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बस परमिट नियमों में होगा बड़ा बदलाव, 899 बसों पर लटकी तलवार, समय सीमा के साथ जांच के आदेश

भोपाल राज्य सरकार बस परमिट नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर रही है। अब किसी भी बस को उसके रूट के लिए उतनी ही अवधि का परमिट दिया जाएगा, जितनी उसकी निर्धारित आयु है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी बस का संचालन निर्माण तिथि से 15 वर्ष तक ही संभव है, तो परमिट भी अधिकतम 15 वर्ष तक का ही होगा। वर्तमान व्यवस्था में परमिट पांच-पांच वर्ष की अवधि के लिए जारी किए जाते हैं, जिसके कारण कई मामलों में बसों के परमिट 15 वर्ष से भी अधिक अवधि के लिए वैध दिखाई देते हैं। जबकि राज्य के भीतर बस संचालन की अधिकतम सीमा 15 वर्ष और अंतरराज्यीय संचालन की सीमा 10 वर्ष तय है।   हाल ही में परिवहन सचिव मनीष सिंह ने परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर उन 899 बसों की सूची भेजी है जिनके परमिट 15 वर्ष से अधिक अवधि के लिए जारी किए गए हैं। सचिव ने आशंका जताई है कि ये बसें संभवतः अभी भी चल रही होंगी, इसलिए इनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। इस पत्र के बाद परिवहन आयुक्त कार्यालय ऐसे नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत बसों के परमिट उनकी अधिकतम आयु की अवधि के भीतर ही सीमित रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार, परमिट वाहन मालिक के नाम पर जारी होता है, जिसमें बस नंबर और रूट का उल्लेख रहता है। पांच वर्ष का परमिट इसलिए दिया जाता था ताकि बस की 15 वर्ष की अवधि पूरी होने पर मालिक उसी रूट पर अनुमति लेकर दूसरी बस संचालित कर सके और नया परमिट लेने की आवश्यकता न पड़े। लेकिन अब नई व्यवस्था में यह समयसीमा बस की अधिकतम आयु से आगे नहीं जाएगी।  

एमपी जेलों में 46 हजार कैदियों के बीच एनआरआई भी पड़ सकते हैं परेशान, एसआईआर ने बढ़ाई टेंशन

