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रामविलास वेदांती का निधन, राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार ने छोड़ी दुनिया, शोक की लहर

रीवा   राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार और अयोध्या से पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती का निधन हो गया है. उन्होंने मध्य प्रदेश के रीवा में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर मिलते ही अयोध्या सहित पूरे संत समाज और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. जानकारी के अनुसार डॉ. रामविलास दास वेदांती मध्य प्रदेश के रीवा जनपद में प्रवास पर थे. इसी दौरान बुधवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया. चिकित्सकों द्वारा लगातार उपचार के प्रयास किए गए, लेकिन इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. डॉ. वेदांती राम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी चेहरों में गिने जाते थे और उन्होंने इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी. अयोध्या से सांसद रहते हुए उन्होंने संसद से लेकर सड़कों तक राम मंदिर निर्माण की आवाज को मजबूती से उठाया. उनके निधन को संत समाज और राम भक्तों के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, मध्य प्रदेश से उनका पार्थिव शरीर लेकर उनके उत्तराधिकारी और सहयोगी थोड़ी देर में अयोध्या ले जाया जाएगा. अयोध्या पहुंचने के बाद उनके अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी. उनके निधन पर कई संतों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. रामविलास वेदांती महाराज के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा कि डॉ. रामविलास वेदांती का गोलोकगमन आध्यात्मिक जगत और सनातन संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जाना एक युग का अवसान है. मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि धर्म, समाज और राष्ट्र की सेवा को समर्पित संत वेदांती का त्यागमय जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा. योगी आदित्यनाथ ने प्रभु श्री राम से प्रार्थना करते हुए कहा कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्राप्त हो और शोक संतप्त शिष्यों एवं अनुयायियों को इस अथाह दुःख को सहन करने की शक्ति मिले.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सख्ती, सरपंच पति प्रथा पर 24 राज्यों के अधिकारियों को समन, महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा

भोपाल  सरपंच पति प्रथा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त कदम उठाया है। देश के 24 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेशों के प्रमुख अधिकारियों को समन जारी किया है। महिला जन प्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का यह बड़ा कदम है। प्रमुख सचिवों को भी समन जारी इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के पंचायत एवं नगरीय निकाय विभाग के प्रमुख सचिवों को भी समन जारी हुआ है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने यह जानकारी दी। आयोग ने सभी प्रदेशों के पंचायत और शहरी निकाय विभाग से इस विषय पर कार्यवाही रिपोर्ट मांगी थी। रिपार्ट नहीं मिलने पर मध्य प्रदेश को भी समन शहरी निकाय और पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिवों को 30 दिसंबर को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए है। 22 दिसंबर 2025 तक रिपोर्ट भेजने पर व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मिल सकती है। रिपोर्ट नहीं देने और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होने पर आयोग ने कठोर कार्रवाई करने की बात कही है। यह प्रथा समानता, गरिमा और जीवन के अधिकार का उल्लंघन दरअसल प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अपनी जांच में पाया कि यह प्रथा समानता, गरिमा और जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। यह 73वें एवं 74वें संविधान संशोधनों की भावना के विपरीत है। जिनका उद्देश्य महिलाओं को वास्तविक सशक्तिकरण प्रदान करना है। ऐसे कृत्य भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत आपराधिक दायित्व को भी जन्म दे सकते हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों और महिलाओं की गरिमा के खिलाफ राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने पंचायत राज संस्थानों और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षित पदों पर प्रधान पति कार्यप्रणाली को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा की ओर से दायर शिकायत पर कदम उठाया है। सुशील वर्मा ने अपनी शिकायत में दावा किया था कि देश भर में कई स्थानों पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति अथवा अन्य पुरुष रिश्तेदार वास्तविक सत्ता का प्रयोग कर रहे हैं, जो कि लोकतांत्रिक मूल्यों और महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है। प्रॉक्सी शासन लोकतंत्र पर सीधा प्रहार आयोग ने दो टूक कहा है कि महिला आरक्षण का उद्देश्य केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि वास्तविक नेतृत्व और निर्णयकारी भूमिका सुनिश्चित करना है, और किसी भी प्रकार का प्रॉक्सी शासन लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है। यह आदेश महिला सशक्तिकरण, संवैधानिक शासन और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की गरिमा की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। मप्र में उठे थे मुद्दे ग्वालियर में सितंबर में मामला आया था। कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान की बैठक में पार्षद पति पहुंच गए थे। शहर की समस्याओं पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक में पार्षद पति पहुंच गए थे। चार महिला पार्षदों की जगह उनके पति पहुंच गए थे। कलेक्टर ने पार्षद पतियों को कुर्सी से उठाकर पीछे बैठा दिया था। कलेक्टर ने कहा था- अब महिलाएं सबल हैं, पत्नियों को ही काम करने दीजिए। अक्टूबर में गुना नगर पालिका ने निकाला आदेश सीएमओ मंजूषा खत्री ने आदेश निकाला। आदेश में कहा कि- शासकीय कार्यालयों और बैठकों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ उनके पति या पत्नियों की उपस्थिति पूर्णतः प्रतिबंधित है। नगरपालिका कार्यालय में आने पर भी पार्षद पतियों और उनके रिश्तेदारों पर रोक लगाई गई। अप्रैल 2025 रतलाम जिला पंचायत में मुददा उठा था। साधारण सभा की बैठक में विवाद हुआ था। जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशू निनामा और सदस्य डीपी धाकड़ ने महिला सदस्यों के साथ बैठक में उनके पति के आने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। सभा कक्ष में लंबी बहस हुई थी। विवाद के बीच बैठक नहीं हो पाई थी। 

