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बड़ी संख्या में महिलाओं को लाड़ली बहना योजना से वंचित, दस्तावेजी और बैंक त्रुटियां बनी बाधा

भोपाल   मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत दतिया जिले की 1,44,204 महिलाओं के बैंक खातों में मध्यप्रदेश सरकार ने अक्टूबर माह में 21 करोड़ 25 लाख 29 हजार 200 रुपए की राशि ट्रांसफर की। यह राशि प्रति महिला 1,500 रुपए के मान से दी गई। लेकिन इसी माह जिले की 2,949 लाड़लियों के नाम योजना की सूची से बाहर कर दिए गए। इनमें 452 महिलाओं ने स्वयं आवेदन देकर योजना का लाभ छोडने की इच्छा जताई, 2,196 महिलाए 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर अपात्र हो गई, जबकि 301 महिलाएं मृत पाई गई, जिनके नाम स्वाभाविक रूप से हटाए गए। अगर मृतक महिलाओं को छोडकर शेष 2,648 महिलाएं योजना में बनी रहतीं, तो सरकार को ?39 लाख 72 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता। योजना से वंचित महिलाओं की परेशानी जिले में 50 हजार महिलाएं ऐसी हैं जो लाड़ली बहना योजना में अपना नाम जुड़वाने के लिए प्रयासरत हैं। ये महिलाएं बैंक खाते में त्रुटि, आधार या समग्र आईडी लिंक न होने तथा दस्तावेज सत्यापन में देरी और पात्रता जांच की जटिल प्रक्रिया जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। नहीं जुड़ा पा रही नाम शहर के वार्ड क्रमांक 17 निवासी 48 वर्षीय शारदा देवी ने बताया कि वे पिछले एक साल से योजना में नाम जुड़वाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन दसतावेजों में कोई न कोई त्रुटि होने से नाम नहीं जुड़ पा रहा। ठंडी सडक़ निवासी 42 वर्षीय वैजयंती कुशवाह ने बताया कि घर से बार-बार निकल नहीं पाते। एक साल में करीब चार बार नाम जुड़वाने का प्रयास किया लेकिन जुड़ नहीं पाया। योजना से और भी महिलाओं के नाम हो सकते हैं बाहर लाड़ली बहना योजना की पात्रता जांच अब और सख्त हो रही है। विभागीय समीक्षा के अनुसार, जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो चुकी है या जिनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, उन्हें योजना से बाहर किया जा रहा है। यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से वित्तीय पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे ग्रामीण क्षेत्रों की कई महिलाओं पर सीधा असर पड़ेगा जो अभी भी योजना के सहारे घरेलू खर्च चला रही थीं। अगले कुछ महीनों में यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि दिसंबर-जनवरी में पात्रता की नई समीक्षा प्रस्तावित है। जारी है समीक्षा योजना से जुड़ी पात्रता की समीक्षा निरंतर जारी है। 60 वर्ष की आयु या मृत्यु की स्थिति में लाभ स्वतः समाप्त कर दिया जाता है।- अरविंद उपाध्याय, जिला कार्यकम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग दतिया

