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अपेक्स बैंक ने मुख्यमंत्री को सौंपा 4.27 करोड़ का लाभांश, सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में हुआ हस्तांतरण

भोपाल मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को सहकारिता विभाग की समीक्षा के उपरांत प्रदेश के सहकारिता तथा खेलकूद एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने अपेक्स बैंक के लाभांश रु. 4.27 करोड़ का चेक भेंट किया ।  इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग जैन, नीरज मंडलोई,  प्रमुख सचिव,  माननीय मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव सहकारिता डी.पी.आहूजा, आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक,  सहकारी संस्थायें मनोज पुष्प, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता के साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

भोपाल में ही पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा लुत्फ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में जल-पर्यटन का केंद्र बनेगी शिकारा सेवा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल में ही पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा लुत्फ प्रदेश के जल-पर्यटन को राष्ट्रीय पटल पर मिलेगी एक नई पहचान पर्यटकों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने का मिलेगा मौका मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया बड़े तालाब के बोट क्लब पर 20 नवीन शिकारा नाव सेवा का शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजा भोज की नगरी भोपाल में लगभग एक हजार साल पहले बने बड़े तालाब में 'शिकारा नाव' सेवा का शुभारंभ ऐतिहासिक अवसर है। इन नवीन 20 शिकारों के माध्यम से पर्यटकों को कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील का आनंद, झीलों की नगरी भोपाल में ही मिल जाएगा। शिकारों में पर्यटकों के लिए खान-पान एवं आरामदायक बैठक व्यवस्था की गई है। ये शिकारे प्रदेश के जल-पर्यटन (वॉटर टूरिज्म) को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलवाएंगे। प्रदेशवासी पर्यटन सेवा का लाभ उठाने के लिए आगे आएं। एम.पी. टूरिज्म, वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों को भी आगे बढ़ा रहा है। शिकारा सेवा का आनंद उठाते हुए पर्यटक स्वदेशी उत्पादों की खरीद भी कर पाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन्य जीवों के पुनर्वास में भी इतिहास रचा है। आज अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को बोट क्लब भोपाल पर 'शिकारा नाव' सेवा को झंडी दिखाने के बाद यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर, हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष  हरविंदर कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष  उमंग सिंघार, विधायक एवं अध्यक्ष  हेमंत खंडेलवाल विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को लेकर आपार संभावनाएं विद्यमान हैं। नर्मदा वैली सहित प्रदेश की बड़ी-बड़ी जल परियानाओं के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित करने वाली गतिविधियां को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। पिछले एक साल में उज्जैन आने वाले पर्यटकों की संख्या 7 करोड़ के पार पहुंच गई। शिकारे की सैर का लिया आनंद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिकारों को फ्लेगऑफ करने के बाद बड़े तालाब में शिकारे की सैर का आनंद लिया और उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गणमान्य नागरिकों ने शिकारा बोट रेस्टोरेंट से चाय, पोहा, समोसे एवं फलों का जायका लिया। साथ ही फ्लोटिंग बोट मार्केट से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की पारम्परिक कला बाघ और बटिक वस्त्रों, जैविक उत्पादों आदि की खरीदारी भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोट क्लब पर मौजूद छात्र-छात्राओं के साथ सेल्फी ली और अथितियों के साथ टेलीस्कोप से सूर्य के दर्शन किए। टेलीस्कोप की बोट क्लब पर व्यवस्था वैज्ञानिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल द्वारा की गई थी। पर्यटन विकास से स्थानीय स्तर पर बढ़ेंगे रोजगार के अवसर : वि.स. अध्यक्ष  तोमर विधानसभा अध्यक्ष  नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि राजधानी की इतनी बड़ी झील में शिकारा सेवा की शुरुआत बहुत आकर्षक है। इससे प्रदेश में पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। देश के दिल भोपाल का विशेष दर्जा है – हरियाणा वि.स. अध्यक्ष  हरविंदर शिकारा सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष  हरविंदर कल्याण भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भोपाल सभी भारतवासियों के दिल के करीब है, यह शहर देशभर में अलग दर्जा हासिल किए हुए है। बड़े तालाब में शिकारे चलते देखने का दृश्य अविस्मरणीय है। वरिष्ठ विधायक  हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेशवासियों को कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव भोपाल में होगा। नेता प्रतिपक्ष  उमंग सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव, डल झील के शिकारों के माध्यम से कश्मीर को मध्यप्रदेश ले आएं हैं। मध्यप्रदेश टूरिज्म की यह पहल सराहनीय है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर शिकारों का संचालन किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सभी 20 शिकारों का निर्माण प्रदूषण रहित आधुनिक तकनीक से किया गया है। इनका निर्माण 'फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन' और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से हुआ है, जो जल के साथ किसी भी प्रकार की रासायनिक क्रिया नहीं करती। इससे बड़े तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता पूर्णतः सुरक्षित रहेगी। ये शिकारे अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा निर्मित किए गए हैं, जिनके द्वारा निर्मित शिकारे केरल, बंगाल और असम में भी पर्यटकों द्वारा अत्यंत पसंद किए जा रहे हैं। भोपाल का बोट क्लब इन आकर्षक शिकारों के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। शिकारों पर नौकायन का आनंद लेने के साथ पर्यटक बर्ड वाचिंग, हैंडीक्रॉफ्ट प्रोडक्ट, स्थानीय व्यंजन, आर्गेनिक वेजिटेबल्स और फ्रूट्स आदि भी खरीद सकेंगे। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार, महापौर भोपाल मती मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष  किशन सूर्यवंशी, जिलाध्यक्ष  रवींद्र यति सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में पर्यटन प्रेमी उपस्थित थे।  

