौधरोपण के वादे हैं, मगर जमीन पर गिरते पुराने पेड़ उस भरोसे को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं. भोपाल, जो कभी हरियाली की पहचान था, अब एक अहम मोड़ पर खड़ा है जहां फैसला सिर्फ सड़क का नहीं, आने वाली पीढ़ियों की सांसों का भी है

इंदौर में न्यूनतम 8°C, भोपाल 9.8°C, MP में घना कोहरा और पचमढ़ी में पारा 4°C से नीचे

भोपाल  उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी का असर मध्यप्रदेश में दिखने लगा है। प्रदेश में ठंड लगातार बढ़ रही है और बुधवार रात से सर्दी और तीखी होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, न्यूनतम तापमान में अगले 24 घंटे में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और गिरावट दर्ज की जा सकती है। फिलहाल पचमढ़ी और शहडोल का कल्याणपुर ऐसे इलाके हैं, जहां रात का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। इधर, प्रदेश के उत्तरी हिस्से घने कोहरे की चपेट में हैं। ग्वालियर, रीवा और सतना में दृश्यता 50 से 200 मीटर तक सिमट गई है, जिससे हालात जीरो विजन जैसे हो गए हैं। दमोह, खजुराहो, नौगांव, मुरैना, सीधी, दतिया, इंदौर, भोपाल, राजगढ़, उज्जैन, शाजापुर, सीहोर और देवास में भी सुबह 6 से 8 बजे के बीच घना कोहरा छाया रहा। बुधवार सुबह भी कई जिलों में यही स्थिति देखने को मिली। कम विजिबिलिटी के कारण कई जगह सड़कों पर वाहन चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। जानिए आपके शहर में मौसम की स्थिति क्या है और आने वाले तीन दिनों में ठंड-कुहासे का क्या असर रहेगा।  आज का मौसम कैसा रहा? बुधवार सुबह ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और शहडोल में घना कोहरा छाया रहा। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, देवास, राजगढ़, रायसेन और विदिशा में मध्यम स्तर का कोहरा देखा गया।मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के मुताबिक, अगले दो दिनों में कोहरे का असर थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन ठंड और तेज होगी। न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की और गिरावट संभव है। अगले पांच दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। न्यूनतम तापमान के मामले में नौगांव (छतरपुर) प्रदेश का दूसरा सबसे ठंडा शहर रहा, जहां रात का तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा राजगढ़ में 7.4, मलाजखंड में 7.6, रीवा में 8.2 और उमरिया में 8.3 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। कई शहरों में कोहरे का असर बुधवार सुबह कुछ शहरों में कोहरे से राहत जरूर मिली, लेकिन इंदौर, खजुराहो, रीवा, सतना, दतिया, गुना, ग्वालियर, रतलाम, उज्जैन, मंडला, नरसिंहपुर और नौगांव में घने कोहरे का असर साफ दिखाई दिया। कई जगह विजिबिलिटी 2 से 4 किलोमीटर तक सीमित रही। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं और साफ आसमान के कारण रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है। ऐसे में लोगों को ठंड से बचाव के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।   पचमढ़ी में इस सीजन की सबसे ठंडी रात प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में इस सीजन पहली बार न्यूनतम तापमान 4 डिग्री से नीचे पहुंच गया। मंगलवार रात यहां तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ सकती है, जिससे न्यू ईयर सेलिब्रेशन पर भी असर पड़ सकता है। एमपी में सबसे ठंडा पचमढ़ी शहर रात का तापमान पचमढ़ी (नर्मदापुरम) 3.8 राजगढ़ 7.4 नौगांव (छतरपुर) 7.0 मलाजखंड (बालाघाट) 7.6 रीवा 8.2 उमरिया 8.3 रायसेन 9.0 छिंदवाड़ा 9.0 मंडला 9.0 खजुराहो (छतरपुर) 9.2 टीकमगढ़ 9.8 बैतूल 10.0 खंडवा 10.0 खरगोन 10.2 सतना 10.2 नरसिंहपुर 10.4 रतलाम 10.5 दमोह 10.6 धार 10.9 दतिया 11.1 गुना 11.4 सिवनी 11.4 सीधी 11.4 