भोपाल में 2000 एकड़ क्षेत्र में बनेगी नॉलेज एंड एआई सिटी

साइंस सिटी प्रोजेक्ट के लिये 25 एकड़ भूमि होगी आवंटित मध्यप्रदेश, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का बनेगा हब 15 हजार 896 करोड़ का निवेश और 64 हजार से अधिक के रोजगार के अवसर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत में तकनीकी विकास का प्रारंभ हुआ स्वर्णिम युग एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव में उद्योगपतियों ने निवेश के प्रति जताई रूचि भोपाल  एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अब अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक नई उड़ान भरने जा रहा है। हम बहुत जल्द स्पेस टेक पॉलिसी-2025 लागू करने जा रहे हैं, जिससे राज्य में सैटेलाइट डेटा, रिमोट सेंसिंग और स्पेस स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन मिलेगा। भोपाल में 2000 एकड़ भूमि पर नॉलेज एण्ड एआई सिटी विकसित की जायेगी। यह सिटी आधुनिक हाईटेक सिटी और सायबर सिटी की तर्ज पर बनाई जायेगी। यहां विश्वस्तरीय संस्थान, अनुसंधान केन्द्र और स्टार्ट-अप्स एक साथ आएंगे जिससे मध्यप्रदेश भारत का एआई हब बन जायेगा। साइंस सिटी प्रोजेक्ट के लिये 25 एकड़ भूमि आवंटित्‍की जा रही है। यहां विज्ञान, नवाचार, और तकनीकी अनुसंधान के लिये अत्याधिक सुविधाएं विकसित की जायेंगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में हमारे युवाओं और विद्यार्थियों के लिये ज्ञान और प्रयोग का केन्द्र बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेन्टर में आयोजित मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में शामिल निवेशकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में तकनीकी विकास का स्वर्णिम युग प्रारंभ हुआ है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र को नई गति देने के लिये मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 का आयोजन इंदौर में किया है। यह आयोजन प्रदेश को भारत में उभरते टेक्नालॉजी मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने में की दिशा में ऐतिहासिक कदम सिद्ध हुआ है। राज्य सरकार की प्रगतिशील नीतियां, सुदृढ़ बुनियादी ढांचा, निवेश अनुकूल वातावरण और कुशल मानव संसाधन ने मध्यप्रदेश को ग्लोबल निवेशकों के लिये आकर्षण का केन्द्र बना दिया है। आईटी, एआई, सेमी कंडक्टर, ड्रोन, फिनटेक, क्लाउड और इएसबीएम जैसे क्षेत्रों में प्रदेश की प्रगति तीव्र गति से हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्दौर में मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में कुल 68 कार्य हुए जिनमें उद्घाटन, भूमि-पूजन, आवंटन-पत्र वितरण, एग्रीमेंट, एमोयू, नीति एवं पोर्टल लॉन्च सहित उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग हुई। इनसे प्रदेश में कुल 15 हजार 896 करोड़ का निवेश आएगा साथ ही 64 हजार 85 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह आयोजन प्रदेश की तकनीकी और औद्योगिक प्रगति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्वेस्टर्स समिट से अप्रेल 2025 में हुए टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 1.0 तक लगभग 99 निवेश प्रस्ताव हुए थे, जिससे लगभग 34 हजार करोड़ रूपये के निवेश और 2 लाख लोगों के लिये रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। इसमें 27 प्रोजेक्ट, जमीन आवंटन के साथ अन्य कार्यप्रगतिरत है। साथ ही 8 प्रोजेक्ट साइट विजिट के चरण में है, जो प्राप्त प्रस्तावों का 47 प्रतिशत है। मात्र 8 महिने में लगभग 6 हजार करोड़ का निवेश एवं 50 हजार लोगों का रोजगार का सपना साकार हुआ है। यह मध्यप्रदेश की टेक ड्रिवन ग्रोथ का सकारात्मक परिणाम है। 