एमपी में 100 ई-बसें चलेंगी, केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय का बड़ा फैसला, डीजल के बजाय पर्यावरण-friendly यात्रा

ग्वालियर केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा ग्वालियर शहर में पीएम ई-बस योजना के तहत 100 बसें चलाई जाएंगी। प्रथम चरण में जल्द ही 60 ई बस (E-Buses) शहर में आने की उम्मीद है, लेकिन अफसर अब तक सुस्त रवैया अपनाए हुए है। योजना के तहत बस संचालन और कलेक्शन सिस्टम समझने के लिए अफसरों को नासिक, दिल्ली, भोपाल और इंदौर का निरीक्षण करना था, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी कोई दौरा नहीं किया। हालांकि कलेक्शन एजेंसी राज्य सरकार व केंद्र सरकार से तय होना है अथवा नगर निगम ग्वालियर से इसको लेकर अफसर कन्फ्यूज थे, ऐसे में अफसर भी निरीक्षण में रुचि नहीं दिखा रहे थे, लेकिन अब क्लियर हो गया है कि बसों के कलेक्शन के लिए एजेंसी राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन द्वारा ही ग्वालियर सहित सभी नगर निगम में तय की जाएगी। इस तरफ वहन होगा खर्च बसों के संचालन से नगर निगम को उम्मीद है कि बस संचालन से 36.14 पैसे प्रति किलोमीटर कलेक्शन मिलेगा, जबकि 22 रुपए केंद्र सरकार की ओर से मिलेंगे। वहीं 58.14 पैसे प्रति किलोमीटर का भुगतान पीएम ई-बस संचालक को किया जाना है। लेकिन इंदौर भोपाल में अभी 22 व 23 रुपए प्रति किलोमीटर कलेक्शन ही मिल रहा है, ऐसे में निगम को बाकी के 14 से 15 रुपए खुद ही वहन करने होंगे और निगम में इसका अतिरिक्त खर्चा बढ़ेगा। डिपो का निर्माण शुरू पीएम ई बस संचालन के लिए रमौआ में डिपो निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। निगमायुक्त संघप्रिय ने बताया कि बसों के कलेक्शन के लिए एजेंसी अब राज्य सरकार द्वारा ही तय की जाएगी। पीएम ई बस सेवा को लेकर रमौआ पर डिपो निर्माण भी शुरू हो चुका है। शहरी कार्य मंत्रालय ने 100 बसों को दी मंजूरी केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय (Union Urban Affairs Ministry) ने प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में डीजल ईंधन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए प्रदेश के 8 नगर निगम में 972 पीएम ई बस सेवा को मंजूरी दी है। यह बसें शीघ्र संचालित हो इसके लिए नगरीय निकायों द्वारा बस डिपो और चार्जिंग से जुड़े सभी अधोसंरचना कार्य तेजी से करने के लिए गया है। इसमें ग्वालियर के लिए 100 ई-बसों को मंजूरी दी है। इसमें प्रथम चरण में 60 बसें नौ मीटर और दूसरे चरण में 40 बसें सात मीटर की आएंगी। बसों के लिए केन्द्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा 40 प्रतिशत राशि प्रदान करेगी। बसें एक बार में चार्ज होने पर 180 किलोमीटर तक आ-जा सकती है। 