भोपाल  मध्य प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों में मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानि एसआईआर शुरू हो गया है. इसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं की वोटर लिस्ट का मिलान कर रहे हैं. लेकिन मिलान साल 2003 की मतदाता सूची से किया जा रहा है. ऐसे में कई लोगों को अगले चुनाव में मताधिकार से वंचित रहना पड़ सकता है. इस समस्या को लेकर अब तक सरकार ने कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किया है. ऐसे समझें एसआईआर की प्रक्रिया एसआईआर का मतलब है मतदाता सूची का विशेष गहन निरीक्षण यानि मतदाता सूची को अपडेट कर वास्तविक मतदाताओं की पहचान करना. इसके लिए बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना पत्र वितरित कर रहे हैं. मतदाताओं द्वारा इस फार्म को भरकर बीएलओ को वापस लौटाना अनिवार्य है. अन्यथा मतदाता सूची से नाम काटा जा सकता है. एसआईआर में यहां उलझ रहा पेंच दरअसल प्रत्येक मतदाता को जो फार्म दिया गया है, उसमें जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर भरना है. इसके साथ ही पुरानी वोटर लिस्ट का एपीआईसी नंबर भी दर्ज करना होगा. फार्म के साथ एक पासपोर्ट साइज फोटो भी लगानी है. खास बात यह है कि वर्तमान वोटर लिस्ट को वर्ष 2003 की लिस्ट से मिलाया जा रहा है. लेकिन कई लोग ऐसे हैं, जो साल 2003 में किसी और स्थान पर थे, लेकिन अब कहीं और निवास कर रहे हैं, ऐसे में उन लोगों के लिए एसआईआर प्रक्रिया चुनौती बन सकती है. सरकारी और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को टेंशन कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी ने बताया कि सेंट्रल गवर्नमेंट और राज्य के लाखों ऐसे कर्मचारी हैं, जो साल 2003 में किसी और जिले में पदस्थ थे. उन्होंने उस समय कहीं और वोट डाला था. लेकिन आप ट्रांसफर के बाद किसी और जिले में पदस्थ हो गए हैं या फिर ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारी जो सेवाकाल में किसी और शहर में थे और रिटायरमेंट के बाद किसी और शहर में बस गए हैं. ऐसे लोगों को साल 2003 की मतदाता सूची से वोटर लिस्ट का मिलान कराना बड़ी कठिनाई प्रक्रिया होगी. 46 हजार कैदियों का सत्यापन अधर में जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया में व्यक्ति की प्रत्यक्ष मौजूदगी जरूरी नहीं होती है. वह व्यक्ति कहीं भी रहे, लेकिन उसके परिजन या प्रतिनिधि साल 2003 की मतदाता सूची के साथ वर्तमान सूची का मिलान कर फार्म भरकर बीएलओ को दे सकते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश की जेलों में बंद करीब 46 हजार कैदियों लिए यह काम काफी कठिन है. यही कठिनाई एनआरआई या प्रवासियों के साथ है. क्योंकि इन लोगों के परिजन या रिश्तेदार यदि दूसरे राज्यों में रहते हैं, तो उन्हें फार्म भरने और जमा करने में काफी संघर्ष करना पड़ सकता है. ऑनलाइन फार्म भर सकते हैं एनआरआई जो लोग लंबे समय से विदेश में रह रहे है, उनके परिजनों को गणना प्रपत्र में उनकी जानकारी देना होगी. 2003 की वोटर लिस्ट में अगर उनका या उनके माता-पिता का नाम है तो वह यह फार्म भर सकते है. यदि उन्होंने दूसरे देश की नागरिकता ले ली है तो वे वोटिंग लिस्ट से बाहर कर दिए जाएंगे. हालांकि यदि फिजिकल फार्म नहीं भर सकते, तो ऐसी परिस्थिति में एनआरआई ऑनलाइन फार्म भी भर सकते है. अधिकारी भी नहीं दे रहे जबाव इस मामले में जब गोविंदपुरा एसडीएम रवीश श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही. वहीं डिप्टी डीईओ भी इसका जबाव नहीं दे सके. वहीं इस मामले में जेल डीजी वरुण कपूर का कहना है कि इलेक्शन कमीशन से अभी जेलों में बंद कैदियों के एसआईआर को लेकर कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. इस संबंध वही जानकारी दे पाएंगे. 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: सिंहस्थ का विश्वस्तरीय आयोजन के लिए तैयारियां चल रही हैं

सिंहस्थ के विश्वस्तरीय आयोजन के लिए तैयारियां जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के लिए किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार होंगी गतिविधियां भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह सौभाग्य का विषय है कि इस बार उज्जैन में भव्य, दिव्य और विश्व स्तरीय सिंहस्थ: 2028 मेले का आयोजन किया जाएगा। राज्य सरकार इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पर गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। अब उज्जैन सिर्फ हमारा धार्मिक शहर ही नहीं, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन और ज्ञान-विज्ञान के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उज्जैन में इस बार अद्भुत सिंहस्थ का आयोजन होने वाला है। इसके लिए राज्य सरकार जिला प्रशासन, साधु-संतों के साथ-साथ किसानों से भी सुझाव ले रही है। हर वर्ग की परेशानियों को दूर करते हुए सबको साथ लेकर बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के संबंध में किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार गतिविधियां संचालित की जाएंगी। केन्द्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार के उचित नियोजन के परिणामस्वरूप सिंहस्थ के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। सिंहस्थ का आयोजन विश्वस्तरीय है और इसके लिए विश्वस्तरीय प्रबंधन किए जा रहे हैं। भविष्य में किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की विषम परिस्थिति निर्मित न हो, इसके लिए सभी तरह के प्रबंध राज्य सरकार कर रही है। सिंहस्थ : 2028 की व्यवस्थाएं अब तक के सभी मेलों से बेहतर होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए यह विचार व्यक्त किए।  

