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मल्हारगढ़ थाने की राष्ट्रीय उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ थाने को उच्च रैंकिंग के लिए दी बधाई गर्व की बात , मल्हारगढ़ देश के सर्वश्रेष्ठ थानों में हुआ शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ थाने को उच्च रैंकिंग प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित पुलिस महानिदेशकों और पुलिस महानिरीक्षकों की कॉन्फ्रेंस में देश के श्रेष्ठ पुलिस थानों के रैंकिंग की घोषणा की गई। इस रैंकिंग में पुलिस थाना मल्हारगढ़, जिला मंदसौर को देश भर के पुलिस थानों में 9 वीं रैंक प्राप्त हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने थानों की रैंकिंग के लिये विभिन्न 70 पैमाने तय किए थे। इनमें अपराध का ग्राफ, आपराधिक प्रकरण को सुलझाने की अवधि, स्वच्छता और पुलिसकर्मियों का व्यवहार सहित अन्य पैमाने शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला पुलिस अधीक्षक मंदसौर सहित संबंधित थाना स्टॉफ और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों कर्मचारियों से इस उपलब्धि का स्तर बनाए रखने की अपेक्षा करते हुए अन्य थानों के स्टॉफ को भी मंदसौर से प्रेरणा लेकर श्रेष्ठ कार्य का आह्वान किया है। उन्होंने गर्व का अनुभव करवाने वाली इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी बधाई दी है।  

महाकाल का अनोखा अलंकरण: फूलों की 10–15 किलो वजनी ‘अजगर माला’ चढ़ाई

उज्जैन महाकाल मंदिर में इन दिनों भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला पहनाई जा रही है। प्रतिदिन होने वाली पांच आरती के अलावा दिनभर भक्तों की ओर से लाई जाने वाली मालाएं भगवान को अर्पित की जा रही है। हालांकि ज्योतिर्लिंग क्षरण मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भगवान को भारी फूल माला तथा अधिक मात्रा में पुष्प अर्पित नहीं करने का सुझाव दिया है। समय-समय पर मंदिर समिति भी एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों पर अमल करने का दावा करती रही है, मगर हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए सारिका गुरु ने वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआइ) और जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की समिति गठित की थी। एक्सपर्ट कमेटी के सदस्य वर्ष 2019 से लगातार ज्योतिर्लिंग क्षरण की जांच कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने क्षरण रोकने के लिए अनेक सुझाव दिए हैं।   इनमें भगवान महाकाल के अभिषेक के लिए सादे पानी की जगह आरओ जल का उपयोग करना, भस्म आरती में ज्योतिर्लिंग पर कपड़ा ढंक कर भस्म अर्पित करना, पंचामृत की मात्रा केवल सवा लीटर करना, भगवान के शृंगार में उपयोग होने वाले आभूषणों का वजन कम करना, भगवान महाकाल को भारी फूल माला तथा अधिक मात्रा में पुष्प अर्पित नहीं करना जैसे सुझाव शामिल है। मंदिर समिति एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर अमल कर रही है। अभिषेक में आरओ जल का उपयोग हो रहा है, आभूषण का वजन कम कर दिया गया है, भस्म आरती में भस्म अर्पण से पहले ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंका जाता है। लेकिन मानीटरिंग के अभाव में भगवान को फूलों की भारी माला पहनाने का क्रम जरूर जारी नजर आ रहा है। 10 से 15 किलो वजनी है अजगर माला महाकाल मंदिर प्रशासनिक भवन के पास स्थित हार, फूल व प्रसाद की दुकानों पर फूलों की भारी माला का विक्रय किया जा रहा है, इसे अजगर माला कहा जाता है। इसमें एक हजार कमल के फूलों से बनी सहस्त्र कमल तथा विभिन्न किस्म के फूलों से तैयार की गई भारी माला शामिल है। बताया जाता है फूलों की भारी भरकम माला का वजन करीब 10 से 15 किलो रहता है। दिन भर में भगवान को इस प्रकार की 40 से 50 मालाएं पहनाई जा रही है। 500 से 2100 रुपये कीमत महाकाल मंदिर के आसपास दुकानों से विक्रय की जाने वाली अजगर माला 500 से 2100 रुपये में विक्रय की जा रही है। भक्तों द्वारा लाई जा रही भारी माला को दिनभर भगवान को अर्पित किया जाता है। पांच आरती में भी भगवान को भरी भरकम मालाएं ही अर्पित की जा रही हैं।