इंदौर में 1450 बेड वाला अस्पताल, मुख्यमंत्री ने किया भूमिपूजन, 773 करोड़ से बनेगा एमवाय अस्पताल का नया भवन

इंदौर  1952 से लेकर अब तक सेंट्रल इंडिया का सबसे बड़ा इंदौर का महाराजा यशवंत राव हॉस्पिटल अब नए स्वरूप में 1450 बेड के साथ अपग्रेड होने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने  773.007 करोड़ की लागत से बनने जा रहे अस्पताल के नवीन भवन का भूमि पूजन किया. इंदौर का महाराजा यशवंत राव हॉस्पिटल सात मंजिला इमारत है, जिसे अब नए सिरे से बनाया जा रहा है. करीब 70 साल पुराना यह अस्पताल महाराजा यशवंत राव होलकर द्वारा बनवाया गया था. जो सेंट्रल इंडिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य केंद्र रहा है. अब यहां अस्पताल की नई बिल्डिंग बनने जा रही है. प्रदेश में स्वास्थ सुविधाओं में वृद्धि इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, ''प्रदेश की स्वास्थ सुविधाओं में पिछले 11 वर्षों से लगातार वृद्धि हो रही है. मध्य प्रदेश में नए-नए मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज कॉलेज खोले रहे हैं. प्रदेश सरकार नागरिकों की सुविधाओं में वृद्धि के लिए दिन-रात प्रयास कर रही है. पिछले वर्षों में प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार आया है.'' कार्यक्रम में प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल भी मौजूद थे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि, ''जिस तरह इंदौर शहर हमारे प्रदेश का गौरव है, उसी तरह इंदौर के एमवाय अस्पताल की भी मध्य प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान है.'' उन्होंने कहा कि, ''इंदौर में 1450 बिस्तरीय अस्पताल बन जाने से न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि हमारे पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती जिलों के मरीजों को भी यहां बेहतर स्वास्थ सुविधाएं उपलब्ध होगी. इंदौर के एमवाय अस्पताल में बोनमेरो ट्रांसप्लांट और किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है.'' उन्होंने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को नए अस्पताल भवन के निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए. ऐसा होगा नए अस्पताल का सेट अप मध्य प्रदेश भवन विकास निगम द्वारा निर्मित किए जाने वाले नए अस्पताल भवन में मेडिसिन वार्ड में कुल 330 बिस्तर, सर्जरी विभाग में 330 बिस्तर, ऑर्थोपेडिक्स विभाग में 180 बिस्तर, शिशु रोग सर्जरी विभाग में 60, शिशु रोग वार्ड में 100, न्यूरो सर्जरी में 60, नाक कान गला विभाग में कुल 30, दंत रोग विभाग में 20, त्वचा रोग विभाग में कुल 20, मातृ एवं शिशु वार्ड में 100, नेत्र वार्ड में 80 तथा इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए 180 बिस्तरीय सुविधा उपलब्ध रहेगी. नए अस्पताल भवन में कुल 1450 बिस्तरीय वार्डों के निर्माण पर कुल 528 करोड़ रुपए व्यय होंगे. इसके अलावा 550 बिस्तरीय नर्सिंग हॉस्टल के निर्माण पर 21.37 करोड रुपए, 250 सीटर मिनी ऑडिटोरियम के निर्माण पर 1.60 करोड. रुपए व्यय किए जाएंगे. इसके अलावा सार्वजनिक पार्किंग के निर्माण पर 31.50 करोड़ रुपए, विद्युतीकरण, बाउंड्रीवॉल एवं सोलर पैनल स्थापना पर 25.53 करोड रुपए तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, प्लंबिंग एवं वाटर सप्लाई संबंधी कार्यों कार्य पर लगभग 10 करोड़ रुपए लागत आएगी.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सर सह कार्यवाह श्री मुकुंदा जी ने किया अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय भोपाल का भ्रमण

भोपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय  सर सह कार्यवाह मुकुंदा जी ने अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय भोपाल का भ्रमण किया एवं अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के  राज्य नेतृत्व के साथ शैक्षणिक एवं सामाजिक विषयों पर चर्चा की उनके साथ इस सार्थक चर्चा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक श्रीमान विमल जी गुप्ता एवं मध्यभारत के प्रांत कार्यवाह हेमंत जी सेठिया की भी उपस्थिति  रही  अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की और से इस चर्चा में  कुलपति गौतम पांडे स्टेट हेड अभिषेक राठौर एवं राज्य नेतृत्व्य के सभी सदस्य उपस्थित थे.

संगीतधानी ग्वालियर में 101वें तानसेन संगीत समारोह का शुभारंभ, CM डॉ. मोहन यादव देंगे शुरुआत

ग्वालियर संगीतधानी ग्वालियर की फिजाएं एक बार फिर सुरों की बारिश से सराबोर होने जा रही हैं। विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत का सबसे बड़ा आयोजन 101वां तानसेन संगीत समारोह आज से शुरू हो रहा है। हजीरा स्थित तानसेन समाधि स्थल पर आयोजित इस समारोह का शुभारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इस बार मंच ग्वालियर के प्रसिद्ध चतुर्भुज मंदिर (शून्य मंदिर) की तर्ज पर तैयार किया गया है, जो आयोजन को और भी भव्य बना रहा है।  15 से 19 दिसंबर तक चलने वाले इस पांच दिवसीय समारोह में देश-विदेश के विश्वविख्यात शास्त्रीय संगीत कलाकार सुर सम्राट मियां तानसेन को स्वरांजलि अर्पित करेंगे। समारोह के पहले दिन शाम 6 बजे से राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण और राजा मानसिंह तोमर सम्मान वितरण समारोह होगा। इसमें मूर्धन्य संगीतज्ञ पंडित राजा काले (2024) और पंडित तरुण भट्टाचार्य (2025) को तानसेन अलंकरण से विभूषित किया जाएगा। वहीं साधना परमार्थिक संस्थान समिति मंडलेश्वर और रागायन संगीत समिति ग्वालियर को राजा मानसिंह तोमर सम्मान प्रदान किया जाएगा।

महिला कलेक्टर के फैसले से हड़कंप, 19 साल की नौकरी में एक गलती पर सहायक ग्रेड-3 को चपरासी बना दिया