CMRS और पीएम मोदी का ग्रीन सिग्नल, भोपाल मेट्रो ट्रैक पर दौड़ेगी और 3 महीने तक किराए में छूट

भोपाल  राजधानी भोपाल के रहवासियों के लिए अच्छी खबर है. कमिश्नर इन मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) ने भोपाल में मेट्रो के संचालन के लिए हरी झंडी दे दी है. यानि अब एम्स साकेत नगर से सुभाष नगर डिपो तक मेट्रो के संचालन की तैयांरियां पूरी हो चुकी हैं. पहले भोपाल मेट्रो के संचालन के लिए 13 दिसंबर 2025 की तारीख तय की गई थी. लेकिन मध्य प्रदेश मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि 6.22 किलोमीटर का कारिडोर मेट्रो के संचालन के लिए तैयार है, लेकिन इसका संचालन राज्य सरकार तय करेगी. पीएम मोदी कर सकते हैं वर्चुअल शुभारंभ मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि, भोपाल मेट्रो का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल शुभारंभ कर सकते हैं. चूंकि प्रायोरिटी कारिडोर में काम पूरा हो गया है और सीएमआरएस ने भी संचालन के लिए हरी झंडी दिखा दी है. ऐसे में माना जा रहा है कि दिसंबर में ही प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो का कमर्शियल रन हो सकता है. सीएमआरएस रिपोर्ट में सब कुछ ओके होने के बाद यह रिपोर्ट प्रदेश सरकार को दी गई है. वहीं, नई दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद मेट्रो के कमर्शियल रन की शुरुआत हो जाएगी. भोपाल मेट्रो में मैन्युअल लेना होगा टिकट मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पाेरेशन के एमडी एस कृष्णा चौतन्य ने बताया कि, ''भोपाल और इंदौर मेट्रो स्टेशन में ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन का काम 186 करोड़ रुपये में तुर्की की कंपनी को दिया गया था. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई करने का मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश मेट्रो ने इसका टेंडर कैंसिल करने का काम भी शुरु कर दिया है. वहीं ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन के लिए दूसरी कंपनी की तलाश की जा रही है. इसके लिए अभी टेंडर जारी किया जा चुका है. लेकिन इसमें अभी समय लग सकता है. ऐसे में भोपाल में भी मेट्रो का शुभारंभ इंदौर की तरह मैन्युअल टिकट के माध्यम से किया जाएगा.'' एक सप्ताह फ्री, 3 महीने तक छूट मेट्रो रेल कार्पाेेशन के अधिकारियों का कहना है कि इंदौर कि, तरह भोपाल मेट्रो में भी यात्रियों को पहले छूट दी जाएगी. शुभारंभ के बाद अगले एक सप्ताह तक भोपाल मेट्रो में यात्री निशुल्क सवारी कर सकेंगे. इसके बाद दूसरे सप्ताह में भी 70 प्रतिशत की छूट टिकट में दी जाएगी. जबकि तीसरे सप्ताह में 50 प्रतिशत और चौथे सप्ताह से शुभारंभ के तीन महीने तक मेट्रो के टिकट में यात्रियों को 25 प्रतिशत की छूट मिलती रहेगी. हालांकि इसका किराया क्या होगा. इसको लेकर कृष्णा चौतन्य का कहना है कि अभी इस पर कमेटी चर्चा कर रही है. जल्द ही इसे भी सार्वजनिक किया जाएगा. भोपाल मेट्रो में एक बार में 900 सवारी करेंगे सफर भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले चरण में 27 ट्रेन प्रस्तावित हैं. इनमें से 9 ट्रेनों की डिलीवरी हो चुकी है. इनकी कमीशनिंग और ट्रायल का काम भी पूरा हो गया है. ये सभी मेट्रो 3 कोच वाली हैं. बाद में जरुरत के अनुसार, इनमें कोच की संख्या बढ़ाई जा सकेगी. अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में मेट्रो करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी. इसमें करीब 900 यात्री सफर कर सकेंगे. वहीं 150 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी. भोपाल मेट्रो स्टेशनों पर काम अधूरे आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि, ''भले ही भोपाल मेट्रो को सीएमआरएस की हरी झंडी मिल गई है, लेकिन अभी रानी कमलापति, डीआरएम और अलकापुरी मेट्रो स्टेशनों पर फिनिशिंग समेत अन्य काम किए जा रहे हैं. ऐसे में अभी मेट्रो के संचालन में और समय लग सकता है.'' कुलश्रेष्ठ का कहना है कि, ''यदि इससे पहले मेट्रो का कामर्शियल रन शुरु भी किया जाता है, तो शुरुआत में इन मेट्रो स्टेशनों पर सवारियों को मेट्रो का लाभ नहीं मिल पाएगा.''