9 कंपनियों को प्रदाय किए भूमि आवंटन के आशय-पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में निवेश और उद्योग संवर्धन लिए 9 कंपनियों को भूमि आवंटन के लिये आशय पत्र जारी किए गए। इन इकाइयों से प्रदेश में कुल 10.61 करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 740 नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। इन आशय पत्रों से विभिन्न टेक्नोलॉजी, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कंपनियों को निवेश के लिए आवश्यक भूमि और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँगे जिससे मध्यप्रदेश में उद्यमिता और औद्योगिक विकास को और मजबूती मिलेगी। टॉस, इजीसॉफ्ट कंपनी, ओम्निस बिल्डकेयर एलएलपी, फ्लैट ट्रेडब्रोकिंग सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, असिस्ट क्लिक प्राइवेट लिमिटेड, लॉजिमोंक, मैमथ एग्जॉस्ट्स इंडिया, एमपी ऑनलाइन, रिद्धि एंटरप्राइज को भूमि आवंटन पत्र जारी किए गए हैं। एमओयू पर हस्ताक्षर कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश में निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में 7 महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इन एमओयू से प्रदेश में लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश होगा तथा 10 हजार 500 से अधिक नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। ये एमओयू सिलिकॉन वेफर विनिर्माण संयंत्र, आईटी पार्क विकास, टेक्नोलॉजी रिसर्च, गेमिंग, स्किल डेवलपमेंट एवं नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों से जुड़े हैं। इस पहल में सोमवेदा एंटरप्राइज, डीएवीवी आईटी पार्क, एएनएसआर, गेम डेवलपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया, इंडस आंत्रप्रेन्योर्स राजस्थान, मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग महू, कोडयोगी फाउंडेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। राज्य सरकार एवं भारतीय सेना के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के मध्य सायबर सुरक्षा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र और नागरिक तकनीकी क्षेत्र के बीच सहयोग को सुदृढ़ करते हुए अत्याधुनिक तकनीकों के विकास, नवाचार और कौशल वृद्धि को बढ़ावा देना है। यह पहल मध्यप्रदेश को उभरते तकनीकी क्षेत्रों में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  निवेश के लिये हुए एग्रीमेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में 85.51 करोड़ निवेश के महत्वपूर्ण एग्रीमेंट् पर हस्ताक्षर हुए। इसमें आईआईएसईआर भोपाल के सहयोग से एआई-संचालित ड्रोन प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना शामिल है, जिसमें उन्नत प्रयोगशालाएँ और स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन सहायता प्रदान की जाएगी। एल एंड टी एड्यूटेक के साथ मिलकर प्रदेश में स्किल ट्रेनिंग हेतु मास्टर सर्विस एग्रीमेंट किया जाएगा, इससे नये तकनीकी क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके अंतर्गत एलएनसीटी कॉलेज, ओरिएंटल ग्रुप, बंसल कॉलेज, सेज यूनिवर्सिटी, आईईएस यूनिवर्सिटी शामिल हैं। सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने सीआईएसओ पोर्टल किया लांच मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरकारी विभागों में सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सीआईएसओ पोर्टल की शुरुआत की। यह सुरक्षित और केंद्रीकृत प्लेटफ़ॉर्म रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, थ्रेट इंटेलिजेंस और अनुपालन प्रबंधन को सक्षम बनाएगा, जिससे सरकारी प्रणालियों में सुरक्षा, पारदर्शिता और दक्षता में अभूतपूर्व सुधार होगा। ड्रोन डेटा रिपॉज़िटरी का हुआ शुभारंभ “डिजिटल मध्यप्रदेश” की परिकल्पना को सशक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव  ने ड्रोन डेटा रिपॉज़िटरी (DDR) का भी शुभारंभ किया। यह पहल भूमि प्रबंधन, शहरी नियोजन, वन संरक्षण, सिंचाई और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में ड्रोन-आधारित डेटा के उपयोग … Read more