 बड़वानी मध्यप्रदेश में अब “चल जाएगा” वाली बाबूगिरी पर सीधी चोट हो रही है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी पैसे से खेल किया तो कुर्सी नहीं बचेगी. पहले बुरहानपुर में और अब बड़वानी में महिला कलेक्टर के एक फैसले ने सरकारी दफ्तरों में बैठे कर्मचारियों की नींद उड़ा दी है. बड़वानी जिले में कलेक्टर जयति सिंह ने वित्तीय अनियमितता के गंभीर मामले में बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए सहायक ग्रेड-3 (क्लर्क) को उसके पद से हटाकर सीधे भृत्य यानी चपरासी बना दिया. यह कार्रवाई तहसील न्यायालय बड़वानी में पदस्थ रहे कर्मचारी प्रकाश डुडवे पर की गई है. शासकीय पैसे में हाथ डाला, मामला हुआ भारी जांच में सामने आया कि प्रकाश डुडवे ने शासकीय वसूली की राशि 3 लाख 2 हजार 266 रुपये सरकारी खजाने में जमा नहीं की. यह साफ तौर पर शासकीय धन का दुरुपयोग माना गया. कलेक्टर ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का गंभीर उल्लंघन माना. जवाब नहीं दे पाए, जांच में फंसे मामला सामने आने के बाद 16 अप्रैल 2024 को कर्मचारी को निलंबित कर स्पष्टीकरण मांगा गया. जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो 14 जून 2024 को अपर कलेक्टर को विभागीय जांच अधिकारी नियुक्त किया गया. जांच के दौरान कर्मचारी ने खुद स्वीकार किया कि उससे वित्तीय अनियमितता हुई है. उसने 5 जून 2024 को 1 लाख 43 हजार रुपये ऑनलाइन चालान के जरिए जमा भी किए, लेकिन तब तक मामला पूरी तरह पकड़ में आ चुका था. सुनवाई में कबूलनामा, फिर गिरी गाज 4 मार्च 2025 को हुई अंतिम सुनवाई में कर्मचारी ने विभागीय जांच में लगे सभी आरोप स्वीकार कर लिए. कलेक्टर ने 19 साल से अधिक की सेवा को ध्यान में रखते हुए सहानुभूति दिखाई, लेकिन संदेश भी साफ दिया कि गलती की सजा मिलेगी. इसके बाद आदेश जारी हुआ कि सहायक ग्रेड-3 को पदावनत कर तहसील कार्यालय पानसेमल में भृत्य (चपरासी) के पद पर पदस्थ किया जाए. पहले भी दिख चुकी है सख्ती इससे पहले जनवरी 2025 में बुरहानपुर की तत्कालीन कलेक्टर भव्या मित्तल ने भी रिश्वतखोरी के मामले में सहायक ग्रेड-3 को चपरासी बना दिया था. अब वही सख्ती बड़वानी में भी देखने को मिली है. इस कार्रवाई के बाद साफ हो गया है कि अब फाइलों में खेल नहीं चलेगा, वरना बाबू से चपरासी बनने में देर नहीं लगेगी.

महाकाल मंदिर में 20 साल बाद बदलाव, गर्भगृह में लगे 25 किलो चांदी के नए द्वार, उकेरी गईं आकर्षक आकृतियां