28478 उपभोक्ताओं ने समाधान योजना में लिया लाभ, 19 करोड़ 31 लाख रुपए का सरचार्ज माफ

भोपाल  3 नवंबर से शुरू हुई मध्य प्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में अब तक 28 हजार 478 बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 35 करोड़ 47 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 19 करोड़ 31 लाख का सरचार्ज माफ किया गया है।लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी भोपाल के लिये portal.mpcz.in पर जाकर पंजीयन कराना होगा। इसमें प्रथम चरण में एकमुश्त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ होगा जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कम होता जाएगा। एकमुश्त भुगतान पर ज्यादा लाभ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल ने बताया कि समाधान योजना 2025- 26 के लागू होने से ऐसे अनेक उपभोक्ता हैं जो बकाया बिल जमा कर रहे हैं और एकमुश्त बकाया जमा राशि जमा करने पर अधिकतम छूट का लाभ ले रहे हैं। कंपनी ने बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रथम चरण में ही एकमुश्त भुगतान कर इस योजना में शामिल होकर सरचार्ज में अधिकतम छूट का लाभ उठाएं।कि यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाधान योजना के प्रथम चरण में सरचार्ज में 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमुश्त अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है। समाधान योजना के बारें में     समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है।     इस योजना में उपभोक्ता को प्रथम चरण में एकमुश्त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ होगा जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कम होता जाएगा। यह योजना दो चरणों में प्रारंभ होकर प्रथम चरण की शुरुआत 3 नवंबर से 31 दिसंबर 2025 तक रहेगी जिसमें 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक सरचार्ज माफ किया जाएगा।     इसी तरह द्वितीय और अंतिम चरण में जो कि एक जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी, इसमें 50 से 90 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। प्रथम चरण में एकमुश्त राशि जमा कराने पर अधिकतम लाभ होगा।     समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल के लिये portal.mpcz.in पर पंजीयन कराना होगा। कंपनी के उपाय ऐप पर भी पंजीयन की सुविधा शीघ्र ही मिलने लगेगी। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है।     घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं। RDSS योजना: अब तक 4 लाख 69 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर स्‍थापित     केन्द्र सरकार की रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) योजना के अंतर्गत मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने का काम त्वरित गति से चल रहा है। जहां स्‍मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, वहां पर समय पर बिलिंग तथा रीडिंग हो रही है तथा दिन के टैरिफ में 20% की छूट भी मिलनी शुरू हो गई है।     कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में अब तक 04 लाख, 69 हजार 069 स्मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं। इनमें सर्वाधिक भोपाल शहर वृत्‍त में 02 लाख, 64 हजार 415 स्‍मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं।     नए टैरिफ आर्डर के अनुसार स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को अब खपत के आधार पर दिन के टैरिफ में 20% की छूट भी दी जा रही है। अक्‍टूबर माह का बिल जो कि नवंबर माह में जारी हुआ है, उसमें दिन के टैरिफ में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपयोग की गई विद्युत के दौरान बनी यूनिट पर छूट अलग कॉलम में अंकित की गई है।