श्योपुर 12.0 सागर 12.4 नर्मदापुरम 13.5 कई शहरों में घना कोहरा बुधवार सुबह कुछ जगहों पर कोहरे से हल्की राहत मिली, लेकिन इंदौर, खजुराहो, रीवा, सतना, दतिया, गुना, ग्वालियर, रतलाम, उज्जैन, मंडला, नरसिंहपुर और नौगांव में घना कोहरा छाया रहा। कई इलाकों में विजिबिलिटी 2 से 4 किलोमीटर तक सीमित रही। आज कैसा है मौसम? घना कोहरा: ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल मध्यम कोहरा: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, देवास, राजगढ़, रायसेन, विदिशा अगले कुछ दिनों का मौसम अपडेट मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, अगले 2 दिन कोहरे का असर कुछ कम रहेगा, लेकिन ठंड और तेज होगी। न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक गिरावट आ सकती है। अगले 5 दिनों तक मौसम साफ रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। नवंबर-दिसंबर में टूटा ठंड का रिकॉर्ड इस बार नवंबर और दिसंबर में ठंड ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भोपाल में नवंबर महीने में 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे ज्यादा है। 17 नवंबर की रात भोपाल में तापमान 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड है। इंदौर में भी 25 साल का रिकॉर्ड टूटा इंदौर में भी इस बार ठंड ने रिकॉर्ड बनाया। यहां तापमान 6.4 डिग्री तक गिर गया, जो पिछले 25 सालों में सबसे कम है। दिसंबर में भोपाल और इंदौर दोनों जगह पारा 5 डिग्री से नीचे जा चुका है। दिसंबर-जनवरी क्यों होते हैं सबसे ठंडे? मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह दिसंबर और जनवरी में सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। इन महीनों में उत्तर भारत से ठंडी हवाएं आती हैं और वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय रहते हैं, जिससे ठंड और बढ़ जाती है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग: बर्फीली हवाओं और घने कोहरे का असर सागर और रीवा संभाग: तेज ठंड और शीतलहर भोपाल संभाग: सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा में ठंड का जोर सागर संभाग: निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना रीवा संभाग: मऊगंज, सीधी, सिंगरौली जबलपुर संभाग: मंडला, डिंडौरी इंदौर संभाग: इंदौर, धार, झाबुआ एक दर्जन से अधिक ट्रेनें 5 से 8 घंटे तक लेट घने कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली एक दर्जन से अधिक ट्रेनें 5 से 8 घंटे तक देरी से चल रही हैं। मालवा एक्सप्रेस रोजाना 4 से 5 घंटे लेट हो रही है, जबकि शताब्दी और सचखंड एक्सप्रेस भी प्रभावित हैं। तापमान की बात करें तो प्रदेश के बड़े शहरों में भोपाल का न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री, इंदौर का 6.4 डिग्री, ग्वालियर का 8.5 डिग्री, उज्जैन का 9.8 डिग्री और जबलपुर का 8.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां रात का पारा 4.2 डिग्री पर पहुंच गया। शहडोल के कल्याणपुर में 4.6 डिग्री, मंदसौर में 5.7 डिग्री, … Read more

भोपाल: संस्कार पब्लिक स्कूल में EPS 95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति की राष्ट्रीय नेतृत्व बैठक आयोजित

भोपाल  EPS 95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति भोपाल के संस्कार पब्लिक स्कूल संत हिरदाराम नगर बैरागढ़ भोपाल में 23 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय नेतृत्व में बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता. महेन्द्र शर्मा कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा की गई जिसमें भोपाल सीहोर विदिशा जबलपुर पिपरिया से बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित थे बैठक में माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर श्री अशोक राऊत राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री बीएस नारखेडे महिला फ्रंट की राष्ट्रीय सचिव श्रीमती सरिता नारखेडे अल्प प्रवास पर भोपाल पधारे बैठक को संबोधित करते हमारे चार सूत्रीय मांगों का निराकरण अब शीघ्र होने जा रहा है पहले प्रमुख मांग न्यूनतम पेंशन 7500 प्लस महंगाई भत्ता दूसरी मांग पेंशन धारक पति पत्नी को निशुल्क अच्छी चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए तीसरी मांग माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश 4 अक्टूबर 2016 और 4 नवंबर 2022 के अनुसार पेंशनरों को बिना किसी भेदभाव के उच्च पेंशन का लाभ दिया जाए. चौथी मांग 1995 के पूर्व 63सेवानिवृत कर्मचारियों को सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए रुपए 5000 मासिक पेंशन दी जाए.उन्होंने अपने संबोधन में यह बताया कि राष्ट्रीय संघर्ष समिति उक्त मांगों के लिए 10 वर्षों से आंदोलन र त है राष्ट्रीय नेतृत्व संगठन द्वारा समय-समय पर माननीय प्रधानमंत्री महोदय माननीय श्रम मंत्री महोदय वित्त मंत्री ईपीएफओ से चर्चा कर पेंशनरों को बहुत ही कम पेंशन मिल रही है जिसमें उनका गुजारा होना असंभव है पेंशनर धन के अभाव में गंभीर बीमारियों का इलाज करने में असमर्थ है और पेंशन बढ़ाने की आस में वह धीरे-धीरे स्वर्गवासी हो रहे हैं राष्ट्रीय नेतृत्व संगठन को माननीय श्रम मंत्री महोदय द्वारा शीघ्र ही उक्त मांगों का अब शीघ्र ही  निराकरण करने को कहा है. अगर अब केंद्र सरकार श्रम मंत्री इस अवसर पर ईपीएफओ द्वारा हमारी मांगों का निराकरण नहीं किया जाता है तो हमें तीव्र आंदोलन करना होगा इसके लिए पेंशनरों को तैयार रहने हेतु कहा गया है इस अवसर महेंद्र शर्मा ने कहा की अल्प पेंशन में  गुजारा मुश्किल है.  सरकार हमको गरीबी रेखा में भी नहीं मानती बैठक में बड़ी संख्या में पेंशनर निगम मंडल के वरिष्ठ कर्मचारी नेता गण उपस्थित थे.

MP में मतदाता सूची की सफाई: 22 साल बाद विशेष गहन पुनरीक्षण, 42.74 लाख नाम हटाए गए

भोपाल  मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए 22 साल बाद हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण में मंगलवार को सभी 71,930 मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन किया गया। अलग-अलग श्रेणियों में 42,74,160 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इनमें अधिकतर शहरी क्षेत्रों के हैं। इनमें 22,78,393 वे मतदाता सर्वाधिक शामिल है, जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं। अब प्रदेश में 23 दिसंबर 2025 की स्थिति में 5,31,31,983 मतदाता रह गए हैं। इनमें 8,65,832 वे मतदाता भी शामिल हैं, जिन्होंने गणना पत्रक अधूरे जमा किए हैं। उन्हें पत्रक में सुधार का मौका दिया गया है।  राज्य में कुल 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 निर्वाचकों में से 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 मतदाताओं ने अपने गणना प्रपत्र जमा किए हैं। इसमें 8 लाख 65 हजार ‘नो-मैपिंग’ वाले मतदाता भी शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को पांच श्रेणियों (कैटेगरी) में विभाजित कर आंकड़े जारी किए हैं। इनमें नो-मैपिंग कैटेगरी में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर चारों महानगर शीर्ष पर हैं। इंदौर में हटाए गए 4 लाख से ज्यादा नाम इंदौर जिले की मतदाता सूची में एसआईआर के बाद मतदाता संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। पहले जिले में कुल 28 लाख 67 हजार 268 मतदाता थे। सत्यापन के बाद मतदाताओं की संख्या घटकर 24 लाख 16 हजार रह गई। 4 लाख 51 हजार 218 मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो पाया। इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने की स्थिति में है। तारीख दो बार बढ़ने से 75 हजार 467 मतदाताओं को राहत मिली है। दोबारा सत्यापन के बाद ये मतदाता सूची में बने रह सके। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, 84.26 फीसद सत्यापन पूरा हो चुका है, शेष 15.74 फीसद मतदाताओं के नाम हटना तय माना जा रहा है। गोविंदपुरा में 97 हजार और नरेला में 81 हजार वोटरों के नाम सूची से हटाए भोपाल की अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में वोटर कटने के आंकड़े असमान रहे हैं. सबसे ज्यादा असर गोविंदपुरा और नरेला विधानसभा क्षेत्र में देखा गया है. गोविंदपुरा में जहां 97 हजार से ज्यादा वोटरों के नाम सूची से हटाए गए हैं, वहीं नरेला में 81 हजार से अधिक मतदाता कम हुए हैं. इसके अलावा भोपाल मध्य, उत्तर, दक्षिण-पश्चिम, हुजूर और बैरसिया विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कटे हैं. खंडवा में 86193 मतदाताओं के नाम कटे खंडवा जिले में में एसईआर के पहले चरण का काम पूरा हो गया है। 27 अक्टूबर 2025 को यहां की चारों विधानसभाओं में 10 लाख 29 हजार 806 मतदाता थे। लेकिन, अब सर्वे के बाद 9 लाख 43 हजार 613 मतदाता शेष हैं। यानी 86 हजार 193 मतदाता कम दर्ज हुए। सबसे ज्यादा परमानेंट शिफ्टेड 50 हजार 784 मतदाता है। 18 हजार 956 मतदाता मृत पाए गए। 8 हजार 782 मतदाता डबल वोटर कार्ड वाले और 7548 मतदाताओं का कोई पता नहीं चल पाया है। खंडवा कलेक्ट्रेट में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मतदाता सूचियों के ड्रॉफ्ट पब्लिकेशन को सीडी और अंतरिम प्रकाशन की विधानसभा वार सूचियां दी गई हैं। वहीं, इंदौर ऐसा एकमात्र जिला है जो सभी पांचों कैटेगरी में शामिल है। मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया राज्य के सभी 55 जिला निर्वाचन अधिकारियों, 230 निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO), 532 सहायक ERO (AERO) तथा 65,014 मतदान केंद्रों पर तैनात बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के समन्वित प्रयासों से पूरी की गई। इस अभियान में स्वयंसेवकों और छह राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की भी सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने 1.35 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए। 42.74 लाख मतदाता नहीं मिले आयोग के अनुसार अब्सेंट, शिफ्टेड, मृत और डुप्लीकेट कैटेगरी में प्रदेश में कुल 42 लाख 74 हजार 160 मतदाता नहीं मिले। अब इनके नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इनमें कुछ मतदाता ऐसे भी हो सकते हैं जिन्होंने समय सीमा में गणना प्रपत्र जमा नहीं किया या स्वयं पंजीकरण में रुचि नहीं ली। आंकड़ों के अनुसार: 8.46 लाख मतदाता (1.47%) मृत पाए गए 31.51 लाख मतदाता (5.49%) अन्य राज्यों में पंजीकृत पाए गए या तीन बार घर जाने पर अनुपस्थित मिले 2.77 लाख मतदाता (0.48%) के नाम दो स्थानों पर दर्ज पाए गए, जिनमें से अब केवल एक स्थान पर नाम रखा जाएगा नो-मैपिंग कैटेगरी में इंदौर टॉप पर नो-मैपिंग कैटेगरी में कुल 8 लाख 65 हजार मतदाता पाए गए, जो 5.31 करोड़ गणना प्रपत्र जमा करने वाले मतदाताओं में शामिल हैं।  जिलावार स्थिति इस प्रकार है: इंदौर – 1,33,696 भोपाल – 1,16,925 जबलपुर – 69,394 ग्वालियर – 68,540 उज्जैन – लगभग 48,000 क्या है ‘नो-मैपिंग’? चुनाव आयोग द्वारा सभी मतदाताओं को गणना प्रपत्र दिए गए थे, जिसमें उन्हें 2003 की मतदाता सूची के अनुसार अपना वोटर आईडी नंबर या किसी रक्त संबंधी (ब्लड रिलेशन) रिश्तेदार का वोटर आईडी नंबर दर्ज करना था। जिन मतदाताओं की यह जानकारी मेल नहीं खा सकी, उन्हें नो-मैपिंग श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मतदाताओं को अब आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें उन्हें 7 दिनों के भीतर आयोग द्वारा मान्य 13 पहचान पत्रों में से किसी एक के माध्यम से अपनी पात्रता सिद्ध करनी होगी। ऐसा न करने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। दो