मप्र में जनजाति वर्गों को मिल रही गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं

जेईई और नीट में हुआ चयन, मप्र देश में दूसरे स्थान पर भोपाल मध्यप्रदेश में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूल के जनजातीय विद्यार्थियों ने जेईई और नीट जैसी कठिन परीक्षाएं उत्तीर्ण कर मध्यप्रदेश को देश की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर ला दिया है। वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश से जेईई मेंस में 51 विद्यार्थियों, जेईई एडवांस्ड में 10 और नीट में 115 विद्यार्थियों ने परीक्षा पास की। इससे देश में मध्यप्रदेश का स्थान दूसरे नंबर पर आ गया है। वर्ष 2022-23 तक इन परीक्षाओं में विद्यार्थियों के पास होने का आंकड़ा मात्र 2 था। स्पष्ट है कि शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई से अब इन शालाओं से ज्यादा से ज्यादा बच्चे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में पास हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय आदिवासी कार्य मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश में 63 एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूल संचालित है। देश में ऐसे 485 स्कूल है। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा 75 और तीसरे नंबर पर झारखंड में 51 स्कूल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार के निर्देश दिए है। मध्यप्रदेश में शैक्षणिक सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं। जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा शैक्षणिक सुविधाएं मिल रही है। प्रदेश में 34,557 शैक्षणिक संस्थाएं हैं। इनमें प्राथमिक शालाओं की संख्या 12913, माध्यमिक शाला 6788, हाई स्कूल 788, 1109, उच्चतर माध्यमिक शाला 804, सांदीपनी विद्यालय 94, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय 63, माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिषद 82, आदर्श आवासीय विद्यालय 8, छात्रावास 1593, आश्रम 1078 और क्रीड़ा परिषद 25 शामिल है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के कल्याण के लिए 2025-26 में 47296 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है जो पिछले बजट की तुलना में 15.91% ज्यादा है। शैक्षणिक और प्रशासनिक संवर्ग सहित 4600 पदों की पूर्ति की जा रही है। जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य 139422 विद्यार्थियों को छात्रावास और आश्रम शालाओं में प्रवेश देकर 94% सीट क्षमता का उपयोग किया गया है। जनजाति वर्ग में सिकल सेल एनीमिया की समस्या पर नियंत्रण के लिए विभाग की संस्थाओं और छात्रावास में पढ़ रहे विद्यार्थियों के सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग निरंतर की जा रही है। अभी तक कुल 1,11,744 विद्यार्थियों की जांच की जा चुकी है। विद्यार्थियों को निरंतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित महाविद्यालय छात्रावास में मेस संचालन के लिए 10 माह के स्थान पर 12 माह की शिष्यवृत्ति स्वीकृत की गई है। इन समुदायों के युवाओं को रोजगारमूलक प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने के उद्देश्य में 10 परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र की स्वीकृति भारत सरकार से मिल गई है। भारत दर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत 125 छात्र एवं 126 छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। इस साल 300 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। विभाग द्वारा अनुबंधित नॉलेज पार्टनर संस्थाओं से जनजातीय कार्य विभाग की शैक्षणिक संस्थानों सांदीपनि आवासीय विद्यालयों में जीवन कौशल प्रशिक्षण एवं फंडामेंटल लिटरेसी-न्यूमैरेसी के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति के माध्यम से एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में 1806 शैक्षणिक स्टॉफ और 40 प्राचार्य की नियुक्ति की गई है। आकांक्षा योजना के अंतर्गत 841 मेधावी विद्यार्थियों को जेईई और नीट कोचिंग दी जा रही है। सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले जनजाति वर्ग के 1000 विद्यार्थियों को सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 2 करोड़ के प्रावधान राशि वितरित की गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 5 संभागों में परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र निर्माण को भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है।  

ग्वालियर को स्मार्ट सिटी के रुप में पहचान मिलेगी : मंत्री तोमर

मंत्री श्री तोमर ने किया 1.04 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर गुरुवार को उप नगर ग्वालियर में 1.04 करोड़ से अधिक राशि की लागत से निर्मित होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। मंत्री श्री तोमर ने आसमानी माता मंदिर होटल क्लार्क इन के पास वार्ड क्रमांक-33 स्थित विभिन्न गलियों में एक करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले सीवर लाइन कार्य का भूमि-पूजन किया। आसमानी माता मंदिर होटल क्लार्क इन के पीछे 4 लाख रुपये लागत के नलकूप खनन कार्य का भी भूमि-पूजन किया। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि विकास की दिशा में यह कदम स्वच्छता, सुरक्षित जल और बेहतर जीवन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।  उन्होंने कहा कि ग्वालियर सांस्कृतिक, औद्योगिक और पर्यटन केन्द्र के रुप में विकसित हो रहा है। बीते कुछ समय में शहरी बुनियादी ढांचे के उन्नयन के साथ पर्यावरण से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया गया है। शहर में चल रहीं विभिन्न विकास योजनाओं के पूरा होने से न केवल सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि ग्वालियर को स्मार्ट सिटी के रूप में नई पहचान मिलेगी। इस अवसर पर लवी खंडेलवाल, पार्षद श्रीमती सुनीता अरुण कुशवाह, पार्षद श्रीमती भावना कन्नोजिया, श्री भीकम खटीक, पूर्व पार्षद श्री चन्द्रू सेन, गिरजा शंकर शर्मा, रामशरण भदौरिया, जिला एवं नगर निगम प्रशासन, विद्युत वितरण कम्पनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

एसआईआर में सहयोग के लिये हेल्प डेस्क स्थापित

मध्यप्रदेश निर्वाचन सदन भोपाल में मतदाताओं को मार्गदर्शन एवं सहयोग करेगी हेल्प डेस्क प्रदेश के सभी कलेक्टर्स एवं ईआरओ कार्यालय में भी प्रारंभ भोपाल  भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य किया जा रहा है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र श्री संजीव कुमार झा के निर्देश पर प्रदेश के मतदाताओं को एसआईआर में मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए मध्यप्रदेश निर्वाचन सदन भोपाल में हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टर तथा ईआरओ कार्यालय में हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हेल्प डेस्क पर आने वाले मतदाताओं को सही मार्गदर्शन एवं पूरा सहयोग किया जाना सुनिश्चित करें जिससे मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता से पूरा किया जा सके।  

शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के शिक्षकों के भत्तों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रस्ताव करें तैयार: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भर्ती प्रक्रिया, अधोसंरचना विकास एवं चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता सुधार के दिए निर्देश भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, अधोसंरचना विकास परियोजनाओं, भर्ती प्रक्रिया तथा अस्पताल सेवाओं से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि विभाग में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करने के लिए पीईबी एवं मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से संचालित भर्ती प्रक्रियाओं को त्वरित और समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि भर्ती कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो और प्रत्येक चरण की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विभागीय अधोसंरचना विकास परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों, उपकरणों की स्थापना तथा नई स्वास्थ्य इकाइयों के क्रियान्वयन से संबंधित परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। यदि किसी भी स्तर पर तकनीकी या प्रशासनिक समस्या आती है तो उसे प्राथमिकता से अग्रेषित कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए, जिससे परियोजनाओं का समय पर निष्पादन हो सके और जनता को लाभ मिले। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अस्पतालों में ओ.पी.डी. में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को समय पर चिकित्सा परामर्श मिले, इसके लिए निर्धारित समय में चिकित्सकों की उपस्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के शिक्षकों के भत्तों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट शिक्षकों की उपलब्धता और शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यह कदम आवश्यक है। इससे मेडिकल शिक्षा संस्थानों में दक्ष मानव संसाधन को बनाए रखने में सहायता मिलेगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव (वित्त) श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) श्री संदीप यादव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

क्लेम खारिज करना पड़ा भारी, बीमा कंपनी पर MP आयोग ने लगाया बड़ा जुर्माना

भोपाल अक्सर लोग स्वास्थ्य बीमा इसलिए कराते हैं,ताकि जब कभी भी बीमारी उन्हें घेरे तो इलाज के लिए उन्हें आर्थिक तौर पर परेशान ना होना पड़े। बीमा उपचार के दौरान बड़ा मददगार साबित होता है, लेकिन कई बार बीमा कंपनी अलग-अलग बहाना बनाकर बीमा राशि देने से इन्कार कर देती है। ऐसे ही मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के एक फैसले का उल्लेख कर कहा कि बीमा कंपनी बीमारियों के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के लिए दावे को अस्वीकार कर सकती है, लेकिन इसे प्रमाणित करने की जिम्मेदारी खुद बीमा कंपनी की है, इसलिए उपभोक्ता क्लेम का अधिकारी है। मामले में आयोग ने क्लेम की राशि पांच लाख रुपये सात फीसद ब्याज की दर से और मानसिक क्षतिपूर्ति राशि 15 हजार रुपये दो माह में देने के आदेश दिए हैं।   यह है पूरा मामला कोलार रोड स्थित मंदाकिनी कालोनी निवासी स्व. देवदास सैनी की पत्नी नुरूननिशा और बेटी सीमा सैनी ने 29 जून 2024 को केयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई थी। शिकायत की है कि कंपनी के बीमा एजेंट अंकित सोनी ने साल 2020 में उनके घर आकर मृतक उपभोक्ता को बीमा लेने के लिए राजी किया। उन्हें कहा गया कि यदि कोई बीमारी हुई तो आपको इलाज में एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। इस आश्वासन के साथ उपभोक्ता का पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा करा दिया। अगले साल भी उपभोक्ता ने इसे 15,450 रुपये का भुगतान कर रिन्यू किया। बीमा अवधि में 23 सितंबर 2021 को तबीयत खराब होने पर देवदास सैनी को भोपाल के निजी अस्पताल में दिखाया तो यहां उन्हें निमोनिया बताकर दवाई देकर भेज दिया गया। तबीयत फिर बिगड़ने पर डाक्टर ने किडनी और यूरिन में इंफेक्शन के कारण निमोनिया होने पर भर्ती होने के लिए कहा। इसकी सूचना बीमा कंपनी को दी और अस्पताल द्वारा दस्तावेज भी भेजे गए। बीमा का पैसा न मिलने पर परिवार ने उधार लेकर इलाज जारी रखा, लेकिन जनवरी 2022 को उनकी मृत्यु हो गई। परिवार ने आवेदन में जानकारी दी कि उपभोक्ता के इलाज में कुल छह लाख 90 हजार रुपये का खर्च हुआ। बीमा कंपनी का तर्क बीमा कंपनी ने तर्क रखा कि उपभोक्ता को पहले से हाई बीपी की बीमारी थी। इसके संबंध में चार वर्ष की वेटिंग पीरियड का एक्सक्लूजन क्लाज बीमा पालिसी में डाला गया है और इसी आधार पर क्लेम खारिज किया गया है। हालांकि, देवदास सैनी की मेडिकल हिस्ट्री में कहीं भी हाई बीपी का जिक्र नहीं था। इलाज के दौरान भी पूर्व में हाई बीपी का जिक्र किसी भी अस्पताल ने नहीं किया था। ऐसे में बीमा कंपनी इस बात को साबित नहीं कर पाई।