उमरीखेड़ा मनोरंजन पार्क में नाइट स्टे शुरू, इंदौर के नजदीक खास अनुभव

 इंदौर  इंदौर शहर से महज दस किमी दूर 190 हेक्टेयर में फैले उमरीखेड़ा मनोरंजन पार्क से पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है। अब यहां नाइट स्टे की सुविधा शुरू कर दी गई है। रात में ठहरने को लेकर वन विभाग ने ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर दी। इसके अंतर्गत पहली बुकिंग 29 नवंबर के लिए की गई है। जब पर्यटक खुले आसमान के नीचे प्रकृति के बीच रात बिता सकेंगे। पार्क में नाइट स्टे के लिए तीन तरह की सुविधाएं तैयार की गई हैं, जिसमें मड हाउस, स्विस टेंट और सामान्य टेंट शामिल है। इन सभी की दरें वन विभाग मुख्यालय ने तय कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि पर्यटकों को दो दिन पहले बुकिंग करवाना अनिवार्य होगा। नाइट स्टे के साथ ही आगंतुक मालवा और निमाड़ के पारंपरिक व्यंजनों का भी स्वाद ले सकेंगे, जो अनुभव को और खास बनाएगा। पार्क में सुंदर पैदल ट्रैक भी बनाया गया पार्क अप्रैल में पर्यटकों के लिए खोला गया था। इसी दौरान इंदौर वनमंडल ने रुकने की सुविधाएं तैयार कर ली थीं और उनकी दरों का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा था। दरें तय करने में कुछ महीनों का समय लगा और आखिरकार अक्टूबर में मंजूरी मिली। मंजूरी मिलते ही बुकिंग शुरू हुई और पहली बुकिंग भोपाल के पर्यटकों द्वारा कराई गई। पार्क में एक सुंदर पैदल ट्रैक भी बनाया गया है, जहां सुबह और शाम प्रकृति की शांति का आनंद लिया जा सकता है। साथ ही वन्यजीवों को भी नजदीक से देखने को मौका मिलेगा। वनमंडल अधिकारी प्रदीप मिश्रा ने बताया कि नाइट स्टे शुरू होने के बाद पर्यटकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। दिसंबर के लिए भी कई पर्यटक मड हाउस बुक करवा चुके हैं। यह रहेंगी नाइट स्टे की दरें     मड हाउस (नान एसी) : 1500 रुपये     ठहरना और दोपहर-रात का भोजन : 3000 रुपये     स्विस टेंट (नान एसी) : 1500 रुपये     ठहरना, चाय-नाश्ता व दोपहर-रात का भोजन : 3000 रुपये     सामान्य टेंट : 750 रुपये     प्रवेश शुल्क, भोजन व अन्य एडवेंचर एक्टिविटी : 350 रुपये  

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आईएएस अधिकारियों का पलायन, 4 अब भी प्रयासरत