जगह नाम वाले मतदाता: बुरहानपुर सबसे आगे डुप्लीकेट वोटर आईडी मामलों में: बुरहानपुर – 23,544 (पहला स्थान) इंदौर – 22,808 (दूसरा) धार – 14,198 (तीसरा) सबसे कम डुप्लीकेट मतदाता: उमरिया – 968 आगर मालवा – 985 नीमच – 1,036 भोपाल – 14,171 मृत मतदाताओं में जबलपुर टॉप पर मृत पाए गए मतदाताओं की संख्या में: जबलपुर – 51,357 (पहला स्थान) इंदौर – 43,743 (दूसरा) सागर – 36,466  (तीसरा) सबसे कम मृत मतदाता: पांढुर्ना – 4,981 हरदा – 5,303 निवाड़ी – 5,539 अब्सेंट मतदाता में इंदौर टॉप पर – बता दें अब्सेंट मतदाता यानी जिनके पते पर तीन बार जाने के बावजूद वह नहीं मिले।  अब्सेंट पाए गये मतदाताओं की संख्या में: इंदौर- 1, 75, 425 (पहला स्थान) भोपाल-1,01,503  (दूसरा) जबलपुर- 66,678 (तीसरा) सबसे कम अब्सेंट मतदाता:  अलीराजपुर- 672 पाढूंर्ना- 1372 आगर मालवा- 1734  शिफ्टेड मतदाता में भोपाल … Read more

सुशासन दिवस पर ग्वालियर में बड़ी सौगात, अमित शाह करेंगे अटल म्यूजियम का उद्घाटन

ग्वालियर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 25 दिंसबर को ग्वालियर के दौरे पर हैं। इस दिन गृह मंत्री महाराज बाड़ा स्थित गोरखी स्कूल में तीन साल पहले बनकर तैयार अटल म्यूजियम का शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री इस म्यूजियम को देखने के लिए पहुंच सकते हैं, क्योंकि उनका अटलजी के पैतृक निवास जाने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। अटल म्यूजियम के साथ ही शासकीय प्रेस बिल्डिंग में तैयार किए गए औद्योगिक म्यूजियम का भी लोकार्पण होने की संभावना है, क्योंकि ये म्यूजियम भी बनकर तैयार है और इसके संचालन-संधारण की एजेंसी भी फाइनल कर ली गई है। स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन के माध्यम से लोकार्पण वाले प्रोजेक्टों में दोनों म्यूजियम का प्रस्ताव भेजा गया था। गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारा लगभग साढ़े नौ करोड़ रुपये में अटल म्यूजियम को तैयार कराया गया था। वर्ष 2022 में ये म्यूजियम बनकर तैयार हो गया था, लेकिन अभी तक इसका विधिवत उद्घाटन नहीं हुआ है। अटलजी की यादों को समर्पित इस म्यूजियम में उनसे जुड़ी कई वस्तुएं रखी हुई हैं। म्यूजियम में अटलजी के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती गैलरियों में फोटो गैलरी, काव्य गैलरी, साइंस गैलरी, डार्क रूम गैलरी सहित विभिन्न गैलरियों का समावेश किया गया है। इनके माध्यम से अटल जी जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। वहीं साइंस गैलरी के माध्यम से जहां अटलजी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान भारत के तकनीक और विज्ञान में सफलता की कहानी को डायरोमा माडल इत्यादि द्वारा प्रदर्शित किया गया है, तो वहीं काव्य गैलरी में अटल जी द्वारा लिखी गई विभिन्न कविताओं का सृजन किया गया है। इन गैलरियों में एक डार्क रूम भी तैयार किया गया है, जिसमें अटल जी के विभिन्न छायाचित्रों को स्पेशल लाइटिंग इफेक्ट से प्रदर्शित किया गया है।

निवेश से रोजगार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हो रहा प्रदेश का औद्योगिक विकास

अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में दिखेगी प्रदेश के आर्थिक विकास की समग्र तस्वीर निवेश से रोजगार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हो रहा प्रदेश का औद्योगिक विकास केन्द्रीय गृह मंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में होंगे शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। इसी उद्देश्य से 25 दिसंबर को ग्वालियर के मेला ग्राउंड में “अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट – निवेश से रोजगार” का आयोजन किया जाएगा। यह ग्रोथ समिट प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश प्रोत्साहन और रोजगार आधारित विकास की समग्र तस्वीर को प्रदर्शित करने वाला सबसे प्रभावी मंच साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन के अनुरूप इस समिट में औद्योगिक निवेश के साथ उत्पादन और रोजगार के सृजन पर भी फोकस किया जायेगा। कार्यक्रम में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह उपस्थित रहेंगे। उनकी सहभागिता यह संदेश देगी कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक विकास मॉडल केंद्र की प्राथमिकताओं के अनुरूप है और प्रदेश में निवेश सुरक्षित, पारदर्शी और लाभकारी तरीके से लागू किया जाएगा। निवेश को जमीन पर उतारने का मंच ग्रोथ समिट के दौरान 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर आधारित भूमि आवंटन और अनुमोदन संबंधी निर्णय लिये जायेंगे। इसके साथ ही 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा। नए औद्योगिक क्षेत्र, क्लस्टर और प्लग-एंड-प्ले इकाइयों के शुभारंभ से प्रदेश में उत्पादन और उद्योग गतिविधियों को गति मिलेगी। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी व्यापक रूप से विकसित होंगे और युवाओं के लिए नई संभावनाएँ उत्पन्न होंगी। कार्यक्रम में निवेशकों को सिंगल-क्लिक प्रणाली के माध्यम से प्रोत्साहन सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली से निवेशक परियोजनाएँ तेजी से शुरू कर पाएंगे और औद्योगिक इकाइयों को समय पर समर्थन मिलेगा। रोजगार और युवाओं का सशक्तिकरण ग्रोथ समिट का उद्देश्य केवल निवेश नहीं, बल्कि रोजगार सृजन को भी प्राथमिकता देना है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में नए उद्योगों के साथ-साथ रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जाएगा। यह पहल यह संदेश देगी कि मध्यप्रदेश में उद्योग और रोजगार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। रोजगार पाने वाले युवाओं को मंच से प्रोत्साहन देने से उनके आत्मविश्वास और उत्पादनशीलता में वृद्धि होगी। एमएसएमई, कौशल विकास और स्टार्टअप पर विशेष ध्यान समिट में एमएसएमई, स्टार्टअप्स, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, ड्रोन, डिफेंस और फार्मा जैसे क्षेत्रीय और निर्यात आधारित उद्योगों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार सृजन पर केंद्रित सत्र यह दिखाएंगे कि प्रदेश सरकार कुशल मानव संसाधन तैयार करने और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप रोजगार अवसर प्रदान करने पर समान रूप से ध्यान दे रही है। औद्योगिक प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की ताकत कार्यक्रम स्थल पर औद्योगिक परियोजनाओं, अधोसंरचना और निवेश से जुड़े विभागीय कार्यों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी में प्रदेश के औद्योगिक अवसर, निवेश के प्रस्ताव, अधोसंरचना विकास और औद्योगिक नीतियों की जानकारी निवेशकों और आमजन को दी जाएगी। इससे निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए भरोसा मिलेगा और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी। सतत औद्योगिक और आर्थिक विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यह ग्रोथ समिट यह सुनिश्चित करेगा कि निवेश केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहे। निवेश को उद्योग स्थापना, उत्पादन, रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण में बदला जाएगा। यह समिट मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति की दिशा को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करेगा। प्रदेश में औद्योगिक निवेश, रोजगार और कौशल विकास एक साथ बढ़ें। समिट के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए सुविधाजनक माहौल है, उद्योगों को गति मिलेगी और युवाओं को स्थायी रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे। समग्र प्रभाव और राष्ट्रीय महत्व ग्रोथ समिट न केवल प्रदेश के निवेश और उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं और नीति स्थिरता को प्रदर्शित करेगा। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की सहभागिता इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी आकर्षक बनाएगी। अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट – निवेश से रोजगार प्रदेश की औद्योगिक नीति और रोजगार सृजन दृष्टि का सबसे बड़ा और प्रभावी मंच साबित होगा। यह आयोजन निवेशकों को भरोसा, उद्योगों को गति और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करके मध्यप्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त, रोजगारोन्मुख और निवेश-फ्रेण्डली राज्य के रूप में स्थापित करेगा।  

देश को समर्पित हिमालयी व्यक्तित्व : श्री अटल बिहारी वाजपेयी

देश को समर्पित हिमालयी व्यक्तित्व : श्री अटल बिहारी वाजपेयी    – डॉ. नरेश बंसल, राज्यसभा सांसद और  राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष ,भारतीय जनता पार्टी  हार नहीं मानूंगा,रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर ,लिखता–मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ। — अटल बिहारी वाजपेयी भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी महज एक स्मृति-उत्सव नहीं है, यह राष्ट्रीय आत्मनिरीक्षण का क्षण है।आज जब देश अपने लोकप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म शताब्दी वर्ष मना रहा है, १४० करोड़ भारतीय एक ऐसे नेतृत्व की परंपरा पर गौरान्वित महसूस कर रहे हैं जिसने नैतिक साहस को लोकतांत्रिक संयम, दृढ़ता को सहानुभूति और दूरदर्शिता को विनम्रता के साथ जोड़ा। अटल जी उन दुर्लभ राजनेताओं में से एक थे जिनके लिए राजनीति जनसेवा का एक पवित्र साधन थी। उनका नेतृत्व दिखावटी नहीं था; बल्कि प्रेरक था। उनका मानना था कि अधिकार विश्वसनीयता से आना चाहिए और शक्ति जवाबदेही पर आधारित होनी चाहिए। एक प्रतिबद्ध विचारक होते हुए भी, उन्होंने कभी भी विचारधारा को संवाद पर हावी नहीं होने दिया। उनके लिए संसदीय लोकतंत्र एक प्रक्रियात्मक दायित्व नहीं बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी थी। प्रधानमंत्री के रूप में, अटल जी ने यह सिद्ध किया कि सशक्त नेतृत्व और मानवीय शासन एक साथ चल सकते हैं। उनके कार्यकाल में भारत ने लोकतांत्रिक मूल्यों में दृढ़ रहते हुए वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके नेतृत्व ने विश्व को दिखाया कि भारत बिना जल्दबाजी किए दृढ़ संकल्पित हो सकता है, और बिना आक्रामक हुए मुखर हो सकता है। उनके विचार में, शक्ति का अर्थ तभी सार्थक होता है जब वह शांति और स्थिरता के लिए अपनी सार्थकता प्रतिस्थापित करता हो। पोखरण परमाणु परीक्षण रणनीतिक दृढ़ संकल्प का प्रतीक था , जबकि शांति के लिए उनके प्रयासों ने उनकी कुशल राजनेता की भूमिका को अभिभूत किया। मानवीय मूल्यों के सशक्त प्रहरी , अटल जी  मानना था कि भारत को सशक्त होने के साथ-साथ उत्तरदायी भी होना आवश्यक है ।   विकास के प्रति उनका दृष्टिकोण भी उतना ही महत्वपूर्ण था। अटल जी समझते थे कि राष्ट्रीय प्रगति तभी सार्थक होती है जब वह समावेशी हो। अवसंरचना, ग्रामीण संपर्क और दूरसंचार के क्षेत्र में शुरू की गई महत्वपूर्ण पहलों का उद्देश्य केवल संपत्ति अर्जन नहीं था, बल्कि लोगों, बाजारों और अवसरों को आपस में जोड़ना था। सड़कों, संपर्क और प्रौद्योगिकी पर उनकी प्राथमिकताओं  ने दूरस्थ क्षेत्रों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में एकीकृत करने में मदद की और भारत के विकास को एक नया आधार दिया।   