ऊर्जा संरक्षण का जन जागरण हर व्यक्ति की महती जिम्मेदारी- राज्यपाल पटेल

राज्यपाल ने ऊर्जा संरक्षण की राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को प्रदान किए पुरस्कार भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण किसी एक संस्था, संगठन और सरकार की चिंता का विषय नहीं है बल्कि हम सभी के बेहतर जीवन का अनिवार्य पहलू है। ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है। ऊर्जा संरक्षण के महत्व को जन जागरण का मुद्दा बनाना केवल सरकार के साथ समाज के हर व्यक्ति की महती जिम्मेदारी है। राज्यपाल श्री पटेल विद्युत मंत्रालय भारत सरकार के ऊर्जा संरक्षण अभियान 2025 के अंतर्गत ऊर्जा संरक्षण की राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दो श्रेणियों में प्रतिभागियों और विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए और बधाई दी। राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता के लिए चयनित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के सदस्यों का भी सम्मान किया। राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, एन.एच.डी.सी. लिमिटेड और मध्यप्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वाधान में सुभाष भवन भोपाल में किया गया था। ऊर्जा की हर यूनिट की बचत, राष्ट्र विकास में योगदान राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि चित्रकला, अंतर्मन की मार्मिक अभिव्यक्ति है। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों द्वारा ऊर्जा संरक्षण पर बनाए गए चित्र अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने उपस्थित जनों से अपील की कि वे चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन ज़रूर करें। प्रतिभावान बाल चित्रकारों की रचनात्मकता और ऊर्जा संरक्षण संदेशों को समझे, उनका अनुसरण करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि ऊर्जा बचत की शुरूआत हमें अपने घर से करना चाहिए। सुबह से शाम तक हर क्षण, सजग रहकर ऊर्जा बचत करना होगा। घर के बड़े-बुजूर्गों द्वारा बच्चों को ऊर्जा के महत्व, जरूरत और बचत का संस्कार बचपन से ही दिया जाना चाहिए। ऊर्जा की हर यूनिट की बचत, प्रकृति संरक्षण के साथ राष्ट्र विकास में योगदान है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऊर्जा की जरूरत और संरक्षण के महत्व को शैक्षणिक पाठ्यक्रम और गतिविधियों में शामिल किया जाना चाहिए। ताकि भावी पीढ़ी को ऊर्जा साक्षर नागरिक के रूप में तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि दूरस्थ अंचलों से लेकर शहरों तक ऊर्जा संरक्षण के ऐसे प्रयास हो कि आम नागरिक, ऊर्जा बचत की सावधानियों, उपायों और प्रयासों को सजगता, संवेदनशीलता और सक्रियता के साथ दैनिक जीवन में लागू करें। राज्यपाल श्री पटेल ने प्रदेश में ऊर्जा संरक्षण अभियान को कुशलता और समर्पण से गति देने और राज्य की ऊर्जा क्षमताओं को नई ऊंचाई तक ले जाने के प्रयासों के लिए एन.एच.डी.सी. की सराहना की। ऊर्जा संरक्षण और अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनुशासन जरूरी राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि जिस प्रकार ऊर्जा संरक्षण प्रकृति के लिए जरुरी है। सतत जागरूकता और सक्रिय प्रयासों से ऊर्जा की बचत की जा सकती है। उसी प्रकार तेजस्वी जीवन के लिए स्वस्थ शरीर भी जरूरी है। उन्होंने कहा की अच्छा खान-पान, नियमित व्यायाम, भरपूर पानी और नींद उत्तम स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए विद्यार्थी अपनी दिन चर्या में अनुशासन का पालन करें। संतुलित दिनचर्या अपनाकर नियमित अध्ययन करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को संयमित जीवन, अनुशासन और पौष्टिक आहार का महत्व जरूर बताएं। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन कर किया। उनका NHDC के प्रबंध निदेशक श्री राजीव जैन ने पौधा और शॉल भेंट कर स्वागत तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। श्री राजीव जैन ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। मुख्य महाप्रबंधक मानव संसाधन श्री अशोक कुमार ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में NHDC के पदाधिकारी, निर्णायक मंडल के सदस्य, प्रतिभागी बच्चे और उनके अभिभावक उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री ने 1.33 लाख से अधिक किसानों के खातों में 233 करोड़ रुपए भावांतर राशि अंतरित की