भोपाल   मध्य प्रदेश में क्या वजह है कि आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने में रुचि दिखा रहे हैं। पिछले एक साल में 17 आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए, केवल तीन ही वापस लौटे और वर्तमान में चार प्रयासरत हैं। हाल ही में केंद्रीय कार्मिक विभाग ने एक और आईएएस अधिकारी अविनाश लवानिया की केंद्र में प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी किया है। इसके अलावा, सचिव स्तर के चार अधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह, अभिषेक सिंह, श्रीमन शुक्ला और जॉन किंग्सले भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए प्रयासरत हैं। जो अधिकारी पहले ही प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में जा चुके हैं, उनमें प्रीति मैथिल, प्रियंका दास, सोफिया वली फारुकी, तरुण पिथोड़े, अजीत कुमार, चंद्रमोहन ठाकुर, पंकज जैन, नीरज सिंह, तन्वी सुंदरियाल, प्रवीण सिंह अढ़ायच, निकुंज श्रीवास्तव, ज्ञानेश्वर पाटिल, पवन शर्मा, बक्की कार्तिकेयन, हर्ष दीक्षित और अनुराधा पी. शामिल है। राज्य में वापस लौटे तीन अधिकारी विशेष गढ़पाले, आशीष भार्गव और रूही खान हैं। मंत्रियों और विधायकों के कामकाज की गहन समीक्षा डॉ. मोहन यादव के मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल को 12 दिसंबर को दो वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। माना जा रहा है कि इसके बाद मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। इसी संदर्भ में संगठन और सत्ता के शीर्ष स्तर पर मंत्रिमंडल के सदस्यों की कार्य पद्धति को लेकर गहन समीक्षा चल रही है। संगठन और सत्ता के शीर्ष स्तर पर पिछले दो वर्षों में उनके विभाग का कामकाज, व्यवहार और छवि को लेकर विशेष समीक्षा की जा रही है। प्रभार के जिलों में मंत्रियों के कार्यों का क्या सकारात्मक परिणाम निकला यह भी परखा जा रहा है। इसी तरह से पार्टी के विधायकों की भी संभाग स्तर पर समीक्षा हो रही है। पार्टी के उच्च स्तर से मिली जानकारी के अनुसार इसी समीक्षा के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार में विधायकों को शामिल किया जाएगा और खराब परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों को बाहर किया जाएगा। जनसंपर्क कर्मियों की कलम बंद हड़ताल स्थगित राज्य शासन के एक आदेश के बाद जनसंपर्क विभाग के सभी अधिकारी- कर्मचारी उसका विरोध करते हुए कलम बंद हड़ताल पर चले गए थे। आयुक्त जनसंपर्क के आश्वासन के बाद फिलहाल इसे स्थगित कर दिया गया है। दरअसल विभाग के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को जनसंपर्क संचालनालय भोपाल में अपर संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आग्रह शासन से किया है और कहा है कि जब तक यह आदेश निरस्त नहीं हो जाता तब तक प्रदेश के सभी अधिकारी कर्मचारी कलम बंद हड़ताल पर रहेंगे। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जनसंपर्क विभाग सरकार की नीतियों को संवेदनशील और प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाते हैं। यह विभाग सरकार की छवि बनाने के लिए कार्य करता है। यहां प्रशासन के बजाय कार्य की प्रकृति और संस्कृति अलग तरह की है। ऐसे में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गणेश जायसवाल की पदस्थापना ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लेकिन आज दिन में आयुक्त जनसंपर्क से तीन सत्रों में हुई बैठक और आश्वासन के बाद जनसंपर्ककर्मियों ने फिलहाल हड़ताल को स्थगित कर दिया है।  

विश्व बैंक की मदद से छिंदवाड़ा सीवरेज परियोजना पूरी, कुल लागत 237 करोड़ रुपये

विश्व बैंक की सहायता से छिंदवाड़ा सीवरेज परियोजना का काम पूरा, परियोजना लागत 237 करोड़ रूपये भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट द्वारा विश्व बैंक की सहायता से छिंदवाड़ा सीवरेज परियोजना का काम पूरा कर लिया गया है। परियोजना की कुल लागत 237 करोड़ रुपये है, जिसमें इसके 10 वर्षों के संचालन और रखरखाव का खर्च भी शामिल है। परियोजना के तहत शहर में 28 एमएलडी क्षमता वाला सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है और 271 किलोमीटर का सीवरेज नेटवर्क बिछाया गया है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से छिंदवाड़ा की 2 लाख से अधिक आबादी को लाभ हो रहा है। आधुनिक तकनीक से तैयार सीवरेज प्लांट में मलजल के शोधन के बाद निकले जल का सिंचाई और अन्य कार्यों में पुन: उपयोग किया जा रहा है। सीवरेज प्लांट के बन जाने से शहर की स्वच्छता में सुधार हुआ है। अब नगर का मलजल सीधे नदियों में पूरी तरह से न मिलने पर सफलता मिली है। सीवरेज प्लांट के निर्माण से शहर के पर्यावरण संरक्षण को और भी मदद मिली है। आधार बेस अटेंडेंस पर प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्‍यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्‍पनी के मुख्‍यालय में आधार बेस अटेंडेंस सिस्टम पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला में कंपनी में काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों को आधार बेस अटेंडेंस सिस्टम की तकनीकी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्रदान की गई। इस प्रणाली के लागू होने से गुड गवर्नेंस के साथ कंपनी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता भी आई है। प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नवीनतम डिजिटल सत्यापन तकनीक से परिचित कराना तथा कार्यक्षमता को मजबूत करना था। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया।  

वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन धीमा, MP में केवल 10% संपत्तियां ही पंजीकृत

भोपाल  मध्य प्रदेश में पिछले छह महीनों में 15,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों में से दस प्रतिशत का भी पंजीकरण केंद्रीय वक्फ पोर्टल, UMEED पर नहीं हो पाया है। राज्य और वक्फ के शीर्ष अधिकारियों ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को यह जानकारी दी। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के लिए 6 दिसंबर तक अपनी वक्फ संपत्तियों को इस पोर्टल पर पंजीकृत करने की समय सीमा तय की थी। केंद्र बढ़ाएगी समय सीमा सरकारी अधिकारियों ने पोर्टल पर सभी जानकारी भरने और वक्फ संपत्तियों को पंजीकृत करने में तकनीकी बाधाओं और रिकॉर्ड की अनुपलब्धता को इसका कारण बताया है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार 6 दिसंबर की समय सीमा को आगे बढ़ाएगी। केंद्र सरकार ने 6 जून को एक नया केंद्रीय वक्फ पोर्टल लॉन्च किया था। वक्फ बोर्ड के अनुसार, राज्य में 15,000 से अधिक वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें से केवल 1,200 संपत्तियों को ही अब तक केंद्रीय पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है, जो दस प्रतिशत से भी कम है। नौ लाख से अधिक हैं संपत्तियां केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जून में बताया था कि भारत में 9 लाख से अधिक सूचीबद्ध वक्फ संपत्तियां हैं। उन्होंने कहा था कि राज्यों को समय-सीमा का सख्ती से पालन करना होगा और बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास पंजीकृत सभी वक्फ संपत्तियों का विवरण निर्धारित 6 महीनों के भीतर पोर्टल पर अपलोड किया जाए। रिजिजू ने पोर्टल लॉन्च के बाद कहा था कि सभी पुरानी संपत्तियां जो कानून के अनुसार हैं – जिनका मालिकाना हक है और वैध हैं – उन्हें शामिल किया जाएगा। जो अवैध हैं और बिना किसी दस्तावेज के हैं, उन्हें सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा। नई वक्फ संपत्तियां, आगे जाकर, डेटाबेस में शामिल की जाएंगी। तकनीकी समस्या हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष संवर पटेल ने कहा कि पोर्टल में 'वक्फ का तरीका' (संपत्ति को वक्फ के रूप में कैसे सूचीबद्ध किया गया) का कॉलम नहीं है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश की कुल वक्फ संपत्तियों में से, 14,164 को सरकारी सर्वेक्षण के माध्यम से वक्फ के रूप में पंजीकृत किया गया था। उस कॉलम की अनुपस्थिति में जहां वक्फ का तरीका परिभाषित किया गया है, केंद्र के पोर्टल पर संपत्ति को सूचीबद्ध करना मुश्किल है। हमें उम्मीद है कि तकनीकी समस्या हल हो जाएगी और 6 दिसंबर की समय सीमा बढ़ा दी जाएगी। राज्य के पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों ने केंद्र के UMEED पोर्टल के साथ तकनीकी समस्याओं को स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वक्फ संपत्ति को पंजीकृत करने के लिए पोर्टल पर भरी जाने वाली सभी आवश्यक जानकारी भी राज्य में ऐसी कई संपत्तियों के लिए उपलब्ध नहीं है। पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया में मुतवल्ली (देखभाल करने वाले) द्वारा संपत्ति का विवरण दर्ज करना शामिल है। इसके बाद वक्फ बोर्ड द्वारा सत्यापन और नामित सरकारी अधिकारियों द्वारा अनुमोदन किया जाता है। रिकॉर्ड की जांच के बाद, 'UMEED' पोर्टल में एक प्रविष्टि की जाती है।  