MP पुलिस: राज्य सेवा के अफसरों को जल्द मिल सकता है आईपीएस अवार्ड

भोपाल  राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को आइपीएस अवार्ड देने की प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिर गई है। दो माह पहले 12 सितंबर को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की हुई बैठक को निरस्त कर दिया गया है। अब 21 नवंबर को दोबारा यह बैठक आयोजित की जाएगी। यह पहला अवसर है जब राज्य पुलिस सेवा से आइपीएस अवार्ड के लिए हुई डीपीसी को निरस्त किया गया है। बता दें, 1997-98 बैच के 15 अफसरों के नामों पर विचार कर पैनल तैयार किया गया था। इनमें से पांच अधिकारियों को आइपीएस अवार्ड मिलना था। लेकिन डेढ़ माह तक आदेश की प्रतीक्षा के बाद अचानक डीपीसी को निरस्त कर दिए जाने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं। इन 15 अफसरों के नाम पर होगा विचार आगामी बैठक 21 नवंबर को होगी। इसमें 15 अफसरों के नामों पर विचार होना है। इनमें सीताराम ससत्या, अमृत मीणा, विक्रांत मुराब, सुरेंद्र कुमार जैन, आशीष खरे, राजेश रघुवंशी, निमिषा पांडेय, राजेश कुमार मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सव्यसाची सर्राफ और समर शर्मा शामिल हैं। अब निगाहें दोबारा होने वाली डीपीसी में होने वाले निर्णय पर टिकी हुई है। दो नामों पर पेच सूत्रों के अनुसार, पैनल में शामिल दो अधिकारियों के मामलों पर पेच फंसा हुआ है। वरिष्ठता क्रम में पहले नंबर पर आने वाले सीताराम ससत्या के खिलाफ एक विभागीय जांच लंबित है, तो दूसरे नंबर की वरीयता वाले अमृत मीणा का जाति प्रमाण पत्र विवाद अदालत में विचाराधीन है। इन दोनों मामलों के चलते पैनल की विश्वसनीयता व पारदर्शिता को लेकर शंकाएं हैं। अब चर्चा है, पहली डीपीसी को निरस्त किया गया, तो अब दोबारा बैठक में मानक क्या होंगे।

जगदीप धनखड़ भोपाल में 21 नवंबर को होंगे मौजूद, इस्तीफा देने के बाद पहला सार्वजनिक कार्यक्रम

भोपाल  पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 21 नवंबर को भोपाल में एक आरएसएस नेता की पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के आयोजकों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।जुलाई में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद धनखड़ का यह पहला सार्वजनिक भाषण होने की संभावना है। इससे पहले उन्हें उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में देखा गया था। मनमोहन वैद्य की किताब के विमोचन में होंगे शामिल भोपाल के रवीन्द्र भवन में 21 नवंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य की किताब "हम और यह विश्व" का विमोचन होगा। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ संबोधन देंगे। कार्यक्रम में वृंदावन के श्री आनंदम धाम आश्रम के पीठाधीश्वर रीतेश्वर जी महाराज और वरिष्ठ पत्रकार विष्णु त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्य वक्ता रहेंगे जगदीप धनखड़ सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने पीटीआई को बताया कि धनखड़ 21 नवंबर को रवींद्र भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य की पुस्तक "हम और यह विश्व" के विमोचन समारोह में मुख्य वक्ता होंगे। उन्होंने बताया कि वृंदावन-मथुरा स्थित आनंदम के मुख्य पुजारी रितेश्वर जी महाराज भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और 12 सितंबर को राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के अलावा, सार्वजनिक रूप से कहीं भी नज़र नहीं आए। कांग्रेस धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठा रही है। विपक्षी दल ने पिछले महीने कहा था कि धनखड़ अपने सभी पूर्ववर्तियों की तरह एक विदाई समारोह के हकदार थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस्तीफा देने के बाद उप राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में आए थे नजर 21 जुलाई को उप राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने के बाद जगदीप धनखड़ नजर नहीं आए। 12 सितंबर को नवनिर्वाचित उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में वह शामिल हुए थे। लेकिन, पद छोड़ने के बाद जगदीप धनखड़ किसी ऐसे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। जिसमें उन्होंने मंच से कोई भाषण या मीडिया में कोई बयान दिया हो। इस्तीफे के ठीक 4 महीने बाद होगा सार्वजनिक कार्यक्रम उप राष्ट्रपति पद छोड़ने के ठीक चार महीने बाद जगदीप धनखड़ का यह पहला कार्यक्रम होगा। जिसमें वे संबोधन देंगे। 21 जुलाई को उन्होंने इस्तीफा दिया था और 21 नवंबर को ठीक चार महीने बाद वे सार्वजनिक कार्यक्रम में मंच पर नजर आएंगे। जगदीप धनखड़ ने 21 सितंबर को उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों को इस्तीफे की वजह बताया था। वे 74 साल के हैं। धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। राष्ट्रपति को पत्र में उन्होंने लिखा- स्वास्थ्य की प्राथमिकता और डॉक्टरी सलाह का पालन करते हुए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं। पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति को उनके सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल को भी सहयोग के लिए आभार जताया।  