नीति और शासन के अलावा, अटल जी का सबसे बड़ा योगदान भारत को एक सभ्यतागत लोकतंत्र के रूप में समझना था। उनका मानना था कि भारत की शक्ति उसकी विविधता, वाद-विवाद करने की क्षमता और एकता खोए बिना मतभेदों को आत्मसात करने की क्षमता में निहित है। उनका राष्ट्रवाद आत्मविश्वास से भरा था, लेकिन कभी भी बहिष्कारवादी नहीं था; दृढ़ होते हुए भी सहानुभूतिपूर्ण था। उत्तराखंड के लिए अटल जी की विरासत बेहद व्यक्तिगत और परिवर्तनकारी है। 9 नवंबर, 2000 को उत्तराखंड (तब उत्तरांचल) का शांतिपूर्ण गठन लोगों की लंबे समय से पोषित आकांक्षा की पूर्ति थी। यह महज प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था; यह राजनीतिक संवेदनशीलता और राष्ट्रीय दूरदर्शिता का महायज्ञ था क्यूँकि अटल जी समझते थे कि भूगोल शासन को आकार देता है, और जनमानस की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए आवश्यक है जन-जन के दिल की धड़कनों से जुड़ना । उनकी प्रतिबद्धता राज्य बनने के साथ ही समाप्त नहीं हुई ;उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि नवगठित राज्य को विशेष दर्जा और आर्थिक विकास को गति देने के लिए एक समर्पित औद्योगिक पैकेज मिले। उत्तराखंड के आध्यात्मिक और पारिस्थितिक महत्व को पहचानते हुए, उनकी सरकार ने उत्तरकाशी जैसे क्षेत्रों में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष आर्थिक सहायता भी प्रदान की। ये निर्णय विकास के प्रति उनकी समग्र समझ को दर्शाते हैं – एक ऐसी समझ जो पारिस्थितिकी, संस्कृति और आजीविका का सम्मान करती है। उत्तराखंड के साथ अटल जी का रिश्ता नीतिगत संबंधों से कहीं बढ़कर था। उन्हें यहाँ के पहाड़ों, नदियों और आध्यात्मिक ऊर्जा से गहरा लगाव था। 1984 में चुनाव में हार के बाद उन्होंने हरिद्वार और गंगोत्री की पहाड़ियों में शरण ली और वहाँ की शांति से शक्ति प्राप्त की। बहुत कम नेता किसी क्षेत्र की आत्मा से इतनी गहराई से जुड़ पाते हैं। आज जब हम कहते हैं, "अटल जी ने बनाया, मोदी जी  संवारेंगे ," तो यह तुलना का नारा नहीं, बल्कि निरंतरता की अनुभूति  है। अटल जी द्वारा रखी गई कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा और राष्ट्रीय एकता की नींव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूत और विस्तारित किया जा रहा है। दूरदृष्टि की यह निरंतरता समावेशी और महत्वाकांक्षी विकास के प्रति भारतीय जनता पार्टी की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।  जन्म शताब्दी वर्ष, विशेष रूप से युवा भारतीयों के लिए, राजनीति को एक महान कर्तव्य के रूप में पुनः स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। अटल जी का जीवन यह सिखाता है कि नेतृत्व संख्या के बारे में नहीं, बल्कि दूरदर्शिता के बारे में है; टकराव के बारे में नहीं, बल्कि आम सहमति के बारे में है; व्यक्तिगत स्वार्थ के  बारे में नहीं, बल्कि उद्देश्यगत ईमानदारी के बारे में है।   सार्वजनिक जीवन में रहने वालों के लिए, उनकी यात्रा इस बात की याद दिलाती है कि सत्ता को हमेशा जवाबदेही के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। राष्ट्र के लिए, यह इस विश्वास को मजबूत करता है कि प्रगति और मूल्य प्रतिस्पर्धी विचार नहीं हैं, बल्कि पूरक हैं।   अटल बिहारी वाजपेयी जी ने एक बार लिखा था कि अंधेरे से डरना नहीं चाहिए क्योंकि यह केवल अपने भीतर ही जीवित रहता है। जैसे-जैसे भारत आत्मविश्वास और आकांक्षा के साथ आगे बढ़ रहा है, उनके शब्द और कार्य आगे के मार्ग को प्रशस्त करते रहेंगे।   2025 में अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मशताब्दी वर्ष है । आइये! उस  दूरदर्शी नेता, कवि, वक्ता और रणनीतिकार को नमन करें जिन्होंने भारत को एक सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने  के लिए इतिहासिक और साहसिक निर्णय लिए और “भारत के सर्वश्रेष्ठ संसद सदस्य “ का मान अर्जित किया । अटल जी का व्यक्तित्व आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता , मजबूत होते हुए भी करुणामय होने की … Read more