सिंहस्थ के लिए तैयारी: उज्जैन पुलिस ने बनाया होटल चेक-इन अलर्ट ऐप

उज्जैन उज्जैन में महाकाल मंदिर के आसपास होटल में रुकने वाले यात्रियों का डेटा अब एक ऐप के माध्यम से पुलिस के पास ऑनलाइन उपलब्ध है। इससे शहर में आने वाले संदिग्धों के बारे में पुलिस को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। एसपी प्रदीप शर्मा ने बड़ी संख्या में उज्जैन आ रहे लोगों का डिजिटल डेटा रखने के लिए GuestReport.in नामक ऐप तैयार करवाया है। इस ऐप से उज्जैन के होटलों में रुकने वाले यात्रियों के नाम, उनकी पहचान, उनका मोबाइल नंबर सहित अन्य डेटा तत्काल पुलिस थाने, थाना प्रभारी और जिले के एसपी के पास रियल टाइम में पहुंच रहा है। ऐप में होटल संचालक को रोजाना अपनी होटल में आने वाले यात्रियों की जानकारी भरनी होती है। यह जानकारी होटल की वेबसाइट सहित संबंधित थाने पहुंच जाती है। पिछले साल आए थे 7 करोड़ श्रद्धालु महाकाल मंदिर के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले साल मध्य प्रदेश टूरिज्म के आंकड़ों में उज्जैन प्रदेश में सबसे ऊपर रहा, जहां करीब 7 करोड़ श्रद्धालु आए थे। इतनी बड़ी संख्या में उज्जैन पहुंच रहे श्रद्धालुओं के बारे में होटल की जानकारी पुलिस थाने तक पहुंचने और उसे खंगालने में करीब एक से दो हफ्तों का समय लग जाता था। लेकिन, उज्जैन पुलिस के एक ऐप से यह सारा काम आसान हो गया है। सिंहस्थ कुंभ में सबसे ज्यादा उपयोगी होगा माना जा रहा है कि उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ के दौरान दो महीने में करीब 30 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन आएंगे। इस दौरान जो लोग होटल, लॉज, धर्मशाला में रहेंगे, उनका डेटा इस ऐप के उपयोग से पुलिस के पास रियल टाइम में उपलब्ध रहेगा। करोड़ों श्रद्धालुओं की रियल टाइम ट्रेसेबिलिटी, कौन कहां ठहरा है। इसका डेटा तुरंत उपलब्ध होगा, गुमशुदा व्यक्तियों की तुरंत पहचान हो सकेगी। यह भी पता लग सकेगा कि कौन कहां रुका हुआ है। पूरे आयोजन में सुरक्षा और निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा सकेगा। अगर कोई यात्री अपनी होटल का पता भूल जाता है, तो भी ऐप के माध्यम से पता लगाया जा सकेगा। होटल वालों के लिए भी उपयोगी पुलिस के इस ऐप से न सिर्फ पुलिस को मदद मिल रही है, बल्कि होटल संचालक भी रोजाना पुलिस थाने जाकर अपनी डिटेल नोट करवाने जैसे झंझट से मुक्त हो गए हैं। जो होटल संचालक ऐप का उपयोग नहीं कर रहे हैं, उन्हें रोज सुबह होटल में रुकने वाले गेस्ट की जानकारी मैन्युअली कागज पर भरकर देनी होती है। इसके लिए रोजाना एक कर्मचारी होटल में पूरी शीट देने जाता है। इस ऐप से होटल वालों को भी कई सुविधाएं मिल गई हैं। अभी होटलों में, बाद में आश्रम और अखाड़ों को भी जोड़ेंगे एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि प्रति वर्ष 7 करोड़ से अधिक श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। भारी संख्या में होम स्टे और होटल आ गए हैं, इसलिए हमेशा अंदेशा बना रहता है कि बाहर से आने वाले लोगों की पूरी जानकारी पुलिस के पास होनी चाहिए। इन हाउस और एक पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। पोर्टल संचालक द्वारा सभी प्रकार के यात्रियों की जानकारी दर्ज की जा रही है। तत्काल संबंधित थाना प्रभारी, थाना और बिट प्रभारी के पास दर्ज हो जाती है। यह पूरा पेपरलेस है। कई तरह की फैसिलिटी, कोई संदिग्ध अलर्ट में है और अगर वह उज्जैन आकर रुका तो हमारे पास अलर्ट आ जाएगा।