संकट में स्कूल भवन: 12 हजार स्कूलों में से 322 बिना भवन, 5600 जर्जर भवन में चल रहे पढ़ाई

भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति का अंदाज इसी से बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में 12000 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक ही शिक्षक पदस्थ है, इन स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की कमी साफ नजर आती है. जबकि कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का आभाव भी साफ नजर आता है. कही बिजली नहीं है तो कही के भवन ठीक नहीं हैं. शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफ्रोमेशन की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. जिसमें यह बताया गया है कि मध्य प्रदेश अभी भी नेशनल पॉलिसी यानि एनईपी के लक्ष्यों प्राप्त करने से फिलहाल बहुत दूर नजर आता है.  प्रदेश के 1,22,20 स्कूलों में से 322 के पास भवन नहीं है, जबकि 5,600 स्कूल जर्जर भवन में संचालित हो रहे हैं। इसी तरह करीब चार हजार से अधिक स्कूलों में बालिका व बालिकाओं के लिए शौचालय नहीं है तो करीब डेढ़ हजार से अधिक स्कूलों में प्रयोगशाला नहीं है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यूडाइस यानी स्कूल शिक्षा पर एकीकृत जिला सूचना रिपोर्ट सत्र 2024-25 में यह बात सामने आई है। करीब 200 करोड़ रुपये स्वीकृत इसे देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के आठ हजार हाई व हायर सेकंडरी स्कूलों में से करीब 200 ऐसे स्कूलों को चिह्नित किया है, जिनमें अतिरिक्त कक्ष, शौचालय व प्रयोगशाला, बाउंड्रीवाल नहीं हैं। इन स्कूलों के लिए विभाग ने करीब 200 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।   इसमें से 66 प्रतिशत राशि वित्त विभाग की ओर से जारी कर दी गई है। प्रत्येक स्कूलों को करीब 22 से 30 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। विभाग ने स्कूलों को जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कर फोटो भेजने के लिए कहा है, ताकि इन स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके। 4,072 स्कूलों में बालिका शौचालय नहीं जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के 4,072 स्कूलों में बालिका शौचालय और 4,926 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय नहीं है। वहीं 564 में पेयजल सुविधा नहीं है तो 39,500 में बाउंड्रीवाल और करीब छह हजार में खेल मैदान नहीं है। नया भवन एक ही इकाई में होना चाहिए जिन स्कूलों की भवन संरचनाएं अत्यंत जर्जर व जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। उन सभी भवनों को ध्वस्त कर उसी स्थान पर नए भवन का निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं। नवीन भवन का निर्माण इस प्रकार कराया जाएगा, ताकि वर्तमान भवन के साथ समाहित हो। पूरा भवन एक ही इकाई के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। एक शिक्षक वाले स्कूल  मध्य प्रदेश के 12 हजार सिंगल शिक्षकों वाले स्कूलों में 9620 स्कूल प्राइमरी हैं, यानि यहां पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी केवल एक ही शिक्षक की है, जबकि अपर प्राइमरी की स्कूलों की स्थिति 2590 है, वहीं छात्र शिक्षक अनुपात की बात की जाए तो 26 प्रतिशत प्राईमरी और 45.8 प्रतिशत अपर प्राइमरी स्कूल हैं. वहीं 23087 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं जहां 30 छात्र भी नहीं हैं. वहीं 451 बस्तियों में प्राइमरी स्कूल भी नहीं हैं. जिससे मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति का फिलहाल पता लगाया जा सकता है. यह आंकड़े यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफ्रोमेशन की रिपोर्ट के अनुसार ही सामने आए हैं.  वहीं इस मामले में स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि राज्य के सभी स्कूलों में व्यवस्थाएं ठीक करने की पूरी कोशिश की जा रही है. शौचालय, पेयजल और मरम्मत के कामों में तेजी लाई जा रही है. जबकि स्कूलों की व्यवस्थाओं को बेहतर भी किया जा रहा है. लेकिन यह रिपोर्ट एमपी में चर्चा में जरूर बनी हुई है. प्रदेश के आंकड़े     1,22,20 प्रदेश में स्कूलों की संख्या     10,800 बिजली आपूर्ति नहीं     14,916 लाइब्रेरी नहीं है     2,301 डिजिटल लाइब्रेरी नहीं     1,19,412 खेल का मैदान नहीं     6,213 पीने का पानी उपलब्ध नहीं     564 पीने के पानी की सुविधा नहीं     1,365 बालिकाओं के लिए शौचालय नहीं