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में बड़ा बदलाव किया गया है। यह बदलाव रविवार के दिन किया गया है। गर्भगृह में  25 किलो चांदी का द्वार लगाया गया है।  इसे विधि विधान से संध्या आरती करने के समय स्थापित किया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी भूषण व्यास के अनुसार, लगभग 20 वर्षों के बाद गर्भगृह के द्वार को बदला गया है। इसके द्वार का निर्माण जयपुर के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार किया गया है। गर्भगृह का आंतरिक और बाहरी परिसर पत्थर का बना हुआ है। इसके कारण नए दरवाजे की माप के आधार पर तैयारी की गई। कोलकाता की भक्त ने बनवाया महाकाल के गर्भगृह के बदले द्वार को कोलकाता की निवासी भक्त निभा प्रकाश ने बनवाया है। उन्होंने लकड़ी पर चांदी की मढ़ाई कराकर इसे बनवाया है। उन्होंने सभामंडप में नए द्वार का विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद द्वार को गर्भगृह के बाहर स्थापित किया गया। चांदी की आज के बाजार भाव के हिसाब से बात करें दो द्वार बनाने की अनुमानित कीमत 50 लाख से अधिक बताई जा रही है। द्वार में उकेरी गई हैंये आकृतियां मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि द्वार के शीर्ष पर दो नंदी की आकृतियां है। इसके साथ ही उनके नीचे ॐ, त्रिशूल और सबसे निचले हिस्से में कलश की आकृति उकेरी गई है। आपको बता दें कि महाकाल के परम भक्त मंदिर में आकर ऐसे दान करते रहते हैं। करीब 4 महीने पहले ही बाबा महाकाल को सवा किलो चांदी का मुकुट दान किया गया था। यह दान यूपी के गाजियाबाद के भक्त सुनील कुमार यादव ने किया था।  

मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने अमित शाह से की मुलाकात, राज्य की विकास योजनाओं पर चर्चा

भोपाल  प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मुख्यमंत्री पद पर दो साल का कार्यकाल पूरा होने के एक दिन बाद, रविवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से आधिकारिक मुलाकात की। दोनों नेताओं की बैठक को अहम माना जा रहा है।  बताया जा रहा है कि सीएम यादव ने बैठक में अमित शाह को प्रदेश की विकास योजनाओं, कानून‑व्यवस्था और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रगति के बारे में जानकारी दी। इस मुलाकात का समय विशेष महत्व रखता है क्योंकि मुख्यमंत्री यादव ने हाल ही में अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए नक्सलवाद को राज्य से पूरी तरह समाप्त करने जैसी बड़ी सफलता को अपनी अवधि की प्रमुख उपलब्धि बताया।  मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार मुख्यमंत्री ने हाल ही में सभी मंत्रियों की समीक्षा की है। मीडिया के सामने कुछ नहीं कहा गया लेकिन सरकारी सूत्र कहते हैं कि, श्री अमित शाह के निर्देश पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सभी मंत्रियों की फाइल बनाई है। इसमें सबके पॉजिटिव और नेगेटिव है। विजय शाह जैसे मंत्रियों के बारे में भी फैसला लेना है। और फिर सबको एडजस्ट भी करना है। वर्तमान में मुख्यमंत्री के पास 15 विभाग है। गृह मंत्रालय को फुल टाइमर मंत्री की जरूरत है। इसके अलावा निगम मंडल की जो लिस्ट तैयार हो गई है, इसकी घोषणा भी करनी है। दोनों के बीच बातचीत का यह सबसे प्रमुख मुद्दा रहा होगा।  शिवराज सिंह चौहान पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान अपने आप में एक बड़ा मुद्दा बन गए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री होने के बावजूद वह नियमित रूप से मध्य प्रदेश में एक्टिव है और अपने नेटवर्क के संपर्क में है। पिछले दिनों उन्होंने अपने समाज के सम्मेलन में "यह सरकार मैंने बनाई, मुख्यमंत्री मुझे बनना चाहिए था" जैसा कुछ बोल गए थे। हाल ही में उन्होंने, केंद्रीय नेतृत्व से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की शिकायत की है। कहा तो यह भी जा रहा है कि उन्होंने बिल्कुल लास्ट मिनट पर भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि बनूँगा तो मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनूँगा, नहीं तो कृषि मंत्री ही ठीक हूं। यही कारण है कि, चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई और नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनना पड़ा।  राज्य के विकास और केंद्र से सहयोग पर चर्चा पिछली कई मुलाकातों में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, सहकारिता, नक्सल मुक्ति जैसी उपलब्धियों की समीक्षा और केंद्र से फंडिंग/प्रोजेक्ट्स पर बात हुई है। हाल ही में मध्य प्रदेश को नक्सल-मुक्त घोषित किया गया है, जिसे सीएम ने अमित शाह और पीएम मोदी की नीतियों का श्रेय दिया है। अब इसका फायदा भी उठाना है। ज्योतिरादित्य सिंधिया दूसरे केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पिछले कुछ दिनों में काफी तेजी से एक्टिव हुए हैं। पिछले दिनों उन्होंने अपनी पॉलिटिकल टेरिटरी का ऐलान कर दिया था। इसमें लगभग 30% मध्य प्रदेश आता है। ग्वालियर में प्रभारी मंत्री के नाम पर बैठक बुलाई जाती है और फिर स्वयं बीच की कुर्सी पर बैठकर एक महाराज की तरह अधिकारियों को दिशा निर्देश देते हैं। इस समस्या का समाधान भी चाहिए।  बढ़ता हुआ विरोध और उसका समाधान पिछले दिनों स्वयं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा था, वह मार्गदर्शन के लिए अक्सर दिल्ली जाते हैं। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में मोहन सरकार का विरोध बढ़ रहा है। इस आग को भड़काने वालों में श्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के अलावा श्री शिवराज सिंह चौहान, श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ प्रचारक और भारतीय जनता पार्टी के कुछ बड़े नेताओं के नाम सामने आए हैं। मध्य प्रदेश में खुले तौर पर कहा जा रहा है कि 2028 का विधानसभा चुनाव डॉ मोहन यादव की लीडरशिप में नहीं लड़ा जाएगा।