अजमेर-रांची-अजमेर के मध्य चलने वाली साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन की अवधि बढ़ाई

जबलपुर  रेलवे प्रशासन द्वारा अतिरिक्त यात्री यातायात को देखते हुए यात्रियों की सुविधा हेतु संचालित अजमेर-रांची-अजमेर साप्ताहिक स्पेशल रेल सेवा की संचालन अवधि में 04-04 ट्रिप का विस्तार किया जा रहा है। यह गाड़ी पश्चिम मध्य रेल के सवाई माधोपुर, सोगरिया, बारां, छबड़ा गुगोर, रूठियाई, गुना, सागर, दमोह, कटनी मुड़वारा, ब्योहारी, बरगवां एवं सिंगरौली स्टेशनों से होकर गन्तव्य को जा रही है। इस रेलसेवा का संचालन समय व ठहराव यथावत् रहेगा। बड़ी हुई अवधि में स्पेशल ट्रेन की विस्तृत जानकारी निम्न है।  गाड़ी संख्या 09619/09620, अजमेर-रांची-अजमेर साप्ताहिक स्पेशल रेल सेवा की संचालन अवधि में अजमेर से दिनांक 05.12.25 से 26.12.25 तक (04 ट्रिप) एवं रांची से दिनांक 07.12.25 से 28.12.25 तक (04 ट्रिप) विस्तार किया जा रहा है।  यात्री सुविधा का लाभ लेते हुए स्पेशल ट्रेन के ठहराव की विस्तृत जानकारी स्टेशन, एनटीइएस या रेल मदद 139 अथवा ऑनलाइन रेलवे वेबसाइट से प्राप्त कर सकते है।

महाकाल मंदिर में नई गाइडलाइन: अजगर माला पहनाने पर रोक, भक्तों को दिया गया निर्देश

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला पहनाने पर रोक लगाने की तैयारी कर ली गई है। मंदिर के उद्घोषणा कक्ष से भक्तों को नए नियम की जानकारी देने के लिए लगातार उद्घोषणा की जा रही है। मंदिर समिति का भक्तों से अनुरोध है कि वे भगवान के लिए अजगर माला न खरीदें। मंदिर के आसपास फूल प्रसाद की दुकान संचालित करने वाले व्यवसायियों को भी फूलों की भारी व बड़ी माला विक्रय न करने के आदेश जारी किए जाएंगे। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए वर्ष 2017 में लगी एक जनहित याचिका पर सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिर्लिंग के क्षरण की जांच तथा उसे रोकने के उपाय करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के विशेषज्ञों की टीम गठित की थी। विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से जांच शुरू की तथा ज्योतिर्लिंग की सुरक्षित रखने के लिए अनेक सुझाव दिए। इसमें एक सुझाव भगवान महाकाल को फूलों की छोटी माला तथा समिति मात्रा में फूल अर्पण का था। 10 से 15 किलो वजनी माला लेकिन पिछले कुछ समय से विशेषज्ञों के सुझाव को दरकिनार करते हुए भगवान को फूलों की मोटी व बड़ी माला पहनाई जा रही थी। मंदिर के आसपास हारफूल की दुकानों पर भी 10 से 15 किलो वजनी मालाओं का विक्रय किया जा रहा था। 500 से 2100 रुपये तक बिकने वाली इन अजगर मालाओं को भक्त खरीद रहे थे।मंदिर के भीतर इन्हें भगवान को पहनाया भी जा रहा था। मामले में नईदुनिया ने 28 नवंबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, इसके बाद मंदिर प्रशासन ने इस पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। एक-दो दिन में औपचारिक आदेश मंदिर प्रशासन ने भगवान महाकाल को फूलों की छोटी माला तथा समिति मात्रा में पुष्प अर्पण की शुरुआत कर दी है। इसके आदेश इसलिए एक दो दिन में जारी होंगे ताकि भक्तों को पहले नए नियम की जानकारी मिल जाए, एक दम रोक लगाने से जो भक्त फूलों की बड़ी माला लेकर आए हैं उनकी भावना आहत होगी। प्रवेश द्वार पर पड़ताल के बाद मिलेगा प्रवेश नया नियम लागू होने के बाद मंदिर के विभिन्न द्वारों पर तैनात गार्ड भक्तों द्वारा भगवान को अर्पण करने के लिए लाई जा रही पूजन सामग्री की जांच करेंगे। बड़ी व भारी फूल माला को गेट पर ही अलग रखवा दिया जाएगा। किसी भी सूरत में बड़ी फूल माला मंदिर के भीतर जाने नहीं दी जाएगी। महाकाल मंदिर में भारी फूलों पर रोक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए वर्ष 2017 में लगी जनहित याचिका पर सुनाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिर्लिंग के क्षरण की जांच तथा उसे रोकने के उपाय करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की टीम गठित की थी। विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से जांच शुरू की और ज्योतिर्लिंग की सुरक्षित रखने के लिए कई सुझाव दिए। इनमें एक सुझाव भगवान महाकाल को फूलों की छोटी माला तथा समिति मात्रा में फूल अर्पण का था, लेकिन कुछ समय से विशेषज्ञों के सुझाव को दरकिनार करते हुए पूजन परंपरा से जुड़े लोगों द्वारा भगवान को फूलों की मोटी व बड़ी माला पहनाई जा रही थी। भक्तों से अजगर माला न खरीदने की अपील इसमें भक्तों द्वारा लाई गई मालाएं भी शामिल हैं। मंदिर के आसपास हार-फूल की दुकानों पर भी 10 से 15 किलो वजनी मालाओं का विक्रय किया जा रहा था। 500 से 2100 रुपये तक बिकने वाली इन अजगर मालाओं को भक्त खरीद रहे थे। मंदिर के भीतर इन्हें भगवान को पहनाया भी जा रहा था। मामले में नईदुनिया ने 28 नवंबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, इसके बाद मंदिर प्रशासन ने इस पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला अर्पित करने पर रोक लगाई जा रही है। एक दो दिनों में इस संबंध में विधिवत आदेश जारी कर दिए जाएंगे।- प्रथम कौशिक, प्रशासक, श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति।    