नियमित फॉलोअप करें और समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य करें पूर्ण: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में नियुक्ति प्रक्रिया अधोसंरचना विकास कार्यों और उपकरण खरीद प्रक्रियाओं की वृहद समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधोसंरचना विकास कार्यों, भर्ती प्रक्रिया और उपकरण खरीद की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं का नियमित फॉलोअप किया जाए और निर्धारित समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण होना सुनिश्चित किया जाए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं—विशेषज्ञ चिकित्सकों, स्टाफ नर्स, पैरा-मेडिकल स्टाफ और तकनीकी पदों—की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए रिक्त पदों की शीघ्र भर्ती अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, मेरिट और गति—इन तीनों का समन्वय सुनिश्चित किया जाए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बुदनी चिकित्सा महाविद्यालय और सिंगरौली मेडिकल कॉलेज से जुड़े निर्माण, उपकरण और अकादमिक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि दोनों संस्थानों के सभी आवश्यक कार्य समय पर पूर्ण हों। उन्होंने एयर एम्बुलेंस सेवा के सुदृढ़ीकरण पर भी जोर दिया और निर्देश दिए कि गंभीर रोगियों को तेज, सुरक्षित और सक्षम आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने के लिए इस सेवा को और अधिक प्रभावी एवं सुगठित बनाया जाए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने एमपीपीएचएससीएल के माध्यम से की जा रही उपकरण खरीद प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए जोर दिया कि चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद में पारदर्शिता और गुणवत्ता सर्वोपरि हो। उन्होंने आपूर्ति समयसीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा प्राथमिकता वाले संस्थानों में उपकरणों की शीघ्र उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री तरुण राठी, तथा एमपीपीएचएससीएल के प्रबंध संचालक श्री मयंक अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

दिल्ली कूच की तैयारी पर ब्रेक: 100 किसानों को नर्मदापुरम में ट्रेन से रोका, विरोध में रेलवे स्टेशन पर किया प्रदर्शन