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भावांतर भुगतान, अन्नदाता के उत्थान का पर्याय है। अन्नदाता को दी गई एमएसपी की गारंटी की पूर्ति करते हुए सोयाबीन भावांतर योजना में 1 लाख 33 हजार किसानों के खाते में 233 करोड रुपए की राशि अंतरित की गई है। यह इस बात का प्रमाण है कि हमने जो कहा उसे कर दिखाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में अनेक किसान हितैषी योजनाएं संचालित की जा रही है। मध्यप्रदेश किसानों को उपज का उचित लाभ दिलवाने के लिए भावान्तर योजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। पिछले साल सोयाबीन का भाव 4800 रुपए था, इस बार किसानों को 500 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ देकर 5300 रुपए से अधिक कीमत पर सोयाबीन खरीदा जा रहा है। भावान्तर योजना के लिए प्रदेश में 9 लाख से अधिक किसानों ने सोयाबीन बेचने के लिए पंजीयन किया। आज 1.33 लाख किसानों के खाते में राशि भेजी गई है। हमारी सरकार ने योजना की शुरुआत करने के 15 दिन में ही किसानों से किया वादा पूरा किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को देवास से प्रदेश के 1.33 लाख सोयाबीन उत्पादक किसानों को भावान्तर योजना के अंतर्गत 233 करोड़ रुपए की राशि अंतरित करने के बाद विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ कर कन्या-पूजन भी किया। वंदे मातरम के गान ने वातावरण को देशभक्ति की भावना का संचार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवास जिले के सर्वांगीण विकास के लिए 183.25 करोड़ लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। साथ ही हितग्राहियों को जैविक खेती, कृषि यंत्र एवं पीएमएफएमई सहित विभिन्न योजनाओं में हितलाभ वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि यंत्रों एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने वाली प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया। 220 से अधिक मुख्य और 80 उप मंडियों में की जा रही खरीदी : सारी प्रक्रिया ई-मंडी पोर्टल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष-2026 को कृषि आधारित उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भावांतर योजना पंजीकृत किसान 15 जनवरी तक अपनी सोयाबीन मंडियों में बेच सकेंगे। पूरे प्रदेश में 220 से अधिक मुख्य मंडियों और 80 उप मंडियों में खरीदी की जा रही है। रेट पारदर्शी तरीके से तय हो रहे हैं, सारी प्रक्रिया ई-मंडी पोर्टल पर है, किसान का डाटा अपने आप दिख रहा है, पैसा सीधे ऑनलाइन खाते में पहुंचने की व्यवस्था की गई है और हर कदम पर रियल टाइम एंट्री और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। किसानों की सुविधा के लिए भावांतर कॉल सेंटर भी स्थापित किया गया है। भावांतर योजना लागू होने से फसल बेचने में किसानों को होने वाली कई परेशानियां दूर हो गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक दिसंबर को गीता जयंती भी पूरी भव्यता के साथ मनाई जाएगी। प्रदेश के नगरों में गीता भवन बनाए जा रहे हैं। साथ ही प्रत्येक विकासखंड में वृंदावन ग्राम बनाए जाएंगे। नरवाई की समस्या के निदान के लिए लगाए जा रहे हैं कम्प्रेस्ट बायो गैस प्लांट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे लिए धरती पुत्र किसान और सीमा पर जवान, दोनों समान सम्मान का भाव रखते हैं। धरती पुत्र किसानों से देश की विशेष पहचान बनी है। किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार खेती के साथ-साथ गोपालन को भी प्रोत्साहित कर रही है। किसान प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए पंजीयन कराएं और 4 हजार रुपए प्रति एकड़ अनुदान का लाभ उठाएं। प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शुरू