MP के दो बड़े इन्फ्लुएंसर्स के बीच प्रॉपर्टी को लेकर विवाद, पारुल-वीर ने की पुलिस में शिकायत

इंदौर इंदौर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पारुल अहिरवार और उसके दोस्त गौरव रावल के बीच चल रहा प्रॉपर्टी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले में अब गौरव रावल ने पुलिस कमिश्नर और डीसीपी को आवेदन देकर पारुल और उसके साथी वीर शर्मा की शिकायत की है। गौरव का आरोप है कि पारूल और वीर शर्मा ने पुलिसकर्मी बनकर उसे धमकी भरा कॉल किया और बदनाम करने की कोशिश की है। इसके पहले पारुल ने गौरव पर लाखों रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए क्राइम ब्रांच में शिकायत की थी। आखिर क्या है पूरा मामला पुलिस के मुताबिक पारुल और गौरव ने 2020 में 800 वर्ग फीट का मकान संयुक्त रुप से खरीदा था, इसके लिए दोनों ने चार-चार लाख रुपए जमा किए थे। गौरव ने इस मकान पर 20 लाख रुपए का बैंक लोन ले लिया था। इस लोन की आधी किस्त 9,000 रुपए पारुल साल 2020 से भरती रही है। इस संबंध में दोनों के बीच एक लिखित एग्रीमेंट भी हुआ था। अब पारुल का आरोप है कि गौरव ने यह एग्रीमेंट चुरा लिया और मकान की रजिस्ट्री अपने नाम पर करा ली है। जून 2025 में पारुल को पता चला कि गौरव मकान को किसी और को बेच चुका है। उसने गौरव को कॉल किया, लेकिन फोन स्विच ऑफ था। पारुल ने कई बार गौरव से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई। जिसके बाद पारुल ने गौरव के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज करा दी। 800 वर्ग फीट के मकान को लेकर तनातनी पुलिस के मुताबिक, पारुल का कहना है कि वर्ष 2020 में उसने और गौरव ने 800 वर्ग फीट का मकान संयुक्त रूप से खरीदा था। इसके लिए दोनों ने चार-चार लाख रुपए जमा किए थे। गौरव ने इस मकान पर 20 लाख रुपए का बैंक लोन ले लिया था। इस लोन की आधी किस्त 9,000 रुपए पारुल साल 2020 से भरती रही है। इस संबंध में दोनों के बीच एक लिखित एग्रीमेंट भी हुआ था। पारुल का आरोप है कि गौरव ने यह एग्रीमेंट चुरा लिया। फिर मकान की रजिस्ट्री अपने नाम पर करा ली। जून 2025 में पारुल को पता चला कि गौरव मकान को किसी और को बेच चुका है। उसने गौरव को कॉल किया लेकिन फोन स्विच ऑफ था। पारुल ने कई बार गौरव से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो पाई। आखिरकार पारुल ने गौरव के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज करा दी। मकान की रजिस्ट्री को लेकर है विवाद गौरव रावल ने पुलिस को शिकायत कहा है, उसने और पारुल ने मिलकर ओमेक्स सिटी फेज वन में घर लिया था, जिसकी रजिस्ट्री गौरव और उसकी मां के नाम थी। पारुल ने तय 5 लाख में से सिर्फ 4 लाख ही बिल्डर को दिए और करीब 18 महीने तक आधे हिस्से में रहने की बात कहकर किराया देती रही। गौरव का आरोप है कि जब उसने मकान बेचने का फैसला किया तो पारुल ने बिना पूरी रकम दिए ही रजिस्ट्री अपने नाम कराने का दबाव बनाया। इसके बाद पारुल और उसके साथी वीर ने गौरव की बहन के ऑफिस में अभद्रता की, जिससे उसकी नौकरी चली गई। गौरव ने यह भी बताया कि वीर ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उसकी बहन को फोन किए। उसे अलग-अलग नंबरों से धमकी भरे कॉल किए। इस विवाद में पारुल पहले ही गौरव पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करा चुकी है। दूसरी ओर गौरव ने भी पारुल और वीर पर धमकी देने और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। वीर का कहना है कि उसने खुद को पुलिसकर्मी बताकर कॉल नहीं किए, बल्कि शिकायत के मामले में थाने को जानकारी दी थी। गौरव के वकील ने स्पष्ट किया कि उनके मुवक्किल को किसी भी तरह का नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पारुल और वीर सोशल मीडिया पर गौरव की छवि खराब करते हैं तो उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ने के बाद दोनों ने सोशल मीडिया पर अपनी गतिविधियां कम कर दी हैं। गौरव और उसकी मां के नाम पर है रजिस्ट्री गौरव के मुताबिक, पारुल और उसने मिलकर शुभांजन ओमेक्स वन सिटी में मकान लिया था। इसकी रजिस्ट्री गौरव और उसकी मां के नाम पर थी। पारुल और गौरव के बीच समझौते के बाद पारुल को बाद में पांच लाख रुपए देने की बात तय हुई थी। इसके एवज में पारुल ने केवल चार लाख रुपए सीधे बिल्डर के बैंक खाते में जमा कराए थे। पारुल आधे हिस्से में रहने की बात कहकर करीब 18 महीने तक गौरव को मकान किराया देती रही। गौरव का ये भी कहना है कि जब उसने मकान बेचने का मन बनाया तो पारुल ने बिना पूरी रकम दिए मकान के एक हिस्से की रजिस्ट्री अपने नाम कराने का दबाव डाला। गौरव बोला- मकान मेरे और मां के नाम पर था उधर, गौरव रावल द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, पारुल और उसने मिलकर शुभांजन ओमेक्स वन सिटी में मकान लिया था। इसकी रजिस्ट्री गौरव और उसकी मां के नाम पर थी। समझौते के अनुसार, पारुल को बाद में 5 लाख रुपए देने की बात तय हुई थी। इसके ऐवज में पारुल ने केवल 4 लाख रुपए सीधे बिल्डर के बैंक खाते में जमा कराए थे। पारुल आधे हिस्से में रहने की बात कहकर करीब 18 महीने तक गौरव को मकान का किराया देती रही। गौरव का दावा है कि जब उसने मकान बेचने का मन बनाया तो पारुल ने बिना पूरी रकम दिए इसके एक हिस्से की रजिस्ट्री अपने नाम कराने का दबाव डाला। वीर पर पुलिसकर्मी बनकर कॉल करने का आरोप गौरव का आरोप है कि पारुल ने अपने साथी वीर को उसकी बहन ममता के ऑफिस में भेजकर अभद्रता कराई। जिसके बाद ममता की नौकरी चली गई। इसके बाद वीर ने खुद को लसूडिया थाने का पुलिसकर्मी बताकर ममता को कॉल किए। गौरव ने बताया कि उसे अलग-अलग फोन नंबरों से धमकी भरी कॉल आ रही थीं। उसने इनकी दो ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को भी सौंपी हैं।  