नर्मदापुरम अपनी मांगों के लिए तमिनलाडु से दिल्ली प्रदर्शन करने जा रहे लगभग 100 किसानों को पुलिस ने सोमवार शाम रेलवे स्टेशन पर उतारा। राष्ट्रीय दक्षिण भारतीय नदी संपर्क किसान संगठन के तत्वावधान में किसान जीटी एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे थे। सूचना मिलने पर पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर किसानों को उतारा। किसानों ने अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया ट्रेन से उतारे जाने के विरोध में किसानों ने रेलवे स्टेशन पर अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। साथ ही तमिल भाषा में जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी किसानों में पुरुषों के साथ बुजुर्ग, महिलाएं भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारी किसानों को उतारने के साथ ही प्रशासन अब उन्हें वापस करने का इंतजाम कर रहा है। वर्तमान में शहर के एक निजी गार्डन में किसानों के भोजन की व्यवस्था की जा रही है। तमिलनाडु एक्सप्रेस से भी उतारे किसान नर्मदापुरम की तरह की इटारसी रेलवे स्टेशन पर तमिलनाडु एक्सप्रेस से प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे लगभग 80 किसानों को उतारा गया। सभी किसानों को बस के माध्यम से नर्मदापुरम लाया गया। इन किसानों के लिए रात्रि भोजन की व्यवस्था भी नर्मदापुरम में प्रशासन ने की है। साथ ही सुबह सभी किसानों को वापस तमिलनाडु पहुंचाने का इंतजाम किया जाएगा।

प्रदेश के 260 सांदीपनि विद्यालयों में 950 स्कूल लीडर्स के अनुकरणीय प्रयासों को सराहना

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये किये जा रहे हैं प्रयास भोपाल  प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सांदीपनि विद्यालय शिक्षण नेतृत्व और शैक्षिक वातावरण में गुणवत्ता के नये मानक प्रस्तुत कर रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये इन विद्यालयों में शिक्षकों को उनके नवाचारी प्रयासों के लिये राज्य स्तरीय पहचान प्रदान करने तथा उनके प्रोत्साहन के लिये "प्रेरक प्रयास" कार्यक्रम की अभिनव पहल प्रारंभ की गई है। इस पहल से विद्यालयों के स्कूल लीडर्स और शिक्षकों द्वारा किये जा रहे अनुकरणीय एवं प्रभावी कार्यों को हर सप्ताह राज्य स्तर से सभी विद्यालयों में विस्तारित किया जा रहा है। प्रेरक प्रयास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सांदीपनि विद्यालय स्तर पर हो रहे हर सकारात्मक प्रयास, चाहे वह छोटा हो या बड़ा उनकी समय पर पहचान हो और सबसे सामने लाया जाये। इस प्रयास से सीखने और सिखाने की परंपरा को बढ़ावा मिल रहा है। इस कार्यक्रम में हर सप्ताह विद्यालयों में नेतृत्व, शिक्षण पद्धति, विद्यार्थी की उपस्थिति एवं प्रगति, नवाचार को पहचान कर चयन किया जाता है, जिन्हें तीन श्रेणियों में आरंभकर्ता, प्रयासकर्ता, सर्वोत्तम गुणवत्ता के रूप में बांटा जाता है। उन्हें विद्यालय स्तर पर सम्मानित कर राज्य स्तर पर बढ़ावा देने के लिये बहुरंगीय पोस्टर के माध्यम से सभी शिक्षकों के बीच साझा किया जाता है। प्रदेश में 260 सांदीपनि विद्यालयों में 950 से अधिक शिक्षकों के अनुकरणीय प्रयासों को राज्य स्तर पर पहचान दिलायी गयी है। विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से स्वयंसेवकों को आमंत्रण केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विद्यांजलि पोर्टल की शुरूआत की है। इस पोर्टल के माध्यम से स्कूल शिक्षा को सामुदायिक भागीदारी से मजबूत करने के प्रयास किये जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति-2020 में स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में सहभागिता को प्रोत्साहित करने के बिन्दु को मुख्य रूप से जोड़ा गया है। विद्यांजलि एक ऐसा मंच है, जहाँ विभिन्न पृष्ठभूमि से जुड़े लोग जैसे पेशेवर, सेवानिवृत्त, गृहणियां और स्वयंसेवी संगठन अपने समय, कौशल और संसाधनों के माध्यम से शासकीय विद्यालयों की गुणवत्ता सुधार में सहभागी बन सकते हैं। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के अनुरूप शुरू की गयी है।