MP में आरएसएस का नया कदम: Gen-Z युवाओं के लिए 34 नगरों में युवा संगम

भोपाल   दुनिया में इन दिनों जेनरेशन जूमर्स यानी जेन-जी (Gen-Z) को लेकर बहस छिड़ी है। जेन-जी वर्ग के युवाओं की पहचान आंदोलन करने के रूप में हो चुकी है। नेपाल में सरकार का तख्ता पलट में जेन-जी की अहम भूमिका थी। हाल ही में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने इंदौर में कहा था कि लोकतंत्र को बचाने के लिए जेन-जी को ही आगे आना पड़ेगा, लेकिन इन सबसे अलग राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) इन दिनों युवाओं को लेकर खास काम कर रहा है।  34 शहरों में शुरू हुआ युवा संगम हाल ही में इंदौर सहित पांच जिलों के 34 नगरों में बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी में 'युवा संगम' का आयोजन किया गया। इस युवा संगम का उद्देश्य युवाओं के मन में राष्ट्र प्रथम भाव को जोड़ना था। जोर दिया गया कि भारत में युवाओं की संख्या विश्व में सर्वाधिक है और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। आरएसएस घर घर जाकर लोगों को बताएंगे  100 वर्षो का संघर्ष   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हर घर संपर्क अभियान के तहत प्रखंड के सभी पंचायतों में स्वयंसेवक संघ का पत्रक, पुस्तक एवं झोला लेकर हर गांव और हर समाज के लोगों तक पहुंच रहे हैं। इस अभियान के तहत लोगों के बीच पुस्तकों एवं पत्रकों के वितरण के लिए प्रखंड मुख्यालय  में सभी सक्रिय स्वयंसेवकों की बैठक हुई। इसमें सक्रिय स्वयंसेवकों को संघ का बैग, संघ का पुस्तक एवं पत्रक दिया गया। इस अवसर पर उन्हें आरएसएस के बारे में बताया गया तथा सभी से अपने-अपने गांव या पंचायत में हर घर संपर्क कर लोगों को संघ से जुड़ने के लिए प्रेरित करने को कहा गया। इस अभियान का उद्देश्य समाज में एक सकारात्मक वातावरण तैयार करना तथा संघ के विचारों को घर-घर तक पहुंचाना है। इसके लिए स्वयंसेवकों ने सनातन समाज के सुमंगल, राष्ट्र की अखंडता एवं संगठन की भावना को लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया। क्षेत्र के सभी परिवारों एवं सभी वर्गों में संपर्क कर जन-जन तक राष्ट्रहित की बात पहुंचाई जा रही है। योजना की जानकारी संघ ने हाल ही में प्रत्येक नगर में युवा संगम का आयोजन किया था। 'युवा संगम' ने कॉलेज छात्रों को एकत्रित कर अलग-अलग सत्र किए, जिसमें उन लोगों को खासकर चिह्नित कर शामिल किया गया जिनका पूर्व से संघ से परिचय नहीं था। संगम में बौद्धिक और अन्य सत्रों में माध्यम से उन्हें संघ की 100 वर्षों की यात्रा और कार्य योजना की जानकारी दी गई। युवा संगम का सीधा सीधा उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र प्रथम भाव से जोड़ना था। मालूम हो, इन दिनों विश्वभर में इस उम्र (जेनरेशन जूमर्स या जेन जी) के युवा आंदोलन के लिए पहचाने जाते हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आरएसएस विभिन्न आयोजन कर रहा है। इंदौर में विजयादशमी पर पथ संचलन हुआ। 1.40 लाख से अधिक स्वयंसेवक शामिल हुए। कुछ समय बाद वृहद हर घर सपर्क अभियान और हिन्दू सम्मलेन जैसे आयोजन की भी प्रस्तावना है।

शिक्षकों के लिए नया नियम: परीक्षा पास करना जरूरी, NIOS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएं

भोपाल  बच्चों की परीक्षा लेने वाले शिक्षकों को भी अब परीक्षा देनी होगी और अगर इसमें फेल हुए तो उन्हें नौकरी से हाथ धोना होगा। दरअसल प्रदेश में पांच हजार शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। प्राइमरी स्कूलों में बतौर शिक्षक भर्ती हुए इन शिक्षकों को पहले ब्रिज कोर्स करना होगा। छह माह का यह कोर्स नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) करवाएगा। इसमें अगर फेल हो गए तो शिक्षक की नौकरी जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट का है निर्देश प्रदेश में 94 हजार सरकारी स्कूल हैं। प्राइमरी कक्षा में 1.40 लाख शिक्षक हैं। इनमें से करीब पांच हजार ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति बीएड के आधार पर हुई। सुप्रीम कोर्ट से जारी निर्देश में पात्रता परीक्षा पास करना शिक्षकों को अनिवार्य हो गया। दो साल में भर्ती हुए ये शिक्षक इस दायरे में आ रहे हैं। दायरे में आ रहे हैं ये शिक्षक शिक्षकों को ब्रिज कोर्स कराने लोक शिक्षण संचालनालय से निर्देश जारी हुए हैं। इसके तहत हर जिले को ऐसे शिक्षकों को एनआइओएस के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना है। इसकी आखिरी तारीख 25 दिसंबर है। 6 माह का कोर्स पूरा कर शिक्षकों को सालभर में सार्टिफिकेट जमा कराना होंगे। यह हैं निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2023 को आदेश पारित किया था। इसके मुताबिक इस तारीख के बाद प्राइमरी स्कूलों मेें बीएड के आधार पर शिक्षकों की भर्ती मान्य नहीं होगी। सेवा समाप्त हो सकती है बीएड के आधार पर भर्ती प्राइमरी शिक्षकों को ब्रिज कोर्स करना होगा। इसके लिए रजिस्ट्रेशन होना है। सभी जिलों को निर्देश जारी हुए हैं। एक साल में कोर्स पूरा न करने पर सेवाएं समाप्त की जा सकती है। – केके द्विवेदी, संचालक, लोक शिक्षण संस्थान

सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद के कार्यों की समीक्षा

भारत सरकार के दल की मध्यप्रदेश के अधिकारियों से हुई चर्चा भोपाल  सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद एमएसईएफसी के कार्यों की एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार की निदेशक श्रीमती अंकिता पांडे एवं विधि विशेषज्ञ सुश्री ईशा अग्रवाल ने गत दिवस समीक्षा की। आयुक्त, एमएसएमई श्री दिलीप कुमार तथा परिषद के अशासकीय सदस्यों श्री राजेश मिश्रा अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती, श्री महेश गुप्ता भूतपूर्व अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती एवं शासकीय सदस्य सिडबी बैठक में मौजूद थे। बैठक के दौरान एमएसएमई ओडीआर पोर्टल पर दर्ज प्रकरणों के त्वरित निपटारे तथा लंबित मामलों को ओडीआर प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की गई ताकि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को समयबद्ध तथा पारदर्शी न्यायिक सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। मध्यप्रदेश एमएसईएफसी के सचिव श्री राजेश अग्रवाल, सहायक संचालक श्री शशिभूषण दुबे एवं सहायक प्रबंधक श्रीमती अनुश्री सक्सेना द्वारा ओडीआर पोर्टल में मध्यप्रदेश की प्रभावी सहभागिता के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी उन्होंने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश एमएसईएफसी द्वारा व्हाट्सऐप एवं ई-मेल के माध्यम से नोटिस जारी किए जा रहे हैं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्षकारों को घर बैठे सुनवाई का अवसर प्रदान किया जा रहा है तथा परिषद द्वारा कोई कोर्ट फीस नहीं ली जाती। साथ ही आरआरसी के माध्यम से वसूली की प्रक्रिया से एमएसई इकाइयों को त्वरित राहत मिल रही है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा मध्यप्रदेश एमएसईएफसी की सुनवाई बैठक का अवलोकन भी किया गया तथा ओडीआर पोर्टल पर राज्य की सक्रिय सहभागिता एवं प्रभावी कार्य प्रणाली की सराहना की गई। इस अवसर पर श्रीमती पांडे ने ओडीआर प्लेटफॉर्म को एमएसएमई विवाद निवारण के लिए एक सशक्त और उपयोगी डिजिटल पहल बताया। आयुक्त श्री दिलीप कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश एमएसईएफसी, एमएसएमई मंत्रालय के साथ निरंतर समन्वय बनाते हुए कार्य कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश इस डिजिटल पहल में अग्रणी राज्यों में शामिल है और भविष्य में भी ओडीआर प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए पूर्ण सहयोग प्रदान करता रहेगा।