मध्यप्रदेश में 45 जर्जर पुलों की तुरंत रिपेयरिंग, PWD ने जारी किया बजट

भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में स्थित 45 जर्जर पुलों की मरम्मत का काम जल्द ही शुरू किया जाएगा। यह निर्णय रायसेन जिले में हाल ही में हुए पुल गिरने की घटना के बाद लिया गया। इस हादसे ने राज्य में पुराने और कमजोर ब्रिजों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सतर्कता बढ़ा दी है। विधानसभा सत्र के दौरान रायसेन में पुल गिरने की घटना के बाद सुरक्षा को लेकर उठे सवालों को लेकर बढ़े दबाव का परिणाम माना जा रहा है।PWD के जारी आदेश में बताया गया कि 03.11.2025 को हुई राज्य स्तरीय आपदा प्रबंधन समिति की 295वीं बैठक में यह फैसला लिया गया कि प्रदेश के कई जिलों से तात्कालिक मरम्मत की जो मांगें आई थीं, उन्हें प्राथमिकता पर स्वीकृत किया जाए। राज्य PWD (Public Works Department) ने मरम्मत के लिए आवश्यक फंड जारी कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, मरम्मत के काम में प्राथमिकता उन पुलों को दी जाएगी जो यातायात की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण हैं या जिनका ढांचा सबसे जर्जर स्थिति में है। इस सूची में ग्रामीण और शहरी दोनों प्रकार के पुल शामिल हैं। PWD अधिकारी बताते हैं कि इन पुलों की मरम्मत में आधुनिक तकनीक और मजबूत सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। केवल सतही मरम्मत नहीं, बल्कि ढांचे की जड़ से मजबूती सुनिश्चित करने का काम किया जाएगा। इससे भविष्य में किसी भी तरह के दुर्घटना या हादसे की संभावना कम हो जाएगी। रायसेन में हाल ही में एक पुल गिरने की घटना में वाहन चालक और राहगीर घायल हुए थे। इस घटना ने राज्य में पुराने पुलों की स्थिति की जांच को और जरूरी बना दिया। मरम्मत अभियान के तहत पुलों की सुरक्षा संकेत, रेलिंग और सड़क की स्थिति भी बेहतर की जाएगी। मध्यप्रदेश सरकार और PWD का कहना है कि सभी पुलों की मरम्मत की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इस कदम से न केवल सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा। सड़क परिवहन और यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि जर्जर पुलों की मरम्मत और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना किसी भी राज्य के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि यातायात सुरक्षित और व्यवस्थित रहे। जानिए किस जिले के कौन से पुल की होगी रिपेयरिंग ग्वालियर जिला     डबरा-जंगीपुर रोड़ पर 13/4 किमी पर छंदूद नदी पर बने पुल की 8.22 लाख रूपए से रिपेयरिंग होगी।     डबरा-चीनोर रोड पर 16/8 किमी पर मेंघरा नाले पर बने पुल को 10.34 लाख से सुधारा जाएगा।     एजी ऑफिस के पास रेलवे ओवर ब्रिज(ROB) की रिपेयरिंग के लिए 99.63 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं।     ग्वालियर शहर में तानसेन नगर के पास बने पुल की रिपेयरिंग पर 27.49 लाख रुपए खर्च होंगे। मुरैना जिला     जडे़रूआ-सुमावली रोड पर कररई नाले पर बने पुल की रिपेयरिंग के लिए 27.49 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं।     आसन पुल 8/8 सुमावली-खनेता रोड पर बने ब्रिज की रिपेयरिंग के लिए 22.02 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं।     एमएस रोड जरैना-सुमावली पहुंच मार्ग के 2/4 किमी पर आसन नदी पर बने उच्चस्तरीय पुल का विशेष मजबूती करण कार्य के लिए 46.03 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं।     महावीरपुर-जैतपुरा तिलावली के बीच क्वारी नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग 24.88 लाख रुपए से होगी। भिंड जिला     लहार-अमायन रोड पर बने सिंध पुल की रिपेयरिंग के लिए 99.43 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं।     भोनपुर सिंहोनिया मार्ग के किमी 2/4 में आसन नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग 97.59 लाख से होगी।     