खजुराहो: गौतम रिसॉर्ट में सब्जी से 4 की मौत, कलेक्टर के निर्देश पर होटल का खाद्य लाइसेंस निलंबित

खजुराहो  खजुराहो के गौतम होटल्स एंड रिसॉर्ट्स में भोजन कर बीमार पड़े नौ कर्मचारियों में से चार की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया है। होटल का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी वेद प्रकाश चौबे को नोटिस दिया है। पूछा है कि वीवीआइपी कार्यक्रम होने के बाद भी होटल में फूड सैंपलिंग में लापरवाही क्यों बरती गई? कलेक्टर ने 15 दिसंबर तक जवाब मांगा है। कलेक्टर के निर्देश पर बड़ा फैसला मामले में सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने बताया कि होटल में चार लोगों की मौत के बाद कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में यह फैसला लिया गया। एक टीम होटल की जांच के लिए भेजी गई है। रिपोर्ट के बाद तय होगा कि खाने में जहरीला पदार्थ था या नहीं। फिलहाल फूड पॉइजनिंग के आधार पर होटल का लाइसेंस निलंबित किया गया है। खजुराहो में थी सरकार खजुराहो में कैबिनेट मीटिंग के चलते सीएम, मंत्री और प्रदेश के शीर्ष अधिकारी भी थे। रिपोर्ट आने के बाद हकीकत सामने आ सकेगी घटना के बाद मृतकों के विसरा और केमिकल सैंपल लिए गए थे, जिनको जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही लोगों की मौत की हकीकत सामने आ सकेगी। लंबे समय से होटल के पिछले हिस्से में रहते थे यह कर्मचारी लंबे समय से होटल के पिछले हिस्से में रहते थे और होटल में हाउस कीपिंग व गार्डनिंग का काम करते थे। इलाज के दौरान ग्वालियर में 20 साल के हार्दिक ने शनिवार को दम तोड़ दिया था। इससे पहले रामस्वरूप कुशवाह, प्रागीलाल कुशवाह, गिरिजा रजक की पहले ही मौत हो गई थी।  अपर कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी वेद प्रकाश चौबे को जिले में लगातार वीवीआइपी मूवमेंट होने के बावजूद खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग की कार्रवाई के संबंध में लापरवाही पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही अपर कलेक्टर ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी से 15 दिसंबर 2025 को शाम चार बजे तक स्पष्टीकरण भी मांगा है।