की गई है। योजना में अगर कोई किसान 40 लाख रूपए लागत का डेयरी व्यवसाय शुरू करता है तो राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के लिए नरवाई की समस्या खत्म करने की दिशा में कदम उठाते हुए प्रदेश में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट का शुभारंभ किया गया है। बहनों का आर्थिक सशक्तिकरण सनातन संस्कृति का गौरव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार 12 नवम्बर को लाड़ली बहनों को जारी बढ़ी हुई राशि का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की बहनों और किसानों को लगातार सौगातें मिल रही हैं। बहनों का आर्थिक सशक्तिकरण सनातन संस्कृति का गौरव है। भारत दुनिया का एक मात्र देश है, जो मातृ सत्ता को स्वीकार करता है। उन्होंने कहा कि जहां देवियों का वास है, वही देवास है। उन्होंने देवास स्थित नोट प्रेस का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के नोट दुनिया में भारत का मान बढ़ाते हैं। भले ही नोट अर्थव्यवस्था को गति देते हों, लेकिन सोयाबीन, कपास और गेहूं का उत्पादन देश की अर्थव्यवस्था को आधार प्रदान करता है। कृषि उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान देश में महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ने मोटे अनाज 'श्रीअन्न' पर दिया बोनस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने मोटा अनाज 'श्रीअन्न' खरीदने के लिए मंडला, बालाघाट, जबलपुर सहित 11 जिलों के लिए किसानों को कोदो-कुटकी पर 1000 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया है। धान और गेहूं उत्पादक किसानों को भी बोनस का लाभ मिला है, चरणबद्ध रूप से गेहूं की कीमतें बढ़ाई जा रही है। संकल्प पत्र में किये वादे को पूरा करते हुए लाड़ली बहना योजना में बहनों के लिए भी राशि बढ़ाकर 1500 रुपए कर दी गई है। किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए अनुदान का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रत्येक 7 दिन में प्रदेशवासियों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत राशि अंतरित की जाएगी। प्रदेश में औद्योगीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार को पिछले दिनों भारत सरकार की ओर से 4 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। देवास जिले में भावान्तर योजना के लिए सबसे अधिक हुआ पंजीयन कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि मध्यप्रदेश किसानों के लिए भावान्तर योजना संचालित करने वाला देश का इकलौता राज्य है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में किसान हितैषी सरकार है। मुख्यमंत्री का किसान मोर्चा और नागरिकों ने किया स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव के देवास पहुँचने पर … Read more

उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन-भत्ते व पेंशन पर हुई बैठक

भोपाल उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन भत्ते, पेंशन आदि के संबंध में गठित समिति की द्वितीय बैठक गुरूवार को मंत्रालय में हुई। बैठक में विधायक सर्व अजय विश्नोई एवं  सचिन सुभाषचंद्र यादव उपस्थित रहे। समिति ने महाराष्ट्र, गुजरात एवं छत्तीसगढ़ के राज्यों में विधायक एवं पूर्व विधायक को मिलने वाली वेतन भत्ते एवं पेंशन राशि पर विस्तृत चर्चा की गई। समिति ने यह निर्णय लिया कि अगामी बैठक में मध्यप्रदेश के विधायकों/पूर्व विधायकों को मिलने वाली सुविधा पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा। समिति के सदस्य सचिव अपर मुख्य सचिव,  अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव वित्त, मनीष रस्तोगी, विधान सभा के प्रमुख सचिव  अरविन्द शर्मा एवं अपर सचिव  वीरेन्द्र कुमार उपस्थित रहे।