खितोली-धमसा मार्ग के 1/4 किमी पर वैशली नदी पर बने पुल को 88.57 लाख रुपए खर्च होंगे।     कनाथर-बरासो मार्ग के 9/10 किमी में वैशली नदी पर बने पुल को रिपेयर करने में 8.93 लाख रुपए खर्च होंगे।     हटीले हनुमान से गंगादास का पुरा मार्ग में वैशली नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग में 59.47 लाख रुपए खर्च होंगे।     प्रतापपुरा-गिरगांव रोड पर खार नाले पर बने पुल की रिपेयरिंग में 99.18 लाख रुपए खर्च होंगे।     सिमराव-कमई मार्ग के बीच क्वारी नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग पर 3.75 लाख रुपए खर्च होंगे।     खरगपुरा-एनो मार्ग में आसन नदी पर बने पुल के सुधार कार्य में 56.38 लाख रुपए खर्च होंगे। दतिया जिला     इंदरगढ़–भांडेर मार्ग के किमी 13/8 पर सिंध नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग के लिए 18.86 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। अशोकनगर जिला     बीना–अशोकनगर मार्ग के किमी 7/8 पर बेतवा नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग 93.58 लाख रुपए से होगी। गुना जिला     बीना–अशोकनगर मार्ग के किमी 6/6 पर सिंध नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग में 79.77 लाख रुपए खर्च होंगे।     गुना–रुठियाई मार्ग के किमी 4/6 पर बने पुल की रिपेयरिंग पर 83.12 लाख रुपए खर्च होंगे।     गुना–मक्सी मार्ग के किमी 8/2 पर नदी पर बने पुल की तत्काल रिपेयरिंग 0.00 लाख (आपातकालीन स्वीकृति) के रूप में दर्ज है।     गुना–ब्यावरा मार्ग के किमी 2/2 पर नदी पर बने पुल की विशेष रिपेयरिंग 80.57 लाख रुपए से होगी।     गुना जिला अस्पताल (R.O.B.) के पास बने पुल की रिपेयरिंग 16.44 लाख रुपए से की जाएगी। सीहोर जिला     सलकनपुर–सीहोर मार्ग पर महादेव मंदिर के पास पुल की रिपेयरिंग 67.18 लाख रुपए से होगी।     सलकनपुर–रायसेन मार्ग के किमी 34/6 पर बने पुल की रिपेयरिंग 85.30 लाख रुपए से की जाएगी। रायसेन जिला     रायसेन–सुल्तानपुर मार्ग पर A.B. रोड (किमी 264) के पास स्थित पुल की रिपेयरिंग पर 37.55 लाख रुपए खर्च होंगे। नरसिंहपुर जिला     गाडरवारा शहर के CMO कार्यालय के पास बने पुल की रिपेयरिंग 22.29 लाख रुपये से होगी।     मॉडल स्टेशन गाडरवारा के पास रेलवे अंडरब्रिज (RUB) की विशेष रिपेयरिंग 99.45 लाख रुपए से होगी। मंदसौर जिला     मंदसौर–सीतामऊ मार्ग के किमी 10/0 पर शिवना नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग 98.17 लाख रुपए से होगी। रतलाम जिला     आलोट–सैलाना मार्ग के किमी 7/8 पर शेर नदी पर बने पुल की रिपेयरिंग में 70.85 लाख … Read 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बर्फीली हवाओं से बढ़ेगी ठिठुरन, मध्यप्रदेश में ठंड का प्रकोप जारी, पारा 2-3 डिग्री तक गिरेगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब तेज ठिठुरन का दौर शुरू होने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी और उसके बाद बर्फ के पिघलने से उठने वाली ठंडी हवाएं प्रदेश की ओर बढ़ रही हैं। इससे आने वाले 48 घंटों में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित कई शहरों के न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट दर्ज हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, एक पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के तुरंत बाद 5 दिसंबर से नया सिस्टम हिमालयी क्षेत्रों को प्रभावित करेगा, जिसका प्रभाव दो दिन बाद MP में साफ दिखाई देगा। पहले से जमा बर्फ के पिघलने पर वहीं से उठने वाली बर्फीली हवा सीधे मध्यप्रदेश पहुंचेगी, जिससे इंदौर, ग्वालियर, चंबल, उज्जैन और सागर संभाग में सबसे ज्यादा सर्दी महसूस की जाएगी।  मध्य प्रदेश में अब कड़ाके की सर्दी का दौर शुरू होगा। बर्फीली हवाओं से और भी ठिठुरन बढ़ेगी। दिसंबर महीने में 20-22 दिन शीतलहर चलने का अनुमान है। भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में तापमान 2 से 3 डिग्री और गिरेगा। इससे पहले बुधवार रात में भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 10 शहरों में पारा 10 डिग्री से कम दर्ज किया। पचमढ़ी फिर सबसे ठंडा,पारा 6.7 डिग्री मंगलवार-बुधवार की रात प्रदेश के कई हिस्सों में पारा 10 डिग्री से नीचे फिसल गया।भोपाल: 9.2°,इंदौर: 8.4°,जबलपुर: 10.6°,उज्जैन: 12°,ग्वालियर: 14.6°पचमढ़ी इस बार भी सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 6.7 डिग्री दर्ज किया गया। कल्याणपुर (शहडोल) में 7.1°, उमरिया में 8.2°, अमरकंटक और शाजापुर में 8.7°, जबकि रीवा-नौगांव में 9° दर्ज हुआ। दिन में भी कई शहरों में अधिकतम तापमान 25 डिग्री से नीचे रहा। नवंबर ने तोड़े रिकार्ड,भोपाल में 15 दिन चली शीतलहर इस साल नवंबर में सांईठुरन ने पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। भोपाल में लगातार 15 दिन शीतलहर चली 1931 के बाद यह सबसे लंबा दौर रहा। 17 नवंबर की रात पारा 5.2 डिग्री तक गिर गया, जो अब तक का सर्वकालिक नवंबर रिकॉर्ड है। इंदौर में भी तापमान 6.4° तक फिसल गया 25 वर्षों में सबसे कम। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि उत्तर भारत में इस बार नवंबर की शुरुआत में ही बर्फबारी शुरू हो गई थी, जिससे ठंडी हवाएं जल्दी मध्यप्रदेश पहुंच गईं। हालांकि, नवंबर के अंतिम सप्ताह में हवा की दिशा बदलने से ठंड थोड़ी कम हुई। पचमढ़ी सबसे ठंडा, पारा 6.7 डिग्री इससे पहले मंगलवार-बुधवार की रात में भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 10 शहरों में पारा 10 डिग्री से कम रहा। भोपाल में 9.2 डिग्री, इंदौर में 8.4 डिग्री, जबलपुर में 10.6 डिग्री, उज्जैन में 12 डिग्री और ग्वालियर में 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन बताती हैं, इस बार उत्तरी राज्यों में नवंबर के पहले ही सप्ताह में बर्फबारी होने लगी। इस वजह से ठंडी हवाएं प्रदेश में पहुंची। आखिरी सप्ताह में हवा की दिशा बदल गई। जिससे ठंड का असर कम रहा है। ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। अब जानिए दिसंबर में कैसी रहेगी ठंड? मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही अनुमान है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी रहेगी     ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ेगी। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आएंगी।     भोपाल संभाग के सीहोर-विदिशा में ठंड का जोर रहेगा।     सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड पड़ेगी।     जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडोरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड रहेगी। 20-22 दिन चल सकती है कोल्ड वेव मौसम एक्सपर्ट की माने तो दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव यानी सर्द हवाएं चलेंगी। जनवरी में यह 20 से 22 दिन तक चल सकती है। इसलिए रहेगा कड़ाके की ठंड का दौर ला नीना ने दिया ठंड को लंबा धक्का     मौसम केंद्र भोपाल के रिटायर्ड डायरेक्टर डीपी दुबे के अनुसार, वैश्विक मौसम मॉडल (विश्व मौसम संगठन, भारत मौसम विज्ञान विभाग आदि) संकेत दे रहे थे कि इस बार ला नीना सक्रिय रहेगा। ला नीना का मतलब, प्रशांत महासागर का ठंडा होना। जैसे ही समुद्र ठंडा होता है, हवा और ज्यादा ठंडी होकर एशिया-भारत की ओर दबाव से धकेली जाती है। यह वही ठंड है जिसने नवंबर से ही मध्य भारत को जकड़ लिया। पहाड़ों पर जल्दी बर्फबारी, ठिठुरन बढ़ाई     इस बार उत्तर भारत में हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर में बर्फबारी सामान्य से काफी पहले शुरू हो गई। ऊंचे पर्वतीय इलाकों की जल्दी बर्फबारी मध्य भारत की ठिठुरन को 20 से 30% तक बढ़ा देती है। ठंडी हवाएं 25% ज्यादा अंदर तक घुसी     ठंड का असर सिर्फ सतह तक नहीं रहा। इस साल ग्वालियर-चंबल, भोपाल-विदिशा, रतलाम-मंदसौर, सागर-दमोह इन चार बड़े मौसम जोन में ठंडी हवाएं 20 से 25% ज्यादा गहराई तक घुस आईं। पश्चिमी विक्षोभ का लगातार … Read more

रायपुर में डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस: AI का इस्तेमाल कर पुलिसिंग को बनाया जाएगा भविष्य तैयार

भोपाल  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जमाने में पुलिस भी बदलेगी। एआई की मदद से पुलिस यह पूर्वानुमान लगा सकेगी कि किस जगह, किस समय, किस तरह का अपराध घटित हो सकता है। पहले के आंकड़ों के आधार पर एआई यह अनुमान लगा सकेगा। ऐसे ही किसी समय के ट्रैफिक का वाल्यूम यानी वाहनों की संख्या के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि सड़क दुर्घटना आशंका कहां-कहां है। इससे पुलिस घटनाएं रोकने पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी। दरअसल, देशभर की पुलिसिंग में 'प्रेडेक्टिव पुलिसिंग' माडल अपनाने पर विचार चल रहा है। पिछले सप्ताह रायपुर में हुई डीजीपी-आईजी कान्फ्रेंस में मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने 'फ्यूचर रेडी पुलिसिंग 2047' को लेकर विजन प्रस्तुत किया। क्राइम प्रिवेंशन एवं डिटेक्शन पर दिया प्रजेंटेंशन उन्होंने बताया कि एआई का उपयोग कर पुलिस अपराध की आशंका आदि बता सकती है। इसे लेकर उन्होंने 'क्राइम प्रिवेंशन एवं डिटेक्शन' विषय पर प्रजेंटेशन दिया। इसी में एआई मॉडल पर चर्चा हुई। कहा गया कि राज्य इस मॉडल का परीक्षण कर अपने-अपने स्तर पर लागू कर सकेंगे। कान्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल थे। डीजीपी मकवाणा ने 'फ्यूचर रेडी पुलिसिंग 2047' के अंतर्गत 'कम्युनिटी पुलिसिंग और पब्लिक ट्रस्ट' विषय पर बताया कि पुलिस आमजन से बेहतर संवाद रखकर कैसे उनका भरोसा जीत सकती है। संवाद को लेकर नवाचार किए बता दें कि डीजीपी बनने के बाद से ही उनका इस पर विशेष ध्यान रहा है। कई जिलों में पुलिस अधीक्षकों ने आमजन से संवाद को लेकर नवाचार भी किए हैं। कांफ्रेस में भी उन्होंने 'नशे से दूरी' अभियान सहित अन्य नवाचारों के बारे में बताया। कांफ्रेंस में उभरते साइबर अपराध, भीड़ प्रबंधन, वैज्ञानिक अन्वेषण, टेक्नोलाजी-इंटीग्रेशन, साइबर सुरक्षा, नागरिक-सहभागिता जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मकवाणा ने डेटा-संचालित निर्णय प्रक्रिया, आपदा प्रबंधन प्रणालियां और युवाओं की सकारात्मक भागीदारी जैसे बिंदुओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग तभी प्रभावी हो सकती है जब उसमें तकनीक और मानवीय संवेदना दोनों का संतुलित समावेश हो।

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ेगी, CM मोहन यादव तीन चीते करेंगे रिलीज

 श्योपुर  इंटरनेशनल चीता-डे के अवसर पर आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कूनो नेशनल पार्क में तीन चीतों को खुले जंगल में छोड़ेंगे। कार्यक्रम की तैयारियों का निरीक्षण श्योपुर और शिवपुरी जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने किया। कलेक्टर अर्पित वर्मा और एसपी सुधीर अग्रवाल ने कूनो पार्क के अहेरा गेट, हेलीपैड और चीता रिलीज प्वाइंट पर व्यवस्थाओं को परखा। अधिकारियों ने शिवपुरी जिले के अहेरा गांव के पास बने अस्थायी हेलीपैड का भी निरीक्षण किया। शिवपुरी कलेक्टर रविन्द्र चौधरी और एसपी अमन सिंह राठौर भी इस दौरान मौजूद रहे। टीम ने आगमन मार्ग से लेकर रिलीज स्थल तक सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और वन विभाग की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। जानकारी के अनुसार सीएम मोहन यादव आज गुरुवार दोपहर को लगभग 2:30 बजे श्योपुर पहुंचेंगे। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल और पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। श्योपुर के कलेक्टर, एसपी और वन विभाग की संयुक्त टीम ने चीता रिलीज प्वाइंट पर सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया। डीएफओ आर. थिरुकुराल, एएसपी प्रवीण भूरिया और अन्य अधिकारियों ने भी निरीक्षण में भाग लिया। वन विभाग ने बताया कि उन्नत ट्रैकिंग सिस्टम, निगरानी टीम और सुरक्षा उपकरणों की तैनाती कर दी गई है, ताकि चीतों की मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा सके। कूनो नेशनल पार्क में इस समय कुल 29 चीते हैं, जिनमें से 16 पहले से खुले जंगल में घूम रहे हैं। एनक्लोजर में रखे चीतों में से तीन मादा चीता वीरा और उसके दो 10 महीने के शावकों को खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। रिलीज का उद्देश्य चीतों को प्राकृतिक वातावरण में ढालना, उन्हें जंगली व्यवहार के अनुकूल बनाना और प्राकृतिक शिकार पर निर्भरता बढ़ाना है। मुख्यमंत्री यादव इस अवसर पर कूनो नेशनल पार्क का 2026 कैलेंडर जारी करेंगे। इसके साथ ही “फ्री-रेंजिंग चीतों के क्लिनिकल मैनेजमेंट के लिए फील्ड मैनुअल” भी लॉन्च किया जाएगा।पार्क में बनी नई सुविनियर शॉप का उद्घाटन भी इसी मौके पर किया जाएगा, जिससे पर्यटकों के अनुभव को और समृद्ध करने के साथ ही संरक्षण जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।